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बुआ की लड़की ने चूत दिलाई - खूब भी चुदी और किराएदार को भी चुदवाया - Buaa ki ladki ki chudai
बुआ की लड़की ने चूत दिलाई - खूब भी चुदी और किराएदार को भी चुदवाया - Buaa ki ladki ki chudai , Antarvasna Sex Stories , Hindi Sex Story , Real Indian Chudai Kahani , choda chadi cudai cudi coda free of cost , Time pass Story.
यह तब की बात है जब बुआ की बड़ी लड़की की शादी थी और मैं शादी के इंतजाम के लिए एक महीना पहले चला गया था.
मेरी बुआ के घर में एक किराएदार रहते थे उनकी एक लड़की थी नाम था अमिता! वो बहुत सुन्दर थी, मैं उसे चोदना चाहता था.
जब मैंने बुआ की एक लड़की शालू को अपने मन की बात बताई कि मैं अमिता को प्यार करने लगा हूँ, तो शालू ने तभी अपने प्यार की बात बताई कि वो मन ही मन मुझे प्यार करने लगी थी और मुझे चूम लिया.
मैं भी जज्बात में बह गया और मैंने भी उसे चूम लिया.
हम दोनों पास-पास ही सोते थे. एक रात जब हम दोनों सोये हुए थे तो मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं शालू की नाइटी में हाथ डाल कर उसकी चूची दबाने लगा. पर शायद वो गहरी नींद में थी, मेरी हिम्मत बढ़ी, मैंने उसकी पेंटी के ऊपर हाथ फिराया तो पाया उसने नेपकिन लगाया हुआ है, और पता नहीं कब नींद आ गई.
सुबह जब मैंने शालू को बताया कि मैंने तेरी पेंटी पर हाथ फिराया था तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने ऐसा किया होगा.
जब मैंने उसे नेपकिन वाली बात बताई तब उसने मान लिया कि मैं सच बोल रहा हूँ.
तब मैंने उससे सेक्स पर बात करनी चालू कर दी.
अगली रात को मैंने उससे कहा- चल कुछ सेक्स हो जाये!
तो वो बोली- नहीं!
मैं- क्यों? तू तो मुझसे प्यार करती है फिर क्यों नहीं?
शालू- मैं गन्दा काम नहीं कर सकती.
मैं- गन्दा मतलब?
शालू- वो ही जो तुम चाहते हो!
मैं- चुम्मी तो दे दे!
शालू- चल ठीक है!
मैंने उसको खूब चूमा और उसकी कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ सहलाई. वो गर्म होने लगी पर शरमा रही थी. मैं उसकी शर्म दूर करने के लिए उससे बात करने लगा.
मैं- तेरा क्या नाप है?
और मेरे हाथ अपना काम कर ही रहे थे.
शालू- 32″
मैं- कभी दबवाई हैं या नहीं?
वो ही जबाब जो हर रण्डी भी देती है- नहीं!
फिर मैं अपना हाथ धीरे धीरे उसकी नाइटी में डालने लगा तो उसने मना कर दिया.
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- ऊपर से चाहे जो कर लो, पर अंदर नहीं!
मैंने पूछा- क्यों? अंदर क्यों नहीं?
तो उसने कहा- बस ऐसे ही!
मैं ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने उसे कहा- मेरा लण्ड तो पकड़ ले!
उसने पजामे के ऊपर से ही लण्ड पकड़ कर सहलाया.
मैंने कहा- हाथ तो अंदर डाल ले!
उसने मना कर दिया, मुझे बहुत गुस्सा आया पर मैं शांत रहा और अपना अपना लण्ड पजामे से बाहर निकल कर उसके हाथ में दे दिया. वो भी धीरे धीरे गर्म हो गई, मैंने मौके का फ़ायदा उठाया और उसके चूचे अंदर हाथ डालकर पकड़ लिए और प्यार से हाथ फिराने लगा.
फ़िर मैंने अपना पानी उसके पेट पर गिराया और उससे चिपक कर सो गया.
अगली रात को हम फिर चालू हो गए. वो कुछ खुल कर कर रही थी.
मैंने उसे कहा- चुम्मी लेनी है.
उसने कहा- ले लो!
मैंने कहा- नीचे की लेनी है.
वो शरमा गई और मैं उसके कपड़े उतारने लगा, उसका विरोध न के बराबर था पर उसने पेंटी और ब्रा नहीं उतारने दी और मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमना चालू कर दिया.
वो बहुत गर्म हो गई और मुझे लिटा कर मुझे नंगा करके मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आया, मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसकी चूची मुँह में ली और चूसने लगा. उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी. फिर मैंने पेंटी उतारी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो गाली बकने लगी. मेरा जोश और बढ़ गया.
शालू- बहनचोद… अ आ आह और चाट साले! तेरी माँ की चूत!
मैंने मुँह हटा कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और मैं भी गाली देने लगा.
मैं- रण्डी, साली! रखैल! तेरी चूत को चोद कर भोंसड़ा बना दूँगा.
फिर हम 69 की अवस्था में हो गए और मैं उसकी चूत और वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और कमरे में सेक्स का माहौल हो गया. वो साली पूरी रण्डी की तरह मेरे लण्ड को चूसने लगी. मेरे लण्ड का पानी उसके मुँह में ही निकल गया तो वो उलटी करने लगी.
मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके मुँह में दुबारा लण्ड दे दिया. मेरा लण्ड दुबारा खड़ा हो गया तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के ऊपर रगड़ना चालू किया पर उसने मना कर दिया- कुछ भी कर लो पर मुझे मत चोदो! मैं नहीं चुदना चाहती.
पर मैंने जबरदस्ती उसकी चूत में लण्ड डाल दिया. वो रोने लगी.
मैंने कहा- बहन की लौड़ी, क्यों रो रही है? आज तो तेरी माँ चोद कर ही हटूँगा.
वो रोती ही रही फिर उसे भी मजा आने लगा और वो अपने हाथ मेरी पीठ पर चलाने लगी और बोलने लगी- फाड़ दे मेरी चूत को! भोंसड़ी के! बड़ा तड़पाया है इस चूत ने आज तक! आ… आह्ह्ह ओह्ह्ह… मजे आ गया.
मेरा निकलने वाला था तो मैंने पूछा- किधर निकालूँ?
उसने कहा- बाहर निकालना!
मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा और अपना पानी उसकी झांटोँ पर डाल दिया और हम नंगे ही चिपक कर लेट गए.
मैंने पूछा- मजा आया?
तो वो बोली- हाँ!
अब तो रोज की चुदाई पक्की थी पर मेरा शिकार तो और कोई थी.
असल में शालू तो बस एक काम चलाऊ चीज थी, मुझे तो अमिता को चोदना था.
एक रात शालू को चोदते समय मैंने शालू से कहा- मुझे अमिता की चूत मारनी है!
तो वो नाराज हो गई और बोली- उस रण्डी की चूत क्या मेरी से ज्यादा अच्छी है?
मैंने कहा- नहीं यार! चल उसे नंगी तो दिखवा दे!
तो वो बोली- नहीं!
मैं बोला- मैं तेरा पति नहीं हूँ, न ही हो सकता हूँ, यह तू भी जानती है. तूने भी तो लण्ड के मज़े लेने को ही मेरे से अपनी चूत चुदवाई है तो फिर मुझे क्यों नहीं अमिता की चूत दिला सकती है तू?
वो बोली- नहीं!
फिर मेरे जिद करने पर वो राज़ी हो गई पर बोली- मेरी चूत भी मारनी होगी! कहीं उस रण्डी के चक्कर में मेरी चूत को ही भूल जाये?
मैंने कहा- नहीं मेरी जान! तेरी चूत को कैसे भूल सकता हूँ मैं?
तो अगली रात उसने अमिता को भी साथ में सुला लिया और अब हम तीनों साथ में थे. एक तरफ़ मैं, बीच में शालू और दूसरी तरफ़ अमिता!
थोड़ी देर बाद मैं सोने का नाटक करने लगा और शालू अमिता की चूची से खेलने लगी और अमिता शालू की चूचियों से!
शालू ने अमिता से कहा- यार, अगर लण्ड मिल गए तो मजा आ जाये!
अमिता बोली- अपने भाई को पटा ले तो लण्ड मिल जायेगा.
मैं सोने का नाटक करते हुए सब सुन रहा था, मेरा लण्ड तूफान की तरह हिल रहा था और मैं अपने लण्ड को शालू की गाण्ड पर रगड़ रहा था पर इस तरह कि अमिता को पता न चले.
फिर शालू ने अमिता से कहा- अगर यह तेरे साथ सेक्स करे तो तू करेगी या नहीं?
उसने कहा- हाँ करुँगी.
क्योंकि वो शालू के हाथों से गर्म हो गई थी.
अमिता ने कमीज-पजामा पहना था, शालू ने उसके कपड़े उतार दिए और ब्रा और पेंटी ही छोड़ी उसके बदन पर!
अमिता ने शालू को नंगी कर दिया!
तब शालू ने मुझ से कहा- मेरे शेर, खड़ा हो! देख तेरा शिकार पानी छोड़ रहा है.
मैं खड़ा हुआ तो अमिता शर्माने लगी और अपने ऊपर चादर डाल ली.
शालू बोली- अभी तो बहुत उछल उछल कर लण्ड मांग रही थी और अब छिप रही है?
अमिता बोली- तुझे अपने भाई के सामने नंगी होने में शर्म नहीं आ रही क्या?
तो शालू बोली- मैं तो इससे चुद भी चुकी हूँ और इसकी इच्छा तुझे चोदने की है तो इसलिए आज की रात तुझे अपने साथ सुलाया है.
अब अमि़ता की भी शर्म कम होने लगी और शालू मेरे लण्ड को मसलने लगी.
थोड़ी देर बाद अमिता बिल्कुल बेशर्म हो गई और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं सीधा लेट गया और शालू अपनी चूत मेरे मुँह पर रख कर बैठ गई. अब मैंने अमिता की पेंटी और ब्रा खोल दी तो अमिता मादरजात नंगी हो गई. क्या रूप था! संतरे जैसी चूचियाँ! गोरा बदन! गोल जांघें! और उनके बीच में सुनहरी छोटी झांटों वाली चूत! यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं.
मैं तो देख कर ही पागल हो गया, मैंने अमिता के होंठों को चूम लिया और उनका रस पीने लगा.
फिर मैं धीरे धीरे उसकी पतली गर्दन को चूमने लगा. वो अन्तर्वासना में पागल होने लगी. फिर मैं उसकी चूची के अंगूर को चूसने लगा और शालू मेरे लण्ड को मुँह लेकर अपने मुँह को चुदवा रही थी.
सोचो दोस्तो, कैसा माहौल होगा- दो लड़कियाँ और एक लड़का, एक उसकी बहन और एक जिसे वो चोदना चाहता हो!
फिर मैंने अमिता की दूसरी चूची चूसी. फिर मैं निचे हुआ और अमिता की नाभि पर पहुँच गया. नाभि को जीभ से चाटने के बाद मैंने अमिता की चूत चाटी. अमिता की चूत चाटने के कारण उसकी चूत का दाना खड़ा हो गया और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी. मैंने उसका पूरा नमकीन पानी चाट कर साफ किया तब अमिता कहने लगी- क्यों तड़पा रहे हो? अब मुझे चोद दो!
तो मैंने शालू से कहा- इसके मुँह पर अपनी चूत रख दो.
तभी शालू अमिता के मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठ गई और अमिता उसकी झांटों वाली गुलाबी चूत को चाटने लगी. मैंने अपना लण्ड का सुपारा अमिता की चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा, चूत चिकनी होने की वजह से लण्ड एक ही बार में आधा अंदर चला गया और अमिता के मुँह पर शालू की चूत होने की वजह से उसकी चीख मुँह में ही दब कर रह गई.
मैंने धक्के लगाने शुरु किए और अब लण्ड प्यार से अंदर-बाहर चल रहा था और कमरे में मेरी, अमिता और शालू की सिसकारियाँ गूंज रही थी.
तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी.
मैंने शालू से कहा- तेरी तो मैं गाण्ड मारूँगा!
वो कहने लगी- कुछ तो मार मेरा भी!
फिर मैंने शालू की गाण्ड पर थूक लगा कर लण्ड अंदर कर दिया और शालू बोलने लगी- बहनचोद! मेरी गाण्ड फाड़ डाली! आह ओ ओ ओ ओह निकाल बहार मादरचोद!
तब अमिता बोली- साली रखैल! अब पता चला कैसा दर्द होता है?
अमिता मेरे लण्ड और शालू की गाण्ड को चाटने लगी.
मेरा निकलने वाला था, मैंने कहा- मेरा पानी कौन पिएगी?
तो अमिता बोली- मेरे मुँह में डाल दो.
फिर मैं खड़ा हो गया और अमिता नीचे बैठ गई और लण्ड चूसने लगी. मेरा सुपारा उसके मुँह में था. फिर मैं उसके मुँह को चोदने लगा और थोड़ी देर में मेरा सारा पानी अमिता के मुँह में गिर गया और सारा पानी वो चाट गई जैसे रसमलाई खा रही हो.
अब मैंने अमिता की चूत देखी तो पाया कि चूत सूज गई थी.
फिर शालू ने कहा- मेरी चूत क्या तेरा बाप मारेगा?
फिर एक बार शालू की चूत मार कर हम तीनों नंगे ही सो गए.
अब अमिता और शालू मेरी रखैल बन गई, जब भी मौका मिलता, मैं उन दोनों को चोद देता था. अब हमारी जिन्दगी अच्छी चल रही थी.
यह तब की बात है जब बुआ की बड़ी लड़की की शादी थी और मैं शादी के इंतजाम के लिए एक महीना पहले चला गया था.
मेरी बुआ के घर में एक किराएदार रहते थे उनकी एक लड़की थी नाम था अमिता! वो बहुत सुन्दर थी, मैं उसे चोदना चाहता था.
जब मैंने बुआ की एक लड़की शालू को अपने मन की बात बताई कि मैं अमिता को प्यार करने लगा हूँ, तो शालू ने तभी अपने प्यार की बात बताई कि वो मन ही मन मुझे प्यार करने लगी थी और मुझे चूम लिया.
मैं भी जज्बात में बह गया और मैंने भी उसे चूम लिया.
हम दोनों पास-पास ही सोते थे. एक रात जब हम दोनों सोये हुए थे तो मुझे नींद नहीं आ रही थी और मैं शालू की नाइटी में हाथ डाल कर उसकी चूची दबाने लगा. पर शायद वो गहरी नींद में थी, मेरी हिम्मत बढ़ी, मैंने उसकी पेंटी के ऊपर हाथ फिराया तो पाया उसने नेपकिन लगाया हुआ है, और पता नहीं कब नींद आ गई.
सुबह जब मैंने शालू को बताया कि मैंने तेरी पेंटी पर हाथ फिराया था तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने ऐसा किया होगा.
जब मैंने उसे नेपकिन वाली बात बताई तब उसने मान लिया कि मैं सच बोल रहा हूँ.
तब मैंने उससे सेक्स पर बात करनी चालू कर दी.
अगली रात को मैंने उससे कहा- चल कुछ सेक्स हो जाये!
तो वो बोली- नहीं!
मैं- क्यों? तू तो मुझसे प्यार करती है फिर क्यों नहीं?
शालू- मैं गन्दा काम नहीं कर सकती.
मैं- गन्दा मतलब?
शालू- वो ही जो तुम चाहते हो!
मैं- चुम्मी तो दे दे!
शालू- चल ठीक है!
मैंने उसको खूब चूमा और उसकी कपड़ों के ऊपर से ही चूचियाँ सहलाई. वो गर्म होने लगी पर शरमा रही थी. मैं उसकी शर्म दूर करने के लिए उससे बात करने लगा.
मैं- तेरा क्या नाप है?
और मेरे हाथ अपना काम कर ही रहे थे.
शालू- 32″
मैं- कभी दबवाई हैं या नहीं?
वो ही जबाब जो हर रण्डी भी देती है- नहीं!
फिर मैं अपना हाथ धीरे धीरे उसकी नाइटी में डालने लगा तो उसने मना कर दिया.
मैंने कहा- क्यों?
उसने कहा- ऊपर से चाहे जो कर लो, पर अंदर नहीं!
मैंने पूछा- क्यों? अंदर क्यों नहीं?
तो उसने कहा- बस ऐसे ही!
मैं ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराता रहा पर मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने उसे कहा- मेरा लण्ड तो पकड़ ले!
उसने पजामे के ऊपर से ही लण्ड पकड़ कर सहलाया.
मैंने कहा- हाथ तो अंदर डाल ले!
उसने मना कर दिया, मुझे बहुत गुस्सा आया पर मैं शांत रहा और अपना अपना लण्ड पजामे से बाहर निकल कर उसके हाथ में दे दिया. वो भी धीरे धीरे गर्म हो गई, मैंने मौके का फ़ायदा उठाया और उसके चूचे अंदर हाथ डालकर पकड़ लिए और प्यार से हाथ फिराने लगा.
फ़िर मैंने अपना पानी उसके पेट पर गिराया और उससे चिपक कर सो गया.
अगली रात को हम फिर चालू हो गए. वो कुछ खुल कर कर रही थी.
मैंने उसे कहा- चुम्मी लेनी है.
उसने कहा- ले लो!
मैंने कहा- नीचे की लेनी है.
वो शरमा गई और मैं उसके कपड़े उतारने लगा, उसका विरोध न के बराबर था पर उसने पेंटी और ब्रा नहीं उतारने दी और मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमना चालू कर दिया.
वो बहुत गर्म हो गई और मुझे लिटा कर मुझे नंगा करके मेरा लण्ड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी.
मुझे बहुत मजा आया, मैंने उसकी ब्रा उतारी और उसकी चूची मुँह में ली और चूसने लगा. उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी. फिर मैंने पेंटी उतारी और उसकी चूत को चाटने लगा. वो गाली बकने लगी. मेरा जोश और बढ़ गया.
शालू- बहनचोद… अ आ आह और चाट साले! तेरी माँ की चूत!
मैंने मुँह हटा कर उसकी चूत में उंगली डाल दी और मैं भी गाली देने लगा.
मैं- रण्डी, साली! रखैल! तेरी चूत को चोद कर भोंसड़ा बना दूँगा.
फिर हम 69 की अवस्था में हो गए और मैं उसकी चूत और वो मेरे लण्ड को चूसने लगी और कमरे में सेक्स का माहौल हो गया. वो साली पूरी रण्डी की तरह मेरे लण्ड को चूसने लगी. मेरे लण्ड का पानी उसके मुँह में ही निकल गया तो वो उलटी करने लगी.
मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके मुँह में दुबारा लण्ड दे दिया. मेरा लण्ड दुबारा खड़ा हो गया तो मैंने अपना लण्ड उसकी चूत के ऊपर रगड़ना चालू किया पर उसने मना कर दिया- कुछ भी कर लो पर मुझे मत चोदो! मैं नहीं चुदना चाहती.
पर मैंने जबरदस्ती उसकी चूत में लण्ड डाल दिया. वो रोने लगी.
मैंने कहा- बहन की लौड़ी, क्यों रो रही है? आज तो तेरी माँ चोद कर ही हटूँगा.
वो रोती ही रही फिर उसे भी मजा आने लगा और वो अपने हाथ मेरी पीठ पर चलाने लगी और बोलने लगी- फाड़ दे मेरी चूत को! भोंसड़ी के! बड़ा तड़पाया है इस चूत ने आज तक! आ… आह्ह्ह ओह्ह्ह… मजे आ गया.
मेरा निकलने वाला था तो मैंने पूछा- किधर निकालूँ?
उसने कहा- बाहर निकालना!
मैंने अपना लण्ड बाहर खींचा और अपना पानी उसकी झांटोँ पर डाल दिया और हम नंगे ही चिपक कर लेट गए.
मैंने पूछा- मजा आया?
तो वो बोली- हाँ!
अब तो रोज की चुदाई पक्की थी पर मेरा शिकार तो और कोई थी.
असल में शालू तो बस एक काम चलाऊ चीज थी, मुझे तो अमिता को चोदना था.
एक रात शालू को चोदते समय मैंने शालू से कहा- मुझे अमिता की चूत मारनी है!
तो वो नाराज हो गई और बोली- उस रण्डी की चूत क्या मेरी से ज्यादा अच्छी है?
मैंने कहा- नहीं यार! चल उसे नंगी तो दिखवा दे!
तो वो बोली- नहीं!
मैं बोला- मैं तेरा पति नहीं हूँ, न ही हो सकता हूँ, यह तू भी जानती है. तूने भी तो लण्ड के मज़े लेने को ही मेरे से अपनी चूत चुदवाई है तो फिर मुझे क्यों नहीं अमिता की चूत दिला सकती है तू?
वो बोली- नहीं!
फिर मेरे जिद करने पर वो राज़ी हो गई पर बोली- मेरी चूत भी मारनी होगी! कहीं उस रण्डी के चक्कर में मेरी चूत को ही भूल जाये?
मैंने कहा- नहीं मेरी जान! तेरी चूत को कैसे भूल सकता हूँ मैं?
तो अगली रात उसने अमिता को भी साथ में सुला लिया और अब हम तीनों साथ में थे. एक तरफ़ मैं, बीच में शालू और दूसरी तरफ़ अमिता!
थोड़ी देर बाद मैं सोने का नाटक करने लगा और शालू अमिता की चूची से खेलने लगी और अमिता शालू की चूचियों से!
शालू ने अमिता से कहा- यार, अगर लण्ड मिल गए तो मजा आ जाये!
अमिता बोली- अपने भाई को पटा ले तो लण्ड मिल जायेगा.
मैं सोने का नाटक करते हुए सब सुन रहा था, मेरा लण्ड तूफान की तरह हिल रहा था और मैं अपने लण्ड को शालू की गाण्ड पर रगड़ रहा था पर इस तरह कि अमिता को पता न चले.
फिर शालू ने अमिता से कहा- अगर यह तेरे साथ सेक्स करे तो तू करेगी या नहीं?
उसने कहा- हाँ करुँगी.
क्योंकि वो शालू के हाथों से गर्म हो गई थी.
अमिता ने कमीज-पजामा पहना था, शालू ने उसके कपड़े उतार दिए और ब्रा और पेंटी ही छोड़ी उसके बदन पर!
अमिता ने शालू को नंगी कर दिया!
तब शालू ने मुझ से कहा- मेरे शेर, खड़ा हो! देख तेरा शिकार पानी छोड़ रहा है.
मैं खड़ा हुआ तो अमिता शर्माने लगी और अपने ऊपर चादर डाल ली.
शालू बोली- अभी तो बहुत उछल उछल कर लण्ड मांग रही थी और अब छिप रही है?
अमिता बोली- तुझे अपने भाई के सामने नंगी होने में शर्म नहीं आ रही क्या?
तो शालू बोली- मैं तो इससे चुद भी चुकी हूँ और इसकी इच्छा तुझे चोदने की है तो इसलिए आज की रात तुझे अपने साथ सुलाया है.
अब अमि़ता की भी शर्म कम होने लगी और शालू मेरे लण्ड को मसलने लगी.
थोड़ी देर बाद अमिता बिल्कुल बेशर्म हो गई और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं सीधा लेट गया और शालू अपनी चूत मेरे मुँह पर रख कर बैठ गई. अब मैंने अमिता की पेंटी और ब्रा खोल दी तो अमिता मादरजात नंगी हो गई. क्या रूप था! संतरे जैसी चूचियाँ! गोरा बदन! गोल जांघें! और उनके बीच में सुनहरी छोटी झांटों वाली चूत! यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं.
मैं तो देख कर ही पागल हो गया, मैंने अमिता के होंठों को चूम लिया और उनका रस पीने लगा.
फिर मैं धीरे धीरे उसकी पतली गर्दन को चूमने लगा. वो अन्तर्वासना में पागल होने लगी. फिर मैं उसकी चूची के अंगूर को चूसने लगा और शालू मेरे लण्ड को मुँह लेकर अपने मुँह को चुदवा रही थी.
सोचो दोस्तो, कैसा माहौल होगा- दो लड़कियाँ और एक लड़का, एक उसकी बहन और एक जिसे वो चोदना चाहता हो!
फिर मैंने अमिता की दूसरी चूची चूसी. फिर मैं निचे हुआ और अमिता की नाभि पर पहुँच गया. नाभि को जीभ से चाटने के बाद मैंने अमिता की चूत चाटी. अमिता की चूत चाटने के कारण उसकी चूत का दाना खड़ा हो गया और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी. मैंने उसका पूरा नमकीन पानी चाट कर साफ किया तब अमिता कहने लगी- क्यों तड़पा रहे हो? अब मुझे चोद दो!
तो मैंने शालू से कहा- इसके मुँह पर अपनी चूत रख दो.
तभी शालू अमिता के मुँह पर अपनी चूत रख कर बैठ गई और अमिता उसकी झांटों वाली गुलाबी चूत को चाटने लगी. मैंने अपना लण्ड का सुपारा अमिता की चूत पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा, चूत चिकनी होने की वजह से लण्ड एक ही बार में आधा अंदर चला गया और अमिता के मुँह पर शालू की चूत होने की वजह से उसकी चीख मुँह में ही दब कर रह गई.
मैंने धक्के लगाने शुरु किए और अब लण्ड प्यार से अंदर-बाहर चल रहा था और कमरे में मेरी, अमिता और शालू की सिसकारियाँ गूंज रही थी.
तभी मैंने अमिता को खड़ा किया और घोड़ी बना कर पीछे से उसकी चूत मारने लगा और शालू भी अब लण्ड मांगने लगी.
मैंने शालू से कहा- तेरी तो मैं गाण्ड मारूँगा!
वो कहने लगी- कुछ तो मार मेरा भी!
फिर मैंने शालू की गाण्ड पर थूक लगा कर लण्ड अंदर कर दिया और शालू बोलने लगी- बहनचोद! मेरी गाण्ड फाड़ डाली! आह ओ ओ ओ ओह निकाल बहार मादरचोद!
तब अमिता बोली- साली रखैल! अब पता चला कैसा दर्द होता है?
अमिता मेरे लण्ड और शालू की गाण्ड को चाटने लगी.
मेरा निकलने वाला था, मैंने कहा- मेरा पानी कौन पिएगी?
तो अमिता बोली- मेरे मुँह में डाल दो.
फिर मैं खड़ा हो गया और अमिता नीचे बैठ गई और लण्ड चूसने लगी. मेरा सुपारा उसके मुँह में था. फिर मैं उसके मुँह को चोदने लगा और थोड़ी देर में मेरा सारा पानी अमिता के मुँह में गिर गया और सारा पानी वो चाट गई जैसे रसमलाई खा रही हो.
अब मैंने अमिता की चूत देखी तो पाया कि चूत सूज गई थी.
फिर शालू ने कहा- मेरी चूत क्या तेरा बाप मारेगा?
फिर एक बार शालू की चूत मार कर हम तीनों नंगे ही सो गए.
अब अमिता और शालू मेरी रखैल बन गई, जब भी मौका मिलता, मैं उन दोनों को चोद देता था. अब हमारी जिन्दगी अच्छी चल रही थी.
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