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आज मुझे अपना लण्ड दिखा दो - Aaj mujhe apna lund dikha do
आज मुझे अपना लण्ड दिखा दो - Aaj mujhe apna lund dikha do , चूत एक लंड अनेक , लंड पैंट से बाहर निकाल कर मुझे दिखाया , नंगा बदन दिखा कर चुदाई , अपना लंड तुम्हारे मुँह में , लंड खड़ा करो चुत में डाल रही हु , मैंने बहुत बार सेक्स किया , भाभी को मेरा मोटा और लम्बा लंड बहुत पसंद है.
यार सच बताऊँ मैं उस दिन कमरे में अकेली बैठी थी। इतने में मेरा जीजू आ गया। मैं भी कुछ मूड में थी। मैं बोली जीजू भोसड़ी के आज मुझे अपना लण्ड दिखा दो। बहुत दिनों से इच्छा हो रही है की मैं तेरा लण्ड देखूं। आज घर में कोई नहीं है। आज मौक़ा है। तुम मुझे अपना लण्ड पकड़ा दो प्लीज। उसने मुझे गले से लगा लिया और मेरी चूंचियां मसलने लगा। मैंने कहा मादर चोद मेरी चूंचियां बाद में मसल लेना। मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ लेकिन मुझे लण्ड पकड़ाओ जल्दी से। मैं जाने कितने दिनों से तेरे लण्ड के लिए तरस रही हूँ ? तुम एक लड़की की छोटी सी तमन्ना नहीं पूरी कर सकते ? तू माँ का लौड़ा मर्द है की बीच वाला ? जल्दी दिखा नहीं तो मैं सबसे कह दूँगी की जीजू के नीचे लण्ड नहीं है चूत है चूत ? वह लड़का नहीं है बल्कि एक लड़की है।
जब मैंने उसे अच्छी तरह ललकारा तो वह बहन चोद अपनी लुंगी खोल कर खड़ा हो गया मेरे आगे और खड़ा हो गया उसका भोसड़ी का लण्ड ? लण्ड देख कर मैं दंग रह गयी ? साला इतना लंबा तगड़ा लण्ड ? मैंने सुना है की मर्दों की बलिष्ठ भुजाएं होतीं हैं लेकिन यह कभी नहीं सुना की किसी का लण्ड भी बलिष्ठ होता है ? और इतना बलिष्ठ होता है ? मैंने तो अपनी आँखों से देख रही हूँ। लण्ड पकड़ा तो वह मेरे एक हाथ में नहीं आया तब मैंने दोनों हाथों से उसे पकड़ा और बोली हाय जीजू क्या तेरा लण्ड जिम जाता है क्या ? इतना मोटा तगड़ा मस्त भुजंग लण्ड तो मैंने कभी किसी ब्लू फिल्म में भी नहीं देखा ? भोसड़ी के इतना बढ़िया तूने अभी तक मुझसे छुपा कर क्यों रखा ? तेरी माँ की चूत साले तेरी बहन की बुर ? अब मैं इसे अपने हाथ से जाने नहीं दूँगी ? अब मैं करूंगी इसका खेल और निकालूंगी इसका तेल.
मैं कविता हूँ दोस्तों, २६ साल की एक शादी शुदा तीखे नैन नक़्श वाली लड़की। गोरी चिट्टी, लम्बे बालों वाली और बड़ी बड़ी आँखों वाली एक शोख़ और चंचल लड़की। बड़ी बड़ी सुडौल चूंचियों वाली, गुदांज़ बाँहों और पतली कमर वाली लड़की। मोटी मोटी जाँघों वाली, बड़े बड़े चूतड़ों वाली और एक मस्त मटकती गांड वाली लड़की। मैं चूत के बारे में आपको क्या बताऊँ ? वो तो आपको ऊपर से दिखती ही नहीं। उसका अंदाज़ा आप चूंचियों की तरह लगा भी नहीं सकते ? बस इतना समझ लो की बिलकुल मक्खन मलाई की तरह मुलायम और रबड़ की तरह टाईट है मेरी चूत। बुर चोदी बड़ी सेक्सी है मेरी चूत। मैं चलती हूँ तो आगे से मेरी चूंचियां उछलती है और पीछे से मेरे चूतड़ मटकते हैं जिन्हे देख कर लोगों के लण्ड में हलचल होने लगती है। मैं अपनी तिरछी निगाहों से देखती जाती हूँ की कौन किस तरह से घूर घूर कर मुझे देखता है और कौन मुझे देखकर अपना लण्ड सहलाने लगता है। मेरी शादी अभी दो साल पहले ही हुई है। सच बताऊँ आपको दोस्तों, मुझे लण्ड पकड़ने का और चुदवाने के बड़ा शौक है ? मैं हर तरह से लण्ड पकड़ती हूँ, अपने हाथों से, अपने मुंह से, होठों से, दांतों से. अपनी चूंचियों से, अपनी चूत से और अपनी गांड से भी ? मैं लण्ड के पोर पोर का मज़ा लूटती हूँ। लण्ड के सुपाड़े को तो मैं दिलो जान से प्यार करती हूँ। लण्ड किसी का भी हो वह मेरे दिल का टुकड़ा है।
आज मैं घर में अकेली हूँ तो जीजू आ गया । जीजू का नाम शेखर है। वह अच्छे कद काठी वाला मर्द है। मैं बहुत दिनों से घात लगाये बैठी थी की किसी दिन इसका लण्ड पकड़ूंगी ? इत्तिफ़ाक़ से आज मौक़ा मिल गया तो मैंने लपक लिया। जैसे ही मैंने उसे ललकारा तो उसका लौड़ा टन्न से खड़ा हो गया । और यही मैं चाहती थी। आज पहली बार जीजू को नंगा देखा और आज ही पहली बार उसका टन टनाता हुआ खड़ा लण्ड देख रही हूँ। लण्ड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गयी और चूत के अंदर तो आग की चिंगारियां सुलगने लगीं। मैं टूट पड़ी लण्ड पर। उसे चूमने लगी, चारों तरफ घुमा घुमा कर देखने लगी लण्ड और पड़े प्यार से पुचकारने लगी लण्ड। मैं मस्ती में डूबती जा रही थी। एक हाथ में लण्ड और दूसरे से पेल्हड़ थाम कर मैं उसे ऊपर नीचे करने लगी। उसका सुपाड़ा बार बार खुलता और बंद होता, जिसे मैं उसे देख देख कर मज़ा लेने लगी।
अचानक मेरी जबान बाहर अपने आप निकल आई और मैं प्यार लण्ड चाटने लगी। इतने में जीजू बोला अरे कविता तूने तो मुझे नंगा कर दिया पर तू तो अभी भी कपड़े पहने हुए बैठी है। मैं उठी और बोली कपड़ों की माँ की चूत ? लो मैं भी आपकी तरह नंगी हो जाती हूँ। मैंने फ़ौरन अपने सारे पकड़े खोल डाले। अब मैं मादर चोद बिलकुल नंगी नगी लण्ड चाटने और चूसने में जुट गयी। मुझे नंगी देख कर लण्ड साला तन कर आसमान देखने लगा। मैंने जीजू को पलंग पर चिट लिटा दिया और मैं उसके उोार चढ़ बैठी। उसके मुंह पर अपनी चूत रख दी । वह मेरी बिना झांट वाली चिकनी चूत चाटने लगा और मैं झुक कर उसका लण्ड चाटने लगी। मुझे दुनिया की बिलकुल फिक्र नहीं थी मैं तो बस लण्ड के प्यार में डूबी हुई थी। मैं बीच बीच में पेल्हड़ भी चाटने लगी। पेल्हड़ चाटने और चूमने का अपना एक अलग ही मज़ा है। यह मैंने ब्लू फिल्मो से सीखा है। सच बात तो यह है की मुझे ब्लू फिल्मों ने बहुत कुछ सिखाया है। इसिलए मैं लण्ड का पूरा मज़ा लूट लेती हूँ।
मैं जब अकेली होती हूँ तो सिर्फ दो काम करती हूँ। या तो मैं नेट पर ब्लू फिल्म देखती हूँ या फिर 'Sex' की कहानियां पढ़ती हूँ। दोनों ही काम एकदम नंगी होकर करती हूँ। ब्लू फिल्म देखते समय कपड़े अपने आप उतर जातें हैं। 'Sex' कहानियां तो मैं कपड़े उतार कर नंगी नंगी ही पढ़ती हूँ क्योंकि मुझे मालूम है कहानी शुरू होते ही मुझे नंगी होना ही पड़ेगा और चूंची और चूत सहलाना ही पड़ेगा। बल्कि चूत में ऊँगली डालनी ही पड़ेगी। इतनी गरम कहानियां मुझे और कहीं नहीं दिखाई पड़ती ? बेड के बगल में एक सोफ़ा पड़ा था। मैंने जीजू को थोड़ी देर बाद सोफ़ा पर बैठा दिया और मैं नीचे उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनो के बल बैठ गयी। मैने लण्ड अपनी चूंचियों के बीच घुसेड़ा और चूंची चुदवाने लगी। या यूँ समझिए की मैं चूंचियों से लण्ड का मुठ्ठ मारने लगी । सुपाड़ा जब ऊपर आता तो मैं उसे जबान निकाल चाट लेती।
मेरी बड़ी बड़ी चूंचियों के बीच लौड़ा पूरा घुस जाता था। मैं इस तरह पहले भी कई लण्ड चोद चुकी हूँ। मेरी मस्ती और सूझी तो मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया और उसे जल्दी जल्दी ऊपर नीचे लगी। वह बोला हाय कविता मैं तो निकल जाऊंगा ? मैंने कहा तो निकला जा न भोसड़ी के मेरे मुंह में ? मैं पहले तेरा लण्ड पियूंगी फिर बाद में चुदवाऊँगी। मेरा मन लण्ड छोड़ने का हो ही नहीं रहा था। मैं तो लण्ड का तेल निकालने में लग गई। मैं लण्ड का स्वाद लेना चाहती थी। इसलिए मैं एक हाथ से पेल्हड़ साधे हुए दूसरे हाथ से लण्ड मुठ्ठी में पकड़ कर दनादन सड़का मारने लगी। खचाखच फ़चाफ़च सटासट सड़का लगाने में मन लगाने लगी जीजू भी ऊँ, हूँ, ओ, ओहो, ए, हाय, चूँ, करने लगा फिर बोला वाओ, वाह और तेज करो, जल्दी जल्दी मारो सड़का। और तेज करो,,, हां,,, हां क्या बात है,,,तू तो भोसड़ी की सड़का अच्छा मार लेती है।
तेरी बहन की बुर, तू बड़ी खूबसूरत है, कविता ? तेरे हाथों में जादू है ? और मारो और मारो ? मैंने कहा भोसड़ी के मैं तेरे लण्ड की माँ चोद दूँगी। निकल जा मादर चोद जल्दी से निकल मेरे मुंह में ? मेरे मुंह में मारो पिचकारी मेरे लण्ड राजा ? बस फिर क्या जीजू के लण्ड ने उगल दिया पूरा वीर्य मेरे मुंह में और मैं पीने लगी लण्ड ? चाटने लगी लण्ड और लण्ड का सुपाड़ा ? खलास कर दिया मादर चोद लण्ड को ? मैंने कहा वाओ,बड़ा स्वादिस्ट है तेरा लण्ड जीजू। बड़ा मज़ा आया। अब मैं दूसरी पारी में लण्ड अपनी बुर में पेलूँगी और धकाधक चुदवाऊँगी। चुदाई के बाद हम दोनों बाथ रूम गए और नहा धोकर वापस आ गए। मगर मैंने कोई कपड़ा नहीं पहना और जीजू ने भी नहीं। हम दोनों नंगे नंगे ही रहे।
इतने में डोर बेल बजी। मैंने एक चादर लपेटा और दरवाजा खोल दिया। मैंने देखा की सामने मेरा देवर गोपी खड़ा है। मैंने उस अंदर बैठाया। मैं उससे बातें करने लगी।
मैंने कहा हां गोपी जब तू आया तब मैं जीजू के लण्ड का सड़का मार कर उसका लण्ड पी रही थी। मैने उससे कहा की मैं बाद में चुदवाऊँगी ? बस तब तक तुम आ गए। वह बोला तुम अब अपने जीजू से चुदवा लो। लेकिन मैं क्या करूंगा भाभी ? मेरे मुंह से निकला की तुम मेरी गांड मारना उसके बाद तुम चोदना और जीजू गांड मारेगा। मतलब यह की तुम दोनों मिलकर चोदो मुझे।
फिर मैं गोपी का लण्ड पकड़े पकड़े अंदर कमरे में चली गयी। मेरा जीजू गोपी को जानता था । वह बोला वाओ, गोपी तुम तो शायद पहले से ही अपनी भाभी की बुर चोद रहे हो। वह बोला नहीं भाई साहेब। बुर चोदना तो दूर अभी तक तो आईने भाभी को लण्ड भी नहीं कपड़ाया था मैंने। आज पहली बार भाभी ने मेरा लण्ड पकड़ा है। मुझे मालूम हुआ की वह आपका भी लण्ड पकड़ चुकी यही तो मैंने कहा फिर मुझे किस बात की शर्म ? चलो मैं तेरे जीजू से मिलता हूँ। इसलिए मैं चला आया। जीजू ने कहा तेरी भाभी तेरा लण्ड पकडे पकड़े आई है इसका मतलब वह तुमसे मेरे सामने चुदवाना चाहती है तो फिर तुम चोदो इसे मैं बैठ कर देखूँगा ? मैंने कहा देख माँ का लौड़ा जीजू मैंने तुझे अपनी झांटे उखाड़ने के लिए नहीं रोका है, बुर चोदने के लिए रोका है, भोसड़े के ? तुम मेरी बुर चोदो, जीजू और मेरा देवर मेरी गांड में घुसेड़ेगा लण्ड ? जी हां मैं बुर भी चुदाऊंगी और गांड भी मराऊँगी।
मैंने जीजू को नीचे लिटा दिया और मैं उसके लण्ड पर बैठ गयी। मैं आगे की ओर झुकी तो मेरी गांड ऊपर उठ गयी। गोपी ने लण्ड मेरी गांड में घुसेड़ दिया। मैं गांड मरवाते हुए बुर चुदवाने लगी और बुर चुदवाते हुए गांड मरवाने लगी। इस तरह जीजू बुर चोदने लगा और देवर गांड मारने लगा। थोड़ी देर में मैंने देवर को नीचे लिटाया और उसके लण्ड पर बैठ गयी। जीजू ने पीछे लण्ड मेरी गांड में घुसा दिया। अब मैं देवर से चुदवाने लगी और जीजू से गांड मरवाने लगी। उसके बाद देवर को आगे लिटा लिया और जीजू से कहा तुम पीछे से लण्ड पेलो मेरी बुर में। मैं देवर का लण्ड चूसते हुए जीजू से चुदवाने लगी। फिर दोनों की एक बार और जगह बदल दी। जीजू को आगे लिटा लिया और उसका लण्ड चाटते हुए देवर से चुदवाने लगी।
रात भर मैंने दोनों के लण्ड इधर उधर करते हुए खूब मस्ती से चुदवाया। कुछ दिनों के बाद मैं जीजू के दोस्तों से और देवर के दोस्तों से भी चुदवाने लगी। जीजू चोदें बुर, देवर मारे गांड...
जब मैंने उसे अच्छी तरह ललकारा तो वह बहन चोद अपनी लुंगी खोल कर खड़ा हो गया मेरे आगे और खड़ा हो गया उसका भोसड़ी का लण्ड ? लण्ड देख कर मैं दंग रह गयी ? साला इतना लंबा तगड़ा लण्ड ? मैंने सुना है की मर्दों की बलिष्ठ भुजाएं होतीं हैं लेकिन यह कभी नहीं सुना की किसी का लण्ड भी बलिष्ठ होता है ? और इतना बलिष्ठ होता है ? मैंने तो अपनी आँखों से देख रही हूँ। लण्ड पकड़ा तो वह मेरे एक हाथ में नहीं आया तब मैंने दोनों हाथों से उसे पकड़ा और बोली हाय जीजू क्या तेरा लण्ड जिम जाता है क्या ? इतना मोटा तगड़ा मस्त भुजंग लण्ड तो मैंने कभी किसी ब्लू फिल्म में भी नहीं देखा ? भोसड़ी के इतना बढ़िया तूने अभी तक मुझसे छुपा कर क्यों रखा ? तेरी माँ की चूत साले तेरी बहन की बुर ? अब मैं इसे अपने हाथ से जाने नहीं दूँगी ? अब मैं करूंगी इसका खेल और निकालूंगी इसका तेल.
मैं कविता हूँ दोस्तों, २६ साल की एक शादी शुदा तीखे नैन नक़्श वाली लड़की। गोरी चिट्टी, लम्बे बालों वाली और बड़ी बड़ी आँखों वाली एक शोख़ और चंचल लड़की। बड़ी बड़ी सुडौल चूंचियों वाली, गुदांज़ बाँहों और पतली कमर वाली लड़की। मोटी मोटी जाँघों वाली, बड़े बड़े चूतड़ों वाली और एक मस्त मटकती गांड वाली लड़की। मैं चूत के बारे में आपको क्या बताऊँ ? वो तो आपको ऊपर से दिखती ही नहीं। उसका अंदाज़ा आप चूंचियों की तरह लगा भी नहीं सकते ? बस इतना समझ लो की बिलकुल मक्खन मलाई की तरह मुलायम और रबड़ की तरह टाईट है मेरी चूत। बुर चोदी बड़ी सेक्सी है मेरी चूत। मैं चलती हूँ तो आगे से मेरी चूंचियां उछलती है और पीछे से मेरे चूतड़ मटकते हैं जिन्हे देख कर लोगों के लण्ड में हलचल होने लगती है। मैं अपनी तिरछी निगाहों से देखती जाती हूँ की कौन किस तरह से घूर घूर कर मुझे देखता है और कौन मुझे देखकर अपना लण्ड सहलाने लगता है। मेरी शादी अभी दो साल पहले ही हुई है। सच बताऊँ आपको दोस्तों, मुझे लण्ड पकड़ने का और चुदवाने के बड़ा शौक है ? मैं हर तरह से लण्ड पकड़ती हूँ, अपने हाथों से, अपने मुंह से, होठों से, दांतों से. अपनी चूंचियों से, अपनी चूत से और अपनी गांड से भी ? मैं लण्ड के पोर पोर का मज़ा लूटती हूँ। लण्ड के सुपाड़े को तो मैं दिलो जान से प्यार करती हूँ। लण्ड किसी का भी हो वह मेरे दिल का टुकड़ा है।
आज मैं घर में अकेली हूँ तो जीजू आ गया । जीजू का नाम शेखर है। वह अच्छे कद काठी वाला मर्द है। मैं बहुत दिनों से घात लगाये बैठी थी की किसी दिन इसका लण्ड पकड़ूंगी ? इत्तिफ़ाक़ से आज मौक़ा मिल गया तो मैंने लपक लिया। जैसे ही मैंने उसे ललकारा तो उसका लौड़ा टन्न से खड़ा हो गया । और यही मैं चाहती थी। आज पहली बार जीजू को नंगा देखा और आज ही पहली बार उसका टन टनाता हुआ खड़ा लण्ड देख रही हूँ। लण्ड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गयी और चूत के अंदर तो आग की चिंगारियां सुलगने लगीं। मैं टूट पड़ी लण्ड पर। उसे चूमने लगी, चारों तरफ घुमा घुमा कर देखने लगी लण्ड और पड़े प्यार से पुचकारने लगी लण्ड। मैं मस्ती में डूबती जा रही थी। एक हाथ में लण्ड और दूसरे से पेल्हड़ थाम कर मैं उसे ऊपर नीचे करने लगी। उसका सुपाड़ा बार बार खुलता और बंद होता, जिसे मैं उसे देख देख कर मज़ा लेने लगी।
अचानक मेरी जबान बाहर अपने आप निकल आई और मैं प्यार लण्ड चाटने लगी। इतने में जीजू बोला अरे कविता तूने तो मुझे नंगा कर दिया पर तू तो अभी भी कपड़े पहने हुए बैठी है। मैं उठी और बोली कपड़ों की माँ की चूत ? लो मैं भी आपकी तरह नंगी हो जाती हूँ। मैंने फ़ौरन अपने सारे पकड़े खोल डाले। अब मैं मादर चोद बिलकुल नंगी नगी लण्ड चाटने और चूसने में जुट गयी। मुझे नंगी देख कर लण्ड साला तन कर आसमान देखने लगा। मैंने जीजू को पलंग पर चिट लिटा दिया और मैं उसके उोार चढ़ बैठी। उसके मुंह पर अपनी चूत रख दी । वह मेरी बिना झांट वाली चिकनी चूत चाटने लगा और मैं झुक कर उसका लण्ड चाटने लगी। मुझे दुनिया की बिलकुल फिक्र नहीं थी मैं तो बस लण्ड के प्यार में डूबी हुई थी। मैं बीच बीच में पेल्हड़ भी चाटने लगी। पेल्हड़ चाटने और चूमने का अपना एक अलग ही मज़ा है। यह मैंने ब्लू फिल्मो से सीखा है। सच बात तो यह है की मुझे ब्लू फिल्मों ने बहुत कुछ सिखाया है। इसिलए मैं लण्ड का पूरा मज़ा लूट लेती हूँ।
मैं जब अकेली होती हूँ तो सिर्फ दो काम करती हूँ। या तो मैं नेट पर ब्लू फिल्म देखती हूँ या फिर 'Sex' की कहानियां पढ़ती हूँ। दोनों ही काम एकदम नंगी होकर करती हूँ। ब्लू फिल्म देखते समय कपड़े अपने आप उतर जातें हैं। 'Sex' कहानियां तो मैं कपड़े उतार कर नंगी नंगी ही पढ़ती हूँ क्योंकि मुझे मालूम है कहानी शुरू होते ही मुझे नंगी होना ही पड़ेगा और चूंची और चूत सहलाना ही पड़ेगा। बल्कि चूत में ऊँगली डालनी ही पड़ेगी। इतनी गरम कहानियां मुझे और कहीं नहीं दिखाई पड़ती ? बेड के बगल में एक सोफ़ा पड़ा था। मैंने जीजू को थोड़ी देर बाद सोफ़ा पर बैठा दिया और मैं नीचे उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनो के बल बैठ गयी। मैने लण्ड अपनी चूंचियों के बीच घुसेड़ा और चूंची चुदवाने लगी। या यूँ समझिए की मैं चूंचियों से लण्ड का मुठ्ठ मारने लगी । सुपाड़ा जब ऊपर आता तो मैं उसे जबान निकाल चाट लेती।
मेरी बड़ी बड़ी चूंचियों के बीच लौड़ा पूरा घुस जाता था। मैं इस तरह पहले भी कई लण्ड चोद चुकी हूँ। मेरी मस्ती और सूझी तो मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया और उसे जल्दी जल्दी ऊपर नीचे लगी। वह बोला हाय कविता मैं तो निकल जाऊंगा ? मैंने कहा तो निकला जा न भोसड़ी के मेरे मुंह में ? मैं पहले तेरा लण्ड पियूंगी फिर बाद में चुदवाऊँगी। मेरा मन लण्ड छोड़ने का हो ही नहीं रहा था। मैं तो लण्ड का तेल निकालने में लग गई। मैं लण्ड का स्वाद लेना चाहती थी। इसलिए मैं एक हाथ से पेल्हड़ साधे हुए दूसरे हाथ से लण्ड मुठ्ठी में पकड़ कर दनादन सड़का मारने लगी। खचाखच फ़चाफ़च सटासट सड़का लगाने में मन लगाने लगी जीजू भी ऊँ, हूँ, ओ, ओहो, ए, हाय, चूँ, करने लगा फिर बोला वाओ, वाह और तेज करो, जल्दी जल्दी मारो सड़का। और तेज करो,,, हां,,, हां क्या बात है,,,तू तो भोसड़ी की सड़का अच्छा मार लेती है।
तेरी बहन की बुर, तू बड़ी खूबसूरत है, कविता ? तेरे हाथों में जादू है ? और मारो और मारो ? मैंने कहा भोसड़ी के मैं तेरे लण्ड की माँ चोद दूँगी। निकल जा मादर चोद जल्दी से निकल मेरे मुंह में ? मेरे मुंह में मारो पिचकारी मेरे लण्ड राजा ? बस फिर क्या जीजू के लण्ड ने उगल दिया पूरा वीर्य मेरे मुंह में और मैं पीने लगी लण्ड ? चाटने लगी लण्ड और लण्ड का सुपाड़ा ? खलास कर दिया मादर चोद लण्ड को ? मैंने कहा वाओ,बड़ा स्वादिस्ट है तेरा लण्ड जीजू। बड़ा मज़ा आया। अब मैं दूसरी पारी में लण्ड अपनी बुर में पेलूँगी और धकाधक चुदवाऊँगी। चुदाई के बाद हम दोनों बाथ रूम गए और नहा धोकर वापस आ गए। मगर मैंने कोई कपड़ा नहीं पहना और जीजू ने भी नहीं। हम दोनों नंगे नंगे ही रहे।
इतने में डोर बेल बजी। मैंने एक चादर लपेटा और दरवाजा खोल दिया। मैंने देखा की सामने मेरा देवर गोपी खड़ा है। मैंने उस अंदर बैठाया। मैं उससे बातें करने लगी।
- मैंने कहा अरे गोपी इतनी रात में तुम कहाँ से आ रहे हो ? और फिर तुमने क्या शराब पी है गोपी ?
- वह बोला हां भाभी मैंने शराब पी है, मैंने। मैं अपने दोस्त के घर गया था। तो उसने शराब पिला दी। मजे की बात यह है की मुझे शराब पिलाने में उसकी बीवी भी थी।
- तो क्या उसकी बीवी भी तेरे साथ शराब पी रही थी ?
- हां भाभी वह भी पी रही थी शराब। उसने मुझसे कम नहीं पी शराब। वह भी खूब नशे में थी।
- तुमने उसके साथ कुछ उल्टा सीधा किया तो नहीं ?
- बिलकुल नहीं किया भाभी। मगर मैं पर करने वाला था। मन तो बहुत था पर हिम्मत नहीं हुई ?
- क्यों हिम्मत नहीं हुई ? क्या वह खूबसूरत नहीं है ? या फिर वह तुम्हे पसंद नहीं है ?
- अरे भाभी खूबसूरत तो वह बहुत है और मुझे पसंद भी है ?
- तो फिर इसका मतलब न तेरी गांड में दम है और न तेरे लांड में दम है । मैं अगर तेरी जगह होती तो चोद देती बुर चोदी की बुर ?
- अरे भाभी मेरी गांड में दम है और उसमे में भी है दम है। पर वह अकेली नहीं थी। उसका हसबैंड भी था उसके साथ। वह अगर अकेली होती ससुरी तो फिर मैं जरूर चोद देता उसे.
- अच्छा, यह बात है ? तो देखो मैं अकेली भी हूँ और नंगी भी हूँ, मुझे चोदो ? मैंने अपनी चादर उतारते हुए कहा लो देखो भोसड़ी के मेरी चूत, मेरी चूंचियां मेरी गांड ?
मैंने कहा हां गोपी जब तू आया तब मैं जीजू के लण्ड का सड़का मार कर उसका लण्ड पी रही थी। मैने उससे कहा की मैं बाद में चुदवाऊँगी ? बस तब तक तुम आ गए। वह बोला तुम अब अपने जीजू से चुदवा लो। लेकिन मैं क्या करूंगा भाभी ? मेरे मुंह से निकला की तुम मेरी गांड मारना उसके बाद तुम चोदना और जीजू गांड मारेगा। मतलब यह की तुम दोनों मिलकर चोदो मुझे।
फिर मैं गोपी का लण्ड पकड़े पकड़े अंदर कमरे में चली गयी। मेरा जीजू गोपी को जानता था । वह बोला वाओ, गोपी तुम तो शायद पहले से ही अपनी भाभी की बुर चोद रहे हो। वह बोला नहीं भाई साहेब। बुर चोदना तो दूर अभी तक तो आईने भाभी को लण्ड भी नहीं कपड़ाया था मैंने। आज पहली बार भाभी ने मेरा लण्ड पकड़ा है। मुझे मालूम हुआ की वह आपका भी लण्ड पकड़ चुकी यही तो मैंने कहा फिर मुझे किस बात की शर्म ? चलो मैं तेरे जीजू से मिलता हूँ। इसलिए मैं चला आया। जीजू ने कहा तेरी भाभी तेरा लण्ड पकडे पकड़े आई है इसका मतलब वह तुमसे मेरे सामने चुदवाना चाहती है तो फिर तुम चोदो इसे मैं बैठ कर देखूँगा ? मैंने कहा देख माँ का लौड़ा जीजू मैंने तुझे अपनी झांटे उखाड़ने के लिए नहीं रोका है, बुर चोदने के लिए रोका है, भोसड़े के ? तुम मेरी बुर चोदो, जीजू और मेरा देवर मेरी गांड में घुसेड़ेगा लण्ड ? जी हां मैं बुर भी चुदाऊंगी और गांड भी मराऊँगी।
मैंने जीजू को नीचे लिटा दिया और मैं उसके लण्ड पर बैठ गयी। मैं आगे की ओर झुकी तो मेरी गांड ऊपर उठ गयी। गोपी ने लण्ड मेरी गांड में घुसेड़ दिया। मैं गांड मरवाते हुए बुर चुदवाने लगी और बुर चुदवाते हुए गांड मरवाने लगी। इस तरह जीजू बुर चोदने लगा और देवर गांड मारने लगा। थोड़ी देर में मैंने देवर को नीचे लिटाया और उसके लण्ड पर बैठ गयी। जीजू ने पीछे लण्ड मेरी गांड में घुसा दिया। अब मैं देवर से चुदवाने लगी और जीजू से गांड मरवाने लगी। उसके बाद देवर को आगे लिटा लिया और जीजू से कहा तुम पीछे से लण्ड पेलो मेरी बुर में। मैं देवर का लण्ड चूसते हुए जीजू से चुदवाने लगी। फिर दोनों की एक बार और जगह बदल दी। जीजू को आगे लिटा लिया और उसका लण्ड चाटते हुए देवर से चुदवाने लगी।
रात भर मैंने दोनों के लण्ड इधर उधर करते हुए खूब मस्ती से चुदवाया। कुछ दिनों के बाद मैं जीजू के दोस्तों से और देवर के दोस्तों से भी चुदवाने लगी। जीजू चोदें बुर, देवर मारे गांड...
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