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चूत मेरी बिलकुल सूखी रह गयी - Meri chut bilkul sukhi hai
चूत मेरी बिलकुल सूखी रह गयी - Meri chut bilkul sukhi hai , क्रेजी सेक्स स्टोरी , Meri Sukhi Chut Ko Gila Kar Do , सूखे और प्यासे होंठ , 2 लंड आराम से चुत में लेती हूँ , पत्नी की चूत सूखी सुमन की चूत भूखी , मेरी बीवी सेक्स में थोड़ी कमजोर है , अपनी चूत की जलन का उपचार करवाया.
मैंने कहा - अच्छा, मैं समझ गयी सासू जी की आज तेरी बेटी यहाँ नहीं है इसीलिए तू मुझे लण्ड पकड़ा रही है ? अगर वह होती तो मेरा नंबर नहीं आता। तुझे उसकी चूत का ज्यादा ख्याल है।
वह बोली - तू अपनी नन्द की बात कर रही है। अरे तेरी नंदी की माँ की चूत ? तू ऐसा मत समझ मैं तेरा भी ख्याल रखती हूँ और उसका भी। हां तू कभी कभी मेरे भोसड़ा की परवाह नहीं करती ? मैंने देखा उस दिन तू किसी का लण्ड चाट रही थी. चाटने के बाद तूने चुदवाया भी था. मैं खड़ी खड़ी देखती रही। लेकिन फिर वह चला गया ? तेरे मुंह से यह नहीं निकला की मेरी सास का भोसड़ा चोदते जाओ ?
मैंने कहा - अरी सासू जी क्या बात करती हो ? उस दिन चुदवाने के बाद मैंने उसे रोका ? लगभग एक घंटे के बाद उसका लण्ड फिर से खड़ा किया और कहा यार तुम रुको मैं अभी अपनी सास को बुला कर लाती हूँ तुम उसे चोद कर जाओ। लेकिन तेरा तो कहीं पता नहीं था। तू शायद कहीं और चली गयीं थीं। फिर मैंने तेरी बेटी को ढूँढा वह भी बुर चोदी कहीं लण्ड हिलाने गई थी। न तेरा भोसड़ा मिला और न तेरी बिटिया की बुर ? इसलिए दुबारा फिर मैंने उससे चुदवाया तब जाने दिया।
सासू बोली - अब जो होना था वह हो गया। अब ले यह लौड़ा संभाल और मस्ती से चुदवा ले।
मैंने हाथ बढाकर लौड़ा पकड़ लिया और उसे मस्ती से चाटने लगी। लौड़ा मेरे मन का था और मुझे मज़ा आने लगा। सासू के भाई जान का लण्ड मुझे वाकई पसंद आ गया। मैं उसका सुपाड़ा बड़े मजे से चाटने लगी और मुंह में लेने लगी पूरा का पूरा लण्ड ? मैं तो लण्ड की बड़ी शौक़ीन हूँ। मैंने सबसे पहले अपने मामू जान का ही लण्ड पकड़ा था।
था तो वह ५ साल मुझसे बड़ा लेकिन साला था बड़ा स्मार्ट और हैंडसम। उसका लौड़ा भी बड़ा लंबा, मोटा और तगड़ा था। मैं तब तक कई ब्लू फिल्म देख चुकी थी इसलिए मुझे लण्ड चाटना चूसना और लण्ड पीना अच्छी तरह मालूम था। यह एक अच्छी बात थी की उसकी झांटें बिलकुल साफ़ थी. लण्ड बिलकुल चिकना था और चिकने थे उसके पेल्हड़ ? मैं पेल्हड़ भी खूब चाटती हूँ। मेरी तरह न मेरी नन्द लण्ड चाट सकती है और न सास ? सास तो बस भोसड़ा खोल कर चुदवाने लगती है और नन्द भी उसकी कापी करती है। लण्ड का पूरा मज़ा लेना इन बुर चोदियों को आता ही नहीं ? हां मेरी खाला सास की बेटी रेहाना मेरी तरह लण्ड चाट लेती है और चूस भी लेती हैं। वह एक दिन मेरे ससुर का लण्ड चाट रही थी तभी मैने उसे देख लिया था। मैंने ससुर का लण्ड भी बड़ी देर तक देखा है. तबसे मेरी चूत में आग लगी है। अब मन बना लिया है की वही लण्ड किसी दिन अपनी बुर में पेलूँगी। मैं उस दिन का बड़ी बेकरारी से इंतज़ार कर रही हूँ। ससुर का लण्ड चोदूंगी तब मुझे करार आएगा ?
तब तक इधर सास के भाई जान का लण्ड मेरी बुर में पूरी तरह घुस गया था और वह बिलकुल अपनी बीवी की तरह मुझे चोदने लगा। सास बैठी हुई मेरी बुर चुदवाने लगीं। लण्ड जब बार बार चूत से फिसल फिसल कर इधर उधर होने लगा तो सासू उठी और लण्ड के बगल में बैठ कर लण्ड को बार बार मेरी बुर में घुसेड़ने लगी। मुझे तो मज़ा आ ही रहा था मैंने देखा की उसे मुझसे ज्यादा मज़ा आ रहा है। मैंने पूंछा अरे सासू जी लगता है की आपको अपनी बहू की बुर चुदवाने में बहुत मज़ा आ रहा है। वह बोली अरी नहीं बहू ऐसा नहीं है। मुझे तो हर जवान बहू बेटी की बुर चुदवाने में मज़ा आता है। मैं अपनी सहेलियों की बेटियों की बुर बड़े मजे से चुदवाती हूँ। उसकी बहुओं की बुर में लण्ड मैं ही पेलती हूँ। जब मैं ऐसा करती हूँ तो मुझे अपने बीते दिन याद आतें हैं और मैं उन्हें याद कर कर के खूब एन्जॉय करती हूँ। मैंने कहा अरी सासू जी तेरा भोसड़ा तो आज भी जवान है।
दूसरे दिन सवेरे सवेरे मेरी नन्द फरहा अपनी ससुराल से आ गयी। वह बहुत खुश थी। मैंने मजाक किया हाय दईया लगता है की तू खूब धकापेल चुदवा कर आ रही है ससुराल से ? वह बोली अरे भाभी इस बार तो मज़ा कुछ भी नहीं आया। न मेरा मियां था और न ही देवर ? न मेरा जेठ था और न नंदोई ? चूत मेरी बिलकुल सूखी रह गयी बहन चोद ? मैंने कहा अरे तेरा ससुर तो था उसी से चुदवा लिया होता ? वह बोली वह भी मादर चोद कहीं चला गया। नहीं तो मैं इस बार उससे जरूर चुदवाकर आती। मैनें मन बना लिया था की आज रात को पकड़ लूंगी उसका लौड़ा ? लेकिन वह भोसड़ी का घर आया ही नहीं और बाहर से ही चला गया। तब मैंने सोंचा की क्यों न मैं माईके जाकर थोड़ा चुदवा कर आऊँ तो राहत मिले ?
मैंने कहा मैं तो आस लगाये हुए थी की तू अपने ससुराल वालों से मेरी चूत चुदवायेगी मगर तू तो खुद ही यहाँ चुदवाने चली आई। वह बोली अरे भाभी यह समय समय की बात है ? लेकिन ऐसा हमेशा तो रहेगा नहीं। मैं तेरी बुर जरूर चुदवाऊँगी और बड़ी मस्ती से चुदवाऊँगी। हम दोनों इसी बात पर हंस पड़ी। फिर हम दोनों शॉपिंग गयी और खूब मज़ा करके वापस आयीं। रात के करीब ९ बजे थे। हम तीनो में किसी बात को लेकर तुक्क ताँय होने लगी।
- सास बोली - तू बुर चोदी फरहा जाने कहाँ कहाँ अपनी भाभी को लेकर घुमा करती है ? कितनी बार कहा है तुम लोगों से की बुर्का पहन कर ही घर के बाहर जाया करो ? न तुम मेरी बात मानती हो और न तेरी ये भाभी ? तुम जरुरत से ज्यादा आवारा हो रही हो, फरहा ?
- फरहा - अरे अम्मी बुर्का पहनने से क्या होता है ? मेरे चेहरे में क्या है जो लोग देख नहीं सकते ? लोग मेरा चेहरा ही देखेंगे न ? मेरी चूत, मेरी चूंची, मेरी गांड तो नहीं देखेंगे न ?
- सास - तेरा बस चले तो तू वह भी दिखा देगी ? इसीलिए मैं कहती हूँ की थोड़ा संभल कर चल, नहीं तो तू बहक जाएगी ?
- फरहा - अब क्या बहक जाऊँगी, अम्मी ? अब तो मेरी शादी हो गयी है। मैं अगर बहक भी गयी तो क्या होगा किसी और मर्द से चुदवाने लगूंगी। वो तो मैं अभी भी चुदवाती हूँ और चुदवाती रहूंगी ? तेरी गांड में दर्द होता है तो मुझे क्या ?
- मैं - अरी फरहा तू जबान क्यों लड़ाती है ? तेरी अम्मी ठीक कह रही है की तू थोड़ा अपनी चूत पर कंट्रोल रख ?
- फरहा - कंट्रोल तू रख बुर चोदी सरारा ? मैं तो अपनी चूत पर कंट्रोल नहीं रखूंगी। मैं तो इसमें लण्ड पर लण्ड पेलूँगी ? तू रख अपनी चूत ताले में ? अम्मी भी अपना भोसड़ा में ताला लगा लें ? मुझे क्या, मैं तो खुली हूँ और खुली रहूंगी।
- सास - तेरी माँ का भोसड़ा, फरहा ? न तू किसी की बात सुनती है और न तेरी चूत ?
- मैं - सासू जी अब मैं मारूंगी तेरी बिटिया की गांड ? तब इसको समझ में आएगा। अभी इसकी चूत बहुत गरम है न ?
- फरहा - अरे भाभी तू भोसड़ी की मेरी गांड क्या मारेगी ? तेरी गांड में तो मैं ठोंकूंगी लण्ड ? क्योंकि लण्ड ठोंकने का ठेका मैंने ले रखा है।
- सास - तू क्या बात करती है फरहा, माँ की लौड़ी ? अभी तक कोई ढंग का लण्ड तो अपनी माँ के भोसड़ा में ठोंक नहीं पाई तू ? अब तू मादर चोद मेरी गांड में क्या ठोकेगी लण्ड ? पहले अपनी गांड की परवाह कर ?
- मैं - सासू जी, तू फरहा को कम आँक रही है। ये बुर चोदी बड़ी ज़ालिम है। जिस दिन तेरा भोसड़ा ढंग से चुदवायेगी उस दिन तेरा भोसड़ा फट जाएगा ? और फट जाएगी तेरी बिटिया की बुर ?
- सास - अरी जा जा बहू, आज तक कोई लौड़ा ऐसा नहीं पैदा हुआ जो मेरा भोसड़ा फाड़ दे। हां मैं तेरी बुर और तेरी माँ का भोसड़ा जरूर फाड़ दूँगी ? बुला किसी दिन तू अपनी अम्मी को ? एक से एक लण्ड पेलूँगी तेरी माँ की चूत में ? मैं चोदूंगी तेरी माँ की चूत, सरारा ?
- मैं - तब मैं चोदूंगी तेरी गांड, मेरी भोसड़ी की सास ?
वह मुंह बनाकर बैठ गयी।
तब तक मेरा मोबाइल बज उठा। मैंने देखा तो उसमे नाम मेरे जीजू असद का था। मैंने कहा हेलो जीजू तो वह बोला अरे सरारा दरवाजा खोलो मैं बाहर खड़ा हैं। मैं फ़ौरन उठी और दरवाजा खोल दिया। वह अनार आया तो मैजे उसे अपनी नन्द से मिलवाया और सास से भी। दोनों बोली हां हम तो पहले भी मिल चुकें हैं तेरे जीजू से सरारा ? फिर मैंने उसे ससुर से मिलवाया तो दोनों खुश हुए। थोड़ी देर में नन्द बोली ले भाभी तेरा भी लौड़ा आ गया। मैंने कहा यार मैंने तो कभी इसका लौड़ा देखा ही नहीं ? वह बोली तो आज देख ले न ? आज भोसड़ी का तेरा जीजू तुझे लौड़ा नहीं दिखायेगा तो मैं इसकी गांड मारूंगी। तब तक सास भी आ गई और कहने लगी अब बता बहू तू अपने जीजू से बुर चुदवायेगी की गांड मरायेगी ?
उसके बाद हम सब लोग बैठ कर थोड़ी थोड़ी शराब पीने लगे और बातें करने लगे। मेरी नज़र जीजू के लण्ड पर थी तो नन्द की नज़र अपने ससुर के लण्ड पर ? वे दोनों भोसड़ी के हम तीनो की चूंचियों पर नज़रें गड़ाये हुए थे। नशा चढ़ने लगा और मस्ती बढ़ने लगी।
मैंने कहा - भोसड़ी के जीजू, तूने कभी अपनी साली की परवाह की है ? कभी उसकी खबर ली ? तेरी एक साली है और वह हूँ मैं ?
वह बोला - बिलकुल परवाह करता हूँ तभी तो चला आया यहाँ तुम्हारे पास, सरारा ?
मैंने कहा - क्या ख़ाक परवाह करते हो माँ के लौड़े ? तूने अपना मादर चोद लण्ड तक तो दिखाया नहीं मुझे अभी तक ? मैं हूँ तेरी साली मैं दूँगी तुझे गाली ? तेरी गांड में दम हो तो अभी सबके सामने दिखाओ मुझे अपना लौड़ा ?
मेरी नन्द नशे में थी वह बोली - और हां तू मेरा ससुर है न हसन ? उस दिन मैंने रात भर तेरा और तेरे लण्ड का इंतज़ार किया मगर तू नहीं आया ? तेरी बिटिया की बुर साले तू किस तरह का मर्द है ? घर में मस्त जवान चूत मौजूद है और तू उसमे अपना लण्ड नहीं घुसेड़ सकता, मादर चोद ?
इसके पहले की वह कोई जबाब देता, दरवाजे की घंटी फिर बज उठी। इस बार फरहा ने दरवाजा खोला तो बड़ी जोर से बोली हाय दईया तू रमज़ान चाचा ? इतनी रात में ? वाओ, जल्दी से आओ अंदर ? वह उसे लेकर अंदर आ गयी। वह आते ही बोला ज़रीना भाभी आदाब ? मेरी सास बोली अरे रमज़ान तुझे इतने दिनों बाद भाभी की याद आई ? अभी तक तू कहाँ गांड मरा रहा था अपनी ?
वह बोला - भाभी आज सवेरे से ही तेरी याद आ रही थी इसलिए गाँव से चल पड़ा मिलने ?
सास बोली - अच्छा ले पहले थोड़ी शराब पी ले ?
मैंने देखा की रमज़ान भी बड़ा मस्त आदमी है इसका लौड़ा भी मस्त होगा ? मेरी इच्छा हुई की मैं इसे भी नंगा देखूं ? सास बोली अरी बहू यह मेरा गाँव का देवर है। और इसका गाँव जैसा लौड़ा भी है। मैंने कहा सासू जी यह गाँव जैसा लौड़ा क्या होता है ? लौड़े तो सब एक ही जैसे होतें है। वह बोली अरी पगली पहली बात तो यह हर लौड़ा अपने आप में अलग होता है। कोई लौड़ा किसी दूसरे लौड़े से हूबहू नहीं मिलता ? और दूसरे गाँव के लण्ड उतने साफ़ सुथरे नहीं होते जितने शहर के लण्ड होते हैं। तीसरी बात यह की गाँव का लण्ड बुर चोदना जानता है बस ? वह खड़ा होता है तो सीधे बुर में घुस जाता है। लण्ड और क्या क्या कर सकता है वहां के लोग नहीं जानतें और वहीं की बीवियां भी नहीं जानती। अब आज मैं बताऊँगी इस मादर चोद रमज़ान के लण्ड को ? मैंने कहा सासू जी तुम तो इसके लण्ड का मज़ा ले चुकी हो अब तुम मेरे जीजू के लण्ड का मज़ा लो ? वह बोली नहीं मैं तो पहले फरहा में ससुर का लण्ड लूंगी। फरहा बोली भाभी मैं तेरे जीजू का लण्ड पकड़ती हूँ।
इतने में मैं उठी और अपने चचिया ससुर को हाथ पकड़ कर उठाया। उसका कुर्ता उतारा और बनियाइन भी उतार दी। उसके पैजामे का नाड़ा खींच लिया तो पैजामा नीचे गिर पड़ा। वह नंगा हो गया। उसका लण्ड थोड़ा थोड़ा टन्नाया हुआ था। मैंने कहा बाप रे बाप इतनी बड़ी बड़ी झांटें ? मैं उसे सीधे बाथ रूम ले गयी। वहाँ से जब आई तो देखा कि मेरी नन्द मेरे जीजू का लण्ड नंगी नंगी चूस रही है और पेल्हड़ भी चाट रही है। मैंने यह भी देखा की मेरी सास अपनी बिटिया के ससुर का लण्ड मस्ती से हिला हिला कर मज़ा ले रही है और बीच बीच में चूम भी रही है। दोनों लण्ड बहन चोद टना टन्न हिनहिना रहें हैं। माँ और बेटी दोनों को नंगी देख कर गाँव वाला लण्ड साला फनफना उठा ? लण्ड एकदम से टन्ना गया और आसमान ताकने लगा ? मैंने देखा की उसका चिकना मोटा तगड़ा लण्ड सबसे बड़ा है। मैं भी बुर चोदी नंगी थी ही ? मैंने लण्ड मुंह में लिया और सुपाड़ा चूसने लगी।
थोड़ी देर में रमज़ान ने लण्ड मेरी चूत में टिका दिया और एक धक्का मारा तो लण्ड गचाक से मेरी चूत में घुस गया । मैं भी रंडी की तरह चुदवाने लगी। मेरी दाहिनी तरफ मेरी नन्द मेरे जीजू का लण्ड अपनी बुर में घुसेड़ लिया। वह भी भोसड़ी की मस्ती से गांड उठा उठा के चुदवाने लगी। मेरी बायीं तरफ चुद रहा था मेरी सास का भोसड़ा ? मेरी नन्द का ससुर मेरी सास का भोसड़ा चोद रहा था।
फरहा बोली :- मादर चोद मेरे ससुर तू अपनी बहू की माँ का भोसड़ा चोद रहा है ? मैं भी किसी दिन तेरी बिटिया की बुर चोदूंगी।
सास बोली :- अरे रमजान तू मेरी बहू की बुर चोदने में लगा है मैं किसी दिन तेरी बहू की बुर में लण्ड पेलूँगी।
मैंने कहा :- हाय मेरे हरामजादे जीजू , तू मेरी नन्द की बुर चोद रहा है ? मैं किसी दिन मेरी बहन की बुर चोदूंगी ?
हम तीनो इसी तरह की गन्दी गन्दी बातें करती हुई और एक दूसरे को गाली देती हुई भकाभक अपनी अपनी चूत चुदवाने में जुट गयीं। खुदा कसम उस दिन जितना मज़ा चुदवाने में आया उतना मज़ा कभी नहीं आया। एक बार चुदवाने के बाद हमने फिर सबसे चुदवाया और रात भर चुदाया। मैंने फरहा के ससुर से चुदवाया और अपने जीजू से भी। सास ने मेरे जीजू से चुदवाया और अपने देवर से भी। मेरी नन्द ने अपने ससुर से चुदवाया और गाँव वाले लण्ड से भी।
अब तो मुझे अकेले अकेले चुदवाने में बिलकुल मज़ा ही नहीं आता ?
अब तो हम ग्रुप बनाकर ही चोदा चोदी करतीं हैं।
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