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मुझे लण्ड पकड़ने की आदत है - Mujhe land pakdne ki aadat hai
मुझे लण्ड पकड़ने की आदत है - Mujhe land pakdne ki aadat hai , मुझे अपना लंड देदो मैं चूत और गांड के द्वार खोल दूंगी , थन की प्यासी , औजार बड़ा होना चाहिए , मुझे चोदो , चुदाई करो , चूत फाड़ दो , चुद्वाती हूँ , चुदवाने आई हूँ , चुद कर शांत होना चाहती हूँ , चुद्कड़ हूँ , चोद लो.
मैं अपनी शादी के बाद अपनी ससुराल आई तो मैं जानना चाहती थी की मेरी नन्द का स्वभाव कैसा है ? वह बात करने में कैसी है ? हंस मुख है की चिड़चिड़ी स्वभाव की है ? क्या मेरी उसके साथ पटरी खायेगी ? क्या वह मेरा साथ दे सकेगी ? कहीं कोई धोखे बाजी तो नहीं करेगी ? यही सब मैं अपनी सास के बारे में भी सोंच रही थी। अब मेरी ज़िन्दगी इन्हीं दोनों लोगों के बीच घूमने फिरने वाली है। अगर इनका स्वाभाव मेरी तरह हुआ की ये घर ज़न्नत हो जायेगा और अगर नहीं तो ये घर मेरे लिए जहन्नुम बन जायेगा ? मैं इसी उधेड़बुन में थी और मेरी उत्सुकता बढ़ती ही जा रही थी।
मैं खूबसूरत हूँ, बड़ी बड़ी चूँचियों वाली, हॉट और बेहद बिंदास स्वभाव की लड़की हूँ। मुझे लण्ड पकड़ने की आदत है वह भी नए नए लण्ड। मैं गालियां भी खूब देती हूँ। जो मुझे जितना प्यारा होता है मैंने उसे उतनी ही ज्यादा गालियां देती हूँ। लोग कहतें है की रेशमा अगर तुम्हे मुस्करा मुस्करा कर गालियां दे रही है तो समझो की वह तुम्हे दिलोजान से प्यार कर रही है। मैं चोदा चोदी के खेल खूब खेलती हूँ। गैर मर्दों के आगे मुझे नंगी होने में बड़ा मज़ा आता है। गैर मर्दों के खड़े लण्ड देखने में मुझे ज़न्नत का मज़ा आता है। लण्ड पीना और लण्ड बुर में पेलना मेरा पसंदीदा खेल है। मैं दो या दो से ज्यादा लण्ड से चुदवाने में ज्यादा मज़ा लेती हूँ।
अगर मेरी सास और नन्द भी इसी तरह की हुई तो मैं अपने आपको बड़ी नसीबवाली समझूंगी। फिर मुझे नन्द की बुर में लण्ड पेलने में कोई देर नहीं लगेगी और सास का भोसड़ा भी चोदने में मैं कोई वख्त नहीं लगाऊंगी।
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