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मैं अच्छे अच्छे लड़कों के लन्ड निचोड़ती हूँ - Main ladkon ke lund nichod deti hun chut se
मेरा नाम है महिमा चावला। मैं २६ साल की एक मद मस्त जवान लड़की हूँ. मैं खूबसूरत हूँ, सेक्सी हूँ और हॉट हूँ। मैं पढ़ी लिखी हूँ और एक मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद हूँ। मेरा काम है एम बी ए स्टूडेंट्स को पढ़ाना। इस कॉलेज के लड़के और लड़कियां साथ साथ पढ़तीं हैं। लगभग बराबर बराबर। यह कोर्स २ साल का होता है और हर साल करीब करीब १०० स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं।
मैं जितनी देखने सुनने में खूबसूरत हूँ उतनी ही हरामजादी और बदचलन भी हूँ। बहुत बड़ी मादर चोद और बुर चोदी हूँ मैं। मुझे बहन चोद लण्ड पकड़ने की आदत १५ साल की उम्र में ही पड़ गयी थी। तब से मैं बराबर लण्ड पकड़ती आ रही हूँ। अब जब मैं इस कॉलेज में गयी हूँ तो मुझे लगता है की जैसे मैं लण्ड के खजाने में आ गयी हूँ। यहाँ तो चारों तरफ लण्ड ही लण्ड हैं। जरुरत है इन्हे अपने पास बुलाकर इकठ्ठा करने की है। इसलिए मैं स्मार्ट और हैंडसम लड़कों से खूब प्यार से बात करती हूँ, मुस्कराकर बात करती हूँ, उन्हें प्यार भरी नज़रों से समझाती हूँ और अच्छी सलाह देती हूँ। यही कारण है की लड़के मेरी तरफ खिंचे चले आते हैं। मैं धीरे धीरे उन्हें अपने घर भी बुलाने लगती हूँऔर वहां भी उतनी ही अदा और प्यार से बातें करती हूँ। धीरे धीरे मैं उनसे मजाक करती हूँ और प्यार से गालियां भी देती हूँ। जिससे उसे भी जोश आ जाये। बात करते करते मैं अश्लील शब्दों का भी प्रयोग करती हूँ जैसे लण्ड, चूत, बुर, भोसड़ा, गांड, झांट आदि। इससे लड़कों को मेरी लण्ड पकड़ने की मंशा मालूम हो जाती है। जैसे गलती करने पर लड़कों के कान खींचे जाते हैं वैसे ही मैं कान की जगह लड़कों के लण्ड खींचती हूँ। जैसे उनके कान नोचे जाते हैं वैसे ही मैं लण्ड नोचती हूँ. जैसे लड़कों के कान उखाड़े जातें है वैसे ही मैं लड़कों के लण्ड उखाड़ती हूँ क्योंकि मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आता है। सच में मुझे लण्ड से खास मोहब्बत है।
वह संडे का दिन था। गर्मी का मौसम था। करीब १० बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया। मैं उस समय बाथ रूम से नहा कर निकली थी। मैंने अपना पेटीकोट चूँचियों तक बांध लिया था इसलिए नीचे मेरी टाँगें कुछ हद तक खुली थीं। इसी बीच मैंने दरवाजा खोल दिया तो देखा की सामने मेरे कॉलेज का एक स्टूडेंट समीर खड़ा है। मैंने उसे अंदर बैठाया। वह मुझे बाद हैंडसम और स्मार्ट लग रहा था. मैं अभी अभी अपनी झांटें बना कर आयी थी तो मेरा दिल उस पर आ गया। उसके हाथ में नोट बुक थी। वह बोला मेम मैंने अपनी थीसिस के कुछ पॉइंट्स बनाये है वो आपको दिखाने आया हूँ। मैंने उसे अपने बगल में बैठा लिया और उसके नोट्स देखने लगी। मुझे एक गलती मिली तो मैंने एक शरारत की।
- मैंने उसके कान पकड़े और कहा आज मैं तेरा कान नहीं उखाड़ूँगी बल्कि तेरी झांटें उखाडूँगी। ऐसा कह कर मैंने उसकी पेंट के ऊपर से झाटों की जगह उंगलियों से कुरेद दिया। वह चुपचाप मुस्करा पड़ा। मैंने नोट्स पढ़ना शुरू किया तो मुझे उसकी दूसरी गलती पकड़ में आ गयी। मैंने फिर उसके कान पकड़े और कहा अब मैं तेरा कान नहीं तेरा लण्ड नोच लूंगी, भोसड़ी के समीर ? ऐसा कह कर मैंने उसका लण्ड पैंट के ऊपर से दबा दिया।
- वह बोला नहीं प्लीज ,,,,,,,ऐसा मत कीजिये, मेम ?
- मैंने कहा तेरी मेम की माँ की चूत। मैं तो आज तेरा लण्ड नोचूँगी ताकि तू आगे से कोई गलती न करे।
- नहीं मेम मैं अब कोई गलती नहीं करूंगा।
- पर अब तो इस गलती की सज़ा तुम्हे भुगतनी ही पड़ेगी। चल दिखा मुझे अपना लण्ड ?
मैं भी पूरी नंगी थी और वह भी पूरा नंगा।मेरी भी झांटें साफ़ थीं और उसकी भी। मैं गोरी गोरी चूत एकदम चिकनी थी और उसका गोरा गोरा लण्ड एकदम चिकना था। मैं प्यार से उसका मुठ्ठ मारने लगी। बीच बीच में लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। वह इतना जोश में आया की उसके लण्ड ने उगल दिया सारा मेरे मुंह में भी और मेरी चूँचियाँ पर भी। मैं झड़ता हुआ लण्ड मस्ती से चाटने लगी। उसका पूरा लण्ड निचोड़ लिया। लण्ड का एक एक बूँद निचोड़ कर पी गयी मैं। मुझे झड़ता हुआ लण्ड पीना बड़ा अच्छा लगता है। वह बोला मेम सॉरी जल्दी हो गया ? मैंने कहा नहीं यार ऐसा पहली बार हो ही जाता है। अगली बार जब तुम आना तो मेरी चूत चोद कर जाना । मैं तेरा इंतज़ार करूंगी। वह चला तो गया पर मैं चुदासी ही रह गयी। मेरी चूत की आग ज्यों की त्यों बरकरार थी। इतने में अचानक फिर किसी ने दरवाजा खटखटाया।
मैंने तुरंत खोला तो सामने विशाल खड़ा था। मैंने उसे अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया। विशाल भी मेरा स्टूडेंट है पर वह फाइनल ईयर का है. मैं उसके सामने बैठ गयी उसकी निगाह मेरी चूँचियों पर टिक गयी।
वह बोला :- मेम मैं मुछ मटेरियल लाया हूँ वो आपको दिखाना चाहता हूँ।
मैंने कहा :- वो सब मैं बाद में देखूँगी। अभी तुम्हे दिखाना हो तो अपना लण्ड दिखाओ मुझे ?
वह बोला :- अरे मेम यह कैसे हो सकता है ? मैं आपका स्टूडेंट हूँ।
मैंने कहा :- माँ के लौड़े, तू मेरा स्टूडेंट मेरे घर पर नहीं है। कॉलेज में तू मेरा स्टूडेंट है लगी। तेरी टीचर। यहाँ घर मैं बुर चोदी महिमा हूँ और तू भोसड़ी का विशाल ? और कुछ नहीं ? चल जल्दी से दिखा मुझे अपना लण्ड ? मैं उसकी पैंट उतारने लगी। उसकी शर्ट उतार दी। उसकी घने घने बालों से भरी नंगी छाती मुझे बड़ी सेक्सी लगी। फिर मैंने उसकी चड्ढी भी खोल दी। उसका लण्ड मेरे सामने टन टना उठा और मैं उसे पकड़ कर हिलाने लगी। इसका लण्ड समीर के लण्ड से थोड़ा बीस ही था। मैंने लण्ड की कई बार चुम्मी ली। उसे पुचकारा और लण्ड का टोपा चाटने लगी। उसके पेल्हड़ चाटने लगी। इसी बीच मेरा भी पेटीकोट खुल कर नीचे गिर गया और मैं मादर चोद बिलकुल नंगी हो गयी। वह मुझे नंगी देख कर दंग रह गया। मैं लण्ड में उलझ गयी और वह मेरी चूत सहलाने लगा। थोड़ी देर में उसने पेल दिया लण्ड मेरी चूत में और मैं मस्ती से चुदवाने लगी। जो काम समीर न कर सका वह काम विशाल करने लगा।
मैंने यूं ही पूंछा - विशाल तुम किस किस लड़की की बुर लेते हो ?
वह बोला - पिंकी और सुधा की बुर लेता हूँ। पिछले कुछ दिनो से शिखा मेम भी मुझे अपनी बुर देने लगीं हैं।
मैंने कहा - वाओ, मुझे नहीं मालूम था की शिखा बुर चोदी इतनी छुपी रुस्तम है ?
वह बोला - अरे मेम कॉलेज के २/३ लड़के और भी उसकी बुर लेते हैं। उसको लण्ड पीने का बड़ा शौक है।
बस मैंने ठान लिया की मुझे क्या करना है ? तब तक मैं पीछे से चुदवाने लगी। वह बोला मेम आप जितनी अच्छी तरह से अपनी बुर दे रही हैं उतनी अच्छी तरह कोई और बुर नहीं देती। न ही प्यार से गालियां देतीं है और न प्यार से बुर देती हैं। बस लण्ड का रस निकाल कर पी लेतीं हैं। मुझे आपकी बुर लेने में बड़ा मज़ा आ रहा है महिमा मेम ?
यह सुनकर मैं और मस्ती से चुदवाने लगी। पीछे से चुदवाने के बाद मैं उसके लण्ड पर बैठ गयी और पीठ उसके मुंह की तरफ कर ली। सामने मेरे एक बड़ा शीशा लगा था उसी में मैं चुदाई देख रही थी। लण्ड मेरी चूत में घुसा है यह मुझे साफ़ साफ़ दिखाई पड़ रहा था , मैं अपने दोनों हाथ ज़मीन पर रख कर और अपनी गांड गांड उचका उचका कर लण्ड चोदने लगी। ऐसा आपने अक्सर पोर्न फिल्म में देखा होगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। लण्ड भी विशाल था इसलिए मुझे मज़ा आ रहा था। थोड़ी देर में मैं घूम गयी और उसके सामने अपना मुंह कर लिया। अब मैं अपने चूतड़ उठा उठा के लण्ड पर पटकने लगी। वह बोला यार महिमा तुम तो चुदवाने में बड़ी एक्सपर्ट हो। मैंने कहा मैं जवानी का पूरा पूरा मज़ा लेती हूँ। दो मिनट के बाद वह बोला यार अब मैं निकलने वाला हूँ। तब तक मैं भी खालास हो चुकी थी। मैंने लण्ड का सड़का मारने लगी। मैंने स्पीड बढ़ा दी तो वह सिसियाने लगा। मैं गाली बकती हूँ मुठ्ठ मार रही थी और फिर वह झड़ गया। मैंने झड़ते हुए लण्ड का एक एक बूँद निचोड़ कर पिया और फिर उसका सुपाड़ा बड़े प्यार से चाटने लगी।
उसके बाद मैं हर दूसरे दिन लड़कों को अपने घर बुलाने लगी और उनके लण्ड निचोड़ने लगी। मुझे खूब मज़ा भी आने लगा और इस तरह मेरी लण्ड निचोड़ने की आदत भी पड़ गयी। अब जिस दिन मुझे लण्ड निचोड़ने को नहीं मिलता उस दिन मेरा मन किसी काम में नहीं लगता। उधर कॉलेज में मैंने शिखा से अपनी दोस्ती बना ली। मैं शिखा के साथ लड़कों के लण्ड पकड़ने लगी। उसके साथ आमने सामने चुदवाने लगी। शिखा से मैंने बहुत कुछ सीखा और उसने भी मुझसे बहुत कुछ सीखा।
एक दिन वह बोली यार महिमा किसी दिन किसी अंकल का लण्ड निचोड़ो। किसी अंकल का लण्ड पकड़ो और उसे अपनी चूत में पेलो। मैंने एक दिन इब्राहिम अंकल का लौड़ा पकड़ा था। बाप रे बाप क्या लौड़ा था भोसड़ी वाले का ? जितना बड़ा और मोटा लौड़ा था उतनी ही देर तक चोदने वाला भी था। उसने मुझे हर बार पहले खलास कर दिया और खुद नहीं हुआ। वह खलास तब हुआ जब मैंने उसके लण्ड का सड़का मारा। उसकी बात मेरे दिमाग में बैठ गयी।
उसने मुझे यह भी बताया की मैं यहाँ के कई लड़कों से चुदवाती हूँ। थामस और ज़ाकिर दो टीचरों से भी चुदवाती हूँ। मुझे ज़ाकिर का कटा लण्ड पसंद है। लण्ड मोटा है और उसका टोपा बड़ा भी है और खूबसूरत भी। यहाँ की मुस्लिम लड़कियां ज़ाकिर से खूब चुदवाती हैं। कुछ लड़कियां तो ज़ाकिर को अपने घर ले जाती है और अपनी माँ चुदवाती हैं। रफा नाम की एक लड़की ने मुझे बताया की मेम मैं तो ज़ाकिर सर लण्ड अपनी माँ की चूत में पेलती हूँ। अपनी बहन की बुर चुदवाती हूँ। अपनी खाला का भोसड़ा चुदवाती हूँ और उसकी बेटी की चूत में भी लण्ड पेलती हूँ। शिखा बोली यार मुस्लिम में ये सब बड़ी आसानी है। वहां चोदा चोदी में किसी को कोई शर्म नहीं आती। लड़कियां बुर चोदी जोश में आकर अपने अब्बू का भी लण्ड पकड़ लेतीं हैं।
मैंने एक दिन रफा को अपने घर बुलाया और उससे बात की। मैंने पहले पूंछा क्या तुम दारू पीती हो। यह बोली हां खूब पीती हूँ। बस हम दोनों दारू पीने लगीं।
- मैंने कहा सुना है की तुम लडकों के लण्ड पकड़ती हूँ।
- अरे मेम मैं एक लड़की हूँ, सेक्सी हूँ हॉट हूँ और बिंदास हूँ, तो लण्ड नहीं पकड़ूँगी तो क्या करूंगी ?
- किस किस के लण्ड पकड़ती हो तुम ?
- मैं तो किसी का भी लण्ड पकड़ लेती हूँ मेम ?
- मेम की माँ का भोसड़ा यार ? सुनो रफा मैं घर में मेम नहीं हूँ मैं मादर चोद महिमा हूँ बस ? तुम मुझे यह बताओ की कॉलेज में सबसे बड़ा और सबसे मोटा लण्ड किसका है ?
- हाय दईया मेरी बुर चोदी महिमा तुझे भी मेरी तरह लण्ड पकड़ने की आदत हो गयी है क्या ? अगर हो गयी है तो बताओ मैं एक से एक मोटे लण्ड तेरी चूत में पेल सकती हूँ।
- सुना है की तुम लड़कों से अपनी माँ भी चुदवाती हो ?
- हां चुदवाती हूँ। माँ क्या मैं अपनी बहन भी चुदवाती हूँ। अपनी खाला की, अपनी फूफी की, और इन सबकी बेटियों की बुर में लड़कों के लण्ड पेलती हूँ। अब तो मुझे सबकी चूत में लण्ड पेलने का शौक हो गया है।
- क्या यह सच है की अंकल लोगों के लण्ड बड़े दमदार होतें हैं ?
- हां हां, बिलकुल सच है। मेरे एक साहिर अंकल हैं उसका लण्ड मेरे अब्बू के लण्ड से भी मोटा है और बड़ा भी ?
- तो क्या तुम अपने अब्बू का लण्ड ,,,,,,,,,,,,,,,,,?
- हां मैं अपने अब्बू का लण्ड पकड़ती हूँ। इसमें कोई गुनाह नहीं है। हमारे यहाँ सब चलता है। हमारे यहाँ बहू बेटियां किसी का भी लण्ड पकड़ सकती हैं। और ये साहिर अंकल है न ये मेरी माँ की बुर लेता है। मेरा अब्बू इसकी बीवी की बुर लेता है। हमारे समाज में चोदा चोदी की पूरी आज़ादी है।
- तो फिर मुझे भी किसी मोटे लण्ड का दीदार कराओ न मेरी भोसड़ी की, रफा ?
- हां हां अभी यहीं बैठे बैठे करा देती हूँ।
बस थोड़ी देर में एक अधेड़ उम्र का आदमी मेरे कमरे में आ गया। वह बोली महिमा ये है मिस्टर कांगो। मैं एक दिन थामस सर से चुदवा रही थी तह यह वहां था। मैंने इसका भी लण्ड पकड़ लिया था। फिर दोनों ने मिलकर मुझे चोदा। बाकी इसका लण्ड कैसा है अब तुम मुझे बताओगी ? मैंने उसे शराब का गिलास पकड़ा दिया तो रफा ने उसका लण्ड पैंट से बाहर निकाल कर मुझे पकड़ा दिया। लण्ड देख कर तो मेरे होश उड़ गये जब की लण्ड पूरा खड़ा नहीं था। उसी झांटें बिलकुल साफ़ थीं। जितना गोरा वह था उससे ज्यादा गोरा उसका लण्ड था। लण्ड का टोपा तो बिलकुल लाल लाल टमाटर जैसा था। मेरी चूत की आग और भड़क उठी। मेरी चूँचियाँ अंदर ही अंदर तन गयीं। मैं लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। तब तक रफा में मेरे कपड़े उतार दिया। मैं मादर चोद बिलकुल नंगी हो गयी। रफा ने उसे भी नंगा कर दिया। पहली बार मुझे कोई नंगा मरद इतना अच्छा लगा की मैं उसे अपना सब कुछ देने के लिए तैयार हो गयी। मुझे गोरा और मोटा लण्ड बड़ा उत्तेजित करता है। मैं उससे मोहब्बत करने लगती हूँ।
इतने में रफा बोली यार महिमा मैं अभी आती हूँ। वह बाहर चली गयी। वह १० मिनट में आ गयी। तब मैं अंकल का लण्ड चाट रही थी और वह मेरी बुर चाट रहा था। हम दोनों 69 की पोजीशन में थे। मैंने जब उसे देखा तो दंग रह गयी। वह नंगी नंगी किसी अंकल का लण्ड पकड़े खड़ी थी। लण्ड भी खड़ा था। वह मुझे लण्ड दिखाती हुई बोली हाय महिमा इससे मिलो ये है शेख़ हामिद का कटा लण्ड। इसे कहते हैं अरबी लण्ड। मैंने फिर गौर से लण्ड देखा तो गन गना उठी। मैंने हाथ बढ़ा कर वह भी लण्ड पकड़ लिया। वह मेरी चूँचियाँ मसलने लगा और रफा मेरी गांड पर हाथ फिराने लगी।
मैं बड़े गौर से अरबी लण्ड पकड़ कर देखने लगी। इतना गोरा मोटा और सख्त विदेशी लण्ड पकड़ कर मेरी चूत की आग धधक उठी। मैं लण्ड से खेलने लगी। दो दो लण्ड एक साथ मुझे चोदने के लिए तैयार थे. मैं अपने आप को बड़ी नसीब वाली समझने लगी। मैंने कांगो का लण्ड अपनी चूत में पेला और हामिद का लण्ड मुंह में लिया। रफ़ा हामिद के पेल्हड़ चाटने लगी और मैं उसके लण्ड का टोपा। मैं बोली रफा तू मादर चोद बड़ी काम की चीज है यार ? इतने बढ़िया बढ़िया लण्ड तू कैसे ढूंढ लेती है ?
वह बोली अरे यार सच बात तो यह है की हर खूबसूरत लड़की को लोग अपने आप लण्ड पकड़ाते हैं। मुझे
मुझे कांगो चुदवाने में बड़ा मज़ा आया। मैंने फिर हामिद का लण्ड पेला अपनी चूत में और कांगो लण्ड मुंह में ?
हामिद का अरबी लण्ड मेरी चूत में चीथड़े उड़ाने लगा। चूत में चारों तरफ से चिपक कर आने जाने लगा। मैं भी मस्ती में डूबने लगी। रफा बड़े प्यार से इन दोनों से मेरी बुर चुदवाने लगी। कभी कांगो का लण्ड पेल देती और कभी अरबी का लण्ड ? आखिर में हम दोनों ने मिलकर कांगो का झडता हुआ लण्ड चाटा। उसका एक एक बूँद निचोड़ा और पी गयी। फिर हामिद का लण्ड भी खलास होने लगा उसे भी हम दोनों ने बड़े प्यार से चाटा। उसके भी लण्ड का एक एक बूँद निचोड़ लिया। मुझे अरबी लण्ड का स्वाद बड़ा अच्छा लगा। उस दिन से मैं विदशी लण्ड भी निचोड़ निचोड़ कर पीने लगी।
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