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अब मैं अपनी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही हूँ - Main har roz chudwati hun mujhe majaa aata hai
अब मैं अपनी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही हूँ - Main har roz chudwati hun mujhe majaa aata hai.
एक दिन मैं ज़रीना आंटी के घर पहुँच गयी। ज़रीना आंटी वह आंटी है जिनसे मैं ट्रेन में मिली थी। मुझे बात चीत में बहुत अच्छी लगीं ज़रीना आंटी। मैं उनसे बहुत प्रभावित हो गयी। हमारा सफ़र बहुत अच्छी तरह के कटा। खूब घुल मिल कर बातें हुई और खूब खुल कर भी। ट्रेन में ए /सी फर्स्ट क्लास का डिब्बा था। उसमे केवल दो बर्थ थीं और हमने दोनों बर्थ पर कब्ज़ा कर लिया था। अंदर से दरवाजा बंद किया और खूब जम कर खुल्लम खुल्ला बातें की। बातों के साथ साथ हंसी मजाक भी होने लगी। चुटकुले भी होने लगे। नॉन वेज बातें भी शुरू हो गयी और लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा सब होने लगा। अपनी अपनी चुदाई की बातें भी होने लगीं। प्यार मोहब्बत से गाली गलौज भी होने लगा। माँ का भोसड़ा, बहन चोद, मादर चोद, गांडू, माँ की चूत, बहन का लण्ड, बिटिया की बुर सब कुछ होने लगा। इतना मज़ा आया की मैं उसे बयान नहीं कर सकती ? आज मेरा मन आया की चलो आंटी के साथ कुछ समय बिताया जाए। इसलिए मैं चली गयी।
आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हो गईं। बोली शहनाज़ मैं तुम्हे खूब याद करती हूँ। तेरी जैसी मद मस्त जवां खूबसूरत लड़की किसी का भी मन मोह सकती है। मैं अगर लड़का होती तो उस दिन ट्रेन में तेरी बुर खूब चोदती। तेरे मुंह में सबसे पहले लौड़ा पेल देती। मैं जानती हूँ की खूबसूरत लड़कियां सबके लण्ड पीती हैं और खूबसूरत लड़कियां बहुत बदचलन और हरामजादी होती हैं। शादी के बाद अपने मियां को धोखा देकर पराये मर्दों से चुदवाया करती हैं। जहाँ जातीं हैं वहां किसी न किसी का लण्ड पकड़ लेती हैं। ऐसी लड़कियों और ऐसी बीवियों पर भरोषा नहीं किया जा सकता शहनाज़ ? वो भोसड़ी की किसी एक मरद की होकर रह ही नहीं सकती। एक बात और है की इन खूबसूरत लड़कियों को लण्ड आसानी से मिल जातें हैं। मरद साले ऐसी लड़कियों को अपना लण्ड पकड़ाने के लिए व्याकुल रहतें हैं। ये लड़कियां ज़रा सा लिफ्ट देती हैं और गप्प से लण्ड पर अटैक कर देती हैं। भीड़ में तो ये लड़कियां किसी का भी लण्ड दबा कर संकेत दे देतीं है की मैं तेरा लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। बाद में उसके साथ कहीं जाकर लण्ड पकड़ती हैं, लण्ड पीती हैं और जम कर चुदवाती हैं।
मैं भी उन्ही औरतों में से हूँ और अब तक जाने कितने लण्ड पकड़ चुकी हूँ। जाने कितने मर्दों से चुदवा चुकी हूँ। मेरी बेटी भी बुर चोदी इसी तरह रोज़ किसी न किसी का लण्ड पकड़ती है। क्योंकि वह भी तेरी तरह खूबसूरत है। अपनी माँ चुदवाती है मेरी बेटी ? मेरी चूत में लण्ड पेलती है मेरी बेटी। तब मैं भी मस्ती में आ जाती हूँ और मैं भी उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ देती हूँ। इस तरह मेरे घर में हर समय चोदा चोदी होती रहती है। मैं अपनी बेटी चुदवाती हूँ और मेरी बेटी अपनी माँ चुदवाती हैं।
चलो यार मैंने तो बहुत कुछ बता दिया तुझे शहनाज़ अब तू अपनी बता ? क्योंकि तू भी माशा अल्ला, बेहद खूबसूरत है। मैंने कहा हां आंटी आप बिलकुल सही कह रहीं हैं। मुझे लण्ड पकड़ने का और लण्ड पीने का बड़ा शौक है। मैं १७ साल की उम्र से लण्ड पकड़ रही हूँ और १८ साल की उम्र से चुदवा रही हूँ। अभी मैं २१ साल की हूँ। यह बात सही है की जिसको देखो वही मुझे अपना लण्ड पकड़ाना चाहता है। यहाँ घर में रहती हूँ तो मुझे मेरा खालू, मेरा मामू, मेरा जीजू सब भोसड़ी के लण्ड पकड़ाया करते हैं और जब मैं कॉलेज जाती हूँ तो वहां लड़के अपना लण्ड पकड़ाने के लिए मेरे आगे पीछे घूमा करते हैं। इसलिए मैं आजकल हर रोज़ लड़कों के साथ कॉलेज गोल करके सिनेमा देखने जाती हूँ। वहीँ पीछे बैठ कर लड़कों के लण्ड हिलाती रहती हूँ और मौक़ा पाकर लण्ड चूसने चाटने लगती हूँ। २/३ लड़कियां तो मुझे अपने घर ले जाती हैं तब मैं उसके भाई जान का लण्ड, उसके मामू जान का लण्ड पकड़ती हूँ। दो लड़कियों ने तो मुझे अपने अब्बू का लण्ड पकड़ा दिया आंटी। तब मुझे मालूम हुआ की लड़कियां भोसड़ी की अपने अब्बू का भी लण्ड चूसती हैं। अब तो कुछ दिनों से वो दोनों अब्बू मेरी बुर चोदने लगें हैं। उनकी नज़र मेरी माँ के भोसड़ा पर भी हैं।
आंटी बोली :- अच्छा यह बताओ की तू भी अपनी माँ चुदवाती है ?
मैंने कहा :- नहीं आंटी मैं नहीं चुदवाती थी पर अपनी शादी के एक साल पहले से अपनी माँ चुदाने लगी।
आंटी बोली :- ऐसा क्या हो गया की तू शादी के जस्ट पहले अपनी माँ चुदाने लगी।
मैंने कहा :- मेरी अम्मी को शायद यह शक था की मेरी बेटी अभी पूरी तरह जवां नहीं हैं। वह शर्माती बहुत है उसे लज्जा आती है। वह लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा की बातें भी नहीं करती है। किसी को गालियां भी नहीं देती ? जवानी का मज़ा कैसे ले पायेगी ? कहीं कोई कमी तो नहीं उसमे ? अम्मी की चिंता अपनी जगह ठीक थी। तब उसने अपनी छोटी बहन यानी मेरी खाला को इस काम पर लगा दिया । खाला मुझे एक दिन अपने साथ अपनी ससुराल ले गईं। यहाँ मैं बता दूँ की मेरी खाला मुझसे सिर्फ ४ साल ही बड़ी हैं। खाला मुझसे खूब गन्दी गन्दी बातें करने लगीं और गन्दी गन्दी कहानियां भी पढ़ाने लगीं। एक उसकी सहेली आ गयी। वो दोनों बातें करने लगीं और मैं बैठी हुई सुनने लगी।
खाला बोली :- यार सलमा, तूने कभी "चुदाई" की कहानियां पढ़ीं। अगर नहीं पढ़ीं है तो पढ़ ले। ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा और सबसे बड़ी बात तो यह है की तू बड़ी बोल्ड हो जाएगी। अपनी सास की गांड मारने लगेगी तू, नन्द की बुर चोदने लगेगी तू और ससुर का लौड़ा अपनी चूत में घुसेड़ने लगेगी तू। इतनी हॉट कहानियां मैंने कहीं नहीं पढ़ीं यार। मैं तो आज से ही शहनाज़ को पढ़ाने वाली हूँ। वह पढ़ेगी तो फ़ौरन लौड़ा अपनी बुर में पेलने लगेगी बुर चोदी ?
वह बोली हाय अल्ला. इतनी हॉट हैं कहानियां ? मेरी चूत तो अभी से गीली हो गयी। जब कहानियां पढूंगी मैं तो क्या हाल होगा ?
खाला - वही हाल होगा जो मेरा हुआ। मैंने एक दिन कहानी पढ़ी और दूसरे दिन ही अपने ससुर का लण्ड पकड़ लिया और चुदवाने लगी। फिर मैंने अपनी जेठानी को भो पढ़ा दिया तो वह भी ससुर का लण्ड पेलने लगी अपनी चूत में ?
यार वैसे मैं अभी अपने दोनों देवरों से चुदवाती हूँ। दोनों के लण्ड जबरदस्त है और बड़ी मस्ती से चोदते हैं। एक दिन अपने नंदोई से चुदवा लिया और एक दिन उसके दोस्त से ? हां अभी ससुर तक नहीं पहुंची ? अब तूने बता दिया है तो मैं कहानी पढूंगी और फिर चोदूँगी अपने ससुर का लण्ड ?
अरे यार यह बात तो पक्की है की आज कहानी पढ़ ले तो कल तू ससुर का लण्ड पकड़ लेगी।
मैं उठ कर जाने लगी तो खाला बोली तू माँ की लौड़ी कहाँ जा रही है। माँ चुदाने जा रही है तू भोसड़ी वाली। सुन मेरी बात उन कहानियों में सिर्फ सास, बहू, नन्द की चुदाई की नहीं है। उसमे माँ चुदाने की कहानियां है। बिटिया की बुर चुदाने की कहानियां है। भाभी की चूत, आंटी का भोसड़ा, पड़ोसन की बुर चोदने चुदाने की भी कहानियां है। जब तू माँ बेटी की चुदाई की कहानियां पढ़ेगी तो लौड़ा अपनी माँ के भोसड़ा में तुरंत पेल देगी। समझी शहनाज़ ? अब तू बड़ी हो गयी है । तेरी शादी होने वाली है। लण्ड का मज़ा अच्छी तरह लेना सीख ले नहीं तो बाद में पछताएगी।
सलमा - तो क्या इसे भी चुदक्कड़ बन देगी तू साजिया ?
अरे यार इसकी शादी होने वाली है। इसे तो चोदना और चुदाना दोनों अच्छी तरह आना चाहिए। नहीं तो नाक कटा देगी मेरी ससुराल जाकर। लोग क्या कहेंगी की दुल्हन को अभी तक लण्ड चोदना भी नहीं आता ? लण्ड चूसना और माँ चुदवाना भी नहीं आता ? तब मैं क्या जबाब दूँगी ?
हां यार तू सही कह रही है। आजकल लड़कियों को बोल्ड होना चाहिए। न शर्माने की जरुरत और न झिझकने की ? बस लौड़ा हाथ में लो और मस्ती करो बाकी दुनिया की माँ का भोसड़ा ?
उन दोनों की बातों ने मेरे अंदर एक अजब तरह की आग पैदा कर दी। मैं तो लण्ड बहुत पहले से पकड़ रही हूँ। चुदवा रही हूँ, मुठ्ठ मार कर लण्ड पी रही हूँ। हां यह बात न मेरी अम्मी को मालूम है और न खाला को। मैंने किसी को बताया नहीं की मैं बहुत बड़ी हरामजादी हूँ, मादर चोद हूँ और लण्ड की जबरदस्त शौकीन हूँ। एक दिन खाला ने कह शहनाज़ आज तू थोड़ा नॉन वेज नास्ता बना ले और ड्रिंक्स का इंतज़ाम कर ले। मैं भी बाथ रूम से आती हूँ। खाला थोड़ी देर में बाथ रूम से आकर ड्राइंग रूम में बैठ गयी। तब तक डोर बेल बजी। मैं जान गयी की कोई आया है। खाला तो दरवाजा खोल ही देगीं। उसने किया भी ऐसा ? लेकिन उसके बाद सन्नाटा छा गया। मैं थोड़ी देर में ड्रिंक्स का सेट लगाकर लमरे में घुस गयी। तब मैंने देखा की खाला तो बहन चोद दो लड़कों के लण्ड खोले हुए बैठी हैं। सोफा पर वह बीच में हैं। एक लड़का इस तरह और एक लड़का उस तरफ। दोनों एकदम नंगे। खाला की भी चूचियाँ एकदम खुली हुई। एक लड़का एक चूंची चाट रहा है और दूसरा लड़का दूसरी चूंची ? मेरी नज़र दोनों टन टनाते हुए लण्ड पर पड़ी। एक लण्ड मैं तुरंत पहचान गयी।
मैंने सामान टेबल पर रखा और बोली :- भोसड़ी के बसीम तुम यहाँ मेरी खाला की बुर चोदने आये हो ?
खाला बोली :- हाय दईया, शहनाज़ तू बिना इसका चेहरा देखे कैसे पहचान गयी की इसका नाम बसीम है ?
मैंने कहा :- अरे खाला जान। मैं इसकी नस नस पहचानती हूँ। इसके लण्ड का पोर पोर जानती हूँ। इसकी छाती, छाती के बाल, इसकी गांड, इसके चूतड़, इसकी झाँटें, इसके पेलहड़ सब पहचानती हूँ मैं। अगरअँधेरे में भी कोई मुझे इसका लौड़ा पकड़ा दे तो मैं पहचान जाऊंगी।
खाला ने कहा :- इसका मतलब तू इसका लौड़ा पकड़ती है, इससे चुदवाती है, इसका लौड़ा पीती है ?
मैंने कहा :- सिर्फ इसका ही नहीं खाला मैं कम से कम एक दर्जन लड़कों के लण्ड पहचानती हूँ। उनके लण्ड पकड़ कर उनका नाम बता सकती हूँ। मैं पिछले ४ साल से लण्ड पकड़ रही हूँ खाला और ३ साल से बराबर चुदवा रही हूँ। मैंने तो २/३ बार लण्ड गांड में भी लिया है अपनी ? आज जब तुमने मुझे चुदवाने के लिए उकसाया तो मेरे अंदर की रंडी जाग उठी। मैं इसी भोसड़ी वाली रंडी से कम नहीं हूँ।
खाला बोली :- तो अभी तक बताया क्यों नहीं तूने माँ की लौड़ी ? सब कुछ किया तूने पर आजतक अपनी माँ नहीं चुदवाई ? अगर एक बार तू अपनी माँ चुदवा लेती तो मेरी दीदी को तेरी इतनी चिंता न होती ?
मैंने कहा :- अब तो मैं अपनी माँ बाद में चुदवाऊँगी। पहले मैं तेरा भोसड़ा चोदूँगी, खाला।
मैंने सबसे पहले खाला के पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे फेंक कर उसकी चूत नंगी कर दी। उसकी चूत मैंने पहली बार देखा। वह तो वाकई मक्खन मलाई जैसी थी। मैंने चूत पर हाथ फेरा और फिर बसीम का लण्ड उसके हाथ से ले लिया। वह नसीम का लण्ड चूसने लगी। थोड़ी देर में मैंने बसीम का लौड़ा खाला की बुर में घुसेड़ दिया। मैं बसीम के पीछे चूतड़ पर चिपक गयी और खाला की बुर चोदने लगी। लेकिन मेरी नज़र नसीम के लण्ड पर थी क्योंकि वह मेरे लिये नया था। मैं थोड़ी देर तक उसका बुर चोदती रही पर फिर मैंने हाथ बढ़ा कर नसीम का लण्ड ले लिया और उसे चाटने लगी। तब तक मैं भी नंगी हो चुकी थी। मुझे उसका लण्ड अच्छा लगा और मैं मस्ती से उसे चूसने लगी। वह मेरी चूंची और चूत सहलाने लगा। मैंने मौका देखा, अपनी चूत फैलाई और लौड़ा उसमे घुसेड़ लिया। खाला की तरह मैं भी झमाझम चुदवाने लगी बल्कि मैं ज्यादा मस्ती से और ज्यादा रफ़्तार से चुदवा रही थी। मैं बोली हाय मेरे राज़ा लौड़ा पूरा पेल के चोदो। हाय अल्ला, बड़ा प्यारा लौड़ा है तेरा, मैं ऐसे लौंडों से ही चुदवाती हूँ, वाओ हाय दईया बड़ा बढ़िया लग रहा है। लगता है तू बुर चोदने में बड़ा एक्सपर्ट है। तेरा लण्ड घोड़े की तरह चोद रहा है मेरी बुर।
खाला मेरी बातें सुन सुन कर मज़ा भी ले रहीं थी और मन में कह भी रही थी की शहनाज़ तो भोसड़ी की बड़ी चुदक्कड़ निकली ? इतनी छोटी सी उम्र में इतने बड़े बड़े लण्ड धकाधक ले रही है अपनी चूत में ? दीदी इसके लिए बेकार ही परेशान हो रहीं हैं ? ये तो अपनी माँ का भोसड़ा भी इसी तरह चोदेगी। खाला अपनी बुर तो कम चुदवा रहीं थी पर मेरी चुदाई ज्यादा देख रहीं थीं। उसे मेरी चुदाई देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैंने मजाक किया खाला क्या तुझे खालू भी इसी तरह चोदता है ? वह बोली अरी शहनाज़ मैंने तेरे खालू से ज्यादा चुदवाया ही नहीं। उससे ज्यादा तो मैंने तेरे अब्बू से चुदवाया है ? तेरा अब्बू मेरा जीजा है और जीजा के लण्ड पर साली का पहला हक़ होता है ? मैंने कहा अरी मेरी बुर चोदी खाला अपनी बुर मस्ती से चुदवाने वाली का हक़ सबके लण्ड पर होता है। अब मैं किसी दिन तेरे मियां का लण्ड अपनी बुर में पेलूंगी। इसी तरह की बातें कर कर के और लण्ड अदल बदल के हम दोनों ने खूब चुदवाया।
दूसरे दिन खाला मुझे लेकर मेरी अम्मी के पास पहुंची। अम्मी उसे देख कर खुश हुई और पूंछा अरी साजिया कुछ काम बना ? शहनाज़ में कोई कमी तो नहीं है ? वह पूरी तरह औरत हैं न ? खाला हंस कर बोली अरे दीदी वह पूरी औरत है। बड़ी हॉटऔर सेक्सी औरत है। उसने अभी तक सब कुछ छुपा रखा था। हम सबको चूतिया बना रही थी वो। उसकी चूत तो बड़े बड़े लण्ड निगल जाती है दीदी। बहुत बड़ी मादर चोद हो गयी है वो। उसने तो मेरी चूत में लण्ड पेल पेल कर मुझे खूब चोदा। उसे तो अपनी माँ चुदाने में कोई शर्म नहीं है। जाने कितनी लडकियों की माँ के भोसड़ा में लण्ड पेलती है तेरी बेटी, दीदी। अम्मी को यह सुनकर बड़ा शुकून मिला। खाला ने फिर रात में ही एक प्लान बनाया और ३/४ मर्दों को बुला कर खूब चोदा चोदी की। मैंने भी अपनी माँ चुदवाई और खाला की बुर चोदा। अम्मी ने भी मेरी बुर में लण्ड रही है अपनी बुर। और खाला की चूत चुदवाई। खाला ने भी घुसेड़ा लण्ड मेरी चूत में और अपनी बहन की बुर में भी।
उसके एक हफ्ते के बाद मेरा निकाह हो गया और मैं अपनी ससुराल चली गयी। ससुराल में सुहागरात और कुछ इधर उधर में एक हफ्ता गुज़र गया। कुछ मेहमान अभी भी बाकी थे। मेरा मियां दुबई चल गया। उसी रात को मैं अपने कमरे में अकेली थी। अचानक रात में उठी और कमरे के बाहर यूँ ही निकल आई। मुझे नन्द के कमरे में हलकी सी रौशनी दिखाई पड़ी। मैं नजदीक जाकर झाँकने लगी। मैंने जो देखा उसे देख कर दंग भी हुई और खुश भी हुई। मैंने देखा की मेरी जेठानी किसी से अपनी गांड मरा रही हैं। और उसी के बगल में मेरी नन्द अपनी बुर चुदवा रही है। जेठानी भी अपनी गांड बार बार आगे फपीछे करती हुई गांड मरवाने में बिजी हैं। नन्द भी नीचे से अपनी गांड उचका उचका के मस्ती से चुदवा रही है अपनी बुर ? मैं अपनी चूत सहलाते हुए उन दोनों की चुदाई देखने लगी। थोड़ी देर में गांड मारने वाला लड़का नन्द की गांड मारने लगा और नन्द की बुर चोदने वाला जेठानी की बुर चोदने लगा। यानी गांड मारने वाला इसकी नहीं उसकी गांड मार रहा है और बुर चोदने वाला इसकी नहीं उसकी बुर चोद रहा है।
चुदाई के बाद मैं जब वापस जाने लगी तो मुझे बगल के कमरे में भी झाँकने का मन हो गया। वहां मैंने देखा की मेरी सास किसी आदमी का लौड़ा चूस रही है। लौड़ा जब उसके मुंह से बाहर निकला तो उस देख कर मेरी चूत की आग बुरी तरह भड़क उठी। मुझे लगा की मैंने इस आदमी को कहीं देखा है। मैं याद करने लगी. थोड़ी देर में याद आया अरे ये तो मेरी फूफी का देवर है। इसी के लण्ड के बारे में एक दिन फूफी बता रही थीं। आज मालूम हुआ की फूफी सच बता रही थीं। मेरा मन हुआ की मैं अभी कमरे में घुस जाऊं और लण्ड पकड़ लूँ। खैर मैंने सासू को चुदवाते हुए देखा। मैं समझ गयी की यहाँ भी चुदाने का पूरा मौक़ा मिलेगा। लेकिन आज मेरे पास कोई लौड़ा नहीं है। अगर एक कैसा भी लौड़ा होता तो मैं उसे मुंह में लेकर अपनी गर्मी शांत कर लेती। मैं बस ललचा कर रह गयी.
दूसरे दिन मैं जेठानी के साथ बैठी थी। तब तक मेरी नन्द भी आ गयी।
मैंने कहा - हाय जीजी कल तो तुमने अपनी गांड खूब मरवाई। क्या तुमको गांड मराना अच्छा लगता है जेठानी जी।
वह बोली - नहीं यार शहनाज़ जो मेरी गांड मार रहा था वह मेरी नन्द का मियां हैं। मेरा नंदोई है और तेरा भी नंदोई है। वह भोसड़ी का गांडू है। उसे बुर चोदना नहीं आता गांड मारना आता है। इसलिए वह अपनी बीवी की बुर दूसरों से चुदवाता है। कल जो मेरी नन्द की बुर ले रहा था वह नंदोई का दोस्त है।
तब तो नन्द रांनी बड़ी नसीब वाली है। इसका मियां खुद दूसरों के लण्ड अपनी बीवी की बुर में पेलता है।
जेठानी - हां बिलकुल सही, पर हम लोग भी गैर मर्दों से चुदवाती हैं ? यहाँ इसी बात कोई मनाही नहीं है।
नन्द - हां शहनाज़ भाभी, आज रात मेरा मियां तेरी गांड मारेगा और उसका दोस्त तेरी बुर चोदेगा। मैं चुदवाऊँगी अपनी भाभी की बुर ?
मैंने कहा - वह कौन है जो कल रात मेरी सास का भोसड़ा चोद रहा था ?
नन्द - वह मेरी अम्मी का बहनोई है। अम्मी को उसका लौड़ा बहुत पसंद है। वह जब जब आता है तब तब मेरी माँ चोद कर जाता है।
मैंने कहा - तो फिर उससे भी चुदवाओ न मेरी बुर ?
नन्द - हां हां भाभी वह भी चोदेगा तुझे आज रात को ?
मैेने कहा - नन्द रानी, तो फिर तू भी अपनी ससुराल में कई लोगों से चुदवाती होगी ?
नन्द - अरे यार ज़रा सोंचो जिसका मियां साला गांडू हो वो तो सबसे चुदवायेगी ही ? इसका मैं पूरा फायदा उठती हूँ। और एक बात बताऊँ भाभी मेरा ससुर भी मेरी बुर लेता है। मुझे भी उसका लौड़ा बहुत पसंद है। मैं तो उसके दोस्तों के भी लण्ड अपनी चूत में पेलती हूँ। ससुराल की तरफ से मुझे किसी भी मरद से चुदवाने की पूरी आज़ादी मिली हुई है।
मैंने फोन पर अपनी अम्मी को सब कुछ बता दिया तो वह बहुत हश हुई. मैं भी इस बात से खुश थी की मुझे यहाँ भी लण्ड की कमी महसूस नहीं होगी। मैं उसी दिन से अपनी जेठानी और अपनी नन्द की चहेती बन गयी। इसका फायदा यह हुआ की मेरी जेठानी लण्ड पहले मेरी चूत में पेलती है फिर अपनी चूत में ? उधर नन्द कोई भी लौड़ा हो वो सीधे मेरी बुर में घुसेड़ देती है और बाद में अपनी बुर में। धीरे धीरे मेरी सास भी मेरी बुर अपने सामने चुदवाने लगी। मैं भी सास की बुर में लौड़ा घुसाने लगी। अब मैं अपनी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही हूँ।
एक दिन मैं ज़रीना आंटी के घर पहुँच गयी। ज़रीना आंटी वह आंटी है जिनसे मैं ट्रेन में मिली थी। मुझे बात चीत में बहुत अच्छी लगीं ज़रीना आंटी। मैं उनसे बहुत प्रभावित हो गयी। हमारा सफ़र बहुत अच्छी तरह के कटा। खूब घुल मिल कर बातें हुई और खूब खुल कर भी। ट्रेन में ए /सी फर्स्ट क्लास का डिब्बा था। उसमे केवल दो बर्थ थीं और हमने दोनों बर्थ पर कब्ज़ा कर लिया था। अंदर से दरवाजा बंद किया और खूब जम कर खुल्लम खुल्ला बातें की। बातों के साथ साथ हंसी मजाक भी होने लगी। चुटकुले भी होने लगे। नॉन वेज बातें भी शुरू हो गयी और लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा सब होने लगा। अपनी अपनी चुदाई की बातें भी होने लगीं। प्यार मोहब्बत से गाली गलौज भी होने लगा। माँ का भोसड़ा, बहन चोद, मादर चोद, गांडू, माँ की चूत, बहन का लण्ड, बिटिया की बुर सब कुछ होने लगा। इतना मज़ा आया की मैं उसे बयान नहीं कर सकती ? आज मेरा मन आया की चलो आंटी के साथ कुछ समय बिताया जाए। इसलिए मैं चली गयी।
आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हो गईं। बोली शहनाज़ मैं तुम्हे खूब याद करती हूँ। तेरी जैसी मद मस्त जवां खूबसूरत लड़की किसी का भी मन मोह सकती है। मैं अगर लड़का होती तो उस दिन ट्रेन में तेरी बुर खूब चोदती। तेरे मुंह में सबसे पहले लौड़ा पेल देती। मैं जानती हूँ की खूबसूरत लड़कियां सबके लण्ड पीती हैं और खूबसूरत लड़कियां बहुत बदचलन और हरामजादी होती हैं। शादी के बाद अपने मियां को धोखा देकर पराये मर्दों से चुदवाया करती हैं। जहाँ जातीं हैं वहां किसी न किसी का लण्ड पकड़ लेती हैं। ऐसी लड़कियों और ऐसी बीवियों पर भरोषा नहीं किया जा सकता शहनाज़ ? वो भोसड़ी की किसी एक मरद की होकर रह ही नहीं सकती। एक बात और है की इन खूबसूरत लड़कियों को लण्ड आसानी से मिल जातें हैं। मरद साले ऐसी लड़कियों को अपना लण्ड पकड़ाने के लिए व्याकुल रहतें हैं। ये लड़कियां ज़रा सा लिफ्ट देती हैं और गप्प से लण्ड पर अटैक कर देती हैं। भीड़ में तो ये लड़कियां किसी का भी लण्ड दबा कर संकेत दे देतीं है की मैं तेरा लण्ड पकड़ना चाहती हूँ। बाद में उसके साथ कहीं जाकर लण्ड पकड़ती हैं, लण्ड पीती हैं और जम कर चुदवाती हैं।
मैं भी उन्ही औरतों में से हूँ और अब तक जाने कितने लण्ड पकड़ चुकी हूँ। जाने कितने मर्दों से चुदवा चुकी हूँ। मेरी बेटी भी बुर चोदी इसी तरह रोज़ किसी न किसी का लण्ड पकड़ती है। क्योंकि वह भी तेरी तरह खूबसूरत है। अपनी माँ चुदवाती है मेरी बेटी ? मेरी चूत में लण्ड पेलती है मेरी बेटी। तब मैं भी मस्ती में आ जाती हूँ और मैं भी उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ देती हूँ। इस तरह मेरे घर में हर समय चोदा चोदी होती रहती है। मैं अपनी बेटी चुदवाती हूँ और मेरी बेटी अपनी माँ चुदवाती हैं।
चलो यार मैंने तो बहुत कुछ बता दिया तुझे शहनाज़ अब तू अपनी बता ? क्योंकि तू भी माशा अल्ला, बेहद खूबसूरत है। मैंने कहा हां आंटी आप बिलकुल सही कह रहीं हैं। मुझे लण्ड पकड़ने का और लण्ड पीने का बड़ा शौक है। मैं १७ साल की उम्र से लण्ड पकड़ रही हूँ और १८ साल की उम्र से चुदवा रही हूँ। अभी मैं २१ साल की हूँ। यह बात सही है की जिसको देखो वही मुझे अपना लण्ड पकड़ाना चाहता है। यहाँ घर में रहती हूँ तो मुझे मेरा खालू, मेरा मामू, मेरा जीजू सब भोसड़ी के लण्ड पकड़ाया करते हैं और जब मैं कॉलेज जाती हूँ तो वहां लड़के अपना लण्ड पकड़ाने के लिए मेरे आगे पीछे घूमा करते हैं। इसलिए मैं आजकल हर रोज़ लड़कों के साथ कॉलेज गोल करके सिनेमा देखने जाती हूँ। वहीँ पीछे बैठ कर लड़कों के लण्ड हिलाती रहती हूँ और मौक़ा पाकर लण्ड चूसने चाटने लगती हूँ। २/३ लड़कियां तो मुझे अपने घर ले जाती हैं तब मैं उसके भाई जान का लण्ड, उसके मामू जान का लण्ड पकड़ती हूँ। दो लड़कियों ने तो मुझे अपने अब्बू का लण्ड पकड़ा दिया आंटी। तब मुझे मालूम हुआ की लड़कियां भोसड़ी की अपने अब्बू का भी लण्ड चूसती हैं। अब तो कुछ दिनों से वो दोनों अब्बू मेरी बुर चोदने लगें हैं। उनकी नज़र मेरी माँ के भोसड़ा पर भी हैं।
आंटी बोली :- अच्छा यह बताओ की तू भी अपनी माँ चुदवाती है ?
मैंने कहा :- नहीं आंटी मैं नहीं चुदवाती थी पर अपनी शादी के एक साल पहले से अपनी माँ चुदाने लगी।
आंटी बोली :- ऐसा क्या हो गया की तू शादी के जस्ट पहले अपनी माँ चुदाने लगी।
मैंने कहा :- मेरी अम्मी को शायद यह शक था की मेरी बेटी अभी पूरी तरह जवां नहीं हैं। वह शर्माती बहुत है उसे लज्जा आती है। वह लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा की बातें भी नहीं करती है। किसी को गालियां भी नहीं देती ? जवानी का मज़ा कैसे ले पायेगी ? कहीं कोई कमी तो नहीं उसमे ? अम्मी की चिंता अपनी जगह ठीक थी। तब उसने अपनी छोटी बहन यानी मेरी खाला को इस काम पर लगा दिया । खाला मुझे एक दिन अपने साथ अपनी ससुराल ले गईं। यहाँ मैं बता दूँ की मेरी खाला मुझसे सिर्फ ४ साल ही बड़ी हैं। खाला मुझसे खूब गन्दी गन्दी बातें करने लगीं और गन्दी गन्दी कहानियां भी पढ़ाने लगीं। एक उसकी सहेली आ गयी। वो दोनों बातें करने लगीं और मैं बैठी हुई सुनने लगी।
खाला बोली :- यार सलमा, तूने कभी "चुदाई" की कहानियां पढ़ीं। अगर नहीं पढ़ीं है तो पढ़ ले। ज़िन्दगी का मज़ा आ जायेगा और सबसे बड़ी बात तो यह है की तू बड़ी बोल्ड हो जाएगी। अपनी सास की गांड मारने लगेगी तू, नन्द की बुर चोदने लगेगी तू और ससुर का लौड़ा अपनी चूत में घुसेड़ने लगेगी तू। इतनी हॉट कहानियां मैंने कहीं नहीं पढ़ीं यार। मैं तो आज से ही शहनाज़ को पढ़ाने वाली हूँ। वह पढ़ेगी तो फ़ौरन लौड़ा अपनी बुर में पेलने लगेगी बुर चोदी ?
वह बोली हाय अल्ला. इतनी हॉट हैं कहानियां ? मेरी चूत तो अभी से गीली हो गयी। जब कहानियां पढूंगी मैं तो क्या हाल होगा ?
खाला - वही हाल होगा जो मेरा हुआ। मैंने एक दिन कहानी पढ़ी और दूसरे दिन ही अपने ससुर का लण्ड पकड़ लिया और चुदवाने लगी। फिर मैंने अपनी जेठानी को भो पढ़ा दिया तो वह भी ससुर का लण्ड पेलने लगी अपनी चूत में ?
यार वैसे मैं अभी अपने दोनों देवरों से चुदवाती हूँ। दोनों के लण्ड जबरदस्त है और बड़ी मस्ती से चोदते हैं। एक दिन अपने नंदोई से चुदवा लिया और एक दिन उसके दोस्त से ? हां अभी ससुर तक नहीं पहुंची ? अब तूने बता दिया है तो मैं कहानी पढूंगी और फिर चोदूँगी अपने ससुर का लण्ड ?
अरे यार यह बात तो पक्की है की आज कहानी पढ़ ले तो कल तू ससुर का लण्ड पकड़ लेगी।
मैं उठ कर जाने लगी तो खाला बोली तू माँ की लौड़ी कहाँ जा रही है। माँ चुदाने जा रही है तू भोसड़ी वाली। सुन मेरी बात उन कहानियों में सिर्फ सास, बहू, नन्द की चुदाई की नहीं है। उसमे माँ चुदाने की कहानियां है। बिटिया की बुर चुदाने की कहानियां है। भाभी की चूत, आंटी का भोसड़ा, पड़ोसन की बुर चोदने चुदाने की भी कहानियां है। जब तू माँ बेटी की चुदाई की कहानियां पढ़ेगी तो लौड़ा अपनी माँ के भोसड़ा में तुरंत पेल देगी। समझी शहनाज़ ? अब तू बड़ी हो गयी है । तेरी शादी होने वाली है। लण्ड का मज़ा अच्छी तरह लेना सीख ले नहीं तो बाद में पछताएगी।
सलमा - तो क्या इसे भी चुदक्कड़ बन देगी तू साजिया ?
अरे यार इसकी शादी होने वाली है। इसे तो चोदना और चुदाना दोनों अच्छी तरह आना चाहिए। नहीं तो नाक कटा देगी मेरी ससुराल जाकर। लोग क्या कहेंगी की दुल्हन को अभी तक लण्ड चोदना भी नहीं आता ? लण्ड चूसना और माँ चुदवाना भी नहीं आता ? तब मैं क्या जबाब दूँगी ?
हां यार तू सही कह रही है। आजकल लड़कियों को बोल्ड होना चाहिए। न शर्माने की जरुरत और न झिझकने की ? बस लौड़ा हाथ में लो और मस्ती करो बाकी दुनिया की माँ का भोसड़ा ?
उन दोनों की बातों ने मेरे अंदर एक अजब तरह की आग पैदा कर दी। मैं तो लण्ड बहुत पहले से पकड़ रही हूँ। चुदवा रही हूँ, मुठ्ठ मार कर लण्ड पी रही हूँ। हां यह बात न मेरी अम्मी को मालूम है और न खाला को। मैंने किसी को बताया नहीं की मैं बहुत बड़ी हरामजादी हूँ, मादर चोद हूँ और लण्ड की जबरदस्त शौकीन हूँ। एक दिन खाला ने कह शहनाज़ आज तू थोड़ा नॉन वेज नास्ता बना ले और ड्रिंक्स का इंतज़ाम कर ले। मैं भी बाथ रूम से आती हूँ। खाला थोड़ी देर में बाथ रूम से आकर ड्राइंग रूम में बैठ गयी। तब तक डोर बेल बजी। मैं जान गयी की कोई आया है। खाला तो दरवाजा खोल ही देगीं। उसने किया भी ऐसा ? लेकिन उसके बाद सन्नाटा छा गया। मैं थोड़ी देर में ड्रिंक्स का सेट लगाकर लमरे में घुस गयी। तब मैंने देखा की खाला तो बहन चोद दो लड़कों के लण्ड खोले हुए बैठी हैं। सोफा पर वह बीच में हैं। एक लड़का इस तरह और एक लड़का उस तरफ। दोनों एकदम नंगे। खाला की भी चूचियाँ एकदम खुली हुई। एक लड़का एक चूंची चाट रहा है और दूसरा लड़का दूसरी चूंची ? मेरी नज़र दोनों टन टनाते हुए लण्ड पर पड़ी। एक लण्ड मैं तुरंत पहचान गयी।
मैंने सामान टेबल पर रखा और बोली :- भोसड़ी के बसीम तुम यहाँ मेरी खाला की बुर चोदने आये हो ?
खाला बोली :- हाय दईया, शहनाज़ तू बिना इसका चेहरा देखे कैसे पहचान गयी की इसका नाम बसीम है ?
मैंने कहा :- अरे खाला जान। मैं इसकी नस नस पहचानती हूँ। इसके लण्ड का पोर पोर जानती हूँ। इसकी छाती, छाती के बाल, इसकी गांड, इसके चूतड़, इसकी झाँटें, इसके पेलहड़ सब पहचानती हूँ मैं। अगरअँधेरे में भी कोई मुझे इसका लौड़ा पकड़ा दे तो मैं पहचान जाऊंगी।
खाला ने कहा :- इसका मतलब तू इसका लौड़ा पकड़ती है, इससे चुदवाती है, इसका लौड़ा पीती है ?
मैंने कहा :- सिर्फ इसका ही नहीं खाला मैं कम से कम एक दर्जन लड़कों के लण्ड पहचानती हूँ। उनके लण्ड पकड़ कर उनका नाम बता सकती हूँ। मैं पिछले ४ साल से लण्ड पकड़ रही हूँ खाला और ३ साल से बराबर चुदवा रही हूँ। मैंने तो २/३ बार लण्ड गांड में भी लिया है अपनी ? आज जब तुमने मुझे चुदवाने के लिए उकसाया तो मेरे अंदर की रंडी जाग उठी। मैं इसी भोसड़ी वाली रंडी से कम नहीं हूँ।
खाला बोली :- तो अभी तक बताया क्यों नहीं तूने माँ की लौड़ी ? सब कुछ किया तूने पर आजतक अपनी माँ नहीं चुदवाई ? अगर एक बार तू अपनी माँ चुदवा लेती तो मेरी दीदी को तेरी इतनी चिंता न होती ?
मैंने कहा :- अब तो मैं अपनी माँ बाद में चुदवाऊँगी। पहले मैं तेरा भोसड़ा चोदूँगी, खाला।
मैंने सबसे पहले खाला के पेटीकोट का नाड़ा खोला और उसे नीचे फेंक कर उसकी चूत नंगी कर दी। उसकी चूत मैंने पहली बार देखा। वह तो वाकई मक्खन मलाई जैसी थी। मैंने चूत पर हाथ फेरा और फिर बसीम का लण्ड उसके हाथ से ले लिया। वह नसीम का लण्ड चूसने लगी। थोड़ी देर में मैंने बसीम का लौड़ा खाला की बुर में घुसेड़ दिया। मैं बसीम के पीछे चूतड़ पर चिपक गयी और खाला की बुर चोदने लगी। लेकिन मेरी नज़र नसीम के लण्ड पर थी क्योंकि वह मेरे लिये नया था। मैं थोड़ी देर तक उसका बुर चोदती रही पर फिर मैंने हाथ बढ़ा कर नसीम का लण्ड ले लिया और उसे चाटने लगी। तब तक मैं भी नंगी हो चुकी थी। मुझे उसका लण्ड अच्छा लगा और मैं मस्ती से उसे चूसने लगी। वह मेरी चूंची और चूत सहलाने लगा। मैंने मौका देखा, अपनी चूत फैलाई और लौड़ा उसमे घुसेड़ लिया। खाला की तरह मैं भी झमाझम चुदवाने लगी बल्कि मैं ज्यादा मस्ती से और ज्यादा रफ़्तार से चुदवा रही थी। मैं बोली हाय मेरे राज़ा लौड़ा पूरा पेल के चोदो। हाय अल्ला, बड़ा प्यारा लौड़ा है तेरा, मैं ऐसे लौंडों से ही चुदवाती हूँ, वाओ हाय दईया बड़ा बढ़िया लग रहा है। लगता है तू बुर चोदने में बड़ा एक्सपर्ट है। तेरा लण्ड घोड़े की तरह चोद रहा है मेरी बुर।
खाला मेरी बातें सुन सुन कर मज़ा भी ले रहीं थी और मन में कह भी रही थी की शहनाज़ तो भोसड़ी की बड़ी चुदक्कड़ निकली ? इतनी छोटी सी उम्र में इतने बड़े बड़े लण्ड धकाधक ले रही है अपनी चूत में ? दीदी इसके लिए बेकार ही परेशान हो रहीं हैं ? ये तो अपनी माँ का भोसड़ा भी इसी तरह चोदेगी। खाला अपनी बुर तो कम चुदवा रहीं थी पर मेरी चुदाई ज्यादा देख रहीं थीं। उसे मेरी चुदाई देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैंने मजाक किया खाला क्या तुझे खालू भी इसी तरह चोदता है ? वह बोली अरी शहनाज़ मैंने तेरे खालू से ज्यादा चुदवाया ही नहीं। उससे ज्यादा तो मैंने तेरे अब्बू से चुदवाया है ? तेरा अब्बू मेरा जीजा है और जीजा के लण्ड पर साली का पहला हक़ होता है ? मैंने कहा अरी मेरी बुर चोदी खाला अपनी बुर मस्ती से चुदवाने वाली का हक़ सबके लण्ड पर होता है। अब मैं किसी दिन तेरे मियां का लण्ड अपनी बुर में पेलूंगी। इसी तरह की बातें कर कर के और लण्ड अदल बदल के हम दोनों ने खूब चुदवाया।
दूसरे दिन खाला मुझे लेकर मेरी अम्मी के पास पहुंची। अम्मी उसे देख कर खुश हुई और पूंछा अरी साजिया कुछ काम बना ? शहनाज़ में कोई कमी तो नहीं है ? वह पूरी तरह औरत हैं न ? खाला हंस कर बोली अरे दीदी वह पूरी औरत है। बड़ी हॉटऔर सेक्सी औरत है। उसने अभी तक सब कुछ छुपा रखा था। हम सबको चूतिया बना रही थी वो। उसकी चूत तो बड़े बड़े लण्ड निगल जाती है दीदी। बहुत बड़ी मादर चोद हो गयी है वो। उसने तो मेरी चूत में लण्ड पेल पेल कर मुझे खूब चोदा। उसे तो अपनी माँ चुदाने में कोई शर्म नहीं है। जाने कितनी लडकियों की माँ के भोसड़ा में लण्ड पेलती है तेरी बेटी, दीदी। अम्मी को यह सुनकर बड़ा शुकून मिला। खाला ने फिर रात में ही एक प्लान बनाया और ३/४ मर्दों को बुला कर खूब चोदा चोदी की। मैंने भी अपनी माँ चुदवाई और खाला की बुर चोदा। अम्मी ने भी मेरी बुर में लण्ड रही है अपनी बुर। और खाला की चूत चुदवाई। खाला ने भी घुसेड़ा लण्ड मेरी चूत में और अपनी बहन की बुर में भी।
उसके एक हफ्ते के बाद मेरा निकाह हो गया और मैं अपनी ससुराल चली गयी। ससुराल में सुहागरात और कुछ इधर उधर में एक हफ्ता गुज़र गया। कुछ मेहमान अभी भी बाकी थे। मेरा मियां दुबई चल गया। उसी रात को मैं अपने कमरे में अकेली थी। अचानक रात में उठी और कमरे के बाहर यूँ ही निकल आई। मुझे नन्द के कमरे में हलकी सी रौशनी दिखाई पड़ी। मैं नजदीक जाकर झाँकने लगी। मैंने जो देखा उसे देख कर दंग भी हुई और खुश भी हुई। मैंने देखा की मेरी जेठानी किसी से अपनी गांड मरा रही हैं। और उसी के बगल में मेरी नन्द अपनी बुर चुदवा रही है। जेठानी भी अपनी गांड बार बार आगे फपीछे करती हुई गांड मरवाने में बिजी हैं। नन्द भी नीचे से अपनी गांड उचका उचका के मस्ती से चुदवा रही है अपनी बुर ? मैं अपनी चूत सहलाते हुए उन दोनों की चुदाई देखने लगी। थोड़ी देर में गांड मारने वाला लड़का नन्द की गांड मारने लगा और नन्द की बुर चोदने वाला जेठानी की बुर चोदने लगा। यानी गांड मारने वाला इसकी नहीं उसकी गांड मार रहा है और बुर चोदने वाला इसकी नहीं उसकी बुर चोद रहा है।
चुदाई के बाद मैं जब वापस जाने लगी तो मुझे बगल के कमरे में भी झाँकने का मन हो गया। वहां मैंने देखा की मेरी सास किसी आदमी का लौड़ा चूस रही है। लौड़ा जब उसके मुंह से बाहर निकला तो उस देख कर मेरी चूत की आग बुरी तरह भड़क उठी। मुझे लगा की मैंने इस आदमी को कहीं देखा है। मैं याद करने लगी. थोड़ी देर में याद आया अरे ये तो मेरी फूफी का देवर है। इसी के लण्ड के बारे में एक दिन फूफी बता रही थीं। आज मालूम हुआ की फूफी सच बता रही थीं। मेरा मन हुआ की मैं अभी कमरे में घुस जाऊं और लण्ड पकड़ लूँ। खैर मैंने सासू को चुदवाते हुए देखा। मैं समझ गयी की यहाँ भी चुदाने का पूरा मौक़ा मिलेगा। लेकिन आज मेरे पास कोई लौड़ा नहीं है। अगर एक कैसा भी लौड़ा होता तो मैं उसे मुंह में लेकर अपनी गर्मी शांत कर लेती। मैं बस ललचा कर रह गयी.
दूसरे दिन मैं जेठानी के साथ बैठी थी। तब तक मेरी नन्द भी आ गयी।
मैंने कहा - हाय जीजी कल तो तुमने अपनी गांड खूब मरवाई। क्या तुमको गांड मराना अच्छा लगता है जेठानी जी।
वह बोली - नहीं यार शहनाज़ जो मेरी गांड मार रहा था वह मेरी नन्द का मियां हैं। मेरा नंदोई है और तेरा भी नंदोई है। वह भोसड़ी का गांडू है। उसे बुर चोदना नहीं आता गांड मारना आता है। इसलिए वह अपनी बीवी की बुर दूसरों से चुदवाता है। कल जो मेरी नन्द की बुर ले रहा था वह नंदोई का दोस्त है।
तब तो नन्द रांनी बड़ी नसीब वाली है। इसका मियां खुद दूसरों के लण्ड अपनी बीवी की बुर में पेलता है।
जेठानी - हां बिलकुल सही, पर हम लोग भी गैर मर्दों से चुदवाती हैं ? यहाँ इसी बात कोई मनाही नहीं है।
नन्द - हां शहनाज़ भाभी, आज रात मेरा मियां तेरी गांड मारेगा और उसका दोस्त तेरी बुर चोदेगा। मैं चुदवाऊँगी अपनी भाभी की बुर ?
मैंने कहा - वह कौन है जो कल रात मेरी सास का भोसड़ा चोद रहा था ?
नन्द - वह मेरी अम्मी का बहनोई है। अम्मी को उसका लौड़ा बहुत पसंद है। वह जब जब आता है तब तब मेरी माँ चोद कर जाता है।
मैंने कहा - तो फिर उससे भी चुदवाओ न मेरी बुर ?
नन्द - हां हां भाभी वह भी चोदेगा तुझे आज रात को ?
मैेने कहा - नन्द रानी, तो फिर तू भी अपनी ससुराल में कई लोगों से चुदवाती होगी ?
नन्द - अरे यार ज़रा सोंचो जिसका मियां साला गांडू हो वो तो सबसे चुदवायेगी ही ? इसका मैं पूरा फायदा उठती हूँ। और एक बात बताऊँ भाभी मेरा ससुर भी मेरी बुर लेता है। मुझे भी उसका लौड़ा बहुत पसंद है। मैं तो उसके दोस्तों के भी लण्ड अपनी चूत में पेलती हूँ। ससुराल की तरफ से मुझे किसी भी मरद से चुदवाने की पूरी आज़ादी मिली हुई है।
मैंने फोन पर अपनी अम्मी को सब कुछ बता दिया तो वह बहुत हश हुई. मैं भी इस बात से खुश थी की मुझे यहाँ भी लण्ड की कमी महसूस नहीं होगी। मैं उसी दिन से अपनी जेठानी और अपनी नन्द की चहेती बन गयी। इसका फायदा यह हुआ की मेरी जेठानी लण्ड पहले मेरी चूत में पेलती है फिर अपनी चूत में ? उधर नन्द कोई भी लौड़ा हो वो सीधे मेरी बुर में घुसेड़ देती है और बाद में अपनी बुर में। धीरे धीरे मेरी सास भी मेरी बुर अपने सामने चुदवाने लगी। मैं भी सास की बुर में लौड़ा घुसाने लगी। अब मैं अपनी जवानी का पूरा मज़ा लूट रही हूँ।
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