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सेक्सी मौसी को उनकी पारलर मे चोद डाला Sexi mosi ko unki parlar me chod dala
पार्लर में चूत की चुदाई , सेक्सी मौसी को उनकी पारलर मे चोद डाला, Sexi mosi ko unki parlar me chod dala, मौसी की चुदाई, मौसी चुद गई, बेटे ने मौसी को चोद दिया, मौसी और बेटा की कामवासना, चुद्क्कड़ मौसी और सेक्सी बेटा, मौसी की चूत में बेटे का लंड, मौसी की चूत की प्यास बुझाई. मौसी की चूत में लंड डालकर किया शांत, बड़े लंड से मौसी की चूत को चोदा.
सोसायटी में नयी नयी रहने आई देसी आंटी गीता के उपर सब की नजरे गडी थी,किसी किसी के कहने के मुताबिक वह एक ब्यूटी पार्लर चलाती थी और उसकी आड़ में वह बड़े बड़े लोगो को लड़कियां सप्लाय करती थी. वैसे इस देसी आंटी के ठाठ अजीब थे, फोर व्हीलर गाडी और नौकर जैसा पति, मगर कुछ भी कहो आंटी ने अपने आप को अभी भी मेन्टेन कर के रखा था, उसकी बोडी को देख के कोई भी नहीं कहेगा की उसकी 17-18 साल की तो बेटी हैं. मेरा लंड भी इस आंटी को देख के कितनी बार टाईट हो जाता था. लेकिन उस दिन भाग्यवश इस आंटी को अपना लंड चुसाने का मौका मिल गया. और फिर उसकी कस कर चुदाई भी मार ली मैंने….वोह रविवार का दिन था….और मैं अपने छत पर डम्बलस ,मार रहा था.
सोसायटी में नयी नयी रहने आई देसी आंटी गीता के उपर सब की नजरे गडी थी,किसी किसी के कहने के मुताबिक वह एक ब्यूटी पार्लर चलाती थी और उसकी आड़ में वह बड़े बड़े लोगो को लड़कियां सप्लाय करती थी. वैसे इस देसी आंटी के ठाठ अजीब थे, फोर व्हीलर गाडी और नौकर जैसा पति, मगर कुछ भी कहो आंटी ने अपने आप को अभी भी मेन्टेन कर के रखा था, उसकी बोडी को देख के कोई भी नहीं कहेगा की उसकी 17-18 साल की तो बेटी हैं. मेरा लंड भी इस आंटी को देख के कितनी बार टाईट हो जाता था. लेकिन उस दिन भाग्यवश इस आंटी को अपना लंड चुसाने का मौका मिल गया. और फिर उसकी कस कर चुदाई भी मार ली मैंने….वोह रविवार का दिन था….और मैं अपने छत पर डम्बलस ,मार रहा था.
देसी आंटी गीता हमारे घर के तीसरे साइड वाले घर में रहेती थी और वह भी नहा के उपर अपने बाल सुखाने सुबह की हलकी हलकी धुप में आई थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैं पिछले सात साल से नियमित कसरत करता था इसलिए मेरी बोडी काफी अच्छी थी और मेरे कसिले बदन को देख के आंटी शायद मोहित हो गई, क्यूंकि मैंने चुपके से देखा की वो घड़ी घड़ी मेरी तरफ देख रही थी. मुझ से भी रहा नहीं गया और मैंने भी आंटी को देखना चालू कर दिया. हम दोनों की आँखे मिली और उसने मस्त स्माइल दे दी. मैंने ऐसी ही एक स्माइल उसे जवाब में दी. मेरी नजर उसके बूब्स पर पड़ी, वोह अपने बालो पर टॉवेल से फटके दे रही थी, लेकिन कसम से उसके बूब्स शायद अभी भी कसे हुए थे वर्ना आंटियो के चुंचे तो स्प्रिंग जैसे होते है, हिलते ही रहते है. मैं मनोमन कुछ भी कर के इसे आज झांसे में लेना चाहता था. तभी मेरी नजर सामने पड़े कोयलों पर पड़ी, छत पर नहाने का पानी गर्म करने का बम्बा लगा था और उसके पास थे कोयले. मैं गया वहाँ और एक कोयला उठा के दिवार पे अपना नंबर लिखने लगा. मुझे आशा थी की यह देसी आंटी नंबर नोट कर लेगी. दो मिनिट इ बाद आंटी निचे चली गई और मुझे लगा के वह शायद इंटरेस्टेड नहीं है….!
दोपहर तक तो मैं यह बात बिलकुल भूल चूका था, करीबन 3 बजे मेरे फोन में नए नंबर से रिंग आई और फोन उठाते ही सामने कोयल जैसा आवाज आया, “हल्लो….!”
मैंने कहा, “हाँ, हल्लो…बोलिए”
सामने वाली औरत, “बस कुछ नहीं, इतना बताने के लिए ही फोन किया था की मुझे तुम्हारा नंबर मिल गया है…!”
ओये तेरी यह तो देसी आंटी गीता….मैं खुश हो गया और बोला, “ओह आंटी थेंक यु, आपने आज ही फोन किया..आपको पता है मै आपका आशिक हूँ एक नंबर का और कब से आपके पास आने की झंखना लिए बैठा था….!”
देसी आंटी, “अच्छा…तो आओ ना रोकता कौन है तुम्हे, शिवाजी मार्ग पर मेरा ब्यूटी पार्लर है, कहो तो गाडी भेजूं लेने के लिए…?”
मैंने कहा, “नहीं आंटी मैं आ जाऊँगा बाइक से…..!”
देसी आंटी, “जल्दी आओ मैं अभी बिलकुल फ्री हूँ, ग़प लगायेंगे.”
मैं मनोमन सोच रहा था गप तेरी मा की चूत लगायेंगे अब तो तेरी चूत में लंड लगायेंगे. मैं फोरन एक टाईट टी-शर्ट और जींस पहन शिवाजी मार्ग गया, वह मुझे गीता ब्यूटी पार्लर ढूंढने में ज्यादा दीक्कत नहीं हुई. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने आंटी को रिंग लगाई और वोह बहार आई. क्या फटाका लग रही थी यार….उसने गुलाबी लिपस्टिक लगाई थी और काली हाफ स्लीव की शर्ट और निचे क्वाद्रो की पेंट. मैं मनोमन खुश हो रहा था की आज पत्ता सेट हो जाए तो लंड और जेब दोनों की कडकी दूर हो जाए. अंदर आते ही आंटी मुझे उसके केबीन में ले गई और उसने मेरे लिए थम्स अप मंगवा ली. थम्स अप आई और मैं वह पी रहा था की आंटी उठी और मेरे झांघ से अपनी झांघ साइड से लगाते हुए बोली, “ बोडी तो अच्छी बना रखी है राजा, मुझे तुम्हारे सिने की चौड़ाई बहुत अच्छी लगी “ इतना कहेते ही उसके हाथ मेरे टी-शर्ट से सिने पर फिरने लगे.
वोह बोली, “आज फ्री हो तो चलो किसी होटल में चलते है, मैं भी तूम से कुछ टिप्स ले लूँ”
कुत्ता हड्डी के लिए थोड़ी राह देखता है, मैंने देसी आंटी के स्तन पर हाथ रखकर कहा, “आंटी आप कहे तो कुँए में भी कूद जाएँगे…!”
आंटी बोली, “कुँए में तो नहीं लेकिन एक गड्डे में करुर कूदना पड़ेगा….!” उसके होंठो की लुच्ची हंसी उसकी चूत की प्यास बता रही थी. मैंने उसके चुंचे दबाये और उसका हाथ मेरे लंड के उपर आके उसकी साइज़ मापने लगा. मैंने आंटी का काम आसन करने के लिए अपनी पेंट की ज़िप खोल लंड को बहार निकाला. आंटी लंड को देख पागल सी हो गिया और उसे हाथ से हलाने लगी, मैंने उसके स्तन और जोर से दबाये और आंटी लंड को मुठ्ठी में कसने लगी, मेरे मुहं से आह निकल गया और आंटी ने ज़िप को बंध किया और कहा चलो अभी शाम की राह मुझ से नहीं देखी जाएंगी. आंटी के केबिन से बहार निकलते मेरा लंड अभी तना हुआ था, पेंट के अंदर होने के बावजूद वोह पेंट को ऊँचे किया था. ब्यूटी पार्लर की लड़कियां लंड की तरफ देख कुछ खुसपुस करने लगी.
मैं आंटी की गाडी की आगे की सिट मैं चढ़ गया और देसी आंटी ने गाड़ी एक बड़े से होटल के तरफ ली, पुरे रास्ते में कभी उसकी चूत पे हाथ रखता तो कभी उसके बूब्स दबाता. आंटी भी गियर बदलने के बाद कभी कभी मेरे लंड के गियर भी बदलती थी. होटल में शायद आंटी का कमरा बुक ही रहेता था क्यूंकि आते ही उसे काउन्टर से चाबी दे दी गई, वह मुझे ले के दुसरे मजले के एक कमरे की तरफ गई. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। रूम में आते ही उसने कड़ी लगाई और वह अपनी पेंट और शर्ट खोलने लगिया एयर बोली, “जल्दी अपना लंड निकाल मुझे उसे बहुत चुसना है…! ला तेरा तोता दे दे मुझे राजा…आज अपनी आंटी की चुदाई कर ले और उसे खुश कर दे तू फिर आंटी तेरी दासी और तेरे लंड की प्यासी….!” मैंने जैसे ही पेंट निकाली आंटी सही में उसके उपर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और लंड को चूसने लगी. उसके गले तक लंड लेने में वह बड़ी कारीगर लग रही थी क्यूंकि 7-8 इंच का लंड पूरा मुहं में लेके चूसना इतना आसन थोड़ी होता है.
देसी आंटी चुस्ती रही लंड को और मैं उसे मुहं के अंदर झटके देता रहा, आंटी चुसाई की प्यासी लगती थी क्यूंकि वह लंड को बिना बहार निकाले उसे चुस्ती ही रही और वह रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. बिच बिच में वह मेरे लंड के गोटों को भी चूस रही थी जिससे मुझे भी अब अच्छी खासी उत्तेजना चढ़ी हुई थी मैं भी इसे देसी आंटी को चोदने के लिए अब बेताब हो गया था. मैंने आंटी को हटाने के लिए मुहं से लंड एक झटके से निकाला. लंड पूरा लाल लाल हो चूका था. अब आंटी भी समझ गई की मेरा इरादा क्या है, वह अपनी पर्स फंफोसने लगी और उसमे से उसने एक कंडोम निकाला और बोली “ मेरे पति ने नसबंधी करवाई है तो यह जरुरी है वर्ना मुझे तो यह अपना दुश्मन लगता है ”
उसने मुझे कंडोम दिया और मैंने उसे अपने लंड पर पहन लिया. मैंने अपना लौड़ा आंटी की चूत में दे दिया और मैं उसे मिशनरी स्टाईल में ही चोदने लगा, उसके दोनों पाँव झांघो से उठा लिए अपने हाथो से और लंड दे दिया उसकी चूत में. यह पोजीशन ऐसे स्त्रियों के लिए पीड़ादायक होती है लेकिन यहाँ इस देसी आंटी को पीड़ा हो रही हो ऐसा मुझे 5 मिनिट की चुदाई में जरा भी नहीं लगा.उपर से यह आंटी तो गांड उठा उठा के लंड को और भी अंदर ले रही थी साथ में उसके हाथ खुद के चुन्चो और होठो पर भी चल रहे थे. मेरी हालत ख़राब हो गई इस देसी चूत को मारते मारते और मेरे पसीने छूटने लगे थे. आंटी मेरे सामने देख मुस्कुरा रही थी और मैंने इसे और जोर से चोदना चाहा, मेरी झड़प एकदम से बढ़िया और एक्स्प्रेक्स ट्रेन की स्पीड से मैं आंटी की चूत पेलने लगा. दो मिनिट और चुदाई हुई और मेरा लंड जवाब दे गया. लंड ने वीर्य छोड़ा और मैं आंटी के उपर ही लेट गया.
आंटी ने मुझे उठाया और मैंने कंडोम निकाल उसे बिन में फेंक दिया, आंटी ने फोन कर के दो ज्यूस मंगवाए. ज्यूस पिने के बाद आंटी और मैं निचे आने के लिए आ रहे थे तो रास्ते में आंटी ने मुझे 1000 के दो नोट दिए और कहाँ की वो मेरे साथ लम्बे समय तक सबंध रखना चाहती है और बदले में वह मुझे पैसे और दुसरे सारे सुख भी दे सकती है. और तो और वोह अपने पार्लर की लडकियों की जवान चूत भी कभी कभी मेरे लिए पेश कर सकती है, यह तो बड़े फायदे के डील थी इसलिए मैंने उसे तुरंत स्वीकार कर लिया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। अब हम दोनों के सबंध 2 साल से है और आंटी का नाक और कान छोड़ सभी छेद मैंने चोदे हुए है, उसके पार्लर की अनीता भी मुझ से चुद्वाती है…..!
दोस्तों आपको देसी आंटी की चुदाई की कहानी कैसी लगी हमें जरुर कमेन्ट करे. हमारे फेसबुक पेज आप यहाँ क्लिक कर के लाइक कर सकते है. तो फिर मिलेंगे और एक हसीन सेक्स स्टोरी के साथ तब तक के लिए सीरिश का बाय बाय….!
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ओये तेरी यह तो देसी आंटी गीता….मैं खुश हो गया और बोला, “ओह आंटी थेंक यु, आपने आज ही फोन किया..आपको पता है मै आपका आशिक हूँ एक नंबर का और कब से आपके पास आने की झंखना लिए बैठा था….!”
देसी आंटी, “अच्छा…तो आओ ना रोकता कौन है तुम्हे, शिवाजी मार्ग पर मेरा ब्यूटी पार्लर है, कहो तो गाडी भेजूं लेने के लिए…?”
मैंने कहा, “नहीं आंटी मैं आ जाऊँगा बाइक से…..!”
देसी आंटी, “जल्दी आओ मैं अभी बिलकुल फ्री हूँ, ग़प लगायेंगे.”
मैं मनोमन सोच रहा था गप तेरी मा की चूत लगायेंगे अब तो तेरी चूत में लंड लगायेंगे. मैं फोरन एक टाईट टी-शर्ट और जींस पहन शिवाजी मार्ग गया, वह मुझे गीता ब्यूटी पार्लर ढूंढने में ज्यादा दीक्कत नहीं हुई. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मैंने आंटी को रिंग लगाई और वोह बहार आई. क्या फटाका लग रही थी यार….उसने गुलाबी लिपस्टिक लगाई थी और काली हाफ स्लीव की शर्ट और निचे क्वाद्रो की पेंट. मैं मनोमन खुश हो रहा था की आज पत्ता सेट हो जाए तो लंड और जेब दोनों की कडकी दूर हो जाए. अंदर आते ही आंटी मुझे उसके केबीन में ले गई और उसने मेरे लिए थम्स अप मंगवा ली. थम्स अप आई और मैं वह पी रहा था की आंटी उठी और मेरे झांघ से अपनी झांघ साइड से लगाते हुए बोली, “ बोडी तो अच्छी बना रखी है राजा, मुझे तुम्हारे सिने की चौड़ाई बहुत अच्छी लगी “ इतना कहेते ही उसके हाथ मेरे टी-शर्ट से सिने पर फिरने लगे.
वोह बोली, “आज फ्री हो तो चलो किसी होटल में चलते है, मैं भी तूम से कुछ टिप्स ले लूँ”
कुत्ता हड्डी के लिए थोड़ी राह देखता है, मैंने देसी आंटी के स्तन पर हाथ रखकर कहा, “आंटी आप कहे तो कुँए में भी कूद जाएँगे…!”
आंटी बोली, “कुँए में तो नहीं लेकिन एक गड्डे में करुर कूदना पड़ेगा….!” उसके होंठो की लुच्ची हंसी उसकी चूत की प्यास बता रही थी. मैंने उसके चुंचे दबाये और उसका हाथ मेरे लंड के उपर आके उसकी साइज़ मापने लगा. मैंने आंटी का काम आसन करने के लिए अपनी पेंट की ज़िप खोल लंड को बहार निकाला. आंटी लंड को देख पागल सी हो गिया और उसे हाथ से हलाने लगी, मैंने उसके स्तन और जोर से दबाये और आंटी लंड को मुठ्ठी में कसने लगी, मेरे मुहं से आह निकल गया और आंटी ने ज़िप को बंध किया और कहा चलो अभी शाम की राह मुझ से नहीं देखी जाएंगी. आंटी के केबिन से बहार निकलते मेरा लंड अभी तना हुआ था, पेंट के अंदर होने के बावजूद वोह पेंट को ऊँचे किया था. ब्यूटी पार्लर की लड़कियां लंड की तरफ देख कुछ खुसपुस करने लगी.
मैं आंटी की गाडी की आगे की सिट मैं चढ़ गया और देसी आंटी ने गाड़ी एक बड़े से होटल के तरफ ली, पुरे रास्ते में कभी उसकी चूत पे हाथ रखता तो कभी उसके बूब्स दबाता. आंटी भी गियर बदलने के बाद कभी कभी मेरे लंड के गियर भी बदलती थी. होटल में शायद आंटी का कमरा बुक ही रहेता था क्यूंकि आते ही उसे काउन्टर से चाबी दे दी गई, वह मुझे ले के दुसरे मजले के एक कमरे की तरफ गई. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। रूम में आते ही उसने कड़ी लगाई और वह अपनी पेंट और शर्ट खोलने लगिया एयर बोली, “जल्दी अपना लंड निकाल मुझे उसे बहुत चुसना है…! ला तेरा तोता दे दे मुझे राजा…आज अपनी आंटी की चुदाई कर ले और उसे खुश कर दे तू फिर आंटी तेरी दासी और तेरे लंड की प्यासी….!” मैंने जैसे ही पेंट निकाली आंटी सही में उसके उपर भूखी शेरनी की तरह टूट पड़ी और लंड को चूसने लगी. उसके गले तक लंड लेने में वह बड़ी कारीगर लग रही थी क्यूंकि 7-8 इंच का लंड पूरा मुहं में लेके चूसना इतना आसन थोड़ी होता है.
देसी आंटी चुस्ती रही लंड को और मैं उसे मुहं के अंदर झटके देता रहा, आंटी चुसाई की प्यासी लगती थी क्यूंकि वह लंड को बिना बहार निकाले उसे चुस्ती ही रही और वह रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी. बिच बिच में वह मेरे लंड के गोटों को भी चूस रही थी जिससे मुझे भी अब अच्छी खासी उत्तेजना चढ़ी हुई थी मैं भी इसे देसी आंटी को चोदने के लिए अब बेताब हो गया था. मैंने आंटी को हटाने के लिए मुहं से लंड एक झटके से निकाला. लंड पूरा लाल लाल हो चूका था. अब आंटी भी समझ गई की मेरा इरादा क्या है, वह अपनी पर्स फंफोसने लगी और उसमे से उसने एक कंडोम निकाला और बोली “ मेरे पति ने नसबंधी करवाई है तो यह जरुरी है वर्ना मुझे तो यह अपना दुश्मन लगता है ”
उसने मुझे कंडोम दिया और मैंने उसे अपने लंड पर पहन लिया. मैंने अपना लौड़ा आंटी की चूत में दे दिया और मैं उसे मिशनरी स्टाईल में ही चोदने लगा, उसके दोनों पाँव झांघो से उठा लिए अपने हाथो से और लंड दे दिया उसकी चूत में. यह पोजीशन ऐसे स्त्रियों के लिए पीड़ादायक होती है लेकिन यहाँ इस देसी आंटी को पीड़ा हो रही हो ऐसा मुझे 5 मिनिट की चुदाई में जरा भी नहीं लगा.उपर से यह आंटी तो गांड उठा उठा के लंड को और भी अंदर ले रही थी साथ में उसके हाथ खुद के चुन्चो और होठो पर भी चल रहे थे. मेरी हालत ख़राब हो गई इस देसी चूत को मारते मारते और मेरे पसीने छूटने लगे थे. आंटी मेरे सामने देख मुस्कुरा रही थी और मैंने इसे और जोर से चोदना चाहा, मेरी झड़प एकदम से बढ़िया और एक्स्प्रेक्स ट्रेन की स्पीड से मैं आंटी की चूत पेलने लगा. दो मिनिट और चुदाई हुई और मेरा लंड जवाब दे गया. लंड ने वीर्य छोड़ा और मैं आंटी के उपर ही लेट गया.
आंटी ने मुझे उठाया और मैंने कंडोम निकाल उसे बिन में फेंक दिया, आंटी ने फोन कर के दो ज्यूस मंगवाए. ज्यूस पिने के बाद आंटी और मैं निचे आने के लिए आ रहे थे तो रास्ते में आंटी ने मुझे 1000 के दो नोट दिए और कहाँ की वो मेरे साथ लम्बे समय तक सबंध रखना चाहती है और बदले में वह मुझे पैसे और दुसरे सारे सुख भी दे सकती है. और तो और वोह अपने पार्लर की लडकियों की जवान चूत भी कभी कभी मेरे लिए पेश कर सकती है, यह तो बड़े फायदे के डील थी इसलिए मैंने उसे तुरंत स्वीकार कर लिया. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। अब हम दोनों के सबंध 2 साल से है और आंटी का नाक और कान छोड़ सभी छेद मैंने चोदे हुए है, उसके पार्लर की अनीता भी मुझ से चुद्वाती है…..!
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