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गर्लफ्रेंड की गैर मौजूदगी में उसकी माँ की चुदाई Girlfriend ghar par nahi thi aur uski maa chud gayi
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दोस्तों, मेरा नाम विकास कुमार यादव हैं और मैं छपरा, बिहार का रहने वाला हूँ. दोस्तों मुझे चूत में और गांड में लंड देने में बहुत मजा आता हैं और मेरी एक गर्लफ्रेंड भी हैं. उसका नाम सुकुमारी हैं और वो एक ओरिया लड़की हैं. इस लड़की की चूत में मैंने अभी तक न जाने कितनी बार भी लंड दिया हैं. उसके घर पे भी मुझे सब जानते हैं और वो मुझे उसका केवल दोस्त समजते हैं. मैंने इसी बात का फायदा उठा के सुकुमारी की चूत में उसके घर पे ही कितनी बार लौड़े से खुदाई की हुई हैं. लेकिन आज मैं आप को उसकी माँ की चूत में लंड देने की बात बताने जा रहा हूँ. सुकुमारी की माँ का नाम सोनम हैं और वो किसी भी एंगल से 35 साल के उपर की नहीं लगती हैं.
दोस्तों, मेरा नाम विकास कुमार यादव हैं और मैं छपरा, बिहार का रहने वाला हूँ. दोस्तों मुझे चूत में और गांड में लंड देने में बहुत मजा आता हैं और मेरी एक गर्लफ्रेंड भी हैं. उसका नाम सुकुमारी हैं और वो एक ओरिया लड़की हैं. इस लड़की की चूत में मैंने अभी तक न जाने कितनी बार भी लंड दिया हैं. उसके घर पे भी मुझे सब जानते हैं और वो मुझे उसका केवल दोस्त समजते हैं. मैंने इसी बात का फायदा उठा के सुकुमारी की चूत में उसके घर पे ही कितनी बार लौड़े से खुदाई की हुई हैं. लेकिन आज मैं आप को उसकी माँ की चूत में लंड देने की बात बताने जा रहा हूँ. सुकुमारी की माँ का नाम सोनम हैं और वो किसी भी एंगल से 35 साल के उपर की नहीं लगती हैं.
वैसे वो हैं तो 35 के ऊपर लेकिन उसने अपनी गांड, चुंचे और शरीर का कसाव अभी भी ऐसे रखा हैं की वो जवान जैसे ही दिखती हैं. उसके चुंचे बड़े, गोल और लचीले हैं. मैंने एक दो बार जब वो घर के बाहर कपडे धो रही थी तब ऊपर की नंगोल से देखा था. ऊपर से उसके चुंचो के बिच की गली बहुत ही मादक दिखती थी; लेकिन सुकुमारी मेरे साथ होने से मैं ज्यादा देख नहीं पाता था. यह बात जून 2016 की हैं, सनीचर का दिन था और कोलेज से हम लोग जल्दी घर आ गए थे. सुकुमारी ने मुझे उसके घर उसकी चूत में लौड़ा डालने के लिए बुलाया था, पढाई के बहाने.
मैं जब चूत में लंड देने के सपने देखता हुए उसके घर पहुंचा तो मुझे सोनम आंटी ने बताया की सुकुमारी तो अंजली और जमीला के साथ पिज़ा खाने के लिए चली गई हैं. मैं मनोमन चिढ गया की साली मुझे चुदाई के लिए बुलाती हैं और खुद पिजा की माँ चोदने गई हैं. मैं वही वरंडे से ही निकलने वाला था लेकिन सोनम आंटी के कहने पे मैं अंदर गया और बैठा. मैंने सुकुमारी को वहीँ से फोन किया और उसने मुझे कहा की उसे आने में अभी 1 घंटा लगेगा. मैंने उसे कहा ठीक हैं. उसने मुझे इशारो इशारो में अपने कमरे में वेट करने के लिए कहा. साली की चूत में खुजली थी तो फिर पिज़ा खाने क्यूँ गई थी. मुझे गुस्सा आ रहा था लेकिन सोनम आंटी खड़ी थी इसलिए मैंने आराम से बात की. सोनम आंटी तभी पानी ले के आई और मेरे सामने सोफे में बैठ गई. मैंने देखा की आंटी की लॉन्ग गाउन पीछे से फटी हुई थी और अंदर की काली पेंटी दिख रही थी. शायद आंटी ने गाउन के निचे सिर्फ ब्रा पेंटी पहनी थी. बहुत सारी औरतो को ऐसे खुले में घुमने का सौख होता हैं. मेरा लंड वैसे भी चूत में जाने के लिए तो तैयार था और आंटी की पेंटी देख के मैं और भी होर्नी हो गया.आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। आंटी को मैंने अंकल के बारे में पूछा. आंटी ने बताया की घर के नौकर श्यामू काका के वहाँ शादी हे इसलिए अंकल वहाँ गए हैं. घर में उस वक्त आंटी और मेरे अलावा कोई नहीं था. और एक कहावत के अनुसार मेरेदिल मैं शैतान जाग ही उठा था. लेकिन मैंने सोचा की माँ को छेड़ा तो बेटी की चूत से भी हाथ धोना पड़ेगा. तभी आंटी उठ के मेरे लिए सेब काट के ले आई और अब की बार वो मेरे पास आके बैठ गई.
मुझे सोनम आंटी का यह कदम शक पैदा करने वाला लगा. उसने अपनी जांघो को मेरी जांघो से सटा के रखी हुई थी. मेरी साँसे फूलने लगी और साथ साथ मेरा लंड भी. मैं आंटी से नजरे नहीं मिला पा रहा था क्यूंकि मेरे दिल में खोट थी उसकी चूत चोदने की. लेकिन जबब मैंने आंटी की तरफ देखा तो वो भी जैसे नजरे चूरा रही थी. तो क्या सोनम आंटी को भी मुझ से चुदवाना था.? मैं मनोमन सोचने लगा की चलो देखते हैं की बूढी घोड़ी कहाँ तक भागती और भगाती हैं. मैंने हलके से अपनी जांघ को आंटी की जांघ से थोडा और सटा दिया और आंटी कुछ नहीं बोली. मेरे होश तो तब उड़ने वाले थे जब आंटी ने मुझे कहा, विकास चलो बेडरूम में बैठेंगे. यहाँ गर्मी हैं, मैं वहाँ एसी चला देती हूँ. मैं सोनम आंटी की चूत में हुई खुजली को भांप गया. आंटी मेरे आगे चल रही थी और मैं उसकी इधर से उधर मटक मटक के चलती मटके के जैसे गांड को देख रहा था. मेरा लंड अब काबू के बाहर होने लगा था. बेडरूम को अंदर से बंध कर के आंटी ने मुझे बिठाया और एसी ओन कर दी. मुझ से रहा नहीं गया और आंटी जब स्विच के पास थी तभी मैंने खड़े हो के टेबल से मैगज़ीन इस तरह उठाये की मेरा लंड उसकी गांड के उपर टच हो गया. आंटी कुछ भी नहीं बोली. लेकिन मेरे लौड़े की गर्मी उसे जरुर महसूस हुई होगी. मैंने जानबूझ के एक दो मैगज़ीन टटोले ताकि लंड और गांड का कनेक्शन थोड़ी देर तक जमा रहे. आंटी कुछ नहीं बोल रही थी, ना वो अपनी गांड हटा रही थी. मैंने मैगज़ीन को वापस रखा और सीधे आंटी की कमर के ऊपर हाथ रख के उसे सहलाने लगा.
आंटी की साँसे फुल चुकी थी, शायद उसकी चूत भी मेरे जैसे जवान लंड का सहवास मांग रही थी. और आंटी ने आज मौका देख के मेरे लंड को चूत से भिगोने का फैसला कर ही लिया था शायद. मैंने अपने हाथ को अब आंटी की कमर से उठा के उनके बूब्स के उपर रख दिए. आंटी बोली, विकास क्या कर रहे हो. मैंने कहा आंटी कुछ नहीं, बस आप बहुत प्यारी हैं इसलिए आप को प्यार दे रहा हूँ. आंटी ने हंसी से मेरे जवाब को चुदाई की मुहर लगा दी. मुझे उसके हंसने से पता चल गया की उसे भी लंड की खुराक अपनी चूत में लेने का मन था ही. मैंने उसके गाउन को उठाया. सर्कस के तंबू के जैसे गाउन को उठाते ही आंटी की लाल ब्रा और काली पेंटी मेरे सामने आ गए. आंटी ने ब्रा पेंटी के ऊपर ही गाउन डाल दिया था वैसा मेरा अंदाजा बिलकुल सही था. मैंने आंटी के कंधे को पकड़ के उनको अपनी तरफ घुमाया और धीरे से उनके बूब्स को पकड़ लिया. आंटी के बूब्स बड़े थे लेकिन लचीले और अंदर से सख्त थे. मैंने पीछे हाथ ले जा के ब्रा का हुक खोल दिया. बिलकुल किसी जवान औरत के जैसे ही आंटी के चुंचे मस्तियाँ रहे थे. मैंने चुंचो को थोडा मसलने के बाद अपना मुहं उनके उपर रख दिया. आह आंटी की सेक्सी निपल्स मेरे मुहं में थी…सच बताऊँ दोस्तों सुकुमारी के चुंचो से तो उसकी माँ के चुंचे ज्यादा अच्छे थे. मैंने जोर जोर से दोनों चुंचो का रसपान किया और आंटी मेरे शर्ट के बटन खोलने लगी.
देखते ही देखते आंटी ने मुझे नग्न कर दिया. वो मेरे लंड को अपने हाथ से मल रही थी और मुझे उसके ऐसा करने से बहुत ही मजा आ रहा था. आंटी ने लंड के सुपाड़े को अपने दोनों हाथ के बिच पकड़ा और जैसे वो बेलन को हाथ के बिच रगड़ रही हो वैसे रगड़ने लगी. मुझे आंटी का यह अजीब खेल समझ में नहीं आया लेकिन मजा उसमे जरुर भरा हुआ था. सोनम आंटी की पेंटी को मैंने अब धीरे से उतारा. उसकी चूत में चांदी जैसे चमक थी, साली आंटी बाल भी नीकाल के बैठी हुई थी.
मैंने आंटी की चूत में धीरे से अपनी ऊँगली डाली और ऊँगली की चारोतरफ मुझे चिकनाहट और गर्मी का अहेसास हो रहा था. आंटी ने अपनी आँखे बंध कर दी, उसके लिए यह शायद असहय हो चला था. मैंने ऊँगली को जरा सा जोर लगा के पूरी के पूरी उसकी चूत में दे दी. आंटी आह ओह ओह आअह्ह्ह्ह कर रही थी और मैंने उसकी चूत को अपनी ऊँगली से मस्त चोद रहा था. आंटी अब बिस्तर के ऊपर लेट गई और मैं जा के उसकी दोनों टांगो के बिच बैठ गया. मैं इतनी चिकनी चूत को देख के उस में जबान डालने का मौका जाने नहीं देना चाहता था. मैंने सीधे अपनी गर्दन को झुकाया और आंटी के चूत में जबान डाल दी. आंटी की आह आह और भी तेज हो गई. मैंने धीरे धीरे कर के पूरी जबान को चूत में घुसा डाला. आंटी ने मेरे माथे के बालो नोंच डाला. उसे भी इस सेक्सी मुखमैथुन से बहुत मजा आ रहा था. मैंने आंटी की दोनों जांघो को पकड़ा हुआ था और मैं उसकी चूत की गहराई तक अपने जबान से जैसे की चुंबन दे रहा था. आंटी आह आह ऊह ओह ओह आह…विकास्स्स्स विकाआआअस्स्स्स…ऐसे आवाज निकाल रही थी. आंटी की चिकनी चूत को चाटने का अपना अलग ही मजा था दोस्तों. मैंने सुकुमारी की चूत भी अगिनित बार चाटी थी इस से पहले. शायद मैं बहुत कम लोगो में से था जिसने माँ बेटी दोनों की चूत चाटने का सौभाग्य पाया था. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। आंटी भी अब मस्त मस्तियाँ गई थी उसने मेरे बड़ी जुल्फों को नोंच के बड़ी ख़राब कर दी थी. मैंने अब खड़े हो के अपना लंड सोनम आंटी कके मुहं के करीब रख दिया. सोनम आंटी को पता था की उसे क्या करना हैं, उसने सीधे लंड के सुपाड़े के ऊपर अपनी जबान फेरी और अपनी चूत में ऊँगली डाल दी. वो एक तफ़र अपनी चूत को ऊँगली कर रही थी और इधर मेरे लंड को चूस रही थी. आंटी ने बहुत ही सेक्सी तरीके से लंड को चूसा था. वो जैसे की स्ट्रॉ से कुछ पी रही हो वैसे लंड को खिंच खिंच के चूस रही थी. मैंने भी आंटी के मुहं को दोनों हाथो के बिच में लिया और अपने लंड के जोर जोर के धक्के उसके मुहं में मारने लगा. आंटी के मुहं से थूंक निकल के उसके होंठो की साइड से बाहर आ रहा था. उसके मुहं की माँ चुद गई थी.
मैंने लौड़े को अब आंटी की चूत के ऊपर रखा और धीरे धीरे कर के पूरा के पूरा लंड आंटी की चूत में घुसेड दिया…..! सोनम आंटी आहा अह हह ह्हह्ह्ह्हाआ करती रही और मैं जोर जोर से उसकी चूत को छेद रहा था. आंटी की चूत की गर्मी मेरे लौड़े के ऊपर मजे से महसूस हो रही थी. आंटी की चूत के अंदर जब पूरा लंड जाता था तो वो मेरे लंड को अंदर कस लेती थी. मेरे लंड के ऊपर अजब दबाव आ जाता था और ऊपर से चूत की सेक्सी गर्मी. सही में बड़ी चुदक्कड थी मेरी गर्लफ्रेंड सुकुमारी की माँ. मैंने अब सोनम आंटी की टांगो को थोडा ऊपर किया और फिर उन्हें उठा के अपने कंधे के ऊपर रख दिया. सोनम आंटी की चूत में मेरा लंड इस वक्त भी धरा के धरा हुआ ही था. मैंने आंटी की दोनों टांगो को कंधे पर रखते ही आंटी की चूत के अंदर जैसे की मेरा लंड और भी धंस गया. मुझे लगा की मैं चूत के अंदर लौड़े को और घुसाने में सफल हुआ था. अब मैंने आंटी के घुटनों के पीछे वाले हिस्से में अपने हाथ दिए और मैंने जोर जोर से आंटी की चूत को मारने लगा. सोनम आंटी भी जैसे की आज लंड को परास्त करने के मुड में थी. उसने भी चूत उठा उठा के मुझे से चुदाई करवाई. 10 मिनिट की हार्डकोर चुदाई के बाद जब मेरा लंड पानी छोड़ने वाला था तभी आंटी ने मुझे लंड चूत में से बहार करने के लिए कहा.
जैसे ही मैंने लौड़े को चूत से बहार निकाला, आंटी निचे बैठ के मुहं के अंदर लंड को लेके उसे जोर जोर से चूस देने लगी. चूत में से निकले लौड़े को पानी छोड़ने में जरा भी देर नहीं हुई और यह भूखी शेरनी जैसी सोनम आंटी सारा मुठ पी गई. हमने कपडे पहन लिए और सोनम आंटी मेरे लिए नास्ता ले के आई. कुछ मिनिट बाद सुकुमारी भी आ गई. मैंने एक घंटे के बाद उसकी चूत को भी लंड से दे मारा. अब मैं अक्सर जब अंकल नहीं होते तब इनके घर आता जाता हूँ, सुकुमारी मिली तो ठीक हैं नहीं तो आंटी की गांड और चूत तो मेरे स्वागत में खुली ही रहती हैं..
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