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अपने बेटों के लण्ड पे बैठती हूँ मैं - Apne beton ke lund pe baithti hun main
अपने बेटों के लण्ड पे बैठती हूँ मैं - Apne beton ke lund pe baithti hun main , माँ बेटे की वासना मेरा बेटा मेरा यार , माँ बेटा की चुदाई कहानियाँ Maa Ki Chudai Story , बेटे की कामुकता, माँ की चुदाई , जिस्म की जरूरत , चाहत हवस की.
मेरे प्यारे दोस्तों, मैं मादर चोद जितनी खूबसूरत हूँ और हॉट हूँ उतनी ही लण्ड की दीवानी भी हूँ। मैं हमेशा २/३ लण्ड अपने पास रखती हूँ।मैं किसी भी लण्ड से परहेज नहीं करती ? मुझे सब तरह के लण्ड पसंद हैं. हर रंग के लण्ड पसंद हैं। छोटे बड़े बूढ़ों के भी लण्ड पसंद हैं। मुझे मालूम है की 70/80 साल के बूढ़े लोगों के लण्ड भी खूब टन टना कर खड़े होतें है और मस्ती से बुर चोदेतें हैं। यह सच है की लण्ड कभी बूढ़ा नहीं होता ? इसलिए मैं सबके लण्ड पकड़ती हूँ, सबके लण्ड अपने मुंह में लेती हूँ और अपनी चूत में पेलवा कर सबसे चुदवाती हूँ। यहाँ तक की मैं अपने जवान बेटों के लण्ड पकड़ती हूँ, चाटती चूसती हूँ और उनके लण्ड पे बैठती हूँ। फिर उनके लण्ड अपनी चूत में घुसेड़ कर खुले आम रंडी की तरह बड़ी बेशर्मी से चुदवाती हूँ। उनके दोस्तों के भी लण्ड अपने भोसड़ा में ठोंकवाती हूँ। मेरे बेटे और उनके दोस्त सब मुझे अच्छी तरह चोदतें है. मैं अपना भोसड़ा चुदवाने में कोई कसर उठा नहीं रखती। यही हाल मेरी बुर चोदी बेटियों का भी है और बहुओं का भी। वो भी मेरी ही तरह बल्कि मुझसे भी बढ़कर लण्ड की बहुत बड़ी दीवानी हैं। वो भी पेलती हैं लण्ड मेरे भोसड़ा में ?
अब ये कहानी मेरी बेटी अमीरा आपको सुना रही है :-
एक दिन मैं अपनी अम्मी जान और भाभी जान के साथ बैठ कर बातें कर रहीं थीं। बाते बड़ी मजे दार और मसाले दार हो रहीं थीं। गन्दी गन्दी बातों के साथ बीच बीच में मस्ती और प्यार भरी गाली गलौज भी हो रही थी। खूब मज़ा आ रहा था इतने में मेरी पड़ोस की वहीदा आंटी आ गयीं और वह भी हमारी बातों में सरीक हो गईं। हमें उसके मुंह से भी बड़ी अश्लील और गन्दी गन्दी बातें सुनने को मिल रहीं थीं। हम सब उसकी बातें सुन सुन कर खूब तालियां बजा बजा कर हंस रही थीं।
मेरे प्यारे दोस्तों, मैं मादर चोद जितनी खूबसूरत हूँ और हॉट हूँ उतनी ही लण्ड की दीवानी भी हूँ। मैं हमेशा २/३ लण्ड अपने पास रखती हूँ।मैं किसी भी लण्ड से परहेज नहीं करती ? मुझे सब तरह के लण्ड पसंद हैं. हर रंग के लण्ड पसंद हैं। छोटे बड़े बूढ़ों के भी लण्ड पसंद हैं। मुझे मालूम है की 70/80 साल के बूढ़े लोगों के लण्ड भी खूब टन टना कर खड़े होतें है और मस्ती से बुर चोदेतें हैं। यह सच है की लण्ड कभी बूढ़ा नहीं होता ? इसलिए मैं सबके लण्ड पकड़ती हूँ, सबके लण्ड अपने मुंह में लेती हूँ और अपनी चूत में पेलवा कर सबसे चुदवाती हूँ। यहाँ तक की मैं अपने जवान बेटों के लण्ड पकड़ती हूँ, चाटती चूसती हूँ और उनके लण्ड पे बैठती हूँ। फिर उनके लण्ड अपनी चूत में घुसेड़ कर खुले आम रंडी की तरह बड़ी बेशर्मी से चुदवाती हूँ। उनके दोस्तों के भी लण्ड अपने भोसड़ा में ठोंकवाती हूँ। मेरे बेटे और उनके दोस्त सब मुझे अच्छी तरह चोदतें है. मैं अपना भोसड़ा चुदवाने में कोई कसर उठा नहीं रखती। यही हाल मेरी बुर चोदी बेटियों का भी है और बहुओं का भी। वो भी मेरी ही तरह बल्कि मुझसे भी बढ़कर लण्ड की बहुत बड़ी दीवानी हैं। वो भी पेलती हैं लण्ड मेरे भोसड़ा में ?
अब ये कहानी मेरी बेटी अमीरा आपको सुना रही है :-
एक दिन मैं अपनी अम्मी जान और भाभी जान के साथ बैठ कर बातें कर रहीं थीं। बाते बड़ी मजे दार और मसाले दार हो रहीं थीं। गन्दी गन्दी बातों के साथ बीच बीच में मस्ती और प्यार भरी गाली गलौज भी हो रही थी। खूब मज़ा आ रहा था इतने में मेरी पड़ोस की वहीदा आंटी आ गयीं और वह भी हमारी बातों में सरीक हो गईं। हमें उसके मुंह से भी बड़ी अश्लील और गन्दी गन्दी बातें सुनने को मिल रहीं थीं। हम सब उसकी बातें सुन सुन कर खूब तालियां बजा बजा कर हंस रही थीं।
- वह बोली सुनो यार मैं तो आजकल अपनी बेटियों और बहुओं के सामने ही अपने भोसड़ा का बाजा बजवाती हूँ। सबके लण्ड सबके सामने धकाधक अपने भोसड़ा में ठोंकवाती हूँ और लण्ड अपनी बेटियों बहुओं की चूत में पेलती भी हूँ। रात भर घर के सारे मर्द हमारी चूत में लण्ड पेलते रहतें हैं।
- मैंने कहा - आंटी जी तुम्हे ऐसा करने में कोई शर्म नहीं आती ?
- शर्म की माँ की चूत, बेटी अमीरा ? शर्माऊँगी तो मेरा भोसड़ा ठीक तरह से चुद नहीं पायेगा ? मेरे भोसड़ा को तरह तरह के लण्ड पेलवाने की आदत पड़ चुकी है।
- तो फिर तेरी बेटियों और बहुओं को भी शर्म नहीं आती क्या सबके सामने चुदवाने में ?
- मेरी बेटियां तो बुर चोदी मुझसे ज्यादा बेशरम हैं। मेरी बेटियों ने ही मुझे लण्ड मुंह में लेना, लण्ड चूसना चाटना सिखाया। मुठ्ठ मार कर लण्ड पीना सिखाया और लण्ड पर चढ़ कर लण्ड चोदना सिखाया ? अब तो मैं लण्ड चोदने में अपनी बेटियों और बहुओं से कम्पटीशन करती हूँ।
- हाय दईया तब तो बड़ा मज़ा आता होगा तुम्हे आंटी।
- हां बेटी खूब मज़ा आता है सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि सबको मज़ा आता है । मैं तो अपने बेटे के लण्ड पर भी बैठती हूँ। कभी बड़े बेटे के लण्ड पर बैठती हूँ और कभी छोटे बेटे के लण्ड पर ?
- हाय रब्बा, तुम अपने बेटे से चुदवाने में भी कोई शर्म नहीं आती आंटी ? भला कोई अपने बेटे से ही चुदवाती है क्या ?
- क्यों नहीं चुदवाती ? मेरी जैसी हज़ारों हैं बेटी अमीरा जो अपने बेटों से चुदवाती हैं। इसमें शर्म किस बात यार ? मेरे बेटे अब बेटे नहीं है। वो दोनों जवान हो चुके हैं। पूरे मर्द हो गयें हैं। उनके लण्ड भी मोटे तगड़े मर्दों जैसे हो गयें हैं और मुझे गैर मर्दों से चुदवाने की आदत है। ऐसे में मेरे लिए मेरे बेटे भी किसी ग़ैर मर्द से कम नहीं हैं। जब मैं बाहर वालों के लण्ड पर बैठ सकती हूँ तो घर वालों के लण्ड पर क्यों नहीं बैठ सकती ? देखो बेटी अमीरा हम मुसलमान है और हमारे समाज में ये सब जायज़ है। हमारे यहाँ किसी को चोदने की और किसी से भी चुदवाने की पूरी छूट है। किसी दिन तुम मेरे घर आना मैं तेरे सामने अपने बेटे के लण्ड पर बैठ कर दिखाऊंगी और तुझको भी अपने बेटे के लण्ड पर बैठाऊंगी।
आंटी की बातें मेरे मन में घर कर गईं। मेरी अम्मी जान तो मेरे पास ही बैठी हुई थीं। मैंने अम्मी जान से पूंछा की क्या अपने बेटों चुदवाना अच्छी बात है ? वह बोली अरी मेरी बेटी अमीरा एक बात बता ? तुझे मालूम है की तेरी कई सहलियां अपने अब्बू का लण्ड पकड़तीं हैं। उनके लण्ड पर बैठती हैं। अपने अब्बू से चुदवाती हैं। जब एक बेटी अपने अब्बू से चुदवा सकती है तो फिर अम्मी अपंने बेटे से क्यों नहीं चुदवा सकती ? अब बता है कोई जबाब तेरे पास बुर चोदी अमीरा ? मैं सच में निरुत्तर हो गई। मैंने कहा हां अम्मी जाना तुम सच कह रही हो। मेरे पास इस सवाल का कोई जबाब नहीं है।
फिर मैंने वहीदा आंटी पूंछा - आंटी जी, तुम पहली बार अपने बेटे के लण्ड पर कब बैठीं और तब तुम्हे कैसा लगा ? उसका लण्ड कैसा है और उसे तेरा भोसड़ा चोदने में कोई शर्म आयी की नहीं ?
आंटी बड़े प्यार से अपनी कहानी सुनाने लगीं - एक दिन मेरे बेटे उस्मान का एक दोस्त साहिर आ गया। उसे देख कर जाने क्यों मेरा दिल उस पर आ गया। वह बड़ा हैंडसम था। न दाढ़ी थी और न मूंछ। वह क्लीन सेव रहता था। उम्र उसकी २४ साल की थी। मेरा मन उसका लण्ड पकड़ कर देखने का हो गया। मेरी चूत पहले ही गीली हो गयी थी। मेरे मन में आया की अगर इसका लण्ड मेरी बुर चोदे तो कितना मज़ा आएगा। मैं उससे मीठी मीठी बातें करने लगी और अपनी चूँचियाँ भी इधर उधर खोल कर दिखाने लगी। देखो न मेरी चूँचियाँ खुदा ने कितनी बड़ी बड़ी बनाई हैं। बस वह मेरी चूँचियाँ बार बार देखने लगा। मुझे लगा की ये लड़का पूरा मर्द हो गया है। मैं अंदर गयी और अपनी कुर्ती उतार कर वास आ गयी। मेरी चूँचियाँ अब पूरी तरह खुल चुकी थी। हां बस निपल्स ही छिपे हुए थे।
- मैंने कहा - क्या मेरा बेटा तेरा पक्का दोस्त है साहिर ?
- वह बोला - हां आंटी वह मेरा ख़ास दोस्त है।
- तो वह कितना ख़ास दोस्त है तेरा ? तेरी तो शादी हो चुकी है उसकी तो अभी शादी नहीं हुई है।
- इससे क्या होता है आंटी जी। वह तो मेरा दोस्त इतना ख़ास है की मेरी बीवी भी उसकी मुरीद है।
- क्या मतलब ? ज़रा खुल कर बताओ बेटा। शर्माने की कोई जरुरत नहीं है अब तुम जवान हो, शादी शुदा हो।
- अरे आंटी तेरा बेटा मेरी बीवी के साथ सोता है।
- हाय दईया तो क्या मेरा बेटा तेरी बीवी चोदता है ?
- हां चोदता है। वह तो मेरी माँ भी चोदता है। मेरी बहन भी चोदता है।
- अरे वाह ! क्या बात है तेरा दोस्त यानी मेरा बेटा तेरी माँ चोदता है तो फिर तुम उसकी माँ क्यों नहीं चोदते ? उसकी बहन क्यों नहीं चोदते ? आज तुम उसकी माँ भी चोदो और बहन भी चोदो।
उसने कहा अम्मी जान अब तो भाई जान के लण्ड का इंतज़ार है। मैं उसे भी तेरे भोसड़ा में पेलूँगी और मैंने कहा हां बेटी मैं भी उसका लण्ड तेरी चूत में घुसाऊंगी।
दो दिन बाद मेरा बेटा आ गया। रात में मैंने कहा बेटा उसमान अभी कुछ दिन पहले तेरा दोस्त साहिर आया था उसने बताया की तुम उसके पक्के दोस्त हो। वह बोला हां अम्मी जान मैं उसका पक्का दोस्त हूँ। मैंने कहा तुम इतने पक्के दोस्त हो की उसकी बीवी चोदते हो, उसकी बहन चोदते हो। वह बोला अरे अम्मी जान उसकी बीवी बहन दोनों मुझे नंगा करके मेरा लण्ड पकड़ लेती हैं तो मैं क्या करू ? मैंने कहा और उसकी अम्मी जान ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,? तो वह चुप हो गया मैंने कहा वह तुमसे चुदवाती है न ? अरे बेटा जब अपने दोस्त की माँ चोदते हो तो फिर अपनी माँ क्यों नहीं ? ये तो सब हमारे समाज में सब जायज़ है। ऐसा कह कर मैंने उसके पजामा में हाथ घुसेड़ दिया और लण्ड बड़ी बेशर्मी से बाहर निकाल लिया। मेरी बेटी हुसे पकड़ कर बोली अरे अम्मी जान साहिर ठीक ही कह रहा था। ये तो उसके लण्ड से बड़ा भी है और मोटा भी। बस मैं उसी दिन से अपने बेटे से चुदवाने लगी।
दो दिन बाद मेरा बेटा आ गया। रात में मैंने कहा बेटा उसमान अभी कुछ दिन पहले तेरा दोस्त साहिर आया था उसने बताया की तुम उसके पक्के दोस्त हो। वह बोला हां अम्मी जान मैं उसका पक्का दोस्त हूँ। मैंने कहा तुम इतने पक्के दोस्त हो की उसकी बीवी चोदते हो, उसकी बहन चोदते हो। वह बोला अरे अम्मी जान उसकी बीवी बहन दोनों मुझे नंगा करके मेरा लण्ड पकड़ लेती हैं तो मैं क्या करू ? मैंने कहा और उसकी अम्मी जान ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,? तो वह चुप हो गया मैंने कहा वह तुमसे चुदवाती है न ? अरे बेटा जब अपने दोस्त की माँ चोदते हो तो फिर अपनी माँ क्यों नहीं ? ये तो सब हमारे समाज में सब जायज़ है। ऐसा कह कर मैंने उसके पजामा में हाथ घुसेड़ दिया और लण्ड बड़ी बेशर्मी से बाहर निकाल लिया। मेरी बेटी हुसे पकड़ कर बोली अरे अम्मी जान साहिर ठीक ही कह रहा था। ये तो उसके लण्ड से बड़ा भी है और मोटा भी। बस मैं उसी दिन से अपने बेटे से चुदवाने लगी।
आंटी की इतनी लम्बी कहानी सुन कर मेरी शर्म सब ख़तम हो गयी और अम्मी जान की भी। मैं अम्मी जान से खुली हुई थी। वह बोली अमीरा तू बुर चोदी पकड़ेगी अपने भाई जान का लण्ड ? मैंने काह क्यों नहीं पकड़ूँगी। इतना बढ़िया लण्ड क्यों नहीं पकड़ूँगी मैं तो तो सीधे सीधे उससे चुदवा लूंगी अम्मी। वह बोली चुदवाना तो मैं भी चाहती हूँ। मैंने काह तो फिर झिझक किस बात की ? मैं अभी एक बात पूंछ कर बताती हूँ तुझे अम्मी जान। मैंने फरान अपनी खाला को फोन लगा दिया। मैंने कहा खाला जान मैंने सुना है की तेरे बेटे का लण्ड 8+ का है ? वह बोली हां है तो। तूने ठीक ही सुना है अमीरा। मैंने कहा तुम ऐसे ही कह रही हूँ की तूने अपनी आँखों से देखा है। वह बोली अरे अमीरा मैंने उसे पकड़ कर देखा है। मुंह में डाल कर देखा है. अपनी चूत मे पेल कर देखा है। क्या मस्त लौड़ा है उसका ? मज़ा आ जाता है उसे पकड़ कर। मैंने फिर पूंछा कभी तुमने मेरे भाई जान का लण्ड देखा है खाला जान ?
वह बोली हां देखा है कई बार देखा है और अक्सर देखते हूँ बेटी। मेरी बेटी भी देख चुकी है। वह भी मेरे साथ चुदवा चुकी है। तेरे भाई जान का लण्ड कुनबे में सबसे बड़ा है अमीरा। बस ये सुनकर मेरी चूत गन गना उठी। मैंने अम्मी जान को बताया तो वह बोली कुछ भी आज मैं रात को तेरे भाई जान के लण्ड पे बैठूंगी। मैंने भी मुस्काकर कहा आज मैं भी तेरे बेटे के लण्ड पर बैठूंगी अम्मी जान। रात को हम दोनों ने प्लान बनाया और रात के ११ बजे उसका लण्ड मेरी हाथ में था और 5 मिनट के बाद वह लण्ड मेरी माँ की चूत में था। वह अपनी माँ चोदने लगा और मैं अपने भाई का लण्ड अपनी माँ चूत में घुसाने लगी। कुछ देर के बाद उसने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। बस हम सबकी झिझक ख़तम हो गयी। हम दोनों साथ साथ चुदवाने लगीं।
अम्मी बोली - बेटी अमीरा तेरी माँ का भोसड़ा ? तेरी माँ की बिटिया की बुर ?
मैंने कहा - तेरी बेटी की चूत अम्मी जान। तेरी बेटी की माँ का भोसड़ा ?
उसके बाद अम्मी जान अक्सर अपने बेटों के लण्ड पर बैठने लगीं।
एक दिन मैं अपनी फूफी जान के घर चली गई। आने में रात हो गयी तो वह बोली अमीरा रात हो गई है मैं तुम्हे इतनी रात को वापस जाने की इज़ाज़त नहीं दे सकती। इसलिए आज रात को यहीं रुक जाओ। मैं रुक गयी। रात का खाना पीना जब हो गाय तो सब लोग नीचे ज़मीं पर ही लेट गए। उस समय मेरी फूफी उसका बेटा ज़मीर , उसकी बेटी सूबा, बेटी का शौहर जमील। बहू साइना, फूफी की नन्द सारा नंदोई सफीक और फूफी का देवर रहमान थे। सब लोग खूब मजे से बातें कर रहे थे. मैं भी उसमे शामिल थी। मैंने फूफी की बेटी साइना से पूंछा की क्या आपके घर में इसी तरह सब लोग सोते हैं ? वह बोली हां सब लोग एक साथ ही एक ही बड़े और लम्बे बिस्तर पर सोते हैं। जो मेहमान आता है या आती है वह भी इसी तरह सोती है। मैंने फिर पूंछा की क्या इसने कोई ख़ास बात होती है ? वह मुस्कराकर बोली अरे यार ऐसे में चोदना और चुदाना बड़ी आसानी से हो जाता है वरना किस किस को कहाँ कहाँ ढूंढा जाए ?
मैं कुछ समझ तो गई पर चोदा चोदी के मौके का इंतज़ार करने लगी। हम लोगों ने पहले तो खूब गन्दी गन्दी बातें की और फिर लेट गए। जिसको जहाँ जगह मिली वह वहीँ लेट गया। करीब एक घंटा के बाद कुछ सुगबुगाहट होने लगी। मैंने अपनी आँखें खोल कर देखने लगी। सबसे पहले मैंने अपनी फूफी जान को देखा। वह खसक कर अपनी बेटी के मियां जमाल की तरफ लेट गयी और उसके लण्ड पर हाथ रख दिया। उसकी बेटी सूबा ने अपना हाथ फूफी के नंदोई सफीक के पजामा में घुसेड़ दिया। वह भी सूबा की चूँचियाँ मसलने लगा। उसकी बहू सेना ने हाथ बढाकर फूफी के देवर का लण्ड पकड़ कर बहार ही निकाल लिया। मेरी नज़र जब लण्ड पर पड़ी तो मेरे तन बदन में आग लग गयी। बहू अपने फुफिया ससुर के लण्ड बड़े प्यार से हिलाने लगी। फूफी के बेटे ज़हीर का लण्ड फूफी की नन्द सारा ने पकड़ रखा था। ज़हीर भाई जान का लण्ड मैंने पहली बार देखा तो मेरी चूत बहन चोद गीली हो गयी। मैंने मन में कहा हाय रे इतना बड़ा लण्ड ? मुझे इसे बहुत पहले पकड़ना चाहिए था। मेरे देखते ही देखते सब लोग एक एक करके नंगे हो गए. सबके लण्ड खड़े होकर टन टनाने लगे। फूफी जान भी नंगी हुई तो मुझे उसकी चूँचियाँ और भोसड़ा देख कर मज़ा आया। उसकी बेटी नंगी हुई तो उसकी बुर और बूब्स बड़े मस्त दिखे। उसकी बहू तो नंगी नंगी रंडी की तरह अपने फुफिया ससुर का लण्ड पीने लगी। उसकी नन्द तो मादर चोद बड़ी बेशर्म निकली। वह अपनी चूत फैलाये हुए लण्ड का मज़ा लेने लगी। तभी किसी ने अपना लण्ड मेरे होठों पर रख दिया। मैं उसे पहचान नहीं पाई। तब तक फूफी की बहू साइना बोली है मेरी अमीरा नन्द रानी ये मेरे अब्बू का लण्ड है। तू पहले इसे अपनी मुंह में ले ले और फिर अपनी चूत में ? मैं भी गरम थी चुदासी थी तो मेरा लण्ड अपने आप ही खुल गया। मैं नंगी नंगी लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी। इस तरह पूरे माहौल ने चुदाई शुरू हो गयी।
मैं वाकई मस्ती से साइना के अब्बू जान से चुदवाने लगी। फूफी अपनी बेटी के मियां से चुदवाने लगीं, उसकी बेटी अपने फूफा से चुदवाने लगी, उसकी बहू अपने चचिया ससुर से चुदवाने लगी और फूफी की नन्द फूफी के बेटे से चुदवाने लगी, सबकी बुर इस तरह चुदने लगी। चुदाई की आवाज़ें पूरे घर में गूंजने लगीं। लण्ड और चूत की महक सारे घर में फ़ैलन लगी. मुझे इस माहौल में बड़ा मज़ा आता है। मुझे सबको नंगी और नंगा देखने में खूब मज़ा आता है। लगभग आधे घने तक यह चुदाई चाय और फिर एक एक करके सबके लण्ड झड़ने लगे और सबकी चूत ढीली होने लगी।
दूसरी पारी में मैंने देखा की फूफी जान अपने ही बेटे के लण्ड पर बैठी हुई हैं। उधर उसकी बहू भी अपने अब्बू के लण्ड पर बैठी हुई है। उसकी बेटी सूबा अपने चचा जान के लण्ड पर बैठ गई। फूफी की नन्द फूफी के दामाद के लण्ड पे बैठ गयी और फिर मैं फूफी के नंदोई के लण्ड पे बैठ गयी। सब की सब लण्ड पे बैठी हुई लण्ड ही चोदने लगीं। आजकल लण्ड पे बैठने का रिवाज़ कुछ ज्यादा ही चल पड़ा है। आजकल की बुर चोदी बीवियां, बहू और बेटियां सब गैर मर्दों के लण्ड पे बैठ कर चुदाई का मज़ा लूटती हैं।
०=०=०=०= समाप्त
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वह बोली हां देखा है कई बार देखा है और अक्सर देखते हूँ बेटी। मेरी बेटी भी देख चुकी है। वह भी मेरे साथ चुदवा चुकी है। तेरे भाई जान का लण्ड कुनबे में सबसे बड़ा है अमीरा। बस ये सुनकर मेरी चूत गन गना उठी। मैंने अम्मी जान को बताया तो वह बोली कुछ भी आज मैं रात को तेरे भाई जान के लण्ड पे बैठूंगी। मैंने भी मुस्काकर कहा आज मैं भी तेरे बेटे के लण्ड पर बैठूंगी अम्मी जान। रात को हम दोनों ने प्लान बनाया और रात के ११ बजे उसका लण्ड मेरी हाथ में था और 5 मिनट के बाद वह लण्ड मेरी माँ की चूत में था। वह अपनी माँ चोदने लगा और मैं अपने भाई का लण्ड अपनी माँ चूत में घुसाने लगी। कुछ देर के बाद उसने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया। बस हम सबकी झिझक ख़तम हो गयी। हम दोनों साथ साथ चुदवाने लगीं।
अम्मी बोली - बेटी अमीरा तेरी माँ का भोसड़ा ? तेरी माँ की बिटिया की बुर ?
मैंने कहा - तेरी बेटी की चूत अम्मी जान। तेरी बेटी की माँ का भोसड़ा ?
उसके बाद अम्मी जान अक्सर अपने बेटों के लण्ड पर बैठने लगीं।
एक दिन मैं अपनी फूफी जान के घर चली गई। आने में रात हो गयी तो वह बोली अमीरा रात हो गई है मैं तुम्हे इतनी रात को वापस जाने की इज़ाज़त नहीं दे सकती। इसलिए आज रात को यहीं रुक जाओ। मैं रुक गयी। रात का खाना पीना जब हो गाय तो सब लोग नीचे ज़मीं पर ही लेट गए। उस समय मेरी फूफी उसका बेटा ज़मीर , उसकी बेटी सूबा, बेटी का शौहर जमील। बहू साइना, फूफी की नन्द सारा नंदोई सफीक और फूफी का देवर रहमान थे। सब लोग खूब मजे से बातें कर रहे थे. मैं भी उसमे शामिल थी। मैंने फूफी की बेटी साइना से पूंछा की क्या आपके घर में इसी तरह सब लोग सोते हैं ? वह बोली हां सब लोग एक साथ ही एक ही बड़े और लम्बे बिस्तर पर सोते हैं। जो मेहमान आता है या आती है वह भी इसी तरह सोती है। मैंने फिर पूंछा की क्या इसने कोई ख़ास बात होती है ? वह मुस्कराकर बोली अरे यार ऐसे में चोदना और चुदाना बड़ी आसानी से हो जाता है वरना किस किस को कहाँ कहाँ ढूंढा जाए ?
मैं कुछ समझ तो गई पर चोदा चोदी के मौके का इंतज़ार करने लगी। हम लोगों ने पहले तो खूब गन्दी गन्दी बातें की और फिर लेट गए। जिसको जहाँ जगह मिली वह वहीँ लेट गया। करीब एक घंटा के बाद कुछ सुगबुगाहट होने लगी। मैंने अपनी आँखें खोल कर देखने लगी। सबसे पहले मैंने अपनी फूफी जान को देखा। वह खसक कर अपनी बेटी के मियां जमाल की तरफ लेट गयी और उसके लण्ड पर हाथ रख दिया। उसकी बेटी सूबा ने अपना हाथ फूफी के नंदोई सफीक के पजामा में घुसेड़ दिया। वह भी सूबा की चूँचियाँ मसलने लगा। उसकी बहू सेना ने हाथ बढाकर फूफी के देवर का लण्ड पकड़ कर बहार ही निकाल लिया। मेरी नज़र जब लण्ड पर पड़ी तो मेरे तन बदन में आग लग गयी। बहू अपने फुफिया ससुर के लण्ड बड़े प्यार से हिलाने लगी। फूफी के बेटे ज़हीर का लण्ड फूफी की नन्द सारा ने पकड़ रखा था। ज़हीर भाई जान का लण्ड मैंने पहली बार देखा तो मेरी चूत बहन चोद गीली हो गयी। मैंने मन में कहा हाय रे इतना बड़ा लण्ड ? मुझे इसे बहुत पहले पकड़ना चाहिए था। मेरे देखते ही देखते सब लोग एक एक करके नंगे हो गए. सबके लण्ड खड़े होकर टन टनाने लगे। फूफी जान भी नंगी हुई तो मुझे उसकी चूँचियाँ और भोसड़ा देख कर मज़ा आया। उसकी बेटी नंगी हुई तो उसकी बुर और बूब्स बड़े मस्त दिखे। उसकी बहू तो नंगी नंगी रंडी की तरह अपने फुफिया ससुर का लण्ड पीने लगी। उसकी नन्द तो मादर चोद बड़ी बेशर्म निकली। वह अपनी चूत फैलाये हुए लण्ड का मज़ा लेने लगी। तभी किसी ने अपना लण्ड मेरे होठों पर रख दिया। मैं उसे पहचान नहीं पाई। तब तक फूफी की बहू साइना बोली है मेरी अमीरा नन्द रानी ये मेरे अब्बू का लण्ड है। तू पहले इसे अपनी मुंह में ले ले और फिर अपनी चूत में ? मैं भी गरम थी चुदासी थी तो मेरा लण्ड अपने आप ही खुल गया। मैं नंगी नंगी लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी। इस तरह पूरे माहौल ने चुदाई शुरू हो गयी।
मैं वाकई मस्ती से साइना के अब्बू जान से चुदवाने लगी। फूफी अपनी बेटी के मियां से चुदवाने लगीं, उसकी बेटी अपने फूफा से चुदवाने लगी, उसकी बहू अपने चचिया ससुर से चुदवाने लगी और फूफी की नन्द फूफी के बेटे से चुदवाने लगी, सबकी बुर इस तरह चुदने लगी। चुदाई की आवाज़ें पूरे घर में गूंजने लगीं। लण्ड और चूत की महक सारे घर में फ़ैलन लगी. मुझे इस माहौल में बड़ा मज़ा आता है। मुझे सबको नंगी और नंगा देखने में खूब मज़ा आता है। लगभग आधे घने तक यह चुदाई चाय और फिर एक एक करके सबके लण्ड झड़ने लगे और सबकी चूत ढीली होने लगी।
दूसरी पारी में मैंने देखा की फूफी जान अपने ही बेटे के लण्ड पर बैठी हुई हैं। उधर उसकी बहू भी अपने अब्बू के लण्ड पर बैठी हुई है। उसकी बेटी सूबा अपने चचा जान के लण्ड पर बैठ गई। फूफी की नन्द फूफी के दामाद के लण्ड पे बैठ गयी और फिर मैं फूफी के नंदोई के लण्ड पे बैठ गयी। सब की सब लण्ड पे बैठी हुई लण्ड ही चोदने लगीं। आजकल लण्ड पे बैठने का रिवाज़ कुछ ज्यादा ही चल पड़ा है। आजकल की बुर चोदी बीवियां, बहू और बेटियां सब गैर मर्दों के लण्ड पे बैठ कर चुदाई का मज़ा लूटती हैं।
०=०=०=०= समाप्त
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