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भैया नामर्द और भाभी तीन देवर के मजे Bhaiya namard bhabhi 3 devar ke maje
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मैं हूँ मंगल. मेरी यह कहानी कई साल पहले की उन दिनों की है जब मैं अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया, काशी राम चौथी शादी करने की सोच रहे थे. हम सब राजकोट से पच्चास किलोमीटर दूर एक छोटे से गाँव में ज़मीदार हैं एक सौ बीघे की खेती है और लंबा चौड़ा व्यापार है हमारा. गाँव मे चार घर और कई दुकानें है. मेरे माता-पिताजी जब में दस साल का था तब ही गुजर गए. मेरे बड़े भैया काशी राम और भाभी सविता ने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया. भैया मेरे से तेरह साल बड़े हें. उनकी पहली शादी के वक़्त मैं आठ साल का था. शादी के पाँच साल बाद भी सविता भाभी को संतान नहीं हुई. कितने डॉकटर को दिखाया लेकिन सब बेकार गया. भैया ने चम्पा भाभी के साथ दूसरी शादी की, तब मेरी आयु तेरह साल की थी.
मैं हूँ मंगल. मेरी यह कहानी कई साल पहले की उन दिनों की है जब मैं अठारह साल का था और मेरे बड़े भैया, काशी राम चौथी शादी करने की सोच रहे थे. हम सब राजकोट से पच्चास किलोमीटर दूर एक छोटे से गाँव में ज़मीदार हैं एक सौ बीघे की खेती है और लंबा चौड़ा व्यापार है हमारा. गाँव मे चार घर और कई दुकानें है. मेरे माता-पिताजी जब में दस साल का था तब ही गुजर गए. मेरे बड़े भैया काशी राम और भाभी सविता ने मुझे पाल पोस कर बड़ा किया. भैया मेरे से तेरह साल बड़े हें. उनकी पहली शादी के वक़्त मैं आठ साल का था. शादी के पाँच साल बाद भी सविता भाभी को संतान नहीं हुई. कितने डॉकटर को दिखाया लेकिन सब बेकार गया. भैया ने चम्पा भाभी के साथ दूसरी शादी की, तब मेरी आयु तेरह साल की थी.
लेकिन चंपा भाभी को भी संतान नहीं हुई. सविता और चंपा की हालत बिगड़ गई, भैया उन के साथ नौकरानियों जैसा व्यवहार करने लगे. मुझे लगता है कि भैया ने दोनों भाभियों को चोदना चालू ही रखा था, संतान की आस में. दूसरी शादी के कुछ साल बाद भैया ने तीसरी शादी की, सुमन भाभी के साथ. उस वक़्त मेरे बदन में फ़र्क पड़ना शुरू हो गया था. कांख और लंड के आसपास बाल उग गए और आवाज़ गहरी हो गई. मुँह पर मुछें भी निकल आई. लौंडा लंबा और मोटा हो गया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। रात को स्वप्न-दोष होने लगा, में मूठ मारना सीख गया. सविता और चंपा भाभी को पहली बार देखा तब मेरे मन में चोदने का विचार तक आया नहीं था, तब मैं बच्चा जो था. सुमन भाभी की बात कुछ और थी. एक तो वो मुझसे चार साल ही बड़ी थी. दूसरे, वो काफ़ी ख़ूबसूरत थी, ये कहो कि मुझे ख़ूबसूरत नज़र आती थी. उसके आने के बाद मैं हर रात कल्पना किए जाता था कि भैया उसे कैसे चोदते होंगे और रोज़ उस के नाम से मूठ मार लेता था. भैया भी रात दिन उसके पीछे पड़े रहते थे.
सविता भाभी और चंपा भाभी की कोई क़ीमत रही नहीं थी. मैं मानता हूँ कि भैया चेंज के वास्ते कभी कभी उन दोनों को भी चोदते थे. ताजुब की बात ये है कि अपने में कुछ कमी हो सकती है ऐसा मानने को भैया तैयार नहीं थे. उनका ऐसा विश्वास था कि बाप बनने के लिए मर्द लंबे लंड से औरत को चोदे और ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में उड़ेल दे बस इतना काफ़ी है. उन्होंने अपने वीर्य की जाँच कभी करवाई नहीं थी. उमर का फ़ासला कम होने से सुमन भाभी के साथ मेरी अच्छी बनती थी, हालाँकि वो मुझे बच्चा ही समझती थी. मेरी मौजूदगी में कभी कभी उनका पल्लू खिसक जाता तो वो शर्माती नहीं थी. इसीलिए उस के गोरे गोरे स्तन देखने के कई मौक़े मिले मुझे.
एक बार स्नान के बाद वो कपड़े बदल रही थी और मैं जा पहुँचा. उनका आधा नंगा बदन देख मैं शरमा गया लेकिन वो बिना हिचकिचाये बोली, ‘दरवाज़ा खटखटा के आया करो.’
दो साल यूँ ही गुज़र गये, में अठारह साल का हो गया था और गाँव में 12वीं में पढ़ता था, भैया चौथी शादी के बारे में सोचने लगे. उन दिनो में जो घटनाएँ घटी, अब वो बातें मैं बता रहा हूँ. बात यह हुई, मेरी उम्र की एक नौकरानी, बसंती, हमारे घर काम पर आया करती थी. वैसे मैंने उसे शुरु से बड़ी होते देखा था, बसंती इतनी सुंदर तो नहीं थी लेकिन उसकी दूसरी लड़कियों के बजाय उसके स्तन काफ़ी बड़े बड़े लुभावने थे, पतले कपड़े की चोली के आर पार उसकी छोटी छोटी निप्पल साफ़ दिखाई देती थी। मैं अपने आप को रोक नहीं सका, एक दिन मौक़ा देख मैंने उसके स्तन थाम लिए, उसने ग़ुस्से से मेरा हाथ झटक डाला और बोली- आइंदा ऐसी हरकत करोगे तो बड़े सेठ को बता दूँगी। भैया के डर से मैंने फिर कभी बसंती का नाम ना लिया।
एक साल पहले बसंती को ब्याह दिया गया था, एक साल ससुराल में रह कर अब वो दो महीनों वास्ते यहाँ आई थी. शादी के बाद उस का बदन भर गया था और मुझे उसको चोदने का दिल हो गया था लेकिन कुछ कर नहीं पाता था, वो मुझसे क़तराती रहती थी और मैं डर का मारा उसे दूर से ही देख कर लार टपका रहा था। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। अचानक क्या हुआ क्या मालूम, लेकिन एक दिन माहौल बदल गया, दो चार बार बसंती मेरे सामने देख मुस्कराई, काम करते करते मुझे गौर से देखने लगी मुझे अच्छा लगता था और दिल भी हो जाता था उस के बड़े बड़े स्तनों को मसल डालने को. लेकिन डर भी लगता था. इसीलिए मैंने कोई भाव नहीं दिया. वो नखरें दिखाती रही.
एक दिन दोपहर को मैं अपने रूम में पढ़ रहा था. मेरा स्टडी रूम अलग मकान में था, मैं वहीं सोया करता था. उस वक़्त बसंती चली आई और रोनी सूरत बना कर कहने लगी- इतने नाराज़ क्यूं हो मुझसे, मंगल?
मैंने कहा- नाराज़? मैं कहाँ नाराज़ हूँ? मैं क्यूं होऊँ नाराज़?
उसकी आँखों में आँसू आ गये, वो बोली- मुझे मालूम है उस दिन मैंने तुम्हारा हाथ जो झटक दिया था ना? लेकिन मैं क्या करती? एक ओर डर लगता था और दूसरे दबाने से दर्द होता था, माफ़ कर दो मंगल मुझे!
इतने में उसकी ओढ़नी का पल्लू खिसक गया, पता नहीं कि अपने आप खिसका या उसने जानबूझ कर खिसकाया। नतीजा एक ही हुआ, लो कट वाली चोली में से उसके गोरे गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिखाई दिया. मेरे लोड़े ने बग़ावत की नौबत लगाई.
मैं: उस में माफ़ करने जैसी कोई बात नहीं है. मैं नाराज़ नहीं हूँ. वैसे भी माफी तो मुझे माँगनी चाहिए.
मेरी हिचकिचाहट देख वो मुस्करा गयी और हंस के मुझसे लिपट गयी और बोली, ‘सच्ची? ओह, मंगल, में इतनी ख़ुश हूँ अब. मुझे डर था कि तुम मुझसे रूठ गये हो. लेकिन मैं तुम्हें माफ़ नहीं करूंगी जब तक तुम मेरी चुचियों को फिर नहीं छूओगे.’
शर्म से वो नीचा देखने लगी मैंने उसे अलग किया तो उस ने मेरी कलाई पकड़ कर मेरा हाथ अपने स्तन पर रख दिया और दबाए रखा.
‘छोड़, छोड़ पगली, कोई देख लेगा तो मुसीबत खड़ी हो जाएगी.’
‘तो होने दो. मंगल, पसंद आई मेरी चूची? उस दिन तो ये कच्ची थी, छूने पर भी दर्द होता था. आज मसल भी डालो, मज़ा आता है.
मैंने हाथ छुड़ाकर कहा, ‘चली जा, कोई आ जाएगा.’
वो बोली, ‘जाती हूँ लेकिन रात को आऊँगी. आऊँ ना ?’
उस का रात को आने का ख़याल मात्र से मेरा लौंडा तन गया. मैंने पूछा, ‘ज़रूर आओगी?’ और अपना हाथ उसकी चूची पर रख दिया.
‘ज़रूर आऊँगी. तुम उपर वाले कमरे में सोना. और एक बात बताओ, तुमने किसी लड़की को चोदा है ?’ उस ने मेरा हाथ पकड़ लिया मगर हटाया नहीं.
‘नहीं तो’ कह के मैंने स्तन दबाया. ओह, क्या चीज़ था वो स्तन. उस ने पूछा, ‘मुझे चोदना है ?’ सुनते ही मैं चौंक पड़ा.
‘उन्न..ह..हाँ
‘लेकिन वेकिन कुछ नहीं. रात को बात करेंगे.’ धीरे से उस ने मेरा हाथ हटाया और मुस्कुराती चली गयी
मुझे क्या पता की इसके पीछे सुमन भाभी का हाथ था ?
रात का इंतज़ार करते हुए मेरा लंड खड़ा का खड़ा ही रहा, दो बार मूठ मारने के बाद भी. क़रीबन दस बजे वो आई.
‘सारी रात हमारी है मैं यहीं सोने वाली हूँ उसने कहा और मुझसे लिपट गयी उस के कठोर स्तन मेरे सीने से दब गये वो रेशम की चोली, घाघरी और ओढनी पहनकर आई थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उस के बदन से मादक सुवास आ रही थी. मैंने ऐसे ही उसको मेरे बाहुपाश में जकड़ लिया
‘हाय दैया, इतना ज़ोर से नहीं, मेरी हड्डियाँ टूट जाएगी.’ वो बोली. मेरे हाथ उसकी पीठ सहलाने लगे तो उस ने मेरे बालों में उंगलियाँ फेरनी शुरू कर दी. मेरा सिर पकड़ कर नीचा किया और मेरे मुँह से अपना मुँह टिका दिया.
उस के नाज़ुक होठ मेरे होठ से छूते ही मेरे बदन में सनसनी फैल गयी और लौड़ा खड़ा होने लगा. ये मेरा पहला चुंबन था, मुझे पता नहीं था कि क्या किया जाता है अपने आप मेरे हाथ उस की पीठ से नीचे उतर कर चूतड़ पर रेंगने लगे. पतले कपड़े से बनी घाघरी मानो थी ही नहीं. उसके भारी गोल गोल नितंब मैंने सहलाए और दबोचे. उसने नितंब ऐसे हिलाया की मेरा लंड उस के पेट साथ दब गया. थोड़ी देर तक मुँह से मुँह लगाए वो खड़ी रही. अब उस ने अपना मुँह खोला और ज़बान से मेरे होठ चाटे. ऐसा ही करने के वास्ते मैंने मेरा मुँह खोला तो उस ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी. मुझे बहुत अच्छा लगा. मेरी जीभ से उसकी जीभ खेली और वापस चली गयी अब मैंने मेरी जीभ उस के मुँह में डाली. उसने होठ सिकोड़कर मेरी जीभ को पकड़ा और चूसा. मेरा लंड फटा जा रहा था. उस ने एक हाथ से लंड टटोला. मेरे टाइट लंड को उस ने हाथ में लिया तो उत्तेजना से उसका बदन नरम पड़ गया. उससे खड़ा नहीं रहा गया. मैंने उसे सहारा दे के पलंग पर लिटाया. चुंबन छोड़ कर वो बोली, ‘हाय, मंगल, आज में पंद्रह दिन से भूखी हूँ पिछले एक साल से मेरे पति मुझे हर रोज़ कम-से-कम एक बार चोदते हैं लेकिन यहाँ आने के बाद मैं प्यासी हूँ. मुझे जल्दी से चोदो, मैं मरी जा रही हूँ.
मुसीबत ये थी कि मैं नहीं जानता था कि चोदने में लंड कैसे और कहाँ जाता है फिर भी मैंने हिम्मत करके उसकी ओढनी उतार फेंकी और मेरा पजामा निकालकर उसकी बगल में लेट गया. वो इतनी उतावली हो गई थी की चोली घाघरी भी नहीं निकाला. फटाफट घाघरी उपर उठाई और जांघें चौड़ी कर मुझे अपने ऊपर खींच लिया. यूँ ही मेरे हिप्स हिल पड़े थे और मेरा आठ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा लंड अंधे की लकड़ी की तरह इधर उधर सिर टकरा रहा था, कहीं जा नहीं पा रहा था. उस ने हमारे बदन के बीच हाथ डाला और लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट करने की कोशिश की. मेरे हिप्स हिल रहे थे और लंड चूत का मुँह खोजता था. मेरे आठ दस धक्के ख़ाली गये हर वक़्त लंड फिसल जाता था. उसे चूत का मुँह मिला नहीं. मुझे लगा की में चोदे बिना ही झड़ जाने वाला हूँ मेरा लंड और बसंती की चूत दोनों काम रस से तरबतर हो गये थे. मेरी नाकामयाबी पर बसंती हंस पड़ी. उसने फिर से लंड पकड़ा और चूत के मुँह पर रखकर अपने चूतड़ ऐसे उठाए कि आधा लंड वैसे ही चूत में घुस गया. तुरंत ही मैंने एक धक्का मारा तो सारा का सारा लंड उस की योनी में समा गया. मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि मैं रुक नहीं सका. आप से आप मेरे हिप्स तल्ला देने लगे और मेरा लंड अंदर बाहर होते हुए बसंती की चूत को चोदने लगा. बसंती भी चूतड़ हिला हिला कर लंड लेने लगी और बोली, ‘ज़रा धीरे चोद, वरना जल्दी झड़ जाएगा.’
मैंने कहा, ‘मैं नहीं चोदता, मेरा लंड चोदता है और इस वक़्त वह मेरी नहीं सुन रहा है.’
‘मार डालोगे आज मुझे,’ कहते हुए उसने चूतड़ घुमाए और चूत से लंड दबोचा. मैं दोनों चूचियों को पकड़कर मुँह से मुँह चिपकाकर बसंती को चोदता रहा. धक्के की रफ़्तार मैं रोक नहीं पाया. कुछ बीस पचीस तल्ले के बाद अचानक मेरे बदन में आनंद का दरिया उमड़ पड़ा. मेरी आँखें ज़ोर से मूँद गयी मुँह से लार निकल पड़ी, हाथ पाँव अकड़ गये और सारे बदन पर रोएँ खड़े हो गये लंड चूत की गहराई में ऐसा घुसा कि बाहर निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था. लंड में से गरमा गरम वीर्य की ना जाने कितनी पिचकारियाँ छूटी, हर पिचकारी के साथ बदन में झुरझुरी फैल गयी थोड़ी देर में मैं होश खो बैठा. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। जब होश आया तब मैंने देखा कि बसंती की टाँगें मेरी कमर के आसपास और बाहें गर्दन के आसपास जमी हुई थी. मेरा लंड अभी भी तना हुआ था और उसकी चूत फट फट फटके मार रही थी. आगे क्या करना है वो मैं नहीं जानता था लेकिन लंड में अभी भी गुदगुदी हो रही थी. बसंती ने मुझे रिहा किया तो मैं लंड निकालकर कर उतरा.
‘बाप रे,’ वो बोली, ‘इतनी अच्छी चुदाई आज कई दिनों के बाद की.’
‘मैंने तुझे ठीक से चोदा ?’
‘बहुत अच्छी तरह से.’
हम अभी पलंग पर लेटे थे. मैंने उसके स्तन पर हाथ रखा और दबाया. पतले रेशमी कपड़े की चोली आर पार उसकी कड़ी निप्पलें मैंने मसली. उसने मेरा लंड टटोला और खड़ा पा कर बोली, ‘अरे वाह, ये तो अभी भी तैयार है कितना लंबा और मोटा है मंगल, जाओ तो, इसे धो के आ.’ मैं बाथरूम में गया, पेसाब किया और लंड धोया. वापस आ के मैंने कहा, ‘बसंती, मुझे तेरे स्तन और चूत ज़रा ढंग से दिखा. मैंने अब तक किसी की देखी नहीं है’
उसने चोली घाघरी निकल दी. मैंने पहले बताया था कि बसंती कोई इतनी ख़ूबसूरत नहीं थी. पाँच फ़ीट दो इंच की उँचाई के साथ पचास किलो वज़न होगा. रंग सांवला, चेहरा गोल, आँखें और बाल काले. नितंब भारी और चिकने. सब से अच्छे थे उस के स्तन. बड़े बड़े गोल गोल स्तन सीने पर उपरी भाग पर लगे हुए थे. मेरी हथेलियों में समाते नहीं थे. दो इंच की अरोला और छोटी सी निप्पलें काले रंग के थे. चोली निकलते ही मैंने दोनो स्तन को पकड़ लिया, सहलाया, दबोचा और मसला.
उस रात बसंती ने मुझे अपनी चूत का हर भाग दिखाया. चूत के आसपास झांट से लेकर चूत के बड़े होठ, छोटे होठ, क्लटोरिस, योनी सब दिखाया. मेरी दो उंगलियाँ चूत में डलवा के चूत की गहराई भी दिखाई, जी-स्पॉट दिखाया. वो बोली, ‘ये जो क्लटोरिस है वो मर्द के लंड बराबर होती है चोदते वक़्त ये भी लंड की माफ़िक कड़ी हो जाती है, तू ने चूत की दिवारें देखी? कैसी करकरी है? लंड जब चोदता है तब ये करकरी दीवारों के साथ घिसता है और बहुत मज़ा आता है हाय, लेकिन बच्चे का जन्म के बाद ये दिवारें चिकनी हो जाती है चूत चौड़ी हो जाती है और चूत की पकड़ कम हो जाती है.
मुझे लिटाकर कर वो बगल में लेट गयी. मेरा लंड थोड़ा सा नर्म हो चला था, उसको मुट्ठी में लिया. टोपी खींच कर सूपाड़ा खुला किया और जीभ से चाटा. तुरंत लंड ने ठुमका लगाया और टाइट हो गया. मैं देखता रहा और उसने लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी. मुँह में जो हिस्सा था उस पर वो जीभ फिरा रही थी, जो बाहर था उसे मुट्ठी में लिए मूठ मार रही थी. दूसरे हाथ से मेरी गोटी दबा रही थी. मेरे हाथ उसकी पीठ सहला रहे थे.
मैंने हस्तमैथुन का मज़ा लिया था, आज एक बार चूत चुदने का मज़ा भी लिया. इन दोनों से अलग किस्म का मज़ा आ रहा था लंड चूसवाने में. वो भी पूरी गर्म हो चुकी थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसने ताबड़तोड़ मेरे लंड को अपने मुँह से निकाल कर वो मेरी जांघों पर बैठ गयी. अपनी जांघें चौड़ी करके अपनी चूत को मेरे लंड पर टिकाया। मेरे खड़े लंड को अपनी योनी के मुख में फंसा कर नितंब नीचा कर के पूरा लंड चूत में ले लिया. और सामने झुककर अपने होठ मेरे होठों पर रख चुसाई और चुदाई दोनों शुरू कर दी।
‘उहहहहह, मज़ा आ गया. मंगल, जवाब नहीं तेरे लंड का. जितना मीठा मुँह में लगता है इतना ही चूत में भी मीठा लगता है कहते हुए उस ने नितंब गोल घुमाए और उपर नीचे कर के लंड को अंदर बाहर करने लगी. आठ दस धक्के मारते ही वो थक गयी और निढाल पड़ गयी. मैंने उसे हाथों में लिया और घूम के उपर आ गया. उस ने टाँगें पसारी और बदले हुए पोजीशन में मेरा लंड पूरा योनी की गहराई में उतर गया. उसकी योनी फच फच करने लगी. मैंने आधा लंड बाहर खींचा, ज़रा रुका और एक ज़ोरदार धक्के के साथ चूत में घुसेड़ दिया. पूरा लंड योनी में उतर गया. ऐसे पाँच सात धक्के मारे. बसंती का बदन हिल पड़ा. वो बोली, ‘ऐसे, ऐसे, मंगल, ऐसे ही चोदो मुझे. मारो मेरी चूत को और फाड़ दो मेरी चूत को.’
आगे क्या बताऊँ उस रात बसंती की खूब जमकर के चुदाई की. उसके बाद बसंती रोज़ चली आती थी चुदवाने. हमें आधा एक घंटा समय मिलता था तब हम जमकर चुदाई करते थे. मैंने सोचा था कि कम से कम एक महीना तक बसंती की चुदाई के मजे लूंगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक हफ्ते में ही वो ससुराल वापस चली गयी. असली खेल अब शुरू हुआ. बसंती के जाने के बाद तीन दिन तक कुछ नहीं हुआ. मैं हर रोज़ उसकी चूत याद करके मूठ मारता रहा. चौथे दिन मैं मेरे कमरे में पढ़ने का प्रयत्न कर रहा था, एक हाथ में टाइट लंड पकड़े हुए, तभी सुमन भाभी आ पहुँची. झटपट मैंने लंड छोड़ कपड़े ठीक किए और सीधा बैठ गया. वो सब कुछ समझती थी इसलिए मुस्कुराती हुई बोली, ‘कैसी चल रही है पढ़ाई, देवर जी? मैं कुछ मदद कर सकती हूँ ?’
भाभी, सब ठीक है मैंने कहा.
आँखों में शरारत भर के भाभी बोली, ‘पढ़ते समय हाथ में क्या पकड़ रखा था जो मेरे आते ही तुमने छोड़ दिया?’
नहीं, कुछ नहीं, ये तो..ये मैं आगे बोल ना सका.
ये तो मेरा लंड था, यही ना?’ उस ने पूछा.
वैसे भी सुमन भाभी मुझे अच्छी लगती थी और अब उसके मुँह से ‘लंड’ सुन कर मैं एक्साइटेड होने लगा. शर्म से उनसे नज़र नहीं मिला सका. कुछ बोला नहीं.
उस ने धीरे से कहा, ‘कोई बात नहीं. मे समझती हूँ लेकिन ये बता, बसंती को चोदना कैसा रहा? पसंद आई उसकी काली चूत? याद आती होगी ना?’
सुन के मेरे होश उड़ गये सुमन भाभी को कैसे पता चला होगा? बसंती ने बता दिया होगा? मैंने इनकार करते हुए कहा, ‘क्या बात करती हो ? मैंने ऐसा वैसा कुछ नहीं किया है
‘अच्छा?’ वो मुस्कराती हुई बोली, ‘क्या वो यहाँ भजन करने आती थी?’
‘वो यहाँ आई ही नहीं,’ मैंने डरते डरते कहा. सुमन मुस्कुराती रही.
‘तो ये बताओ की ये निक्कर किस की है तेरे पलंग से जो मिली है?’ उसने सूखे वीर्य से अकड़ी हुई निक्कर दिखा के पूछा.
मैंने कहा, ‘भाभी, क्या बात है ? मैंने कुछ ग़लत किया है?’
उसने कहा,’वो तो तेरे भैया तय करेंगे.’
भैया का नाम आते ही में डर गया. मैंने सुमन को गिड़गिड़ा विनती की कि वो भैया को ये बात ना बताएँ. तब उसने शर्त रखी और सारा भेद खोल दिया. सुमन ने बताया की भैया के वीर्य में शुक्राणु नहीं थे, भैया इससे अनजान थे. भैया तीनों भाभियों को अच्छी तरह चोदते थे और हर वक़्त ढेर सारा वीर्य भी छोड़ जाते थे. लेकिन शुक्राणु बिना बच्चा हो नहीं सकता. सुमन चाहती थी की भैया चौथी शादी ना करें. वो किसी भी तरह बच्चा पैदा करने को तुली थी. इसके वास्ते दूर जाने की ज़रूरत कहाँ थी, मैं जो घर में ही मौजूद था? सुमन ने तय किया की वो मुझसे चुदवायेगी और माँ बनेगी. अब सवाल उठा मेरी मंज़ूरी का. मैं कहीं ना बोल दूं तो? भैया को बता दूं तो? मुझे इसीलिए बसंती ने जाल में फंसाया था.
ये बाते सुनकर मैंने हंसकर कहा ‘भाभी, तुझे इतना कष्ट लेने की क्या ज़रूरत थी? तूने कहीं भी, कभी भी कहा होता तो में तुझे चोदने से इनकार ना करता, तू चीज़ ऐसी मस्त हो.’
उसका चहेरा लाल हो गया, वो बोली, ‘रहने भी दो, झूठे कहीं के. आए बड़े चोदने वाले. चोदने के वास्ते लंड चाहिए और बसंती तो कहती थी की अभी तो तुम्हारी लुल्ली है उस को चूत का रास्ता मालूम नहीं था. सच्ची बात ना?’
मैंने कहा, ‘दिखा दूं अभी लुल्ली है या लंड ?’
‘ना बाबा, ना. अभी नहीं. मुझे सब सावधानी से करना होगा. अब तू चुप रहना, मैं ही मौक़ा मिलने पर आ जाउंगी और तब देखेंगे कि तेरी लुल्ली है या लंड.
दोस्तो, दो दिन बाद भैया दूसरे गाँव गये तीन दिन के लिए उनके जाने के बाद दोपहर को वो मेरे कमरे में चली आई. मैं पूछता इससे पहले वो बोली, ‘कल रात तुम्हारे भैया ने मुझे तीन बार चोदा है सो आज में तुमसे गर्भवती हो जाऊं तो किसी को शक नहीं पड़ेगा. और दिन में आने की वजह भी यही है की कोई शक ना करे.’ वो मुझ से चिपक गयी और मुँह से मुँह लगा कर फ़्रेंच किस करने लगी. मैंने उस की पतली कमर पे हाथ रख दिए, मुँह खोल कर हमने जीभ लड़ाई. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मेरी जीभ होठों के बीच लेकर वो चुसने लगी मेरे हाथ सरकते हुए उसके नितंब पर पहुँचे. भारी नितंब को सहलाते सहलाते में उसकी साड़ी और घाघरी उपर की तरफ़ उठाने लगा. एक हाथ से वो मेरा लंड सहलाती रही. कुछ देर में मेरे हाथ उस के नंगे नितंब पर फिसलने लगे तो पजामा की नदी खोल उस ने नंगा लंड मुट्ठी में ले लिया.
में उसको पलंग पर ले गया और मेरी गोद में बिठाया. लंड मुट्ठी में पकड़े हुए उस ने फ़्रेंच क़िस चालू रक्खी. मैंने ब्लाउज के हूक खोले और ब्रा के उपर से स्तन दबाए. लंड छोड़ उसने अपने आप ब्रा का हॉक खोल कर ब्रा उतर फेंकी. उस के नंगे स्तन मेरी हथेलियों में समा गये, शंकु आकर के सुमन के स्तन चौदह साल की लड़की के स्तन जैसे छोटे और कड़े थे. मैं निपपलों को छेड़ने लगा तो सुमन बोल उठी, ‘ज़रा होले से. मेरी निपपले और क्लटोरिस बहुत सेंसीटिव है उंगली का स्पर्श सहन नहीं कर सकती.’ उस के बाद मैंने निपपले मुँह में ली और चूसने लगा.
में आप को बता दूं की सुमन भाभी कैसी थी. पाँच फ़ीट पाँच इंच की लंबाई के साथ वज़न था साठ किलो. बदन पतला और गोरा था. चेहरा गोल थोड़ा सा नरगिस जैसा. आँखें बड़ी बड़ी और काली. बाल काले रेशमी और लम्बें. सीने पर छोटे - छोटे दो स्तन जिसे वो हमेशा ब्रा से ढके रखती थी. पेट बिल्कुल सपाट था. हाथ पाँव सूडोल थे. नितंब गोल और भारी थे. कमर पतली थी. वो जब हंसती थी तब गालों में गड्ढे पड़ते थे. मैंने स्तन पकड़े तो उसने लंड थाम लिया और बोली, ‘देवर जी, तुम तो तुमरे भैया जैसे बड़े हो गये हो. वाकई ये तेरी लुल्ली नहीं बल्कि लंड है और वो भी कितना तगड़ा ? हाय राम, अब ना तड़पाओ, जल्दी करो.’
मैंने उसे लेटा दिया. ख़ुद उस ने घाघरा उपर उठाया, जांघें नंगी की और पाँव चौड़े कर लिए, में उस की भोसी देख के दंग रह गया. स्तन के माफ़िक सुमन की भोसी भी चौदह साल की लड़की की भोसी जितनी छोटी थी. फ़र्क इतना था की सुमन की चूत पर काले बाल थे और क्लटोरिस लम्बी और मोटी थी. भैया का लंड वो कैसे ले पाती थी, ये मेरी समझ में आ ना सका. में उस की जांघों के बीच आ गया. उसने अपने हाथों से चूत के होठ चौड़े पकड़ रखे थे तो मैंने लंड पकड़ कर सारी भोसी पर रगड़ा. उस के नितंब हिलने लगे. अब की बार मुझे पता था की क्या करना है मैंने लंड का टोपा चूत के मुँह में घुसाया और लंड हाथ से छोड़ दिया. चूत ने लंड पकड़े रखा. हाथों के बल आगे झुककर मैंने मेरे हिप्स से ऐसा धक्का लगाया की सारा लंड चूत में उतर गया. मोन्स से मोन्स टकराई, लंड तमाक तुमक करने लगा और चूत में फटक फटक होने लगा.
में काफ़ी उत्तेजित हुआ था इसलिए रुक नहीं सका. पूरा लंड खींचकर ज़ोरदार धक्के से मैंने सुमन को चोदना शुरू किया. अपने चूतड़ उठा उठा के वो सहयोग देने लगी, चूत में से और लंड में से चिकना पानी बहने लगा. उसके मुँह से निकलती आह आह.... जैसी आवाज़ और चूत की पूच्च पूच्च की आवाज़ से कमरा गूंज उठा. पूरी बीस मिनट तक मैंने सुमन भाभी की चूत मारी. इस दरमियाँ वो दो बार झड़ी. आख़िर उसने चूत ऐसी सिकोड़ी की अंदर बाहर आते जाते लंड की टोपी चढ़ - उतर करने लगी, मानो की चूत मूठ मार रही हो. ये हरकत मैं बर्दाश्त नहीं कर सका, में ज़ोर जोर से चोदने लगा और झड़ते वक़्त मैंने लंड को चूत की गहराई में ज़ोर से दबा लिया था और टोपी इतना ज़ोर से रगड़ गयी थी की दो दिन तक लोडे में दर्द रहा. वीर्य छोड़ के मैंने लंड निकाला, वो अभी भी तना हुआ था. सुमन टाँगें उठाए लेटी रही, कोई दस मिनट तक उसने चूत से वीर्य निकलने नहीं दिया.
दोस्तो, क्या बताऊँ ? उस दिन के बाद भैया आने तक हर रोज़ सुमन मेरे से चुदवाती रही. नसीब का करना था की वो प्रेग्नेट हो गयी. घर में आनंद ही आनंद हो गया. सब ने सुमन भाभी को बधाई दी. भैया सीना तान के मुछ मरोड़ते रहे. सविता भाभी और चंपा भाभी की हालत और बिगड़ गयी, प्रेग्नेंशी के बहाने सुमन भाभी ने चुदवाने से मना कर दिया था, भैया के पास दूसरी दोनों को चोदने के सिवा कोई चारा ना था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। जिस दिन भैया सुमन भाभी को डॉकटर के पास ले आए, उसी दिन शाम वो मेरे पास आई. घबराती हुई वो बोली, ‘मंगल, मुझे डर है की सविता और चंपा को शक हो गया है हमारे बारे में.’
सुन कर मुझे पसीना आ गया. भैया जान गए तो अवश्य हम दोनो को जान से मार डालेंगें. मैंने पूछा, ‘क्या करेंगे अब ?’
‘एक ही रास्ता है - वो सोच के बोली.
मैंने पूछा - क्या रास्ता है?’
‘तुझे उन दोनो को भी चोदना पड़ेगा. चोदेगा?’
‘भाभी, तुज़े चोदने बाद दूसरी को चोदने का दिल नहीं होता. लेकिन क्या करें ? तू जो कहेगी वैसा में करूँगा.’
मैंने बाज़ी सुमन के हाथों में छोड़ दी. सुमन ने प्लान बनाया. रात को जिस भाभी को भैया चोदेंगे वो दूसरे दिन मेरे पास चली आएगी. किसी को शक ना पड़े इसलिए तीनो एक साथ मेरे पास आएंगी लेकिन मैं एक को ही चोदुंगा. थोड़े दिन बाद चंपा भाभी की बारी आई. माहवारी आए आठ दिन ही हुए थे. सुमन और सविता दूसरे कमरे में थी और चंपा मेरे कमरे में चली आई. आते ही उसने कपड़े निकलने शुरू कर दिए. मैंने कहा, ‘भाभी, ये मुझे करने दे.’ आलिनगन में लेकर मैंने फ़्रेंच किस किया तो वो तड़प उठी. समय की परवाह किए बिना मैंने उसे ख़ूब चूमा. उस का बदन ढीला पड़ गया. मैंने उसे पलंग पर लेटा दिया और होले होले सब कपड़े उतार दिए. मेरा मुँह एक निपपल पर लग गया, एक हाथ स्तन दबाने लगा, दूसरा क्लटोरिस के साथ खेलने लगा. थोड़ी ही देर में वो गरम हो गयी.
उसने ख़ुद टांगे उठाई और चौड़ी कर ली. में बीच में आ गया. एक दो बार भोस की दरार में लंड का टोपा रगड़ा तो चंपा के नितंब डोलने लगे. इतना होने पर भी उसने शर्म से अपनी आँखों पर हाथ रखे हुए थे. ज़्यादा देर किए बिना मैंने लंड पकड़ कर चूत पर टिकाया और होले से अंदर डाला. चंपा की चूत सुमन की चूत जितनी सीकुडी हुई नहीं थी लेकिन लंड पर उसकी अच्छी पकड़ थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने धीरे धक्के से चंपा को आधे घंटे तक चोदा. इसके दौरान वो दो बार झड़ी. मैंने धक्कों की रफ़्तर बढाई तो चंपा मुझ से लिपट गयी और मेरे साथ ही झड़ गई. थकी हुई वो पलंग पर लेटी रही, मैं कपड़े पहन कर खेतों मे चला गया.
दूसरे दिन सुमन अकेली आई कहने लगी ‘कल की तेरी चुदाई से चंपा बहुत ख़ुश है. अपनी बारी के लिए सविता को पंद्रह दिन राह देखनी पड़ी. आख़िर वो दिन आ भी गया. सविता को मैंने हमेशा माँ के रूप में देखा था इसलिए उस की चुदाई का ख़याल मुझे अच्छा नहीं लगता था. लेकिन दूसरा चारा कहाँ था ? हमारे अकेले होते ही सविता ने आँखें मूँद ली. मेरा मुँह स्तन पर चिपक गया. मुझे बाद में पता चला की सविता के सेक्स की चाबी उस के स्तन थे. इस तरफ़ मैंने स्तन चूसना शुरू किया तो उस तरफ़ उसकी चूत ने काम रस का फ़वारा छोड़ दिया. मेरा लंड कुछ आधा तना था और ज़्यादा अकड़ने की गुंजाइश ना थी. लंड चूत में आसानी से घुस ना सका. हाथ से पकड़ कर धकेल कर लंड चूत में फसा दिया, सविता ने चूत सिकोड़ी. ठुमका लगा कर लंड ने जवाब दिया. इस तरह का प्रेमलाप लंड और चूत के बीच होता रहा और लंड ज़्यादा से ज़्यादा अकड़ता रहा. आख़िर जब वो पूरा तन गया तब मैंने सविता के पाँव मेरे कंधे पर लिए और लंबे झटके से उसे चोदने लगा. सविता की चूत इतनी टाईट नहीं थी लेकिन संकोचन कर के लंड को दबाने का तरीका सविता अच्छी तरह से जानती थी. बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ी. मैंने भी पिचकारी छोड़ दी.
दूसरे दिन सुमन वही संदेशा लाई जो की चंपा ने भेजा था. तीनो भाभियों ने मेरी चुदाई के तरीके की सराहना की. अब तीन भाभीयों और मेरे बीच एक समझौता हुआ की कोई भी ये राज़ नहीं खोलेगा. सुमन ने भैया से चुदवाना बंद किया था लेकिन मुझ से नहीं. एक के बाद एक ऐसे मैं तीनो को चोदता रहा. भगवान कृपा से दूसरी दोनो भी प्रेग्नेट हो गयी, भैया के आनंद की सीमा ना रही. समय आने पर सुमन और सविता ने लड़कों को जन्म दिया तो चंपा ने लड़की को. भैया ने बड़ी दावत दी और सारे गाँव में मिठाई बाँटी. भाभियों की सेवा में बसंती भी आ गयी थी और हमारी रेगुलर चुदाई चल रही थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने शादी ना करने का निश्चय कर लिया. सब का संसार आनंद से चलता है लेकिन मेरे लिए एक बड़ी समस्या खड़ी हो गयी है, वैसे तो भैया सब बच्चों को बड़े प्यार से रखते है लेकिन कभी कभी वो जब उनसे मार पीट करते है तब मेरा ख़ून उबल जाता है और मुझे सहन करना मुश्किल हो जाता है दिल करता है की उस के हाथ पकड़ लूं और बोलूं, ‘रहने दो, ख़बरदार मेरे बच्चे को हाथ लगाया तो.’ ऐसा बोलने की हिम्मत अब तक मैं जुटा नहीं पाया....
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