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हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है
हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, हस्तमैथुन के फायदे ही फायदे, स्त्रियाँ भी अपनी कामवासना की प्यास हस्त-मैथुन से बुझा लेती है, हस्तमैथुन एक सेक्स के खिलौने और वयस्क, मुट्ठ मारने से क्या नुक्सान है, हस्तमैथुन करना सही है या गलत, हस्तमैथुन के फायदे और नुकसान हिंदी में, लड़कियों को रोजाना सुबह हस्तमैथुन, हस्तमैथुन की बुरी आदत छुड़ाने के रामबाण उपाय, हस्तमैथुन (hastmaithun) की बुरी लत से बचने के उपाय.
हमारे देश में यौन, खास तौर से हस्त-मैथुन के प्रति बहुत सी भ्रांतियाँ हैं जो कि या तो अनपढ़ लोगों ने या फिर निहित-स्वार्थ से प्रभावित लोगों ने समाज में फैलाई हुई हैं। पर जैसे जैसे समाज में शिक्षा फैली है और इस विषय पर शोध हुआ है इनमें से कई भ्रांतियों का पर्दा-फाश हुआ है।
हमारे देश में यौन, खास तौर से हस्त-मैथुन के प्रति बहुत सी भ्रांतियाँ हैं जो कि या तो अनपढ़ लोगों ने या फिर निहित-स्वार्थ से प्रभावित लोगों ने समाज में फैलाई हुई हैं। पर जैसे जैसे समाज में शिक्षा फैली है और इस विषय पर शोध हुआ है इनमें से कई भ्रांतियों का पर्दा-फाश हुआ है।
दुर्भाग्यवश, इसके बारे में जानकारी केवल पढ़े-लिखे और समृद्ध लोगों तक ही सीमित है और इसका प्रचार अंग्रेजी तथा यूरोपीय भाषाओं में ही हुआ है। हमारे देश में अभी भी ढोंगी लोग (जो कि डॉक्टर, तांत्रिक, हकीम, वैद या स्वामी के रूप में फैले हुए हैं) इस अज्ञान का फ़ायदा उठा कर मासूम और अबोध लड़के-लड़कियों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें उपचार देने के बहाने उनसे पैसे लूट रहे हैं। अन्तर्वासना की कोशिश है कि यौन-सम्बन्धी विषयों पर हिंदी-प्रार्थी समुदाय को सही व उचित ज्ञान प्राप्त हो जिससे वे इस अत्यंत आवश्यक, अत्यंत निजी और अत्यंत आनन्ददायक प्राकृतिक उपलब्धि का पूरा लाभ उठा सकें। यह लेख इसी अभियान की एक कड़ी है।
हस्तमैथुन Masturbation एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है जिसे यौन सन्तुष्टि के लिए पुरुष और स्त्री दोनों ही करते हैं। इसे केवल युवा ही नहीं बल्कि हर आयु के लोग स्वेच्छा से करते हैं। हस्तमैथुन, यानि हस्त+मैथुन, मतलब हाथ से किया जाने वाला मैथुन (सम्भोग) अर्थात अपने यौनांगों को इस तरह से छूना, रगड़ना, सहलाना या उनमें कोई कृत्रिम चीज़ डालना जिससे करने वाले को चरम आनन्द प्राप्त हो। यहाँ अपने हाथ (हस्त) को पुरुष स्त्री की योनि के एवज में और स्त्रियाँ अपनी ऊँगली पुरुष के लिंग के एवज में प्रयोग करती हैं। इसे तब तक करते हैं जब तक पूरी तरह उत्तेजित ना हो जाएँ और परम आनन्द महसूस ना कर लें।
हालांकि हस्तमैथुन को हमारे समाज में अभी भी हेय दृष्टि से देखा जाता है, किन्तु सर्वेक्षण से पता चला है कि लगभग सभी स्त्री-पुरुष अपने जीवन में कभी न कभी हस्तमैथुन करते ही हैं। कब करते हैं और कितना करते हैं – यह तो बहुत से कारकों और हालातों पर निर्भर करता है इसलिए हस्त-मैथुन की कोई ‘सामान्य-दर’ नहीं है। कुछ लोगों की यौन इच्छा औरों के मुक़ाबले प्रबल होती है, जैसे जवान लड़के-लड़की, तो किन्हीं के हालात ऐसे होते हैं कि वे अपनी यौन-इच्छा की तृप्ति नहीं कर पाते हैं जैसे मोर्चे पर तैनात सैनिक, जेल में बंद कैदी, किसी बीमारी से त्रस्त मरीज़ या फिर किसी भी कारण से बिछड़े हुए दाम्पत्य जोड़े। ऐसे लोग ज्यादा हस्त-मैथुन करते हैं। कुछ लोग में यौन-इच्छा कुदरतन कम होती है या उनको सामान्य सम्भोग के अवसर मिलते रहते हैं… इस तरह के लोग हस्त-मैथुन कम बार करते हैं। मतलब, हस्तमैथुन करने की दर दिन में दो-तीन बार से लेकर महीने में दो-तीन बार हो सकती है।
यह भी देखा गया है कि यौन-इच्छा एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रबल ताक़त है जिस पर सामान्य लोगों का जोर नहीं चलता। जब किसी स्त्री-पुरुष में यौन-इच्छा उत्पन्न हो जाती है तो उसकी तृप्ति के लिए वह हर संभव प्रयत्न करने के लिए विवश हो जाते हैं। यह एक प्राकृतिक ज़रूरत है जिसके अभाव में इस सृष्टि की रचना ही डाँवाडोल हो सकती है… अतः यौन-इच्छा का प्रबल होना और इसकी तृप्ति के लिए त्रस्त होना ना केवल मानव-जाति के लिए अपितु अधिकाँश जानवरों के लिए भी अनिवार्य है।
ऐसे में जब भी किसी स्त्री-पुरुष में इस इच्छा की प्रवृत्ति होती है उसका सम्भोग के लिए विवश होना स्वाभाविक है। अगर ऐसे कामोन्मुक्त व्यक्ति को सम्भोग के लिए कोई साथी ना मिले तो उसके पास हस्त-मैथुन ही एक ऐसा सहारा रह जाता है जिससे वह सुरक्षित, कानूनी एवं परिपूर्ण तृप्ति प्राप्त कर सकता है। कोई और सहारा या तो सुरक्षित नहीं होगा, या कानूनी नहीं होगा या फिर परिपूर्ण सुख नहीं देगा।
इस लिहाज़ से जो लोग हस्तमैथुन को बुरा मानते हैं या इसके झूठे दुष्परिणामों की अफवाहें फैलाते हैं, वे एक तरह से वेश्यावृति, बलात्कार और शोषण जैसे यौन-अपराधों को पैदा करने में मदद करते हैं। अगर सभी यौन-उत्तेजित पुरुष अपनी तृप्ति हस्त-मैथुन से कर लें और ऐसा करने में उन्हें कोई व्यक्तिगत हानि का गलत डर ना हो तो समाज में लड़कियों और बहु-बेटियों की सुरक्षा अपने आप सुधर जाए। इसी तरह अगर स्त्रियाँ भी अपनी कामवासना की प्यास हस्त-मैथुन से बुझा लें तो कई सामाजिक और वैवाहिक तनाव से मुक्ति मिल सकती है। अर्थात हस्तमैथुन के फायदे ही फायदे हैं… फिर भी ना जाने क्यों इसके प्रति इतनी गलतफ़हमियाँ और दुष्प्रचार फैला हुआ है।
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