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मोटे लण्ड से चुदवाने में दूना मज़ा आता है - Mote lund se chudai mein duguna swad aata hai
मोटे लण्ड से चुदवाने में दूना मज़ा आता है - Mote lund se chudai mein duguna swad aata hai , Antarvasna Sex Stories , Hindi Sex Story , Real Indian Chudai Kahani , choda chadi cudai cudi coda free of cost , Time pass Story , Adult xxx vasna kahaniyan.
हाय अंकल, बड़ा मज़ा आ रहा है ? मैं जाने कब से इसी दिन का इंतज़ार कर रही थी ? वाओ, कितना मस्त और दमदार लौड़ा है तेरा अंकल देखो न साला
बड़ी दूर तक घुस कर चोद रहा है मेरी चूत ? हाय मेरे राजा, और धकाधक चोदो मेरी चूत ? पूरा पेल दो लौड़ा भोसड़ी के अंकल ? इतने दिनों से तू माँ का लौड़ा कहाँ था ? पहले क्यों नहीं चोदा मेरी बुर, मादर चोद अंकल ? मुझे पहले चोदने में तेरी क्या गांड फट रही थी ? मैं तो दो साल से ऐसे मोटे और मस्ताने लण्ड के लिए तरस रही हूँ। आज मेरे मन का लौड़ा मिला है ? मेरी पसंद का है तेरा लौड़ा बहन चोद ?
हाय दईया, मुझे अपनी बीवी की तरह चोदो, अंकल ? अपनी बीवी की बुर समझ के चोदो मेरी बुर ? एक रंडी की तरह चोदो मुझे ? फाड़ डालो मेरी बुर चोदी चूत ? चीथड़े उड़ा दो मेरी इस भोसड़ी वाली चूत के आज, अंकल ? और जोर जोर से चोदो, भचाभच चोदो, गचागच चोदो। मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। अंकल ने चोदने की स्पीड और बढ़ा दी तो मुझे ज़न्नत का मज़ा आने लगा। मैं अपनी दोनों टाँगे उठा कर चुदवाने लगी। आगे से चुदवाने लगी, पीछे से चुदवाने लगी, लण्ड पर चढ़ कर चुदवाने लगी, मैं हर तरफ से चुदवाने का मज़ा लूटने लगी। जाने क्यों मुझे मोटे लण्ड से चुदवाने में दूना मज़ा आता है ? मैं इतनी गरम और इतनी मस्त हो गयी की मैं सोंचने लगी की अंकल का लौड़ा साला क्या ? खुद अंकल ही भोसड़ी का घुस जाए मेरी बुर में तो मज़ा आ जाये ? अंकल तुम चिंता न करो ? खूब चोदो मुझे। मुझे हर दिन चोदो, दिन रात चोदो तो भी मैं चुदवाती रहूंगी। मैं तेरी बीवी हूँ, अंकल ? धकाधक पेलो अपना लण्ड मेरी चूत में ?
मैं तो कहती हूँ की तुम अपने दोस्तों के भी लण्ड मेरी चूत में पेला करो ? अपने शादी शुदा दोस्तों से चुदवाया करो मेरी बुर और तुम चोदा करो उनकी बीवियों की बुर ?
तुमको भी खूब मज़ा आएगा और मुझे भी। अगर तुम मेरी गांड मारना चाहते हो तो भी मार सकते हो अंकल। मैं तुम्हे बेहद प्यार करती हूँ। तुम जो चाहो मुझसे करवा सकते हो। मैं तेरी गुलाम हूँ अंकल बस मुझे चोदते रहो और मेरी बुर चुदवाते रहो ?
दोस्तों, मेरा नाम है कविता और मैं २६ साल की एक मस्त मौला खूबसूरत लड़की हूँ । एक कंपनी में काम करती हूँ और अकेली ही कलकत्ता में रहती हूँ। मुझे लण्ड पकड़ने का शौक तबसे हो गया था जब मैं १५ साल की थी। पहले तो लण्ड पकड़ पकड़ कर हिलाया करती थी। फिर धीरे धीरे लण्ड चाटने लगी, चूसने लगी और फिर मुठ्ठ मारने लगी। कॉलेज के लड़के मुझसे मुठ्ठ मरवाने लगे और फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके लण्ड का वीर्य भी चाटा क्योंकि मैं उस दिन मैं ब्लू फिल्म देख कर आई थी। मुझे ब्लू फिल्म देखने का शौक उसी दिन से हो गया. मैंने सोंचा की लड़कियां जब यहाँ लण्ड का वीर्य बड़े प्यार से पी रही है और झड़ता हुआ लण्ड चाट रहीं हैं तो फिर मैं क्यों नहीं चाट सकती ? मैं ब्लू फिल्म की लड़कियों की तरह लण्ड पीना चाहती थी और उसी तरह अपनी बुर चुदवाना चाहती थी। मैं जब १७ साल की हुई तो मेरी चूत एकदम पक गयी। लण्ड घुसेड़ने के काबिल हो गयी मेरी चूत और एक दिन मैंने शिवा नाम के लड़के का लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया। पहले तो थोड़ा दर्द हुआ लेकिन बस २ मिनट के बाद जो मज़ा आया वह मैं कभी भूल नहीं सकती ? उसके बाद चुदवाने का सिलसिला चल पड़ा।
अंकल का नाम है बलराज। वह मेरी ही कॉलोनी में ही रहता है बस एक किलोमीटर का फासला है। बार बार आने जाने से अंकल से एक दिन मुलाक़ात हो गयी, कुछ बात भी हो गयी और फिर धीरे धीरे २/४ और मुलाकातें भी हुई। एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया तब मुझे मालूम हुआ की उसकी उम्र ४५ साल की है और उसने शादी नहीं की है। वह भी एक बड़ी कंपनी में बड़े पद पर काम करता है। फिर २/३ बार मैंने भी उसे बुलाया। उसके साथ शराब पी सिगरेट पी और मस्ती से बात चीत की। उस दिन मैं काफी खुल चुकी थी। मेरे मुंह से बात बात में माँ की चूत, बहन की चूत, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा सब निकलने लगा । तब मुझे लगा की अंकल मेरी गालियां एन्जॉय करता है।
एक दिन मैं नशे में थी तो बोली देखो अंकल मैं भी अकेली हूँ तुम भी अकेले हो लेकिन अपने को अकेला मत समझो। मैं तेरे साथ हूँ और मेरी चूत तुम्हारे साथ है। मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया और बोली इसी तरह तुम मेरे साथ हो और तेरा लण्ड मेरे साथ है। मैंने अहसास की उसका लौड़ा खड़ा है तो मैं और आगे बढ़ी और बड़ी बेशर्मी से कहा अंकल आज मैं शराब के साथ तेरा लण्ड पियूंगी। उसने कोई आपत्ति नहीं की और तब मैंने उसकी पैंट में हाथ घुसेड़ कर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया। मैंने उसे हिला हिला कर खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में आँखें डाल कर पीने लगी लण्ड ? अब तो रास्ता खुल गया। मैंने फ़ौरन एक एक करके अपने सारे कपडे उतार दिया और हो गयी मादर चोद पूरी नंगी ? फिर मैंने मस्ती से अंकल को कर दिया पूरा नंगा। अब उसका लौड़ा मेरी आँखों के सामने और टन टनाने लगा। मैं बड़े प्यार से चूमने लगी, चूसने लगी और पीने लगी उसका लण्ड । पहला दिन था मैं भी बहुत गरम थी और वह भी। मैं उसे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ बैठी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख कर चटवाने लगी और मैं झुक कर उसका लण्ड चाटने लगी। नतीजा यह हुआ की वह थोड़ी में झड़ गया और मैंने झड़ता हुआ लण्ड बड़ी मस्ती से चाटा। उस दिन मैं चुदवा तो नहीं सकी लेकिन मुझे मज़ा बहुत आया । मैं खुश थी की चलो रास्ता तो खुल गया चुदवा तो मैं कभी लूंगी ही ?
दोस्तों, आज दूसरा मौक़ा है जब मैंने उसका लण्ड पकड़ा और पहला मौक़ा है जब मैंने उसका लण्ड अपनी चूत में पेला ? मेरी यह पहली चुदाई हमेशा याद रहेगी। मैंने जब कहा अंकल मैं तेरी गुलाम हूँ मुझे कस कस के चोदो तो उसने चोदने की स्पीड बढ़ा दी। अंकल जिस तरह चोद रहा था उससे मालूम हुआ की वह चोदने में बड़ा एक्सपर्ट है। मैंने आखिर पूंछ ही लिया अंकल क्या तुम हर रोज़ किसी न किसी की बुर चोदते हो ? वह बोला नहीं कविता ऐसा नहीं है लेकिन हां हफ्ते में ३/४ बुर जरूर चोद लेता हूँ। मेरा दूसरा सवाल था की लड़कियों की बुर चोदते हो की औरतों का भोसड़ा ? वह बोला बुर हो भोसड़ा मैं तो सब चोदता हूँ। हां एक बात जरूर है की कभी कोई लड़की अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाती है और कभी कोई माँ अपनी बिटिया की बुर चुदवाती है। मुझे तो दोनों में मज़ा आता है ? वह इतना कह के फिर गपागप घुसेड़ने लगा लण्ड। थोड़ी देर में बोला कविता अब मैं खलास होने वाला हूँ। मैंने कहा अरे यार मैं तो खलास हो गयी हूँ। मैं तेरा मुठ्ठ मार देती हूँ। मैंने मुठ्ठ मार लण्ड मस्ती से चाटा।
एक दिन मेरी सहेली चित्रा आ गयी। छुट्टी का दिन था मैंने उसे प्यार से बैठाया और व्हिस्की पिलाने लगी फिर सिगरेट दिया और हम दोनों दारू के साथ सिगरेट का मज़ा लेने लगी। इतने में उसका फोन आ गया। उसने लॉउडस्पीकर ऑन कर दिया और मोबाइल सामने रख कर बात करने लगी।
मैंने अंकल को फोन लगा दिया और उससे आने कहा वह बोला यार कविता अभी मैं अपने दोस्त के साथ बैठा हूँ तब मेरे मुंह से निकला उसे भी लेते आ ? वह भी तो भोसड़ी का मर्द है ? उसके पास भी लौड़ा होगा ? वह हंस कर बोला अच्छा आता हूँ। तब मैंने चित्रा से कहा यार तू भी डिम्पी को अपने हसबैंड के साथ बुला ले न बड़ा मज़ा आएगा ? थोड़ी देर में अंकल अपने एक दोस्त के साथ आ गये। उसने कहा कविता यह मेरा दोस्त समर सिंह है। मैं उसे देख कर खुश हो गयी। समर तो हट्टा कट्टा नैजवान था। फिर मैंने उसे अपनी सहेली चित्रा से मिलवाया वह बोला हां मैं इससे पहले मिल चुका हूँ। फिर हम चारों लोग बैठ दारू पीने लगे और बातें करने लगे। मैं सिर्फ पेटीकोट पहने बैठी थी। मेरी चूंचियां खुली थीं एकदम नंगी थी । हां मैंने एक चुन्नी माला की तरह ओढ़ रखी थी बस। मैं ऐसी ही बैठी रही। चित्रा भी अपना टॉप खोल कर बैठी थी। उसकी बड़ी बड़ी चूंचियां एक छोटी सी ब्रा में क़ैद थीं। सिर्फ निपल्स ही अंदर थे बाकी चूंचियां बाहर साफ़ साफ़ दिख रही थी। उन दोनों की निगाहें हमारी चूंचियों पर थी मगर पता नहीं क्यों सब लोग थोड़ी देर तक चुप रहे। मैं समझ गयी की माहौल ठंडा हो रहा है इसे गरम करने की जरुरत है तो मैं बोली अरे भोसड़ी के अंकल क्या समर भी तेरे साथ लड़कियां चोदता है ? वह बोला हां कभी कभी ऐसा ही होता है।
तब तक चित्रा बोली इसका मतलब है की तुम दोनों मिलकर बुर चोदते हो ? क्या किसी लड़की को चोदने में दो लौड़े लगते है ? किसी के लौड़े में इतना भी दम नहीं की वह अकेले बुर चोद सके ?
उसकी बात में दम थी लेकिन सब लोग हंस पड़े ? बस माहौल में गर्मी आ गयी। अंकल बोला दम तो बहुत है मेरी जान चित्रा ? कोई मस्त चुदवाने वाली तो मिले ? चित्रा बोली तो मैं किस मर्ज़ की दवा हूँ ? मैं तुम्हे मस्त नहीं लगती ? क्या मेरे पास चूत नहीं है ? क्या तेरे लौड़े में मेरी चूत चोदने की ताकत नहीं है। बस यह सुनकर अंकल ने उसे अपनी तरफ खींच कर चिपका लिया और बोला हाय मेरी जान तुम मुझे बहुत अच्छी रही हो ? कितनी मस्त मस्त और सेक्सी बातें कर रही हो तुम, भोसड़ी वाली ? तू मुझे ललकार रही है इसलिए मैं सबसे पहले तुझे ही चोदूंगा ? वह बोली हां तो चोदो न माँ के लौड़े, अंकल ? कविता ने तो तेरे लण्ड की बड़ी तारीफ की है ज़रा मैं भी देखूं की कितना दम है तेरे लण्ड में ?
चित्रा इतना बोल कर उसकी पैंट खोलने लगी। उधर मैंने भी समर के कपडे खोलने शुरू कर दिया। जैसे ही समर की चड्ढी खुली उसका लौड़ा टन्ना कर मेरे सामने आ गया. मैंने लौड़ा पकड़ा और हिला हिला कर कहा हाय चित्रा समर का लौड़ा तो वाकई बड़ा जबरदस्त है, यार ? तब तक उसने भी अंकल का लौड़ा खोल कर बाहर निकाल लिया था। वह बोली वाओ, अंकल का लौड़ा तो वाकई बड़ा हलब्बी है। जैसा तू कह रही थी कविता बिलकुल वैसा ही है इसका लण्ड ? मेरी तो चूत बहन चोद गनगना उठी है। तब अंकल बोला अरे भोसड़ी की चित्रा तू अपनी चूत खोल कर दिखाती क्यों नहीं ? दिखाने में तेरी गांड फट रही है क्या ? वह बोली साले गांड तो अब तेरी फटेगी अंकल जब मेरी चूत तेरा लण्ड खाना शुरू करेगी। मेरी चूत तो बड़े बड़े लौड़ों के छक्के छुड़ा देती है।
बस फिर मैं समर का लण्ड चूसने लगी और चित्रा अंकल का लण्ड ? इतने में डोर बेल बजी ,आम कहा चित्रा देख शायद डिम्पी आई होगी। उसने जब दरवाजा खोला तो सामने वाकई डिम्पी अपने मियाँ के साथ खड़ी थी। डिम्पी उन दोनों सीधे मेरे कमरे में ले आई जहाँ मैं दोनों लण्ड चोप्स रही थी। डिम्पी तो यह सब देख कर उछल पड़ी वह बोली वाओ, यहाँ तो पहले से ही चल रहा है सब कुछ बहन चोद ? उसने सबको अपने मियां विशाल से मिलवाया। विशाल यह सब देख बड़ा मस्ती में आ गया। तब तक चित्रा ने विशाल के कपडे उतारा और समर ने डिम्पी के कपड़े। इस तरह वे दोनों भी हमारी तरह नंगे हो गये। मैंने कहा यार अब मैं बताती हूँ। देखो यहाँ तीन लण्ड और तीन चूत हैं। यहाँ मर्द दूसरे की बीवी को अपनी बीवी समझ कर चोदेँगेँ ? यह समझो की चोदने वाला हसबैंड है और चुदाने वाली उसकी बीवी। मैंने कहा :- मैं समर की बीवी बन जाती हूँ। चित्रा विशाल की बीवी बन जाती है और डिम्पी बलराज अंकल की बीवी अब तुम लोग भोसड़ी वालों पहले अपनी अपनी बीवी चोदो।
बड़ी दूर तक घुस कर चोद रहा है मेरी चूत ? हाय मेरे राजा, और धकाधक चोदो मेरी चूत ? पूरा पेल दो लौड़ा भोसड़ी के अंकल ? इतने दिनों से तू माँ का लौड़ा कहाँ था ? पहले क्यों नहीं चोदा मेरी बुर, मादर चोद अंकल ? मुझे पहले चोदने में तेरी क्या गांड फट रही थी ? मैं तो दो साल से ऐसे मोटे और मस्ताने लण्ड के लिए तरस रही हूँ। आज मेरे मन का लौड़ा मिला है ? मेरी पसंद का है तेरा लौड़ा बहन चोद ?
हाय दईया, मुझे अपनी बीवी की तरह चोदो, अंकल ? अपनी बीवी की बुर समझ के चोदो मेरी बुर ? एक रंडी की तरह चोदो मुझे ? फाड़ डालो मेरी बुर चोदी चूत ? चीथड़े उड़ा दो मेरी इस भोसड़ी वाली चूत के आज, अंकल ? और जोर जोर से चोदो, भचाभच चोदो, गचागच चोदो। मैं भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी। अंकल ने चोदने की स्पीड और बढ़ा दी तो मुझे ज़न्नत का मज़ा आने लगा। मैं अपनी दोनों टाँगे उठा कर चुदवाने लगी। आगे से चुदवाने लगी, पीछे से चुदवाने लगी, लण्ड पर चढ़ कर चुदवाने लगी, मैं हर तरफ से चुदवाने का मज़ा लूटने लगी। जाने क्यों मुझे मोटे लण्ड से चुदवाने में दूना मज़ा आता है ? मैं इतनी गरम और इतनी मस्त हो गयी की मैं सोंचने लगी की अंकल का लौड़ा साला क्या ? खुद अंकल ही भोसड़ी का घुस जाए मेरी बुर में तो मज़ा आ जाये ? अंकल तुम चिंता न करो ? खूब चोदो मुझे। मुझे हर दिन चोदो, दिन रात चोदो तो भी मैं चुदवाती रहूंगी। मैं तेरी बीवी हूँ, अंकल ? धकाधक पेलो अपना लण्ड मेरी चूत में ?
मैं तो कहती हूँ की तुम अपने दोस्तों के भी लण्ड मेरी चूत में पेला करो ? अपने शादी शुदा दोस्तों से चुदवाया करो मेरी बुर और तुम चोदा करो उनकी बीवियों की बुर ?
तुमको भी खूब मज़ा आएगा और मुझे भी। अगर तुम मेरी गांड मारना चाहते हो तो भी मार सकते हो अंकल। मैं तुम्हे बेहद प्यार करती हूँ। तुम जो चाहो मुझसे करवा सकते हो। मैं तेरी गुलाम हूँ अंकल बस मुझे चोदते रहो और मेरी बुर चुदवाते रहो ?
दोस्तों, मेरा नाम है कविता और मैं २६ साल की एक मस्त मौला खूबसूरत लड़की हूँ । एक कंपनी में काम करती हूँ और अकेली ही कलकत्ता में रहती हूँ। मुझे लण्ड पकड़ने का शौक तबसे हो गया था जब मैं १५ साल की थी। पहले तो लण्ड पकड़ पकड़ कर हिलाया करती थी। फिर धीरे धीरे लण्ड चाटने लगी, चूसने लगी और फिर मुठ्ठ मारने लगी। कॉलेज के लड़के मुझसे मुठ्ठ मरवाने लगे और फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके लण्ड का वीर्य भी चाटा क्योंकि मैं उस दिन मैं ब्लू फिल्म देख कर आई थी। मुझे ब्लू फिल्म देखने का शौक उसी दिन से हो गया. मैंने सोंचा की लड़कियां जब यहाँ लण्ड का वीर्य बड़े प्यार से पी रही है और झड़ता हुआ लण्ड चाट रहीं हैं तो फिर मैं क्यों नहीं चाट सकती ? मैं ब्लू फिल्म की लड़कियों की तरह लण्ड पीना चाहती थी और उसी तरह अपनी बुर चुदवाना चाहती थी। मैं जब १७ साल की हुई तो मेरी चूत एकदम पक गयी। लण्ड घुसेड़ने के काबिल हो गयी मेरी चूत और एक दिन मैंने शिवा नाम के लड़के का लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया। पहले तो थोड़ा दर्द हुआ लेकिन बस २ मिनट के बाद जो मज़ा आया वह मैं कभी भूल नहीं सकती ? उसके बाद चुदवाने का सिलसिला चल पड़ा।
अंकल का नाम है बलराज। वह मेरी ही कॉलोनी में ही रहता है बस एक किलोमीटर का फासला है। बार बार आने जाने से अंकल से एक दिन मुलाक़ात हो गयी, कुछ बात भी हो गयी और फिर धीरे धीरे २/४ और मुलाकातें भी हुई। एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया तब मुझे मालूम हुआ की उसकी उम्र ४५ साल की है और उसने शादी नहीं की है। वह भी एक बड़ी कंपनी में बड़े पद पर काम करता है। फिर २/३ बार मैंने भी उसे बुलाया। उसके साथ शराब पी सिगरेट पी और मस्ती से बात चीत की। उस दिन मैं काफी खुल चुकी थी। मेरे मुंह से बात बात में माँ की चूत, बहन की चूत, माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा सब निकलने लगा । तब मुझे लगा की अंकल मेरी गालियां एन्जॉय करता है।
एक दिन मैं नशे में थी तो बोली देखो अंकल मैं भी अकेली हूँ तुम भी अकेले हो लेकिन अपने को अकेला मत समझो। मैं तेरे साथ हूँ और मेरी चूत तुम्हारे साथ है। मैंने उसके लण्ड पर हाथ रख दिया और बोली इसी तरह तुम मेरे साथ हो और तेरा लण्ड मेरे साथ है। मैंने अहसास की उसका लौड़ा खड़ा है तो मैं और आगे बढ़ी और बड़ी बेशर्मी से कहा अंकल आज मैं शराब के साथ तेरा लण्ड पियूंगी। उसने कोई आपत्ति नहीं की और तब मैंने उसकी पैंट में हाथ घुसेड़ कर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया। मैंने उसे हिला हिला कर खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में आँखें डाल कर पीने लगी लण्ड ? अब तो रास्ता खुल गया। मैंने फ़ौरन एक एक करके अपने सारे कपडे उतार दिया और हो गयी मादर चोद पूरी नंगी ? फिर मैंने मस्ती से अंकल को कर दिया पूरा नंगा। अब उसका लौड़ा मेरी आँखों के सामने और टन टनाने लगा। मैं बड़े प्यार से चूमने लगी, चूसने लगी और पीने लगी उसका लण्ड । पहला दिन था मैं भी बहुत गरम थी और वह भी। मैं उसे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ बैठी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख कर चटवाने लगी और मैं झुक कर उसका लण्ड चाटने लगी। नतीजा यह हुआ की वह थोड़ी में झड़ गया और मैंने झड़ता हुआ लण्ड बड़ी मस्ती से चाटा। उस दिन मैं चुदवा तो नहीं सकी लेकिन मुझे मज़ा बहुत आया । मैं खुश थी की चलो रास्ता तो खुल गया चुदवा तो मैं कभी लूंगी ही ?
दोस्तों, आज दूसरा मौक़ा है जब मैंने उसका लण्ड पकड़ा और पहला मौक़ा है जब मैंने उसका लण्ड अपनी चूत में पेला ? मेरी यह पहली चुदाई हमेशा याद रहेगी। मैंने जब कहा अंकल मैं तेरी गुलाम हूँ मुझे कस कस के चोदो तो उसने चोदने की स्पीड बढ़ा दी। अंकल जिस तरह चोद रहा था उससे मालूम हुआ की वह चोदने में बड़ा एक्सपर्ट है। मैंने आखिर पूंछ ही लिया अंकल क्या तुम हर रोज़ किसी न किसी की बुर चोदते हो ? वह बोला नहीं कविता ऐसा नहीं है लेकिन हां हफ्ते में ३/४ बुर जरूर चोद लेता हूँ। मेरा दूसरा सवाल था की लड़कियों की बुर चोदते हो की औरतों का भोसड़ा ? वह बोला बुर हो भोसड़ा मैं तो सब चोदता हूँ। हां एक बात जरूर है की कभी कोई लड़की अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाती है और कभी कोई माँ अपनी बिटिया की बुर चुदवाती है। मुझे तो दोनों में मज़ा आता है ? वह इतना कह के फिर गपागप घुसेड़ने लगा लण्ड। थोड़ी देर में बोला कविता अब मैं खलास होने वाला हूँ। मैंने कहा अरे यार मैं तो खलास हो गयी हूँ। मैं तेरा मुठ्ठ मार देती हूँ। मैंने मुठ्ठ मार लण्ड मस्ती से चाटा।
एक दिन मेरी सहेली चित्रा आ गयी। छुट्टी का दिन था मैंने उसे प्यार से बैठाया और व्हिस्की पिलाने लगी फिर सिगरेट दिया और हम दोनों दारू के साथ सिगरेट का मज़ा लेने लगी। इतने में उसका फोन आ गया। उसने लॉउडस्पीकर ऑन कर दिया और मोबाइल सामने रख कर बात करने लगी।
- वह बोली - हां बोल बुर चोदी डिम्पी ? तेरी सुहागरात कैसे रही ?
- वह बोली - बहुत अच्छी रही यार। मज़ा आ गया ?
- कितना बड़ा लण्ड है तेरे मियां का ?
- मजे का बड़ा है बहन चोद। अच्छी बात यह की अंदर घुस कर चोदता है साला ? लण्ड यार तेरे मन का है चित्रा ?
- क्या मतलब खुल कर बताओ न ?
- अरे यार मस्त मोटा लौड़ा है मेरे मरद का ? तुझे तो मोटा लण्ड पसंद है न ? तेरी बुर छील डालेगा मेरे मरद का लौड़ा ? और लंबा भी है यार ?
- तो भोसड़ी की देर क्यों कर रही है। किसी दिन चुदवा दे न मेरी भी बुर अपने मरद से ?
- अरे यार मेरी बात हो गयी है। एक दिन मेरा हसबैंड बोला डिम्पी तुम मेरे दोस्त से चुदवा लोगी प्लीज ? तब मैंने कहा हां मैं तेरे दोस्त से चुदवा लूंगी लेकिन तुम भी मेरी सहेली चित्रा की बुर चोदोगे तब ? बस वह मान गया ? अब तुम बोलो तेरी बुर किस दिन खाली है ? किस दिन चुदवाओगी तुम मेरे मियाँ से ?
- अरे यार मैं अभी अपने सहेली कविता के पास बैठी हूँ उससे बार करके तुझे बताती हूँ अभी ?
मैंने अंकल को फोन लगा दिया और उससे आने कहा वह बोला यार कविता अभी मैं अपने दोस्त के साथ बैठा हूँ तब मेरे मुंह से निकला उसे भी लेते आ ? वह भी तो भोसड़ी का मर्द है ? उसके पास भी लौड़ा होगा ? वह हंस कर बोला अच्छा आता हूँ। तब मैंने चित्रा से कहा यार तू भी डिम्पी को अपने हसबैंड के साथ बुला ले न बड़ा मज़ा आएगा ? थोड़ी देर में अंकल अपने एक दोस्त के साथ आ गये। उसने कहा कविता यह मेरा दोस्त समर सिंह है। मैं उसे देख कर खुश हो गयी। समर तो हट्टा कट्टा नैजवान था। फिर मैंने उसे अपनी सहेली चित्रा से मिलवाया वह बोला हां मैं इससे पहले मिल चुका हूँ। फिर हम चारों लोग बैठ दारू पीने लगे और बातें करने लगे। मैं सिर्फ पेटीकोट पहने बैठी थी। मेरी चूंचियां खुली थीं एकदम नंगी थी । हां मैंने एक चुन्नी माला की तरह ओढ़ रखी थी बस। मैं ऐसी ही बैठी रही। चित्रा भी अपना टॉप खोल कर बैठी थी। उसकी बड़ी बड़ी चूंचियां एक छोटी सी ब्रा में क़ैद थीं। सिर्फ निपल्स ही अंदर थे बाकी चूंचियां बाहर साफ़ साफ़ दिख रही थी। उन दोनों की निगाहें हमारी चूंचियों पर थी मगर पता नहीं क्यों सब लोग थोड़ी देर तक चुप रहे। मैं समझ गयी की माहौल ठंडा हो रहा है इसे गरम करने की जरुरत है तो मैं बोली अरे भोसड़ी के अंकल क्या समर भी तेरे साथ लड़कियां चोदता है ? वह बोला हां कभी कभी ऐसा ही होता है।
तब तक चित्रा बोली इसका मतलब है की तुम दोनों मिलकर बुर चोदते हो ? क्या किसी लड़की को चोदने में दो लौड़े लगते है ? किसी के लौड़े में इतना भी दम नहीं की वह अकेले बुर चोद सके ?
उसकी बात में दम थी लेकिन सब लोग हंस पड़े ? बस माहौल में गर्मी आ गयी। अंकल बोला दम तो बहुत है मेरी जान चित्रा ? कोई मस्त चुदवाने वाली तो मिले ? चित्रा बोली तो मैं किस मर्ज़ की दवा हूँ ? मैं तुम्हे मस्त नहीं लगती ? क्या मेरे पास चूत नहीं है ? क्या तेरे लौड़े में मेरी चूत चोदने की ताकत नहीं है। बस यह सुनकर अंकल ने उसे अपनी तरफ खींच कर चिपका लिया और बोला हाय मेरी जान तुम मुझे बहुत अच्छी रही हो ? कितनी मस्त मस्त और सेक्सी बातें कर रही हो तुम, भोसड़ी वाली ? तू मुझे ललकार रही है इसलिए मैं सबसे पहले तुझे ही चोदूंगा ? वह बोली हां तो चोदो न माँ के लौड़े, अंकल ? कविता ने तो तेरे लण्ड की बड़ी तारीफ की है ज़रा मैं भी देखूं की कितना दम है तेरे लण्ड में ?
चित्रा इतना बोल कर उसकी पैंट खोलने लगी। उधर मैंने भी समर के कपडे खोलने शुरू कर दिया। जैसे ही समर की चड्ढी खुली उसका लौड़ा टन्ना कर मेरे सामने आ गया. मैंने लौड़ा पकड़ा और हिला हिला कर कहा हाय चित्रा समर का लौड़ा तो वाकई बड़ा जबरदस्त है, यार ? तब तक उसने भी अंकल का लौड़ा खोल कर बाहर निकाल लिया था। वह बोली वाओ, अंकल का लौड़ा तो वाकई बड़ा हलब्बी है। जैसा तू कह रही थी कविता बिलकुल वैसा ही है इसका लण्ड ? मेरी तो चूत बहन चोद गनगना उठी है। तब अंकल बोला अरे भोसड़ी की चित्रा तू अपनी चूत खोल कर दिखाती क्यों नहीं ? दिखाने में तेरी गांड फट रही है क्या ? वह बोली साले गांड तो अब तेरी फटेगी अंकल जब मेरी चूत तेरा लण्ड खाना शुरू करेगी। मेरी चूत तो बड़े बड़े लौड़ों के छक्के छुड़ा देती है।
बस फिर मैं समर का लण्ड चूसने लगी और चित्रा अंकल का लण्ड ? इतने में डोर बेल बजी ,आम कहा चित्रा देख शायद डिम्पी आई होगी। उसने जब दरवाजा खोला तो सामने वाकई डिम्पी अपने मियाँ के साथ खड़ी थी। डिम्पी उन दोनों सीधे मेरे कमरे में ले आई जहाँ मैं दोनों लण्ड चोप्स रही थी। डिम्पी तो यह सब देख कर उछल पड़ी वह बोली वाओ, यहाँ तो पहले से ही चल रहा है सब कुछ बहन चोद ? उसने सबको अपने मियां विशाल से मिलवाया। विशाल यह सब देख बड़ा मस्ती में आ गया। तब तक चित्रा ने विशाल के कपडे उतारा और समर ने डिम्पी के कपड़े। इस तरह वे दोनों भी हमारी तरह नंगे हो गये। मैंने कहा यार अब मैं बताती हूँ। देखो यहाँ तीन लण्ड और तीन चूत हैं। यहाँ मर्द दूसरे की बीवी को अपनी बीवी समझ कर चोदेँगेँ ? यह समझो की चोदने वाला हसबैंड है और चुदाने वाली उसकी बीवी। मैंने कहा :- मैं समर की बीवी बन जाती हूँ। चित्रा विशाल की बीवी बन जाती है और डिम्पी बलराज अंकल की बीवी अब तुम लोग भोसड़ी वालों पहले अपनी अपनी बीवी चोदो।
सबसे पहले मैंने समर का लौड़ा अपनी चूत में घुसा लिया और चुदवाने लगी। मुझे देख कर चित्रा ने पहले विशाल का लण्ड पकड़ कर सहलाया, उसकी कई बार चुम्मी ली और फिर उसे मुंह में घुसा कर चूसने लगी। वह बोली वाओ, कितना मस्त लौड़ा है डिम्पी तेरे मरद का ? डिम्पी बोली अरी चित्रा तू बुर चोदी झूंठ क्यों बोल रही है ? विशाल मेरा मरद नहीं तेरा मरद है , तू चुदवा भोसड़ी वाली पहले अपने मरद से उसके बाद मैं चुदाऊंगी तेरे मरद से ? तब तक मैं अपने मरद मादर चोद बलराज से अपनी बुर चुदवा रही हूँ। डिम्पी वाकई बलराज से भकाभक चुदवाने लगी। हम तीनो इसी तरह से लण्ड अदल बदल कर एक दूसरे मरद से चुदवाने लगी। रात भर खूब मज़ा लूटा हम सबने। मर्दों ने भी सबकी बुर चोद चोद कर खूब मज़ा लिया। दूसरी पारी में सब लड़कियों ने गांड मराने का प्लान बनाया। हम सबने बारी बरी से सबके लण्ड अपनी अपनी गांड में पेले और मस्ती से अपनी अपनी गांड मरवाई।
सवेरे जब हम लोग उठे तो देखा की सभी मादर चोद नंगे नंगे लेटे हैं । तब फिर सबने एक एक बार सबकी बुर चोदी...
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