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सास, बहू, नन्द तीनो चुदक्कड़ - चुदाई में सबको चोदा - Sabhi mahilaon ki chudai me khub choda
सास, बहू, नन्द तीनो चुदक्कड़ - चुदाई में सबको चोदा - Sabhi mahilaon ki chudai me khub choda , Antarvasna Sex Stories , Hindi Sex Story , Real Indian Chudai Kahani , choda chadi cudai cudi coda free of cost , Time pass Story , Adult xxx vasna kahaniyan.
अब क्या बताऊँ तुम्हे समीना बेगम, मेरी मेरी बहू भी बुर चोदी बड़ी मस्त है और बहू की बुर चोदी नन्द भी बहुत मस्त हैं। दोनों की दोनों लन्ड का शिकार करने में लगीं रहतीं हैं। जैसे बिल्ली किसी चूहे तो पकड़ने के लिए घात लगा कर बैठती है वैसे ही ये दोनों भी लन्ड पकड़ने के लिए घात लगाए कहीं न कहीं बैठी ही रहतीं है। कभी यहाँ कभी वहां, कभी इस घर में तो कभी उस घर में ? कभी इस मोहल्ले में तो कभी उस मोहल्ले में ? जैसे ही कोई लौड़ा मिलता है तो झपट पड़तीं है ये दोनों। फिर क्या एक चुदवाती है अपनी माँ की चूत और दूसरी चुदवाती है अपनी सास का भोसड़ा ? सास भी भोसड़ी वाली कम नहीं है। वह भी लन्ड की तलास में घूमती रहती है। लन्ड मिलते ही पेल देती है कभी अपनी बहू की बुर में कभी उसकी नन्द की बुर में ?
मेरा नाम बसीमा बेगम है। मैं ४५ साल की हूँ। मेरे साथ मेरी बेटी लैला है। वह २३ साल की है और उसकी शादी हो चुकी है। वह आजकल यहाँ मेरे साथ ही है। उसकी ससुराल इसी शहर में है और वह अपनी ससुराल आती जाती रहती है। मेरी बहू है रफ़ा बहुत ही खूबसूरत, चंचल और हॉट है। खूब मजे की बातें करती हैं और सबके मासाले दार किस्से सुनाती रहती है। उसे छुप छुप कर सबकी बातें सुनना और छुप छुप कर सबको नंगी, सबको नंगे देखना और छुप छुप कर सबकी चुदाई देखने का बड़ा शौक है। उसे सबसे ज्यादा मज़ा आता है छुप छुप कर लन्ड देखने में ? वह हमेशा किसी न किसी का लन्ड देखने के चक्कर में रहती है। जितने शौक से वह इन चीजों को देखती है उतने ही शौक से सुनाती भी है। इसीलिये वह सबका दिल बड़ी आसानी से जीत लेती है। उसकी देखा देखीअब मेरी बेटी भी वैसा ही करने लगी है। मैं भी इन दोनों के बीच में रह कर खूब एन्जॉय करती हूँ। लन्ड तो मेरी भी बहुत बड़ी कमजोरी है। मैं भी बिना लन्ड के रह नहीं सकती। मैं भी लन्ड की ताक में रहती हूँ और कोई मौक़ा हाथ से खाली नहीं जाने देती ? मैं इस बात की कतई परवाह नहीं करती की लन्ड है किसका ? मुझे अगर लन्ड पसंद आ गया तो वह पहले मेरे मुंह में जायेगा और फिर मेरी चूत में। मैं अपनी इसी आदत की वजह से रंगे हाथों पकड़ी गयी हूँ। मुझे पकड़ने वाली कोई और नहीं बल्कि मेरी बेटी ही थी। पहले तो मैं थोड़ा झिझकी पर फिर सोंचा की मेरी बेटी भी तो जवान हो गयी है। उसे भी लन्ड की जरुरत है। इसलिए मैं एकदम बिंदास खुल कर बोलने लगी।
हुआ यह की उस समय गर्मी के दिन थे। दोपहर का समय था। मैं घर में अकेली ही थी। बहू अपने माईके गयी थी और बेटी अपनी साहेल के घर। इतने में मेरे गाँव का देवर आ गया। उसके साथ उसका एक दोस्त भी था। मैंने कहा अरे मजीद तू इतनी धूप कहाँ घूम रहा है यार। लू लग गयी तो बहुत तकलीफ होगी। वह बोला अरे भाभी यहाँ कुछ काम था इसलिए आना पड़ा। अब काम ख़तम हो गया तो सोंचा की चलो बसीमा भब ही से मिलता चलूँ। मेरे साथ ये मेरा दोस्त फ़राज़ भी चल पड़ा। मैंने कहा अच्छा बैठो पहले ठण्डा पानी पियो। मैंने उन्हें पांणी पिलाया और फिर कुछ बातें होने लगीं। कमरे में ए सी था इसलिए गर्मी जल्दी ही छू मंतर हो गयी। अब कुछ गरमागरम बातें होने लगीं। बातों में मज़ा आने लगा। बदन में सुरसुरी होने लगी।
मैंने कहा मजीद आजकल तो गाँव भी शहर बन रहे हैं। तो तुम्हे वहां भी लड़कियां खूब मिलती होंगी। वह बोला हां भाभी बात तो तुम्हारी बिलकुल सही है। अब तुम तो जानती हो भाभी की मुझे लड़कियां चोदने का शौक है ? और मुझे लड़कियां मिल भी जातीं हैं। मैंने कहा अरे यार क्यों नहीं मिलेगीं। तेरा लौड़ा खुदा ने इतना बड़ा और मोटा बनाया है तो लड़कियां बहन चोद अपने आप मिलेगीं। वह बोला अरे भाभी लड़कियां क्या अब तो लड़कियों की माँ भी आने लगीं हैं। मैं तो बहुत बिजी हो गया हूँ। मैंने कहा तू नहीं तेरा लन्ड बहुत बिजी हो गया है, मादर चोद । मैंने देखा की मेरी बातों का असर उसके दोस्त पर भी पड़ रहा है। तब तक वह बोला अरे भाभी जानती हो लड़कियों की माँ तो सबसे ज्यादा फ़राज़ के पास आतीं हैं। खुदा ने इस पर भी मेहरवानी की है। मैंने कहा हाय दईया तब फिर जल्दी से दिखाओ न इसका लन्ड मुझे। तूने तो यह कह मेरी चूत में आग लगा दी है यार. बस मैं आगे बढ़ी और फ़राज़ के पैजामे का नाड़ा खोलने लगी।
समीना बड़े गौर से मेरी कहानी सुन रही थी।
मैंने लन्ड हिलाया तो वह खड़ा हो गया। मैंने फिर उसका पैजामा खोल कर फेंक दिया तो लौड़ा मेरे सामने तन कर खड़ा हो गया। तब तक मजीद भी मेरे आगे नंगा हो गया। मैं दोनों अपने दोनों हाथों से लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। तब तक मजीद ने मेरे कपड़े भी उतार दिया। अब कमरे में हम तीनो नंगे थे। मुझे नंगे लन्ड देखने का शौक है ही। मैं मस्ती करने लगी, लन्ड चूमने लगी और चूसने लगी लन्ड ? मैंने न खिड़की की परवाह की और न दरवाजे की। अचानक मेरी बेटी लैला कमरे में आ गयी। वह बोली हाय दईया अम्मी ये क्या हो रहा है ? मैं उसके बात सुनकर थोड़ा झिझक गयी लेकिन फिर हिम्मत करके बोली पहले ये बता की तू कहाँ से आ रही है अपनी माँ माँ चुदवा के भोसड़ी वाली ? मैंने जान बूझ कर गालियां दीं ताकि उसकी शर्म ख़तम हो जाये। वह मैन कहाँ गयी थी मैं तो यहीं थी। बस थोड़ी देर के लिए पड़ोस में गयी थी। मैंने फिर सवाल दाग दिया तो वहां किसका लन्ड हिलाने गयी थी तू माँ की लौड़ी ?
वह बोली अरे अम्मी तुम ये सब क्या कह रही हो ? उससे रहा न गया और फिर थोड़ा हिम्मत करके बोली अम्मी सच तो यह है लन्ड तुम हिला रही हो। वह भी एक नहीं दो दो लन्ड ? मैं पड़ोस में लन्ड हिलाने नहीं गयी थी। आंटी से पता पूंछने गयी थी बस ? मैंने कहा अच्छा ठीक है वहां लन्ड नहीं हिलाया तो फिर यहाँ हिला ले लन्ड। ले पकड़ अपने मजीद अंकल का लन्ड ? मैंने उसे बड़े प्यार से लन्ड दिखाते हुए कहा। वह थोड़ा झिझकी तब मैंने कहा अरे बेटी जवानी बिना लन्ड के नहीं कटती। शर्म छोड़ और आ जा मैदान में ? बचपन तेरा गया। बचपन में लड़की दूध पीती है और जवानी में लन्ड पीती है। ले पी ले ये मस्ताना लन्ड ? मेरी बात का असर हुआ। लन्ड देख कर तो वह भी लालच गयी थी। उसने हाथ बढ़ाया तो मैंने मजीद का लन्ड पकड़ा दिया। उसने लन्ड मुठ्ठी में लिया और ऊपर नीचे करने लगी। मैंने फिर कहा बेटी कल को तेरी शादी होगी तो अभी से लन्ड का मज़ा लेना सीख ले। चुदाना सीख ले। गालियां दे दे कर चुदवाना सीख ले ताकि ससुराल में कोई तुझे अनाड़ी न समझे ?आज से मैं तेरी दोस्त हूँ समझी बुर चोदी, लैला।
वह बोली हां अम्मी मैं बिलकुल समझ गयी। मैंने फ़राज़ का लौड़ा हाथ में लिया और मस्ती से उसे घुमा फिरा के चारों तरफ से देखने लगी। मुझे लौड़ा बड़ा मस्त मोटा और ताज़ा लगा और मैं उसी में बिजी हो गयी। अचानक मेरी नज़र जब लैला पर पड़ी तो जाना की वह तो बड़ी अच्छी तरह से लन्ड चाट रही है, चूस रही है और लन्ड से बातें भी कर रही है। वह बोल रही थी - हाय मेरे लौड़े मियां तुम तो बड़े सयाने निकले ? तूने मुझसे पहले मेरी माँ के ऊपर हमला बोल दिया। तुम तो बहुत बड़े मादर चोद हो, यार ? बहुत बड़े हरामजादे हो ? तेरी बहन का लन्ड साले ? लन्ड महराज आज मैं तेरा सारा तेल निकाल लूंगी। वह फिर बोली हाय मजीद अंकल तूने इतना बढ़िया लन्ड मुझे पहले क्यों नहीं पकड़ाया। तेरी गांड फट रही थी क्या, अंकल ? फिर उसने आधे से अधिक लन्ड अपने मुंह में भर लिया। अंदर ही अंदर लन्ड के सुपाड़े के चारों ओर जबान घुमाने लगी।
मजीद तो मस्ती के मारे सिसयाने लगा। मैं समझ गयी की लैला बुर चोदी बहुत दिनों के लन्ड चूस रही है। उसने मुझे कभी यह बात नहीं बताई ?
मैंने पूंछा - लैला सच बताओ की तुम कब से लन्ड चूस रही हो ?
वह बोली - अम्मी, अब मैं तुमसे सच नहीं छुपाऊँगी ? मैं पिछले २ साल से लन्ड चूस रही हूँ। अब तक कई लन्ड चूस चुकी हूँ।
मैंने कहा - तेरी माँ का भोसड़ा लैला, तू तो बड़ी सायानी निकली । अब तू यह भी बता दे की कितने लन्ड तू अपनी चूत में ले चुकी है ?
वह बोली - लन्ड तो मैं कई ले चुकी हूं अपनी चूत में लेकिन मैंने कोई गिनती नहीं की ? अब मैं पूंछती हूँ तुम बताओ की तुमने अब तक कितने लन्ड अपनी चूत में पीला है अम्मी ? भला कोई लन्ड गिन गिन कर चुदवाती है क्या ? इसका जबाब न मेरे पास है और तेर पास अम्मी ?
मैंने कहा - हाय अल्ला, तू तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ निकली, लैला ?
वह बोली - मैं कितनी भी बड़ी चुदक्कड़ हो जाऊं पर तुमसे कम ही रहूंगी, अम्मी ?
फिर हम दोनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।
उस दिन हम दोनों ने खूब मस्ती से चुदवाया। एक दूसरे के चूत में लन्ड पेल पेल कर चुदवाया और दोनों लन्ड से एक साथ भी चुदवाया। रात भर बहन चोद यही होता रहा।
कुछ दिन बाद लैला की शादी हो गयी और वह अपनी ससुराल चली गयी। इधर मेरे बेटे की भी शादी हो गयी। वह शादी के एक महीने के बाद दुबई काम पर चला गया। अब घर पर हम दोनों सास बहू रह गयी। मेरी बहू रफ़ा बेहद खूबसूरत है, सेक्सी है और हॉट है। उसे देख कर मुझे यकीन हो गया की मेरी बहू भी लन्ड की दीवानी होगी। क्योंकि कोई भी खूबसूरत बीवी बिना ग़ैर मरद के लन्ड के रह ही नहीं सकती। वह भोसड़ी वाली शादी के पहले भी चुदवाती है और शादी के बाद भी गैर मर्दों से चुदवाती है। यही हाल मेरा भी है और मेरी बेटी का भी ? अब देखना यह है की मेरी बहू रफ़ा क्या क्या गुल खिलाती है. अभी एक महीना ही हुआ की मेरी बेटी कुछ दिन के लिए यहां आ गयी है। फिर हम दोनों अपनी बहू पर नज़र रखने लगीं। हमारा यह मकसद था की बहू भी हमारी तरह हो जाए तो अच्छा है।
एक दिन रफ़ा लैपटॉप पर बैठी थी। तभी अचानक लैला उसके पास पहुँच गयी। बहू शायद अपना ईमेल देख रही थी। इतना में उसका फोन बज उठा. फोन शायद उसकी अम्मी का था इसलिए वह बात करने के लिए दूसरे कमरे में चली गयी। इधर उसका लैपटॉप खुला ही रह गया। बस लैला को मौक़ा वह उसके मेल्स देखने लगी। उसमे एम् सन्देश मिला। लिखा था -
"रफ़ा यार तेरी शादी हो रही है। तू ससुराल चली जाएगी तो हम लोगों का क्या होगा ? अब हमारे लन्ड कौन पकड़ेगी ? हम तीनो शैफ अली, साजिद और आरिफ को तेरी याद बहुत आएगी। हम लोग जब तुम्हे एक साथ मिलकर चोदते हैं तो हमें ज़न्नत का मज़ा आता है। अब पता नहीं यह मज़ा मिलेगा भी की नहीं ? तुम्हारे दोस्त "
जबाब में रफा ने लिखा -
"नहीं यार तुम लोगों को निराश होने की जरुरत नहीं है। मैं जल्दी जल्दी आती रहूंगी और तुम लोगों से चुदवाती रहूंगी। मैं भी बिना तुम लोगों से चुदवाये रह ही नहीं सकती। तुम्हारी रफ़ा"
लैला ने फौरन मुझे बुला कर यह संदश पढ़वा दिया। अब तो बहू की सारी पोल खुल गयी। तब तक बहू वापस आ गयी। उसे मालूम ही नहीं हुआ की हम दोनों ने उसका सन्देश पढ़ लिया है।
दूसरे दिन वह फोन पर बोल रही थी - हाय अम्मी मेरी सास और नन्द दोनों ही बड़ी अच्छी हैं ,,,,, ? सास तो अभी मस्त जवान है बहन चोद ,,,,? नन्द भी बुर चोदी बड़ी सेक्सी और हॉट है ,,,,,,, ? खालू और फूफा दोनों मस्त हो जायेगें इन्हें चोद कर, अम्मी ,,,,,,,? मुझे मालूम हुआ की मेरी नन्द का ससुर साला बड़ा चोदू है ,,,,,,,,,? वह मेरी दोस्त का अब्बू है ,,,,,,? उसके लन्ड की बड़ी तारीफ सुनी है,,,,,,,,,,? देखा नहीं है अभी तक मैंने ,,,,,,? हां हां लगता तो है की मेरी सास और नन्द दोनों बुर चोदी चुदक्कड़ हैं ,,,,,,,, ? मैं किसी दिन नन्द की बुर चोदूंगी और उसकी माँ का भोसड़ा ? तब आएगा मज़ा ,,,,, ? अच्छा आदाब अम्मी।
हम दोनों ने उसकी फोन की बातें सुन लीं। वह मुड़ी तो पीछे हम दोनों खड़ी थी। वह हमें देख कर सकपका गयी। उसे लगा की मेरी गन्दी गन्दी बातें इन लोगों ने सुन लीं हैं। वह डरी सहमी थोड़ी देर तक खड़ी रही। तब मैंने मुस्कराते हुए कहा अरे बहू डरने की कोई बात नहीं ? ये तो अच्छा हुआ जो तूने अपनी अम्मी से बात कर ली। अब बस तू यह मुझे बता दे की तेरे खालू का लन्ड बड़ा है की तेरे फूफा का लन्ड ? तुझे दोनों में से किसका लन्ड ज्यादा पसंद है ? तब तक लैला बोली अरे भाभी जान तेरी दोस्त का अब्बू मेरा ससुर है तो इसका मतलब मेरी नन्द निगार तेरी दोस्त है। और मैं तेरी नन्द हूँ। अब तो मैं अपनी नन्द को छोड़ूंगी नहीं। उसकी चूत में मैं पेलूंगी लन्ड। मैंने तो यह बात पहले ही सोंच ली थी। है मैंने अभी तक अपने ससुर का लौड़ा नहीं देखा। तो भाभी जान तेरी सहेली ने तो बताया होगा की उसकेअब्बू का लन्ड कैसा है ? उसके लन्ड का साइज क्या है और देखने में कैसा लगता है लन्ड ? अरे वही तो है मेरा भोसड़ी का ससुर ? अगर लौड़े में दम है तो मैं उसे अभी किसी बहाने बुला ले लेती हूँ। मैंने भाभी को मोबाइल देते हुए बड़े प्यार से कहा लो भाभी बात करों न अपनी दोस्त से। रफ़ा ने अपनी नन्द की बात मान ली और हमारे सामने ही बात करने लगी।
उधर तब तक मेरी पड़ोसन शकीला आ गयी। मैं उससे बातें करने लगी। मेरे बगल में मेरी बेटी लैला बैठी थी और थोड़ी देर में रफ़ा भी आकर बैठ गयी। शकीला बात करते करते बोली यार बसीमा कल रात को बड़ा मज़ा आया। कल मेरी खाला का लड़का जो मेरी ही उम्र का है, वह आ गया। मैं उससे बातें कर ही रही थी की मेरी बेटी आ गयी और मेरे सामने ही उसके पैजामे में हाथ घुसेड़ कर उसका लन्ड सहलाने लगी। वह बोली हाय मामू जान आज तो तेरा लन्ड तो पहले से कुछ ज्यादा मोटा हो गया है। उसने फिर पैजामा खोल कर उसका लन्ड चाटने चूसने लगी। तब फिर मुझे भी ताव आ गया। मैं उसके कमरे में गयी और उसके मियां का लन्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लन्ड भी साला एकदम से तन कर खड़ा हो गया । फिर मैं उसे बाहर ले आयी और अपनी बेटी के सामने ही उसके मियां का लन्ड चाटने चूसने लगी। जानती हो बसीमा फिर क्या हुआ ? मेरी बेटी के मामू ने मेरी बेटी की बुर लेना शुरू कर दिया और उसे झमाझम चोदने लगा। इधर मैं भी उसके आमने उसके मियां से भकाभक चुदवाने लगी।
रात भर हम दोनों लन्ड अदल बदल कर चुदवाती रहीं और तभी मेरे मन में आया की मैं क्यों न आज बसीमा का भोसड़ा चुदवाऊँ ? इसलिए मैंने दोनों को रोक लिया है और मैं चाहती हूँ की आज रात को तुम लोग उन दोनों लन्ड का मज़ा लो। मैंने कहा की "नेकी और पूंछ पूंछ" अब भेज दो न उन दोनों को मेरे पास। अब तो मेरी बहू भी आ गयी है। अब हम तीनो मिलकर चोदेगीं उन दोनों के लन्ड ? तब तक लैला बोली अम्मी उन दोनों के लन्ड नहीं उन तीनो के लन्ड चोदेगीं। मेरा ससुर भी आ रहा है। मेरे पास मैसेज आ गया है। शकीला के जाने के बाद लैला और रफ़ा ने मिलकर ड्रिंक्स का सारा इंतज़ाम और चुदाई का सारा इंतज़ाम कर लिया। हम तीनो बड़ी मस्ती के मूड में आ गयीं।
मैंने मजाक करते हुए कहा - बेटी लैला, आज चुदेगा तेरी भाभी की सास का भोसड़ा, बहन चोद ?
लैला भी उसी जोश में बोली - हां अम्मी तू सही कह रही है, आज तो चुदेगी तेरी बहू की नन्द की चूत ? तब आएगा असली मज़ा। साली कई दिनों से चरमरा रही है उसकी चूत ?
फिर बहू से भी न रहा गया। वह भी बोल पड़ी - नन्द रानी. आज चुदेगी तेरी माँ की बहू की बुर ? उसकी बुर भोसड़ी की लन्ड खाने के लिए देखो न अपना मुंह खोले कैसे इधर उधर घूम रही है।
फिर हम तीनो खूब खिलखिला कर हंसने लगीं।
मैंने लगे हाथ गालियों का दूसरा दौर भी चालू कर दिया। रफ़ा बोली नन्द रानी तेरी माँ का भोसड़ा ? आज मैं तेरी माँ का चोदूंगी भोसड़ा ? लैला ने कहा हाय अम्मी मैं तेरी बहू की बुर में घुसेड़ दूँगी लन्ड ? आज मैं चोद डालूँगी उसकी चूत ? मैंने कहा बहू कुछ भी हो जाए ? आज तेरी नन्द की बुर बच नहीं पायेगी ? बहन चोद तेरी बुर चोदी नन्द की बुर ? इस तरह हम तीनो एक दूसरे को गालियां दे दे कर खूब एन्जॉय करतीं रहीं।
इतने में शकीला उन दोनों के साथ मेरे घर आ गयी। उसने बताया ये है ताहिर मेरा मौसेरा भाई और ये है साजिद मेरी बेटी का शौहर। मैं उन दोनों को देख कर मस्त हो गयी। तब तक लैला भी अपने ससुर को लेकर कमरे में आ गयी। उसने सबसे कहा है ये है मेरा ससुर अजमल। मैं तो मन ही मन इन सबके लन्ड के बारे में सोंचने लगी। शकीला चली गयी और इधर हम सबने दारू का मज़ा लेना शुरू कर दिया। दारू के साथ होने लगीं गरमागरम मसालेदार बातें ?
बस थोड़ी ही देर में एक ही कमरे में मैं अपनी बेटी के ससुर से चुदवाने लगी. मेरी बेटी लैला साजिद के लन्ड अपनी चूत में घुसेड़ कर चुदवाने लगी और मेरी बहू ने ताहिर का लौड़ा अपनी बुर में घुसा लिया। हम सब बिलकुल रंडियों की तरह भकाभक चुदवाने लगीं।
मैं मन में यही कह रही थी की ये तीनों भोसड़ी वाली सास, बहू और नन्द देखो कितनी चुदक्कड़ हैं।
अब क्या बताऊँ तुम्हे समीना बेगम, मेरी मेरी बहू भी बुर चोदी बड़ी मस्त है और बहू की बुर चोदी नन्द भी बहुत मस्त हैं। दोनों की दोनों लन्ड का शिकार करने में लगीं रहतीं हैं। जैसे बिल्ली किसी चूहे तो पकड़ने के लिए घात लगा कर बैठती है वैसे ही ये दोनों भी लन्ड पकड़ने के लिए घात लगाए कहीं न कहीं बैठी ही रहतीं है। कभी यहाँ कभी वहां, कभी इस घर में तो कभी उस घर में ? कभी इस मोहल्ले में तो कभी उस मोहल्ले में ? जैसे ही कोई लौड़ा मिलता है तो झपट पड़तीं है ये दोनों। फिर क्या एक चुदवाती है अपनी माँ की चूत और दूसरी चुदवाती है अपनी सास का भोसड़ा ? सास भी भोसड़ी वाली कम नहीं है। वह भी लन्ड की तलास में घूमती रहती है। लन्ड मिलते ही पेल देती है कभी अपनी बहू की बुर में कभी उसकी नन्द की बुर में ?
मेरा नाम बसीमा बेगम है। मैं ४५ साल की हूँ। मेरे साथ मेरी बेटी लैला है। वह २३ साल की है और उसकी शादी हो चुकी है। वह आजकल यहाँ मेरे साथ ही है। उसकी ससुराल इसी शहर में है और वह अपनी ससुराल आती जाती रहती है। मेरी बहू है रफ़ा बहुत ही खूबसूरत, चंचल और हॉट है। खूब मजे की बातें करती हैं और सबके मासाले दार किस्से सुनाती रहती है। उसे छुप छुप कर सबकी बातें सुनना और छुप छुप कर सबको नंगी, सबको नंगे देखना और छुप छुप कर सबकी चुदाई देखने का बड़ा शौक है। उसे सबसे ज्यादा मज़ा आता है छुप छुप कर लन्ड देखने में ? वह हमेशा किसी न किसी का लन्ड देखने के चक्कर में रहती है। जितने शौक से वह इन चीजों को देखती है उतने ही शौक से सुनाती भी है। इसीलिये वह सबका दिल बड़ी आसानी से जीत लेती है। उसकी देखा देखीअब मेरी बेटी भी वैसा ही करने लगी है। मैं भी इन दोनों के बीच में रह कर खूब एन्जॉय करती हूँ। लन्ड तो मेरी भी बहुत बड़ी कमजोरी है। मैं भी बिना लन्ड के रह नहीं सकती। मैं भी लन्ड की ताक में रहती हूँ और कोई मौक़ा हाथ से खाली नहीं जाने देती ? मैं इस बात की कतई परवाह नहीं करती की लन्ड है किसका ? मुझे अगर लन्ड पसंद आ गया तो वह पहले मेरे मुंह में जायेगा और फिर मेरी चूत में। मैं अपनी इसी आदत की वजह से रंगे हाथों पकड़ी गयी हूँ। मुझे पकड़ने वाली कोई और नहीं बल्कि मेरी बेटी ही थी। पहले तो मैं थोड़ा झिझकी पर फिर सोंचा की मेरी बेटी भी तो जवान हो गयी है। उसे भी लन्ड की जरुरत है। इसलिए मैं एकदम बिंदास खुल कर बोलने लगी।
हुआ यह की उस समय गर्मी के दिन थे। दोपहर का समय था। मैं घर में अकेली ही थी। बहू अपने माईके गयी थी और बेटी अपनी साहेल के घर। इतने में मेरे गाँव का देवर आ गया। उसके साथ उसका एक दोस्त भी था। मैंने कहा अरे मजीद तू इतनी धूप कहाँ घूम रहा है यार। लू लग गयी तो बहुत तकलीफ होगी। वह बोला अरे भाभी यहाँ कुछ काम था इसलिए आना पड़ा। अब काम ख़तम हो गया तो सोंचा की चलो बसीमा भब ही से मिलता चलूँ। मेरे साथ ये मेरा दोस्त फ़राज़ भी चल पड़ा। मैंने कहा अच्छा बैठो पहले ठण्डा पानी पियो। मैंने उन्हें पांणी पिलाया और फिर कुछ बातें होने लगीं। कमरे में ए सी था इसलिए गर्मी जल्दी ही छू मंतर हो गयी। अब कुछ गरमागरम बातें होने लगीं। बातों में मज़ा आने लगा। बदन में सुरसुरी होने लगी।
मैंने कहा मजीद आजकल तो गाँव भी शहर बन रहे हैं। तो तुम्हे वहां भी लड़कियां खूब मिलती होंगी। वह बोला हां भाभी बात तो तुम्हारी बिलकुल सही है। अब तुम तो जानती हो भाभी की मुझे लड़कियां चोदने का शौक है ? और मुझे लड़कियां मिल भी जातीं हैं। मैंने कहा अरे यार क्यों नहीं मिलेगीं। तेरा लौड़ा खुदा ने इतना बड़ा और मोटा बनाया है तो लड़कियां बहन चोद अपने आप मिलेगीं। वह बोला अरे भाभी लड़कियां क्या अब तो लड़कियों की माँ भी आने लगीं हैं। मैं तो बहुत बिजी हो गया हूँ। मैंने कहा तू नहीं तेरा लन्ड बहुत बिजी हो गया है, मादर चोद । मैंने देखा की मेरी बातों का असर उसके दोस्त पर भी पड़ रहा है। तब तक वह बोला अरे भाभी जानती हो लड़कियों की माँ तो सबसे ज्यादा फ़राज़ के पास आतीं हैं। खुदा ने इस पर भी मेहरवानी की है। मैंने कहा हाय दईया तब फिर जल्दी से दिखाओ न इसका लन्ड मुझे। तूने तो यह कह मेरी चूत में आग लगा दी है यार. बस मैं आगे बढ़ी और फ़राज़ के पैजामे का नाड़ा खोलने लगी।
समीना बड़े गौर से मेरी कहानी सुन रही थी।
मैंने लन्ड हिलाया तो वह खड़ा हो गया। मैंने फिर उसका पैजामा खोल कर फेंक दिया तो लौड़ा मेरे सामने तन कर खड़ा हो गया। तब तक मजीद भी मेरे आगे नंगा हो गया। मैं दोनों अपने दोनों हाथों से लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी। तब तक मजीद ने मेरे कपड़े भी उतार दिया। अब कमरे में हम तीनो नंगे थे। मुझे नंगे लन्ड देखने का शौक है ही। मैं मस्ती करने लगी, लन्ड चूमने लगी और चूसने लगी लन्ड ? मैंने न खिड़की की परवाह की और न दरवाजे की। अचानक मेरी बेटी लैला कमरे में आ गयी। वह बोली हाय दईया अम्मी ये क्या हो रहा है ? मैं उसके बात सुनकर थोड़ा झिझक गयी लेकिन फिर हिम्मत करके बोली पहले ये बता की तू कहाँ से आ रही है अपनी माँ माँ चुदवा के भोसड़ी वाली ? मैंने जान बूझ कर गालियां दीं ताकि उसकी शर्म ख़तम हो जाये। वह मैन कहाँ गयी थी मैं तो यहीं थी। बस थोड़ी देर के लिए पड़ोस में गयी थी। मैंने फिर सवाल दाग दिया तो वहां किसका लन्ड हिलाने गयी थी तू माँ की लौड़ी ?
वह बोली अरे अम्मी तुम ये सब क्या कह रही हो ? उससे रहा न गया और फिर थोड़ा हिम्मत करके बोली अम्मी सच तो यह है लन्ड तुम हिला रही हो। वह भी एक नहीं दो दो लन्ड ? मैं पड़ोस में लन्ड हिलाने नहीं गयी थी। आंटी से पता पूंछने गयी थी बस ? मैंने कहा अच्छा ठीक है वहां लन्ड नहीं हिलाया तो फिर यहाँ हिला ले लन्ड। ले पकड़ अपने मजीद अंकल का लन्ड ? मैंने उसे बड़े प्यार से लन्ड दिखाते हुए कहा। वह थोड़ा झिझकी तब मैंने कहा अरे बेटी जवानी बिना लन्ड के नहीं कटती। शर्म छोड़ और आ जा मैदान में ? बचपन तेरा गया। बचपन में लड़की दूध पीती है और जवानी में लन्ड पीती है। ले पी ले ये मस्ताना लन्ड ? मेरी बात का असर हुआ। लन्ड देख कर तो वह भी लालच गयी थी। उसने हाथ बढ़ाया तो मैंने मजीद का लन्ड पकड़ा दिया। उसने लन्ड मुठ्ठी में लिया और ऊपर नीचे करने लगी। मैंने फिर कहा बेटी कल को तेरी शादी होगी तो अभी से लन्ड का मज़ा लेना सीख ले। चुदाना सीख ले। गालियां दे दे कर चुदवाना सीख ले ताकि ससुराल में कोई तुझे अनाड़ी न समझे ?आज से मैं तेरी दोस्त हूँ समझी बुर चोदी, लैला।
वह बोली हां अम्मी मैं बिलकुल समझ गयी। मैंने फ़राज़ का लौड़ा हाथ में लिया और मस्ती से उसे घुमा फिरा के चारों तरफ से देखने लगी। मुझे लौड़ा बड़ा मस्त मोटा और ताज़ा लगा और मैं उसी में बिजी हो गयी। अचानक मेरी नज़र जब लैला पर पड़ी तो जाना की वह तो बड़ी अच्छी तरह से लन्ड चाट रही है, चूस रही है और लन्ड से बातें भी कर रही है। वह बोल रही थी - हाय मेरे लौड़े मियां तुम तो बड़े सयाने निकले ? तूने मुझसे पहले मेरी माँ के ऊपर हमला बोल दिया। तुम तो बहुत बड़े मादर चोद हो, यार ? बहुत बड़े हरामजादे हो ? तेरी बहन का लन्ड साले ? लन्ड महराज आज मैं तेरा सारा तेल निकाल लूंगी। वह फिर बोली हाय मजीद अंकल तूने इतना बढ़िया लन्ड मुझे पहले क्यों नहीं पकड़ाया। तेरी गांड फट रही थी क्या, अंकल ? फिर उसने आधे से अधिक लन्ड अपने मुंह में भर लिया। अंदर ही अंदर लन्ड के सुपाड़े के चारों ओर जबान घुमाने लगी।
मजीद तो मस्ती के मारे सिसयाने लगा। मैं समझ गयी की लैला बुर चोदी बहुत दिनों के लन्ड चूस रही है। उसने मुझे कभी यह बात नहीं बताई ?
मैंने पूंछा - लैला सच बताओ की तुम कब से लन्ड चूस रही हो ?
वह बोली - अम्मी, अब मैं तुमसे सच नहीं छुपाऊँगी ? मैं पिछले २ साल से लन्ड चूस रही हूँ। अब तक कई लन्ड चूस चुकी हूँ।
मैंने कहा - तेरी माँ का भोसड़ा लैला, तू तो बड़ी सायानी निकली । अब तू यह भी बता दे की कितने लन्ड तू अपनी चूत में ले चुकी है ?
वह बोली - लन्ड तो मैं कई ले चुकी हूं अपनी चूत में लेकिन मैंने कोई गिनती नहीं की ? अब मैं पूंछती हूँ तुम बताओ की तुमने अब तक कितने लन्ड अपनी चूत में पीला है अम्मी ? भला कोई लन्ड गिन गिन कर चुदवाती है क्या ? इसका जबाब न मेरे पास है और तेर पास अम्मी ?
मैंने कहा - हाय अल्ला, तू तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ निकली, लैला ?
वह बोली - मैं कितनी भी बड़ी चुदक्कड़ हो जाऊं पर तुमसे कम ही रहूंगी, अम्मी ?
फिर हम दोनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।
उस दिन हम दोनों ने खूब मस्ती से चुदवाया। एक दूसरे के चूत में लन्ड पेल पेल कर चुदवाया और दोनों लन्ड से एक साथ भी चुदवाया। रात भर बहन चोद यही होता रहा।
कुछ दिन बाद लैला की शादी हो गयी और वह अपनी ससुराल चली गयी। इधर मेरे बेटे की भी शादी हो गयी। वह शादी के एक महीने के बाद दुबई काम पर चला गया। अब घर पर हम दोनों सास बहू रह गयी। मेरी बहू रफ़ा बेहद खूबसूरत है, सेक्सी है और हॉट है। उसे देख कर मुझे यकीन हो गया की मेरी बहू भी लन्ड की दीवानी होगी। क्योंकि कोई भी खूबसूरत बीवी बिना ग़ैर मरद के लन्ड के रह ही नहीं सकती। वह भोसड़ी वाली शादी के पहले भी चुदवाती है और शादी के बाद भी गैर मर्दों से चुदवाती है। यही हाल मेरा भी है और मेरी बेटी का भी ? अब देखना यह है की मेरी बहू रफ़ा क्या क्या गुल खिलाती है. अभी एक महीना ही हुआ की मेरी बेटी कुछ दिन के लिए यहां आ गयी है। फिर हम दोनों अपनी बहू पर नज़र रखने लगीं। हमारा यह मकसद था की बहू भी हमारी तरह हो जाए तो अच्छा है।
एक दिन रफ़ा लैपटॉप पर बैठी थी। तभी अचानक लैला उसके पास पहुँच गयी। बहू शायद अपना ईमेल देख रही थी। इतना में उसका फोन बज उठा. फोन शायद उसकी अम्मी का था इसलिए वह बात करने के लिए दूसरे कमरे में चली गयी। इधर उसका लैपटॉप खुला ही रह गया। बस लैला को मौक़ा वह उसके मेल्स देखने लगी। उसमे एम् सन्देश मिला। लिखा था -
"रफ़ा यार तेरी शादी हो रही है। तू ससुराल चली जाएगी तो हम लोगों का क्या होगा ? अब हमारे लन्ड कौन पकड़ेगी ? हम तीनो शैफ अली, साजिद और आरिफ को तेरी याद बहुत आएगी। हम लोग जब तुम्हे एक साथ मिलकर चोदते हैं तो हमें ज़न्नत का मज़ा आता है। अब पता नहीं यह मज़ा मिलेगा भी की नहीं ? तुम्हारे दोस्त "
जबाब में रफा ने लिखा -
"नहीं यार तुम लोगों को निराश होने की जरुरत नहीं है। मैं जल्दी जल्दी आती रहूंगी और तुम लोगों से चुदवाती रहूंगी। मैं भी बिना तुम लोगों से चुदवाये रह ही नहीं सकती। तुम्हारी रफ़ा"
लैला ने फौरन मुझे बुला कर यह संदश पढ़वा दिया। अब तो बहू की सारी पोल खुल गयी। तब तक बहू वापस आ गयी। उसे मालूम ही नहीं हुआ की हम दोनों ने उसका सन्देश पढ़ लिया है।
दूसरे दिन वह फोन पर बोल रही थी - हाय अम्मी मेरी सास और नन्द दोनों ही बड़ी अच्छी हैं ,,,,, ? सास तो अभी मस्त जवान है बहन चोद ,,,,? नन्द भी बुर चोदी बड़ी सेक्सी और हॉट है ,,,,,,, ? खालू और फूफा दोनों मस्त हो जायेगें इन्हें चोद कर, अम्मी ,,,,,,,? मुझे मालूम हुआ की मेरी नन्द का ससुर साला बड़ा चोदू है ,,,,,,,,,? वह मेरी दोस्त का अब्बू है ,,,,,,? उसके लन्ड की बड़ी तारीफ सुनी है,,,,,,,,,,? देखा नहीं है अभी तक मैंने ,,,,,,? हां हां लगता तो है की मेरी सास और नन्द दोनों बुर चोदी चुदक्कड़ हैं ,,,,,,,, ? मैं किसी दिन नन्द की बुर चोदूंगी और उसकी माँ का भोसड़ा ? तब आएगा मज़ा ,,,,, ? अच्छा आदाब अम्मी।
हम दोनों ने उसकी फोन की बातें सुन लीं। वह मुड़ी तो पीछे हम दोनों खड़ी थी। वह हमें देख कर सकपका गयी। उसे लगा की मेरी गन्दी गन्दी बातें इन लोगों ने सुन लीं हैं। वह डरी सहमी थोड़ी देर तक खड़ी रही। तब मैंने मुस्कराते हुए कहा अरे बहू डरने की कोई बात नहीं ? ये तो अच्छा हुआ जो तूने अपनी अम्मी से बात कर ली। अब बस तू यह मुझे बता दे की तेरे खालू का लन्ड बड़ा है की तेरे फूफा का लन्ड ? तुझे दोनों में से किसका लन्ड ज्यादा पसंद है ? तब तक लैला बोली अरे भाभी जान तेरी दोस्त का अब्बू मेरा ससुर है तो इसका मतलब मेरी नन्द निगार तेरी दोस्त है। और मैं तेरी नन्द हूँ। अब तो मैं अपनी नन्द को छोड़ूंगी नहीं। उसकी चूत में मैं पेलूंगी लन्ड। मैंने तो यह बात पहले ही सोंच ली थी। है मैंने अभी तक अपने ससुर का लौड़ा नहीं देखा। तो भाभी जान तेरी सहेली ने तो बताया होगा की उसकेअब्बू का लन्ड कैसा है ? उसके लन्ड का साइज क्या है और देखने में कैसा लगता है लन्ड ? अरे वही तो है मेरा भोसड़ी का ससुर ? अगर लौड़े में दम है तो मैं उसे अभी किसी बहाने बुला ले लेती हूँ। मैंने भाभी को मोबाइल देते हुए बड़े प्यार से कहा लो भाभी बात करों न अपनी दोस्त से। रफ़ा ने अपनी नन्द की बात मान ली और हमारे सामने ही बात करने लगी।
उधर तब तक मेरी पड़ोसन शकीला आ गयी। मैं उससे बातें करने लगी। मेरे बगल में मेरी बेटी लैला बैठी थी और थोड़ी देर में रफ़ा भी आकर बैठ गयी। शकीला बात करते करते बोली यार बसीमा कल रात को बड़ा मज़ा आया। कल मेरी खाला का लड़का जो मेरी ही उम्र का है, वह आ गया। मैं उससे बातें कर ही रही थी की मेरी बेटी आ गयी और मेरे सामने ही उसके पैजामे में हाथ घुसेड़ कर उसका लन्ड सहलाने लगी। वह बोली हाय मामू जान आज तो तेरा लन्ड तो पहले से कुछ ज्यादा मोटा हो गया है। उसने फिर पैजामा खोल कर उसका लन्ड चाटने चूसने लगी। तब फिर मुझे भी ताव आ गया। मैं उसके कमरे में गयी और उसके मियां का लन्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लन्ड भी साला एकदम से तन कर खड़ा हो गया । फिर मैं उसे बाहर ले आयी और अपनी बेटी के सामने ही उसके मियां का लन्ड चाटने चूसने लगी। जानती हो बसीमा फिर क्या हुआ ? मेरी बेटी के मामू ने मेरी बेटी की बुर लेना शुरू कर दिया और उसे झमाझम चोदने लगा। इधर मैं भी उसके आमने उसके मियां से भकाभक चुदवाने लगी।
रात भर हम दोनों लन्ड अदल बदल कर चुदवाती रहीं और तभी मेरे मन में आया की मैं क्यों न आज बसीमा का भोसड़ा चुदवाऊँ ? इसलिए मैंने दोनों को रोक लिया है और मैं चाहती हूँ की आज रात को तुम लोग उन दोनों लन्ड का मज़ा लो। मैंने कहा की "नेकी और पूंछ पूंछ" अब भेज दो न उन दोनों को मेरे पास। अब तो मेरी बहू भी आ गयी है। अब हम तीनो मिलकर चोदेगीं उन दोनों के लन्ड ? तब तक लैला बोली अम्मी उन दोनों के लन्ड नहीं उन तीनो के लन्ड चोदेगीं। मेरा ससुर भी आ रहा है। मेरे पास मैसेज आ गया है। शकीला के जाने के बाद लैला और रफ़ा ने मिलकर ड्रिंक्स का सारा इंतज़ाम और चुदाई का सारा इंतज़ाम कर लिया। हम तीनो बड़ी मस्ती के मूड में आ गयीं।
मैंने मजाक करते हुए कहा - बेटी लैला, आज चुदेगा तेरी भाभी की सास का भोसड़ा, बहन चोद ?
लैला भी उसी जोश में बोली - हां अम्मी तू सही कह रही है, आज तो चुदेगी तेरी बहू की नन्द की चूत ? तब आएगा असली मज़ा। साली कई दिनों से चरमरा रही है उसकी चूत ?
फिर बहू से भी न रहा गया। वह भी बोल पड़ी - नन्द रानी. आज चुदेगी तेरी माँ की बहू की बुर ? उसकी बुर भोसड़ी की लन्ड खाने के लिए देखो न अपना मुंह खोले कैसे इधर उधर घूम रही है।
फिर हम तीनो खूब खिलखिला कर हंसने लगीं।
मैंने लगे हाथ गालियों का दूसरा दौर भी चालू कर दिया। रफ़ा बोली नन्द रानी तेरी माँ का भोसड़ा ? आज मैं तेरी माँ का चोदूंगी भोसड़ा ? लैला ने कहा हाय अम्मी मैं तेरी बहू की बुर में घुसेड़ दूँगी लन्ड ? आज मैं चोद डालूँगी उसकी चूत ? मैंने कहा बहू कुछ भी हो जाए ? आज तेरी नन्द की बुर बच नहीं पायेगी ? बहन चोद तेरी बुर चोदी नन्द की बुर ? इस तरह हम तीनो एक दूसरे को गालियां दे दे कर खूब एन्जॉय करतीं रहीं।
इतने में शकीला उन दोनों के साथ मेरे घर आ गयी। उसने बताया ये है ताहिर मेरा मौसेरा भाई और ये है साजिद मेरी बेटी का शौहर। मैं उन दोनों को देख कर मस्त हो गयी। तब तक लैला भी अपने ससुर को लेकर कमरे में आ गयी। उसने सबसे कहा है ये है मेरा ससुर अजमल। मैं तो मन ही मन इन सबके लन्ड के बारे में सोंचने लगी। शकीला चली गयी और इधर हम सबने दारू का मज़ा लेना शुरू कर दिया। दारू के साथ होने लगीं गरमागरम मसालेदार बातें ?
- मैंने पूंछा ताहिर और साजिद सुना है कल तुम लोगों ने माँ बेटी की खूब बजाई चूत ।
- ताहिर बोला अरे यार मैं क्या करता ? मैं जब भी आता हूँ तो शकीला न मुझे छोड़ती है और न मेरे लन्ड को ? कल तो हद ही हो गयी। शकीला से ज्यादा उसकी बेटी बेशरम निकली। उसने अपनी अम्मी के सामने ही मेरा लन्ड पकड़ लिया तो फिर मैं क्या करता ? वही किया जो करना था।
- साजिद बोला मेरे साथ भी है हुआ। मैं तो अपनी बीवी की बुर लेता ही हूँ। कल मैंने अपनी बीवी की माँ की बुर ले ली। मुझे अपनी बीवी की माँ चोदने में बड़ा मज़ा आया।
- तब तक रफ़ा बोली हाय अजमल अंकल तुम मेरी दोस्त के अब्बू हो और इधर से तुम मेरी नन्द के ससुर हो। मैं तो तुम्हे बहुत पहले से जानती हूँ। पर आजतक तेरा लन्ड नहीं पकड़ा अंकल।हां तेरे लन्ड की तारीफ बहुत सुनी है।अब तो तेरे लन्ड पर मेरा दोनों तरफ से हक़ है। पहले तो मैं अपनी दोस्त के अब्बू का लन्ड चोदूँगी और फिर चोदूंगी अपनी नन्द के ससुर का लन्ड ? आज तेरे लन्ड की ख़ैर नहीं है अजमल अंकल ?
- लैला बोली हाय दईया सारा माल तुम ही ले लोगों क्या मेरी बुर चोदी भाभी जान ? मैं भी तो लन्ड चोदूंगी। एक दो नहीं मैं तो तीनो के लन्ड चोदूँगी।
- अब तो माहौल बहुत ही गरम हो चुका था। अब किसी के ऊपर एक भी कपड़ा बरदास्त नहीं हो रहा था। मुझे भी ताव आ गया। मैंने अपना भोसड़ा खोल कर कहा तो फिर मेरा भोसड़ा क्या तेरे बाप चोदेगा बहू रानी ?
बस थोड़ी ही देर में एक ही कमरे में मैं अपनी बेटी के ससुर से चुदवाने लगी. मेरी बेटी लैला साजिद के लन्ड अपनी चूत में घुसेड़ कर चुदवाने लगी और मेरी बहू ने ताहिर का लौड़ा अपनी बुर में घुसा लिया। हम सब बिलकुल रंडियों की तरह भकाभक चुदवाने लगीं।
मैं मन में यही कह रही थी की ये तीनों भोसड़ी वाली सास, बहू और नन्द देखो कितनी चुदक्कड़ हैं।
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