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Jawani ka majaa kaise luta jaata hai - जवानी का मज़ा कैसे लूटा जाता है
मैंने जैसे ही फरज़ाना आंटी से बात शुरू की और कहा - आंटी तेरी बेटी कह रही थी की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,?
बेटी की माँ की चूत बहू की बुर ?
वह बीच में ही मुझे टोक कर :- मेरी बेटी की माँ की चूत ? वह भोसड़ी वाली मुझसे ज्यादा जानती है क्या ? मैंने जब एक बार कह दिया की लण्ड चाहे जिसका हो अगर तुझे पसंद आ गया है तो उसे अपनी चूत में पेल ले। अपनी माँ के भोसड़ा में घुसा दे. अपनी बहन की बुर में घुसेड़ दे, अपनी भाभी का भोसड़ा चोद ले। इस तरह मस्ती से चुदवा ले अपनी बुर और हम सबकी बुर ? फिर इसमें बार बार पूंछने की जरुरत क्या है ?
मैंने कहा :- आंटी जी आपकी बात सही है पर आपकी बहू भी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,?
वह फिर मुझे टोक कर बोली :- मेरी बहू की बुर चोदी बुर ? उसकी माँ की गांड ? वो तो बिचारी अभी ठीक से लन्ड का मज़ा ले ही नहीं पाती। उसकी माँ ने लन्ड का पूरा मज़ा लेना सिखाया ही नहीं उसे ? माँ होने का कर्त्तव्य निभाया उसने ? और लन्ड पीना सिखाया उसने कभी अपने बेटी को ? वो तो भोसड़ी की अपनी बुर खोल देती थी और लोग उसमें अपना अपना लन्ड घुसेड़ा करते थे। उसे तो जवानी का मज़ा लेना और लण्ड का मज़ा लेना आता ही नहीं तो वह भोसड़ी की अपनी बेटी को क्या सिखाएगी ? अब वह मेरे घर की बहू है ? अब मैं उसे सिखाऊंगी की लन्ड क्या होता है ? लण्ड का मज़ा कैसे लिया जाता है ? देखना एक दिन वह बड़ी अच्छी तरह लण्ड का मज़ा लूटने वाली बहू बन जाएगी।
आंटी फिर बोली - देखो सुलेखा मैंने तो अपनी बहू बेटियों से कह रखा है की तुम लोग जवानी में खूब एन्जॉय करो। खुले आम लण्ड पकड़ो और पकड़ाओ। लण्ड पेलो और पेलवाओ। बुर चोदो और चुदवाओ। कोई शर्म करने की जरुरत नहीं है। जवानी में लण्ड न मिले तो जवानी बेकार है। जवानी में चूत न मिले तो जवानी बेकार है ? इसलिए न किसी लण्ड से परहेज करो और न किसी चूत से ? चाहे अपनी माँ चुदाओ, अपनी बेटी चुदाओ, बहू चुदाओ, सास चुदाओ चाहे नन्द की बुर चुदाओ पर चुदाओ। मेरी दो बेटियां है दो बहुयें। हम सब मिलकर चोदा चोदी करतीं हैं। माँ की चूत हो चाहे बेटी की बुर, सास का भोसड़ा हो चाहे बहू की चूत नन्द की चूत हो चाहे भौजाई की बुर। लन्ड सबमें पेलो। खूब जम कर एक साथ चुदाई करो। प्यारी प्यारी और मस्त मस्त गालियां बको। एक दूसरे के अंदर चुदाई का जोश भरो और ज़िन्दगी का असली मज़ा लो ?
मेरा नाम सफीका है दोस्तों। आंटी की बातों का मेरे दिमाग में बहुत असर कर गया और मैं भी बिंदास होकर लड़कों के लण्ड पकड़ने लगी, लण्ड हिलहिला कर चाटने और चूसने लगी। मुठ्ठ मार मार लण्ड पीने लगी। लण्ड का पूरा पूरा मज़ा लेने लगी।
लण्ड तो मैंने १५ साल की उम्र से पकड़ना शुरू कर दिया था। उस समय लण्ड पकड़ कर हिलाना, लण्ड चाटना,
लण्ड चूसना, लण्ड के साथ पेल्हड़ चूमना और चाटना, लण्ड की झांटें बनाना, लण्ड का मुठ्ठ मार कर पीना मैं सब कुछ कुछ ही दिनों में सीख गयी थी। मैं जब १८ + की हुई तो अम्मी ने मुझे और बोल्ड बना दिया। उसी दिन से अम्मी मुझसे गालियों से बातें करने लगीं। वह मुझसे मादर चोद, बहन चोद, भोसड़ी की, माँ की लौड़ी आदि कह कर बुलाने लगी। मेरे सामने ही अपने कपड़े पहनने और उतारने लगीं। एक दिन मैंने उसे पूरी नंगी देख लिया। वह भी मुझे नंगी होते हुए देखने में इंटरेस्ट लेने लगीं। एक दिन वह लैपटॉप पर बैठी हुई थी तो मुझे बुला कर पूंछा बेटी सफीका यह बता की तुझे किस तरह के लण्ड पसंद हैं ? देखो मैं तुम्हे कई तरह के लण्ड दिखाती हूँ। उसने साइट खोली तो उसमे दर्जनों लण्ड दिखाई पड़े। वह फिर बोली अब तू इनमे से छांट ले लण्ड सफिका और मुझे बता की मैं तेरे लिए किस तरह के लण्ड का इंतज़ाम करूं ?
मैं अम्मी की यह बात सुनकर हैरान रह गयी। मैं सोंचने लगी की मैं क्या जबाब दूँ ? मैं थोड़ी शर्मा भी गईं थी। मेरे मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। अम्मी फिर मुस्कराकर बोली अरी सफीका बोलती क्यों नहीं ? क्या लन्ड देख कर तेरी गांड फट गयी ? अम्मी गाली पर गाली सुनाती जा रहीं थीं और मैं मुंह नीचे किये हुए सुनती जा रही थी। अम्मी ने फिर कहा अब तू ज्यादा मुझे चूतिया बनाने की कोशिश न कर ? अच्छा बता की इसमें कौन सा लण्ड तेरे जीजू के लण्ड से बड़ा है और कौन सा लण्ड तेरे खालू के लण्ड से बड़ा है ? मैं समझ गयी की अम्मी को मालूम हो गया है की मैं जीजू और खालू का लण्ड चूसती हूँ। मैंने कहा मुझे शर्म आ रही है। अम्मी ने फ़ौरन जबाब दिया और कहा अच्छा जब तू इन दोनों का लण्ड चपर चपर चूसती है तब तुझे शर्म नहीं आती ? जब तू कॉलेज के लड़कों के लण्ड बुर्का पहन कर सिनेमा हॉल में हिलाती है तब तुझे शर्म नहीं आती ? जब तू हलीम अंकल का लण्ड पी कर आती है तब तुझे शर्म नहीं आती ? अरे तू तो हलीम से अपनी माँ चुदवाना चाहती है बुर चोदी सफीका, तेरी माँ की चूत मुझे सब मालूम है ? अब तू सही सही बता दे मुझे नहीं तो मैं एक मोटा लण्ड पेल दूँगी तेरी चूत में ?
अब मेरे पास दो ही ऑप्शन थे। पहला मैं भी अम्मी की तरह बेशर्म हो जाऊं, अम्मी से बिलकुल खुल जाऊं और चुदवाने लगूं और दूसरा की मैं किसी अच्छे लण्ड वाले लड़के के साथ भाग जाऊं ? मैंने पहला ऑप्शन चुना और फ़ौरन चार लण्ड पर ऊँगली रख कर बोली की ये चारों लण्ड खालू और जीजू के लण्ड से बड़े है और मोटे भी हैं। अम्मी ने कहा इनमे कौन सा लण्ड तू अपनी माँ के भोसड़ा में पेलेगी ? मैंने जबाब दिया कोई नहीं ? मैं तो हलीम अंकल का ही लण्ड अपनी माँ के भोसड़ा में पेलूँगी। मैं पहले चोदूँगी अपनी माँ की चूत ? फिर इनमे से कोई सा भी लण्ड अम्मी की बिटिया की बुर में घुसा दूँगी। अम्मी खिलखिलाकर हंसने लगीं।
वह बोली देखो बेटी सफीका मैं भी १५ साल की उम्र में लण्ड पकड़ना शुरूं किया था और तब से आज तक पकड़ रही हूँ। मैंने १७ साल की उम्र में चुदवाना शुरू कर दिया था और आज तक भकाभक चुदवा रही हूँ। मैंने अपनी ज़िन्दगी में सेक्स खूब एन्जॉय किया है। एक से एक बेहतरीन लण्ड का मज़ा लिया है। देशी विदेशी लण्ड का मज़ा लिया है। बुर है बहन चोद तो इसमें लण्ड नहीं पेलूँगी तो क्या पेलूँगी ? इसे तो सिर्फ लण्ड चाहिए और कुछ भी नहीं। इसीलिए मैं चाहती हूँ की मेरी बेटी भी जवानी का मज़ा खूब लूटे। मैं तेरे जवान होने का इंतज़ार कर रही थी। मैंने सोंच लिया था की जब सफीका १८ साल की हो जाएगी तब मैं उसे माँ चुदाना सिखा दूँगी। उसे लण्ड का मज़ा लेना सिखा दूँगी। चुदवाना सिखा दूँगी। साथ ही साथ प्यार से गालियां देने भी सिखा दूँगी। प्यार की गालियां चुदाई में आग में घी का काम करतीं हैं।
फिर अम्मी ने कहा सफीका तू बैठ मैं अभी आती हूँ। वह बाहर गयीं और १० मिनट के बाद वापस आ गयीं। इस बार वह एक पेटीकोट पहने थी। ऊपर कुछ भी नहीं। उसकी बड़ी बड़ी चूँचियाँ एकदम नंगी थीं। उसके साथ एक अधेड़ उमर का आदमी था वह भी नंगा। अम्मी उसका खड़ा लण्ड मुझे पकड़ाते हुए बोली ले भोसड़ी की सफीका पकड़ अपनी दीदी के ससुर का लण्ड ? देख यह वही लण्ड है जिस पर तूने ऊँगली रखी थी। मैंने लण्ड पकड़ लिया और उसे हिलाते हुए चारों तरफ से घुमा घुमा कर देखने लगी। लण्ड तो वाकई बड़ा मस्त था। तभी अम्मी बोली है न तेरे जीजू के लण्ड के बड़ा लण्ड ? तेरे खालू के लण्ड से बड़ा लण्ड ? अब तू पेल दे अपनी माँ के भोसड़ा में यही लण्ड बुर चोदी सफीका ? ऐसा कह कर अम्मी मेरे कपड़े उतारने लगीं और कहने लगीं की बेटी जब लण्ड हाथ में हो तो बदन पर कपडे अच्छे लगते ?
मैं भी मादर चोद एकदम नंगी हो गयी। तब तक दीदी के ससुर ने अम्मी का पेटीकोट खोल कर फेंक दिया और कहा भाभी तुम नंगी नंगी ज्यादा हसीन लगती हो ? मैं तो जबान निकाल कर लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। तब तक एक और लण्ड मेरे कंधे पर आ गया। मैंने गर्दन घुमा कर देखा तो वह साला बड़ा मोटा था। मैंने उसे भी पकड़ा और मस्ती से सहलाने लगी। अम्मी ने कहा बेटी यह तेरे दीदी के ससुर का दोस्त है। इसका लण्ड तेरी दीदी को भी बहुत पसंद है। मैंने कहा अम्मी यह भी वही लण्ड है जिस पर मैंने ऊँगली रखी थी। तब अम्मी ने बताया हां बेटी तूने सही कहा। मैंने तुम्हे जो लण्ड की लिस्ट दिखाई थी वह नेट की नहीं थी बल्कि उन लौंड़ों की थी जो लौड़े मुझे चोदते हैं। मैं मुझे चोदने वाले लण्ड की फोटो खींच लेती हूँ और उसकी अलबम बना लेती हूँ। मैंने जो अलबम तुम्हे दिखाई वो तो आधे लौंड़ों की है। आधे लौड़े अलबम तोअभी तुमने देखी ही नहीं पगली। तेरी माँ बुर चोदी बहुत बड़ी अय्यास है। वह तो हमशा लण्ड की भूंखी रहती है।
मैंने भी बड़ी बेशर्म हो चुकी थी। मैंने अम्मी को वो लण्ड दिखाते हुए लाहा अम्मी अब ये लण्ड तेरी बिटिया की बुर चोदेगा। अम्मी की ख़ुशी का ठिकाना न था। मैं उसे खुश देख कर और खुश हो गयी। मैंने दीदी के ससुर का लण्ड अम्मी के भोसड़ा में पेल दिया तो अम्मी ने उसके दोस्त का लण्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया। हम दोनों आमने आमने मंजी हुई रंडियों की तरह चुदवाने लगीं।
अम्मी मस्ती में आकर बोली :- सफीका तू माँ की लौड़ी बहुत बेशर्म हो गयी है। अपनी माँ का भोसड़ा चुदवा रही है ? तेरी दीदी की माँ की चूत ?
मैं भी मस्ती में थी। मैंने भी कहा :- हमीदा ( अम्मी का नाम ) तू भोसड़ी की अपनी बेटी की बुर चुदवा रही है। लण्ड पेल रही है उसकी बुर में ? तेरी बेटी की बहन का लण्ड ? तेरी बेटी की माँ का भोसड़ा।
बस हमारी प्यारी प्यारी गालियां सुनकर लण्ड साले और जोश में आ गए। चुदाई की स्पीड बढ़ने लगी और हम दोनों भी अपनी अपनी गांड उठा उठा के चुदवाने लगीं।
बस उस दिन से हम दोनों माँ बेटी नहीं बल्कि चोदा चोदी करने वाली एक दूसरे की दोस्त बन गयीं। बस अगले हफ्ते मेरी रिदा भाभी अपने माईके से आ गयी। मेरे भाई जान तो अरब में काम करतें हैं वह साल २/३ बार ही आतें हैं। मैंने देखा की भाभी के चेहरे का नूर कुछ ज्यादा ही निखार आया है। उसकी चूँचियाँ कुछ बढ़ गयीं हैं और गांड भी मोती हो गयी है। मैं और अम्मी आस पास ही बैठी थी। भाभी के साथ भाभी का जीजू भी था। मैंने उसे दूसरी निगाह से देखा तो मेरी चूत चुहचुहाने लगी। उसकी उम्र ३० से ज्यादा नहीं होगी। अम्मी ने भाभी का और उसके जीजू का खैरमकदम किया और खूब प्यारी प्यारी बातें की। थोड़ी देर में उसका जीजू चला गया। अचानक अम्मी का मूड कुछ हंसी मजाक का बन गया।
वह बोली - रिदा बहू इस बात तू कुछ ज्यादा ही खूबसूरत दिखाई पड़ रही है। तेरी तो चूँचियाँ भी बढ़ गयीं हैं ?
वह बोली - अरे सासू जी इनका काम तो बढ़ना ही है ?
मैंने कहा - हाय दईया, मरद जब चूँचियाँ मसलेगें तो ये तो बुर चोदी चूँचियाँ बढ़ ही जायेंगीं न ?
अम्मी - इसका मतलब इस बात तू खूब चुदवा कर आयी है, बहू ?
भाभी - अब अगर कोई चोदने वाला मिल जाये तो फिर कौन भोसड़ी वाली नहीं चुदवायेगी, सासू माँ ?
अम्मी - अपनी माँ चुदवाई है न बहू तूने ? अगर चुदवाई है तो बता कितनी बार चुदवाई है.
भाभी - हां माँ तो जरूर चुदवाई है। कभी कभी तो रात रात भर चुदवाई है अपनी माँ ?
अम्मी - तो फिर आज तू अपनी नन्द की माँ का भोसड़ा भी चुदवा ले रिदा ?
मैंने कहा - और अपनी सास की बिटिया की बुर भी चुदवा ले भाभी जान ?
भाभी - हाय अल्ला, क्या तुम दोनों इतनी खुल चुकी हो आपस में ? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है ?
अम्मी - तेरी बुर चोदी नन्द की बुर, बहू ? आज तुम अपनी नन्द की बुर चोद डालो मेरे सामने ?
मैंने कहा - भाभी तेरी मादर चोद सास का भोसड़ा ? आज तुम अपनी सास के भोसड़ा में लण्ड पेलो मेरे आगे। मैं तेरी मदद करुँगी। इसका बहन चोद भोसड़ा लण्ड पे लण्ड खता चला जाता है और डकार तक नहीं लेता ?
अम्मी - बहू, तेरी नन्द की बुर साली कुतिया की तरह सबसे चुदवाती रहती है ? इसकी माँ की चूत ?
मैंने कहा - अच्छा भाभी सच्ची सच्ची बता की तेरे जीजू का लण्ड कितना बड़ा है ?
भाभी - तू खुद ही पकड़ कर देख ले न मेरी नन्द रानी ? मैं बता दूँगी तो फिर तुझे मज़ा नहीं आएगा ?
हम लोग बातें कर ही रहीं थीं की अचानक मेरा जीजू आ गया। उसे देख कर तो मेरी चूत की आग भड़क गयी। मेरा मन हुआ की आज तो जीजू का लौड़ा मैं अपनी चूत में घुसा कर ही मानूगीं। क्योंकि पिछली बार मैं उसका लौड़ा हिलाकर ही रह गयी थी। टाइम कम था उसे जाना था। मैंने लौड़ा मुंह में तो लिया था और चूसा भी था लेकिन चुदवा नहीं पाई थी। अब मुझे यह नहीं मालूम की अम्मी ने उसका लौड़ा पेला है अपनी चूत में की नहीं ? हमारे पास पैसों की कमी तो है नहीं। इसलिए ऐय्यासी खूब की जाती है। आपने देखा की मेरी अम्मी कितनी ऐय्यास है ? मैं कितनी ऐय्यास हूँ और मेरी भाभी भी हमारी ही लाइन की ही हैं। हमारा बस चले तो हम सड़क पर चलते हुए आदमी का लन्ड अपनी चूत में घुसा लें।
हम सब शराब का मज़ा लेने गे। बात करते करते मैंने कहा अम्मी दीदी तो ,,,,,,,,,,,,? अम्मी छूटते ही बोली सफीका तेरी दीदी की माँ का भोसड़ा ? वह क्या हम लोगों से चुदवाने में कम है ? वह भी बुर चोदी लौड़े की उतनी ही शौक़ीन हैं जितनी की हम लोग हैं । फिर किसी ने दरवाजा खटखटाया। अम्मी ने दरवाजा खोला। थोड़ी देर में अम्मी एक मौलाना के साथ हमारे सामने आ गयी। उसकी बड़ी बड़ी सफ़ेद दाढ़ी देख कर हम लोग थोड़ा सहम गयीं। अम्मी ने कहा ये है मौलाना सफीउल्लाह। इसकी उम्र है ६० साल है ? मैंने मन में कहा इस साले बुड्ढे का क्या काम हमारी महफ़िल में ? इसका तो लौड़ा भीं नहीं खड़ा होता होगा ?
तब तक अम्मी ने आज मैंने इसे अपने जश्न में बुलाया है। सुना है की इसके पास सभी मामलों का हल है ?
मैंने कहा :- अम्मी हमें आज अपने मामले हल करने हैं की एन्जॉय करना है ?
अम्मी ने बताया :- अरी सफिका बेटी सुना है की इन लोगों के लन्ड बहुत बड़े बड़े होतें हैं। ये लोग मादर चोद बहुत हरामी होतें हैं। सबकी बहू बेटियां और बीवियां चोदा करतें हैं। ये साले अपनी ही बेटियों की बुर में लौड़ा पेला करतें हैं। मेरी एक सहेली है वह अभी अभी इससे हलाला करवा कर आयी है। वह बता रही थी की इसका लौड़ा बहुत जबरदस्त है। इसीलिए मैंने इसे आज बुला लिया है।
मैंने कहा :- अम्मी हलाला क्या होता है ?
अम्मी बोली :- बस समझ लो की तलाक के बाद पराये मरद से चुदवाने को हलाला कहते हैं। बाकी पूरी कहानी बाद में बताऊंगी। वह भी शराब पीने में शामिल हो गया। मैंने मन में सोंचा की इसकी तो बड़ी बड़ी दाढ़ी है तो बड़ी बड़ी झांटें भी होगीं और मुझे तो झांट वाला लौड़ा बिलकुल पसंद नहीं है।
तब तक अम्मी ने भाभी के जीजू के लन्ड पर हाथ रख दिया और बोली बेटा तुम मेरी बहू की बुर लेते हो ? आज तुम मेरे सामने मेरी बहू की नन्द की बुर ले लो। अम्मी ने सीधे सीधे मेरी चूत पर अटैक किया। तो फिर मैं भी अपने जीजू के लन्ड पर हाथ रख बोली - जीजू तुम मेरी बहन की बुर चोदते हो ? आज तुम मेरे सामने मेरी माँ का भोसड़ा चोदो। यह सुन कर सब लोग हंस पड़े और महफ़िल में जोश आ गया।
अम्मी ने भाभी के जीजू के पैजामे में हाथ घुसेड़ दिया और लौड़ा टटोलने लगीं। इधर भाभी ने मेरे जीजू का लन्ड पकड़ लिया और उसे प्यार से पुचकारने और चूमने लगी। मैंने मौलाना के पैजामे के अंदर हाथ घुसेड़ दिया . मेरा हाथ सरसराता हुआ उसके लण्ड से टकरा गया। बीच का रास्ता बिलकुल चिकना था। मैं समझ गयी की इस भोसड़ी वाले की झांटें बनी हुई हैं। लौड़ा एकदम चिकना है। मेरा हाथ छूते ही लौड़ा बहन चोद फनफना उठा। मुझे यकीन नहीं हो रहा था की जिस आदमी के मुंह में इतने बाल है उसने लन्ड में एक भी बाल नहीं ? सच में मौलाना मादर चोद बड़ा चालू आदमी है। मैंने फिर प्रेम से उसके पैजामे का नाड़ा खोला और उसे उतार कर फेंक दिया। उसका कुरता तो पहले ही उतार चुकी थी मैं।
वह सबके सामने एकदम नंगा हो चुका था। मैं लन्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लन्ड साला एक मिनट में टन टना कर खड़ा हो गया। उधर अम्मी ने भाभी के जीजू का लन्ड खड़ा कर दिया और भाभी ने मेरे जीजू का लन्ड। तीनो लन्ड साले बुर चोदने के लिए हिनहिनाने लगे। इन तीनो में सबसे बड़ा लन्ड मौलाना का ही था। ८१/२ " का मोटा तगड़ा लन्ड देख कर मेरी तो गांड जरूर फट गयी पर मैं खुश भी बहुत थी। एक तो यह जानकार की मौलाओं के लन्ड सच में बड़े बड़े होतें हैं और दूसरा यह की आज पहली बार किसी मोठे तगड़े लन्ड से चुदवाने ला मज़ा मिलेगा। मौलाना बहन चोद झुक कर मेरी चूत चाटने लगा। उसकी दाढ़ी जब मेरी चूत में चुभी ो मुझे बहुत अच्छा लगा।
मैंने कहा अंकल आपकी दाढ़ी न होती तो अच्छा होता ? वह बोला अरे बेटी इसी दाढ़ी की बदौलत ही मुझे अच्छी अच्छी नई ताज़ी बुर चोदने को मिलती है। तलाक के बाद कई नई नई बीवियां हलाला करवाने आती हैं। मेरे लन्ड का मज़ा लूटती हैं। मैंने कहा अच्छा यह बात है तो क्या सभी मौलाओं के लन्ड इतने बड़े बड़े होतें हैं ? वह बोला हां बेटी जिसका लन्ड मोटा तगड़ा नहीं होता वह मौलाना नहीं बन सकता ? मैं भी उसकं लन्ड चाटने और चूसने में बुरी तरह लगी थी।मैं तो उसके लन्ड की गुलाम हो गयी। वह बोला सफीका तू भी अपनी अम्मी की तरह ही लन्ड चूसती है। मैं कहा मैं अम्मी की तरह चुदवाती भी हूँ। बस मैंने चूत फैला दी और लौड़ा पेल कर भकाभक बड़ी मस्ती से चुदवाने लगी।
मेरे सामने मेरी भाभी चुदवा रही थी और अम्मी भी भाभी की जीजू के लन्ड का लूट रहीं थीं। मैंने कहा अम्मी मुझे मौलाना का लन्ड पसंद आ गया है। अम्मी ने कहा यही तो बात है की बेटी की बेटियों में, बहुओं में, बीवियों में, इसका लौड़ा बड़ा मशहूर है। इसकी खुद की बेटियां भी इसका लण्ड पीती हैं। ये साला किसी की भी बुर बिना चोदे नहीं छोड़ता। लेकिन इसकी बीवी गैर मर्दों से चुदवाती रहती है।
अम्मी ने फिर कहा :- बहू, देख तेरी बुर चोदी नन्द की बुर कितनी मस्ती से चुद रही है।
भाभी ने जबाब दिया :- मेरी नन्द की माँ का भोसड़ा भी मस्ती से चुद रहा है, सासू जी ?
मैंने कहा :- अरे अम्मी, देखो तेरी बुर चोदी बहू की बुर भी कितनी अच्छी तरह चुद रही है।
इस तरह की गन्दी गन्दी गालियों से अपना पन बढ़ता है। हमारी नजदीकियां बढ़तीं हैं और फिर एक साथ मिलकर चुदवाने का मज़ा दूना तिगुना हो जाता है।
अम्मी ने फिर कहा :- बेटी सफीका तेरी माँ की चूत ?
मैंने कहा :- अम्मी, तेरी बहू की नन्द की बुर ?
भाभी बोली :- नन्द रानी, तेरी माँ की बहू का भोसड़ा ?
मस्ती का आलम यह था की हम तीनो एक दूसरे की चूत में लन्ड पेल पेल कर चोदने भी लगीं और चुदवाने भी लगीं। उस दिन मुझे मालूम हुआ की जवानी का मज़ा कैसे लूटा जाता है ?
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