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मैं रोज़ सेक्सी कहानी पढ़ कर चूत चुदवाती हूँ - Main daily sex story padh kar chudai karvati hun
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दोस्तों, मैं खुशबू हूँ, २५ साल की एक शादी शुदा, खूबसूरत, मस्त और बिंदास लड़की। मेरी अम्मी हैं नताशा ४६ साल की एक मस्त और बेहद खूबसूरत महिला। हम दोनों के बीच माँ बेटी का नहीं बल्कि दोस्ती का रिस्ता का है। जैसे तो सहेलियां आपस में खुल कर और गाली गलौज के साथ बात करतीं नही वैसे ही हम दोनों भी करतीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है की हम दोनों की जरूरतें एक हैं। जो अम्मी को चाहिए वो मुझे भी और जो मुझे चाहिए वो अम्मी को भी। इसीलिए हमारी दोस्ती बहुत पक्की है। जैसे की लन्ड मुझे भी चाहिए और अम्मी को भी ? चुदाना मुझे भी अच्छा लगता है और अम्मी को भी। अम्मी भी गैर मर्दों से चुदवाती और मैं भी ? अम्मी भी गैर मर्दों के लन्ड एन्जॉय करतीं है और मैं भी ? अम्मी मुझसे बहन चोद मादर चोद बहन की लौड़ी भोसड़ी की कह कर बात चीत करतीं है और मैं भी। हम दोनों में गज़ब की नजदीकियां हैं। यहाँ तक की हम दोनों एक ही लन्ड एक साथ मिलकर चूस लेतीं हैं।
उस दिन अम्मी जब मेरे कमरे में आयीं तो मुझे देखते ही बोली :- बेटी, तेरी बुर चोदी माँ की चूत ? तेरी माँ की जैसी चुदाने वाली औरत दुनियां में कोई और नहीं होगी ? लन्ड तो तेरी माँ मुंह से ऐसे पकड़ती है बेटी जैसे बिल्ली चूहा पकड़ती है। एक बार पकड़ में आ गया तो फिर छोड़ती नहीं है। इसलिए आज तू समझ ले की तेरी माँ यानी मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ, बेटी खुशबू ? मैं समझ गयी की अम्मी आज बड़े मूड में हैं। जरूर कोईं ख़ास बात है। कुछ अच्छा ही हुआ है शायद ? वैसे तो अम्मी मुझसे हर दिन गाली के साथ खुल कर बातें करतीं है लेकिन आज कुछ ज्यादा ही मस्त लग रहीं हैं। उसका इरादा शायद आज जम कर चुदवाने का है। इसलिए मैं भी उसकी मस्ती बढ़ाते हुए उसी की तरह जबाब देने की ठान ली।
मैंने जबाब दिया :- अम्मी, तेरी बुर चोदी बिटिया की बुर ? तेरी बेटी भी लन्ड पकड़ने में बड़ी माहिर है। लड़कियां तो अमूमन होठों से लन्ड पकड़ती हैं पर तेरी बेटी दांतों से लन्ड पकड़ती है पर इतने पोले पोले पकड़ती है की मज़ाल है की तनिक सी भी चोट लग जाए लन्ड को ? अगर तू बहुत बड़ी बुर चोदी है अम्मी तो मैं भी बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ।
तब तक मेरी खाला आ गयीं।
वह अम्मी से बोली :- दीदी, तेरी बुर चोदी बहन का भोसड़ा ? तेरी बहन तो बिलकुल कुतिया है कुतिया जो सरे आम कुत्तों से चुदवाया करती है। मैं लौड़ा खोर हूँ। मैं लौड़ा बाजी करती हूँ।
उसके पीछे से खाला की बेटी आ गयी।
वह मुझसे बोली :- तराना, तेरी खाला की बिटिया की चूत ? मुझको कम न समझो। मैं अपनी अम्मी से दो कदम आगे हूँ। लन्ड साला मुझसे बच कर कहीं और नहीं जा पाता ?
हम चारों तालियां बजा बजा कर हंसने लगीं। तब तक एक दौर और चल पड़ा।
अम्मी बोली :- मैं तेरी माँ चोद दूँगी बेटी ? जानती हो क्यों ? क्योंकि मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ बेटी ? तेरी माँ बहुत बड़ी हरामी चीज है बेटी। उसे लन्ड खाने की आदत पड़ चुकी है। बिना लन्ड के वह एक मिनट भी नहीं रह सकती । अब मैं तेरी माँ चोदूँगी तब उसे समझ में आएगा।
मैंने कहा :- मैं तेरी बेटी की चोदूँगी बुर, अम्मी ? हां हां अम्मी तेरी बेटी बड़ी आवारा हो गयी है। जहाँ पाती है वहां लन्ड हाथ बढ़ा कर पकड़ लेती है। उसे न तो किसी का डर है और न कोईं शर्म ? इतनी खुले मिज़ाज़ की लौंडिया मैंने कोई और नहीं देखी । लन्ड का शिकार करती है तेरी बेटी, अम्मी। बड़ी बहन चोद लौड़ा खोर हो गयी है। आज मैं उसकी चूत में लन्ड पेलूँगी तब उसे होश आएगा ?
खाला बोली :- दीदी, मैं चोदूँगी तेरी बहन का भोसड़ा ? हाय दईया जाने कितने लन्ड लेता है तेरी बहन का भोसड़ा दीदी। बही कल रात में दो लन्ड इसे चोद चुके हैं और अभी भी चुदाने के लिए बेताब है। अल्ला जाने क्या होगा आगे ?
खाला की बेटी बोली :- खाला जान मैं चोदूँगी तेरी बहन की बिटिया की बुर। एक बार फिर ठहाका लगा। अरे खाला तुमने मेरी अम्मी का हाल देख ही लिया है। अब उसकी बेटी की बारी है। वह भी बुर चोदी अपनी माँ से कम नहीं है। अपनी माँ से एक लन्ड ज्यादा ही लेती है उसकी बुर मादर चोद ? आज मैं उसमे लन्ड पेल कर उसकी सारी गर्मी निकाल दूँगी।
हम लोगों की बातें सुनकर अम्मी ने पूंछा अच्छा यह बताओ बेटी खुशबू क्या तुम "चुदाई" की कहानियां पढ़ कर आयी हो ? क्योंकि उसकी ही कहानियों में ये सब बातें लिखीं है जो हम यहाँ बोल रहीं हैं। मैंने कहा हां अम्मी तुमने सही पकड़ा। मैं तो हर रोज़ उसकी कहानियां पढ़ती हूँ। मज़ा भी खूब आता है और उसके बाद चुदाने में तो और मज़ा आता है। फिर अम्मी ने बताया अरे बेटी मैं भी वही कहानियां पढ़ती हूँ। उसमे माँ बेटी की चुदाई धुआंधार होती है। उसी का असर है की मैं तुमसे खुल कर बातें करने लगी हूँ और गाली भी बकने लगी हूँ । तब तक खाला की बेटी नाज़ ने कहा हां खाला मैं भी "चुदाई" की कहानियां पढ़ती हूँ। इसके बारे में मुझे एक लड़के ने बताया था। वो भोसड़ा का रोज़ नंगे होकर कहानियां पढता है और मुठ्ठ मारता है। कभी लड़कियों से मुठ्ठ मरवाता है।
मैं एक दिन कहानियां पढ़कर आयी तो अम्मी से बता दिया। फिर उसने भी कहानियां पढ़ी और मुझसे बोली नाज़ तेरी माँ की चूत बेटी। नाज़ आज से अपनी माँ चुदाया करो बेटी और लन्ड पेला करो अपनी माँ की चूत में ? मैं समझ गयी की अम्मी को भी कहानियों का नशा हो गया है।
बस फिर हम दोनों एक साथ चुदवाने लगीं।
अब मैं एक बात और बताना चाहूंगी। मैंने उस ब्लॉग में बाप और बेटी की कहानियां भी पढ़ी। मैं सोंचने लगी की कैसे कोई बेटी अपने अब्बू का लन्ड पकड़ लेती है और चुदवा भी लेती है। ये सब कहानियों में होता है हकीकत में नहीं ? कहानियां लिखने वाली रेहाना बुर चोदी अपनी मन गढंत बातें लिखा करती है। वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होता ? तभी मेरी एक सहेली आ गयी मैं उससे बातें करने लगी। बात करते करते मैं पूंछ बैठी यार सच बताओ क्या कोई बेटी अपने अब्बू का लन्ड पकड़ सकती है। वह बोली हां पकड़ सकती है। इसमें कौन सी ख़ास बात है। देखो जवानी में जब बदन की आग जोर मारती है। चूत की आग धधकने लगती है तो उसमे सारे नाते रिस्ते ख़तम हो जातें हैं। केवल लन्ड और चूत का ही रिस्ता रहता है। और फिर किसी के लन्ड में यह नहीं लिखा होता की यह किसका लन्ड है। लन्ड तो बस लन्ड है। उसका काम है चूत में घुस कर चोदना। जवानी में किसी का भी लन्ड पकड़ना जायज़ है चाहे वो अपने अब्बू का ही लन्ड क्यों न हो ? अब मैं सच बता रही हूँ की मैं अपने अब्बू का लन्ड पकड़ती हूँ। आजकल हर दूसरी लड़की अपने अब्बू का लन्ड पकड़ती है। हां जबरदस्ती नहीं प्यार से। मस्ती से। जवानी के जोश में और एन्जॉय करने के लिए।
मैंने पूंछा क्या तुमने "चुदाई" की कहानियां पढ़ी हैं। वह बोली मुझे ब्लॉग वगैरह कुछ नहीं मालूम ? मैंने आजतक लैपटॉप नहीं देखा कंप्यूटर नहीं देखा। कोई ब्लू फिल्म नहीं देखी और कोई सेक्स की कहानी नहीं पढ़ी क्योंकि ये सब तो मैं हर रोज़ करती हूँ। कभी इसका लन्ड कभी उसका लन्ड ? मैं तब समझ गयी की ये रेहाना भोसड़ी की सही बातें लिखती है। जो हकीकत में होता है वही लिखती है।
मैंने मजाक में कहा :- तो फिर पेलो लन्ड अपनी माँ की चूत में नाज़ ?
वह बोली :- बताओ किसका लन्ड पेल दूं अपनी माँ की चूत में ?
मैंने कहा :- अपने मियां का लन्ड पेलो।
वह बोली :- हाय दईया खुशबू , तो क्या तू भी अपने मियां का लन्ड अपनी माँ की चूत में पेलेगी ?
मैंने कहा :- क्यों नहीं पेलूंगी। मैं तो चोदूँगी उसका भोसड़ा ?
वह बोली :- यार एक बात बताऊँ मैं भी आज तेरे मियां का लन्ड अपनी चूत में लूंगी।
मैंने कहा :- अरी मेरी पगली नाज़। यहाँ सब भोसड़ी वाली सबके लन्ड अपनी अपनी चूत में घुसेड़ेगी। तू चिंता न कर ? तेरी बुर तो खूब अच्छी तरह चोदी जाएगी। सारे मर्द चोदेंगें सबकी चूत। फिर मैं बाहर गयी और सबको बुला कर ले आयी। रात का समय था। सबके लन्ड चूत की तलास में ही घूम रहे थे। मैंने अपने मियां रहीम को पकड़ा और फिर नाज़ के मियां नियाज़ को पकड़ कर ले आयी। मेरे पीछे पीछे मेरा खालू रेहान भी आ गया और मेरा चाचू फतह भी। हम चार थीं तो वो भी चार थे। मैंने कहाअब आज होगा यहाँ घमाशान चोदा चोदी और घुसेगें सबके लन्ड सबकी बुर में। हम चारो मर्दों के पकड़े उतारने लगीं और मरद हमारे कपड़े ? जैसे ही हम सब नंगी हुई वैसे ही मरद भी सब के सब नंगे हो गये। फिर शुरू हो गया पकड़ा पकड़ी।
नाज़ का मियां मेरी चूंचियां दबाने लगा तो मैं उसका लन्ड हिलाने लगी। नाज़ मेरे सामने मेरे मियां का लौड़ा सहलाने लगी। अम्मी ने हाथ बढ़ा कर खालू का लन्ड पकड़ लिया और खाला ने मेरे चाचू का लन्ड। सबके हिस्से में एक एक लन्ड आ गया और मर्दों के हाथ में एक एकऔरत की चूंचियां। सबको परायी बीवियों का मज़ा मिलने लगा और बीवियों को पराये मर्दों के लन्ड का मज़ा ? मुझे नाज़ के मियां का लन्ड बहुत भा रहा था। मस्त मोटा लन्ड पाकर मैं भी मस्त हो गयी। वह भी मेरी चूंचियां मुंह लगाकर चूसने लगा। मैं नाज़ को देख रही थी की वह कितने मजे से मेरे मियां का लन्ड मुंह में लेकर चूस रही है। और मेरी अम्मी तो वाकई बड़ी बुर चोदी निकली। वो तो ऐसे लन्ड पर टूट पड़ी जैसे उसे ज़िन्दगी में पहली बार कोई लन्ड मिला है। यह इस बात को दर्शाता है की मेरी अम्मी कितनी हॉट हैं। यही हाल करीब करीब मेरी खाला का भी था। वह भी भोसड़ी की कुछ कम बुर चोदी नहीं है। बुर चोदी तो उसकी बेटी नाज़ भी है लेकिन मैंने देखा की वो तो लन्ड का अपनी बेटी से ज्यादा मज़ा ले रही है।
सच ही है की जब पराये मरद का लन्ड मुंह में जाता है तो बहुत मज़ा आता है और जब बुर में जाता है तो सबसे ज्यादा मज़ा आता है। चुदाने में तो मज़ा आता है लेकिन अपने साथ किसी और को चुदते हुए देखने में और मजा आता है। यह भी देखने में अच्छा लगता है की किसका लन्ड कितना बड़ा है ? किस की चूत कैसी है, गांड कैसी हैं, चूंचियां कैसी हैं और वो सब माँ की लौड़ी चुदवाती कैसे हैं ? सामूहिक चुदाई का यही तो मज़ा है। इसके अलावा जब उसकी चूत का लन्ड मेरी चूत में घुसता है और मेरी चूत का लन्ड उसकी चूत में घुसता है तो बेहद मज़ा आता है।
तब तक नाज़ ने अपने मियां का लन्ड अपनी माँ के भोसड़ा में पेल दिया और बोली ले देख खुशबू तू यही चाहती थी न की मैं अपनी माँ चुदवाऊँ ? मैंने कहा ठीक है यार मैं जान गयी तुझे की तू बहुत बड़ी ऐय्याश है। लेकिन मैं तुझसे कम नहीं हूँ। तब तक मैंने भी अपने मियां का लौड़ा अम्मी की बुर में घुसा दिया। यह कोई पहली बार नहीं था। ये हमारे बीच अक्सर होता है। बस २ मिनट के बाद अम्मी ने मेरे खालू का लन्ड मेरी चूत में घुसेड़ा और खाला ने मेरे चाचू का लन्ड नाज़ की बुर में पेल दिया। हम दोनों भी अपनी अपनी गांड उचका उचका रंडी की तरह कर चुदवाने लगीं। अम्मी ने कहा देखो शबाना आजकल की लड़कियां बहुत स्मार्ट और बोल्ड हो गयीं हैं। अपनी माँ चुदाने में उन्हें कोई शर्म नहीं और उनके साथ हम भी मस्ती से उसी तरह चुदवाने लगीं है। मतलब की हम भी बहुत बड़ी बुर चोदी और हमारी बेटियां भी बहुत बड़ी बुर चोदी।
तब तक नाज़ हंस कर बोली अरे खाला जान हम लोग बुर चोदी नहीं, लन्ड चोदी हैं और लौड़ा चोदी हैं।
एक दिन मेरी एक दोस्त नगमा मुझसे मिलाने आयी। उसकी शादी भी मेरी शादी के आस पास ही हुई थी। वह अपनी सुहागरात के किस्से मुझे सुना चुकी है और मैं उसे अपनी सुहागरात के ? मैंने उसे थोड़ी व्हिस्की पिला दी। घर मैं उस टाइम अकेली ही थी। नगमा आ गाय तो कंपनी हो गयी। हम दोनों बातें करती रहीं।
वह बोली यार ससुराल में अगर लन्ड मिलते रहें तो ससुराल से प्यारी जगह कहीं और नहीं है।
मैंने कहा हां यार तू बिलकुल सच कह रही है।
देखो मैं तो लन्ड पकड़ने में कोई परहेज नहीं करती। मुझे हर तरह के लन्ड पसंद है। मैं हर एक लन्ड से मज़ा ले लेती हूँ।
मेरा भी यही कहना है मैं करती भी यही हूँ।
कभी माँ चुदवाई तूने अपनी खुशबू ?
हां यार खूब चुदवाई और अभी भी चुदवाती हूँ।
यार मैं तो शादी के पहले से अपनी माँ चुदा रही हूँ। और हां सुन जबसे मैंने "चुदाई" की कहानियां पढ़ी तबसे मैंने माँ चुदाना और तेज कर दिया है। अब तो मैं नन्द की भी बुर चोदती हूँ और सास का भोसड़ा भी चोदती हूँ। बड़ा मज़ा आता है।
हां यार मैं भी यही करती हूँ। हमारी तुम्हारी स्टाइल बड़ी मिलती जुलतीं हैं।
और हां सुन मैंने ससुर का भी लन्ड पेला अपनी चूत में। हुआ ये की एक रात को वह अपने कमरे में नंगा नंगा अपने लन्ड का सड़का मार रहा था। मैंने थोड़ा झाँक कर देखा तो मालूम हुआ की वह "चुदाई" की कहानियां पढ़ कर सड़का मार रहा है। फिर मैं भी बेशर्म हो गयी और सीधे उसके कमरे में घुस गयी। मैने कहा अरे अब्बू ससुर ये क्या कर रहे हो ? ये तो औरतों का काम है मर्दों का नहीं। लाओ मैं लगाती हूँ तेरे लन्ड का सड़का ? मैंने लन्ड पकड़ लिया और कहा ससुर जी जब घर में चूत मौजूद है तो सड़का क्यों मार रहे हो ? लो पेलो न मेरी चूत में लन्ड। मैं देख रही हूँ की तुम "चुदाई" की कहानी "मेरे ससुर का मस्त लौड़ा" पढ़ रहे हो और अपना लन्ड हिला रहे हो। कहानी में जब ससुर अपनी बहू की बुर लेता है। तो फिर तुम मेरी बुर क्यों नहीं ले रहे हो ? ऐसा कह कर मैं चढ़ बैठी उसके लन्ड पर ?
इसका मतलब मेरी तरह तू भी दीवानी है "चुदाई" की कहानियों की ?
हां यार बिलकुल दीवानी हूँ और मैं रोज़ कहानी पढ़ती हूँ और रोज़ चुदवाती हूँ।
दोस्तों, मैं खुशबू हूँ, २५ साल की एक शादी शुदा, खूबसूरत, मस्त और बिंदास लड़की। मेरी अम्मी हैं नताशा ४६ साल की एक मस्त और बेहद खूबसूरत महिला। हम दोनों के बीच माँ बेटी का नहीं बल्कि दोस्ती का रिस्ता का है। जैसे तो सहेलियां आपस में खुल कर और गाली गलौज के साथ बात करतीं नही वैसे ही हम दोनों भी करतीं हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है की हम दोनों की जरूरतें एक हैं। जो अम्मी को चाहिए वो मुझे भी और जो मुझे चाहिए वो अम्मी को भी। इसीलिए हमारी दोस्ती बहुत पक्की है। जैसे की लन्ड मुझे भी चाहिए और अम्मी को भी ? चुदाना मुझे भी अच्छा लगता है और अम्मी को भी। अम्मी भी गैर मर्दों से चुदवाती और मैं भी ? अम्मी भी गैर मर्दों के लन्ड एन्जॉय करतीं है और मैं भी ? अम्मी मुझसे बहन चोद मादर चोद बहन की लौड़ी भोसड़ी की कह कर बात चीत करतीं है और मैं भी। हम दोनों में गज़ब की नजदीकियां हैं। यहाँ तक की हम दोनों एक ही लन्ड एक साथ मिलकर चूस लेतीं हैं।
उस दिन अम्मी जब मेरे कमरे में आयीं तो मुझे देखते ही बोली :- बेटी, तेरी बुर चोदी माँ की चूत ? तेरी माँ की जैसी चुदाने वाली औरत दुनियां में कोई और नहीं होगी ? लन्ड तो तेरी माँ मुंह से ऐसे पकड़ती है बेटी जैसे बिल्ली चूहा पकड़ती है। एक बार पकड़ में आ गया तो फिर छोड़ती नहीं है। इसलिए आज तू समझ ले की तेरी माँ यानी मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ, बेटी खुशबू ? मैं समझ गयी की अम्मी आज बड़े मूड में हैं। जरूर कोईं ख़ास बात है। कुछ अच्छा ही हुआ है शायद ? वैसे तो अम्मी मुझसे हर दिन गाली के साथ खुल कर बातें करतीं है लेकिन आज कुछ ज्यादा ही मस्त लग रहीं हैं। उसका इरादा शायद आज जम कर चुदवाने का है। इसलिए मैं भी उसकी मस्ती बढ़ाते हुए उसी की तरह जबाब देने की ठान ली।
मैंने जबाब दिया :- अम्मी, तेरी बुर चोदी बिटिया की बुर ? तेरी बेटी भी लन्ड पकड़ने में बड़ी माहिर है। लड़कियां तो अमूमन होठों से लन्ड पकड़ती हैं पर तेरी बेटी दांतों से लन्ड पकड़ती है पर इतने पोले पोले पकड़ती है की मज़ाल है की तनिक सी भी चोट लग जाए लन्ड को ? अगर तू बहुत बड़ी बुर चोदी है अम्मी तो मैं भी बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ।
तब तक मेरी खाला आ गयीं।
वह अम्मी से बोली :- दीदी, तेरी बुर चोदी बहन का भोसड़ा ? तेरी बहन तो बिलकुल कुतिया है कुतिया जो सरे आम कुत्तों से चुदवाया करती है। मैं लौड़ा खोर हूँ। मैं लौड़ा बाजी करती हूँ।
उसके पीछे से खाला की बेटी आ गयी।
वह मुझसे बोली :- तराना, तेरी खाला की बिटिया की चूत ? मुझको कम न समझो। मैं अपनी अम्मी से दो कदम आगे हूँ। लन्ड साला मुझसे बच कर कहीं और नहीं जा पाता ?
हम चारों तालियां बजा बजा कर हंसने लगीं। तब तक एक दौर और चल पड़ा।
अम्मी बोली :- मैं तेरी माँ चोद दूँगी बेटी ? जानती हो क्यों ? क्योंकि मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ बेटी ? तेरी माँ बहुत बड़ी हरामी चीज है बेटी। उसे लन्ड खाने की आदत पड़ चुकी है। बिना लन्ड के वह एक मिनट भी नहीं रह सकती । अब मैं तेरी माँ चोदूँगी तब उसे समझ में आएगा।
मैंने कहा :- मैं तेरी बेटी की चोदूँगी बुर, अम्मी ? हां हां अम्मी तेरी बेटी बड़ी आवारा हो गयी है। जहाँ पाती है वहां लन्ड हाथ बढ़ा कर पकड़ लेती है। उसे न तो किसी का डर है और न कोईं शर्म ? इतनी खुले मिज़ाज़ की लौंडिया मैंने कोई और नहीं देखी । लन्ड का शिकार करती है तेरी बेटी, अम्मी। बड़ी बहन चोद लौड़ा खोर हो गयी है। आज मैं उसकी चूत में लन्ड पेलूँगी तब उसे होश आएगा ?
खाला बोली :- दीदी, मैं चोदूँगी तेरी बहन का भोसड़ा ? हाय दईया जाने कितने लन्ड लेता है तेरी बहन का भोसड़ा दीदी। बही कल रात में दो लन्ड इसे चोद चुके हैं और अभी भी चुदाने के लिए बेताब है। अल्ला जाने क्या होगा आगे ?
खाला की बेटी बोली :- खाला जान मैं चोदूँगी तेरी बहन की बिटिया की बुर। एक बार फिर ठहाका लगा। अरे खाला तुमने मेरी अम्मी का हाल देख ही लिया है। अब उसकी बेटी की बारी है। वह भी बुर चोदी अपनी माँ से कम नहीं है। अपनी माँ से एक लन्ड ज्यादा ही लेती है उसकी बुर मादर चोद ? आज मैं उसमे लन्ड पेल कर उसकी सारी गर्मी निकाल दूँगी।
हम लोगों की बातें सुनकर अम्मी ने पूंछा अच्छा यह बताओ बेटी खुशबू क्या तुम "चुदाई" की कहानियां पढ़ कर आयी हो ? क्योंकि उसकी ही कहानियों में ये सब बातें लिखीं है जो हम यहाँ बोल रहीं हैं। मैंने कहा हां अम्मी तुमने सही पकड़ा। मैं तो हर रोज़ उसकी कहानियां पढ़ती हूँ। मज़ा भी खूब आता है और उसके बाद चुदाने में तो और मज़ा आता है। फिर अम्मी ने बताया अरे बेटी मैं भी वही कहानियां पढ़ती हूँ। उसमे माँ बेटी की चुदाई धुआंधार होती है। उसी का असर है की मैं तुमसे खुल कर बातें करने लगी हूँ और गाली भी बकने लगी हूँ । तब तक खाला की बेटी नाज़ ने कहा हां खाला मैं भी "चुदाई" की कहानियां पढ़ती हूँ। इसके बारे में मुझे एक लड़के ने बताया था। वो भोसड़ा का रोज़ नंगे होकर कहानियां पढता है और मुठ्ठ मारता है। कभी लड़कियों से मुठ्ठ मरवाता है।
मैं एक दिन कहानियां पढ़कर आयी तो अम्मी से बता दिया। फिर उसने भी कहानियां पढ़ी और मुझसे बोली नाज़ तेरी माँ की चूत बेटी। नाज़ आज से अपनी माँ चुदाया करो बेटी और लन्ड पेला करो अपनी माँ की चूत में ? मैं समझ गयी की अम्मी को भी कहानियों का नशा हो गया है।
बस फिर हम दोनों एक साथ चुदवाने लगीं।
अब मैं एक बात और बताना चाहूंगी। मैंने उस ब्लॉग में बाप और बेटी की कहानियां भी पढ़ी। मैं सोंचने लगी की कैसे कोई बेटी अपने अब्बू का लन्ड पकड़ लेती है और चुदवा भी लेती है। ये सब कहानियों में होता है हकीकत में नहीं ? कहानियां लिखने वाली रेहाना बुर चोदी अपनी मन गढंत बातें लिखा करती है। वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं होता ? तभी मेरी एक सहेली आ गयी मैं उससे बातें करने लगी। बात करते करते मैं पूंछ बैठी यार सच बताओ क्या कोई बेटी अपने अब्बू का लन्ड पकड़ सकती है। वह बोली हां पकड़ सकती है। इसमें कौन सी ख़ास बात है। देखो जवानी में जब बदन की आग जोर मारती है। चूत की आग धधकने लगती है तो उसमे सारे नाते रिस्ते ख़तम हो जातें हैं। केवल लन्ड और चूत का ही रिस्ता रहता है। और फिर किसी के लन्ड में यह नहीं लिखा होता की यह किसका लन्ड है। लन्ड तो बस लन्ड है। उसका काम है चूत में घुस कर चोदना। जवानी में किसी का भी लन्ड पकड़ना जायज़ है चाहे वो अपने अब्बू का ही लन्ड क्यों न हो ? अब मैं सच बता रही हूँ की मैं अपने अब्बू का लन्ड पकड़ती हूँ। आजकल हर दूसरी लड़की अपने अब्बू का लन्ड पकड़ती है। हां जबरदस्ती नहीं प्यार से। मस्ती से। जवानी के जोश में और एन्जॉय करने के लिए।
मैंने पूंछा क्या तुमने "चुदाई" की कहानियां पढ़ी हैं। वह बोली मुझे ब्लॉग वगैरह कुछ नहीं मालूम ? मैंने आजतक लैपटॉप नहीं देखा कंप्यूटर नहीं देखा। कोई ब्लू फिल्म नहीं देखी और कोई सेक्स की कहानी नहीं पढ़ी क्योंकि ये सब तो मैं हर रोज़ करती हूँ। कभी इसका लन्ड कभी उसका लन्ड ? मैं तब समझ गयी की ये रेहाना भोसड़ी की सही बातें लिखती है। जो हकीकत में होता है वही लिखती है।
मैंने मजाक में कहा :- तो फिर पेलो लन्ड अपनी माँ की चूत में नाज़ ?
वह बोली :- बताओ किसका लन्ड पेल दूं अपनी माँ की चूत में ?
मैंने कहा :- अपने मियां का लन्ड पेलो।
वह बोली :- हाय दईया खुशबू , तो क्या तू भी अपने मियां का लन्ड अपनी माँ की चूत में पेलेगी ?
मैंने कहा :- क्यों नहीं पेलूंगी। मैं तो चोदूँगी उसका भोसड़ा ?
वह बोली :- यार एक बात बताऊँ मैं भी आज तेरे मियां का लन्ड अपनी चूत में लूंगी।
मैंने कहा :- अरी मेरी पगली नाज़। यहाँ सब भोसड़ी वाली सबके लन्ड अपनी अपनी चूत में घुसेड़ेगी। तू चिंता न कर ? तेरी बुर तो खूब अच्छी तरह चोदी जाएगी। सारे मर्द चोदेंगें सबकी चूत। फिर मैं बाहर गयी और सबको बुला कर ले आयी। रात का समय था। सबके लन्ड चूत की तलास में ही घूम रहे थे। मैंने अपने मियां रहीम को पकड़ा और फिर नाज़ के मियां नियाज़ को पकड़ कर ले आयी। मेरे पीछे पीछे मेरा खालू रेहान भी आ गया और मेरा चाचू फतह भी। हम चार थीं तो वो भी चार थे। मैंने कहाअब आज होगा यहाँ घमाशान चोदा चोदी और घुसेगें सबके लन्ड सबकी बुर में। हम चारो मर्दों के पकड़े उतारने लगीं और मरद हमारे कपड़े ? जैसे ही हम सब नंगी हुई वैसे ही मरद भी सब के सब नंगे हो गये। फिर शुरू हो गया पकड़ा पकड़ी।
नाज़ का मियां मेरी चूंचियां दबाने लगा तो मैं उसका लन्ड हिलाने लगी। नाज़ मेरे सामने मेरे मियां का लौड़ा सहलाने लगी। अम्मी ने हाथ बढ़ा कर खालू का लन्ड पकड़ लिया और खाला ने मेरे चाचू का लन्ड। सबके हिस्से में एक एक लन्ड आ गया और मर्दों के हाथ में एक एकऔरत की चूंचियां। सबको परायी बीवियों का मज़ा मिलने लगा और बीवियों को पराये मर्दों के लन्ड का मज़ा ? मुझे नाज़ के मियां का लन्ड बहुत भा रहा था। मस्त मोटा लन्ड पाकर मैं भी मस्त हो गयी। वह भी मेरी चूंचियां मुंह लगाकर चूसने लगा। मैं नाज़ को देख रही थी की वह कितने मजे से मेरे मियां का लन्ड मुंह में लेकर चूस रही है। और मेरी अम्मी तो वाकई बड़ी बुर चोदी निकली। वो तो ऐसे लन्ड पर टूट पड़ी जैसे उसे ज़िन्दगी में पहली बार कोई लन्ड मिला है। यह इस बात को दर्शाता है की मेरी अम्मी कितनी हॉट हैं। यही हाल करीब करीब मेरी खाला का भी था। वह भी भोसड़ी की कुछ कम बुर चोदी नहीं है। बुर चोदी तो उसकी बेटी नाज़ भी है लेकिन मैंने देखा की वो तो लन्ड का अपनी बेटी से ज्यादा मज़ा ले रही है।
सच ही है की जब पराये मरद का लन्ड मुंह में जाता है तो बहुत मज़ा आता है और जब बुर में जाता है तो सबसे ज्यादा मज़ा आता है। चुदाने में तो मज़ा आता है लेकिन अपने साथ किसी और को चुदते हुए देखने में और मजा आता है। यह भी देखने में अच्छा लगता है की किसका लन्ड कितना बड़ा है ? किस की चूत कैसी है, गांड कैसी हैं, चूंचियां कैसी हैं और वो सब माँ की लौड़ी चुदवाती कैसे हैं ? सामूहिक चुदाई का यही तो मज़ा है। इसके अलावा जब उसकी चूत का लन्ड मेरी चूत में घुसता है और मेरी चूत का लन्ड उसकी चूत में घुसता है तो बेहद मज़ा आता है।
तब तक नाज़ ने अपने मियां का लन्ड अपनी माँ के भोसड़ा में पेल दिया और बोली ले देख खुशबू तू यही चाहती थी न की मैं अपनी माँ चुदवाऊँ ? मैंने कहा ठीक है यार मैं जान गयी तुझे की तू बहुत बड़ी ऐय्याश है। लेकिन मैं तुझसे कम नहीं हूँ। तब तक मैंने भी अपने मियां का लौड़ा अम्मी की बुर में घुसा दिया। यह कोई पहली बार नहीं था। ये हमारे बीच अक्सर होता है। बस २ मिनट के बाद अम्मी ने मेरे खालू का लन्ड मेरी चूत में घुसेड़ा और खाला ने मेरे चाचू का लन्ड नाज़ की बुर में पेल दिया। हम दोनों भी अपनी अपनी गांड उचका उचका रंडी की तरह कर चुदवाने लगीं। अम्मी ने कहा देखो शबाना आजकल की लड़कियां बहुत स्मार्ट और बोल्ड हो गयीं हैं। अपनी माँ चुदाने में उन्हें कोई शर्म नहीं और उनके साथ हम भी मस्ती से उसी तरह चुदवाने लगीं है। मतलब की हम भी बहुत बड़ी बुर चोदी और हमारी बेटियां भी बहुत बड़ी बुर चोदी।
तब तक नाज़ हंस कर बोली अरे खाला जान हम लोग बुर चोदी नहीं, लन्ड चोदी हैं और लौड़ा चोदी हैं।
एक दिन मेरी एक दोस्त नगमा मुझसे मिलाने आयी। उसकी शादी भी मेरी शादी के आस पास ही हुई थी। वह अपनी सुहागरात के किस्से मुझे सुना चुकी है और मैं उसे अपनी सुहागरात के ? मैंने उसे थोड़ी व्हिस्की पिला दी। घर मैं उस टाइम अकेली ही थी। नगमा आ गाय तो कंपनी हो गयी। हम दोनों बातें करती रहीं।
वह बोली यार ससुराल में अगर लन्ड मिलते रहें तो ससुराल से प्यारी जगह कहीं और नहीं है।
मैंने कहा हां यार तू बिलकुल सच कह रही है।
देखो मैं तो लन्ड पकड़ने में कोई परहेज नहीं करती। मुझे हर तरह के लन्ड पसंद है। मैं हर एक लन्ड से मज़ा ले लेती हूँ।
मेरा भी यही कहना है मैं करती भी यही हूँ।
कभी माँ चुदवाई तूने अपनी खुशबू ?
हां यार खूब चुदवाई और अभी भी चुदवाती हूँ।
यार मैं तो शादी के पहले से अपनी माँ चुदा रही हूँ। और हां सुन जबसे मैंने "चुदाई" की कहानियां पढ़ी तबसे मैंने माँ चुदाना और तेज कर दिया है। अब तो मैं नन्द की भी बुर चोदती हूँ और सास का भोसड़ा भी चोदती हूँ। बड़ा मज़ा आता है।
हां यार मैं भी यही करती हूँ। हमारी तुम्हारी स्टाइल बड़ी मिलती जुलतीं हैं।
और हां सुन मैंने ससुर का भी लन्ड पेला अपनी चूत में। हुआ ये की एक रात को वह अपने कमरे में नंगा नंगा अपने लन्ड का सड़का मार रहा था। मैंने थोड़ा झाँक कर देखा तो मालूम हुआ की वह "चुदाई" की कहानियां पढ़ कर सड़का मार रहा है। फिर मैं भी बेशर्म हो गयी और सीधे उसके कमरे में घुस गयी। मैने कहा अरे अब्बू ससुर ये क्या कर रहे हो ? ये तो औरतों का काम है मर्दों का नहीं। लाओ मैं लगाती हूँ तेरे लन्ड का सड़का ? मैंने लन्ड पकड़ लिया और कहा ससुर जी जब घर में चूत मौजूद है तो सड़का क्यों मार रहे हो ? लो पेलो न मेरी चूत में लन्ड। मैं देख रही हूँ की तुम "चुदाई" की कहानी "मेरे ससुर का मस्त लौड़ा" पढ़ रहे हो और अपना लन्ड हिला रहे हो। कहानी में जब ससुर अपनी बहू की बुर लेता है। तो फिर तुम मेरी बुर क्यों नहीं ले रहे हो ? ऐसा कह कर मैं चढ़ बैठी उसके लन्ड पर ?
इसका मतलब मेरी तरह तू भी दीवानी है "चुदाई" की कहानियों की ?
हां यार बिलकुल दीवानी हूँ और मैं रोज़ कहानी पढ़ती हूँ और रोज़ चुदवाती हूँ।
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