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मामा जी से चुदाई का आया निराला स्वाद – Mama ji se chudai ka aaya nirala swad
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मैं एस.सी. की पढ़ाई करने के लिए शहर गई हुई और होस्टल में रहती थी। होस्टल से थोड़ी सी दुरी पर मामा जी की जान-पहचान का एक आदमी रहता था। मामाजी ने मुझसे बोल दिया था की यदि मुझे कोई दिक्कत हो या किसी चीज की जरूरत हो तो उन्हें इस बारे में बता दूँ। वो आदमी करीब 50-55 साल का था और मामा जी का दोस्त होने के कारण मैं उसे भी मामा ही कहती थी। मैं कम्प्यूटर के लिये रोज़ शाम को वहां जाती थी। उस दिन मैं जब घर गई तो मामा ड्रिंक कर रहे थे और कुछ काम कर रहे थे। मैं रोज़ की तरह कम्प्यूटर पर अपने ईमेल चेक करने लगी। आज मामा मुझे घूर रहे थे। मुझे भी अहसास हुआ कि आज मामा कुछ और टाइप के मूड में हैं।
मैं एस.सी. की पढ़ाई करने के लिए शहर गई हुई और होस्टल में रहती थी। होस्टल से थोड़ी सी दुरी पर मामा जी की जान-पहचान का एक आदमी रहता था। मामाजी ने मुझसे बोल दिया था की यदि मुझे कोई दिक्कत हो या किसी चीज की जरूरत हो तो उन्हें इस बारे में बता दूँ। वो आदमी करीब 50-55 साल का था और मामा जी का दोस्त होने के कारण मैं उसे भी मामा ही कहती थी। मैं कम्प्यूटर के लिये रोज़ शाम को वहां जाती थी। उस दिन मैं जब घर गई तो मामा ड्रिंक कर रहे थे और कुछ काम कर रहे थे। मैं रोज़ की तरह कम्प्यूटर पर अपने ईमेल चेक करने लगी। आज मामा मुझे घूर रहे थे। मुझे भी अहसास हुआ कि आज मामा कुछ और टाइप के मूड में हैं।
वो मुझसे बोला - मुझे लगता है तुम्हें कम्प्यूटर की बहुत जरूरत है क्योंकि तुम रोज़ ही कम्प्यूटर प्रयोग करती हो.
मैंने कहा - हां मामा पर पापा मुझे अभी नहीं दिलायेंगे. उसने कहा - तुम चाहो तो ये कम्प्यूटर सेट तुम्हारा हो सकता है पर तुम्हे मेरा एक छोटा सा काम करना पड़ेगा.
सुनते ही मैं उछल पड़ी और बोली - सच मामा... बोलो बोलो क्या करना पड़ेगा.
मैं उठ कर मामा के पास आ गई।
उसने कहा - कुछ खास नहीं... वही जो तुम पहले कितनी ही बार कर चुकी हो...
मैंने कहा - अरे वाह मामा ...... तब तो कम्प्यूटर मेरा हो गया......" मैं चहक उठी।
उसने कहा - आओ... उस कमरे में...
मैं मामा के पीछे पीछे उनके बेड रूम में चली आई। उन्होने अन्दर से रूम को बन्द करके कुन्डी लगा दी। मुझे लगा कि मामा कुछ गड़बड़ करने वाले हैं। मेरा शक सही निकला। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
उन्होने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा - मैं बरसों से अकेला हूं... तुम्हें देख कर मेरी मर्दों वाली इच्छा भड़क उठी है... प्लीज़ मेरी मदद करो..."
मैंने कहा - मामा... पर आप तो मेरे पापा के बराबर है।
मैं सोचने लगी की मामा ने ये क्यों कहा कि तुम पहले कितनी ही बार कर चुकी हो... मामा को कैसे पता चला।
इतने में वो फिर बोले - सुनो तुम्हे मुझे कोई खतरा नहीं है... क्योंकि अब मेरी उमर नहीं रही... और फिर मेरा घर तो तुम्हारे लिये खुला है... तुम चाहो तो तुम्हारे दोस्त को भी यहा बुला सकती हो.
मैं समझ गई कि मामा को सब पता चल चुका है... अचानक मुझे सब याद आ गया... शायद मामा को मेरा ईमेल एड्रेस और पासवर्ड मिल गया था...जो गलती से मेज पर ही लिखा हुआ छूट गया था।
मैंने कहा - मामा... मेरा मेल पढ़ते है ना आप...
यह सुनकर मामा मुस्करा दिये। यह देखकर मैं डर गई और सोचने लगी अगर इसने मेरे मामाजी को बता दिया तो बात घर वालों तक पहुँच जाएगी. इसलिए मुझे बात मानने में ही फायदा लगा और फिर मुझे कम्प्यूटर भी मिल रहा था. मैं झट से उनकी छाती से लग गई।
उन्होंने थैंक्स कहा और मेरे चूतड़ दबा दिये। मैंने अपने होंठ उनकी तरफ़ बढ़ा दिये... उन्होने मेरे होंठो से अपने होंठ मिला दिये... दारू की तेज महक आई... मामा ने मेरी जीन्स ढीली कर दी... फिर मैंने स्वयं ही झुक कर उतार दी... टोप अपने आप ही उतार दिया। मामा ने बड़े प्यार से मेरे जिस्म को सहलाना शुरु कर दिया। मेरे बोबे फ़ड़क उठे... ब्रा कसने लग गई... पेंटी तंग लगने लगी... पर मुझे कुछ भी करने की जरूरत नहीं पड़ी... मामा ने खुद ही मेरी पुरानी सी ब्रा खींच कर उतार दी और पैंटी भी जोश में फ़ाड़ दी।
मैंने उससे कहा की मेरी पैंटी क्यों फाड़ दी. अब मैं क्या पहनूंगी।
उसने कहा - अब तुम मेरी रानी हो... तुम ये पहनोगी... नही... मेरे साथ चलना... एक से एक बढ़िया आइटम दिला दूंगा......" मामा जोश में भरे बोले जा रहे थे। मुझे नंगी करके मामा ने बिस्तर पर लेटा दिया। मेरे पांव चीर दिये और मेरी चूत पर अपने होन्ठ लगा दिये। मेरी चूत में से पानी निकलने लगा... चुदने की इच्छा बलवती होने लगी। मेरा दाना भी फ़ड़कने लगा... मामा जीभ से मेरे दाने को चाट रहे थे... साथ में जीभ चूत में भी अन्दर जा रही थी। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। अब मामा ने मेरे पांव और ऊपर उठा दिये...मेरी गाण्ड ऊपर आ गई... उन्होने मेरे चूतड़ की दोनो फ़ांके अपने हाथों से चौड़ा दी। और गाण्ड के छेद पर अपनी जीभ घुसा दी और गाण्ड को चाटने लगे। मुझे गाण्ड पर तेज गुदगुदी होने लगी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
मैंने कहा - हाय मामा... बहुत मजा आ रहा है...
कुछ देर गाण्ड चटने के बाद उनके हाथ मेरे बदन की मालिश करने लगे...
अब मैं मामा से लिपट पड़ी...उनकी कमीज़ और दूसरे कपड़े उतार फ़ेंके। उनका बदन एकदम चिकना था... कोई बाल नहीं थे... गोरा बदन... लम्बा और मोटा लण्ड झूलता हुआ। सुपाड़ा खुला हुआ ...लाल मोटा और चिकना। मैंने मामा का लण्ड पकड़ लिया और दबाना शुरू कर दिया। मामा के मुह से सिसकारी निकलने लगी।
उसने कहा - आहऽऽऽ.. कितने सालों बाद मुझे ये सुख मिला है... हाय... मसल डाल...
मैंने मामा का लण्ड मसलना और मुठ मारना चालू कर दिया। वो बिस्तर पर सीधे लेट गये उनका लण्ड खड़ा हो चुका था... मेरे से रहा नहीं गया... मैं उनके ऊपर बैठ गई और चूत के द्वार पर लण्ड रख दिया। मैंने जोश में जोर लगा कर सुपाड़ा को अन्दर लेने की कोशिश करने लगी... पर लण्ड बार बार इधर उधर मुड़ जाता था... शायद लण्ड पर पूरी तनाव नहीं आया था।
हाय... ये लैंड अंदर जा नहीं रहा है..." मैं तड़प उठी...
उसने कहा - बस ऐसे ही मुझे रगड़ती रहो... लण्ड मसलती रहो...।
मैं मामा से ऊपर ही लिपट पड़ी और चूत को उनके लण्ड पर मारने लगी। पर वो नहीं घुस रहा था। मैं उठी और उनके लण्ड को मुख में ले कर चूसने लगी... उन्के लण्ड मे बस थोड़ा सा उठान था। सीधा खड़ा था पर नरम था... मामा अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरे मुख को ही चोदने लगे। मैंने उनका सुपाड़ा बुरी तरह से चूस डाला और दांतो से कुचला भी... नतीजा... एक तेज पिचकारी ने मेरे मुख को भिगा दिया...मामा ज्यादा सह नहीं पाये थे। मामा जोर लगा लगा कर सारा वीर्य मेरे मुख में निकाल रहे थे। मैंने कोशिश की कि ज्यादा से ज्यादा मैं पी जाऊं। मैं उनका लण्ड पकड़ कर खींच खींच कर रस निकालने लगी... मामा का सारा माल बाहर आ चुका था। उनका सारा जोश ठंडा पड़ चुका था... उनका लण्ड और भी ज्यादा मुरझा गया था। और वो थक चुके थे।
मैं पलंग से उतर कर नीचे बैठ गई और दो अंगुलियों को चूत मे डाल कर अन्दर घुमाने लगी... कुछ ही देर में मैं भी झड़ गई। मैं जल्दी से उठी और बाथरूम में जा कर मुंह हाथ धो आई... मामा दरवाजे पर खड़े थे...
उन्होंने कहा - तुम्हे कैसे थैंक्स दूं... आज से ये घर तुम्हारा है...आओ भोजन करें...
मैंने पूछा - मामा... आपका लंड तो खड़ा होता ही नहीं है... फिर भी इतना ढेर सारा पानी कैसे निकला...
उसने कहा - बस ये ही तो खड़ा नहीं होता है... इच्छायें तो वैसी ही रहती हैं... इच्छायें शांत हो जाती है तो ही काम में मन लगता है...
बाहर से नौकर को बुला कर डिनर लगवा दिया... और कहा – मेरी कार ले जाओ ... और ये कम्प्यूटर सेट इसके होस्टल में लगा दो।
मैं खुश थी कि बिना चुदे ही कम्प्युटर मुझे मिल गया। डिनर के बाद मैं होस्टल जाने लगी तो एक बार मामा ने फिर से मुझे गले लगा लिया। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।
मैंने कहा - मामा ... प्लीज़ आप दुखी मत होना... मैं हूँ ना... आपका पूरा खयाल रखूंगी... मामा को किस करके मैं होस्टल की तरफ़ चल पड़ी।
मामा मुझे जाते हुए प्यार से निहारते रहे...... इसके बाद मुझे जब भी किसी भी सामान की जरुरत होती थी वो मेरे मांगते ही मिलने लगा.
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