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पूरा लौड़ा पेल के चोदो गुरु जी - Apne sir se chut chudai karvayi lund bhi chusa
पूरा लौड़ा पेल के चोदो गुरु जी - Apne sir se chut chudai karvayi lund bhi chusa.
उन दिनी मैं डिग्री कॉलेज में पढ़ती थी। मेरे कॉलेज के एक प्रोफेसर थे मिस्टर अंकित । उसकी उम्र लगभग ४५ की होगी। देखने में हट्टे कट्टे गोरे चिट्टे थे। बड़े स्मार्ट और हैंडसम थे। उसकी इंग्लिश बहुत अच्छी थी। वह जब बोलते थे तो मुझे सुनने बड़ा अच्छा लगता था। मैं हमेशा यही मन में सोंचती की क्या मैं भी कभी इसी तरह से फटाफट इंग्लिश बोल पाऊंगी ? क्या मैं कभी अंकित सर की तरह इंग्लिश में स्पीच दे पाऊंगी। बस मैं इंग्लिश की तरफ ध्यान देने लगी और घर में इंग्लिश का न्यूज़ पेपर मांगा कर रोज़ पढ़ने लगी। तभी एक दिन मुझे ख्याल आया की क्यों न सर से घर जाकर पढ़ा करूँ। अगर वह पढ़ा देंगें तो अच्छा है नहीं तो वापस चली आऊंगी। मुझे कोई दिक्कत तो नहीं होगी। एक बार कोशिश करने में कोई हर्ज़ तो नहीं है। बस मैं इसी ख्याल से एक दिन उस के घर चली गयी। मैंने जब सर से अपनी बात कही तो ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गए। वह बोले हां गौरी मैं तुम्हे इंग्लिश पढ़ा दिया करूंगा और ६ महीने में ही तुम इंग्लिश बोलना सीख जाओगी। मैं बहुत खुश हो गयी और नियमित रूप से उनके घर जाकर पढ़ने लगी। मैं धीरे धीरे सर के नजदीक आने लगी। उससे खुल कर बातें करने लगी। कभी तिरछीं निगाहों से बात करती तो कभी आँख मार बात करती। सर भी मेरी बातों में इंटरेस्ट लेने लगे। मैं और मस्त होने लगी और मेरी और हिम्मत बढ़ने लगी। एक दिन अचानक मैंने कहा सर अब आज से मैं आपको गुरु जी कहूँगी सर नहीं ?
मेरी उम्र २१ साल की है और मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ . मैं एक सुन्दर, चंचल और शोख़ लड़की हूँ। चुलबुली हूँ, नटखट हूँ और बिंदास हूँ। मैं खुल कर बोलती हूँ और खूब बोलती हूँ। मैं नॉन - वेज बातें ज्यादा करती हूँ। खूब गन्दी गन्दी अश्लील बातें करती हूँ। खूब गहरी मजाक करती हूँ। गालियां भी देती हूँ। मुझे लड़कों को चिढ़ाने में बड़ा मज़ा आता है। लड़कियों को चूतिया बनाने में मुझे बड़ा लगता है। आपको यह जान कर बड़ी हैरानी होगी की मैं शरब भी पीती हूँ। लेकिन मैं शराबी नहीं हूँ। पहले मैं थोड़ी थोड़ी शराब मम्मी के साथ कभी कभी पीती थी। मुझे अच्छा लगता था। मैं जब १८ + की हो गयी तो मम्मी के साथ कुछ ज्यादा ही दारू पीने लगी। मम्मी भी पीने के साथ खुल कर बात करने लगीं। एक दिन तो वह खुल कर लण्ड चूत की भी बात करने लगी। पहले तो मैं थोड़ा झिझकी थोड़ा शरमाई। तो मम्मी बोली अरी गौरीअब तू एडल्ट हो गयी है। जवान हो गयी है। अब इस तरह की बातें किया करो। सेक्स की बातें किया करो बेटी। इसमें कोई शर्म नहीं है और कोई हर्ज़ भी नहीं है। सेक्स की फील्ड में शर्माने की कोई जगह नहीं है। धीरे धेीर मैं भी मम्मी के सामने बहन चोद, मादर चोद, भोसड़ी के बोलने लगी।
यही हाल उधर गुरु जी के साथ भी हो रहा था। मैं वहां भी गुरु जी के सामने माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, बहन का लण्ड सब बोलने लगी। इधर मैं मम्मी से खुलने लगी और उधर मैं गुरु जी से भी खुलने लगी।
एक दिन मैं सर के घर सवेरे १० बजे ही पहुँच गयी। जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो वह बोला अरे गौरी तुम ? आओ अंदर बैठो। मैं अंदर चली गयी तो देखा की टेबल पर शराब की बोतल रखी है और गिलास में कुछ शराब। इतवार का दिन था। वह नंगे बदन था। केवल एक ढीली नेकर पहने था। उसका कसरती बदन देखने लायक था। उसकी छाती के घने घने बाल मुझे बड़े सेक्सी लग रहे थे। मैंने उसका गिलास उठाया और उसकी पूरी शराब एक ही घूंट में पी गयी। वह बोला
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मैं भी उसके सामने बैठ शराब पीने लगी।
मैंने एक टॉप पहना था। ब्रा नहीं थी। मैंने अपनी बड़ी बड़ी चूचियाँ टेबल पर टिका दीं तो उनका उभार ऊपर दिखाई पड़ने लगा।
HE SAID GAURI , TODAY YOU ARE LOOKING VERY SMART AND SEXY. I SAID GURU JI , YOU ARE TOO LOOKING VERY HANDSOME AND SEXY.
एक पैग और पी लिया तो मस्ती सवार हो गयी। मैंने कहा मैं आपकी छाती के बाल छू कर देखना चाहती हूँ। वह बोला अरे इसमें क्या देख लो। मैं उठी और उसकी कुर्शी के पीछे चली गयी। मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रखा और उन्हें सरसराते हुए पूरी छाती पर हाथ फेरा। मैं बोली वाओ, क्या मखमली कालीन की तरह है तेरी छाती बहन चोद ? मुझे शरारत सूझी तो मैंने अपना हाथ उसकी नेकर के अंदर घुसेड़ दिया। मैंने कहा अरे ये क्या नीचे तो कोई बाल ही नहीं ? वह हंसने लगा बोला गौरी आगे मत बढ़ो प्लीज। मैंने कहा अरे हां नीचे के बालों को तो झांट कहते हैं न गुरु जी ? तो क्या तेरी झाँटें नहीं है ? वह बोला अरे गौरी प्लीज रहने दो। अब और नहीं। सामने आओ और बैठो। मैंने कहा गुरु जी अब तो मैं यह देख कर ही हटूंगी की तेरी झाँटें हैं की नहीं ? हैं तो कितनी बड़ी बड़ी हैं और नहीं हैं तो कबसे नहीं हैं ?
गुरु जी के लण्ड का मुठ्ठ मारा
मैं फिर किसी हाल में रुकी नहीं और अपना हाथ पूरा घुसेड़ दिया नेकर में। हाथ उसके लण्ड से टकरा गया। मैं बोली O' MY GOD ? झाँटें तो मिली नहीं मगर लौड़ा मिल गया साला ? बाप रे बाप इतना बड़ा लण्ड तेरा, सर। इतना मोटा लण्ड बहन चोद ? मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर दिया और मैं कुर्शी पर बैठ गयी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी नेकर खींच कर फेंक दीं। वह मेरे सामने एकदम नंगा हो गया। उसका लण्ड फनफनाकर मेरे मुंह के सामने खड़ा हो गया। मैंने लण्ड मुठ्ठी में ले लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। लण्ड का टोपा बाहर निकाल लिया। मैंने लण्ड की कई बार चुम्मी ली और बोली
HOW BIG AND HOW THICK YOUR LUND IS, GURU JI !
इतना बड़ा लण्ड तो अमर अंकल का भी लण्ड नहीं है। देखो साला बढ़ता ही जा रहा है, मादर चोद ? मैंने कई बार लण्ड बड़े प्यार से चूमा। मैं लण्ड से मोहब्बत करने लगी।
तब तक उसने मेरे टॉप की दोनों बटन खोल दी। मेरी नंगी चूचियाँ उसके हाथ में आ गयी। उसने धीरे से टॉप उतार दिया और मेरे बूब्स दबाने लगा। मेरे अंदर वासना भर गयी। मैं मस्त होने लगी और किसी भी हद को पार करने के लिए बुरी तरह तैयार हो गयी। उसका हाथ मेरी चूत तक जा पहुंचा और मैं उसे रोक भी नहीं सकती थी। मैं उसका लण्ड चाटने लगी और दूसरे हाथ से पेलहड़ सहलाने लगी। उसकी झाँटें साफ़ थी इसलिए लण्ड बड़ा और मोटा लग रह था। मेरी नज़र वहीँ पड़े एक इंची टेप पर गयी तो मैं उसे उठा कर लण्ड नापने लगी। मैं बोली हाय रे ये तो 8" से भी बड़ा है लण्ड ? मोटा भी साला 5" से ज्यादा है। मैंने मन में कहा ऐसा लौड़ा मिले तो कौन भोसड़ी वाली मज़ा नहीं करेगी ? इतने में मैंने लण्ड का सुपाड़ा मुंह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगी। अंदर ही अंदर सुपाड़े के चारों तरफ जबान घुमाने लगी। बार बार लण्ड मुंह में बाहर निकालने और फिर अंदर घुसाने लगी। ऐसा करने से मुझे भीऔर उसे भी मज़ा आने लगा। उसने मेरी जींस खोल दी। मैं पूरी नंगी हो गयी। मेरी चूत उसके सामने आ गयी। वह मुझे गोद में उठा लिया। मेरा हाथ नीचे उसके लण्ड पर ही रहा और मेरी चुम्मियां लेने लगा। मेरी चूचियाँ चूमने लगा।
वहीँ एक सोफा पड़ा था। मैंने उसकी गोद से उतरी और उसे सोफा पर बैठा दिया। मैं नीचे घुटनो के बल बैठ गयी उसकी दोनों टांगों के बीच। उसका लण्ड मेरे बूब्स छूने लगा। मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। जबान निकाल कर चाटने लगी। फर लण्ड आधे से अधिक मुंह में घुसेड़ लिया। लण्ड मुंह में घुसेड़ कर चूसने लगी। मुझे पहली बार कोई मस्त लौड़ा मिला था तो मैं क्यों न उसका पूरा मज़ा लूँ। मैं लौड़ा अपनी चूचियों पर भी घुमाने लगी। फिर लण्ड अपने दोनों हाथों के बीच डाल और उसे मथनी की तरह मथने लगी। इस क्रिया से उसे भी मज़ा आने लगा। मैं जल्दी जल्दी करने लगी तो वह सिसियाने लगा। फिर मैं लण्ड मुठ्ठी में लेकर उसका सटासट सड़का मारने लगी। मुझे ऐसा करने में खूब मज़ा अने लगा। वह भिबोला हाय गौरी मैं निकल जाऊंगा। मैंने कहा तो निकल जा न ?
मैं तो अब तेरे लण्ड का मक्खन निकाल कर ही दम लूंगी गुरु जी ? तेरा लण्ड मुझे बहुत पसंद आ गया है गुरु जी। अभी तो मैं मक्खन ही निकाल रही हूँ। अभी तो मैं तेरा लण्ड चोदूँगी गुरु जी। इतने बढ़िया लण्ड के मालिक हो यह बात तुमने मुझे पहले कभी नहीं बताई। मैं अगर तेरी जगह होती तो खोल कर दिखा देती अपना लण्ड अपनी शिष्या को। लण्ड घुसेड़ के चोद डालती उसकी बुर ? चीथड़े उड़ा देती अपनी शिष्या की चूत के गुरु जी। मैंने मुठ्ठ मारने की स्पीड बढ़ा दी। वह बोला हाय गौरी तेरे हाथ में जादू है। बड़ा मज़ा आ रहा है। ऐसे तो किसी लड़की ने मेरा मुठ्ठ नहीं मारा ? वाओ, ओ,,, हो,, आ,, आ रे,, हां,, हां,, और तेज करो,,, हां और तेज जल्दी जल्दी मारो मुठ्ठ,,, क्या बात है,,,, आए,,, हां हो,,, औ आ,,,, ओ,,,, ओहो ओ,, ऊँ ओ हो,, आ,, आये हां लो ,,,,,, आ बस लण्ड ने दनादन्न ३/४ पिचकारी मेरे मुंह में मार दी। मैंने मुंह खोल रख था। मैं सारा सीमेन पी गयी। पहले तो ख़राब लगा लेकिन फिर टेस्ट अच्छा लगने लगा। यह सब फिल्मों से सीखा था की लड़कियां कैसे झड़ता हुआ लण्ड पीती हैं। मैं उसका सुपाड़ा जबान निकाल कर चाटने लगी।
लण्ड आहिस्ते आहिस्ते ढीला होने लगा। मैंने उसे बाथ रूम लेकर गयी। उसका लौड़ा धोया। उस पर साबुन लगाया और अपने हाथ धोए मुंह धोया। अपनी चूचियाँ धोईं। फिर उसने मुझे नहला दिया और मैंने उसे नहला दिया। मैंने लण्ड पर कई बार साबुन लगाया और खूब मल मल कर उसे धोया। लण्ड साला नहां धोकर फिर खड़ा होने लगा। मैं बोली देखो गुरु जी तेरा लण्ड भोसड़ा का फिर से मुझे आँखें दिखाने लगा है। हम दोनों बाहर आ गए और फिर मैं ख़ुशी ख़ुशी अपने घर आ गयी।
चूत में पेला गुरु जी का लण्ड
कुछ देर बाद मेरी चूत साली आफत मचाने लगी। वह मुझसे शिकायत करने लगी की बुर चोदी गौरी तूने मेरे अंदर लौड़ा क्यों नहीं पेला ? मैं तो इंतज़ार ही करती रही और तू सिर्फ सड़का मार कर चली आई। अब मैं क्या करूँ ? अब तू किसका लौड़ा मेरे अंदर घुसेड़ेगी ? चुदवाया क्यों नहीं तूने। मैंने सोंचा की मेरी चूत सही तो कह रही है। मुझे गुरु जी का लौड़ा इसके अंदर घुसाना चाहिए था। बस फिर क्या मैं शाम को फिर पहुँच गयी गुरु जी के घर। मेरे पहुँचते ही उसने मुझे गले लगा लिया और बोला अरे गौरी मैं तुम्हे फोन करने ही वाला था। तुम्हारे जाने के बाद मेरा लौड़ा साला मुझे परेशान करने लगा। वह बोला अरे अंकित भोसड़ी के तूने गौरी को जाने क्यों दिया ? उसकी चूत में मुझे पेला क्यों नहीं ? चोदा क्यों नहीं उसकी बुर ? मुझे घुसेड़ा क्यों नहीं उसकी चूत में ? मैं तो चूत मे घुसाने के लिए तरसता ही रह गया, बहन चोद । अब बुलाओ न उसे और पेलो मुझे उसकी बुर में ? मैं बैठूंगा नहीं जब तक उसकी चूत में घुस नहीं जाता।
मैंने कहा अरे गुरु जी यही तो मेरी चूत भी कह रही थी और इसीलिए उसने मुझे घर से धक्के दे कर निकाला तो मैं आपके पास चली आई। अब मेरी चूत बड़ी खुश है। वह बोला और मेरा लौड़ा भी बहुत खुश है, देखो न पकड़ के गौरी ? मैंने उसे नंगा किया और लौड़ा पकड़ लिया। उसने मुझे नंगी किया और मेरी चूत सहलाया। मेरे बूब्स मसले। मैं चुदाने के लिये तैयार होने लगी और उसका लौड़ा चोदने के लिए। वह मुझे उठाकर बेड पर ले गया। उसने मुझे पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा। मेरा गाल चूमने लगा मेरे होंठ, मेरी नाक मेरा माथा और मेरे कान सब चूमने लगा। मेरी गर्दन चूमी और फिर मेरी चूचियों पर अटक गया। बड़ी देर तक चाटता रहा मेरी चूचियाँ . निपल्स भी मस्ती चूसता रहा. फिर वह नीचे खसक गया। अपना मुंह मेरी जाँघों के बीच डाल दिया। चूत फैला दी मैंने तो वह जबान निकाल कर मेरी चूत चाटने लगा। मैंने कहा गुरु जी दोनों हाथ से मेरी चूचियाँ मसलते हुए मेरी चूत चाटो। जबान से चोदो मेरी चूत।
उसने मेरी चूत इतनी अच्छी तरह से चाटी की मैं मस्त हो गयी। मैं फिर घूम गयी और उसका लौड़ा अपने मुंह में भर लिया। मैं चाटने लगी उसका लण्ड। पेलहड़ थामे हुए मैं मजे से लौड़ा चाटने चूसने लगी। मुझे तो खूब मज़ा आने लगा और उसे भी। तब तक मेरी बुर बहुत गरम हो चुकी थी। मैं बोली गुरु जी अब पेलो लण्ड मेरी चूत मे। वह भी तत्व में था। उसने लण्ड मेरी चूत पर रखा तो एक ही धक्के से सरसराता हुआ लण्ड अंदर घुस गया। मुझे दर्द तो हुआ। मैं चिल्ला भी पड़ी उई माँ मर गयी मैं ? फाड़ डाला मेरी चूत इसके लण्ड ने ? हाय दईया अब क्या होगा ? मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही ? लेकिन फिर रही हूँ। चोद गचागच मज़ा आने लगा। मैं भी अपनी गांड उठा उठा के चुदाने लगी। मेरी चूचियाँ हिलने लगी। उन्हें देख कर गुरु जी धक्का पे धक्का लगाने लगे। मैंने कहा पूरा लौड़ा पेल के चोदो गुरु जी। मुझे लगा की वह लड़कियां चोदने में एक्सपर्ट है। मैंने पूंछा गुरु जी क्या तुम और भी लड़कियां चोदते हो। वह बोला हां गौरी अब देखो मैंने शादी तो की नहीं। इसलिए मुझे लड़कियां चोदने का शौक है। मुझसे कई लड़कियां चुदवाने आती है। कुछ लड़कियां अपनी माँ भी चुदवाने आती हैं। कुछ तो शादी हो जाने के बाद भी चुदवाने आती हैं।
मैं मजे से चुदती चली जा रही थी। फिर मैंने कहा गुरु जी अब मुझे पीछे से चोदो। मैं वैसे ही चुदवाने लगी जैसे ब्लू फिल्म की लड़कियां चुदवाती हैं। लौड़ा तो पूरा घुस कर चोद रहा था। मैंने कहा सारे जानवर भोसड़ी के इसी तरह चुदवाते हैं और मैं भी एक जानवर की तरह चुदवा रही हूँ। कितना मज़ा आ रहा है। थोड़ी देर में मैं उसके लण्ड पर बैठ गयी और बोली गुरु जी अब मैं चोदूँगी तेरा लण्ड ? मैं कूद कूद कर लण्ड चोदने लगी। मैं सोंच रही थी की अगर यहाँ कोई फोटोग्राफर होता तो मेरा वीडियो बना लेता तो अच्छा था क्योंकि मैं खुद देखना चाहती हूँ की मैं कैसे चुदवाती हूँ। कैसे लौड़ा पीती हूँ. कैसे लौड़ा चाटती हूँ और कैसे लण्ड का सड़का मारती हूँ। अब मैं मंजिल के करीब आ गयी थी। मैं खलास होने वाली थी तब तक वह बोला गौरी मैं झड़ रहा हूँ। मैंने कहा ओ के मेरे मुंह में गिरा दे मैं झड़ता हुआ लौड़ा पी जाऊंगी। मैं मस्ती से चाटने लगी झड़ता हुआ लण्ड।
उसके बाद मैं अक्सर गुरु जी से चुदवाने लगी। जवानी का खूब मज़ा लूटने लगी। मैं वास्तव में गुरु जी के लण्ड की दीवानी हो गयी। मैंने उसके लण्ड की कई फोटो अपने मोबाइल में कैद कर लीं
एक दिन इतवार को मैं उसके घर गयी तो दरवाजा किसी और ने खोला। जिसने खोला वह एक नौजवान लड़का था। बड़ा हैंडसम था, स्मार्ट था, गोरा चिट्टा था। मेरी नियत उस पर ख़राब हो गयी। मैं तो बस उसके लण्ड के बारे में सोंचने लगी। उसने मुझे बैठाया और पानी लेने अंदर चला गया। तब तक मैंने अपनी टॉप के दोनों बटन खोल डाला। अपनी चूचियाँ टेबल पर रख कर बैठ गयी। मैंने पानी पिया और चाय भी पी. वह मेरी चूचियाँ बड़े गौर से देखने लगा। मैंने पूंछा आप गुरु जी को कैसे जानते हैं ? वह बोला वह मेरे भी गुरु जी हैं। मैंने कहा तब तो तुम बहन चोद बड़े मस्त आदमी हो ? उसने कहा वाओ, तुम गालियां भी देती हो ? मैंने कहा हां बिलकुल देती हूँ ? उसने फिर पूंछा तो कैसी गालियां देती हो ? मैंने कहा - मादर चोद, बहन चोद, कुत्ते, कमीने, तेरी माँ का भोसड़ा तेरी बहन की बुर, तेरी गांड में ठोंक दूँगी लण्ड, तेरी माँ की चूत, भोसड़ी के, गांडू, तेरी बिटिया की बुर, चूतिया साले तेरी बहन का लण्ड ? वह बोला बस बस,, बाप रे बाप ? आप तो तूफ़ान मेल गालियां देती हैं। तेरा मुकाबला कोई नहीं कर सकता ?
इतने में बेल बज गयी और गुरु जी आ गए। उसके साथ एक लड़की थी. गुरु जी बोले अरे शेखर तुम तो मुझसे पहले ही आ गए। फिर गुरु जी ने उसका परिचय करवाया और कहा देखो गौरी यह है मिस नमिता। जिस तरह तुम मेरे लण्ड की दीवानी हो गौरी उसी तर नमिता शेखर के लण्ड की दीवानी है। यह सुन कर मेरी चूत में भयानक आग लग गयी। मैंने सोंचा की आज मेरी तमंन्ना पूरी हो जाएगी। तब तक गुरु जी ने दारू शुरू कर दी। हम चारों लोग दारू पीने लगे। एक पैग जैसे ही खत्म हुआ वैसे ही नमिता उठी और गुरु जी को नंगा करने लगी। उसके सारे कपड़े उतार कर गुरु जी का लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। मैंने मन में कहा ये तो भोसड़ी की मुझसे आगे निकल गयी। तब मैं उठी और फटाफट शेखर को नंगा किया। उसका लौड़ा पकड़ा और उसकी ताबड़तोड़ कई चुम्मियां ले लीं। मैंने पहले लण्ड चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखा और फिर लौड़ा हिलाना शुरू किया तो लौड़ा खड़ा होकर मेरे सामने दहाड़ने लगा। मैंने कहा वाओ, क्या लौड़ा है यार तेरा ? ये है मरदाना लण्ड बिलकुल गुरु जी के लण्ड की तरह ?
फिर मैंने गुरु जी के सामने ही शेखर से भकाभक चुदवाया और नमिता ने मेरे सामने गुरु जी से भकाभक चुदवाया।
उन दिनी मैं डिग्री कॉलेज में पढ़ती थी। मेरे कॉलेज के एक प्रोफेसर थे मिस्टर अंकित । उसकी उम्र लगभग ४५ की होगी। देखने में हट्टे कट्टे गोरे चिट्टे थे। बड़े स्मार्ट और हैंडसम थे। उसकी इंग्लिश बहुत अच्छी थी। वह जब बोलते थे तो मुझे सुनने बड़ा अच्छा लगता था। मैं हमेशा यही मन में सोंचती की क्या मैं भी कभी इसी तरह से फटाफट इंग्लिश बोल पाऊंगी ? क्या मैं कभी अंकित सर की तरह इंग्लिश में स्पीच दे पाऊंगी। बस मैं इंग्लिश की तरफ ध्यान देने लगी और घर में इंग्लिश का न्यूज़ पेपर मांगा कर रोज़ पढ़ने लगी। तभी एक दिन मुझे ख्याल आया की क्यों न सर से घर जाकर पढ़ा करूँ। अगर वह पढ़ा देंगें तो अच्छा है नहीं तो वापस चली आऊंगी। मुझे कोई दिक्कत तो नहीं होगी। एक बार कोशिश करने में कोई हर्ज़ तो नहीं है। बस मैं इसी ख्याल से एक दिन उस के घर चली गयी। मैंने जब सर से अपनी बात कही तो ख़ुशी ख़ुशी तैयार हो गए। वह बोले हां गौरी मैं तुम्हे इंग्लिश पढ़ा दिया करूंगा और ६ महीने में ही तुम इंग्लिश बोलना सीख जाओगी। मैं बहुत खुश हो गयी और नियमित रूप से उनके घर जाकर पढ़ने लगी। मैं धीरे धीरे सर के नजदीक आने लगी। उससे खुल कर बातें करने लगी। कभी तिरछीं निगाहों से बात करती तो कभी आँख मार बात करती। सर भी मेरी बातों में इंटरेस्ट लेने लगे। मैं और मस्त होने लगी और मेरी और हिम्मत बढ़ने लगी। एक दिन अचानक मैंने कहा सर अब आज से मैं आपको गुरु जी कहूँगी सर नहीं ?
मेरी उम्र २१ साल की है और मैं ग्रेजुएशन कर रही हूँ . मैं एक सुन्दर, चंचल और शोख़ लड़की हूँ। चुलबुली हूँ, नटखट हूँ और बिंदास हूँ। मैं खुल कर बोलती हूँ और खूब बोलती हूँ। मैं नॉन - वेज बातें ज्यादा करती हूँ। खूब गन्दी गन्दी अश्लील बातें करती हूँ। खूब गहरी मजाक करती हूँ। गालियां भी देती हूँ। मुझे लड़कों को चिढ़ाने में बड़ा मज़ा आता है। लड़कियों को चूतिया बनाने में मुझे बड़ा लगता है। आपको यह जान कर बड़ी हैरानी होगी की मैं शरब भी पीती हूँ। लेकिन मैं शराबी नहीं हूँ। पहले मैं थोड़ी थोड़ी शराब मम्मी के साथ कभी कभी पीती थी। मुझे अच्छा लगता था। मैं जब १८ + की हो गयी तो मम्मी के साथ कुछ ज्यादा ही दारू पीने लगी। मम्मी भी पीने के साथ खुल कर बात करने लगीं। एक दिन तो वह खुल कर लण्ड चूत की भी बात करने लगी। पहले तो मैं थोड़ा झिझकी थोड़ा शरमाई। तो मम्मी बोली अरी गौरीअब तू एडल्ट हो गयी है। जवान हो गयी है। अब इस तरह की बातें किया करो। सेक्स की बातें किया करो बेटी। इसमें कोई शर्म नहीं है और कोई हर्ज़ भी नहीं है। सेक्स की फील्ड में शर्माने की कोई जगह नहीं है। धीरे धेीर मैं भी मम्मी के सामने बहन चोद, मादर चोद, भोसड़ी के बोलने लगी।
यही हाल उधर गुरु जी के साथ भी हो रहा था। मैं वहां भी गुरु जी के सामने माँ का लौड़ा, बहन का लौड़ा, बहन का लण्ड सब बोलने लगी। इधर मैं मम्मी से खुलने लगी और उधर मैं गुरु जी से भी खुलने लगी।
एक दिन मैं सर के घर सवेरे १० बजे ही पहुँच गयी। जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो वह बोला अरे गौरी तुम ? आओ अंदर बैठो। मैं अंदर चली गयी तो देखा की टेबल पर शराब की बोतल रखी है और गिलास में कुछ शराब। इतवार का दिन था। वह नंगे बदन था। केवल एक ढीली नेकर पहने था। उसका कसरती बदन देखने लायक था। उसकी छाती के घने घने बाल मुझे बड़े सेक्सी लग रहे थे। मैंने उसका गिलास उठाया और उसकी पूरी शराब एक ही घूंट में पी गयी। वह बोला
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गुरु जी के लण्ड का मुठ्ठ मारा
मैं फिर किसी हाल में रुकी नहीं और अपना हाथ पूरा घुसेड़ दिया नेकर में। हाथ उसके लण्ड से टकरा गया। मैं बोली O' MY GOD ? झाँटें तो मिली नहीं मगर लौड़ा मिल गया साला ? बाप रे बाप इतना बड़ा लण्ड तेरा, सर। इतना मोटा लण्ड बहन चोद ? मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे खड़ा कर दिया और मैं कुर्शी पर बैठ गयी। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी नेकर खींच कर फेंक दीं। वह मेरे सामने एकदम नंगा हो गया। उसका लण्ड फनफनाकर मेरे मुंह के सामने खड़ा हो गया। मैंने लण्ड मुठ्ठी में ले लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। लण्ड का टोपा बाहर निकाल लिया। मैंने लण्ड की कई बार चुम्मी ली और बोली
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इतना बड़ा लण्ड तो अमर अंकल का भी लण्ड नहीं है। देखो साला बढ़ता ही जा रहा है, मादर चोद ? मैंने कई बार लण्ड बड़े प्यार से चूमा। मैं लण्ड से मोहब्बत करने लगी।
तब तक उसने मेरे टॉप की दोनों बटन खोल दी। मेरी नंगी चूचियाँ उसके हाथ में आ गयी। उसने धीरे से टॉप उतार दिया और मेरे बूब्स दबाने लगा। मेरे अंदर वासना भर गयी। मैं मस्त होने लगी और किसी भी हद को पार करने के लिए बुरी तरह तैयार हो गयी। उसका हाथ मेरी चूत तक जा पहुंचा और मैं उसे रोक भी नहीं सकती थी। मैं उसका लण्ड चाटने लगी और दूसरे हाथ से पेलहड़ सहलाने लगी। उसकी झाँटें साफ़ थी इसलिए लण्ड बड़ा और मोटा लग रह था। मेरी नज़र वहीँ पड़े एक इंची टेप पर गयी तो मैं उसे उठा कर लण्ड नापने लगी। मैं बोली हाय रे ये तो 8" से भी बड़ा है लण्ड ? मोटा भी साला 5" से ज्यादा है। मैंने मन में कहा ऐसा लौड़ा मिले तो कौन भोसड़ी वाली मज़ा नहीं करेगी ? इतने में मैंने लण्ड का सुपाड़ा मुंह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगी। अंदर ही अंदर सुपाड़े के चारों तरफ जबान घुमाने लगी। बार बार लण्ड मुंह में बाहर निकालने और फिर अंदर घुसाने लगी। ऐसा करने से मुझे भीऔर उसे भी मज़ा आने लगा। उसने मेरी जींस खोल दी। मैं पूरी नंगी हो गयी। मेरी चूत उसके सामने आ गयी। वह मुझे गोद में उठा लिया। मेरा हाथ नीचे उसके लण्ड पर ही रहा और मेरी चुम्मियां लेने लगा। मेरी चूचियाँ चूमने लगा।
वहीँ एक सोफा पड़ा था। मैंने उसकी गोद से उतरी और उसे सोफा पर बैठा दिया। मैं नीचे घुटनो के बल बैठ गयी उसकी दोनों टांगों के बीच। उसका लण्ड मेरे बूब्स छूने लगा। मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। जबान निकाल कर चाटने लगी। फर लण्ड आधे से अधिक मुंह में घुसेड़ लिया। लण्ड मुंह में घुसेड़ कर चूसने लगी। मुझे पहली बार कोई मस्त लौड़ा मिला था तो मैं क्यों न उसका पूरा मज़ा लूँ। मैं लौड़ा अपनी चूचियों पर भी घुमाने लगी। फिर लण्ड अपने दोनों हाथों के बीच डाल और उसे मथनी की तरह मथने लगी। इस क्रिया से उसे भी मज़ा आने लगा। मैं जल्दी जल्दी करने लगी तो वह सिसियाने लगा। फिर मैं लण्ड मुठ्ठी में लेकर उसका सटासट सड़का मारने लगी। मुझे ऐसा करने में खूब मज़ा अने लगा। वह भिबोला हाय गौरी मैं निकल जाऊंगा। मैंने कहा तो निकल जा न ?
मैं तो अब तेरे लण्ड का मक्खन निकाल कर ही दम लूंगी गुरु जी ? तेरा लण्ड मुझे बहुत पसंद आ गया है गुरु जी। अभी तो मैं मक्खन ही निकाल रही हूँ। अभी तो मैं तेरा लण्ड चोदूँगी गुरु जी। इतने बढ़िया लण्ड के मालिक हो यह बात तुमने मुझे पहले कभी नहीं बताई। मैं अगर तेरी जगह होती तो खोल कर दिखा देती अपना लण्ड अपनी शिष्या को। लण्ड घुसेड़ के चोद डालती उसकी बुर ? चीथड़े उड़ा देती अपनी शिष्या की चूत के गुरु जी। मैंने मुठ्ठ मारने की स्पीड बढ़ा दी। वह बोला हाय गौरी तेरे हाथ में जादू है। बड़ा मज़ा आ रहा है। ऐसे तो किसी लड़की ने मेरा मुठ्ठ नहीं मारा ? वाओ, ओ,,, हो,, आ,, आ रे,, हां,, हां,, और तेज करो,,, हां और तेज जल्दी जल्दी मारो मुठ्ठ,,, क्या बात है,,,, आए,,, हां हो,,, औ आ,,,, ओ,,,, ओहो ओ,, ऊँ ओ हो,, आ,, आये हां लो ,,,,,, आ बस लण्ड ने दनादन्न ३/४ पिचकारी मेरे मुंह में मार दी। मैंने मुंह खोल रख था। मैं सारा सीमेन पी गयी। पहले तो ख़राब लगा लेकिन फिर टेस्ट अच्छा लगने लगा। यह सब फिल्मों से सीखा था की लड़कियां कैसे झड़ता हुआ लण्ड पीती हैं। मैं उसका सुपाड़ा जबान निकाल कर चाटने लगी।
लण्ड आहिस्ते आहिस्ते ढीला होने लगा। मैंने उसे बाथ रूम लेकर गयी। उसका लौड़ा धोया। उस पर साबुन लगाया और अपने हाथ धोए मुंह धोया। अपनी चूचियाँ धोईं। फिर उसने मुझे नहला दिया और मैंने उसे नहला दिया। मैंने लण्ड पर कई बार साबुन लगाया और खूब मल मल कर उसे धोया। लण्ड साला नहां धोकर फिर खड़ा होने लगा। मैं बोली देखो गुरु जी तेरा लण्ड भोसड़ा का फिर से मुझे आँखें दिखाने लगा है। हम दोनों बाहर आ गए और फिर मैं ख़ुशी ख़ुशी अपने घर आ गयी।
चूत में पेला गुरु जी का लण्ड
कुछ देर बाद मेरी चूत साली आफत मचाने लगी। वह मुझसे शिकायत करने लगी की बुर चोदी गौरी तूने मेरे अंदर लौड़ा क्यों नहीं पेला ? मैं तो इंतज़ार ही करती रही और तू सिर्फ सड़का मार कर चली आई। अब मैं क्या करूँ ? अब तू किसका लौड़ा मेरे अंदर घुसेड़ेगी ? चुदवाया क्यों नहीं तूने। मैंने सोंचा की मेरी चूत सही तो कह रही है। मुझे गुरु जी का लौड़ा इसके अंदर घुसाना चाहिए था। बस फिर क्या मैं शाम को फिर पहुँच गयी गुरु जी के घर। मेरे पहुँचते ही उसने मुझे गले लगा लिया और बोला अरे गौरी मैं तुम्हे फोन करने ही वाला था। तुम्हारे जाने के बाद मेरा लौड़ा साला मुझे परेशान करने लगा। वह बोला अरे अंकित भोसड़ी के तूने गौरी को जाने क्यों दिया ? उसकी चूत में मुझे पेला क्यों नहीं ? चोदा क्यों नहीं उसकी बुर ? मुझे घुसेड़ा क्यों नहीं उसकी चूत में ? मैं तो चूत मे घुसाने के लिए तरसता ही रह गया, बहन चोद । अब बुलाओ न उसे और पेलो मुझे उसकी बुर में ? मैं बैठूंगा नहीं जब तक उसकी चूत में घुस नहीं जाता।
मैंने कहा अरे गुरु जी यही तो मेरी चूत भी कह रही थी और इसीलिए उसने मुझे घर से धक्के दे कर निकाला तो मैं आपके पास चली आई। अब मेरी चूत बड़ी खुश है। वह बोला और मेरा लौड़ा भी बहुत खुश है, देखो न पकड़ के गौरी ? मैंने उसे नंगा किया और लौड़ा पकड़ लिया। उसने मुझे नंगी किया और मेरी चूत सहलाया। मेरे बूब्स मसले। मैं चुदाने के लिये तैयार होने लगी और उसका लौड़ा चोदने के लिए। वह मुझे उठाकर बेड पर ले गया। उसने मुझे पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा। मेरा गाल चूमने लगा मेरे होंठ, मेरी नाक मेरा माथा और मेरे कान सब चूमने लगा। मेरी गर्दन चूमी और फिर मेरी चूचियों पर अटक गया। बड़ी देर तक चाटता रहा मेरी चूचियाँ . निपल्स भी मस्ती चूसता रहा. फिर वह नीचे खसक गया। अपना मुंह मेरी जाँघों के बीच डाल दिया। चूत फैला दी मैंने तो वह जबान निकाल कर मेरी चूत चाटने लगा। मैंने कहा गुरु जी दोनों हाथ से मेरी चूचियाँ मसलते हुए मेरी चूत चाटो। जबान से चोदो मेरी चूत।
उसने मेरी चूत इतनी अच्छी तरह से चाटी की मैं मस्त हो गयी। मैं फिर घूम गयी और उसका लौड़ा अपने मुंह में भर लिया। मैं चाटने लगी उसका लण्ड। पेलहड़ थामे हुए मैं मजे से लौड़ा चाटने चूसने लगी। मुझे तो खूब मज़ा आने लगा और उसे भी। तब तक मेरी बुर बहुत गरम हो चुकी थी। मैं बोली गुरु जी अब पेलो लण्ड मेरी चूत मे। वह भी तत्व में था। उसने लण्ड मेरी चूत पर रखा तो एक ही धक्के से सरसराता हुआ लण्ड अंदर घुस गया। मुझे दर्द तो हुआ। मैं चिल्ला भी पड़ी उई माँ मर गयी मैं ? फाड़ डाला मेरी चूत इसके लण्ड ने ? हाय दईया अब क्या होगा ? मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही ? लेकिन फिर रही हूँ। चोद गचागच मज़ा आने लगा। मैं भी अपनी गांड उठा उठा के चुदाने लगी। मेरी चूचियाँ हिलने लगी। उन्हें देख कर गुरु जी धक्का पे धक्का लगाने लगे। मैंने कहा पूरा लौड़ा पेल के चोदो गुरु जी। मुझे लगा की वह लड़कियां चोदने में एक्सपर्ट है। मैंने पूंछा गुरु जी क्या तुम और भी लड़कियां चोदते हो। वह बोला हां गौरी अब देखो मैंने शादी तो की नहीं। इसलिए मुझे लड़कियां चोदने का शौक है। मुझसे कई लड़कियां चुदवाने आती है। कुछ लड़कियां अपनी माँ भी चुदवाने आती हैं। कुछ तो शादी हो जाने के बाद भी चुदवाने आती हैं।
मैं मजे से चुदती चली जा रही थी। फिर मैंने कहा गुरु जी अब मुझे पीछे से चोदो। मैं वैसे ही चुदवाने लगी जैसे ब्लू फिल्म की लड़कियां चुदवाती हैं। लौड़ा तो पूरा घुस कर चोद रहा था। मैंने कहा सारे जानवर भोसड़ी के इसी तरह चुदवाते हैं और मैं भी एक जानवर की तरह चुदवा रही हूँ। कितना मज़ा आ रहा है। थोड़ी देर में मैं उसके लण्ड पर बैठ गयी और बोली गुरु जी अब मैं चोदूँगी तेरा लण्ड ? मैं कूद कूद कर लण्ड चोदने लगी। मैं सोंच रही थी की अगर यहाँ कोई फोटोग्राफर होता तो मेरा वीडियो बना लेता तो अच्छा था क्योंकि मैं खुद देखना चाहती हूँ की मैं कैसे चुदवाती हूँ। कैसे लौड़ा पीती हूँ. कैसे लौड़ा चाटती हूँ और कैसे लण्ड का सड़का मारती हूँ। अब मैं मंजिल के करीब आ गयी थी। मैं खलास होने वाली थी तब तक वह बोला गौरी मैं झड़ रहा हूँ। मैंने कहा ओ के मेरे मुंह में गिरा दे मैं झड़ता हुआ लौड़ा पी जाऊंगी। मैं मस्ती से चाटने लगी झड़ता हुआ लण्ड।
उसके बाद मैं अक्सर गुरु जी से चुदवाने लगी। जवानी का खूब मज़ा लूटने लगी। मैं वास्तव में गुरु जी के लण्ड की दीवानी हो गयी। मैंने उसके लण्ड की कई फोटो अपने मोबाइल में कैद कर लीं
एक दिन इतवार को मैं उसके घर गयी तो दरवाजा किसी और ने खोला। जिसने खोला वह एक नौजवान लड़का था। बड़ा हैंडसम था, स्मार्ट था, गोरा चिट्टा था। मेरी नियत उस पर ख़राब हो गयी। मैं तो बस उसके लण्ड के बारे में सोंचने लगी। उसने मुझे बैठाया और पानी लेने अंदर चला गया। तब तक मैंने अपनी टॉप के दोनों बटन खोल डाला। अपनी चूचियाँ टेबल पर रख कर बैठ गयी। मैंने पानी पिया और चाय भी पी. वह मेरी चूचियाँ बड़े गौर से देखने लगा। मैंने पूंछा आप गुरु जी को कैसे जानते हैं ? वह बोला वह मेरे भी गुरु जी हैं। मैंने कहा तब तो तुम बहन चोद बड़े मस्त आदमी हो ? उसने कहा वाओ, तुम गालियां भी देती हो ? मैंने कहा हां बिलकुल देती हूँ ? उसने फिर पूंछा तो कैसी गालियां देती हो ? मैंने कहा - मादर चोद, बहन चोद, कुत्ते, कमीने, तेरी माँ का भोसड़ा तेरी बहन की बुर, तेरी गांड में ठोंक दूँगी लण्ड, तेरी माँ की चूत, भोसड़ी के, गांडू, तेरी बिटिया की बुर, चूतिया साले तेरी बहन का लण्ड ? वह बोला बस बस,, बाप रे बाप ? आप तो तूफ़ान मेल गालियां देती हैं। तेरा मुकाबला कोई नहीं कर सकता ?
इतने में बेल बज गयी और गुरु जी आ गए। उसके साथ एक लड़की थी. गुरु जी बोले अरे शेखर तुम तो मुझसे पहले ही आ गए। फिर गुरु जी ने उसका परिचय करवाया और कहा देखो गौरी यह है मिस नमिता। जिस तरह तुम मेरे लण्ड की दीवानी हो गौरी उसी तर नमिता शेखर के लण्ड की दीवानी है। यह सुन कर मेरी चूत में भयानक आग लग गयी। मैंने सोंचा की आज मेरी तमंन्ना पूरी हो जाएगी। तब तक गुरु जी ने दारू शुरू कर दी। हम चारों लोग दारू पीने लगे। एक पैग जैसे ही खत्म हुआ वैसे ही नमिता उठी और गुरु जी को नंगा करने लगी। उसके सारे कपड़े उतार कर गुरु जी का लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। मैंने मन में कहा ये तो भोसड़ी की मुझसे आगे निकल गयी। तब मैं उठी और फटाफट शेखर को नंगा किया। उसका लौड़ा पकड़ा और उसकी ताबड़तोड़ कई चुम्मियां ले लीं। मैंने पहले लण्ड चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखा और फिर लौड़ा हिलाना शुरू किया तो लौड़ा खड़ा होकर मेरे सामने दहाड़ने लगा। मैंने कहा वाओ, क्या लौड़ा है यार तेरा ? ये है मरदाना लण्ड बिलकुल गुरु जी के लण्ड की तरह ?
फिर मैंने गुरु जी के सामने ही शेखर से भकाभक चुदवाया और नमिता ने मेरे सामने गुरु जी से भकाभक चुदवाया।
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