Home
» Didi ki Chudai ko choda भाई ने दीदी को चोद दिया Bahan aur Bhai ka najayaj rishta
» बड़े भाई के साथ चूत चुदाई - बड़े भैया ने दीदी को चोदा खूब मजे से - Bade Bhai ke sath suhagrat
बड़े भाई के साथ चूत चुदाई - बड़े भैया ने दीदी को चोदा खूब मजे से - Bade Bhai ke sath suhagrat
बड़े भाई के साथ चूत चुदाई - बड़े भैया ने दीदी को चोदा खूब मजे से - Bade Bhai ke sath suhagrat , Antarvasna Sex Stories , Hindi Sex Story , Real Indian Chudai Kahani , choda chadi cudai cudi coda free of cost , Time pass Story.
मेरे बड़े भाई का नाम विजय है। उसकी एक गर्लफ्रैंड भी है जिसका नाम गीता है। गीता मेरे साथ पढ़ चुकी है और मेरे घर से थोड़ी दूर ही रहती है। गीता विजय को पसंद करती है लेकिन गीता के कई दोस्त हैं। गीता एक चालू लड़की है। फ़िर भी विजय को गीता से अकेले में मिलने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।
एक दिन मेरे पापा और मम्मी दो दिन के लिए एक शादी में जबलपुर जाने वाले थे, हम पढ़ाई का बहाना करके घर में ही रुके रहे। वैसे विजय मेरा बड़ा भाई है लेकिन हम दोस्तों की तरह रहते हैं। हम एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते हैं और आपस में हर एक विषय पर खुल कर बातें करते हैं, यहाँ तक सेक्स की बात करने से भी हमें कोई शर्म नहीं आती है।
उस दिन विजय ने मुझसे कहा- मंजू, दो दिन तक हम लोग अकेले रहेंगे, अगर तुम किसी तरह गीता को दो दिन के लिए अपने घर रहने के लिए तैयार कर लो तो मैं तुम्हारी हर शर्त मान लूंगा।
मैंने भी अपनी शर्त रखी- मैं गीता को किसी भी बहाने अपने घर रुकने पर राजी कर लूंगी लेकिन तुम गीता के साथ जो भी करोगे मेरे सामने करना होगा।विजय बोला- लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरा पूरा साथ देना पड़ेगा !
इस तरह हम दोनों के बीच शर्तें तय हो गईं।
शाम को मैंने गीता को फोन किया कि मुझे अपना एक प्रोजेक्ट बनाने के लिए उसकी मदद चाहिए और दो दिनों में प्रोजेक्ट पूरा करना है, घर में अकेली हूँ मेरे घर में कोई परेशानी नहीं होगी, मिल कर पढ़ाई और मस्ती करेंगे।
मैंने कहा- विजय भी हमारी मदद करेगा !
गीता भी फ़ौरन तैयार हो गई। गीता काफी चालाक है, वह सारा मामला समझ गई और एक घंटे के बाद ही घर आ गई। वह काफी सजधज कर आई थी।
दरवाज़े पर विजय ने ही उसका स्वागत किया। गीता आराम से सोफे पर बैठ गई और इधर उधर की बातें करने बाद विजय तीन व्हिस्की के पैग बना कर लाया। हम धीमे धीमे व्हिस्की की चुस्कियाँ लेने लगे। विजय खड़े खड़े हमारी बातें सुन रहा था।
तभी विजय ने झुक कर गीता को चूम लिया। गीता खड़ी हो गई और विजय की पैंट की जिप खोल कर उसका लण्ड चूसने लगी। गीता ने विजय का दस इंची लण्ड पूरा अपने मुँह में ले लिया। मैं भी विजय के लण्ड का लाल लाल सुपारा देख कर दंग रह गई। ऐसा लग रहा था कि जैसे गुस्से से लण्ड का मुँह लाल हो गया हो और चूत पर हमला करने वाला हो। गीता बड़े प्यार से लण्ड चूस रही थी और सारा लण्ड निगल लेना चाहती थी। यह देख कर मेरी चूत भी गीली हो रही थी। गीता लण्ड को अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी, इससे लण्ड और सख्त और लंबा हो रहा था। लण्ड गीता के थूक से पूरी तरह से सना था।
तभी गीता ने विजय को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके बाक़ी के सारे कपड़े निकाल दिए। विजय का लण्ड कुतुबमीनार की तरह सीधा खड़ा था। एक एक करके गीता ने अपने कपड़े भी उतार दिए। जब गीता ने अपनी पैंटी भी उतार दी तो मैं उसकी गोरी गोरी चूत देख कर मोहित हो गई। गीता ने अपनी चूत के बाल अच्छी तरह से साफ़ किए थे। चूत से सेक्सी खुशबू आ रही थी। मैंने गीता की चूत को चूम लिया। आख़िर वह मेरे भाई का इतना लंबा मोटा लण्ड लेने जा रही थी। और कोई लड़की होती तो विजय के लण्ड से उसकी चूत जरूर फट जाती।
फ़िर गीता उठी और विजय के लण्ड को निशाना बना कर उस पर अपनी चूत रख दी। लण्ड का सुपारा चूत पर था, गीता लण्ड पर बैठ गई। गीता के दवाब से लण्ड अन्दर घुसने लगा। जब लण्ड का सुपारा चूत में घुस गया तो चूत में लण्ड के लिए रास्ता बनता गया। लण्ड चूत को चीरते हुए भीतर जाने लगा।
मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैं लगातार गीता को हिम्मत दिलाती रही और कभी उसे चूमती और कभी उसके स्तन सहलाती रही। जैसे ही पूरा लण्ड गीता की चूत में समा गया, मैंने ताली बजा कर गीता को बधाई दी। गीता अपनी चूत में विजय का लण्ड इस तरह अन्दर-बाहर करने लगी जैसे वह विजय की आज ठीक से चुदाई करे बिना नहीं मानेगी।
कुछ देर बाद विजय गीता के ऊपर आ गया और उसका लण्ड गच से गीता की चूत में धंस गया। विजय गीता को लगातार चूम रहा था और उसकी चूत की भगनासा को मसल रहा था।
गीता मस्ती में बक रही थी- विजय जोर जोर से डालो, फाड़ दो मेरी चूत ! उफ़ मज़ा आ रहा है ! जोर से धक्के मारो ! मेरी पूरी चूत भर गई है चूत में अब जगह नहीं है। चोदो ! लगे रहो ! आज मैं जन्नत का मज़ा ले रही हूँ ! तुम्हारा लण्ड कमाल है।
करीब आधा घंटे के बाद विजय ने गीता को पलंग पर घोड़ी बनाकर अपना लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुसा दिया और दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए। इस जबरदस्त चुदाई से गीता हाय हाय करने लगी। गीता हर धक्के पर अपनी चूत लण्ड की तरफ़ धकेल देती थी जिससे मजा दुगुना हो जाता था। गीता की चूत से पानी रिस रहा था, फ़िर भी वह लगातार चुदवा रही थी।
यह देख कर मुझे भी इसी तरह चुदवाने की इच्छा हो रही थी और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
इसी तरह आधा घंटा और चोदने के बाद विजय ने मुझे बुला कर कहा- गीता की चूत काफी चुद गई है, अब मैं गीता की गाण्ड मारूंगा, तुम ज़रा पास आकर गीता की कमर जोर से पकड़े रहना और गीता की चूत और वक्ष मसलते रहना। अगर गीता को दर्द हो तो उसकी चूत चाटते रहना, इससे दर्द कम हो जाएगा। वरना वह मेरा इतना लंबा मोटा लण्ड सह नहीं पायेगी, उसकी गाण्ड भी फट सकती है, तुम अपने हाथों से गीता के चूतड़ फैलाते रहना।
फ़िर विजय ने दोबारा गीता को घोड़ी बनाया। मैंने थोड़ा सा तेल गीता की गाण्ड और विजय के लण्ड पर लगा दिया और विजय को गाण्ड जीतने का आशीर्वाद दे दिया। विजय ने उठ कर अपने लण्ड का सुपारा गीता की गाण्ड के छेद पर रख कर थोड़ा सा दवाब डाला। सुपारा गाण्ड में घुस गया, गीता चिल्लाई- मर गई ! ओह ओह उई उई ! धीमे ! ज़रा धीमे से ! यह लण्ड काफी मोटा है ! मैं सह नहीं पाऊँगी।
विजय ने कहा- हिम्मत रखो ! हम तुम्हारी गाण्ड नहीं फटने देंगे ! आराम से डालेंगे !
फ़िर विजय ने चौथाई लण्ड अन्दर घुसा दिया जो आसानी चला गया। फ़िर गीता के दर्द की परवाह किए बिना आधा लण्ड जब चला गया तो मैंने कहा- अब रुको नहीं ! बाक़ी लण्ड भी घुसा दो !
विजय ने एक ऐसा जोर का धक्का मारा कि गाण्ड को फाड़ते हुए गाण्ड में समा गया। गीता ने इतनी जोर की चीख मारी कि मुझे उसका मुँह बंद करना पड़ा।
विजय बोला- अब थोड़ा सा दर्द सह लो ! गाण्ड में लण्ड के लिए रास्ता बन चुका है !
कुछ देर बाद विजय ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू किया तो लण्ड आसानी से घुसने लगा। गीता ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, उसका दर्द गायब हो चुका था। मुझे ताज्जुब हुआ कि लण्ड कैसे फचा फच गाण्ड में जा रहा है और गीता मजे से गाण्ड मरवा रही है। मैं गीता की हिम्मत की दाद देने लगी, मैं बोली- तुम्हें तो गाण्ड मरवाने का ओलम्पिक मैडल मिलना चाहिए।
यह सुन कर विजय ने अपनी स्पीड तेज कर दी। जब उसका लण्ड से बाहर आता तो तो ऐसा लगता था कि लण्ड के साथ पूरी गाण्ड बाहर आ जायेगी क्योंकि लण्ड गाण्ड में पूरी तरह से कसा हुआ था।
गीता कभी मुझे और कभी विजय को चूम लेती थी। आधे घंटे की गाण्ड मराई के बाद विजय ने अपना गर्म गर्म वीर्य गीता की गाण्ड में छोड़ दिया जो गाण्ड से बाहर बहने लगा। विजय के लण्ड से गीता की गाण्ड काफी चौड़ी हो गई थी। लण्ड निकलने के बाद गाण्ड का गुलाबी चौड़ा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था।
गीता ने विजय के लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया और एक तरफ़ लेट कर साँस लेने लगी।
मैंने पूछा- कैसा लगा विजय का लण्ड?
गीता ने लण्ड को चूम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। इससे लण्ड फ़िर से फड़कने लगा और कड़क होकर खड़ा हो गया। तभी गीता ने मुझे अपने पास पलंग पर गिरा लिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरे कपड़े उतार दिए और विजय का लण्ड मेरी चूत पर रख दिया।
गीता ने कहा- मंजू चुदाई कुदरत का वरदान है ! दुनिया के सभी प्राणी चुदाई करते हैं ! एक बार लण्ड किसी की चूत में घुस जाता है तो सारे रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, सिर्फ़ चूत और लण्ड का रिश्ता बाक़ी रह जाता है। इसलिए किसी लण्ड का अपमान नही करना चाहिए, जो भी मिले, जैसा भी मिले, जहाँ भी मिले, लण्ड का मजा जरूर लेना चाहिए। तू तो किस्मत वाली है कि घर में ही इतना मजेदार लण्ड मौजूद है।
फ़िर भी पुराने विचारों में अपना मजा बरबाद कर रही है। हर एक चूत को हर एक लण्ड से मजा मिलता है। देख, मैंने इसी सुख के लिए विजय के घोड़े जैसे लण्ड से तेर सामने चुदा लिया और गाण्ड भी मरवाई। यह एसा मजा है जिसमे कोई खर्चा नहीं लगता, सिर्फ़ हिम्मत चाहिए। चल उठ और मेरे सामने ही विजय से चुदा ले ! फ़िर तुझे भी पता चल जाएगा कि ऐसे लण्ड से चुदाने में कितना मजा आता है। तू फ़िर रोज चुदवाने लगेगी और मुझे याद करेगी।
मेरे बड़े भाई का नाम विजय है। उसकी एक गर्लफ्रैंड भी है जिसका नाम गीता है। गीता मेरे साथ पढ़ चुकी है और मेरे घर से थोड़ी दूर ही रहती है। गीता विजय को पसंद करती है लेकिन गीता के कई दोस्त हैं। गीता एक चालू लड़की है। फ़िर भी विजय को गीता से अकेले में मिलने का कोई मौका नहीं मिल पा रहा था।
एक दिन मेरे पापा और मम्मी दो दिन के लिए एक शादी में जबलपुर जाने वाले थे, हम पढ़ाई का बहाना करके घर में ही रुके रहे। वैसे विजय मेरा बड़ा भाई है लेकिन हम दोस्तों की तरह रहते हैं। हम एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपाते हैं और आपस में हर एक विषय पर खुल कर बातें करते हैं, यहाँ तक सेक्स की बात करने से भी हमें कोई शर्म नहीं आती है।
उस दिन विजय ने मुझसे कहा- मंजू, दो दिन तक हम लोग अकेले रहेंगे, अगर तुम किसी तरह गीता को दो दिन के लिए अपने घर रहने के लिए तैयार कर लो तो मैं तुम्हारी हर शर्त मान लूंगा।
मैंने भी अपनी शर्त रखी- मैं गीता को किसी भी बहाने अपने घर रुकने पर राजी कर लूंगी लेकिन तुम गीता के साथ जो भी करोगे मेरे सामने करना होगा।विजय बोला- लेकिन इसके लिए तुम्हें मेरा पूरा साथ देना पड़ेगा !
इस तरह हम दोनों के बीच शर्तें तय हो गईं।
शाम को मैंने गीता को फोन किया कि मुझे अपना एक प्रोजेक्ट बनाने के लिए उसकी मदद चाहिए और दो दिनों में प्रोजेक्ट पूरा करना है, घर में अकेली हूँ मेरे घर में कोई परेशानी नहीं होगी, मिल कर पढ़ाई और मस्ती करेंगे।
मैंने कहा- विजय भी हमारी मदद करेगा !
गीता भी फ़ौरन तैयार हो गई। गीता काफी चालाक है, वह सारा मामला समझ गई और एक घंटे के बाद ही घर आ गई। वह काफी सजधज कर आई थी।
दरवाज़े पर विजय ने ही उसका स्वागत किया। गीता आराम से सोफे पर बैठ गई और इधर उधर की बातें करने बाद विजय तीन व्हिस्की के पैग बना कर लाया। हम धीमे धीमे व्हिस्की की चुस्कियाँ लेने लगे। विजय खड़े खड़े हमारी बातें सुन रहा था।
तभी विजय ने झुक कर गीता को चूम लिया। गीता खड़ी हो गई और विजय की पैंट की जिप खोल कर उसका लण्ड चूसने लगी। गीता ने विजय का दस इंची लण्ड पूरा अपने मुँह में ले लिया। मैं भी विजय के लण्ड का लाल लाल सुपारा देख कर दंग रह गई। ऐसा लग रहा था कि जैसे गुस्से से लण्ड का मुँह लाल हो गया हो और चूत पर हमला करने वाला हो। गीता बड़े प्यार से लण्ड चूस रही थी और सारा लण्ड निगल लेना चाहती थी। यह देख कर मेरी चूत भी गीली हो रही थी। गीता लण्ड को अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी, इससे लण्ड और सख्त और लंबा हो रहा था। लण्ड गीता के थूक से पूरी तरह से सना था।
तभी गीता ने विजय को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके बाक़ी के सारे कपड़े निकाल दिए। विजय का लण्ड कुतुबमीनार की तरह सीधा खड़ा था। एक एक करके गीता ने अपने कपड़े भी उतार दिए। जब गीता ने अपनी पैंटी भी उतार दी तो मैं उसकी गोरी गोरी चूत देख कर मोहित हो गई। गीता ने अपनी चूत के बाल अच्छी तरह से साफ़ किए थे। चूत से सेक्सी खुशबू आ रही थी। मैंने गीता की चूत को चूम लिया। आख़िर वह मेरे भाई का इतना लंबा मोटा लण्ड लेने जा रही थी। और कोई लड़की होती तो विजय के लण्ड से उसकी चूत जरूर फट जाती।
फ़िर गीता उठी और विजय के लण्ड को निशाना बना कर उस पर अपनी चूत रख दी। लण्ड का सुपारा चूत पर था, गीता लण्ड पर बैठ गई। गीता के दवाब से लण्ड अन्दर घुसने लगा। जब लण्ड का सुपारा चूत में घुस गया तो चूत में लण्ड के लिए रास्ता बनता गया। लण्ड चूत को चीरते हुए भीतर जाने लगा।
मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। मैं लगातार गीता को हिम्मत दिलाती रही और कभी उसे चूमती और कभी उसके स्तन सहलाती रही। जैसे ही पूरा लण्ड गीता की चूत में समा गया, मैंने ताली बजा कर गीता को बधाई दी। गीता अपनी चूत में विजय का लण्ड इस तरह अन्दर-बाहर करने लगी जैसे वह विजय की आज ठीक से चुदाई करे बिना नहीं मानेगी।
कुछ देर बाद विजय गीता के ऊपर आ गया और उसका लण्ड गच से गीता की चूत में धंस गया। विजय गीता को लगातार चूम रहा था और उसकी चूत की भगनासा को मसल रहा था।
गीता मस्ती में बक रही थी- विजय जोर जोर से डालो, फाड़ दो मेरी चूत ! उफ़ मज़ा आ रहा है ! जोर से धक्के मारो ! मेरी पूरी चूत भर गई है चूत में अब जगह नहीं है। चोदो ! लगे रहो ! आज मैं जन्नत का मज़ा ले रही हूँ ! तुम्हारा लण्ड कमाल है।
करीब आधा घंटे के बाद विजय ने गीता को पलंग पर घोड़ी बनाकर अपना लण्ड उसकी चूत में पीछे से घुसा दिया और दनादन धक्के लगाना शुरू कर दिए। इस जबरदस्त चुदाई से गीता हाय हाय करने लगी। गीता हर धक्के पर अपनी चूत लण्ड की तरफ़ धकेल देती थी जिससे मजा दुगुना हो जाता था। गीता की चूत से पानी रिस रहा था, फ़िर भी वह लगातार चुदवा रही थी।
यह देख कर मुझे भी इसी तरह चुदवाने की इच्छा हो रही थी और मैं अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
इसी तरह आधा घंटा और चोदने के बाद विजय ने मुझे बुला कर कहा- गीता की चूत काफी चुद गई है, अब मैं गीता की गाण्ड मारूंगा, तुम ज़रा पास आकर गीता की कमर जोर से पकड़े रहना और गीता की चूत और वक्ष मसलते रहना। अगर गीता को दर्द हो तो उसकी चूत चाटते रहना, इससे दर्द कम हो जाएगा। वरना वह मेरा इतना लंबा मोटा लण्ड सह नहीं पायेगी, उसकी गाण्ड भी फट सकती है, तुम अपने हाथों से गीता के चूतड़ फैलाते रहना।
फ़िर विजय ने दोबारा गीता को घोड़ी बनाया। मैंने थोड़ा सा तेल गीता की गाण्ड और विजय के लण्ड पर लगा दिया और विजय को गाण्ड जीतने का आशीर्वाद दे दिया। विजय ने उठ कर अपने लण्ड का सुपारा गीता की गाण्ड के छेद पर रख कर थोड़ा सा दवाब डाला। सुपारा गाण्ड में घुस गया, गीता चिल्लाई- मर गई ! ओह ओह उई उई ! धीमे ! ज़रा धीमे से ! यह लण्ड काफी मोटा है ! मैं सह नहीं पाऊँगी।
विजय ने कहा- हिम्मत रखो ! हम तुम्हारी गाण्ड नहीं फटने देंगे ! आराम से डालेंगे !
फ़िर विजय ने चौथाई लण्ड अन्दर घुसा दिया जो आसानी चला गया। फ़िर गीता के दर्द की परवाह किए बिना आधा लण्ड जब चला गया तो मैंने कहा- अब रुको नहीं ! बाक़ी लण्ड भी घुसा दो !
विजय ने एक ऐसा जोर का धक्का मारा कि गाण्ड को फाड़ते हुए गाण्ड में समा गया। गीता ने इतनी जोर की चीख मारी कि मुझे उसका मुँह बंद करना पड़ा।
विजय बोला- अब थोड़ा सा दर्द सह लो ! गाण्ड में लण्ड के लिए रास्ता बन चुका है !
कुछ देर बाद विजय ने लण्ड को अन्दर-बाहर करना शुरू किया तो लण्ड आसानी से घुसने लगा। गीता ने अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी, उसका दर्द गायब हो चुका था। मुझे ताज्जुब हुआ कि लण्ड कैसे फचा फच गाण्ड में जा रहा है और गीता मजे से गाण्ड मरवा रही है। मैं गीता की हिम्मत की दाद देने लगी, मैं बोली- तुम्हें तो गाण्ड मरवाने का ओलम्पिक मैडल मिलना चाहिए।
यह सुन कर विजय ने अपनी स्पीड तेज कर दी। जब उसका लण्ड से बाहर आता तो तो ऐसा लगता था कि लण्ड के साथ पूरी गाण्ड बाहर आ जायेगी क्योंकि लण्ड गाण्ड में पूरी तरह से कसा हुआ था।
गीता कभी मुझे और कभी विजय को चूम लेती थी। आधे घंटे की गाण्ड मराई के बाद विजय ने अपना गर्म गर्म वीर्य गीता की गाण्ड में छोड़ दिया जो गाण्ड से बाहर बहने लगा। विजय के लण्ड से गीता की गाण्ड काफी चौड़ी हो गई थी। लण्ड निकलने के बाद गाण्ड का गुलाबी चौड़ा छेद साफ़ दिखाई दे रहा था।
गीता ने विजय के लण्ड को चाट चाट कर साफ़ कर दिया और एक तरफ़ लेट कर साँस लेने लगी।
मैंने पूछा- कैसा लगा विजय का लण्ड?
गीता ने लण्ड को चूम लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। इससे लण्ड फ़िर से फड़कने लगा और कड़क होकर खड़ा हो गया। तभी गीता ने मुझे अपने पास पलंग पर गिरा लिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरे कपड़े उतार दिए और विजय का लण्ड मेरी चूत पर रख दिया।
गीता ने कहा- मंजू चुदाई कुदरत का वरदान है ! दुनिया के सभी प्राणी चुदाई करते हैं ! एक बार लण्ड किसी की चूत में घुस जाता है तो सारे रिश्ते ख़त्म हो जाते हैं, सिर्फ़ चूत और लण्ड का रिश्ता बाक़ी रह जाता है। इसलिए किसी लण्ड का अपमान नही करना चाहिए, जो भी मिले, जैसा भी मिले, जहाँ भी मिले, लण्ड का मजा जरूर लेना चाहिए। तू तो किस्मत वाली है कि घर में ही इतना मजेदार लण्ड मौजूद है।
फ़िर भी पुराने विचारों में अपना मजा बरबाद कर रही है। हर एक चूत को हर एक लण्ड से मजा मिलता है। देख, मैंने इसी सुख के लिए विजय के घोड़े जैसे लण्ड से तेर सामने चुदा लिया और गाण्ड भी मरवाई। यह एसा मजा है जिसमे कोई खर्चा नहीं लगता, सिर्फ़ हिम्मत चाहिए। चल उठ और मेरे सामने ही विजय से चुदा ले ! फ़िर तुझे भी पता चल जाएगा कि ऐसे लण्ड से चुदाने में कितना मजा आता है। तू फ़िर रोज चुदवाने लगेगी और मुझे याद करेगी।
Click on Search Button to search more posts.
आपको ये भी पसंद आएंगें
- चाचा ने चाची को चोदा - चाची की चुदाई - chacha ne chachi ko choda - Aunty ki chut chudai
- Kuwari ladki ki chudai
- चुदवाने के लिए तेरे पास खुद आएगी - Sex ka mantar
- छोटी बहन की सील तोड़ी - Chhoti bahan ki seel todi
- सगी बहनों की रसीली चूत - भाई ने सगी बहनों को चोदा - दीदी की चुदाई - Bhai ka land Bahan ki chut
- पूरी फैमिली चोदो अदल बदल के - Badla karke biwi ko chudwaya
- ससुर जी ने चोदकर चूत फुला दी - बहु को ससुर ने चोदो - Sasur ji ne chodkar bahu ki chut fula di
- छोटी भाभी की होली में रंग लगाकर की चुदाई Chhoti Bhabhi ki holi me rang lagakar ki chudai
- बेटा माँ बहन बीवी बेटी सब चोदो - Hindi Sex story
- कुँवारी साली को माँ बनाया - जीजा ने की मजेदार चुदाई खूब मजे से चोदा - Jija Sali ki chut ki chudai
