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चूत ही चूत, लन्ड ही लन्ड, गांड ही गांड, चूंची ही चूंची - Charo taraf chudai ke aujar mojud hai
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मेरा नाम गुंजन है दोस्तों. मैं एक खूबसूरत, हॉट और बिंदास लड़की हूँ. मैं खूब मस्ती करती हूँ। कॉलेज में मैंने बहुत मस्ती की और लड़कों को खूब चिढाया। मैं गालियां भी खूब देती थी और मुझे लड़कों की गांड मारने में बड़ा मज़ा आता था। सारी लड़कियां मेरे कॉलेज आने का इंतज़ार करती थी। मैं जितनी बातें करने में मशहूर थी उतनी पढ़ने में भी। लेकिन सच यह है की मैंने कभी किसी लड़के का लन्ड नहीं पकड़ा। मैं २२ साल की हो गयी थी लेकिन कभी किसी लन्ड के दर्शन नहीं किया। हां ब्लू फिल्म जरूर देखीं हैं। उन्ही से मुझे मालूम हुआ की लन्ड कैसा होता है ? खड़ा होने पर लन्ड कैसा लगता है और जब ढीला होता है तो लन्ड की शक्ल कैसी होती है ? यह भी मालूम हुआ की लन्ड चूत किस तरह चोदता है और कैसे खलास होता है लन्ड ?
२४ साल में मेरी शादी हो गयी तब मुझे असली लन्ड के दर्शन हुए। मैं अपने पति का लन्ड पाकर बड़ी खुश थी। शादी तो मेरी कई सहेलियों की भी हो चुकी थी। वो जब मुझसे बातें करती तो कहती अरी गुंजन तू क्या पागल हो गयी है । अभी एक ही लन्ड से चिपकी हुई है ? अरे इससे आगे बढ़ो और कई लड़कों के लन्ड पकड़ो। कई मर्दों के लन्ड पकड़ो और जवानी का मज़ा लूटो ? शादी का मतलब है चुदवाना। और चुदवाने का मतलब है लन्ड अपनी चूत में पेलना। अब लन्ड भोसड़ी का चाहे जिसका हो ? तुझे तो चुदाने से मतलब ? अब मुझे देखो मैं तो ३/४ लन्ड से चुदवा चुकी हूँ और आज भी चुदवाती हूँ। इसमें कोई गुनाह नहीं है यार।
वह आगे बोली एक बात नोट कर ले गुंजन जो मज़ा पराये मरद के लन्ड है वो मज़ा अपने मरद के लन्ड में नहीं है यार ? यह बात मुझे एक सहेली ने नहीं बल्कि कई सहेलियों ने कहा। पर मेरी हिम्मत कभी नहीं हुई किसी पराये मरद का लन्ड पकड़ने की। एक दिन सीमा भी इसी तरह बोलने लगी और कहा की मैं भी कभी अपने देवर से चुदवाती हूँ, कभी अपने नंदोई से। कभी अपने पति के दोस्तों से चुदवा लेती हूँ। उस दिन जब अरुणा ने मुझसे जोर देकर कहा तो मैंने उसके हसबैंड शेखर का लन्ड पकड़ा। मैंने पहली बार किसी पराये पुरुष का लन्ड पकड़ा तब मुझे मालूम हुआ की वो सब ठीक ही कह रहीं थीं।
मैंने बड़े प्यार से शेखर के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिया। उसे बिलकुल नंगा कर दिया और उसका
लन्ड पकड़ कर मजे से हिलाने लगी। लन्ड भी कुलांचें भरने लगा और पल भर में ही खड़े होकर घोड़े की तरह हिनहिनाने लगा। मैं लन्ड का साइज देख कर मस्त हो गयी। एकदम गोरा चिट्टा बिना झांट का चिकना लन्ड पाकर मुझे लगा की जैसे मुझे दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मिल गयी है। मुझे उसके पेल्हड़ भी बहुत सेक्सी लगे। मैं पेल्हड़ एक हाथ से थाम कर लन्ड जबान निकाल कर चाटने लगी। नंगी मैं भी थी। मेरी भी बड़ी बड़ी और सुडौल चूंचियां बिलकुल खुली थीं। जिन्हें शेखर मसलने में लगा हुआ था। शेखर ने तब तक मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया तो मैं मादर चोद बिलकुल नंगी हो गयी। मेरी छोटी छोटी झांटों वाली चूत उसके सामने आ गयी। वह मेरी चूत पर हाथ फेरने लगा। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसका लन्ड मुंह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर में मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी। वह मेरी चूत चाटने लगा और मैं उसका लन्ड ? हम दोनों 69 बन गए. . मस्ती बढ़ने लगी। उसका लौड़ा साला ८" + था और मोटा भी ५"+ था।
मेरी चूत एकदम तैयार थी लन्ड खाने के लिए। वासना बुरी तरह मेरे ऊपर सवार थी और मैं वासना के ऊपर। मुझे लन्ड के अलावा दुनिया में कुछ और नहीं दिखाई पड़ रहा था। बस लन्ड अपनी चूत में घुसाने ही वाली की शेखर ने खुद ही लन्ड मेरी चूत पर रख पेल दिया। लन्ड बहन चोद सांप की तरह सरसराता हुआ मेरी बुर में घुस गया। शेखर ने लन्ड जैसे ही मेरी चूत में घुसेड़ा वैसे ही मुझे एक अच्छी शुरुआत का एहसास हुआ। मुझे बहुत तसल्ली मिली। दिल को शुकून मिला। लन्ड घुसा कर बड़ा मज़ा आया और बड़ा संतोष मिला। मैं मन ही मन यह लाईने गुनगुनाने लगी :-
पराये मरद का, पहला है लौड़ा,
कितना लम्बा , कितना चौड़ा...
मैंने मन में कहा आज पराये मरद का पहला लन्ड मेरी चूत में घुसा है। भगवान् करे की इसी तरह से पराये मर्दों के लन्ड मेरी चूत में आगे भी घुसते रहें ? मैंने मस्त होकर अपनी दोनों टांगें फैला दीं और चुदवाने लगी। उसका मोटा तगड़ा लन्ड मेरी चूत का बाजा बजाने लगा और मैं बड़े मन से अपनी चूत का बाजा बजवाने लगी। मैं सोंचने लगी की मेरी सहेलियां ठीक ही कह रही थीं की चुदवाना हो तो पराये मर्दों से चुदवाओ ? चुदवाना हो तो पराये मर्दों के लन्ड अपनी बुर में पेलो। पराये मर्दों के लन्ड दनादन्न बड़ी बेशर्मी से घुसेड़ो अपनी चूत में ? फिर देखो चुदाई का मज़ा ? सच तो यह है की पराये मरद का लन्ड चाहे जैसा हो पर मज़ा बहुत देता है। आज मुझे वाकई पराये मरद का लन्ड बड़ा मज़ा दे रहा है।
शेखर मेरी एक दोस्त अरुणा का हसबैंड है।
मैंने एक दिन अरुणा से ज़िक्र किया था की यार मैंने सुना है की आजकल की बीवियां पराये मर्दों के लन्ड की तरफ ज्यादा भागतीं हैं। क्या यह बात सही है ? अगर सही है तो ऐसा क्या है पराये मर्दों एक लन्ड में ?
वह बोली - हां यार गुंजन यह बात सही है। बीवियों को आजकल पराये मर्दों के लन्ड बहुत भातें हैं। मुझे भी। मैं भी पराये मर्दों के लन्ड की गुलाम हूँ। और यह भी जान ले मरद भी साले परायी बीवियों की तरफ बहुत भागतें हैं।
मैंने कहा - तो क्या तू पराये मरद का लन्ड पकड़ती है ? क्या तू उनसे चुदवाती है ?
वह बोली - हां बिलकुल चुदवाती हूँ। इसमें हर्ज़ ही क्या है ? जब मुझे उनके लन्ड अच्छे लगतें हैं तो फिर क्यों न पेलूं उनके लन्ड अपनी चूत में ?
मैंने कहा - यार मैंने तो आजतक किसी पराये मरद का लन्ड नहीं पकड़ा ? देखा भी नहीं किसी पराये पुरुष का लन्ड ?
वह बोली - हाय दईया तो इतने दिनों से तू क्या गांड मरा रही थी अपनी ? अरे किसी अच्छे खासे मरद का लन्ड पकड़ कर देख। उससे चुदवा कर देख तब तुझे सही बात का पता चल जायेगा ?
अरे यार मुझे कौन पकड़ायेगा अपना लन्ड ?
आये हाय चल हट झूंठी कहीं की ? तू इतनी खूबसूरत है तुझे तो कोई भी अपना लन्ड पकड़ा देगा। बस तू थोड़ा अपना इंटरेस्ट तो दिखा ? तुझे चोदने वालों की तो लाइन लग जाएगी गुंजन ?
अच्छा तू बता कौन चोदेगा मुझे ?
मेरा हसबैंड चोदेगा तुझे ? बोल चुदवा लेगी तू ? डरेगी तो नहीं ? शर्माएगी तो नहीं ?
नहीं बिलकुल नहीं शर्माउंगी। मस्ती से चुदवा लूंगी।
ठीक है कल अपनी पूरी तैयारी करके रखना। मैंने अपने पति को तेरे पास भेजूंगी क्योंकि उसे परायी बीवियां चोदना बड़ा अच्छा लगता है।
तो दोस्तों, इस तरह अरुणा का हसबैंड मेरे पास मुझे चोदने के लिए आ गया। मैं पलंग पर लेटी थी। मेरी गांड के नीचे दो तकिया लगीं थी और मेरी चूत इसीलिए उपट उठी हुई थी। शेखर नीचे ज़मीं पर खड़ा था। मैंने अपनी दोनों टांगें उसके कंधे पर रख दीं थी। मेरी चूत उसके लन्ड के बिलकुल सामने हो गयी थी और तभी शेखर लन्ड गपाक से अंदर पेल दिया। मुझे मरद के कंधे पर टांगें रख कर चुदवाने में बड़ा मज़ा आता है। मैं अक्सर इसी तरह अपने पति से चुदवाती हूँ।आज शेखर भी मुझे इसी तरह चोद रहा है तो मुझे लग रहा है की जैसे मैं अपने ही मरद से चुदवा रही हूँ हां फर्क इतना है इसका लन्ड ज्यादा मज़ा दे रहा है। थोड़ी देर तक चुदाने के बाद मैं उतरी और लन्ड फिर चूसने लगी। मुझे तो उसका लन्ड देखने में ही मज़ा आ रहा था। लन्ड भी इतना खूबसूरत होता है यह बात मुझे उसी दिन पता चली।
उसके बाद शेखर ने मुझे पीछे से चोदना शुरू किया। मुझे कुतिया बना कर चोदने लगा। मैं भी मस्ती से कुतिया बनी हुई थी। मेरे मन में आया की अब मैं किसी और मरद से चुदवाऊँ तो वह भी अलग तरह से चोदेगा तो फिर कितना मज़ा आएगा ? फिर मुझे याद आया की मेरी एक सहेली पद्मा ने कहा था की यार सब मर्दों के लन्ड अलग अलग होतें हैं। किसी एक का लन्ड दूसरे लन्ड से हूबहू नहीं मिलता ? शायद इसीलिए बीवियां पराये मर्दों से चुदवाती हैं। क्योंकि तरह तरह लन्ड से चुदवाने में मज़ा तो वाकई अलग अलग आता होगा। फिर मैंने भी ठान लिया की मैं भी अब कई मर्दों से चुदवाऊँगी। तब तक मैं मंजिल तक पहुँच चुकी थी। मेरी चूत ढीली होने लगी थी। इतने में शेखर बोला गुंजन भाभी अब मैं निकलने वाला हूँ। बस मैं घूम गयी और लन्ड मुठ्ठी में लेकर सड़का मारने लगी। उसके बाद जब लन्ड ने वीर्य निकाला तो मैं उसे चाट गयी। मुझे लन्ड का टोपा चाटने में खूब मज़ा आया।
दूसरे दिन अरुणा मेरे घर आ गयी। उस समय मैं घर में अकेली थी। मेरा पति ऑफिस चला गया था और शेखर भी ऑफिस चला गया था। इसलिए वह यहाँ मेरे घर चली आयी। मैं उसे देख कर बड़ी खुश हो गयी। मैंने चाय बनाकर रखा और उससे बातें करने लगी।
वह बोली - गुंजन तुम्हें कैसा लगा मेरे पति का लन्ड ?
मैंने कहा - अरे यार क्या बात है तेरे पति के लन्ड की ? जितनी तारीफ करूँ उतना कम है। इतना लंबा और मोटा लन्ड पाकर मैं तो मस्त हो गयी।
अरुणा - वैसे मेरे पति का लन्ड तेरे पति के लन्ड से थोड़ा छोटा है।
मैंने कहा - नहीं नहीं यार ऐसा नहीं है। तेरे पति का लन्ड बड़ा है यार और मोटा भी थोड़ा ज्यादा है ?
अरुणा - मुझे तो तेरे पति का लन्ड कुछ ज्यादा ही लग रहा है।
मैंने कहा - तुम्हे कैसे मालूम की मेरे पति का लन्ड कैसा है ? तुमने कभी उसे देखा तो है नही ?
अरुणा - तेरे पति के लन्ड पर दो तिल हैं। एक तिल वहां है जहाँ से लन्ड शुरू होता है। और एक तिल वहां है जहां से लन्ड का सुपाड़ा शुरू होता है।
मैंने कहा - अरे वाह ! बात तो तेरी सही है। मैंने उसके लन्ड पर ये दोनों तिल अपनी सुहागरात में ही देखा था। तुमको इसके बारे में किसने बताया ?
अरुणा - मुझे किसी ने बताया नहीं। मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है ?
मैंने कहा - हाय दईया ! क्या तुम सच कह रह रही हो अरुणा ? अगर ऐसा है तो तुमने मेरे पति का लन्ड कब देख लिया और कैसे देख लिया ? पकड़ कर देखा की दूर से देखा ?
अरुणा - पकड़ कर भी देखा, चूस और चाट कर भी देखा। तुम जब मेरे पति से अपने घर में चुदवा रही थी तब मैं भी अपने घर में तेरे पति से चुदवा रही थी।
मैंने कहा - ओ माय गॉड ! तूने तो कमाल कर दिया ? अब तो मेरे रास्ता खुल गया।
अरुणा - मैं चाहती थी की तेरा पति तुम्हे आराम से बिना रोक टोक के पराये मर्दों से चुदवाने दे ? और यह तभी संभव है जब वह खुद परायी बीवियां चोदे ? मैंने इसलिए उससे चुदवाया ताकि उसे भी परायी बीवी चोदने का स्वाद लग जाए ? जानती हो गुंजन उसने जाते जाते क्या कहा ? वह बोला अरुणा भाभी अब मुझे और भी लोगों की बीवियां चोदने का मौक़ा दो प्लीज। इसका मतलब तेरा पति परायी बीवियां चोदना चाहता है। ऐसे में तेरा रास्ता एक दम खुल गया है।
मैंने अरुणा को गले लगा लिया और फिर हम दोनों ने मस्ती में शराब पी। जाते समय वह बोली अब की शनिवार को मैं अपने घर में तेरे पति के सामने ही किसी पराये मरद का लन्ड तेरी चूत में पेलूंगी। तुम भी अपने सामने ही अपने पति को किसी और की बीवी चोदने देना ?
मैंने कहा - हां बिलकुल चोदने दूँगी।
शनिवार को मैं अपने पति रोहन के साथ अरुणा के घर पहुँच गयी। मैं मन ही मन बहुत खुश थी। अरुणा ने हमारा वेलकम किया। मैं शेखर से फिर मिली और रोहन अरुणा से फिर मिला। इतने में एक और कपल आ गया। अरुणा ने हमें उन दोनों से मिलवाया और कहा गुंजन इससे मिलो ये है सुजीत और या है इसकी बीवी सपना। हम लोग आपस में खुल कर बात कर चुके हैं। मुझे जब अपनी सहेली रूपा से मालूम हुआ की सपना और सुजीत दोनों "वाइफ स्वैपिंग" करतें है तो मैंने इनसे संपर्क किया। इन्हें भी नये कपल की जरुरत थी इसलिए ये लोग तुरंत तैयार हो गए और आज हमारे सामने हैं।
सपना बोली - हां हम लोग "हसबैंड स्वैपिंग" का खेल रूपा के साथ खेलतें हैं। मुझे उसका हसबैंड पसंद है और उसे मेरा हसबैंड। बस फिर हो गयी हसबैंड की अदल बदली। इतने में अरुणा मजाक करती हुई बोली सपना तुम्हे उसका हसबैंड नहीं उसके हसबैंड का लन्ड पसंद आ गया। इसी बात पर सब लोग हंसने लगे। ड्रिंक्स लेते हुए कुछ बातें बड़ी गहरी और सेक्सी होने लगीं, फिर खुल कर होने लगी। तब सपना ने बताया की मैंने तो शादी के एक साल के बाद ही हसबैंड अदल बदल कर चुदवाने का खेल खेलना शुरू कर दिया था। सबसे पहले मैंने अपनी मौसी की बेटी पूजा के साथ किया था। पूजा मेरे पति पर मर मिटी और मैं उसके पति पर। फिर क्या एक रात को हमने शराब पी और पूजा का हाथ अपने पति सुजीत के लन्ड पर रख दिया। उसने मेरा हाथ अपने पति के लन्ड पर रख दिया। फिर रात भर हुआ धमाधम चुदाई। तब तक अरुणा ने सपना अपने पति शेखर के लन्ड पर रख दिया और कहा लो अब इसे पकड़ कर दिखाओ।
सपना नशे में थी। उसने पकड़ भी लिया। मैंने सुजीत के लन्ड पर रखा और अरुणा ने मेरे पति के लन्ड पर। फिर वो लोग एक दूसरे की बीवी को खींच कर चिपका लिया और पूरे बदन पर हाथ फिराने लगे। मुझे सुजीत का हाथ अपनी चूंचियां पर बड़ा अच्छा लगा। शेखर सपना की चूंचियां मसलने लगा और मेरा पति अरुणा की चूंचियां। फिर धीरे धीरे सबके कपडे भी उतरने लगे। देखते ही देखते पूरे कमरे में हम ६ लोग एक दूसरे के सामने नंगे हो गए। मर्द दूसरों की नंगी बीवियां आँखें फाड़ फाड़ कर देखने लगी और बीवियां पराये मर्दों को। मैंने जब सुजीत का लन्ड पकड़ा तो मज़ा आ गया। मैंने अपने पति का लन्ड और शेखर का लन्ड पहले ही देख लिया था। मैं बड़े चाव से सुजीत के लन्ड पर हाथ फिराने लगी। उसे घुमा घुमा कर चारों तरफ से देखने लगी। उसके पेल्हड़ भी सहलाने लगी। वह भी मेरी चूत, मेरे चूतड़, मेरी चूंची, मेरी गाड़ पर मस्ती से हाथ फेरने लगा। सब लोगों को परायी बीवी अच्छी लग रही थी। और हम लोगों को भी पराया मरद बड़ा अच्छा लग रहा था। एक बार फिर मुझे अहसास हुआ की पराये मरद को नंगा देखने में कितना मज़ा आता है ?
मैं सपना के पति सुजीत का लन्ड चाटने लगी। सपना अरुणा के पति का लन्ड चूसने लगी और अरुणा मेरे पति का लन्ड चूसने लगी। हम तीनो एक दूसरे को पराये मरद का लन्ड चूसते हुए देख भी रहीं थीं। बस ५ मिनट ये लन्ड एक एक करके चूत में घुसने लगे। हम सबकी चुदने लगी चूत। मेरा पति शेखर की बीवी चोदने लगा, शेखर सुजीत की बीवी चोदने लगा और और सुजीत मेरे पति रोहन की बीवी छोड़नेलग यानी वह मुझे चोदने लगा। पूरा कमरा चुदाई की आवाजों से गूजने लगा। चुदाई से जगमगा गया पूरा कमरा पूरा माहौल। ऐसी चुदाई मैं पहली बार देख रही थी। मैंने मन में ठान लिया की अब मैं भी अपने घर में इस तरह की सामूहिक चुदाई हर हफ्ते करवाया करूंगी।
दूसरी पारी में मेरे पति ने सुजीत की बीवी चोदा, सुजीत ने शेखर की बीवी चोदा और शेखर ने रोहन की बीवी यानी मुझे चोदा। रात भर चुदाई का होता रहा धमाल। लेकिन रात भर चोदने / चुदाने में भी किस का मन नहीं नहीं भरा। इसलिए दूसरे दिन भी यह चढाई चलती रही। पूरे दिन भर और फिर रात भर किसी ने कोई पकड़ा नन्ही पहना। बस हर तरफ चूत ही चूत, लन्ड ही लन्ड, गांड ही गांड, चूंची ही चूंची ?
तो दोस्तों यह थी मेरी पराये मरद का पहला लन्ड की कहानी।
मेरा नाम गुंजन है दोस्तों. मैं एक खूबसूरत, हॉट और बिंदास लड़की हूँ. मैं खूब मस्ती करती हूँ। कॉलेज में मैंने बहुत मस्ती की और लड़कों को खूब चिढाया। मैं गालियां भी खूब देती थी और मुझे लड़कों की गांड मारने में बड़ा मज़ा आता था। सारी लड़कियां मेरे कॉलेज आने का इंतज़ार करती थी। मैं जितनी बातें करने में मशहूर थी उतनी पढ़ने में भी। लेकिन सच यह है की मैंने कभी किसी लड़के का लन्ड नहीं पकड़ा। मैं २२ साल की हो गयी थी लेकिन कभी किसी लन्ड के दर्शन नहीं किया। हां ब्लू फिल्म जरूर देखीं हैं। उन्ही से मुझे मालूम हुआ की लन्ड कैसा होता है ? खड़ा होने पर लन्ड कैसा लगता है और जब ढीला होता है तो लन्ड की शक्ल कैसी होती है ? यह भी मालूम हुआ की लन्ड चूत किस तरह चोदता है और कैसे खलास होता है लन्ड ?
२४ साल में मेरी शादी हो गयी तब मुझे असली लन्ड के दर्शन हुए। मैं अपने पति का लन्ड पाकर बड़ी खुश थी। शादी तो मेरी कई सहेलियों की भी हो चुकी थी। वो जब मुझसे बातें करती तो कहती अरी गुंजन तू क्या पागल हो गयी है । अभी एक ही लन्ड से चिपकी हुई है ? अरे इससे आगे बढ़ो और कई लड़कों के लन्ड पकड़ो। कई मर्दों के लन्ड पकड़ो और जवानी का मज़ा लूटो ? शादी का मतलब है चुदवाना। और चुदवाने का मतलब है लन्ड अपनी चूत में पेलना। अब लन्ड भोसड़ी का चाहे जिसका हो ? तुझे तो चुदाने से मतलब ? अब मुझे देखो मैं तो ३/४ लन्ड से चुदवा चुकी हूँ और आज भी चुदवाती हूँ। इसमें कोई गुनाह नहीं है यार।
वह आगे बोली एक बात नोट कर ले गुंजन जो मज़ा पराये मरद के लन्ड है वो मज़ा अपने मरद के लन्ड में नहीं है यार ? यह बात मुझे एक सहेली ने नहीं बल्कि कई सहेलियों ने कहा। पर मेरी हिम्मत कभी नहीं हुई किसी पराये मरद का लन्ड पकड़ने की। एक दिन सीमा भी इसी तरह बोलने लगी और कहा की मैं भी कभी अपने देवर से चुदवाती हूँ, कभी अपने नंदोई से। कभी अपने पति के दोस्तों से चुदवा लेती हूँ। उस दिन जब अरुणा ने मुझसे जोर देकर कहा तो मैंने उसके हसबैंड शेखर का लन्ड पकड़ा। मैंने पहली बार किसी पराये पुरुष का लन्ड पकड़ा तब मुझे मालूम हुआ की वो सब ठीक ही कह रहीं थीं।
मैंने बड़े प्यार से शेखर के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिया। उसे बिलकुल नंगा कर दिया और उसका
लन्ड पकड़ कर मजे से हिलाने लगी। लन्ड भी कुलांचें भरने लगा और पल भर में ही खड़े होकर घोड़े की तरह हिनहिनाने लगा। मैं लन्ड का साइज देख कर मस्त हो गयी। एकदम गोरा चिट्टा बिना झांट का चिकना लन्ड पाकर मुझे लगा की जैसे मुझे दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मिल गयी है। मुझे उसके पेल्हड़ भी बहुत सेक्सी लगे। मैं पेल्हड़ एक हाथ से थाम कर लन्ड जबान निकाल कर चाटने लगी। नंगी मैं भी थी। मेरी भी बड़ी बड़ी और सुडौल चूंचियां बिलकुल खुली थीं। जिन्हें शेखर मसलने में लगा हुआ था। शेखर ने तब तक मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया तो मैं मादर चोद बिलकुल नंगी हो गयी। मेरी छोटी छोटी झांटों वाली चूत उसके सामने आ गयी। वह मेरी चूत पर हाथ फेरने लगा। मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसकी टांगों के बीच बैठ कर उसका लन्ड मुंह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर में मैं उसके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी। वह मेरी चूत चाटने लगा और मैं उसका लन्ड ? हम दोनों 69 बन गए. . मस्ती बढ़ने लगी। उसका लौड़ा साला ८" + था और मोटा भी ५"+ था।
मेरी चूत एकदम तैयार थी लन्ड खाने के लिए। वासना बुरी तरह मेरे ऊपर सवार थी और मैं वासना के ऊपर। मुझे लन्ड के अलावा दुनिया में कुछ और नहीं दिखाई पड़ रहा था। बस लन्ड अपनी चूत में घुसाने ही वाली की शेखर ने खुद ही लन्ड मेरी चूत पर रख पेल दिया। लन्ड बहन चोद सांप की तरह सरसराता हुआ मेरी बुर में घुस गया। शेखर ने लन्ड जैसे ही मेरी चूत में घुसेड़ा वैसे ही मुझे एक अच्छी शुरुआत का एहसास हुआ। मुझे बहुत तसल्ली मिली। दिल को शुकून मिला। लन्ड घुसा कर बड़ा मज़ा आया और बड़ा संतोष मिला। मैं मन ही मन यह लाईने गुनगुनाने लगी :-
पराये मरद का, पहला है लौड़ा,
कितना लम्बा , कितना चौड़ा...
मैंने मन में कहा आज पराये मरद का पहला लन्ड मेरी चूत में घुसा है। भगवान् करे की इसी तरह से पराये मर्दों के लन्ड मेरी चूत में आगे भी घुसते रहें ? मैंने मस्त होकर अपनी दोनों टांगें फैला दीं और चुदवाने लगी। उसका मोटा तगड़ा लन्ड मेरी चूत का बाजा बजाने लगा और मैं बड़े मन से अपनी चूत का बाजा बजवाने लगी। मैं सोंचने लगी की मेरी सहेलियां ठीक ही कह रही थीं की चुदवाना हो तो पराये मर्दों से चुदवाओ ? चुदवाना हो तो पराये मर्दों के लन्ड अपनी बुर में पेलो। पराये मर्दों के लन्ड दनादन्न बड़ी बेशर्मी से घुसेड़ो अपनी चूत में ? फिर देखो चुदाई का मज़ा ? सच तो यह है की पराये मरद का लन्ड चाहे जैसा हो पर मज़ा बहुत देता है। आज मुझे वाकई पराये मरद का लन्ड बड़ा मज़ा दे रहा है।
शेखर मेरी एक दोस्त अरुणा का हसबैंड है।
मैंने एक दिन अरुणा से ज़िक्र किया था की यार मैंने सुना है की आजकल की बीवियां पराये मर्दों के लन्ड की तरफ ज्यादा भागतीं हैं। क्या यह बात सही है ? अगर सही है तो ऐसा क्या है पराये मर्दों एक लन्ड में ?
वह बोली - हां यार गुंजन यह बात सही है। बीवियों को आजकल पराये मर्दों के लन्ड बहुत भातें हैं। मुझे भी। मैं भी पराये मर्दों के लन्ड की गुलाम हूँ। और यह भी जान ले मरद भी साले परायी बीवियों की तरफ बहुत भागतें हैं।
मैंने कहा - तो क्या तू पराये मरद का लन्ड पकड़ती है ? क्या तू उनसे चुदवाती है ?
वह बोली - हां बिलकुल चुदवाती हूँ। इसमें हर्ज़ ही क्या है ? जब मुझे उनके लन्ड अच्छे लगतें हैं तो फिर क्यों न पेलूं उनके लन्ड अपनी चूत में ?
मैंने कहा - यार मैंने तो आजतक किसी पराये मरद का लन्ड नहीं पकड़ा ? देखा भी नहीं किसी पराये पुरुष का लन्ड ?
वह बोली - हाय दईया तो इतने दिनों से तू क्या गांड मरा रही थी अपनी ? अरे किसी अच्छे खासे मरद का लन्ड पकड़ कर देख। उससे चुदवा कर देख तब तुझे सही बात का पता चल जायेगा ?
अरे यार मुझे कौन पकड़ायेगा अपना लन्ड ?
आये हाय चल हट झूंठी कहीं की ? तू इतनी खूबसूरत है तुझे तो कोई भी अपना लन्ड पकड़ा देगा। बस तू थोड़ा अपना इंटरेस्ट तो दिखा ? तुझे चोदने वालों की तो लाइन लग जाएगी गुंजन ?
अच्छा तू बता कौन चोदेगा मुझे ?
मेरा हसबैंड चोदेगा तुझे ? बोल चुदवा लेगी तू ? डरेगी तो नहीं ? शर्माएगी तो नहीं ?
नहीं बिलकुल नहीं शर्माउंगी। मस्ती से चुदवा लूंगी।
ठीक है कल अपनी पूरी तैयारी करके रखना। मैंने अपने पति को तेरे पास भेजूंगी क्योंकि उसे परायी बीवियां चोदना बड़ा अच्छा लगता है।
तो दोस्तों, इस तरह अरुणा का हसबैंड मेरे पास मुझे चोदने के लिए आ गया। मैं पलंग पर लेटी थी। मेरी गांड के नीचे दो तकिया लगीं थी और मेरी चूत इसीलिए उपट उठी हुई थी। शेखर नीचे ज़मीं पर खड़ा था। मैंने अपनी दोनों टांगें उसके कंधे पर रख दीं थी। मेरी चूत उसके लन्ड के बिलकुल सामने हो गयी थी और तभी शेखर लन्ड गपाक से अंदर पेल दिया। मुझे मरद के कंधे पर टांगें रख कर चुदवाने में बड़ा मज़ा आता है। मैं अक्सर इसी तरह अपने पति से चुदवाती हूँ।आज शेखर भी मुझे इसी तरह चोद रहा है तो मुझे लग रहा है की जैसे मैं अपने ही मरद से चुदवा रही हूँ हां फर्क इतना है इसका लन्ड ज्यादा मज़ा दे रहा है। थोड़ी देर तक चुदाने के बाद मैं उतरी और लन्ड फिर चूसने लगी। मुझे तो उसका लन्ड देखने में ही मज़ा आ रहा था। लन्ड भी इतना खूबसूरत होता है यह बात मुझे उसी दिन पता चली।
उसके बाद शेखर ने मुझे पीछे से चोदना शुरू किया। मुझे कुतिया बना कर चोदने लगा। मैं भी मस्ती से कुतिया बनी हुई थी। मेरे मन में आया की अब मैं किसी और मरद से चुदवाऊँ तो वह भी अलग तरह से चोदेगा तो फिर कितना मज़ा आएगा ? फिर मुझे याद आया की मेरी एक सहेली पद्मा ने कहा था की यार सब मर्दों के लन्ड अलग अलग होतें हैं। किसी एक का लन्ड दूसरे लन्ड से हूबहू नहीं मिलता ? शायद इसीलिए बीवियां पराये मर्दों से चुदवाती हैं। क्योंकि तरह तरह लन्ड से चुदवाने में मज़ा तो वाकई अलग अलग आता होगा। फिर मैंने भी ठान लिया की मैं भी अब कई मर्दों से चुदवाऊँगी। तब तक मैं मंजिल तक पहुँच चुकी थी। मेरी चूत ढीली होने लगी थी। इतने में शेखर बोला गुंजन भाभी अब मैं निकलने वाला हूँ। बस मैं घूम गयी और लन्ड मुठ्ठी में लेकर सड़का मारने लगी। उसके बाद जब लन्ड ने वीर्य निकाला तो मैं उसे चाट गयी। मुझे लन्ड का टोपा चाटने में खूब मज़ा आया।
दूसरे दिन अरुणा मेरे घर आ गयी। उस समय मैं घर में अकेली थी। मेरा पति ऑफिस चला गया था और शेखर भी ऑफिस चला गया था। इसलिए वह यहाँ मेरे घर चली आयी। मैं उसे देख कर बड़ी खुश हो गयी। मैंने चाय बनाकर रखा और उससे बातें करने लगी।
वह बोली - गुंजन तुम्हें कैसा लगा मेरे पति का लन्ड ?
मैंने कहा - अरे यार क्या बात है तेरे पति के लन्ड की ? जितनी तारीफ करूँ उतना कम है। इतना लंबा और मोटा लन्ड पाकर मैं तो मस्त हो गयी।
अरुणा - वैसे मेरे पति का लन्ड तेरे पति के लन्ड से थोड़ा छोटा है।
मैंने कहा - नहीं नहीं यार ऐसा नहीं है। तेरे पति का लन्ड बड़ा है यार और मोटा भी थोड़ा ज्यादा है ?
अरुणा - मुझे तो तेरे पति का लन्ड कुछ ज्यादा ही लग रहा है।
मैंने कहा - तुम्हे कैसे मालूम की मेरे पति का लन्ड कैसा है ? तुमने कभी उसे देखा तो है नही ?
अरुणा - तेरे पति के लन्ड पर दो तिल हैं। एक तिल वहां है जहाँ से लन्ड शुरू होता है। और एक तिल वहां है जहां से लन्ड का सुपाड़ा शुरू होता है।
मैंने कहा - अरे वाह ! बात तो तेरी सही है। मैंने उसके लन्ड पर ये दोनों तिल अपनी सुहागरात में ही देखा था। तुमको इसके बारे में किसने बताया ?
अरुणा - मुझे किसी ने बताया नहीं। मैंने खुद अपनी आँखों से देखा है ?
मैंने कहा - हाय दईया ! क्या तुम सच कह रह रही हो अरुणा ? अगर ऐसा है तो तुमने मेरे पति का लन्ड कब देख लिया और कैसे देख लिया ? पकड़ कर देखा की दूर से देखा ?
अरुणा - पकड़ कर भी देखा, चूस और चाट कर भी देखा। तुम जब मेरे पति से अपने घर में चुदवा रही थी तब मैं भी अपने घर में तेरे पति से चुदवा रही थी।
मैंने कहा - ओ माय गॉड ! तूने तो कमाल कर दिया ? अब तो मेरे रास्ता खुल गया।
अरुणा - मैं चाहती थी की तेरा पति तुम्हे आराम से बिना रोक टोक के पराये मर्दों से चुदवाने दे ? और यह तभी संभव है जब वह खुद परायी बीवियां चोदे ? मैंने इसलिए उससे चुदवाया ताकि उसे भी परायी बीवी चोदने का स्वाद लग जाए ? जानती हो गुंजन उसने जाते जाते क्या कहा ? वह बोला अरुणा भाभी अब मुझे और भी लोगों की बीवियां चोदने का मौक़ा दो प्लीज। इसका मतलब तेरा पति परायी बीवियां चोदना चाहता है। ऐसे में तेरा रास्ता एक दम खुल गया है।
मैंने अरुणा को गले लगा लिया और फिर हम दोनों ने मस्ती में शराब पी। जाते समय वह बोली अब की शनिवार को मैं अपने घर में तेरे पति के सामने ही किसी पराये मरद का लन्ड तेरी चूत में पेलूंगी। तुम भी अपने सामने ही अपने पति को किसी और की बीवी चोदने देना ?
मैंने कहा - हां बिलकुल चोदने दूँगी।
शनिवार को मैं अपने पति रोहन के साथ अरुणा के घर पहुँच गयी। मैं मन ही मन बहुत खुश थी। अरुणा ने हमारा वेलकम किया। मैं शेखर से फिर मिली और रोहन अरुणा से फिर मिला। इतने में एक और कपल आ गया। अरुणा ने हमें उन दोनों से मिलवाया और कहा गुंजन इससे मिलो ये है सुजीत और या है इसकी बीवी सपना। हम लोग आपस में खुल कर बात कर चुके हैं। मुझे जब अपनी सहेली रूपा से मालूम हुआ की सपना और सुजीत दोनों "वाइफ स्वैपिंग" करतें है तो मैंने इनसे संपर्क किया। इन्हें भी नये कपल की जरुरत थी इसलिए ये लोग तुरंत तैयार हो गए और आज हमारे सामने हैं।
सपना बोली - हां हम लोग "हसबैंड स्वैपिंग" का खेल रूपा के साथ खेलतें हैं। मुझे उसका हसबैंड पसंद है और उसे मेरा हसबैंड। बस फिर हो गयी हसबैंड की अदल बदली। इतने में अरुणा मजाक करती हुई बोली सपना तुम्हे उसका हसबैंड नहीं उसके हसबैंड का लन्ड पसंद आ गया। इसी बात पर सब लोग हंसने लगे। ड्रिंक्स लेते हुए कुछ बातें बड़ी गहरी और सेक्सी होने लगीं, फिर खुल कर होने लगी। तब सपना ने बताया की मैंने तो शादी के एक साल के बाद ही हसबैंड अदल बदल कर चुदवाने का खेल खेलना शुरू कर दिया था। सबसे पहले मैंने अपनी मौसी की बेटी पूजा के साथ किया था। पूजा मेरे पति पर मर मिटी और मैं उसके पति पर। फिर क्या एक रात को हमने शराब पी और पूजा का हाथ अपने पति सुजीत के लन्ड पर रख दिया। उसने मेरा हाथ अपने पति के लन्ड पर रख दिया। फिर रात भर हुआ धमाधम चुदाई। तब तक अरुणा ने सपना अपने पति शेखर के लन्ड पर रख दिया और कहा लो अब इसे पकड़ कर दिखाओ।
सपना नशे में थी। उसने पकड़ भी लिया। मैंने सुजीत के लन्ड पर रखा और अरुणा ने मेरे पति के लन्ड पर। फिर वो लोग एक दूसरे की बीवी को खींच कर चिपका लिया और पूरे बदन पर हाथ फिराने लगे। मुझे सुजीत का हाथ अपनी चूंचियां पर बड़ा अच्छा लगा। शेखर सपना की चूंचियां मसलने लगा और मेरा पति अरुणा की चूंचियां। फिर धीरे धीरे सबके कपडे भी उतरने लगे। देखते ही देखते पूरे कमरे में हम ६ लोग एक दूसरे के सामने नंगे हो गए। मर्द दूसरों की नंगी बीवियां आँखें फाड़ फाड़ कर देखने लगी और बीवियां पराये मर्दों को। मैंने जब सुजीत का लन्ड पकड़ा तो मज़ा आ गया। मैंने अपने पति का लन्ड और शेखर का लन्ड पहले ही देख लिया था। मैं बड़े चाव से सुजीत के लन्ड पर हाथ फिराने लगी। उसे घुमा घुमा कर चारों तरफ से देखने लगी। उसके पेल्हड़ भी सहलाने लगी। वह भी मेरी चूत, मेरे चूतड़, मेरी चूंची, मेरी गाड़ पर मस्ती से हाथ फेरने लगा। सब लोगों को परायी बीवी अच्छी लग रही थी। और हम लोगों को भी पराया मरद बड़ा अच्छा लग रहा था। एक बार फिर मुझे अहसास हुआ की पराये मरद को नंगा देखने में कितना मज़ा आता है ?
मैं सपना के पति सुजीत का लन्ड चाटने लगी। सपना अरुणा के पति का लन्ड चूसने लगी और अरुणा मेरे पति का लन्ड चूसने लगी। हम तीनो एक दूसरे को पराये मरद का लन्ड चूसते हुए देख भी रहीं थीं। बस ५ मिनट ये लन्ड एक एक करके चूत में घुसने लगे। हम सबकी चुदने लगी चूत। मेरा पति शेखर की बीवी चोदने लगा, शेखर सुजीत की बीवी चोदने लगा और और सुजीत मेरे पति रोहन की बीवी छोड़नेलग यानी वह मुझे चोदने लगा। पूरा कमरा चुदाई की आवाजों से गूजने लगा। चुदाई से जगमगा गया पूरा कमरा पूरा माहौल। ऐसी चुदाई मैं पहली बार देख रही थी। मैंने मन में ठान लिया की अब मैं भी अपने घर में इस तरह की सामूहिक चुदाई हर हफ्ते करवाया करूंगी।
दूसरी पारी में मेरे पति ने सुजीत की बीवी चोदा, सुजीत ने शेखर की बीवी चोदा और शेखर ने रोहन की बीवी यानी मुझे चोदा। रात भर चुदाई का होता रहा धमाल। लेकिन रात भर चोदने / चुदाने में भी किस का मन नहीं नहीं भरा। इसलिए दूसरे दिन भी यह चढाई चलती रही। पूरे दिन भर और फिर रात भर किसी ने कोई पकड़ा नन्ही पहना। बस हर तरफ चूत ही चूत, लन्ड ही लन्ड, गांड ही गांड, चूंची ही चूंची ?
तो दोस्तों यह थी मेरी पराये मरद का पहला लन्ड की कहानी।
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