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हॉस्टिल के पियोन ने तोड़ डाली मेरी सील Hospital ke pion ne tod dali meri seel
हस्पताल में चपड़ासी से चूत चुदाई , हॉस्टिल के पियोन ने तोड़ डाली मेरी सील Hospital ke pion ne tod dali meri seel , अस्पताल में पियन से चुद गई , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी.
मैं तब 18 साल की थी, मेरी मम्मी एक टीचर थी और पापा भागलपुर मे पहले से जॉब करते थे, सो मैं पटना मे अकेली रह गयी थी, मैं तब BCA कर रही थी तो मैने कॉलेज का होस्टल जाय्न कर लिया, होस्टल मे बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स थे, मोबाइल फोन भी अल्लावड नही था, बाहर जाना वीक मे एक बार पासिबल था, मैं तो वहां न्यू थी, ना किसी को ज्यादा अच्छे से जानती थी, ना ही कोई बॉय फ्रेंड था, धीरे धीरे मैने देखा की सब हॉस्टिल वाली लड़किया अपने बॉयफ्रेंड से काम करवाती है, मिलने जाती है, मेरा भी बहुत मन होता था की काश मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड होता.
मैं तब 18 साल की थी, मेरी मम्मी एक टीचर थी और पापा भागलपुर मे पहले से जॉब करते थे, सो मैं पटना मे अकेली रह गयी थी, मैं तब BCA कर रही थी तो मैने कॉलेज का होस्टल जाय्न कर लिया, होस्टल मे बहुत स्ट्रिक्ट रूल्स थे, मोबाइल फोन भी अल्लावड नही था, बाहर जाना वीक मे एक बार पासिबल था, मैं तो वहां न्यू थी, ना किसी को ज्यादा अच्छे से जानती थी, ना ही कोई बॉय फ्रेंड था, धीरे धीरे मैने देखा की सब हॉस्टिल वाली लड़किया अपने बॉयफ्रेंड से काम करवाती है, मिलने जाती है, मेरा भी बहुत मन होता था की काश मेरा भी कोई बॉयफ्रेंड होता.
मैं बिल्कुल अंजान थी उस जगह से, काफी दिक्कत आती जब कोई काम रहता, हमारे हॉस्टिल का मेस बिल्कुल हॉस्टिल से सटा हुआ ही है, आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। एक दिन मैं क्लास अटेंड करके मेस की तरफ आ रही थी, गर्मी के दिन थे, मैं पसीना पसीना हो चुकी थी, मेरे कपड़े पसीने से गीले हो चुके थे और गीले कपड़ो की वजह से मेरी चुचियाँ मेरे कपड़ो से साफ झलक रही थी, मैने देखा की किचन से कोई मुझे घूर रहा है, मैने भी अंदर झाँक कर देखा तो दिखा की एक न्यू नोकर आया है, वो लगभग 24-25 साल का था, उसका काला सा चेहरा मुझसे ज़्यादा लंबा था,वो मुझे अब भी घूर ही रहा था, मैं वहां से चली गयी, फिर धीरे- धीरे नोटीस किया की वो मुझे हमेशा ही घूरता है, बहुत गुस्सा आता था, पर सच कहु तो पहली बार मुझे कोई घूर रहा था तो इसलिए बहुत अच्छा भी लग रहा था, फिर मुझे एक दिन पॅड्स (स्टायफ्री) की ज़रूरत थी. और मेरे पास मेरे बेग मे एक भी नही बची थी, मैं क्या करू, रूममेट भी घर गयी हुई थी, तो सोचा की क्यों ना उस नोकर को बोलू.
मैने बहुत हिम्मत करके उसको बोला, वो दौड़ कर गया और ला कर दिया, फिर तो मुझे कुछ भी काम होता तो उसको ही कहती, वो एक बार मे कर देता, वो मुझे अच्छा लगने लगा था, वो मेरे आजू-बाजू घूमता रहता, हॉस्टिल मे मेरे लिए अलग से मस्त खाना बनाता, एक दिन कॉलेज मे फंक्सन था, मैने फंक्सन मे डान्स किया, और आते-आते इतना थक गयी कि आते ही सो गयी, सो कर उठी तो रात के 11बज रहे थे, मुझे बहुत भूख लगी थी, मैने सोचा की उसको बोलती हूँ, मैं जैसे ही उसके रूम मे जाकर उसको उठाने के लिए एंटर हुई तो पाया की वो सिर्फ़ अंडरवियर ही पहन कर सोया हुआ था, उसका अंडरवियर कुछ उठा हुआ सा था, मैं उसे देख कर हैरान थी और मेरे जिस्म मे उसके अंडरवियर के उठे हुए भाग को देख कर गुदगुदी सी होने लगी थी, मेरा भी मन कर रहा था की उसके अंडरवियर को हाथ लगा कर देख ही लू की वो उठी हुई चीज़ है क्या, पर मैने अपने आप पर काबू करते हुए उसको आवाज़ देकर उठाया, वो इतनी रात को मुझे देखकर हैरान हुआ.
मैने बोला कि मुझे भूख लगी है, सुबह से एक बार ही खाना खाया है, तो वो बोला- मेडम सो गई होगी, आप किचन में जाओ मैं आ रहा हूँ, मैं किचन की तरफ गई, वो आया, उसने रोटी सब्जी बनाई, मैं भी उसकी हेल्प कर रही थी, बीच-बीच मे उसका हाथ मेरी चुचियों को टच हो रहा था, मुझे शर्म आ रही थी और मैं हल्की-हल्की स्माइल भी कर रही थी, उसने इसको ग्रीन सिग्नल समझा, 11बजे, फंकषन की रात, कोई भी जाग नही रहा था हॉस्टिल मे, तो हमे कोई डिस्टर्ब नही करने वाला था, उसने मुझे आई लव यू कहा, मैं कुछ भी नही बोली तो उसने मुझे लीप किस करना स्टार्ट कर दिया, पता नही कब तक उसने मेरे होठों को चूसा! ये मेरा पहला किस था, वो अपना हाथ मेरी पीठ पर घूमा रहा था उसने मेरे मुंह में अपनी जीभ घुसा दी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। मुझे नीचे उसका लॅंड चुभ रहा था, मैंने बिल्कुल भी नही सोचा कि हॉस्टिल मैं जिसके साथ मजे ले रही हूँ वो एक नौकर है. मैंने किस का मज़ा लिया और फिर हम अलग हो गए. मैं खाना लेकर रूम में चली गयी और देखा की रूममेट सोई हुई है.
दिल को तसली हुआ खाना खाकर सो गई, उस दिन के बाद लाइफ चेंज हो गई, वो हॉस्टिल मे बात भी नही करता था ताकि किसी को पता न चले. वीक मे हम ज़ू जाते थे वो वहां बहुत मजे करवाता था. एक महीने मे मेरी ब्रा मुझे छोटी लगने लगी थी, वो ज़ू मे काफ़ी किस करता, बूब्स प्रेस्सिंग भी करता. एक दिन उसने पूछा तुम्हारी बुर कैसे रंग की है, मैंने उसे एक प्यार वाला थप्पड़ लगाया, उसने मुझे उठाया और कहा बहुत भारी है. उसने मेरी गांड दबा दी फिर कभी कभी कमर से धक्का भी दिया, मज़ा आ रहा था, हम लोग प्यार मे डूबे थे पर हॉस्टिल मे किसी को नही पता था. मेरी रूममेट अपने बॉयफ्रेंड से फोन पर बार करती थी इसलिए उसने भी मुझे फोन लाकर दिया, हम रात को सेक्स चैट भी करने लगे, अब तक सेक्स नही हो पाया था, होली की छुट्टी आने वाली थी, सब घर जा रही थी, मैं उदास थी क्योंकि मम्मी की तबीयत खराब थी, वो भागलपुर से नही आती तो मैं अकेली होली कैसे मनाती, फिर हॉस्टिल मे सिर्फ़ मैं थी.
होली की सुबह 12 बजे उठी, नहाकर तावल मे आ रही थी, पता नही वो कहाँ से आ गया, मैं थोड़ा डर गयी, उसने मुझे टायलेट मे घुसा कर किस किया, मैं भी उसे किस कर रही थी. उसने मुझे गोद मे उठाया और रूम में ले गया. उसके हाथो मे लाल रंग था, उसने मेरी तावल उतार दी अंदर कूछ नही था, मैं सरमा गयी, वो निहार रहा था और बोला - आपके जिस्म बहुत गौरा है, बुर भी गोरी है, उसने गालो से रंग लगाना शुरु किया, चुचियों को तो बहुत बुरी तरह मसला. उसने मेरी चुत को प्यार से दबाया और मुझे रंग में पूरी तरह लाल कर दिया. उसने उगली भी करना शुरु कर दिया. तभी किसी के आने की आहट हुई, मैं टॉयलेट मे भागी, वो भी चला गया. मैं रात मे टॉप स्कर्ट मे सोई हुई थी. वो गुनगुनाता हुआ आया और आते ही मुझे गोदी मे बिठाया और मेरी चूची दबाने लगा. उसने मेरे कानो को किस भी किया और बोला - आज होली में होने दो जो होता है.
उसने मेरी टॉप और ब्रा भी फाड़ दी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसने मुझे पूरा न्यूड किया. मैं भी उस पर चढ गई. मैंने उसको भी न्यूड कर दिया. हम दोनों ने एक - दुसरे को बाँहों में भर लिया. उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और बिना किसी दया के पूरा लंड पेल दिया और उसने मुझे पूरी रात चोदा. आज तो मेरी जान ही चली गयी थी. ये मेरा पहला सेक्स था जो की मैं आज भी नही भूली हूँ...
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