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चार महिलाऐं खेलती है लंड लण्ड का खेल - Land ke khel mein jeet aur haar ke rochak inaam
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एक बार एक कॉलेज की चार लड़कियां बैठी हुई शराब पी रही थीं और खुल कर बातें भी कर रहीं थीं। चारों के हाथ में शराब की बोतल थी और दूसरे हाथ में सिगरेट। मुंह से सिगरेट के धुआं का छल्ला निकाल निकाल कर अपनी अपनी बातें बता रहीं थीं। कहतें है की शराब के नशे में सच बात मुंह से निकल ही आती है।
पहली लड़की बोली :- मैं तो साफ़ और सच्ची सच्ची बात करती हूँ। मैं बहन चोद किसी से कुछ भी नहीं छुपाती। न मैं झूंठ बोलती हूँ और न किसी का झूंठ बरदास्त करती हूँ। मैं तो 'लण्ड' 'लण्ड' खेलती हूँ। हारती हूँ तो 'बुर' दे देती हूँ और जीतती हूँ तो 'लन्ड' ले लेती हूँ।
दूसरी लड़की बोली :- 'लण्ड' 'लण्ड' तो मैं भी खेलती हूँ. हारती हूँ तो गांड मारती हूँ और जीतती हूँ तो 'लन्ड' चोदती हूँ।
तीसरी लड़की बोली :- जी हां, मुझे भी 'लण्ड' 'लण्ड' खेलने का शौक है। हारती हूँ तो गांड मरवा लेती हूँ और जीतती हूँ तो माँ चोद देती हूँ।
चौथी लड़की बोली :- अरे तो मैं क्या किसी से कम हूँ ? मुझे भी 'लण्ड' 'लण्ड' खेलना आता है. हारती हूँ तो माँ चुदवा लेती हूँ और जीतती हूँ तो माँ चोद देती हूँ। मेरी पड़ोस में एक आंटी रहती हैं। नाम है उनका शमीमा। वह बहुत ही हंसमुख और मस्त आंटी हैं। मैं उनसे हर तरह की बातें कर लेती हूँ। गन्दी से भी गन्दी बातें, अश्लील बातें. चोदा चोदी की बातें और गाली गलौज भी कर लेती हूँ। मुझे तो बड़ा मज़ा आता है उनके साथ। वह भोसड़ी की मेरी चूत के बारे में ऊट पटांग कहती है और मैं बुर चोदी उसके भोसड़ा के बारे में अल्लम गल्लम कहा करती हूँ। उसकी बेटी है समीना। आंटी उससे भी कहती है समीना तेरी माँ का भोसड़ा, तेरी माँ की चूत ?
एक दिन मैं उसके घर गयी और खूब मस्ती से बातें करने लगी। मैंने कहा देखो शमीमा आंटी, मुझे घर में तभी अच्छा लगता है, जब घर में लड़क हों, लड़के नंगे हों और लड़कों के लन्ड खड़े हों। मुझे लड़कों को नंगा देखने का बड़ा शौक है और उससे ज्यादा शौक हैं उनके खड़े लन्ड देखने का। फिर मैं भी हो जातीं हूँ नंगी। मेरी चूंचियां, मेरी चूत, मेरी गांड सब हो जातीँ हैं नंगी। उसके बाद शुरू हो जाता है लन्ड, चूत और चूंची का खेल ?
आंटी बोली - हाय दईया तू तो भोसड़ी की बहुत चालू चीज है ? तू सच कह रही है की मुझे चूतिया बना रही है ?
मैंने कहा - सच कह रही हूँ, आंटी। न मानो तो अपनी बेटी से पूंछ लो ? वो तो मेरे साथ ही रहती है। वह क्या तुमसे झूंठ बोलेगी ?
आंटी बोली - वो बुर चोदी मुझसे झूंठ बोल के कहाँ रह पायेगी ? पर मुझे यह बता क्या वह भी लड़कों के आगे नंगी हो जाती है ?
मैंने कहा - हां बिलकुल हो जाती है नंगी । वह तो मुझसे पहले उतार देती है अपने कपड़े और हो जाती है बिलकुल नंगी। फिर मुझसे पहले पकड़ लेती है लन्ड ? एक नहीं आंटी दो दो तीन तीन लन्ड एक साथ पकड़ती है तेरी बेटी। उसे लन्ड पीने का बड़ा शौक है।
आंटी ने कहा - हाय दईया यहाँ तो ऐसी बनी रहती है की जैसे उसने कभी लन्ड देखा ही नहीं ? बड़ा नाटक करती है मादर चोद, उल्लू की पठ्ठी ? उसकी माँ का भोसड़ा ? आने दो आज मैं उसके सामने उसकी माँ चोदूँगी ?
मैंने कहा - चोदने के लिए लन्ड मैं दे दूँगी, आंटी ?
आंटी हंसने लगीं।
मेरा नाम है परवीन, दोस्तों। मैं २६ साल की हूँ और एक प्राइवेट डिग्री कॉलेज में पढ़ाती हूँ। हमारे कॉलेज के लड़का लड़की साथ साथ पढ़तें हैं। सभी एडल्ट है। कोई भी २० साल से कम नहीं है। मैं एक फ्लैट में मुम्बई में रहती हूँ। मेरे साथ आंटी की बेटी समीना भी रहती है। यह सच है की मैं अपने घर में लड़कों को नंगा रखती हूँ। उनके लन्ड पकड़ती हूँ, लन्ड चूसती हूँ, चाटती हूँ और फिर मुठ्ठ मार कर पीती हूँ लन्ड। पता नहीं क्यों और कैसे मुझे लन्ड का रस पीने का चस्का लग गया। मैं सच में वीर्य पी जाती हूँ चाट जाती हूँ. जबसे मैंने लन्ड पीना शुरू किया है तबसे मेरी चूंचियां डबल हो गयीं है और मेरी खूबसूरती में जबरदस्त निखार आ गया है। इसलिए मैं लन्ड पीना अब छोड़ नहीं सकती। मेरे साथ समीना भी पीती है लन्ड, आंटी ? वह तो मुझसे ज्यादा मस्ती करती है। खूब गालियां बकती है और चुदवाते समय तो वह रंडी से भी बदतर हो जाती है। हम दोनों एक दूसरे की चूत में लन्ड पेलती है और खूब एन्जॉय करती हैं।
२/३ लड़के मेरे घर में नंगे बने ही रहतें हैं। कॉलेज का जो भी लड़का मेरे घर आता है मैं सबसे पहले उसे नंगा करती हूँ। मैं भी नंगी हो जाती हूँ और फिर उसका लन्ड पकड़ कर उससे बात करती हूँ। यह बात कॉलेज में सबको मालूम हो गया है। इसलिए अब कुछ ज्यादा ही लड़के मेरे घर आने लगे हैं।
आंटी ने कहा :- अच्छा यह बताओ परवीन बेटी, मैं तेरी बातों पर यकीन कैसे करूँ? हो सकता है तुम झूंठ बोल रही हो ताकि मैं अपनी बेटी की अच्छी तरह खबर लूँ।
मैंने कहा :- अरे नही आंटी मैं बिलकुल सह कह रही हूँ।
फिर मैंने आंटी को अपने मोबाइल से निकाल कर वीडियो दिखा दिया जिसमे उसकी बेटी समीना अपने सारे कपड़े उतार कर एक लड़के का लन्ड बड़ी मस्ती से पी रही है। आंटी देख कर बोली हाय अल्ला, तू तो बिलकुल सही कह रही है परवीन। अब तो मैं समीना की माँ जरूर चोद दूँगी ? आने दो उसे बहन चोद को ? ।
मैंने कहा - अभी रुको आंटी मैं तुम्हे एक चीज और दिखाती हूँ। मैंने एक ऑडियो निकाला और उसे ऑन कर दिया। उससे गालियां निकलने लगीं - "साले मादर चोद, तेरी माँ का भोसड़ा, कुत्ते, कमीने, तेरी बहन का लन्ड, भोसड़ी के, मैं तेरी गाड़ में घुसेड़ दूँगी लन्ड, फाड़ डालूँगी तेरी माँ की चूत"
आंटी बोली - हाय अल्ला, यह तो उसी की आवाज़ है। बाप रे बाप इतनी गालियां देती हैं ? समीना बुर चोदी है तो बड़ी हरामजादी ? ये तो मादर चोद बड़ी बेशरम हो गयी है। देखो न कितना झूंठ बोल रही है। अपनी माँ की चूत तो कभी फड़वा नहीं पाई आज तक और अब उसकी माँ की चूत फाड़ने चली है ? अच्छा यह बताओ परवीन और क्या क्या करती हो तुम लोग ?
मैंने कहा - आंटी, हम लोग सब कुछ करती हैं। यह पूंछो की हम लोग क्या क्या नहीं करतीं हैं ?
वह बोली - अच्छा तो चल, यही बता दे की तुम लोग क्या क्या नहीं करती हो ?
मैंने कहा - हम लोग बच्चे नहीं पैदा करतीं, झांटू लन्ड यानी झांट वाले लन्ड पर हाथ नहीं लगाती, जबरदस्ती किसी का लन्ड नहीं चोदती, मुझे और समीना को चोदने के लिए किसी को मना नहीं करती और किसी मरद को अपने घर में कोई कपड़ा नहीं पहनने देती ? बाकी सब कुछ करतीं हूँ।
आंटी बोली - हाय दईया इसका मतलब तुम सबके लन्ड पकड़ती हो, लन्ड चूसती चाटती हो, मुठ्ठ मार कर पीती लन्ड पीती हो, लन्ड चूत में पेल कर चुदवाती हो, गांड मरवाती हो, सबसे चुदवाती हो, एक दूसरे की चूत में लन्ड पेलती हो, सबको गालियां देती हो, सब करती हो तुम लोग मगर अपनी माँ नहीं चुदवाती हो ?
मैंने कहा - हाय रब्बा आंटी तुमने हमें सही पकड़ लिया। समीना ने अब तक अपनी माँ नहीं चुदवाई और मैंने भी नहीं चुदवाई अपनी माँ ? मेरी माँ ने तो मेरे अब्बू को तलाक देकर किसी और से शादी कर ली। अब तो मेरी माँ बुर चोदी जरूर कहीं किसी से अपना भोसड़ा चुदवाती होगी। पर इसका अता पता मुझे नहीं है। आंटी जी, तुम भी चलो न मेरे साथ मुम्बई ? मैं तुम्हे मुम्बई घुमा दूँगी और फिर तुम्हे उन लड़कों से भी मिला दूँगी जो मेरे घर में नंगे नंगे पड़े रहतें हैं।
आंटी ने कहा - हाय दईया लगता है की मेरी बेटी समीना तो मेरा भोसड़ा नहीं चुदवा पाई पर तू मेरा भोसड़ा जरूर चुदवायेगी। ठीक है मैं भी चलती हूँ तेरे साथ।
मैं शमीमा आंटी को लेकर अपने घर मुम्बई में आ गयी। घर की एक चाभी मेरे पास रहती है और एक चाभी समीना के पास। मैं दरवाजा खोल कर अंदर घुस गयी। तब मुझे अंदर कमरे से कुछ बात करने की आवाज़ सुनाई पड़ी। मैंने कहा आंटी जी तुम बाहर से खिड़की से ही झाँक कर देखो की अंदर क्या हो रहा है ? मैं अंदर जाती हूँ और समीना से बात करती हूँ। मैं जब कमरे में घुसी तो मैंने तीन लड़कों को नंगे पाया। मैं उन्हें पहचानती थी और उनके लन्ड भी पहचानती थी। मैंने कहा अरे भोसड़ी की समीना ये तीन तीन लन्ड यहाँ खड़े टन टना रहें हैं तू भोसड़ी की कहाँ है ? माँ चुदाने गयी है क्या तू अपनी ? वह आते हुए बोली नहीं यार मैं तो शराब की बोतल लेने लगी थी। तुम जानती हो न की मुझे लन्ड के साथ शराब पीना कितना पसंद है ? वह आयी और सबके लिए एक एक पैग बनाया और शराब पीते हुए लन्ड चाटने लगी। वह भी मादर चोद झकाझक एकदम नंगी थी। लड़के उसकी चूंचियां मसलने लगे और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगे।
आंटी यह सब देख कर बड़ी हैरान हो गयीं। उसे यह नहीं मालूम था की मेरी बेटी इतनी अय्यास हो गयी है। वो तीन लड़के थे विक्कु, काके और रज़ा ? मैंने भी अपने कपड़े उतार दिया और नंगी नंगी रज़ा का लन्ड हिलाने लगी। वहीँ से आंटी को लन्ड दिखाने लगी। तो आंटी ने इशारा करते हुए कहा भोसड़ी की परवीन मुझे भी बुलाओ न लन्ड चाटने के लिए। तब तक एक और लड़का बाथ रूम से निकल आया। मैंने कहा अरे वाह बहन का लौड़ा डम्पी तू भोसड़ी का कहाँ छिपा था ? मैं उसका भी लन्ड हिलाने लगी। अब मेरे हाथ में भी दो लन्ड और समीना के हाथ में भी दो लन्ड।
मैंने पूंछा समीना अगर ऐसे में तुझे तेरी अम्मी देख लें तो तू क्या करेगी ?
करुँगी क्या ? उसको भी एक लन्ड पकड़ा दूँगी ? तुम मेरी अम्मी को नहीं जानती हो परवीन ? मेरी अम्मी बहुत मस्त और सेक्सी हैं। उसे भी लन्ड उतने ही प्यारे हैं जितने की मुझे ?
अच्छा तो तुम यह बात दावे के साथ कैसे कह सकती हो ?
अरे यार मैंने अपनी अम्मी को एक दिन दो दो ग़ैर मर्दों के लन्ड चाटते हुए देख लिया था। मैं बड़ी देर तक देखती रही और बोली कुछ भी नहीं।
तो फिर तूने अगले दिन अपनी अम्मी से बात नहीं की इसके बारे में ? तू तो बहन चोद जवान हो गयी थी।
अगले दिन क्या मैंने तो आज तक उसके बारे में बात नहीं की ? हां उसका असर यह जरूर हुआ की मेरी लन्ड पकड़ने की हिम्मत बढ़ गयी। मैंने सोंचा की अगर किसी दिन मेरी अम्मी ने मुझे लन्ड पकड़ने के लिए डांटा तो मैं भी उसकी पोल पट्टी खोल दूँगी ?
अच्छा यह बता ? आजकल तो लड़कियां जवान हो जाने के बाद अपनी माँ चुदाने लगतीं हैं। तू क्या अपनी माँ चुदवायेगी ? तुझे कोई शर्म तो नहीं आएगी ?
शर्म काहे की ? अगर अम्मी मेरे सामने चुदवाने के लिए तैयार हों तो मुझे चुदवाने में अच्छा लगेगा। मज़ा आएगा। वैसे भी मैं यहाँ चुदवाती हूँ न ?
तब मैंने कहा अच्छा समीना मैं अभी आती हूँ। लो तुम ये दोनों लन्ड भी हिलाती रहो।
मैं बाहर आयी और आंटी को थोड़ा दूर ले गयी और चुपके चुपके बातें करने लगी। आंटी ने कहा हाय परवीन समीना तो बहन चोद बहुत बड़ी अय्यास हो गयी है। मैं इस बात से खुश हूँ की वह जवानी का मज़ा लूट रही है पर इस बात से नाराज़ हूँ की उसने अभी अपनी माँ नहीं चुदवाई ? मेरे कहा अरे आंटी अब तो सब ठीक हो जायेगा। अब वह कहाँ बच कर जा सकती है। उसकी तो मैं माँ चोद दूँगी। अब तुम मेरे साथ कमरे में चलो। मैं आपके ऊपर एक चादर डाल कर उसके सामने ले चलती हूँ। मैंने ऐसा ही किया और कहा समीना देख तुमसे कोई मिलने आयी है। वह बोली कौन है भोसड़ी की जो इस समय मिलने आ गयी ?
तब मैंने चादर हटा दी। तब समीना अपनी अम्मी को देख कर थोड़ा सहम भी गयी और शर्मा भी गयी। तब तक आंटी बोली कोई बात नहीं बेटी ये सब जवानी में होता है। शर्माने की कोई जरुरत नहीं। तू अपना काम जारी रख। वह बोली नहीं अम्मी ऐसे कैसे हो सकता है ? मैं तो बस यूँ ही ,,,,,,,,,,,,,,? आंटी ने कहा मैं आधे घंटे से तुम्हे देख रही हूँ और मैंने सब कुछ देख लिया है। घर में तुम बिलकुल भोली भाली लड़की बनी रहती हो। ऐसा मालूम होता है की तूने कभी कोई लन्ड पकड़ा ही नहीं। पकड़ना तो दूर तूने अभी तक कोई लन्ड देखा ही नहीं ? पर यहाँ पर तू लन्ड पे लन्ड चाटती चली जा रही है ? एक दिन तूने मुझे चुपके चुपके लन्ड चाटते हुए देखा था आज मैंने तुम्हे चुपके चुपके लन्ड चाटते हुए देख लिया। हिसाब बराबर हो गया। आंटी फिर मुस्कराकर बोलीं देख बेटी लन्ड तुझे भी चाहिए और मुझे भी। इसमें शर्माने की कोई जरुरत नहीं है, तेरी माँ का भोसड़ा, बहन चोद ? और ये परवीन तेरी दोस्त है न ? तो इसकी दोस्त की माँ की चूत ?
यह सुनते ही समीना की शर्म छू मंतर हो गयी। वह बोली तेरी बिटिया की बुर, अम्मी ? फिर हम सब लोग पड़े. इतने में मैंने डम्पी का लन्ड आंटी को पकड़ा दिया, काके का लन्ड मैंने पकड़ लिया और समीना रज़ा और विक्कू का लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। बस फिर २ मिनट में आंटी के कपड़े भी उतर गए। कमरे में चार लन्ड और तीन चूत का खेल शुरू हो गया। काके का समूचा लन्ड मझे बड़ा अच्छा लगा। समीना भी विक्कू के अनकटे लन्ड पर इतराने लगी। उसे पहली बात कोई कटा लन्ड मिला। तब तक डम्पी ने लन्ड मेरी चूत में पेल दिया और मैं भी मजे से चुदवाने लगी। समीना ने जब अपनी चूत में रज़ा का लन्ड पेला और अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी तो उसकी अम्मी उसे देखती रह गयी। वह बोली हाय परवीन मेरी बेटी तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हो गयी दी। मुझे तो लगता है की वह रंडी से भी आगे निकल गयी है। तब तक आंटी ने भी लौड़ा अपने भोसड़ा में पेला और मस्ती से चुदवाने लगी। आंटी की जवानी देखते ही बनती थी।
मैं दोनों माँ बेटी को एक साथ चुदवाते देख कर बड़ी खुश हो रही थी। थोड़ी देर तक धकाधक चुदवाने के बाद समीना जो विक्कू का लन्ड चाट रही थीं, वह आगे बढ़ी। उसने अपनी माँ की चूत से डम्पी का लन्ड निकाल कर उसकी जगह विक्कू का लन्ड घुसा दिया। मैंने कहा हाय आंटी देखा समीना अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाने लगी है न ? आंटी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी। उसने डम्पी का लन्ड समीना की बुर में घुसेड़ दिया। समीना उसी के सामने गचर गचर चुदवाने लगी। मैंने कहा समीना देखा अब तेरी माँ भी अपनी बिटिया की बुर चुदाने में पीछे नहीं है। आंटी अभी मस्त जवान हैं। समीना बोली परवीन तेरी आंटी की बहन की बुर ? तब तक आंटी बोली परवीन तेरी सहेली की माँ का लन्ड ? अब तो वह ससुरी बहुत बड़ी चुदक्कड़ हो गयी है। इस तरह हम तीनो मस्ती की बातें करती हुई खूब झमाझम रात भर चुदवाया। न मैं कम थी, न समीनाऔर न उसकी माँ ? हम तीनों ने सबके लन्ड पेल पेल कर चुदाई का खूब मज़ा लूटा।
आंटी जब तक वहां रहीं तब तक हर रोज़ भकाभक चुदवाती रहीं। कुछ दिन बाद आंटी अपने घर वापस आ गयीं। उधर मैं और समीना कुछ नये लड़कों को बुला कर उन्हें नंगा करके उनके लन्ड हिलाने लगीं। हमें जब कोई नया लन्ड मिलता है तो बड़ा मज़ा आता है। इस समय मेरे घर में ३/४ नये नये लड़के एकदम नंगे नंगे मेरे सामने बैठें हैं। दो लड़कों के लन्ड से मैं खेल रही हूँ और दो लन्ड से समीना भी खेल रही है।
एक महीने के बाद मैं अपने घर आयी और फिर एक दन आंटी के फर चली गयी। आंटी मुझे देख कर बड़ी खुश हो गयी और मुझे बड़े प्यार से बैठाया। मुझे नास्ता वगैरह कराया। मैं देख रही थी की आंटी के कपड़े बड़े अस्त व्यस्त हैं। उसकी चूंचियां तो एकदम नंगी हैं। उसकी मोटी मोटी जांघें भी दिख रहीं हैं। मैंने पूंछा आंटी ऐसी क्या बात हो गयी है ? वह बोली बेटी परवीन मुझे भी तेरा रोग लग गया है। मैंने कहा कौन सा रोग आंटी जी ? तब वह मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अंदर कमरे में ले गयीं। मैंने कमरे में घुसते ही देखा की वहाँ पलंग पर तीन जवान मरद एकदम नंगे लेटे हैं। उनके लन्ड टन टना रहें हैं। उनके खड़े लन्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। मेरी चूत चुचुहाने लगी और मेरे मुंह से लार टपकने लगी। मैं बोली हाय आंटी लन्ड तो बहन चोद बड़े मोटे तगड़े हैं। आंटी ने मुझे एक लन्ड पकड़ाते हुए कहा :-
देखो परवीन बेटी, , मुझे घर में तभी अच्छा लगता है, जब घर में मरद हों, लड़केमरद नंगे हों और मरदों के
लन्ड खड़े हों। मुझे मरदों को नंगा देखने का बड़ा शौक है और उससे ज्यादा शौक हैं उनके खड़े लन्ड देखने का। फिर मैं भी हो जातीं हूँ नंगी। मेरी चूंचियां, मेरी चूत, मेरी गांड सब हो जातीँ हैं नंगी। उसके बाद शुरू हो जाता है लन्ड, चूत और चूंची का खेल ?
मैंने हँस कर कहा हाय दईया आंटी ये तो वही बात है जो मैंने आपसे पहले कही थी। आंटी बोली हां परवीन तभी तो मैं कह रही हूँ की मुझे तेरा ही रोग लग गया है। अब तो मैं पहले से ज्यादा लन्ड से खेलने लगीं हूँ। एक नहीं ३-३/ ४-४ लन्ड एक साथ लेती हूँ और सबको मज़ा देती हूँ।
एक बार एक कॉलेज की चार लड़कियां बैठी हुई शराब पी रही थीं और खुल कर बातें भी कर रहीं थीं। चारों के हाथ में शराब की बोतल थी और दूसरे हाथ में सिगरेट। मुंह से सिगरेट के धुआं का छल्ला निकाल निकाल कर अपनी अपनी बातें बता रहीं थीं। कहतें है की शराब के नशे में सच बात मुंह से निकल ही आती है।
पहली लड़की बोली :- मैं तो साफ़ और सच्ची सच्ची बात करती हूँ। मैं बहन चोद किसी से कुछ भी नहीं छुपाती। न मैं झूंठ बोलती हूँ और न किसी का झूंठ बरदास्त करती हूँ। मैं तो 'लण्ड' 'लण्ड' खेलती हूँ। हारती हूँ तो 'बुर' दे देती हूँ और जीतती हूँ तो 'लन्ड' ले लेती हूँ।
दूसरी लड़की बोली :- 'लण्ड' 'लण्ड' तो मैं भी खेलती हूँ. हारती हूँ तो गांड मारती हूँ और जीतती हूँ तो 'लन्ड' चोदती हूँ।
तीसरी लड़की बोली :- जी हां, मुझे भी 'लण्ड' 'लण्ड' खेलने का शौक है। हारती हूँ तो गांड मरवा लेती हूँ और जीतती हूँ तो माँ चोद देती हूँ।
चौथी लड़की बोली :- अरे तो मैं क्या किसी से कम हूँ ? मुझे भी 'लण्ड' 'लण्ड' खेलना आता है. हारती हूँ तो माँ चुदवा लेती हूँ और जीतती हूँ तो माँ चोद देती हूँ। मेरी पड़ोस में एक आंटी रहती हैं। नाम है उनका शमीमा। वह बहुत ही हंसमुख और मस्त आंटी हैं। मैं उनसे हर तरह की बातें कर लेती हूँ। गन्दी से भी गन्दी बातें, अश्लील बातें. चोदा चोदी की बातें और गाली गलौज भी कर लेती हूँ। मुझे तो बड़ा मज़ा आता है उनके साथ। वह भोसड़ी की मेरी चूत के बारे में ऊट पटांग कहती है और मैं बुर चोदी उसके भोसड़ा के बारे में अल्लम गल्लम कहा करती हूँ। उसकी बेटी है समीना। आंटी उससे भी कहती है समीना तेरी माँ का भोसड़ा, तेरी माँ की चूत ?
एक दिन मैं उसके घर गयी और खूब मस्ती से बातें करने लगी। मैंने कहा देखो शमीमा आंटी, मुझे घर में तभी अच्छा लगता है, जब घर में लड़क हों, लड़के नंगे हों और लड़कों के लन्ड खड़े हों। मुझे लड़कों को नंगा देखने का बड़ा शौक है और उससे ज्यादा शौक हैं उनके खड़े लन्ड देखने का। फिर मैं भी हो जातीं हूँ नंगी। मेरी चूंचियां, मेरी चूत, मेरी गांड सब हो जातीँ हैं नंगी। उसके बाद शुरू हो जाता है लन्ड, चूत और चूंची का खेल ?
आंटी बोली - हाय दईया तू तो भोसड़ी की बहुत चालू चीज है ? तू सच कह रही है की मुझे चूतिया बना रही है ?
मैंने कहा - सच कह रही हूँ, आंटी। न मानो तो अपनी बेटी से पूंछ लो ? वो तो मेरे साथ ही रहती है। वह क्या तुमसे झूंठ बोलेगी ?
आंटी बोली - वो बुर चोदी मुझसे झूंठ बोल के कहाँ रह पायेगी ? पर मुझे यह बता क्या वह भी लड़कों के आगे नंगी हो जाती है ?
मैंने कहा - हां बिलकुल हो जाती है नंगी । वह तो मुझसे पहले उतार देती है अपने कपड़े और हो जाती है बिलकुल नंगी। फिर मुझसे पहले पकड़ लेती है लन्ड ? एक नहीं आंटी दो दो तीन तीन लन्ड एक साथ पकड़ती है तेरी बेटी। उसे लन्ड पीने का बड़ा शौक है।
आंटी ने कहा - हाय दईया यहाँ तो ऐसी बनी रहती है की जैसे उसने कभी लन्ड देखा ही नहीं ? बड़ा नाटक करती है मादर चोद, उल्लू की पठ्ठी ? उसकी माँ का भोसड़ा ? आने दो आज मैं उसके सामने उसकी माँ चोदूँगी ?
मैंने कहा - चोदने के लिए लन्ड मैं दे दूँगी, आंटी ?
आंटी हंसने लगीं।
मेरा नाम है परवीन, दोस्तों। मैं २६ साल की हूँ और एक प्राइवेट डिग्री कॉलेज में पढ़ाती हूँ। हमारे कॉलेज के लड़का लड़की साथ साथ पढ़तें हैं। सभी एडल्ट है। कोई भी २० साल से कम नहीं है। मैं एक फ्लैट में मुम्बई में रहती हूँ। मेरे साथ आंटी की बेटी समीना भी रहती है। यह सच है की मैं अपने घर में लड़कों को नंगा रखती हूँ। उनके लन्ड पकड़ती हूँ, लन्ड चूसती हूँ, चाटती हूँ और फिर मुठ्ठ मार कर पीती हूँ लन्ड। पता नहीं क्यों और कैसे मुझे लन्ड का रस पीने का चस्का लग गया। मैं सच में वीर्य पी जाती हूँ चाट जाती हूँ. जबसे मैंने लन्ड पीना शुरू किया है तबसे मेरी चूंचियां डबल हो गयीं है और मेरी खूबसूरती में जबरदस्त निखार आ गया है। इसलिए मैं लन्ड पीना अब छोड़ नहीं सकती। मेरे साथ समीना भी पीती है लन्ड, आंटी ? वह तो मुझसे ज्यादा मस्ती करती है। खूब गालियां बकती है और चुदवाते समय तो वह रंडी से भी बदतर हो जाती है। हम दोनों एक दूसरे की चूत में लन्ड पेलती है और खूब एन्जॉय करती हैं।
२/३ लड़के मेरे घर में नंगे बने ही रहतें हैं। कॉलेज का जो भी लड़का मेरे घर आता है मैं सबसे पहले उसे नंगा करती हूँ। मैं भी नंगी हो जाती हूँ और फिर उसका लन्ड पकड़ कर उससे बात करती हूँ। यह बात कॉलेज में सबको मालूम हो गया है। इसलिए अब कुछ ज्यादा ही लड़के मेरे घर आने लगे हैं।
आंटी ने कहा :- अच्छा यह बताओ परवीन बेटी, मैं तेरी बातों पर यकीन कैसे करूँ? हो सकता है तुम झूंठ बोल रही हो ताकि मैं अपनी बेटी की अच्छी तरह खबर लूँ।
मैंने कहा :- अरे नही आंटी मैं बिलकुल सह कह रही हूँ।
फिर मैंने आंटी को अपने मोबाइल से निकाल कर वीडियो दिखा दिया जिसमे उसकी बेटी समीना अपने सारे कपड़े उतार कर एक लड़के का लन्ड बड़ी मस्ती से पी रही है। आंटी देख कर बोली हाय अल्ला, तू तो बिलकुल सही कह रही है परवीन। अब तो मैं समीना की माँ जरूर चोद दूँगी ? आने दो उसे बहन चोद को ? ।
मैंने कहा - अभी रुको आंटी मैं तुम्हे एक चीज और दिखाती हूँ। मैंने एक ऑडियो निकाला और उसे ऑन कर दिया। उससे गालियां निकलने लगीं - "साले मादर चोद, तेरी माँ का भोसड़ा, कुत्ते, कमीने, तेरी बहन का लन्ड, भोसड़ी के, मैं तेरी गाड़ में घुसेड़ दूँगी लन्ड, फाड़ डालूँगी तेरी माँ की चूत"
आंटी बोली - हाय अल्ला, यह तो उसी की आवाज़ है। बाप रे बाप इतनी गालियां देती हैं ? समीना बुर चोदी है तो बड़ी हरामजादी ? ये तो मादर चोद बड़ी बेशरम हो गयी है। देखो न कितना झूंठ बोल रही है। अपनी माँ की चूत तो कभी फड़वा नहीं पाई आज तक और अब उसकी माँ की चूत फाड़ने चली है ? अच्छा यह बताओ परवीन और क्या क्या करती हो तुम लोग ?
मैंने कहा - आंटी, हम लोग सब कुछ करती हैं। यह पूंछो की हम लोग क्या क्या नहीं करतीं हैं ?
वह बोली - अच्छा तो चल, यही बता दे की तुम लोग क्या क्या नहीं करती हो ?
मैंने कहा - हम लोग बच्चे नहीं पैदा करतीं, झांटू लन्ड यानी झांट वाले लन्ड पर हाथ नहीं लगाती, जबरदस्ती किसी का लन्ड नहीं चोदती, मुझे और समीना को चोदने के लिए किसी को मना नहीं करती और किसी मरद को अपने घर में कोई कपड़ा नहीं पहनने देती ? बाकी सब कुछ करतीं हूँ।
आंटी बोली - हाय दईया इसका मतलब तुम सबके लन्ड पकड़ती हो, लन्ड चूसती चाटती हो, मुठ्ठ मार कर पीती लन्ड पीती हो, लन्ड चूत में पेल कर चुदवाती हो, गांड मरवाती हो, सबसे चुदवाती हो, एक दूसरे की चूत में लन्ड पेलती हो, सबको गालियां देती हो, सब करती हो तुम लोग मगर अपनी माँ नहीं चुदवाती हो ?
मैंने कहा - हाय रब्बा आंटी तुमने हमें सही पकड़ लिया। समीना ने अब तक अपनी माँ नहीं चुदवाई और मैंने भी नहीं चुदवाई अपनी माँ ? मेरी माँ ने तो मेरे अब्बू को तलाक देकर किसी और से शादी कर ली। अब तो मेरी माँ बुर चोदी जरूर कहीं किसी से अपना भोसड़ा चुदवाती होगी। पर इसका अता पता मुझे नहीं है। आंटी जी, तुम भी चलो न मेरे साथ मुम्बई ? मैं तुम्हे मुम्बई घुमा दूँगी और फिर तुम्हे उन लड़कों से भी मिला दूँगी जो मेरे घर में नंगे नंगे पड़े रहतें हैं।
आंटी ने कहा - हाय दईया लगता है की मेरी बेटी समीना तो मेरा भोसड़ा नहीं चुदवा पाई पर तू मेरा भोसड़ा जरूर चुदवायेगी। ठीक है मैं भी चलती हूँ तेरे साथ।
मैं शमीमा आंटी को लेकर अपने घर मुम्बई में आ गयी। घर की एक चाभी मेरे पास रहती है और एक चाभी समीना के पास। मैं दरवाजा खोल कर अंदर घुस गयी। तब मुझे अंदर कमरे से कुछ बात करने की आवाज़ सुनाई पड़ी। मैंने कहा आंटी जी तुम बाहर से खिड़की से ही झाँक कर देखो की अंदर क्या हो रहा है ? मैं अंदर जाती हूँ और समीना से बात करती हूँ। मैं जब कमरे में घुसी तो मैंने तीन लड़कों को नंगे पाया। मैं उन्हें पहचानती थी और उनके लन्ड भी पहचानती थी। मैंने कहा अरे भोसड़ी की समीना ये तीन तीन लन्ड यहाँ खड़े टन टना रहें हैं तू भोसड़ी की कहाँ है ? माँ चुदाने गयी है क्या तू अपनी ? वह आते हुए बोली नहीं यार मैं तो शराब की बोतल लेने लगी थी। तुम जानती हो न की मुझे लन्ड के साथ शराब पीना कितना पसंद है ? वह आयी और सबके लिए एक एक पैग बनाया और शराब पीते हुए लन्ड चाटने लगी। वह भी मादर चोद झकाझक एकदम नंगी थी। लड़के उसकी चूंचियां मसलने लगे और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगे।
आंटी यह सब देख कर बड़ी हैरान हो गयीं। उसे यह नहीं मालूम था की मेरी बेटी इतनी अय्यास हो गयी है। वो तीन लड़के थे विक्कु, काके और रज़ा ? मैंने भी अपने कपड़े उतार दिया और नंगी नंगी रज़ा का लन्ड हिलाने लगी। वहीँ से आंटी को लन्ड दिखाने लगी। तो आंटी ने इशारा करते हुए कहा भोसड़ी की परवीन मुझे भी बुलाओ न लन्ड चाटने के लिए। तब तक एक और लड़का बाथ रूम से निकल आया। मैंने कहा अरे वाह बहन का लौड़ा डम्पी तू भोसड़ी का कहाँ छिपा था ? मैं उसका भी लन्ड हिलाने लगी। अब मेरे हाथ में भी दो लन्ड और समीना के हाथ में भी दो लन्ड।
मैंने पूंछा समीना अगर ऐसे में तुझे तेरी अम्मी देख लें तो तू क्या करेगी ?
करुँगी क्या ? उसको भी एक लन्ड पकड़ा दूँगी ? तुम मेरी अम्मी को नहीं जानती हो परवीन ? मेरी अम्मी बहुत मस्त और सेक्सी हैं। उसे भी लन्ड उतने ही प्यारे हैं जितने की मुझे ?
अच्छा तो तुम यह बात दावे के साथ कैसे कह सकती हो ?
अरे यार मैंने अपनी अम्मी को एक दिन दो दो ग़ैर मर्दों के लन्ड चाटते हुए देख लिया था। मैं बड़ी देर तक देखती रही और बोली कुछ भी नहीं।
तो फिर तूने अगले दिन अपनी अम्मी से बात नहीं की इसके बारे में ? तू तो बहन चोद जवान हो गयी थी।
अगले दिन क्या मैंने तो आज तक उसके बारे में बात नहीं की ? हां उसका असर यह जरूर हुआ की मेरी लन्ड पकड़ने की हिम्मत बढ़ गयी। मैंने सोंचा की अगर किसी दिन मेरी अम्मी ने मुझे लन्ड पकड़ने के लिए डांटा तो मैं भी उसकी पोल पट्टी खोल दूँगी ?
अच्छा यह बता ? आजकल तो लड़कियां जवान हो जाने के बाद अपनी माँ चुदाने लगतीं हैं। तू क्या अपनी माँ चुदवायेगी ? तुझे कोई शर्म तो नहीं आएगी ?
शर्म काहे की ? अगर अम्मी मेरे सामने चुदवाने के लिए तैयार हों तो मुझे चुदवाने में अच्छा लगेगा। मज़ा आएगा। वैसे भी मैं यहाँ चुदवाती हूँ न ?
तब मैंने कहा अच्छा समीना मैं अभी आती हूँ। लो तुम ये दोनों लन्ड भी हिलाती रहो।
मैं बाहर आयी और आंटी को थोड़ा दूर ले गयी और चुपके चुपके बातें करने लगी। आंटी ने कहा हाय परवीन समीना तो बहन चोद बहुत बड़ी अय्यास हो गयी है। मैं इस बात से खुश हूँ की वह जवानी का मज़ा लूट रही है पर इस बात से नाराज़ हूँ की उसने अभी अपनी माँ नहीं चुदवाई ? मेरे कहा अरे आंटी अब तो सब ठीक हो जायेगा। अब वह कहाँ बच कर जा सकती है। उसकी तो मैं माँ चोद दूँगी। अब तुम मेरे साथ कमरे में चलो। मैं आपके ऊपर एक चादर डाल कर उसके सामने ले चलती हूँ। मैंने ऐसा ही किया और कहा समीना देख तुमसे कोई मिलने आयी है। वह बोली कौन है भोसड़ी की जो इस समय मिलने आ गयी ?
तब मैंने चादर हटा दी। तब समीना अपनी अम्मी को देख कर थोड़ा सहम भी गयी और शर्मा भी गयी। तब तक आंटी बोली कोई बात नहीं बेटी ये सब जवानी में होता है। शर्माने की कोई जरुरत नहीं। तू अपना काम जारी रख। वह बोली नहीं अम्मी ऐसे कैसे हो सकता है ? मैं तो बस यूँ ही ,,,,,,,,,,,,,,? आंटी ने कहा मैं आधे घंटे से तुम्हे देख रही हूँ और मैंने सब कुछ देख लिया है। घर में तुम बिलकुल भोली भाली लड़की बनी रहती हो। ऐसा मालूम होता है की तूने कभी कोई लन्ड पकड़ा ही नहीं। पकड़ना तो दूर तूने अभी तक कोई लन्ड देखा ही नहीं ? पर यहाँ पर तू लन्ड पे लन्ड चाटती चली जा रही है ? एक दिन तूने मुझे चुपके चुपके लन्ड चाटते हुए देखा था आज मैंने तुम्हे चुपके चुपके लन्ड चाटते हुए देख लिया। हिसाब बराबर हो गया। आंटी फिर मुस्कराकर बोलीं देख बेटी लन्ड तुझे भी चाहिए और मुझे भी। इसमें शर्माने की कोई जरुरत नहीं है, तेरी माँ का भोसड़ा, बहन चोद ? और ये परवीन तेरी दोस्त है न ? तो इसकी दोस्त की माँ की चूत ?
यह सुनते ही समीना की शर्म छू मंतर हो गयी। वह बोली तेरी बिटिया की बुर, अम्मी ? फिर हम सब लोग पड़े. इतने में मैंने डम्पी का लन्ड आंटी को पकड़ा दिया, काके का लन्ड मैंने पकड़ लिया और समीना रज़ा और विक्कू का लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। बस फिर २ मिनट में आंटी के कपड़े भी उतर गए। कमरे में चार लन्ड और तीन चूत का खेल शुरू हो गया। काके का समूचा लन्ड मझे बड़ा अच्छा लगा। समीना भी विक्कू के अनकटे लन्ड पर इतराने लगी। उसे पहली बात कोई कटा लन्ड मिला। तब तक डम्पी ने लन्ड मेरी चूत में पेल दिया और मैं भी मजे से चुदवाने लगी। समीना ने जब अपनी चूत में रज़ा का लन्ड पेला और अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी तो उसकी अम्मी उसे देखती रह गयी। वह बोली हाय परवीन मेरी बेटी तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हो गयी दी। मुझे तो लगता है की वह रंडी से भी आगे निकल गयी है। तब तक आंटी ने भी लौड़ा अपने भोसड़ा में पेला और मस्ती से चुदवाने लगी। आंटी की जवानी देखते ही बनती थी।
मैं दोनों माँ बेटी को एक साथ चुदवाते देख कर बड़ी खुश हो रही थी। थोड़ी देर तक धकाधक चुदवाने के बाद समीना जो विक्कू का लन्ड चाट रही थीं, वह आगे बढ़ी। उसने अपनी माँ की चूत से डम्पी का लन्ड निकाल कर उसकी जगह विक्कू का लन्ड घुसा दिया। मैंने कहा हाय आंटी देखा समीना अपनी माँ का भोसड़ा चुदवाने लगी है न ? आंटी भी कहाँ पीछे रहने वाली थी। उसने डम्पी का लन्ड समीना की बुर में घुसेड़ दिया। समीना उसी के सामने गचर गचर चुदवाने लगी। मैंने कहा समीना देखा अब तेरी माँ भी अपनी बिटिया की बुर चुदाने में पीछे नहीं है। आंटी अभी मस्त जवान हैं। समीना बोली परवीन तेरी आंटी की बहन की बुर ? तब तक आंटी बोली परवीन तेरी सहेली की माँ का लन्ड ? अब तो वह ससुरी बहुत बड़ी चुदक्कड़ हो गयी है। इस तरह हम तीनो मस्ती की बातें करती हुई खूब झमाझम रात भर चुदवाया। न मैं कम थी, न समीनाऔर न उसकी माँ ? हम तीनों ने सबके लन्ड पेल पेल कर चुदाई का खूब मज़ा लूटा।
आंटी जब तक वहां रहीं तब तक हर रोज़ भकाभक चुदवाती रहीं। कुछ दिन बाद आंटी अपने घर वापस आ गयीं। उधर मैं और समीना कुछ नये लड़कों को बुला कर उन्हें नंगा करके उनके लन्ड हिलाने लगीं। हमें जब कोई नया लन्ड मिलता है तो बड़ा मज़ा आता है। इस समय मेरे घर में ३/४ नये नये लड़के एकदम नंगे नंगे मेरे सामने बैठें हैं। दो लड़कों के लन्ड से मैं खेल रही हूँ और दो लन्ड से समीना भी खेल रही है।
एक महीने के बाद मैं अपने घर आयी और फिर एक दन आंटी के फर चली गयी। आंटी मुझे देख कर बड़ी खुश हो गयी और मुझे बड़े प्यार से बैठाया। मुझे नास्ता वगैरह कराया। मैं देख रही थी की आंटी के कपड़े बड़े अस्त व्यस्त हैं। उसकी चूंचियां तो एकदम नंगी हैं। उसकी मोटी मोटी जांघें भी दिख रहीं हैं। मैंने पूंछा आंटी ऐसी क्या बात हो गयी है ? वह बोली बेटी परवीन मुझे भी तेरा रोग लग गया है। मैंने कहा कौन सा रोग आंटी जी ? तब वह मुझे मेरा हाथ पकड़ कर अंदर कमरे में ले गयीं। मैंने कमरे में घुसते ही देखा की वहाँ पलंग पर तीन जवान मरद एकदम नंगे लेटे हैं। उनके लन्ड टन टना रहें हैं। उनके खड़े लन्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। मेरी चूत चुचुहाने लगी और मेरे मुंह से लार टपकने लगी। मैं बोली हाय आंटी लन्ड तो बहन चोद बड़े मोटे तगड़े हैं। आंटी ने मुझे एक लन्ड पकड़ाते हुए कहा :-
देखो परवीन बेटी, , मुझे घर में तभी अच्छा लगता है, जब घर में मरद हों, लड़केमरद नंगे हों और मरदों के
लन्ड खड़े हों। मुझे मरदों को नंगा देखने का बड़ा शौक है और उससे ज्यादा शौक हैं उनके खड़े लन्ड देखने का। फिर मैं भी हो जातीं हूँ नंगी। मेरी चूंचियां, मेरी चूत, मेरी गांड सब हो जातीँ हैं नंगी। उसके बाद शुरू हो जाता है लन्ड, चूत और चूंची का खेल ?
मैंने हँस कर कहा हाय दईया आंटी ये तो वही बात है जो मैंने आपसे पहले कही थी। आंटी बोली हां परवीन तभी तो मैं कह रही हूँ की मुझे तेरा ही रोग लग गया है। अब तो मैं पहले से ज्यादा लन्ड से खेलने लगीं हूँ। एक नहीं ३-३/ ४-४ लन्ड एक साथ लेती हूँ और सबको मज़ा देती हूँ।
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