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अनजान आदमी से चुदाई करवाने का तरीका Is tarah aap kisi ka bhi lund le sakti hai
अनजान आदमी से चुदाई करवाने का तरीका Is tarah aap kisi ka bhi lund le sakti hai , गैर आदमी से कैसे चुदें , दुसरे आदमी का लंड अपनी चूत में कैसे डलवाएं , बिना जान पहचान के व्यक्ति से कैसे कहें कि मुझे आप चोद दो , चुदना है , चुदाई करवानी है , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी.
हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तो.. मैं हाज़िर हूँ अपनी नई कहानी लेकर.. मैं बता नहीं सकती कि मेरी चूत और मैं आज कितनी खुश हूँ। मैं एक नई कहानी लिखने जा रही हूँ। मेरा नाम अंजलि अरोड़ा है.. मैं एक शादीशुदा महिला हूँ। मेरी उम्र 32 साल.. रंग दूध सा गोरा.. मदमस्त फिगर 35-28-38 की है और मैं एक अति चुदासी माल हूँ। अचानक मेरे पति को जरूरी काम से देहरादून जाना पड़ा। अगले दिन सुबह मेरे पति निकल गए और पहुँच कर मुझे फोन किया और कहा कि केवल 15 दिन की ही बात है।
हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तो.. मैं हाज़िर हूँ अपनी नई कहानी लेकर.. मैं बता नहीं सकती कि मेरी चूत और मैं आज कितनी खुश हूँ। मैं एक नई कहानी लिखने जा रही हूँ। मेरा नाम अंजलि अरोड़ा है.. मैं एक शादीशुदा महिला हूँ। मेरी उम्र 32 साल.. रंग दूध सा गोरा.. मदमस्त फिगर 35-28-38 की है और मैं एक अति चुदासी माल हूँ। अचानक मेरे पति को जरूरी काम से देहरादून जाना पड़ा। अगले दिन सुबह मेरे पति निकल गए और पहुँच कर मुझे फोन किया और कहा कि केवल 15 दिन की ही बात है।
दो दिन पति से बिना चुदे मेरी चूत लन्ड खाने के लिए मचलने लगी थी, फ़ुदक रही थी और बच्चों के स्कूल जाने के बाद मैं अब घर में अकेली रह जाती थी इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना मैं घुमने के लिए पार्क में चली जाऊं तो मैं पार्क में चली गई। वहां एक हट्टे - कट्टे शरीर का लड़का जो 25 के आस पास की उम्र का था, पार्क में बैठा था। मैं भी उसके पास जाकर बैठ गई और मैं मोबाइल में नेट चलाने लगी। मैंने वैसे भी बस नॉर्मल टी-शर्ट और लोवर पहन रखा था, अन्दर कुछ भी नहीं था।
थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वो लड़का भी मोबाइल चला रहा था और कुछ पॉर्न साइट चला रहा था। इसी के साथ-साथ अपने लौड़े को ऊपर से सहला रहा था, उसने भी टी-शर्ट और लोवर ही पहन रखा था।
मैंने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया।
फिर थोड़ी देर बाद मैंने देखा उसका लंड टनटनाने लगा.. मुझे अजीब सा लगने लगा। वो ईअर फोन लगा कर ब्लू-फिल्म देख रहा था। मैं भी वही देखने लगी। थोड़ी देर बाद मुझे अजीब सा लगने लगा। मैंने भी हल्के से अपने लोवर में हाथ डाल कर चूत को देखा.. तो गीला सा लगा। मैंने सोचा छोड़ो.. ध्यान ही मत दो।
अब तो मैं ऐसे ही मोबाइल में फेसबुक यूज करने लगी।
अब थोड़ी देर बाद मेरी नज़र उसकी तरफ गई और देखा कि वो आदमी लंड को लोवर में से हिला रहा था।
अब मुझे अजीब लगा और मैं भी उसके फोन में ब्लू-फिल्म देखने लगी। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उसका खड़ा लंड देख कर मेरी चूत में मानो आग ही लग गई, मैंने पार्क में चारों तरफ देखा, अब तक पार्क में केवल पांच - सात लोग ही रहे थे, मैं उसके नजदीक आ गई, उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने कहा कि मुझे आप मेरे पति जैसे लगते हो, वो मुस्कुराने लगा और उसने भी देखा कि कोई हमारे आस - पास नहीं था, उसने अपनी पैंट की चैन खोल दी और अपना लैंड बाहर निकाल लिया, उसका लंड क्या मस्त मोटा था… कम से कम 6 इंच का तो होगा ही.. साथ ही मोटा भी इतना था कि हाथ में भी ना आए।
मेरी नज़र उसके लौड़े से हटी ही नहीं.. उसने लौड़े की चमड़ी को पीछे भी किया.. तो उसका सुपाड़ा देखा.. सुर्ख लाल टमाटर जैसा था, मेरा मन तो हुआ वहीं चूस लूँ। मैं देखती रही.. वो उसे और हिलाने लगा। फिर मेरी तरफ देखा और उसने मुझे आँख मार दी। मेरी तो हालत खराब होने लगी। मैंने अपनी चूत में उंगली डाली और मेरा मन भी उंगली करने का हुआ तो मैंने उसका लंड समझ कर उंगली घुसा-घुसा चूत की खाज कम करने लगी। थोड़ी देर बाद चूत की आग और ज्यादा भड़क गई..
वो बोला- आप शादीशुदा हो?
मैं बोली- हाँ..
तो वो बोला- आप बहुत सुंदर हो।
मैं बोली- थैंक्स।
तो वो बोला- ‘क्या नाम है आपका?’
मैं बोली- ‘अंजलि!’
तो वो मुझसे बोला - उंगली की क्या ज़रूरत है.. मैं हूँ न..
मैं बोली- पागल हो.. मेरे उधर कीड़ा घुस गया था।
वो बोला- हाँ दस मिनट से देख रहा हूँ.. कीड़ा ज्यादा खुजली कर रहा है..
उसने अपना एक हाथ तुरंत अपने लौड़े की तरफ किया.. जो फुल खड़ा था। मेरा मन हुआ कि साले को पकड़ लूँ और घुसड़वा लूँ चूत में.. मगर फिर लगा कि नहीं पार्क में नहीं यार..
वो बोला- बताओ अंजलि जी.. कैसा लगा आपको ये वाला सीन?
मैं भी बोल पड़ी- अच्छा था।
तो वो बोला- फिर से देखोगी।
मैं बोली- यह मोटा बहुत है।
वो बोला- वैसे हो तुम बिंदास यार..
वो मेरे करीब अपना मुँह ले आया.. और उसके लंड से मेरी कोहनी टकरा रही थी। मैंने अपनी आँखें बंद की.. और उसने किस कर दिया। अचानक उसमें इतनी गर्मी आ गई.. वो बिल्कुल मेरे ऊपर चढ़ गया और लंड को मेरे मुंह में घुसेड़ने लगा।
मैंने कहा - यहाँ ठीक नहीं है यहीं पास ही मेरा घर है, चलो वहां चलते है।
वो बोला - ठीक है तुम चलो मैं पीछे - पीछे आता हूँ.
फिर हमने अपने कपड़े ठीक किये और घर की तरफ चल दिए, मैं आगे थी और वो मेरे पीछे - पीछे था, मैंने दरवाजा खोला और अंदर चली गई कुछ ही देर में वो भी अंदर आ गया, मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। वो दरवाजा बंद करते ही मेरे होंठो और चुचों पर टूट पड़ा और लगभग 20 मिनट तक हम एक - दुसरे को किस करते रहे और वो मेरे मम्मे दबाता रहा और मैं उसके लंड को सहलाती रही।
अब उसने मेरा लोवर उतारा.. मैंने भी उसका लोवर उतार दिया, वो इतना गरम हो गया था कि मुझे बैड पर लेटाया और लंड को चूत पर रखा और एक ही धक्के में पूरा लंड चूत के अंदर ठोक दिया। मेरी चीख निकलते-निकलते ही रह गई थी कि उसने मेरे मुँह को हाथ से बंद कर दिया और मुझे साँस भी नहीं लेने दी। फिर साला चोदने भी लगा। आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। जैसे-तैसे मैंने अपने मुँह से उसका हाथ हटाया और एक गहरी साँस ली और उसको रोका। वो साला ठोकू कहाँ रुकने वाला था।
खैर.. उसने मुझे वहीं धकाधक चोदा और मेरी चूत में ही झड़ गया। मगर मैं तो अभी गरम हुई थी। खैर.. मेरी प्यास ने मुझे तुरंत उठाया और उसका लंड मैंने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। अब तो वो पागल हो गया और बोला- तू तो रंडी की तरह चूसती है।
मैं बोली- नहीं.. मैं तो रंडी से भी मस्त चूसती हूँ।
अब उसने मेरी टी-शर्ट उठा दी और मेरे मस्त रसीले मम्मों देख कर पागल हो गया। वो उन्हें ऐसे भींचने लगा कि मेरे दूध लाल कर दिए। अब उसका फिर से खड़ा हो गया और अब हम फिर से चुदाई करने लगे। अब मैं भी तेज़-तेज़ चूत को चुदवाने लगी। मैं चिल्लाना चाहती थी.. मगर नहीं चिल्ला पा रही थी। बस हल्की-हल्की सिसकारियां ले रही थी। फिर अचानक उसने मुझे बैड से उठाया।
मैं बोली- नहीं, क्या कर रहे हो?
तो वो बोला- अरे चुप हो जा.. तू बैड पर घोड़ी बन जा।
मैंने वैसे ही किया और उसने पीछे से मेरी गाण्ड को पकड़ते हुए क्या मस्त चोदना शुरू किया.. आह्ह.. मैं उस आनन्द को बता नहीं सकती। मैं तो अधनंगी पड़ी थी। साला खूब मजे ले रहा था.. और मैं भी रगड़वा रही थी।
पीछे से भी धक्के लगवा-लगवा कर अपनी गाण्ड को हिलाते हुए उसका लौड़ा घुसवा रही थी। उसने भी मुझे बहुत तेज़ चोदना स्टार्ट कर दिया। मुझे हर धक्के में ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत में इसका लंड नहीं.. मोटा सरिया घुसा हो। अब उसने और 10 मिनट चोदते-चोदते अपना माल मेरी चूत में ही झाड़ दिया और अब मैं भी झड़ गई थी। वो मेरे ऊपर लेटा रहा.. और मेरे मम्मों से खेलने लगा।
उसने मुझे दो बार ठोका.. मगर गाण्ड नहीं मारी। उसे गाण्ड मारना पसंद ही नहीं था। लेकिन मैं गांड मरवाना चाहती थी परन्तु मैंने सोचा कि कोई बात नहीं ये गांड नहीं मार रहा तो क्या हुआ कल कोई दूसरा जमूरा पकड़ लेती हूँ, फिर वो अपने कपड़े पहनकर चला गया.......
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