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अल्ला ने लण्ड सबके लिए बनाया है - Lund chut gand chuchiyan sab ek khel hai
अल्ला ने लण्ड सबके लिए बनाया है - Lund chut gand chuchiyan sab ek khel hai, बुर चुदाने की उत्तेजना, चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चूसने की मस्ती, कामुक कथाएं - Hindi Sex Stories, गांड की एक झलक, लंड के पिस्टन, सबके सामने चुदाई.
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| लण्ड तो सबके लिए है अम्मी |
लण्ड तो सबका होता है अम्मी। लण्ड में किसी का नाम तो लिखा नहीं होता ? न ही कोई रिस्ता लिखा होता है लण्ड में ? की यह अपने मियां का लण्ड है, या जीजू का लण्ड है, ससुर का लण्ड है, जेठ का, देवर का, या फिर नंदोई का लण्ड है ? खालू जान का, मामू जान का, या अब्बा जान का लण्ड है ? अरे लण्ड तो सिर्फ लण्ड होता है, अम्मी ? लण्ड तो किसी एक के लिए नहीं बल्कि सबके लिए होता है। अब मैं ये लण्ड चाटूं चाहे वो लण्ड चाटूं, ये लण्ड चूसूं चाहे वो लण्ड चूसूं, ये लण्ड पियूं चाहे वो लण्ड पियूं, इस लण्ड से चुदवाऊँ चाहे उस लण्ड से चुदवाऊँ, इससे क्या फरक पड़ता है ? अल्ला ने लण्ड बनाया है तो सबके लिए बनाया है। तो फिर इतनी हाय तोबा क्यों अम्मी ? तुमने इसका लण्ड पकड़ लिया, उसका लण्ड पकड़ लिया, इससे चुदवा लिया, उससे चुदवा लिया। यह सब क्यों ? ऐसा शोर गुल क्यों होता है, अम्मी ? अरे लण्ड का काम है बुर चोदना। मेरे पास बुर है मैंने एक लण्ड घुसा कर किसी और की नहीं बल्कि अपनी ही बुर चुदवा ली तो इसमें कौन सा गुनाह कर दिया मैंने, अम्मी ?
अम्मी ने कहा :- देखो तब्बू, चूत भी तो सबके लिए होती है ? चूत में किसी का नाम तो लिखा नहीं होता ? न ही कोई रिस्ता लिखा होता है चूत में ? की यह अपनी बीवी की चूत है, या दीदी की चूत है, सास की चूत है, जेठानी की, देवरानी की, या फिर नन्द की चूत है ? खाला जान की चूत, मामी जान की चूत या फिर अम्मी जान की चूत है ? अरे चूत तो सिर्फ चूत होती है बेटी ? चूत किसी एक के लिए नहीं बल्कि सबके लिए होती है। अब मैं इससे चटवाऊं चूत चाहे उससे चटवाऊं चूत, चाहे ये चोदे मेरी चूत चाहे वो चोदे मेरी चूत ? इससे क्या फरक पड़ता है बेटी ? तुमने इसे बुर दे दी ? उसे बुर दे दी ? इस मरद से चुदवा लिया ? उस मरद से चुदवा लिया ? यह सब शोर शराबा क्यों बेटी ? इतना हो हल्ला क्यों ? चूत का काम है चुदवाना अब मेरे पास चूत है और इसमे कोई अपना लण्ड पेल दे फिर मैं मस्ती से चुदवा लूँ तो इसमें कौन सा गुनाह कर दिया मैंने, बेटी ?
मैंने अम्मी के गले में अपनी बाहें डाल कर कहा हाय अम्मी यही यो मैं कहने वाली थी। तुम्हें तो मेरे मुंह की बात छीन ली अम्मी। तुम भी बिलकुल वही सोंच रही हो अम्मी जैसा मैं सोंच रही हूँ . इतने में मेरी खाला जान आशिता आ गयीं।
वह बोली :- अरी तब्बू, मैं तुम लोगों की बातें सुन ली। मेरी बेटी भी यही बातें मुझसे उस दिन कह रही थी। उसने कहा अम्मी जब किसी के लण्ड और चूत पर कोई नाम नहीं लिखा होता ? किसी के लण्ड और चूत पर कोई रिस्ता नहीं लिखा होता ? ऐसे में मैंने अगर लड़कों के लण्ड पकड़ लिया, उनके लण्ड चूस लिया या फिर अपनी चूत में पेल कर चुदवा लिया तो ये भोसड़ी वाले लोग फिर मेरी गांड में ऊँगली क्यों करते हैं ? शोर क्यों मचाते हैं ? उनकी गांड में दर्द क्यों होने लगता है अम्मी ? मैंने जीजू से चुदवा लिया, नंदोई से चुदवा लिया, ससुर का लण्ड पेल लिया तो इसमें उनकी माँ क्यों चुदने लगती है भोसड़ी वालों की, अम्मी।
तब मैंने कहा :- तूने अपनी माँ चुदवाई कभी बुर चोदी रज़िया (मेरी खाला की बेटी का नाम)
वह अपनी अम्मी से बोली :- तूने अपनी बेटी चुदवाई कभी भोसड़ी की आशिता ?
फिर हम दोनों खूब खिलखिला कर हंस पड़ीं ? और फिर उसी रात में मेरी बेटी ने अपनी माँ चुदवाई और मैंने अपनी बेटी चुदवाई ?
मैं मन ही मन सोंचने लगी की रज़िया से पहले मेरी झांटें आयीं, उससे पहले मेरी चूंचों निकलीं। उससे पहले मेरी चूंचियां बड़ी हुई, उससे पहले मैंने लण्ड पकड़ा, उससे पहले मैंने मुठ्ठ मार कर लण्ड पिया और उससे पहले मैंने अपनी बुर चुदवाई। आज उस भोसड़ी वाली ने मुझसे पहले अपनी माँ चुदवा ली ? वह मादर चोद मुझसे आगे कैसे निकल गयी ? अब तो मैं जल्दी ही अपनी माँ चुदवाऊँगी।
खाला जब जाने लगीं तो मैंने चुपचाप उससे पूंछा खाला जान ये बताओ मुझे तुम्हे अपनी बेटी के साथ चुदवाने में मज़ा आता है ? क्या तेरी बेटी भी उतना ही एन्जॉय करती है ? वह बोली अरी मेरी भोसड़ी की तब्बू मेरी बेटी मुझसे ज्यादा एन्जॉय करती है और मैं उससे ज्यादा एन्जॉय करती हूँ। कभी तुम भी अपनी माँ चुदवा कर देखो ?
मैंने कहा :- तो फिर किसका लण्ड पेलूँ माँ की चूत में खाला जान ?
वह बोली :- अरे यार लण्ड में किसी का नाम लिखा होता है क्या ? किसी का भी लौड़ा पेल दे अपनी माँ के भोसड़ा में ? लण्ड में तो कोई रिस्ता भी नहीं लिखा होता ? कभी कभी लोग रात में मेरे भोसड़ा में लण्ड पेल कर चले जातें है मुझे पता ही नहीं चलता कौन भोसड़ी वाला चोद गया मुझे ? इसलिए लण्ड किसका है और कौन से रिश्ते का है इसकी बिलकुल परवाह न कर भोसड़ी की तब्बू ? जो भी लण्ड मिले उसे अपनी चूत में पेल ले और मजे से चुदवा? लण्ड पेल कर अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदवा ? समझी मेरी बुर चोदी तब्बू ? जवानी का मज़ा तरह तरह के लण्ड एन्जॉय करने में होता हैं ? मैं भी यही करती हूँ और मेरी बेटी भी यही करती है। देखो न उस भोसड़ी वाली की चूंचियां एक साल में ही दुगुनी हो गयीं है।
खाला जान की खरी खरी बातें सुनकर मैं तो बिलकुल चुप हो गयी। लेकिन एक बात तो पक्की हो गयी की दोनों माँ बेटी बुर चोदी चुदाने में अव्वल हैं। जवानी का मज़ा दोनों मिल कर ले रहीं हैं ? दो दिन बाद रजिया मुझे मिली।
- मैंने पूंछा तू भोसड़ी की कब से चुदवाने लगी अपनी माँ ? और अगर चुदवाने भी लगी तो मुझे क्यों नहीं बताया ?
- वह बोली अरी तब्बू मैंने बहुत लेट शुरू किया माँ चुदाना ? मेरे साथ की लड़कियां तो जाने कब से चुदवा रही हैं अपनी माँ ? मैंने तो अपनी शादी के बाद माँ चुदाना शुरू किया।
- यार क्या कह रही है तू ? अभी एक साल से ही तू अपनी माँ चुदा रही है ?
- वह हंसकर बोली हां एक साल ही हुआ है और इस एक साल में ही देखो न मेरी गांड कितनी मोटी हो गयी है बहन चोद ? मेरी चूत कितनी चबूतरा हो गयी है ? और मेरी चूंचियां तो बुर चोदी दुगुनी हों गयीं है ?
- हां बात तो सही है और तू भी एक साल में बहुत हसींन हो गयी है ? अब तो दूसरे लोग भी तुम्हे चोदना चाहते होंगें ?
- चाहते ही नहीं भोसड़ी वाले, तब्बू ? सब के सब चोदने लगे है मेरी बुर ?
- तो क्या तू एक साल में ही सबसे चुदवाने लगी ?
- नहीं यार, चुदवाती पहले भी थी मैं ? लेकिन इतनी मस्ती और शिद्दत से नहीं चुदवाती थी। जबसे मैं ससुराल में आयीं हूँ तबसे मुझे चोदने वाले बहुत लोग हो गये है,बहन चोद ? हर दिन कोई न कोई अपना लण्ड मेरी बुर में पेल ही देता है।
- तो तू सबके लण्ड पहचान लेती है ?
- अरे यार २/४ लण्ड हों तो पहचान भी लूँ ? जब हर दिन एक नया लण्ड मेरी बुर चोदेगा तो कहाँ तक पहचानूंगी मैं लण्ड ? अब तो मैं भी खोल देती हूँ अपनी चूत और कहती हूँ की जिसका मन हो वो पेल दे अपना लण्ड ? मुझे तो बस चुदवाने से मतलब ?
- इसका मतलब तू भी बिलकुल अपनी अम्मी की तरह है ?
- हां यार मेरी माँ का भोसड़ा चोदने वाले भी बहुत हैं ?
- ससुराल में किसका लण्ड ज्यादा अच्छा लगा तुझे ?
- देखो यार तब्बू हर लण्ड अलग अलग होता है और हर लण्ड का मज़ा भी अलग अलग होता है। कोई लण्ड देर तक चोदता है ! कोई लण्ड दूर तक घुस के चोदता है ! कोई लण्ड बुर चोदने में अच्छा होता है ! कोई लण्ड गांड मारने में अच्छा होता है ! किसी लण्ड से चुदवाने में अच्छा लगता है ! किसी लण्ड को चाटने में चूसने में ज्यादा मज़ा जाता है ! किसी लण्ड का स्वाद बड़ा अच्छा होता है ! कोई लण्ड भोसड़ा चोदने में अच्छा चोदता है तो कोई लण्ड चूत चोदने में ! कोई लण्ड मुठ्ठ मारने में अच्छा होता है तो कोई लण्ड पीने में मज़ा देता है ! इसलिए मैं हर एक लण्ड का मज़ा लेती हूँ और हर एक लण्ड को मज़ा देती हूँ।
- अगर तुझे कोई अंजाना लण्ड चोद राह हो तो तू कुछ बोलती भी नहीं ? हल्ला भी नहीं मचाती ?
- जब मज़ा आ रहा हो तो न बोलने की कोई जरुरत है और न हल्ला मचाने की ? मैं तुझे एक सच्ची घटना बता रही हूँ। उस दिन डिनर के बाद मैं और मेरी जेठानी एक ही पलंग पर लेट गयीं और बात करते करते सो भी गयीं। रात में जाने कब मेरी जेठानी किसी और कमरे में चली गयीं। मैं वहीँ लेटी लेटी सोती रही। रात को कोई मर्द मेरे पास आया। मैं समझी की वह मेरा मरद है। इसलिए मैं कुछ बोली नहीं। उसने अन्धेरे में मेरे बदन पर हाथ फिराया और फिर मेरी चूंचियां दबाने लगा। तब फिर मैंने भी अपनी मैक्सी उतार कर फेंक दी। मैं बहन चोद पूरी नंगी हो गयी। वह बड़ी बुरी तरह मेरे ऊपर चढ़ बैठा ? मेरी चूत सहलाने लगा। मेरा भी हाथ उसके लण्ड पर चला गया। मैंने उसका खड़ा लण्ड पकड़ लिया। मुझे लगा की लण्ड आज कुछ अलग तरह का लग रहा है ? उसकी चूंचियां दबाने की और मसलने की अदा भी अलग लग रहा था । मैंने सोंचा की शायद यह मेरा मरद नहीं है लेकिन मुझे कुछ अलग तरह का मज़ा आने लगा तो मैं चुप रही। इतने में उसने गचाक से लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और चोदने लगा ? मैं भी चुदवाने लगी। न वह बोला और न मैं ? फिर जब वह मुझे अपने लण्ड पर बैठा के चोदने लगा तो मैं जान गयी की यह मेरा नहीं किसी और का मरद है ? उसका लण्ड मुझे इतना पसंद आया की मैं चुदवाने में मस्त हो गयी। आखिर में मैंने उसका झड़ाता हुआ लण्ड भी चाटा ? फिर मैं उठी और बाथ रूम की बत्ती जला दी। तो बोला अरे तब्बू तुम ? मैंने कहा हाय दईया जेठ जी तुम ? इतनी देर से तुम मुझे चोद रहे थे ? भोसड़ी के तुझे मालूम नहीं हुआ की यह चूत तेरी बीवी की नहीं बल्कि किसी और की है ? तू माँ का लौड़ा मुझे धोखे से चोद रहा था ? वह बोला अरी तब्बू अगर मुझे नहीं मालूम हुआ तो तुझे तो पता होना चाहिए था की यह तेरे मियां का लण्ड नहीं है ? मैंने कहा मादर चोद जेठ लण्ड में क्या किसी का रिस्ता लिखा होता है ? किसी का नाम लिखा होता है ? मैं कैसे पहचानती की यह मेरे मियां का नहीं किसी और का लण्ड है ? वह बोला तो तब्बू किसी की चूत में क्या रिस्ता लिखा होता है या फिर नाम लिखा होता है ? मैं कैसे पहचानता की यह मेरी बीवी की बुर नहीं है ? मुझे तो मज़ा आया इसलिए मैं चोदता रहा ? मैंने कहा हां यही तो बात है ? मुझे भी मज़ा आया तो मैं भी चुदवाती रही ? उसने मुझे इसी बात पर चिपका लिया तब मैंने कहा जेठ जी भोसड़ी के एक बार फिर चोदो मुझे तेरा लण्ड बड़ा प्यारा है ? फिर मैंने रात में तीन बार चुदवाया उससे और आज भी चुदवाती हूँ।
- तो ऐसा केवल तेरे साथ ही हुआ की कैसी और के साथ भी होता है ?
- अरे यार सबके साथ होता है । मैंने जेठानी को देवर के धोखे नंदोई से चुदवाते हुए देखा ? सास को धोखे से मेरे अब्बू से चुदवाते हुए देखा ? खालू के धोखे पडोसी से चुदवाते हुए खाला जान को देखा ? यह तो होता ही रहता है। मैं खुद कई लोगों से धोखे से चुदवा चुकी हूँ लेकिन हर बार बड़ा मज़ा आया ? लोग यहाँ अपनी बीवी के धोखे दूसरे की बीवी खूब चोदते है ? बीवियां अपने मरद के धोखे पराये मरद से खूब चुदवाती हैं।
- तो ऐसा जानबूझ कर भी होता होगा ?
- हां ज्यादा तर बीवियां बुर चोदी जानबूझ कर दूसरों से चुदवाती हैं। लेकिन इसे कोई mind नहीं करता ? यह सब चलता है।
बस मैं उठी और झांक कर देखने लगी। मैंने देखा की अम्मी एक आदमी का लण्ड पकड़ कर हिला रही हैं। अम्मी भी बिलकुल नंगी और वह आदमी भी बिलकुल नंगा ? लण्ड देख कर मैं भी ललचा गयी। मैं जान गयी की आज मेरी अम्मी इससे चुदवायेगी ? मेरे मन में आया की उसके लण्ड पेलने के पहले मैं आरिफ का लण्ड उसके भोसड़ा में घुसेड़ दूँ ? मैं आज से ही शुरू कर दूँ अपनी माँ का भोसड़ा चुदाना ? रजिया ने अपनी शादी के बाद अपनी माँ चुदवाई ? मैं शादी के पहले अपनी माँ चुदवाऊँगी। मैं नशे में धुत्त थी और बड़ी बेशरम हो चुकी थी। मैं आरिफ का लण्ड पकड़े पकड़े अम्मी के कमरे में दन्न से घुस गयी ?
घुसते ही मैंने कहा भोसड़ी की अम्मी ? तेरी बिटिया की चूत मादर चोद आज मैं ठोंकूंगी तेरे भोसड़ा में लण्ड ? आज मैं चुदाऊंगी अपनी माँ का भोसड़ा ? अम्मी मुझे देख कर बहुत खुश हुईं और उसी लहज़े में बोली तब्बू तेरी माँ का भोसड़ा बुर चोदी आज मैं चुदाऊंगी अपनी बिटिया की बुर ? ये मेरे हाथ में लण्ड देख रही हो न ? ये है तेरे खालू के भाई जान का लण्ड ? मैं यही लण्ड तेरी चूत में पेलूँगी ? मैंने जबाब दिया और ये है मेरे दोस्त आरिफ मियां का लण्ड ? मैं इसे तेरे भोसड़ा में पेलूँगी ? फिर हुआ भी यही ?
हम दोनों मिलकर खूब मस्ती से चुदवाने लगी। कभी मैं घुसाती लण्ड उसकी चूत में कभी वो घुसाती लण्ड मेरी चूत में ? कभी मैं ठोंकती लण्ड उसकी गांड में कभी वो ठोंकती लण्ड मेरी गांड में ? थोड़ी देर में मैंने कहा अम्मी बताओ आरिफ का लण्ड पेलूँ की उस भोसड़ी वाले का लण्ड ? अम्मी बोलीं अरी तब्बू लण्ड कोई भी पेलो मेरी चूत में ? लण्ड तो सबके लिए है, बेटी...
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