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» मैं ये लंड गांड में नहीं लुंगी, चूत चोदो बस - Ye lund chut me dalo gand to fat jayegi
मैं ये लंड गांड में नहीं लुंगी, चूत चोदो बस - Ye lund chut me dalo gand to fat jayegi
मैं ये लंड गांड में नहीं लुंगी, चूत चोदो बस - Ye lund chut me dalo gand to fat jayegi.
अज़रा बेटी तेरे देवर का लण्ड कितना बड़ा है ?
मेरे दो देवर हैं अम्मी ? किसके लण्ड के बारे में तुम बात कर रही हो ?
अपने दोनों देवरों के लण्ड के बारे में बताओ न मुझे ? उनके साइज के बारे में बताओ।
बड़े वाले देवर का लण्ड लगभग 8" का है और छोटे वाले देवर का लण्ड 8" से थोड़ा बड़ा है।
अच्छा इसका मतलब बड़े वाले देवर का लण्ड छोटा है और छोटे वाले देवर का लण्ड बड़ा है।
हां हां बिलकुल सही कहा तुमने अम्मी। पर खड़े होने पर दोनों खूब सख्त हो जातें है। एक बात और है की बड़े वाले के लण्ड का टोपा अंडाकार है और छोटे वाले के लण्ड का टोपा एकदम गोल है।
अच्छा बेटी, तेरे नंदोई का लण्ड कैसा है ?
बड़ा जबरदस्त है अम्मी उसका लण्ड ? साला बड़ा भी है और मोटा भी ? एकदम मेरे ससुर के लण्ड के टक्कर का है उसका लण्ड ?
हाय दईया, तो क्या तू अपने ससुर का लण्ड पकड़ चुकी है।
हां पकड़ चुकी हूँ एक बार नहीं कई बार। चुदवा भी चुकी हूँ कई बार। पहली बार लण्ड पकड़ने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। उसके बाद तो सब कुछ आसान हो गया। अब तो वह मौका पाते ही मेरे सामने अपना लण्ड खोल कर नंगा खड़ा हो जाता है।
तू तो बड़ी सयानी निकली बहन चोद, अज़रा ? अभी तेरी शादी के ६ महीने हुए हैं और तूने कई लोगों के लण्ड पकड़ लिए हैं।
अरे अम्मी, आजकल नयी नवेली दुल्हन को कौन अपना लण्ड नहीं पकड़ाना चाहता ? अब ज़माना बदल गया है। सभी भोसड़ी वाले चाहते हैं की दुलहन मेरा लण्ड पकड़ ले। इसी तरह मैं पकड़ती गयी सबके लण्ड ? मैं भी मज़ा लेती गयी।
सुना है तेरे जेठ का लण्ड बड़ा खूबसूरत है ?
हां अम्मी यह बात तो सही है। वह वाकई बड़ा खूबसूरत है। मैंने जब पहली बार देखा तो पागल हो गयी थी। मन करता था की इसे बस देखती ही रहूं।
और तेरे ससुर के बड़े भाई जान का लण्ड ?
वो लण्ड मैंने अभी तक नहीं देखा ? हां मेरी नन्द ने उसके लण्ड के बारे में मुझे बताया जरूर है। लेकिन जब मैं उसका लण्ड पकड़ लूंगी और उससे चुदवा लूंगी तब बताउंगी तुम्हे, अम्मी।
मेरी अम्मी का नाम है तसरीन बेगम। वह ४५ साल की मद मस्त महिला हैं। बड़ी हंसमुख और खुश मिज़ाज़ है। बहुत खूबसूरत है हॉट हैं और सेक्सी हैं। एकदम खुल्लम खुल्ला बात करती हैं। मन में कोई मलाल नहीं रखती हैं। मुंहफट हैं। सब कुछ मुंह पर ही साफ़ साफ़ बोल देतीं है। मैं जब २१ साल की हुई तो अम्मी एक दिन बोली अरी अज़रा अब तू बड़ी हो गयी है। माशा अल्ला बड़ी खूबसूरत और हसींन हो गयी है तू। अब जवानी का मज़ा लूटना शुरू कर दे बेटी। लड़कों को अपनी तरह आने की दावत दिया कर बेटी। लण्ड पकड़ना शुरू कर दे। शर्माने की कोई जरुरत नहीं हैं। एक बार लण्ड पकड़ना और लण्ड चूसना शुरू कर देगी तो फिर बाकी सब अपने आप आ जायेगा। अब मैं अम्मी को क्या बताऊँ की मैं पिछले दो साल से लण्ड पकड़ रही हूँ और चूस भी रही हूँ। हां इससे एक बात पक्की हो गयी की अभी तक मैं चोरी छिपे लण्ड पकड़ती थी अब मैं अम्मी के सामने खुले आम लण्ड पकड़ सकती हूँ।
मैं एक दिन अपने कमरे में अपने बॉय फ्रेंड असद का लौड़ा चूस रही थी। मैं भी नंगी थी और वह भी नंगा था। झाँटें उसकी भी साफ़ थीं और मेरी भी। मेरी निगाहें उसके लण्ड पर पड़ीं और उसकी मेरी चूत और चूचियों पर। मुझे नंगे लड़के बहुत पसंद हैं। नंगे नंगे लण्ड देखने में मुझे बड़ा अच्छा लगता है। मैं तो कभी कभी लड़कों को सिर्फ बुरखा पहना देती हूँ और नीचे एकदम नंगा रखती हूँ। बुरखा में एक होल बना लिया है उसी में हाथ डाल कर चुपचाप बैठी हुई लण्ड हिलाया करती हूँ। यह काम मैं सिनेमा हाल बहुत करती हूँ। किसी को क्या पता की बुरखे के अंदर लण्ड है की चूत। इस तरह मैं कई लड़कों के लण्ड सिनेमा हाल में बैठी बैठी हिलाती रहती हूँ। मौका पाते ही झुक कर चूस भी लेती हूँ लण्ड ?
इधर असद का लण्ड और सख्त हो गया। तब तक अचानक अम्मी कमरे में आ गईं। वह मुझे देख कर बोली अरी अज़रा लौड़ा तो तू बहुत बढ़िया ढूंढ कर लायी है, बेटी ? लाओ ज़रा मैं भी पकड़ कर देखूं। अम्मी ने लौड़ा मेरे हाथ से ले लिया। उसे ऊपर नीचे करके बोली हाय दईया बड़ा मोटा और सख़्त है लौड़ा ? बिलकुल इसी तरह है तेरे खालू का लण्ड बेटी ? मैंने कहा अरे अम्मी मैंने कभी खालू का लण्ड पकड़ा ही नहीं लेकिन अब तो मैं जरूर पकडूंगी उसका लण्ड ? वह बोली हां बेटी बिलकुल पकड़ना। मैं पकड़ाूऊंगी तुझे उसका लण्ड ? पर आज मैं तेरे दोस्त के लण्ड से खेलूंगी बेटी ? मैंने कहा खेलो अम्मी मुझे तो अच्छा लग रहा है। वह बोली अच्छा लग रहा है तो चुदवा ले न तू अपनी माँ का भोसड़ा अज़रा ? आज तो मौक़ा है। मैंने कहा हां अम्मी मैंने असद को अपनी माँ चोदने के लिए ही बुलाया है। मैंने इससे कहा था की यार आज मेरी माँ चोद कर देखना।
असद भी समझ गया। उसने लण्ड अम्मी की चूत पर टिकाया और फिर मस्ती से एक धक्का मारा। लण्ड सटाक से अंदर घुस गया। मैं भी उसके चूतड़ पर हाथ रख ऊपर नीचे करने लगी। बीच बीच में उसके पेलहड़ सहलाने लगी। अम्मी मस्ती से चुदवाते हुए बोली अरी अज़रा तू तो अपनी माँ चुदा रही है। बड़ी हरामजादी हो गयी है तू। जवानी का मज़ा लूट रही है तू। थोड़ी देर तक चुदाने के बाद अम्मी ने लण्ड मेरी चूत पर रख दिया और असद में मुस्कराते हुए धक्का मार दिया। लण्ड साला गटाक से अंदर चला गया। मैं चिल्ला पड़ी हाय दईया मेरी तो बुर फट गयी माँ। हाय रे कितना मोटा है इसका लण्ड अम्मी ? मेरी चूत क्या मेरी तो गांड फटी जा रही है। लेकिन फिर चुदवाने में जो मज़ा आया उसे बयान नहीं किया जा सकता। मैं भी मस्ती हो गयी और मेरीअम्मी भी। फिर हम दोनों ने झड़ता हुआ लण्ड खूब चाटा। लण्ड के टोपा से लेकर पेलहड़ तक और पेलहड़ से लेकर लण्ड के टोपा तक।
उस दिन से मेरी और अम्मी का याराना शुरू हो गया। हम दोनों दना दन्न एक के बाद एक मर्दों से चुदवाने लगीं। मैं अपने दोस्तों के लण्ड अम्मी की चूत मे घुसाने लगी और अम्मी अपने दोस्तों के लण्ड मेरी चूत में। फिर धीरे धीरे मैं घर में ही सेक्स पार्टी करने लगी। लड़कों को बुलाती, पहले खूब ड्रिंक्स और डांस होता उसके बाद भकाभक चुदाई। इस तरह हमें नए नए लण्ड मिलने लगे और उन्हें नयी नयी चूत। जब चोदने वाले लोग ज्यादा होने लगे तो मैंने अपनी दोस्त सलमा और सबा को शामिल कर लिया और उधर अम्मी ने भी आयसा और नगमा को शामिल कर लिया।
फिर एक दिन मेरा निकाह हो गया और मैं ससुराल चली गई। वहां मुझे नन्द मिल गयी। उसका नाम है इकरा। वह भी शादी शुदा है। मेरी सुहाग रात के बाद वह बोली भाभी आज रात को मैं चोदूँगी तेरी बुर। पहले तो मैं समझी की वह मजाक कर रही है पर रात में जब वह आई तो मुझसे कहने लगी भाभी एक बात बताओ तुम्हे किस तरह का लण्ड पसंद है मैं उसी तरह का लण्ड पेल कर तेरी बुर चोदूँगी। मैंने भी मुस्कराकर कह दिया मोटा और सख्त लण्ड ? बस वह रात में ११ बजे आ गयी और बोली भाभी तेरा लण्ड आ गया है। मैंने कहा यार तू क्या सच कह रही है। वह बोली हां बिलकुल सच। मैंने कहा अरे मेरा मियां आने वाला होगा ? वह बोली अरे भाभी वह नहीं आएगा मैं जानती हूँ। वो तो अभी अपनी भाभी की बुर ले रहा है। उसके बाद वह अपनी फूफी की बेटी की बुर लेगा। फिर वह अपनी दोस्त की बीवी चोदेगा। उसका लण्ड तो रात भर के लिए बुक है। तुम उसके इंतज़ार में अपना समय क्यों बर्बाद करोगी। तेरा मियां उधर मजे से चोद रहा है, तुम इधर मजे से चुदवाओ।
इकरा ने फिर उस लड़के को अंदर बुला लिया। लड़का देखने में तो हैंडसम था लम्बा था लेकिन इकहरे बदन का था। मैं सोंचने लगी की क्या इसका लण्ड इतना मोटा होगा जितना मैं चाहती हूँ। ये है इकबाल मेरे मियां का दोस्त। मैंने इसका लण्ड आज़मा कर देखा है भाभी। मैं पहले तुम्हे दिखाती हूँ इसका लण्ड और फिर खोलती हूँ तेरी बुर। वह इकबाल के कपड़े उतारने लगी। बस पल भर में वह मेरे सामने बिलकुल नंगा हो गया। इकरा लण्ड पकड़ कर प्यार से हिलाया तो वह साला फनफनाकर खड़ा हो गया। लण्ड देख कर मेरे मुंह से निकला हाय दईया इतना मोटा लण्ड ? इकहरे बदन वाले आदमी का लण्ड इतना मोटा होगा यह तो मैंने सोंचा ही नहीं। वह बोली अरे भाभी आदमी के शरीर से उसके लण्ड के साइज का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। मैंने ५' के आदमी का ९" का लण्ड देखा है। मैंने कहा वाओ, तू सच कह रही है की मुझे चूतिया बना रही है। वह बोली अरे भाभी किसी दिन मैं उसका भी लण्ड तेरे हाथ में रख दूँगी। तब तुम्हे मेरी बात पर यकीन हो जायेगा।
इकरा ने फिर मुझे नंगी कर दिया और लण्ड मुझे पकड़ा कर मेरी चूत चाटने लगी। नंगी वह भी थी और किसी से चुदवा कर आई थी। मैं तो मस्ती से इकबाल का लण्ड चूसने लगी। इतना मोटा लण्ड मैं पहली बार देख रही थी। , इकरा बोली भाभी आज जितने लण्ड यहाँ मौजूद है उनमे सबसे मोटा लण्ड इसी का है। वैसे मेरे ससुर का लण्ड इससे भी मोटा है। मैंने कहा बपपरे तू अपने ससुर का लण्ड पकड़ती है। वह बोली अरे भाभी पकड़ती ही नहीं हूँ उसे अपनी चूत में भी लेती हूँ। वह भी बड़ी मस्ती से मेरी बुर लेता है। भाभी तुम भी अपने ससुर का लण्ड पकड़ोगी तो मस्त हो जाओगी। इकरा ने ऐसा कह कर मेरे अंदर ससुर का लण्ड पकड़ने की इच्छा जगा दी। मैं उसी समय से अपने ससुर का लण्ड पकड़ने की सोंचने लगी। इधर इकबाल का लण्ड जब मेरी चूत में घुसा तो मज़ा आ गया। मेरे अंदर की रंडी जाग गयी। मैं बड़ी बेशर्मी से अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी। जैसे ब्लू फिल्मों ने हीरोइन चुदवाती हैं।
मेरी नन्द इसी तरह रात भर मेरी बुर चुदवाती रही। मैं अपनी नन्द से बहुत खुश थी और दुआ करने लगी की ऐ खुदा अगर किसी को नन्द दे तो फिर वह मेरी नन्द इकरा की ही तरह हो ? चुदवाने के बाद मैंने उसे गले लगाया और बोली यार इकरा तू तो बहन चोद बहुत अच्छी है। मैंने जान बूझ कर गाली दी। तो वह भी बोली हाय अल्ला, तुम भी तो भोसड़ी की बड़ी मस्ती हो भाभी ? बस उस दिन से हम दोनों गालियों से ही बातें करने लगीं। अब मेरी इच्छा घर के सभी मर्दों के लण्ड पकड़ने की होने लगी। मेरी निगाह अपने छोटे देवर के लण्ड पर टिक गयी। एक दिन वह तौलिया लपेट कर बाथ रूम जा रहा था। मैं अपने कमरे में बैठी थी। मैंने उसे इशारे से बुलाया और जब वह मेरे सामने आया तो मैंने उसकी तौलियां खींच ली। वह नंगा हो गया और अपना लण्ड छुपाने लगा। मैंने कहा साले तुम मेरे देवर हो और लण्ड मुझसे ही छुपा रहे हो ? मैंने तेरा लण्ड पकड़ने के लिए ही तुझे नंगा किया है। मैंने दरवाजा बंद किया और लण्ड पर टूट पड़ी। लण्ड साला बड़ा मोटा तगड़ा निकला और फिर मुझे चुदवाने में बड़ा मज़ा आया।
दो दिन बाद उसका बड़ा भाई असीम मेरे सामने आ गया। मैंने उसे बुलाया और सीधे छत पर चली गयी। छत का दरवाजा बंद किया और उससे कहा देवर जी अपना लण्ड मुझे दिखाओ। मैंने अपनी चूचियाँ खोल दिन। वह चुंचियां देख कर मना नहीं कर सका। मैंने उसका पैजामा खोला और लौड़ा पकड़ कर बाहर निकाला। उसे पूरा नंगा कर दिया। मैंने भी अपना सलवार खोला और नंगी हो गयी। उसका लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगी। लण्ड एकदम से टन टना कर खड़ा हो गया। छोटे देवर से इसका लण्ड मोटा जरूर था लेकिन लम्बाई में छोटा था। मैं आम की गुठली की तरह उसका सुपाड़ा चूसने लगी। फिर मैं पलंग पर लेट गयी और उससे अपनी बुर चटवाई। मैनें पूंछा क्या तुमने किसी और की बुर चाटी है। वह बोला हां भाभी मैं बड़ी भाभी की बुर चाटता भी हूँ और चोदता भी हूँ। खाला जान की बुर चोदता हूँ और फूफी की भी बुर। खाला की बेटी की भी बुर चोदने लगा हूँ भाभी। वह भी बड़ी मस्ती से पीती है मेरा लण्ड ? फिर मैंने उससे खूब भकाभक चुदवाया तब मुझे शुकून मिला। मैं हरामजादी दिन पर दिन बड़ी चुदक्कड़ होती जा रही थी।
अब मेरी इच्छा अपने ससुर का लण्ड पकड़ने की हो गयी। मैं रोज़ सुबह शाम उसके लण्ड के तलाश में रहने लगी। मैं घात लगाए हुए बैठी थी मैं जैसे बिल्ली चूहे पर घात लगाती है। एक दिन वह मुझे घर में अकेला मिल गया। रात में भी हम दोनों के अलावा कोई नहीं था। मैंने पहले अपनी झाँटे बना लीं और चूत एकदम चिकनी कर ली। ससुर जी को प्यार से खाना खिलाया। खान खिलाते समय मैंने अपनी चूचियाँ खोल रहीं थी। बार मैं उसे चूचियाँ दिखाती जा रही थी। नीच पेटीकोट पहना था तो अपनी जांघें भी खोल देती थी। मैं ससुर की नज़रों पर नज़र रखे थी। मैं जान गयी की वह मुझे नंगी देखने में रूचि ले रहा है। उसने एक छोटी सी लुंगी पहनी थी। उसके अंदर से कुछ उभार मुझे दिखाई पड़ा। मैं जान गयी की उसका लण्ड खड़ा हो रहा है। वह बार बार लुंगी समेट रहा था। मैंने एक बार कहा ससुर जी रहने दो लुंगी को घर में कोई और तो नहीं बहन चोद। खुल भी जाएगी तो क्या हुआ ?
उसको मेरे मुंह से गाली अच्छी लगी। वह भी बोला कहो तो बहू खोल के रख दूँ लुंगी । मैंने कहा ससुर जी लुंगी तुम मुझे दे दो मैं तुम्हे पैजामा देती हूँ। ऐसा कह कर मैंने लुंगी खींच ली। वह नंगा हो गया और मैंने उसका लण्ड देख लिया। मैं पैजामा जानबूझ कर थोड़ी देर में आई। तब तक मैंने उसका लण्ड खूब मजे से देखा। मजे की बात यह थी की वह भी साला लण्ड मुझे दिखाने लगा। वह दोनों हाथ ऊपर करके खड़ा हो गया और बोला बहू पैजामा पहना दो मुझे। पैजामा पहनाते समय मैंने उसके लण्ड पर कई बार हाथ मारा। लण्ड साला अकड़ कर खड़ा हो गया। मैंने कहा ससुर जी लण्ड तो खड़ा हो गया है। वह बोला बहू इसे पकड़ कर अंदर घुसेड़ दो। मैंने लण्ड पकड़ लिया। वह मुस्कराने लगा।
रात में जब मैं अपने बिस्तर पर गयी तो एकदम नंगी लेट गयी। मेरी चूचियाँ खुलीं थी मेरी गांड खुली थी। हां चूतअंदर थीं क्योंकि मैं टांग पर टांग रखे हुए लेटी थी। थोड़ी देर में मैंने आँख खोली तो देखा वह तो मेरा सामने बिलकुल नंगा खड़ा है। वह बोला अज़रा बहू जब तूने मेरा लण्ड देख ही लिया है तो फिर पकड़ कर ठीक से देख लो न। अब तो न मुझे नींद आ रही है और न मेरे लण्ड को। फिर क्या मैंने गचगचा कर पकड़ लिया लण्ड और उसे प्यार से हिलाने लगी। लण्ड बढ़ने लगा। साला लगभग ९" का हो गया लण्ड ? मैंने भी अपनी चूत दिखा दी। वह भी भनभना उठा। मेरा रंडीपना जाग उठा. मैंने कहा ससुर जी भोसड़ी के पहले तुम मेरी चूत चाटो फिर मैं तेरा लण्ड चाटूँगी ? सच बताऊँ दोस्तों , मैंने रात में तीन बार चुदवाया। सवेरे उठ कर फिर मस्ती से पिया उसका लण्ड। तब मुझे चैन आया।
मैं जब अपने माईकेआई तो अम्मी को सारा किस्सा बताया। वह बहुत खुश हुई की मेरी बेटी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही है। मैंने भी मन मे ठान लिया की बाकी जो लण्ड है अभी मेरी ससुराल में मैं अबकी जाकर सब के सब पकडूंगी, हिलाऊँगी, चूसूँगी और चुदवाऊँगी ?
एक दिन मैं जब घर आई तो देखा की अम्मी के बगल मेरा ससुर बैठा है। मैंने आदाब कहा उसने भी जबाब दिया। मैं यह देख कर हैरान थी की अम्मी अपना हाथ उसके पैजामे के अंदर घुसेड़ कर उसका लण्ड सहला रहीं हैं। मेरे आने के बाद भी उसने अपना हाथ नहीं हटाया बल्कि और जोर जोर से हिलाने लगीं।
मुझसे रहा न गया तो मैंने पूंछ ही लिया अम्मी ये तुम क्या कर रही हो ?
वह बड़ी बेबाकी से बोली बेटी मैं तेरे ससुर का लण्ड हिला रही हूँ। इतनी जल्दी एक ही दिन में तुम मेरे ससुर का लण्ड हिलाने लगीं अम्मी। मैं कुछ समझी नहीं ?
उसने लण्ड पैजाम के बाहर निकाल कर मुझे दिखाते हुए कहा अरे बेटी इसके लण्ड से मेरी पुरानी दोस्ती है ? इस लण्ड ने मुझे अपने बस में कर रखा है।
लेकिन यह बात आपने मुझे कभी बताई नहीं, अम्मी ?
मैं तुम्हे सरप्राईज़ देना चाहती थी और आज दे भी दिया ?
अब पहेलियां न बुझाओ अम्मी। ठीक से बताओ यह सब कैसे हुआ ?
अम्मी ने लण्ड की कई बार चुम्मी ली और बोली मैं तेरे ससुर का लण्ड पीती हूँ बेटी। मैं तेरी शादी के पहले से ही इसका लण्ड पीती आ रही हूँ। दरअसल तेरा ससुर भोसड़ी का मेरा रिस्ते में नंदोई लगता है ? और मैं इसका लण्ड इसकी शादी से पी रही हूँ। जब जब यह मेरे सामने आता है तब तब इसका लण्ड पहले मेरे मुंह में घुसता है और फिर मेरी चूत में ?
वाओ, मेरी हरामजादी अम्मी, YOU ARE GREAT..
अज़रा बेटी तेरे देवर का लण्ड कितना बड़ा है ?
मेरे दो देवर हैं अम्मी ? किसके लण्ड के बारे में तुम बात कर रही हो ?
अपने दोनों देवरों के लण्ड के बारे में बताओ न मुझे ? उनके साइज के बारे में बताओ।
बड़े वाले देवर का लण्ड लगभग 8" का है और छोटे वाले देवर का लण्ड 8" से थोड़ा बड़ा है।
अच्छा इसका मतलब बड़े वाले देवर का लण्ड छोटा है और छोटे वाले देवर का लण्ड बड़ा है।
हां हां बिलकुल सही कहा तुमने अम्मी। पर खड़े होने पर दोनों खूब सख्त हो जातें है। एक बात और है की बड़े वाले के लण्ड का टोपा अंडाकार है और छोटे वाले के लण्ड का टोपा एकदम गोल है।
अच्छा बेटी, तेरे नंदोई का लण्ड कैसा है ?
बड़ा जबरदस्त है अम्मी उसका लण्ड ? साला बड़ा भी है और मोटा भी ? एकदम मेरे ससुर के लण्ड के टक्कर का है उसका लण्ड ?
हाय दईया, तो क्या तू अपने ससुर का लण्ड पकड़ चुकी है।
हां पकड़ चुकी हूँ एक बार नहीं कई बार। चुदवा भी चुकी हूँ कई बार। पहली बार लण्ड पकड़ने में थोड़ी मेहनत करनी पड़ी थी। उसके बाद तो सब कुछ आसान हो गया। अब तो वह मौका पाते ही मेरे सामने अपना लण्ड खोल कर नंगा खड़ा हो जाता है।
तू तो बड़ी सयानी निकली बहन चोद, अज़रा ? अभी तेरी शादी के ६ महीने हुए हैं और तूने कई लोगों के लण्ड पकड़ लिए हैं।
अरे अम्मी, आजकल नयी नवेली दुल्हन को कौन अपना लण्ड नहीं पकड़ाना चाहता ? अब ज़माना बदल गया है। सभी भोसड़ी वाले चाहते हैं की दुलहन मेरा लण्ड पकड़ ले। इसी तरह मैं पकड़ती गयी सबके लण्ड ? मैं भी मज़ा लेती गयी।
सुना है तेरे जेठ का लण्ड बड़ा खूबसूरत है ?
हां अम्मी यह बात तो सही है। वह वाकई बड़ा खूबसूरत है। मैंने जब पहली बार देखा तो पागल हो गयी थी। मन करता था की इसे बस देखती ही रहूं।
और तेरे ससुर के बड़े भाई जान का लण्ड ?
वो लण्ड मैंने अभी तक नहीं देखा ? हां मेरी नन्द ने उसके लण्ड के बारे में मुझे बताया जरूर है। लेकिन जब मैं उसका लण्ड पकड़ लूंगी और उससे चुदवा लूंगी तब बताउंगी तुम्हे, अम्मी।
मेरी अम्मी का नाम है तसरीन बेगम। वह ४५ साल की मद मस्त महिला हैं। बड़ी हंसमुख और खुश मिज़ाज़ है। बहुत खूबसूरत है हॉट हैं और सेक्सी हैं। एकदम खुल्लम खुल्ला बात करती हैं। मन में कोई मलाल नहीं रखती हैं। मुंहफट हैं। सब कुछ मुंह पर ही साफ़ साफ़ बोल देतीं है। मैं जब २१ साल की हुई तो अम्मी एक दिन बोली अरी अज़रा अब तू बड़ी हो गयी है। माशा अल्ला बड़ी खूबसूरत और हसींन हो गयी है तू। अब जवानी का मज़ा लूटना शुरू कर दे बेटी। लड़कों को अपनी तरह आने की दावत दिया कर बेटी। लण्ड पकड़ना शुरू कर दे। शर्माने की कोई जरुरत नहीं हैं। एक बार लण्ड पकड़ना और लण्ड चूसना शुरू कर देगी तो फिर बाकी सब अपने आप आ जायेगा। अब मैं अम्मी को क्या बताऊँ की मैं पिछले दो साल से लण्ड पकड़ रही हूँ और चूस भी रही हूँ। हां इससे एक बात पक्की हो गयी की अभी तक मैं चोरी छिपे लण्ड पकड़ती थी अब मैं अम्मी के सामने खुले आम लण्ड पकड़ सकती हूँ।
मैं एक दिन अपने कमरे में अपने बॉय फ्रेंड असद का लौड़ा चूस रही थी। मैं भी नंगी थी और वह भी नंगा था। झाँटें उसकी भी साफ़ थीं और मेरी भी। मेरी निगाहें उसके लण्ड पर पड़ीं और उसकी मेरी चूत और चूचियों पर। मुझे नंगे लड़के बहुत पसंद हैं। नंगे नंगे लण्ड देखने में मुझे बड़ा अच्छा लगता है। मैं तो कभी कभी लड़कों को सिर्फ बुरखा पहना देती हूँ और नीचे एकदम नंगा रखती हूँ। बुरखा में एक होल बना लिया है उसी में हाथ डाल कर चुपचाप बैठी हुई लण्ड हिलाया करती हूँ। यह काम मैं सिनेमा हाल बहुत करती हूँ। किसी को क्या पता की बुरखे के अंदर लण्ड है की चूत। इस तरह मैं कई लड़कों के लण्ड सिनेमा हाल में बैठी बैठी हिलाती रहती हूँ। मौका पाते ही झुक कर चूस भी लेती हूँ लण्ड ?
इधर असद का लण्ड और सख्त हो गया। तब तक अचानक अम्मी कमरे में आ गईं। वह मुझे देख कर बोली अरी अज़रा लौड़ा तो तू बहुत बढ़िया ढूंढ कर लायी है, बेटी ? लाओ ज़रा मैं भी पकड़ कर देखूं। अम्मी ने लौड़ा मेरे हाथ से ले लिया। उसे ऊपर नीचे करके बोली हाय दईया बड़ा मोटा और सख़्त है लौड़ा ? बिलकुल इसी तरह है तेरे खालू का लण्ड बेटी ? मैंने कहा अरे अम्मी मैंने कभी खालू का लण्ड पकड़ा ही नहीं लेकिन अब तो मैं जरूर पकडूंगी उसका लण्ड ? वह बोली हां बेटी बिलकुल पकड़ना। मैं पकड़ाूऊंगी तुझे उसका लण्ड ? पर आज मैं तेरे दोस्त के लण्ड से खेलूंगी बेटी ? मैंने कहा खेलो अम्मी मुझे तो अच्छा लग रहा है। वह बोली अच्छा लग रहा है तो चुदवा ले न तू अपनी माँ का भोसड़ा अज़रा ? आज तो मौक़ा है। मैंने कहा हां अम्मी मैंने असद को अपनी माँ चोदने के लिए ही बुलाया है। मैंने इससे कहा था की यार आज मेरी माँ चोद कर देखना।
असद भी समझ गया। उसने लण्ड अम्मी की चूत पर टिकाया और फिर मस्ती से एक धक्का मारा। लण्ड सटाक से अंदर घुस गया। मैं भी उसके चूतड़ पर हाथ रख ऊपर नीचे करने लगी। बीच बीच में उसके पेलहड़ सहलाने लगी। अम्मी मस्ती से चुदवाते हुए बोली अरी अज़रा तू तो अपनी माँ चुदा रही है। बड़ी हरामजादी हो गयी है तू। जवानी का मज़ा लूट रही है तू। थोड़ी देर तक चुदाने के बाद अम्मी ने लण्ड मेरी चूत पर रख दिया और असद में मुस्कराते हुए धक्का मार दिया। लण्ड साला गटाक से अंदर चला गया। मैं चिल्ला पड़ी हाय दईया मेरी तो बुर फट गयी माँ। हाय रे कितना मोटा है इसका लण्ड अम्मी ? मेरी चूत क्या मेरी तो गांड फटी जा रही है। लेकिन फिर चुदवाने में जो मज़ा आया उसे बयान नहीं किया जा सकता। मैं भी मस्ती हो गयी और मेरीअम्मी भी। फिर हम दोनों ने झड़ता हुआ लण्ड खूब चाटा। लण्ड के टोपा से लेकर पेलहड़ तक और पेलहड़ से लेकर लण्ड के टोपा तक।
उस दिन से मेरी और अम्मी का याराना शुरू हो गया। हम दोनों दना दन्न एक के बाद एक मर्दों से चुदवाने लगीं। मैं अपने दोस्तों के लण्ड अम्मी की चूत मे घुसाने लगी और अम्मी अपने दोस्तों के लण्ड मेरी चूत में। फिर धीरे धीरे मैं घर में ही सेक्स पार्टी करने लगी। लड़कों को बुलाती, पहले खूब ड्रिंक्स और डांस होता उसके बाद भकाभक चुदाई। इस तरह हमें नए नए लण्ड मिलने लगे और उन्हें नयी नयी चूत। जब चोदने वाले लोग ज्यादा होने लगे तो मैंने अपनी दोस्त सलमा और सबा को शामिल कर लिया और उधर अम्मी ने भी आयसा और नगमा को शामिल कर लिया।
फिर एक दिन मेरा निकाह हो गया और मैं ससुराल चली गई। वहां मुझे नन्द मिल गयी। उसका नाम है इकरा। वह भी शादी शुदा है। मेरी सुहाग रात के बाद वह बोली भाभी आज रात को मैं चोदूँगी तेरी बुर। पहले तो मैं समझी की वह मजाक कर रही है पर रात में जब वह आई तो मुझसे कहने लगी भाभी एक बात बताओ तुम्हे किस तरह का लण्ड पसंद है मैं उसी तरह का लण्ड पेल कर तेरी बुर चोदूँगी। मैंने भी मुस्कराकर कह दिया मोटा और सख्त लण्ड ? बस वह रात में ११ बजे आ गयी और बोली भाभी तेरा लण्ड आ गया है। मैंने कहा यार तू क्या सच कह रही है। वह बोली हां बिलकुल सच। मैंने कहा अरे मेरा मियां आने वाला होगा ? वह बोली अरे भाभी वह नहीं आएगा मैं जानती हूँ। वो तो अभी अपनी भाभी की बुर ले रहा है। उसके बाद वह अपनी फूफी की बेटी की बुर लेगा। फिर वह अपनी दोस्त की बीवी चोदेगा। उसका लण्ड तो रात भर के लिए बुक है। तुम उसके इंतज़ार में अपना समय क्यों बर्बाद करोगी। तेरा मियां उधर मजे से चोद रहा है, तुम इधर मजे से चुदवाओ।
इकरा ने फिर उस लड़के को अंदर बुला लिया। लड़का देखने में तो हैंडसम था लम्बा था लेकिन इकहरे बदन का था। मैं सोंचने लगी की क्या इसका लण्ड इतना मोटा होगा जितना मैं चाहती हूँ। ये है इकबाल मेरे मियां का दोस्त। मैंने इसका लण्ड आज़मा कर देखा है भाभी। मैं पहले तुम्हे दिखाती हूँ इसका लण्ड और फिर खोलती हूँ तेरी बुर। वह इकबाल के कपड़े उतारने लगी। बस पल भर में वह मेरे सामने बिलकुल नंगा हो गया। इकरा लण्ड पकड़ कर प्यार से हिलाया तो वह साला फनफनाकर खड़ा हो गया। लण्ड देख कर मेरे मुंह से निकला हाय दईया इतना मोटा लण्ड ? इकहरे बदन वाले आदमी का लण्ड इतना मोटा होगा यह तो मैंने सोंचा ही नहीं। वह बोली अरे भाभी आदमी के शरीर से उसके लण्ड के साइज का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। मैंने ५' के आदमी का ९" का लण्ड देखा है। मैंने कहा वाओ, तू सच कह रही है की मुझे चूतिया बना रही है। वह बोली अरे भाभी किसी दिन मैं उसका भी लण्ड तेरे हाथ में रख दूँगी। तब तुम्हे मेरी बात पर यकीन हो जायेगा।
इकरा ने फिर मुझे नंगी कर दिया और लण्ड मुझे पकड़ा कर मेरी चूत चाटने लगी। नंगी वह भी थी और किसी से चुदवा कर आई थी। मैं तो मस्ती से इकबाल का लण्ड चूसने लगी। इतना मोटा लण्ड मैं पहली बार देख रही थी। , इकरा बोली भाभी आज जितने लण्ड यहाँ मौजूद है उनमे सबसे मोटा लण्ड इसी का है। वैसे मेरे ससुर का लण्ड इससे भी मोटा है। मैंने कहा बपपरे तू अपने ससुर का लण्ड पकड़ती है। वह बोली अरे भाभी पकड़ती ही नहीं हूँ उसे अपनी चूत में भी लेती हूँ। वह भी बड़ी मस्ती से मेरी बुर लेता है। भाभी तुम भी अपने ससुर का लण्ड पकड़ोगी तो मस्त हो जाओगी। इकरा ने ऐसा कह कर मेरे अंदर ससुर का लण्ड पकड़ने की इच्छा जगा दी। मैं उसी समय से अपने ससुर का लण्ड पकड़ने की सोंचने लगी। इधर इकबाल का लण्ड जब मेरी चूत में घुसा तो मज़ा आ गया। मेरे अंदर की रंडी जाग गयी। मैं बड़ी बेशर्मी से अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगी। जैसे ब्लू फिल्मों ने हीरोइन चुदवाती हैं।
मेरी नन्द इसी तरह रात भर मेरी बुर चुदवाती रही। मैं अपनी नन्द से बहुत खुश थी और दुआ करने लगी की ऐ खुदा अगर किसी को नन्द दे तो फिर वह मेरी नन्द इकरा की ही तरह हो ? चुदवाने के बाद मैंने उसे गले लगाया और बोली यार इकरा तू तो बहन चोद बहुत अच्छी है। मैंने जान बूझ कर गाली दी। तो वह भी बोली हाय अल्ला, तुम भी तो भोसड़ी की बड़ी मस्ती हो भाभी ? बस उस दिन से हम दोनों गालियों से ही बातें करने लगीं। अब मेरी इच्छा घर के सभी मर्दों के लण्ड पकड़ने की होने लगी। मेरी निगाह अपने छोटे देवर के लण्ड पर टिक गयी। एक दिन वह तौलिया लपेट कर बाथ रूम जा रहा था। मैं अपने कमरे में बैठी थी। मैंने उसे इशारे से बुलाया और जब वह मेरे सामने आया तो मैंने उसकी तौलियां खींच ली। वह नंगा हो गया और अपना लण्ड छुपाने लगा। मैंने कहा साले तुम मेरे देवर हो और लण्ड मुझसे ही छुपा रहे हो ? मैंने तेरा लण्ड पकड़ने के लिए ही तुझे नंगा किया है। मैंने दरवाजा बंद किया और लण्ड पर टूट पड़ी। लण्ड साला बड़ा मोटा तगड़ा निकला और फिर मुझे चुदवाने में बड़ा मज़ा आया।
दो दिन बाद उसका बड़ा भाई असीम मेरे सामने आ गया। मैंने उसे बुलाया और सीधे छत पर चली गयी। छत का दरवाजा बंद किया और उससे कहा देवर जी अपना लण्ड मुझे दिखाओ। मैंने अपनी चूचियाँ खोल दिन। वह चुंचियां देख कर मना नहीं कर सका। मैंने उसका पैजामा खोला और लौड़ा पकड़ कर बाहर निकाला। उसे पूरा नंगा कर दिया। मैंने भी अपना सलवार खोला और नंगी हो गयी। उसका लण्ड मुंह में भर लिया और चूसने लगी। लण्ड एकदम से टन टना कर खड़ा हो गया। छोटे देवर से इसका लण्ड मोटा जरूर था लेकिन लम्बाई में छोटा था। मैं आम की गुठली की तरह उसका सुपाड़ा चूसने लगी। फिर मैं पलंग पर लेट गयी और उससे अपनी बुर चटवाई। मैनें पूंछा क्या तुमने किसी और की बुर चाटी है। वह बोला हां भाभी मैं बड़ी भाभी की बुर चाटता भी हूँ और चोदता भी हूँ। खाला जान की बुर चोदता हूँ और फूफी की भी बुर। खाला की बेटी की भी बुर चोदने लगा हूँ भाभी। वह भी बड़ी मस्ती से पीती है मेरा लण्ड ? फिर मैंने उससे खूब भकाभक चुदवाया तब मुझे शुकून मिला। मैं हरामजादी दिन पर दिन बड़ी चुदक्कड़ होती जा रही थी।
अब मेरी इच्छा अपने ससुर का लण्ड पकड़ने की हो गयी। मैं रोज़ सुबह शाम उसके लण्ड के तलाश में रहने लगी। मैं घात लगाए हुए बैठी थी मैं जैसे बिल्ली चूहे पर घात लगाती है। एक दिन वह मुझे घर में अकेला मिल गया। रात में भी हम दोनों के अलावा कोई नहीं था। मैंने पहले अपनी झाँटे बना लीं और चूत एकदम चिकनी कर ली। ससुर जी को प्यार से खाना खिलाया। खान खिलाते समय मैंने अपनी चूचियाँ खोल रहीं थी। बार मैं उसे चूचियाँ दिखाती जा रही थी। नीच पेटीकोट पहना था तो अपनी जांघें भी खोल देती थी। मैं ससुर की नज़रों पर नज़र रखे थी। मैं जान गयी की वह मुझे नंगी देखने में रूचि ले रहा है। उसने एक छोटी सी लुंगी पहनी थी। उसके अंदर से कुछ उभार मुझे दिखाई पड़ा। मैं जान गयी की उसका लण्ड खड़ा हो रहा है। वह बार बार लुंगी समेट रहा था। मैंने एक बार कहा ससुर जी रहने दो लुंगी को घर में कोई और तो नहीं बहन चोद। खुल भी जाएगी तो क्या हुआ ?
उसको मेरे मुंह से गाली अच्छी लगी। वह भी बोला कहो तो बहू खोल के रख दूँ लुंगी । मैंने कहा ससुर जी लुंगी तुम मुझे दे दो मैं तुम्हे पैजामा देती हूँ। ऐसा कह कर मैंने लुंगी खींच ली। वह नंगा हो गया और मैंने उसका लण्ड देख लिया। मैं पैजामा जानबूझ कर थोड़ी देर में आई। तब तक मैंने उसका लण्ड खूब मजे से देखा। मजे की बात यह थी की वह भी साला लण्ड मुझे दिखाने लगा। वह दोनों हाथ ऊपर करके खड़ा हो गया और बोला बहू पैजामा पहना दो मुझे। पैजामा पहनाते समय मैंने उसके लण्ड पर कई बार हाथ मारा। लण्ड साला अकड़ कर खड़ा हो गया। मैंने कहा ससुर जी लण्ड तो खड़ा हो गया है। वह बोला बहू इसे पकड़ कर अंदर घुसेड़ दो। मैंने लण्ड पकड़ लिया। वह मुस्कराने लगा।
रात में जब मैं अपने बिस्तर पर गयी तो एकदम नंगी लेट गयी। मेरी चूचियाँ खुलीं थी मेरी गांड खुली थी। हां चूतअंदर थीं क्योंकि मैं टांग पर टांग रखे हुए लेटी थी। थोड़ी देर में मैंने आँख खोली तो देखा वह तो मेरा सामने बिलकुल नंगा खड़ा है। वह बोला अज़रा बहू जब तूने मेरा लण्ड देख ही लिया है तो फिर पकड़ कर ठीक से देख लो न। अब तो न मुझे नींद आ रही है और न मेरे लण्ड को। फिर क्या मैंने गचगचा कर पकड़ लिया लण्ड और उसे प्यार से हिलाने लगी। लण्ड बढ़ने लगा। साला लगभग ९" का हो गया लण्ड ? मैंने भी अपनी चूत दिखा दी। वह भी भनभना उठा। मेरा रंडीपना जाग उठा. मैंने कहा ससुर जी भोसड़ी के पहले तुम मेरी चूत चाटो फिर मैं तेरा लण्ड चाटूँगी ? सच बताऊँ दोस्तों , मैंने रात में तीन बार चुदवाया। सवेरे उठ कर फिर मस्ती से पिया उसका लण्ड। तब मुझे चैन आया।
मैं जब अपने माईकेआई तो अम्मी को सारा किस्सा बताया। वह बहुत खुश हुई की मेरी बेटी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही है। मैंने भी मन मे ठान लिया की बाकी जो लण्ड है अभी मेरी ससुराल में मैं अबकी जाकर सब के सब पकडूंगी, हिलाऊँगी, चूसूँगी और चुदवाऊँगी ?
एक दिन मैं जब घर आई तो देखा की अम्मी के बगल मेरा ससुर बैठा है। मैंने आदाब कहा उसने भी जबाब दिया। मैं यह देख कर हैरान थी की अम्मी अपना हाथ उसके पैजामे के अंदर घुसेड़ कर उसका लण्ड सहला रहीं हैं। मेरे आने के बाद भी उसने अपना हाथ नहीं हटाया बल्कि और जोर जोर से हिलाने लगीं।
मुझसे रहा न गया तो मैंने पूंछ ही लिया अम्मी ये तुम क्या कर रही हो ?
वह बड़ी बेबाकी से बोली बेटी मैं तेरे ससुर का लण्ड हिला रही हूँ। इतनी जल्दी एक ही दिन में तुम मेरे ससुर का लण्ड हिलाने लगीं अम्मी। मैं कुछ समझी नहीं ?
उसने लण्ड पैजाम के बाहर निकाल कर मुझे दिखाते हुए कहा अरे बेटी इसके लण्ड से मेरी पुरानी दोस्ती है ? इस लण्ड ने मुझे अपने बस में कर रखा है।
लेकिन यह बात आपने मुझे कभी बताई नहीं, अम्मी ?
मैं तुम्हे सरप्राईज़ देना चाहती थी और आज दे भी दिया ?
अब पहेलियां न बुझाओ अम्मी। ठीक से बताओ यह सब कैसे हुआ ?
अम्मी ने लण्ड की कई बार चुम्मी ली और बोली मैं तेरे ससुर का लण्ड पीती हूँ बेटी। मैं तेरी शादी के पहले से ही इसका लण्ड पीती आ रही हूँ। दरअसल तेरा ससुर भोसड़ी का मेरा रिस्ते में नंदोई लगता है ? और मैं इसका लण्ड इसकी शादी से पी रही हूँ। जब जब यह मेरे सामने आता है तब तब इसका लण्ड पहले मेरे मुंह में घुसता है और फिर मेरी चूत में ?
वाओ, मेरी हरामजादी अम्मी, YOU ARE GREAT..
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