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सास ने अपनी बहू और बेटी को चुदते हुए देखा - Saas ne apni Beti aur Bahu ko chudai krte dekha
सास ने अपनी बहू और बेटी को चुदते हुए देखा - Saas ne apni Beti aur Bahu ko chudai karte dekha , बहु चुदवाती हुई पकड़ी गई , माँ ने बेटी को गांड मरवाते पकड़ लिया , एक औरत ने दूसरी महिला / लड़की को चुदवाई करते पाया.
सास बहू नन्द तीनों भोसड़ी की एक ही कमरे में ग़ैर मरदों के ऊपर चढ़ी हुई नंगी नंगी चोद रही हैं लन्ड ? सास अपनी बेटी और बहू को लन्ड चोदते हुए देख रही है। बहू अपनी सास और नन्द को लन्ड चोदते हुए देख रही है और नन्द अपनी भाभी और अपनी माँ को लन्ड चोदते हुए देख रही है। ये तीनो लन्ड बहन चोद पराये मर्दों के हैं। न इसमें कोई ससुर का लन्ड है न ही बेटे का लन्ड और न ही नंदोई का लन्ड ? इतना ही नहीं ये तीनो लन्ड अदल बदल कर भी चोद रही हैं। तीनो की मस्ती सातवें आसमान पर है। सास बेटी और बहू की बुर में लन्ड पेल रही है, बहू अपनी सास और नन्द की चूत में लन्ड घुसेड़ रही है और नन्द अपनी माँ के भोसड़ा में और भाभी की चूत में लन्ड घुसा रही है।
इतनी आग, इतनी मस्ती और इतनी बेशरम चुदाई बहुत कम देखने को मिलती है। जहाँ सास कहती है की आज मैं अपनी बहू और बेटी की बुर चोद डालूँगी, बहू कहती मैं भी अपनी सास और नन्द की चूत फाड़ डालूँगी और नन्द कहती है की मैं तो आज माँ का भोसड़ा और भाभी की बुर चोद चोद कर हलवा बना दूँगी।
यह चुदाई जानती हो कब हो रही है ? यह चुदाई होली के मौके पर हो रही है।
होली में सबको लगे, सबसे प्यारा लन्ड
सास चुदाये, बहू भी और चुदाये नन्द
यह बहन चोद होली का माहौल भी बड़ा मजेदार होता है। चूत वैसे चाहे कभी चुदासी न हो लेकिन वह बुर चोदी होली के मौके पर जरूर चुदासी हो जाती है। लन्ड भोसड़ी का वैसे चाहे कभी खड़ा न होता हो पर होली के दरमियान जरूर खड़ा हो जाता है। लन्ड साला जब खड़ा हो जाता है तो वह चूत में घुसने के लिए बेताब हो जाता है। चूत जब उसे दिख जाती है तो वह फ़ौरन उसमे घुस जाता है। वह यह नहीं देखता की चूत है किसकी ? इसी तरह चूत जब चुदासी होती है तो वह लन्ड ढूंढने लगती है। लन्ड जब मिल जाता है तब वह उसे अपने अंदर फ़ौरन घुसेड़ लेती है। वह यह नहीं देखती की लन्ड बहन चोद है किसका ? कोई चाहे कुछ भी कहे और लाख कोशिश करे पर यह सच है की चूत की आग और लन्ड का जोश किसी के रोके नहीं रुकता ?
इसीलिए शायद कहा गया है की होली के मौके "होली में बाबा देवर लागे". यानी होली के मौके पर बाबा (grand father - in - law) भी देवर के समान लगता है। इसका मतलब यह है की होली में बाबा का भी लन्ड पकड़ने में और उससे चुदवाने में कोई हर्ज़ नहीं है। इसका असली मतलब यह है की कोई भी बीवी होली के समय किसी से भी चुदवा सकती है।
होली के समय मेरी सास मेरे पास आयी और बोली - देखो बहू, आज तो होली है। आज तो धमाल होना ही चाहिए ? आज तुम अपनी नन्द की मारो गांड ? लन्ड उसकी गांड में ठोंक दो बहन चोद ? उसके बाद चोदो उसकी माँ का भोसड़ा ? मैं मन में सोंचने लगी की सास तो अपना ही भोसड़ा चुदाने की बात कह रहीं हैं और अपनी ही बेटी की गांड भी मरवाना चाहती हैं। सास आज वास्तव में बहुत चुदासी है क्योंकि यह होली का माहौल है। होली में कुछ भी हो सकता है।
तब तक मेरी नन्द मेरे पास आयी और बोली - भाभी, आज ठोंक दो अपनी सास की गांड में लन्ड और पेल दो उसकी बिटिया की बुर में हाथ भर का लौड़ा ? बड़ी चुदासी हो गयी है तेरी सास की बुर और उसकी बेटी की चूत।
मैंने मन में कहा हाय दईया सास और नन्द दोनों एक ही तरह की हैं बुर चोदी । इधर नन्द अपनी माँ का भोसड़ा चुदाना चाहती है और उधर सास अपनी बिटिया की बुर ? लेकिन क्या इन दोनों को मेरी चूत का ख्याल नहीं है ? क्या मैं जवान नहीं हूँ ? क्या मेरी चूत में आग नहीं है ? ये दोनों मुझे क्या समझती हैं ? तभी मुझे कुछ आवाज़ सुनाई पड़ी। मैं धीरे से कमरे के नजदीक गयी और कान लगा कर उन दोनों की बातें सुनने लगी।
सास बोल रही थी - बेटी, तेरी भाभी की बुर तेरी माँ की चूत ? आज तुम अपनी भाभी की चोद डालो बुर ? आज होली है ? आज तुम्हे जो भी लन्ड मिले उसे पहले अपनी भाभी की चूत में घुसेड़ दो और फिर घुसेड़ दो लन्ड अपनी माँ के भोसड़ा में ?
होली के माहौल में सब जायज़ होता है बेटी।
होली में बहू की बुर, बेटी की चूत, माँ का भोसड़ा सब बराबर ?
नन्द बोली - अम्मी, तेरी बहू की बुर, तेरी बेटी की चूत ? आज तुमको भी जो लन्ड मिले उसे पहले अपनी बहू की बुर में पेलो। पहले चोदो अपनी बहू की चूत ? फिर वही लन्ड पेल दो अपनी बिटिया की बुर में ?
उन दोनों की बात सुन कर मैं तो दंग रह गयी। मैं मन में बोली हाय दईया मैं तो इन लोगों के बारे में गलत सोंच रही थी। ये तो मेरी चूत का बहुत ख्याल रख रही हैं। पहला ही लन्ड मेरी चूत में पेलने की बात कह रही हैं। अब तो मुझे चाहिए की मैं भी इन दोनों की चूत का ख्याल रखूँ।
मेरा नाम है सारा दोस्तों, मेरी सास का नाम है आयना और मेरी नन्द है समीरा। मैं इस घर की बहू हूँ। मैं २४ साल की एक बेहद खूबसूरत बीवी हूँ। एक दिन हम तीनो एक साथ बैठी हुई बातें कर रही थीं। तभी मेरी नन्द ने खुल कर कहा देखो भाभी मैं जवान हूँ तुम भी जवान हो और मेरी माँ भी जवान हैं। हम तीनो को चाहिए लन्ड ? लन्ड के बिना हमारा गुज़ारा नहीं है और हम एक दूसरे से छिप छिप कर लन्ड का मज़ा खुल कर नहीं ले सकतीं। फिर क्यों हम एक साथ लन्ड का मज़ा लिया करें ? तब तक सास बोली देखो बहू मेरी बेटी जब जवान हुई उसी दिन से मैंने उसके ऊपर से कण्ट्रोल हटा लिया और उसे सेक्स का पाठ पढ़ा दिया। हम दोनों साथ साथ लन्ड का मज़ा लेने लगीं और अब तुम आ गयी हो तो सोने पे सुहाग हो गया है। पहले मैं कहती थी बेटी, तेरी माँ की चूत ? अब मैं बहू, तेरी सास का भोसड़ा भी कहूँगी ? तब तक नन्द बोली भाभी मैं पहले कहती हूँ अम्मी तेरी बिटिया की बुर ? अब मैं भाभी तेरी नन्द की चूत भी कहूँगी ? यह सब सुनकर मुझे भी जोश आ गया और तब मैं उसी लहज़े में बोली - मैं भी कहूँगी सासू तेरी बहू की बुर ? और कहूँगी तेरी भाभी का भोसड़ा, नन्द रानी ? मेरी बात सुनकर उन दोनों ने मुझे गले लगा लिया।
मेरा शौहर दुबई में काम करता है और साल में २/३ बार ही आता है। मेरा ससुर भी वहीँ रहता है। वह भी २/३ बार ही आता है। मेरी नन्द की शादी हो चुकी है। उसकी ससुराल इसी शहर में है। आजकल होली का टाइम है और मेरी नन्द यहीं हमारे पास है। हम तीनो होली का मज़ा लेने का प्लान बना रही हैं। हमारा मोहल्ला बहुत अच्छा है। यहाँ सब लोग मिलकर होली, दिवाली और ईद मानते हैं। बड़ा अच्छा लगता है और मज़ा भी खूब आता है। ऐसा माहौल बहुत कम देखने को मिलता है।
इतने में शोर गुल सुनाई पड़ा - लन्ड चूत की टोली है - बुरा न मानो होली है ? आज चुदा लो होली है - चोदा चोदी होली है। हम सब बाहर देखने लगी तो मालूम हुआ की तीन लड़के यही सब बकते हुए हमारे घर में घुस आये। उनके हाथ में रंग और गुलाल था। वो सब आते ही हमारे मुंह में रंग और गुलाल लगाने लगे। हम सब भी उसी मस्ती में मस्त हो गयीं और हम भी लड़कों के रंग और गुलाल मलने लगीं। तब तक किसी ने सास के ब्लाउज़ में हाथ घुसेड़ कर रंग लगा दिया। तो सास ने उसके पैजामे में हाथ घुसड़ कर रंग लगा दिया। मस्ती और बढ़ने लगी। वो लड़के हमारी चूंचियां रंगने लगे तो हम भी उनके लन्ड और पेल्हड़ रंगने लगीं। सास ने एक लड़के का कुर्ता फाड़ दिया। एक लड़के का पैजामा फाड़ डाला तो उसका लन्ड नंगा नंगा दिखने लगा। फिर हाथा पाईं में हमारे भी कपड़े फटने आगे। मेरी चूंचियां नंगी हो गयीं तो नन्द की चूत। उधर सास का भोसड़ा भी दिखने लगा। हम सबको मज़ा आने लगा और देखते ही देखते तीनो लड़के मादर चोद नंगे हो गए। इधर हम सब भी बेशरम हो गयीं और हमने भी अपने बचे खुचे कपड़े उतार फेंका। तीनो लन्ड हमारे सामने तन कर खड़े हो गये और तब तक हमारी चूंचियां भी तन चुकी थीं।
मेरी सास ने ज़फर का लन्ड पकड़ लिया और उसे बड़े प्यार से हिलाने लगी। मेरी नन्द ने शिवा का लन्ड पकड़ा और उसे चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी। मैंने साइमन का लौड़ा लिया और उसके पेल्हड़ थामे हुए लन्ड का हाल चाल लेने लगी। सभी बहन चोद लाल, पीले, हरे, गुलाबी लन्ड बड़े प्यारे लग रहे थे। मन तो लन्ड मुंह में लेने का था लेकिन रंग और गुलाल के कारन नहीं ले पा रही थी। यही हाल लड़कों का भी था वह भी लाल, गुलाबी, हरी, बैगनी चूत का मज़ा लूट रहे थे। हमारी चूत पर हाथ फेर रहे थे और चूतड़ों पर हाथ रगड़ रहे थे। वो सब रंगीन चूंचियां भी दबा दबा कर मज़ा कर रहे थे। मस्तियाँ बढ़ती जा रहीं थीं। मैंने खेल शुरू होने के पहले एक विडियो सेट कर दिया था। जो कुछ भी कमरे में हो रहा था उसका विडियो अपने आप बनता जा रहा था। हम सब नंगी नंगी कैमरा के सामने लन्ड हिला हिला कर हंस रहीं थीं।
इतने में सास बोली :-
बहू तुम्हारी गांड में, लौड़ा दूँगी पेल
फिर बोलूंगी चोद लो, ये होली का खेल
मैंने भी सास को सुना दिया :-
सास तुम्हारा भोसड़ा मैं चोदूंगी आज
लौड़े सारे पेल दूं मिट जाये बुर की खाज़
मेरी नन्द तो बुर चोदी बड़े मूड में थी। वह बोली अरे भाभी :-
नन्द की बुर में ठोंक दो,लन्ड अभी दो चार
मेरे मुंह से गिर रही, लन्ड देख कर लार
तब तक हमारी चूत की आग और भड़क उठी थी । अब बिना चुदवाये किसी से रहा नहीं जा रहा था। इसलिए हम सब लोग बाथ रूम चली गयीं। वहां जाकर हमने सारे लन्ड पर साबुन लगा लगा कर खूब नहलाया और लड़कों ने हमारी चूँचियों पर, चूत पर और गांड पर साबुन लगा कर खूब नहलाया। इसी दौरान लन्ड जब नहा धोकर साफ़ हो गये तो उन पर प्यार आ गया। मैंने ज़फर का लन्ड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी। सास ने शिवा का लौड़ा मुंह में लिया और नन्द ने साइमन का लौड़ा। हम तीनो लन्ड चूमने, चाटने और चूसने लगीं। मैं थोड़ी देर में एक हाथ से पेल्हड़ थाम कर दूसरे हाथ से लन्ड का मुठ्ठ मारने लगी।
मेरा मन लन्ड पीने का हो गया। मुझे देख कर सास और नन्द भी लन्ड का सड़का लगाने लगीं। ज़फर बोला हाय सारा मैं निकलने वाला हूँ। मेरे कहा तो फिर तू मेरे मुंह में निकल जा। मैंने मुंह फैला दिया और फिर उसके लन्ड ने २/४ पिचकारी छोड़ दीं। मेरे मुंह लन्ड के रस से भर गया। मैं सारा रस पी गयी और लन्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। यही हाल मेरी सास का था। वह झड़ता हुआ लन्ड कुतिया की तरह चाट रही थी। उसी के बगल उसकी बिटिया भोसड़ी की झड़ता हुआ लन्ड चाटने में जुटी हुई थी। लन्ड पीने का और उसका टोपा चाटने का मज़ा अपने आप में बड़ा मजेदार होता है। सास बहू नन्द जब एक साथ नंगी नंगी लन्ड पी रही हों तो उसे देख कर कौन मस्त नहीं हो जायगा।
दोस्तों, आपका भी लौड़ा खड़ा होगा। तो फिर किसी के मुंह में घुसेड़ दो न लन्ड ? अगर आप लड़की हैं तो फिर आपकी चूत काबू के बाहर हो गयी होगी। आप भी किसी का लौड़ा पकड़ कर पेल लो अपनी चूत में फिर देखो कितना मज़ा आता है ?
फिर हम सबने नंगे नंगे ही खाना खाया और खूब मस्ती की बातें की। सास बोली यार अब तुम लोग मेरे सामने ही मेरी बहू की बेटी की बुर चोदना। मैं इन दोनों की बुर चुदते हुए देखना चाहती हूँ। मैं कहा हां यार आज तो बहुत बढ़िया मौक़ा है। आज तुम मेरे आगे ही मेरी नन्द की चोदो चूत और सास का चोदो भोसड़ा ? ये दोनों मादर चोद बड़ी चुदक्कड़ है और तुम्हे खूब मज़ा आएगा। तब तक नन्द बोली हां यार आज तो होली है आज चाहे जिसकी बुर ले लो। पर पहले तुम लोग चोदो मेरी भाभी की बुर और फिर चोदो मेरी माँ की चूत।आज मैं खुद तुम लोगों के लन्ड इन दोनों की बुर में पेलूंगी। इस तरह जबरदस्त चुदाई का माहौल बन गया।
अचानक मैं आगे बढ़ी और ज़फर का लन्ड पकड़ लिया। मैं उसे बड़े प्यार से हिलाने लगी, चूमने लगी और प्यार करने लगी। मेरी दाहिनी तरफ मेरी सास शिवा का लन्ड हिला रही थीं। मैं मन में कहने लगी की सास तो भोसड़ी की इतनी बड़ी हो गयी है लेकिन लन्ड पकड़ने में बिलकुल १६ साल की लौंडिया लगती है। देखो न कितनी बेशरम है बुर चोदी, अपनी बेटी के सामने कैसे लन्ड चूस रही है। इतना ही नहीं वह लन्ड अपनी बेटी की बुर में भी पेलने को तैयार है। मैं उसकी बहू हूँ मुझसे भी कोई पर्दा नहीं है। उसकी इच्छा है की वह मेरे अंदर सब जगह लन्ड पेल दे। मेरी बायीं तरफ मेरी नन्द साईमन का लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। वह भी भोसड़ी की अपनी अम्मी से कम नहीं है। उसे भी अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाने में बड़ा मज़ा आता है।
मैं बीच में थी। मेरी गांड की तरफ मेरी सास और नन्द का मुंह था और मेरा मुंह उन दोनों की गांड के बीच में था। ज़फर का लन्ड मेरी चूत में घुस गया, शिवा ने अपना लन्ड सास के भोसड़ा में पेल दिया और साइमन लन्ड पेल कर नन्द की बुर चोदने लगा। हम तीनो रंडी की तरह चुदवाने लगीं। मैं दाहिने हाथ से शिवा के पेल्हड़ और बाएं हाथ से साइमन के पेल्हड़ सहलाने लगी। वो दोनों ज़फर के पेल्हड़ सहला सहला कर मज़ा लेने लगीं। चुदाई धकाधक होने लगी।
इतने में सास बोली :- बेटा ज़फर, फाड़ डालो तुम मेरी बहू की बुर ? बेटा साइमन तुम तो बुर अच्छी तरह से चोद लेते हो। आज मेरी बेटी की बुर बचने न पाए ससुरी ? पूरा लन्ड पेल पेल के चोद डालो मेरी बेटी की बुर ? आज होली में तुम्हे एक अच्छा मौक़ा मिला है।
नन्द बोली :- हाय शिवा, तुम मादर चोद मेरी माँ का भोसड़ा चोद रहे हो ? आगे भी ऐसे ही चोदते रहना मेरी माँ का भोसड़ा। और तुम ज़फर मेरी भाभी की बुर पहली बार चोद रहे हो। मज़ा तो तुम्हे खूब आ रहा होगा। अब आगे भी आना तो चोद कर जाना मेरी भाभी की चूत। वैसे मुझे मालूम हुआ है की तुम अपनी भाभी की बुर भी इसी तरह लेते हो ?
मेरे कहा - हाय मेरे राजा शिवा, ये मेरी सास का भोसड़ा है चोदते चोदते तेरे लन्ड की गांड फट जाएगी। लेकिन चोदना बंद नहीं करना। और तुम साइमन मेरी नन्द की बुर ले रहे हो। ये मेरी बुर चोदी नन्द की बुर बड़ी टाइट है। इसे चोद चोद कर ढीली कर दो।
हम सब इसी तरह की गन्दी गन्दी बातें करती हुई भकाभक चुदवाने लगीं। मैं सोंचने लगी की होली का मौक़ा भी कितना मस्त और मसालेदार होता है ? होली में चुदवाने का एक अलग ही तरीके के मज़ा मिलता है।
दूसरे दिन ज़फर का फोन आया। वह बोला अरे सारा भाभी आज फिर हम लोग चोदने के लिए आ रहे हैं। पर आज मेरे साथ दो और नए दोस्त होगें। शिवा और साइमन मेरी खाला की बुर लेने गए हैं। मैंने कहा आ जाओ। हम सब घर में ही हैं। मैंने यह बात अपनी सास और नन्द को बताई तो वह भी उछल पड़ी। सास तो बोली हाय बहू आज फिर मुझे तेरी बुर चोदने को मिलेगी। मैंने कहा नहीं सासू जी आज मैं चुदवाऊँगी नहीं बल्कि चोदूंगी ? वह बोली हाय दईया तू बुर चोदी क्या कह रही है सारा ? तब तक मेरी नन्द समीरा भी वहीँ आ गयी। मैंने कहा आज मैं लन्ड चोदूंगी। समीरा बोली आये हाय भाभी तो फिर मैं भी लन्ड चोदूंगी। सास बोली हाय दईया तुम दोनों लन्ड चोदोगी तो क्या मैं बैठी बैठी झांटें गिनूँगी ? मैं भी लन्ड चोदूंगी।
ये सब बातें हो ही रहीं थी की इतने में ज़फर आ गया। उसके साथ दो दोस्त थे। वह बोला भाभी यह हैं मेरे दोस्त नसीब और यह है करीम। मैं इन दोनों की बीवियां चोदता हूँ और ये दोनों मेरी बीवी चोदते हैं। मेरी बीवी इन दोनों के लन्ड बहुत पसंद करती है। इसलिए मुझे यकीन है की आप लोगों को भी इनके लन्ड पसंद आयेगें ?
फिर क्या बिछ गयी चादरें और निकल आये मैदान में लन्ड ? लन्ड के सामने आ गयी मस्तानी चूत और मस्तानी तन हुई चूंचियां। उसके बाद होने लगा चुदाई का झमाझम जशन ?
होली के बाद भी हम अक्सर इसी तरह मिलकर कई लड़कों से चुदवाने लगीं।
सास बहू नन्द तीनों भोसड़ी की एक ही कमरे में ग़ैर मरदों के ऊपर चढ़ी हुई नंगी नंगी चोद रही हैं लन्ड ? सास अपनी बेटी और बहू को लन्ड चोदते हुए देख रही है। बहू अपनी सास और नन्द को लन्ड चोदते हुए देख रही है और नन्द अपनी भाभी और अपनी माँ को लन्ड चोदते हुए देख रही है। ये तीनो लन्ड बहन चोद पराये मर्दों के हैं। न इसमें कोई ससुर का लन्ड है न ही बेटे का लन्ड और न ही नंदोई का लन्ड ? इतना ही नहीं ये तीनो लन्ड अदल बदल कर भी चोद रही हैं। तीनो की मस्ती सातवें आसमान पर है। सास बेटी और बहू की बुर में लन्ड पेल रही है, बहू अपनी सास और नन्द की चूत में लन्ड घुसेड़ रही है और नन्द अपनी माँ के भोसड़ा में और भाभी की चूत में लन्ड घुसा रही है।
इतनी आग, इतनी मस्ती और इतनी बेशरम चुदाई बहुत कम देखने को मिलती है। जहाँ सास कहती है की आज मैं अपनी बहू और बेटी की बुर चोद डालूँगी, बहू कहती मैं भी अपनी सास और नन्द की चूत फाड़ डालूँगी और नन्द कहती है की मैं तो आज माँ का भोसड़ा और भाभी की बुर चोद चोद कर हलवा बना दूँगी।
यह चुदाई जानती हो कब हो रही है ? यह चुदाई होली के मौके पर हो रही है।
होली में सबको लगे, सबसे प्यारा लन्ड
सास चुदाये, बहू भी और चुदाये नन्द
यह बहन चोद होली का माहौल भी बड़ा मजेदार होता है। चूत वैसे चाहे कभी चुदासी न हो लेकिन वह बुर चोदी होली के मौके पर जरूर चुदासी हो जाती है। लन्ड भोसड़ी का वैसे चाहे कभी खड़ा न होता हो पर होली के दरमियान जरूर खड़ा हो जाता है। लन्ड साला जब खड़ा हो जाता है तो वह चूत में घुसने के लिए बेताब हो जाता है। चूत जब उसे दिख जाती है तो वह फ़ौरन उसमे घुस जाता है। वह यह नहीं देखता की चूत है किसकी ? इसी तरह चूत जब चुदासी होती है तो वह लन्ड ढूंढने लगती है। लन्ड जब मिल जाता है तब वह उसे अपने अंदर फ़ौरन घुसेड़ लेती है। वह यह नहीं देखती की लन्ड बहन चोद है किसका ? कोई चाहे कुछ भी कहे और लाख कोशिश करे पर यह सच है की चूत की आग और लन्ड का जोश किसी के रोके नहीं रुकता ?
इसीलिए शायद कहा गया है की होली के मौके "होली में बाबा देवर लागे". यानी होली के मौके पर बाबा (grand father - in - law) भी देवर के समान लगता है। इसका मतलब यह है की होली में बाबा का भी लन्ड पकड़ने में और उससे चुदवाने में कोई हर्ज़ नहीं है। इसका असली मतलब यह है की कोई भी बीवी होली के समय किसी से भी चुदवा सकती है।
होली के समय मेरी सास मेरे पास आयी और बोली - देखो बहू, आज तो होली है। आज तो धमाल होना ही चाहिए ? आज तुम अपनी नन्द की मारो गांड ? लन्ड उसकी गांड में ठोंक दो बहन चोद ? उसके बाद चोदो उसकी माँ का भोसड़ा ? मैं मन में सोंचने लगी की सास तो अपना ही भोसड़ा चुदाने की बात कह रहीं हैं और अपनी ही बेटी की गांड भी मरवाना चाहती हैं। सास आज वास्तव में बहुत चुदासी है क्योंकि यह होली का माहौल है। होली में कुछ भी हो सकता है।
तब तक मेरी नन्द मेरे पास आयी और बोली - भाभी, आज ठोंक दो अपनी सास की गांड में लन्ड और पेल दो उसकी बिटिया की बुर में हाथ भर का लौड़ा ? बड़ी चुदासी हो गयी है तेरी सास की बुर और उसकी बेटी की चूत।
मैंने मन में कहा हाय दईया सास और नन्द दोनों एक ही तरह की हैं बुर चोदी । इधर नन्द अपनी माँ का भोसड़ा चुदाना चाहती है और उधर सास अपनी बिटिया की बुर ? लेकिन क्या इन दोनों को मेरी चूत का ख्याल नहीं है ? क्या मैं जवान नहीं हूँ ? क्या मेरी चूत में आग नहीं है ? ये दोनों मुझे क्या समझती हैं ? तभी मुझे कुछ आवाज़ सुनाई पड़ी। मैं धीरे से कमरे के नजदीक गयी और कान लगा कर उन दोनों की बातें सुनने लगी।
सास बोल रही थी - बेटी, तेरी भाभी की बुर तेरी माँ की चूत ? आज तुम अपनी भाभी की चोद डालो बुर ? आज होली है ? आज तुम्हे जो भी लन्ड मिले उसे पहले अपनी भाभी की चूत में घुसेड़ दो और फिर घुसेड़ दो लन्ड अपनी माँ के भोसड़ा में ?
होली के माहौल में सब जायज़ होता है बेटी।
होली में बहू की बुर, बेटी की चूत, माँ का भोसड़ा सब बराबर ?
नन्द बोली - अम्मी, तेरी बहू की बुर, तेरी बेटी की चूत ? आज तुमको भी जो लन्ड मिले उसे पहले अपनी बहू की बुर में पेलो। पहले चोदो अपनी बहू की चूत ? फिर वही लन्ड पेल दो अपनी बिटिया की बुर में ?
उन दोनों की बात सुन कर मैं तो दंग रह गयी। मैं मन में बोली हाय दईया मैं तो इन लोगों के बारे में गलत सोंच रही थी। ये तो मेरी चूत का बहुत ख्याल रख रही हैं। पहला ही लन्ड मेरी चूत में पेलने की बात कह रही हैं। अब तो मुझे चाहिए की मैं भी इन दोनों की चूत का ख्याल रखूँ।
मेरा नाम है सारा दोस्तों, मेरी सास का नाम है आयना और मेरी नन्द है समीरा। मैं इस घर की बहू हूँ। मैं २४ साल की एक बेहद खूबसूरत बीवी हूँ। एक दिन हम तीनो एक साथ बैठी हुई बातें कर रही थीं। तभी मेरी नन्द ने खुल कर कहा देखो भाभी मैं जवान हूँ तुम भी जवान हो और मेरी माँ भी जवान हैं। हम तीनो को चाहिए लन्ड ? लन्ड के बिना हमारा गुज़ारा नहीं है और हम एक दूसरे से छिप छिप कर लन्ड का मज़ा खुल कर नहीं ले सकतीं। फिर क्यों हम एक साथ लन्ड का मज़ा लिया करें ? तब तक सास बोली देखो बहू मेरी बेटी जब जवान हुई उसी दिन से मैंने उसके ऊपर से कण्ट्रोल हटा लिया और उसे सेक्स का पाठ पढ़ा दिया। हम दोनों साथ साथ लन्ड का मज़ा लेने लगीं और अब तुम आ गयी हो तो सोने पे सुहाग हो गया है। पहले मैं कहती थी बेटी, तेरी माँ की चूत ? अब मैं बहू, तेरी सास का भोसड़ा भी कहूँगी ? तब तक नन्द बोली भाभी मैं पहले कहती हूँ अम्मी तेरी बिटिया की बुर ? अब मैं भाभी तेरी नन्द की चूत भी कहूँगी ? यह सब सुनकर मुझे भी जोश आ गया और तब मैं उसी लहज़े में बोली - मैं भी कहूँगी सासू तेरी बहू की बुर ? और कहूँगी तेरी भाभी का भोसड़ा, नन्द रानी ? मेरी बात सुनकर उन दोनों ने मुझे गले लगा लिया।
मेरा शौहर दुबई में काम करता है और साल में २/३ बार ही आता है। मेरा ससुर भी वहीँ रहता है। वह भी २/३ बार ही आता है। मेरी नन्द की शादी हो चुकी है। उसकी ससुराल इसी शहर में है। आजकल होली का टाइम है और मेरी नन्द यहीं हमारे पास है। हम तीनो होली का मज़ा लेने का प्लान बना रही हैं। हमारा मोहल्ला बहुत अच्छा है। यहाँ सब लोग मिलकर होली, दिवाली और ईद मानते हैं। बड़ा अच्छा लगता है और मज़ा भी खूब आता है। ऐसा माहौल बहुत कम देखने को मिलता है।
इतने में शोर गुल सुनाई पड़ा - लन्ड चूत की टोली है - बुरा न मानो होली है ? आज चुदा लो होली है - चोदा चोदी होली है। हम सब बाहर देखने लगी तो मालूम हुआ की तीन लड़के यही सब बकते हुए हमारे घर में घुस आये। उनके हाथ में रंग और गुलाल था। वो सब आते ही हमारे मुंह में रंग और गुलाल लगाने लगे। हम सब भी उसी मस्ती में मस्त हो गयीं और हम भी लड़कों के रंग और गुलाल मलने लगीं। तब तक किसी ने सास के ब्लाउज़ में हाथ घुसेड़ कर रंग लगा दिया। तो सास ने उसके पैजामे में हाथ घुसड़ कर रंग लगा दिया। मस्ती और बढ़ने लगी। वो लड़के हमारी चूंचियां रंगने लगे तो हम भी उनके लन्ड और पेल्हड़ रंगने लगीं। सास ने एक लड़के का कुर्ता फाड़ दिया। एक लड़के का पैजामा फाड़ डाला तो उसका लन्ड नंगा नंगा दिखने लगा। फिर हाथा पाईं में हमारे भी कपड़े फटने आगे। मेरी चूंचियां नंगी हो गयीं तो नन्द की चूत। उधर सास का भोसड़ा भी दिखने लगा। हम सबको मज़ा आने लगा और देखते ही देखते तीनो लड़के मादर चोद नंगे हो गए। इधर हम सब भी बेशरम हो गयीं और हमने भी अपने बचे खुचे कपड़े उतार फेंका। तीनो लन्ड हमारे सामने तन कर खड़े हो गये और तब तक हमारी चूंचियां भी तन चुकी थीं।
मेरी सास ने ज़फर का लन्ड पकड़ लिया और उसे बड़े प्यार से हिलाने लगी। मेरी नन्द ने शिवा का लन्ड पकड़ा और उसे चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी। मैंने साइमन का लौड़ा लिया और उसके पेल्हड़ थामे हुए लन्ड का हाल चाल लेने लगी। सभी बहन चोद लाल, पीले, हरे, गुलाबी लन्ड बड़े प्यारे लग रहे थे। मन तो लन्ड मुंह में लेने का था लेकिन रंग और गुलाल के कारन नहीं ले पा रही थी। यही हाल लड़कों का भी था वह भी लाल, गुलाबी, हरी, बैगनी चूत का मज़ा लूट रहे थे। हमारी चूत पर हाथ फेर रहे थे और चूतड़ों पर हाथ रगड़ रहे थे। वो सब रंगीन चूंचियां भी दबा दबा कर मज़ा कर रहे थे। मस्तियाँ बढ़ती जा रहीं थीं। मैंने खेल शुरू होने के पहले एक विडियो सेट कर दिया था। जो कुछ भी कमरे में हो रहा था उसका विडियो अपने आप बनता जा रहा था। हम सब नंगी नंगी कैमरा के सामने लन्ड हिला हिला कर हंस रहीं थीं।
इतने में सास बोली :-
बहू तुम्हारी गांड में, लौड़ा दूँगी पेल
फिर बोलूंगी चोद लो, ये होली का खेल
मैंने भी सास को सुना दिया :-
सास तुम्हारा भोसड़ा मैं चोदूंगी आज
लौड़े सारे पेल दूं मिट जाये बुर की खाज़
मेरी नन्द तो बुर चोदी बड़े मूड में थी। वह बोली अरे भाभी :-
नन्द की बुर में ठोंक दो,लन्ड अभी दो चार
मेरे मुंह से गिर रही, लन्ड देख कर लार
तब तक हमारी चूत की आग और भड़क उठी थी । अब बिना चुदवाये किसी से रहा नहीं जा रहा था। इसलिए हम सब लोग बाथ रूम चली गयीं। वहां जाकर हमने सारे लन्ड पर साबुन लगा लगा कर खूब नहलाया और लड़कों ने हमारी चूँचियों पर, चूत पर और गांड पर साबुन लगा कर खूब नहलाया। इसी दौरान लन्ड जब नहा धोकर साफ़ हो गये तो उन पर प्यार आ गया। मैंने ज़फर का लन्ड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी। सास ने शिवा का लौड़ा मुंह में लिया और नन्द ने साइमन का लौड़ा। हम तीनो लन्ड चूमने, चाटने और चूसने लगीं। मैं थोड़ी देर में एक हाथ से पेल्हड़ थाम कर दूसरे हाथ से लन्ड का मुठ्ठ मारने लगी।
मेरा मन लन्ड पीने का हो गया। मुझे देख कर सास और नन्द भी लन्ड का सड़का लगाने लगीं। ज़फर बोला हाय सारा मैं निकलने वाला हूँ। मेरे कहा तो फिर तू मेरे मुंह में निकल जा। मैंने मुंह फैला दिया और फिर उसके लन्ड ने २/४ पिचकारी छोड़ दीं। मेरे मुंह लन्ड के रस से भर गया। मैं सारा रस पी गयी और लन्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। यही हाल मेरी सास का था। वह झड़ता हुआ लन्ड कुतिया की तरह चाट रही थी। उसी के बगल उसकी बिटिया भोसड़ी की झड़ता हुआ लन्ड चाटने में जुटी हुई थी। लन्ड पीने का और उसका टोपा चाटने का मज़ा अपने आप में बड़ा मजेदार होता है। सास बहू नन्द जब एक साथ नंगी नंगी लन्ड पी रही हों तो उसे देख कर कौन मस्त नहीं हो जायगा।
दोस्तों, आपका भी लौड़ा खड़ा होगा। तो फिर किसी के मुंह में घुसेड़ दो न लन्ड ? अगर आप लड़की हैं तो फिर आपकी चूत काबू के बाहर हो गयी होगी। आप भी किसी का लौड़ा पकड़ कर पेल लो अपनी चूत में फिर देखो कितना मज़ा आता है ?
फिर हम सबने नंगे नंगे ही खाना खाया और खूब मस्ती की बातें की। सास बोली यार अब तुम लोग मेरे सामने ही मेरी बहू की बेटी की बुर चोदना। मैं इन दोनों की बुर चुदते हुए देखना चाहती हूँ। मैं कहा हां यार आज तो बहुत बढ़िया मौक़ा है। आज तुम मेरे आगे ही मेरी नन्द की चोदो चूत और सास का चोदो भोसड़ा ? ये दोनों मादर चोद बड़ी चुदक्कड़ है और तुम्हे खूब मज़ा आएगा। तब तक नन्द बोली हां यार आज तो होली है आज चाहे जिसकी बुर ले लो। पर पहले तुम लोग चोदो मेरी भाभी की बुर और फिर चोदो मेरी माँ की चूत।आज मैं खुद तुम लोगों के लन्ड इन दोनों की बुर में पेलूंगी। इस तरह जबरदस्त चुदाई का माहौल बन गया।
अचानक मैं आगे बढ़ी और ज़फर का लन्ड पकड़ लिया। मैं उसे बड़े प्यार से हिलाने लगी, चूमने लगी और प्यार करने लगी। मेरी दाहिनी तरफ मेरी सास शिवा का लन्ड हिला रही थीं। मैं मन में कहने लगी की सास तो भोसड़ी की इतनी बड़ी हो गयी है लेकिन लन्ड पकड़ने में बिलकुल १६ साल की लौंडिया लगती है। देखो न कितनी बेशरम है बुर चोदी, अपनी बेटी के सामने कैसे लन्ड चूस रही है। इतना ही नहीं वह लन्ड अपनी बेटी की बुर में भी पेलने को तैयार है। मैं उसकी बहू हूँ मुझसे भी कोई पर्दा नहीं है। उसकी इच्छा है की वह मेरे अंदर सब जगह लन्ड पेल दे। मेरी बायीं तरफ मेरी नन्द साईमन का लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। वह भी भोसड़ी की अपनी अम्मी से कम नहीं है। उसे भी अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाने में बड़ा मज़ा आता है।
मैं बीच में थी। मेरी गांड की तरफ मेरी सास और नन्द का मुंह था और मेरा मुंह उन दोनों की गांड के बीच में था। ज़फर का लन्ड मेरी चूत में घुस गया, शिवा ने अपना लन्ड सास के भोसड़ा में पेल दिया और साइमन लन्ड पेल कर नन्द की बुर चोदने लगा। हम तीनो रंडी की तरह चुदवाने लगीं। मैं दाहिने हाथ से शिवा के पेल्हड़ और बाएं हाथ से साइमन के पेल्हड़ सहलाने लगी। वो दोनों ज़फर के पेल्हड़ सहला सहला कर मज़ा लेने लगीं। चुदाई धकाधक होने लगी।इतने में सास बोली :- बेटा ज़फर, फाड़ डालो तुम मेरी बहू की बुर ? बेटा साइमन तुम तो बुर अच्छी तरह से चोद लेते हो। आज मेरी बेटी की बुर बचने न पाए ससुरी ? पूरा लन्ड पेल पेल के चोद डालो मेरी बेटी की बुर ? आज होली में तुम्हे एक अच्छा मौक़ा मिला है।
नन्द बोली :- हाय शिवा, तुम मादर चोद मेरी माँ का भोसड़ा चोद रहे हो ? आगे भी ऐसे ही चोदते रहना मेरी माँ का भोसड़ा। और तुम ज़फर मेरी भाभी की बुर पहली बार चोद रहे हो। मज़ा तो तुम्हे खूब आ रहा होगा। अब आगे भी आना तो चोद कर जाना मेरी भाभी की चूत। वैसे मुझे मालूम हुआ है की तुम अपनी भाभी की बुर भी इसी तरह लेते हो ?
मेरे कहा - हाय मेरे राजा शिवा, ये मेरी सास का भोसड़ा है चोदते चोदते तेरे लन्ड की गांड फट जाएगी। लेकिन चोदना बंद नहीं करना। और तुम साइमन मेरी नन्द की बुर ले रहे हो। ये मेरी बुर चोदी नन्द की बुर बड़ी टाइट है। इसे चोद चोद कर ढीली कर दो।
हम सब इसी तरह की गन्दी गन्दी बातें करती हुई भकाभक चुदवाने लगीं। मैं सोंचने लगी की होली का मौक़ा भी कितना मस्त और मसालेदार होता है ? होली में चुदवाने का एक अलग ही तरीके के मज़ा मिलता है।
दूसरे दिन ज़फर का फोन आया। वह बोला अरे सारा भाभी आज फिर हम लोग चोदने के लिए आ रहे हैं। पर आज मेरे साथ दो और नए दोस्त होगें। शिवा और साइमन मेरी खाला की बुर लेने गए हैं। मैंने कहा आ जाओ। हम सब घर में ही हैं। मैंने यह बात अपनी सास और नन्द को बताई तो वह भी उछल पड़ी। सास तो बोली हाय बहू आज फिर मुझे तेरी बुर चोदने को मिलेगी। मैंने कहा नहीं सासू जी आज मैं चुदवाऊँगी नहीं बल्कि चोदूंगी ? वह बोली हाय दईया तू बुर चोदी क्या कह रही है सारा ? तब तक मेरी नन्द समीरा भी वहीँ आ गयी। मैंने कहा आज मैं लन्ड चोदूंगी। समीरा बोली आये हाय भाभी तो फिर मैं भी लन्ड चोदूंगी। सास बोली हाय दईया तुम दोनों लन्ड चोदोगी तो क्या मैं बैठी बैठी झांटें गिनूँगी ? मैं भी लन्ड चोदूंगी।
ये सब बातें हो ही रहीं थी की इतने में ज़फर आ गया। उसके साथ दो दोस्त थे। वह बोला भाभी यह हैं मेरे दोस्त नसीब और यह है करीम। मैं इन दोनों की बीवियां चोदता हूँ और ये दोनों मेरी बीवी चोदते हैं। मेरी बीवी इन दोनों के लन्ड बहुत पसंद करती है। इसलिए मुझे यकीन है की आप लोगों को भी इनके लन्ड पसंद आयेगें ?
फिर क्या बिछ गयी चादरें और निकल आये मैदान में लन्ड ? लन्ड के सामने आ गयी मस्तानी चूत और मस्तानी तन हुई चूंचियां। उसके बाद होने लगा चुदाई का झमाझम जशन ?
होली के बाद भी हम अक्सर इसी तरह मिलकर कई लड़कों से चुदवाने लगीं।
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