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ससुर ने बहु को चोद दिया - Sasur ne bahu ko diya bade land ka sukh
ससुर ने बहु को चोद दिया - Sasur ne bahu ko diya bade land ka sukh , ससुर और बहु की चुदाई की कहानी , ससुर ने बहु को चोदा , बेटे की पत्नी को लंड बिठा दिया , पिता ने बेटे की बीवी की गांड चूत बुर फाड़ दी.
बहू की बुर में ससुर का लण्ड ? बेटी की बुर में बाप का लण्ड ? माँ की बुर में बेटे का लण्ड ? सास की बुर में दामाद का लण्ड ? बहन की बुर में भाई का लण्ड ? यह सब आपको सुनने में भले ही बुरा लग रहा हो पर है ये हकीकत ? ऐसा अक्सर रात में होता है। हमारे समाज में हर घर में होता है। रात में तुम किसी के घर में घुस जाओ तो तुम्हे यही सब दिखाई पड़ेगा ? मैं तो हर रोज़ देखती हूँ। देखती ही नहीं बल्कि करती भी हूँ। मैं बहू भी हूँ, बेटी भी हूँ, माँ भी हूँ, सास भी हूँ, बहन भी हूँ। मेरी बुर में मेरे ससुर का लण्ड, मेरे बाप का लण्ड, मेरे दामाद का लण्ड, मेरे भाई का लण्ड घुसता है और मैं बड़े प्यार से सबके लण्ड घुसेड़वा लेती हूँ और खूब जी भर के मन लगाकर चुदवाती भी हूँ। न मुझे कोई शर्म आती है और न चोदने वाले को कोई शर्म ?
मेरा नाम हैं अदीना। मैं अब जवान हो चुकी हूँ। मैंने पहली बार अपने अब्बू जान का लण्ड पकड़ा था। हुआ यह थी की मैं छत पर गयी थी कपड़े फैलाने। वहां मामू जान पहले से ही मौजूद था। वह लगभग मेरे अब्बू के बराबर था। खुदा ने मेरी चूँचियाँ बड़ी बड़ी बनायीं हैं। मेरी चूँचियाँ देख कर मेरा मामू जान की नियत ख़राब हो गयी। वह मेरे पास आया और बोला अदीना आज तुम बहुत हसीन लग रही हो। मैंने कुछ कहा नहीं बल्कि मुस्करा पड़ी। वह आगे मुझे अपनी बाँहों में ले लिया। वह बोला ये तेरी चूँचियाँ मेरी जान ले रही है अदीना। उसने मेरी चूँचियाँ दबा दीं और मेरी सलवार के अंदर हाथ डाल दिया। उसका हाथ मेरी झांटों तक पहुँच गया।, मैं भी गरम हो गयी थी. मैंने कहा मामू जान ये क्या कर रहे हो ? मैं तेरी बेटी के बराबर हूँ मामू जान। वह बोला तभी तो मैं तेरे मुंह में लण्ड पेलना चाहता हूँ और फिर तेरी बुर में भी ? मैंने कहा तो क्या तुम अपनी बेटी के मुंह में पेलते हो लण्ड और फिर उसकी बुर में ,,,, ? वह साफ़ साफ़ बोला मेरी बेटी मेरा लण्ड खुद पकड़ती है। पहले अपने मुंह में लेती है और फिर अपनी बुर में ? तब मैं चुप हो गयी। वह अपना खड़ा लण्ड खोल कर मेरे आगे खड़ा हो गया और फिर मैंने लण्ड बड़े प्यार से पकड़ लिया और चाटने चूसने लगी. उसने मुझे नंगी कर दिया और मैंने उसे। मैं उसका मोटा तगड़ा लण्ड देख कर खुश भी थी और थोड़ा डरी भी थी। पर मैं रुकी नहीं।
मैं एक हाथ से पेल्हड़ थामे हुए दूसरे हाथ लण्ड पकड़ कर मज़ा करने लगी और थोड़ी के बाद लण्ड अपनी बुर में पेलवा लिया। मुझे सच में उस दिन चुदवाने में बड़ा मज़ा आया हां यह बात जरूर है की मुझे दर्द भी बहुत हुआ था। मैंने यह बात अम्मी जान को बताई तो हंस कर बोली ठीक क्या तूने। अब तू जवान है ? मामू जान का ही क्यों सबके लण्ड पेला कर अपनी चूत में और अपनी माँ की चूत में भी। अम्मी की बात ने मेरे अंदर और जोश पैदा कर दिया। फिर उसने कहा आज से तू हम सब लोगों के साथ नीचे ही लेटा कर। मैं यह सुनकर मगन हो गयी और मन ही मन लण्ड पकड़ने का लेने की सोंचने लगी। रात को मैं भी सबके साथ ज़मीन पर लेट गई। लेटते समय आपस में कुछ बातें भी होने लगीं और मस्ती भी होने लगी ।
कुछ देर बाद मैंने देखा की मेरी भाभी जान अब्बू का लण्ड पकड़ कर हिला रहीं हैं। मैं तो लण्ड देख कर गन गना गयी , लण्ड बहन चोद बड़ा गज़ब का दिख रहा था। मुझे तो अब्बू के लण्ड पर फ़कर हुआ। मेरा मन हुआ की मैं भी पकड़ लूँ पर मैं चुप रही। इतने में मेरी खाला जान मेरे भाई जान का लण्ड पकड़ कर हिलाने लगीं। मैं समझ गयी की यहाँ कोई किसी से शर्माती नहीं है। झिझकती नहीं है। सब कुछ खुले आम हो रहा है। मैंने देखा की अचानक मेरी अम्मी जान मेरे मामू का लण्ड पकड़े पकड़े सबके सामने आ गयीं। वही मामू जान जिसने मुझे चोदा था। खाला की बेटी फूफा जान के लण्ड पर मर मिटी। उसका लण्ड मुंह में भर कर चूसने लगी। उधर फूफी जान अपनी ही बेटी के मियां का लौड़ा अपनी दोनों चूँचियों के बीच डाल कर चूँचियाँ ही चुदवाने लगीं। यह सब देख कर मैंने सोंचा की वाकई जवानी बड़ी अच्छी चीज है। यहाँ सब एक दूसरे की बीवी बेटी बहू को अपना लण्ड पकड़ा रहे हैं। इतनी आज़ादी है की चाहे जिसका लण्ड पेलो और चाहे जिससे चुदवाओ। चाहे जिसका लण्ड पकड़ो चाहे जिसकी चूँची ?
फूफी जान ने कहा - सबरीन (मेरी अम्मी जान का नाम) आज तो तेरी बेटी अदीना भी सबसे चुदवाने आ गयी है बर चोदी।
अम्मी जान बोली - अदीना की माँ का भोसड़ा, अदीना की फूफी की बुर ? अब वह भोसड़ी की पूरी तरह जवान हो गयी है। ऐसे में लण्ड नहीं पकड़ेगी तो क्या झांटें गिनेगी ? तब तक अब्बू बड़े मजे से भाभी की बुर चोदने लगा। मैंने कहा हाय दईया बहू की बुर में ससुर का लण्ड ? फिर मैंने जो देखा उसे देख कर बोलने लगी. खाला की बुर में अपनी बहन के बेटे का लण्ड ? अम्मी की बुर में अपने भाई जान का लण्ड ? खाला की बेटी की बुर में फूफा का लण्ड ? फूफी की बुर में खाला की बेटी के मियां का लण्ड और मेरी बुर में खालू का लण्ड ? खालू बोला बेटी अदीना मुझे तेरी बुर बिलकुल मक्खन मलाई लग रही है। आज मुझे बुर चोदने का असली मज़ा आ रहा है। बेटियों की बुर चोदने का मज़ा ही और होता है ? मैंने पूंछा तो फिर तुम अपनी बेटी की बुर भी चोदते होंगे फूफा जान। वह तपाक से बोला हां चोदता हूँ बड़े शौक से चोदता हूँ और वह भी उसी शौक से चुदवाती है। मैंने कहा भोसड़ी के फूफा जान मैं भी बड़े शौक से चुदवाती हूँ तू बस चोदता जा मेरी बुर ? तूने मेरी माँ का भोसड़ा खूब चोदा है। मैंने तुझे उसे चोदते हुए देखा भी है।
कुछ देर बाद भाई जान ने लण्ड मेरी में पेल दिया। वह अपनी बहन की ही बुर चोदने लगा। मैं भी मजे से चुदवाने लगी क्योंकि हमे समाज में भाई जान से चुदवाना बड़ी आम बात है। हर लड़की अपने भाई जान से चुदवाती है। मुझे तो मज़ा तब आया जब की खाला की बेटी अपने अब्बू जान का लण्ड पीने लगी। चुदाई में ज्यादा मज़ा आने लगा। कुछ देर बाद भाई जान हटा तो मेरे फूफा जान ने अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया। मुझे लगा की यहाँ आज मुझे सब लोग चोदना चाहतें हैं। तब तक मैंने देखा की मेरा भाई जान मेरी अम्मी जान के ुवार चढ़ा हुआ है। यह वह अपनी माँ का भोसड़ा चोदने लगा ? अम्मी जान भी बेहिचक उससे चुदवाने लगीं। मैंने थोड़ा शंका से देखा अम्मी को देखा तो वह बोली बेटी अदीना मेरा बेटा अब मरद है। उसकी शाद भी हो चुकी है। उसे अपनी माँ का भोसड़ा चोदने में कोई हर्ज़ नहीं है। बाप जब अपनी बेटी की बुर चोद सकता है तो माँ भी अपने बेटे से चुदवा सकती है। मैं अम्मी और सबकी चुदाई देख देख और मज़ा लेने लगी। फिर मुझे खाला जान की बेटी के मियां ने भी चोदा और मामू जान ने भी।
अम्मी मेरे अंदर जोश भरने के लिए बोलीं - हाय मेरी बुर चोदी अदीना तू तो बहुत अच्छी तरह से चुदवा रही है। तेरी माँ का भोसड़ा ? तेरी माँ की बहन का भोसड़ा ? मेरे अंदर हिम्मत आ गयी। मैं भी सबकी तरह बेशरम हो गयी और गालियां भी बड़े प्यार से देने लगी। मैंने भी जबाब में कहा - तेरी बहन चोद बिटिया की बुर , अम्मी जान ? तेरी बुर चोदी बेटी की माँ की चूत ? मैं तो इसी तरह चुदवाती हूँ और आगे भी चुदवाती रहूंगी। मैं उस दिन से बिंदास सबके सामने चुदवाने लगी और ज़िन्दगी का मज़ा लूटने लगी। फिर एक दिन मेरी शादी हो गयी और मैं अपनी ससुराल चली गयी। ससुराल में थोड़ा तो नयापन लगा पर कुछ दिन के बाद सब अपना पन लगने लगा। मेरी नन्द रफ़ा ने मेरा बहुत साथ दिया और मेरी सास ने मुझे खूब समझा बुझा कर मुझसे काम लिया। मेरी नन्द बुर चोदी मेरी ही तरह है और वह उसी तरह गालियां देती है जैसे मैं देती हूँ।
उसने कहा भाभी जान मैं चुदवाते समय खूब गालियां सुनाती हूँ. असल बात यह है की मेरे हाथ में पराये मरद का लण्ड आते ही मेरे अंदर की रंडी जग जाती है और फिर मैं झांट किसी की नहीं सुनती और धकापेल चुदवाती हूँ, हर तरफ से चुदवाती हूँ और खुल्लम खुल्ला चुदवाती हूँ। मैंने कहा ऐसे में तेरी अम्मी जान तुम्हे कुछ नहीं कहती ? तेरी सास कुछ नहीं बोलती क्या ?
वह बोली - बुर चोदी अम्मी का भोसड़ा और सास की चूत ? वे क्या दोनों दूध की धुली हुईं हैं। दोनों भोसड़ी वाली खूब जम कर ग़ैर मर्दों से चुदवाती हैं। लण्ड पकड़ती है सबके। लण्ड पर बैठ कर लण्ड चोदती है सबके ? उनसे क्या डरना ? मैं तो अपनी सास के भोसड़ा में पेलती हूँ। तू भी पेला कर अपनी सास के भोसड़ा में लण्ड भाभी जान। जब उसका भोसड़ा शांत रहेगा तो वह भी बुर चोदी शांत रहेगी ?
मैंने पूंछा - तो फिर ससुर के लण्ड के बारे में ,,,,,,,,,,,,,,,?
वह बोली - अपने ससुर का तो लण्ड अपनी बुर में घुसा लेना बस वह भी मादर चोद अपनी दुम तेरे आगे हिलाता घूमा करेगा। मेरा ससुर तो मेरे आगे अपना लण्ड हिलाता हुआ घूमता है। इस तरह मेरे सामने अपनी सास और ससुर की पोल खुल रही थी। उसने बताया आज रात को ही चुदाई का मज़ा लूटा जायेगा भाभी जान। इसमें तेरी चूत का पूरा पूरा साथ लिया जायेगा। अब कौन कौन चोदेगा तेरी बुर ये तो मैं अभी बता नहीं सकती। मैं उसकी बात सुनकर मस्त हो गयी।
अब मेरी जान अपने ससुर के लण्ड पे ही अटकी हुई थी। मैंने पूंछा नन्द रानी ये तो बता दो की तेरे अब्बू जान का लौड़ा कैसा है ? उसका हुलिया कैसा है ? वह बोली भाभी जान मैं जानती सब हूँ अपने अब्बू जान के लण्ड के बारे में लेकिन बताउंगी कुछ भी नहीं ? जब तुम खुद उसका लण्ड पकड़ कर देखोगी तब तुम सब कुछ जान जाओगी। इससे मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी। मैं जल्दी से जल्दी अपने ससुर का लण्ड पकड़ कर प्यार से चारों तरफ देखना चाहती थी वह भी सबके सामने ? सबको मालूम करा देना चाहती थी की मैं लण्ड से कितनी मोहब्बत करती हूँ ताकि सब लोग मुझे अपना अपना लण्ड पकड़ाने में कोई देरी न करें।
लण्ड ही मेरी जान है लण्ड ही मेरी ज़िन्दगी है और
लण्ड ही मेरी दुनिया है। मैं लण्ड के लिए हूँ
और लण्ड मेरे लिए हैं।
मैं बड़ी बेकरारी से रात होने का इंतज़ार करने लगी। शाम को करीब ८ बजे मेरी नन्द का ससुर आ गया। उसके साथ उसका बेटा भी था यानी मेरी नन्द का शौहर। जी हाँ मेरा नंदोई। मैंनउसे देख कर खुश हो गयी क्योंकि वह तो बड़ा हैंडसम था और तगड़ा तंदुरुस्त भी था। मैंने सोंचा की इसका लौड़ा भी मोटा तगड़ा होगा। मैं तो ससुर के लण्ड के फिराक में थी। इसलिए वह जहाँ जहाँ जाता था मैं वही वहीँ पहुँच जाती थी। यहाँ तक की मैं उस जगह चली गयी जहाँ वह अपने कपडे बदल रहा था। उसके लूंगी पहनते ही मुझे उसके लण्ड की झलक मिल गयी। लण्ड का सुपाड़ा बाप रे बाप जैसे मुर्गी का अंडा ? झांट उसकी बिलकुल नहीं थी और पेल्हड़ भी औसतन थे। बस मैं लौड़ा हैट से पकड़ कर देखना चाहती थी। इतने में नन्द आ गयी और बोली भाभी जान मैं भी आपके साथ लेटूंगी। मैं कहा बड़ी ख़ुशी की बात है यार लेट जाओ।
वह तो बुर चोदी अपनी चूँचियाँ खोल कर मेरे पास आकर लेट गयी। मैंने पूंछा की तेरी अम्मी जान कहाँ है तो वह बोली वह भी कही नंगी नंगी घूमती होगी बुर चोदी ? इतने में उतनी और बाहर गयी। वहां मुझे मेरी सास मिल गयी। मैंने शरारत करते हुए पूंछा सासू जी नन्द रानी कहीं दिख नहीं रही हैं। वह बोली वह भोसड़ी की यहीं कही अपनी माँ चुदा रही होगी। मुझे पक्का यकीन हो गया की ये दोनों एक दूसरे से गालियों से ही बातें करतीं हैं। थोड़ी देर में नन्द रानी अपने ससुर को लेकर आ गयीं। मैं उससे पहले ही मिल चुकी थी। वह भी लगभग मेरे अब्बू के उम्र का था। मेरा ससुर भी उसी उम्र का था। ये तीनो भोसड़ी के एक ही उम्र के थे लगभग। नन्द तो उससे चिपक कर लेट गयी। उसकी चूँचियाँ उसके ससुर की छाती से चिपक गयी। उसका ससुर मेरी नन्द की नंगी चूँचियाँ सहलाने लगा। तभी नन्द ने अपना हाथ उसके पजामा में घुसेड़ दिया और अंदर ही अंदर उसका लौड़ा सहलाने लगी। उसकी मुस्कराहट बता रही थी की लण्ड उसे पसंद आ गया है। उसने मुझे आँखों से इशारा किया की तुम भी अपने ससुर का लण्ड पकड़ लो भाभी जान। अब शर्माने की कोई जरुरत नहीं है। मैंने जैसे ही हाथ बढ़ाया तो मेरे ससुर ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और बोला बहू तुम तो बहुत हसीन हो खूबसूरत हो। उसने मेरी चूँचियाँ दबा दीं और मेरी कई चुम्मियाँ ले लीं। मैंने भी उसकी लुंगी बड़ी बेशर्मी से खोल कर फेंक दी। वह मेरे आगे बिलकुल नंगा हो गया। मेरी बेटी यानी मेरी नन्द ने भी उसे नंगा देखा। ख़ैर वह तो पहले भी कई बार अपने अब्बू को नंगा देख चुकी थी। अब मेरा ध्यान उसके लण्ड पर टिक गया। मैंने लण्ड पकड़ा, उसे चूमा और चाटने लगी। साथ ही साथ उसे घुमा घुमा कर चारों तरफ से देखने लगी। मैंने मन में कहा अरे ये तो मेरे अब्बू के लण्ड से थोड़ा बड़ा ही है। नन्द के ससुर का लण्ड भी इतना ही बड़ा नज़र आ रहा था।
वह नंगी नंगी अपने ससुर का लण्ड पीने लगी और मैं नंगी नंगी अपने ससुर का लण्ड ? नन्द बोली हाय भाभी जान कैसा लगा मेरे अब्बू जान का लौड़ा ? मैंने बताया बहुत उम्दा ? बहुत बढ़िया और बहुत बेहतरीन ? ऐसा लण्ड बहुत कम लोगों का होता है। मेरा ससुर मेरी बुर चाटने लगा और नन्द का ससुर का नन्द की बुर ? थोड़ी देर में मेरे ससुर ने लण्ड मेरी बुर में घुसा दिया। वह मुझे धकाधक चोदने लगा। उधर मेरे सामने मेरी नन्द भी अपने ससुर से झमाझम चुदवाने लगी।
वह बोली - भाभी जान, ससुर के लण्ड के लिए सबसे सेफ जगह है बहू की बुर।
इसीलिए सभी ससुर अपनी अपनी बहू की बुर में लण्ड पेलते रहतें हैं। इतने में मेरी सास नंगी नंगी कमरे में आ गयीं। उसके हाथ में मेरे नंदोई का लण्ड था। वह हम दोनों के बीच में लेट कर अपनी बेटी के शौहर से चुदवाने लगी। यानी बाप चोद रहा है बहू की बुर। बेटा चोद रहा है सास की बुर ? पीछे से आवाज़ आयी भाई चोद रहा है बहन की बुर ? मैंने घूम कर देखा की मेरा जेठ मेरी बड़ी नन्द की बुर लेने में जुटा हुआ है। ये सब हमारे समाज की बलिहारी है। हमारे समाज में सब कुछ जायज़ है. हर तरह की चोदा चोदी जायज़ है।
०=०=०=०=०=०समाप्त
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