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बीवी हूँ एक की चुदवाती हूँ सबसे - Biwi hun ek ki chudwati hun sabse
बीवी हूँ एक की चुदवाती हूँ सबसे - Biwi hun ek ki chudwati hun sabse , घर के सभी लोग करते हाउ चुदाई , कोई मेहमान आए तो मुझे चुदवाया जाता है , मैं लोग दिखावा इंकार करती हूँ वास्तव में मैं तो खुद चुदना चाहती हूँ , अन्तर्वासना कामवासना की स्टोरी , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी.
किसी को बुरा लगता है तो लगे, किसी की गांड जलती है तो जले, किसी की माँ चुदती है तो चुदे लेकिन यह सच है की मैं बीवी एक की हूँ और चुदवाती सबसे हूँ। सबके लण्ड अपनी चूत में पेलती हूँ, सबके लण्ड पर बैठती हूँ और सबके लण्ड चोदती हूँ. मुझे किसी भोसड़ी वाली का या भोसड़ा वाले का कोई डर नहीं है। जिसको अच्छा लगे वो देखे जिसको न अच्छा लगे वो गांड मराये अपनी। मुझको किसी से क्या लेना देना ? मेरा नाम सुनीता है। मैं गैर मर्दों से बड़ी जल्दी संपर्क बना लेती हूँ। जानते हो कैसे ? क्योंकि मैं बहुत खूबसूरत हूँ मेरी चूँचियां बड़ी बड़ी हैं, मेरी गांड़ बड़ी सेक्सी है और मेरी चूत एकदम चौकस है। रंग गोरा है, गाल गुलाबी हैं और मैं बिंदास सबसे हंस कर बात करती हूँ। लण्ड पकड़ने में मेरा कोई मुकाबला नहीं कर सकता। मैं किसी भी मरद का लण्ड एक मिनट में पकड़ लेती हूँ। मैंने ट्रेन में कई लोगों के लण्ड पकड़े हैं., बस में चलते चलते कई लड़कों के लण्ड पकड़े हैं और बात करते करते कई लड़कों के लण्ड पर हाथ मारा है। जिसके लण्ड पर हाथ मारती हूँ वह भोसड़ी का मेरे आगे पीछे अपना लण्ड पकड़ाने के लिए घूमा करता है। शादी के बाद मैंने सबसे पहले अपने बड़े देवर का लण्ड पकड़ा। पहले दिन मुंह में लण्ड लेने के बाद वह जल्दी ही झड़ गया और मुझे चोद नहीं पाया। वह थोड़ा झेंप गया। तब मैंने कहा नहीं देवर जी पहली बार ऐसा होता है पर अगली बार तुम मेरी बुर चोद लोगो। दो दिन बाद मैंने फिर उसका पकड़ा और तब उसने मुझे खूब जम कर चोदा। उसके बाद मैंने एक दिन मैंने अपने छोटे देवर से चुदवा लिया और फिर मैं दोनों से अक्सर चुदवाने लगी। एक दिन मैंने अपने नंदोई को फंसा लिया। अकेले में उसका लण्ड पकड़ा तो वह बोला भाभी जी आप तो बहुत सुन्दर हैं। मैंने कहा तो फिर चोदो न मुझे। मैंने उसका लौड़ा उसे नंगा करके पकड़ लिया। मैंने लण्ड हिला कर कहा अच्छा तो यही लण्ड मेरी नंद की बुर में घुसता है ? आज ये मादर चोद नन्द की भाभी की बुर चोदेगा ? मैंने फिर रात भर उससे तीन बार चुदवाया।
एक दिन मैं बैंक गयी और मैनेजर.मिस्टर रमन से मिली। मैनेजर एक मस्त नौजवान लगभग ३० साल का आदमी था। मेरा दिल उस पर आ गया। मेरी नियत उस पर ख़राब हो गयी। अब ऑफिस में मैं उसके लण्ड पर हाथ नहीं मार सकती थी तो मैंने उससे कहा सर कल मेरी बर्थ डे है। मैं आपको आमंत्रित कर रही हूँ। कल शाम को आप ८ बजे जरूर आ जाना।
दूसरे दिन वह आ गया। तब तक मैंने सब तैयारी कर ली थी। मेज पर केक भी रख लिया बगल में डिंक्स की भी तैयारी थी। पर घर उसके अलावा कोई और नहीं था। उसने पूंछा मैडम मेरे अलावा कोई और नहीं है ? मैंने कहा बात यह है की मैं अपना बर्थ डे वैसे मानती नहीं हूँ। कल आपसे मुलाकात हुई तो मैंने कह दिया और मैं खुश हूँ की आप आ गए। मेरे लिए आप ही काफी हैं। अब मुझे किसी और भोसड़ी वाले की जरुरत ही नहीं है। मैंने जानबूझ कर गाली दी। केक कटा और फिर हम दोनों ने डिंक्स लेना शुरू कर दिया। मैंने नीचे एक घाघरा पहना था और ऊपर कुछ भी नहीं। बस एक चुन्नी माला की तरह डाली थी जिसमे मेरी चूँचियाँ थोड़ी बहुत छुपी थीं। मैं बीच बीच में चूँचियाँ इधर उधर करके उसको झलक दिखा भी देती थी। मैं थोड़ा अश्लील बातें भी करने लगी और इन्ही बातों के दरमियान उसने कहा मैडम,,,,,,, ? तो मैंने छूटते ही कहा मैडम की माँ का भोसड़ा ? मैडम की बहन की बुर । मुझे मैडम मत कहो मैं सुनीता हूँ। मुझे बुर चोदी सुनीता कहो।
मेरी गालियां सुनकर उसके बदन में हलचल होने लगी। थोड़ा और नशा चढ़ा तो मेरी चूँचियाँ लगभग पूरी खुलने लगीं। उसकी नज़र चूँचियों पर बार बार टिक जाती। मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और आगे बढाकर उसका लण्ड ऊपर से दबा कर कहा यार अब कब तक इस बिचारे 'लण्ड' को छुपाकर रखोगे रमन बाबू। 'लण्ड' जब एक बार खड़ा हो जाए तो उसे दबाना नहीं चाहिए ? मेरे मुंह से 'लण्ड' सुनकर उसका लण्ड और हरकत में आ गया। तब तक मैंने अपनी चुन्नी उतार कर फेंक दी। मेरी नंगी चूँचियाँ उसके सामने छलक पड़ीं। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूँचियाँ पर रख दिया और कहा अब ये बुर चोदी चूँचियाँ तेरी ही हैं रमन बाबू ? इनका मज़ा जैसे चाहो वैसे ले लो। उसने चूँचियाँ दबा दीं और उनकी चुम्मी भी ले ली। मुझे उसकी मंसा का आभाष हो गया और मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई।
मैं मुस्कराते हुए उसक पैंट खोलने लगी और उसने कोई आपत्ति नहीं की। वह। कमीज उतार दी और बनियाइन भी। उसकी चौड़ी छाती मुझे सेक्सी लगीं क्योंकि उस पर घने बाल थे। मैंने कर दिया और सोफा पर बैठी बैठी उसकी चड्ढी नीचे खसका दी। तब उसका लण्ड टन्न से मेरे गाल पर लगा। लण्ड देख कर मैं गद गद हो गयी। लण्ड का लंबा भी था और मोटा भी। उसका सूपड़ा अधिक बाहर था। मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया उसकी कई चुम्मियाँ लीं और बोली रमन यार तेरा लण्ड बड़ा सॉलिड है, जबरदस्त है और मर्दाना है। मुझे मर्दाने लण्ड ही पसंद आते हैं। मेरा मुंह खुला और लण्ड का सुपाड़ा अंदर। मैं पेल्हड़ थामे जबान सुपाड़े के चारों तरफ अंदर ही अंदर घुमाने लगी। मजे की बात यह थी की लण्ड की झांटें बिलकुल साफ़ थी। लण्ड सच में बड़ा प्यारा और खूबसूरत लग रहा था।
फिर मैंने भी अपना घाघरा खोल डाला और अपनी मस्तानी छोटी छोटी झांटों वाली चूत उसे दिखा दी। अब वह मेरे सामने पूरा नंगा हो गया और मैं भी मादर चोद उसके सामने बिलकुल नंगी हो गयी। मैं उसका लण्ड पकड़े पकड़े बेड रूम में चली गयी और उसे चित लिटा दिया। मैं उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ कर उसका लौड़ा हिलाने लगी, उसे चूमने चाटने लगी. मैं लण्ड से प्यार करने लगी। मैं लण्ड से खेलने लगी, मैं लण्ड अपने माँथे पर, अपनी आँखों पर, अपने गालों पर, अपने होठों पर, अपने गर्दन में रगड़ने लगी। मैं लण्ड को प्यार से पुचकारने लगी। उसके बाद मैं लण्ड बड़े मजे से अपनी चूँचियों पर फिराने लगी। फिर मैं उस पर चढ़ बैठी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
हम दोनों 69 बने हुए थे. मैं उसका लण्ड चाटने लगी और वह मेरी चूत चाटने लगा। थोड़ी देर में वह जोश में आ गया और लण्ड मेरी बुर में घुसेड़ दिया। मैं चुदाने लगी और वह चोदने लगा। वह स्पीड बढ़ाता गया और मैं उसका साथ देती गयी। मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी और उसे भी एक नई चूत चोदने का मौक़ा मिल रहा था। मेरे मुंह से निकला वाओ, क्या लौड़ा है तेरा यार रमन ? बड़ा मज़ा दे रहा है। मुझे खूब अच्छी तरह से चोदो। फाड़ डालो मेरी बुर चोदी बुर ? मेरी गांड मार लो, मेरी चूँचियाँ चोद लो, मेरे मुंह में घुसेड़ दो लण्ड, मेरी माँ चोद लो यार, मेरी बहन की बुर ले लो. तेरे लण्ड में बड़ी ताकत है। हाय दईया बड़ा अच्छा लग रहा है। बहुत दिनों के बाद ऐसा लौड़ा मिला है। चोदो मुझे दिन रात चोदो। रोज़ चोदो सुबह शाम चोदो, शराब पी पी कर चोदो। अपने दोस्तों के भी लण्ड पेल दो मेरी चूत में यार।
रमन ने फिर मुझे पीछे से चोदना शुरू किया। मैं डॉगी स्टाइल की चुदाई खूब एन्जॉय करती हूँ। मैं धकाधक छुड़वाने लगी और तब मुझे लगा की मेरी चूत ढीली हो रही है। लौड़ा जब मोटा हो और सख्त हो तो चूत का बाजा जल्दी बजा देता है। मैं झाड़ गयी और तब वह बोला भाभी अब मैं भी निकलने वाला हूँ। मैंने घूम गयी और लण्ड मुठ्ठी में लेकर सड़का मारने लगी। मैंने लण्ड के आगे मुंह खोल दिया और तब लण्ड ने उगल दिया सारा वीर्य जिसे मैं पी गयी और मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटने लगी।
एक बार मैं ट्रेन में सफर कर रही थी। मैं फर्स्ट A / C में थी जिसमे 4 बर्थ होतीं हैं। लेकिन 1 बर्थ खाली थीं जिसमे कोई भी यात्री नहीं था। शाम के ८ बज चुके थे। मेरे सामने 2 बर्थ पर दो लड़के थे उनकी उम्र लगभग २६ / २८ साल की होगी। वे थे बड़े स्मार्ट और हैंडसम। मेरी नियत उन पर ख़राब हो गयी। मैंने बात चीत शुरू की तो मालूम शिवा और सुरेश थे , दोनों आपस में दोस्त थे। रात को टी टी आया और टिकट चेक करके चला गया। फिर हमने कूपे को अंदर से बंद कर लिया। एक ने अपने बैग से शराब की बोतल निकाली और दो पैग बनाया। मैं बड़े गौर से देख रही थी तो शिवा बोला मैडम आप साथ देंगीं ? मैंने कहा मैं सुनीता हूँ। मुझे सुनीता कहो मैडम नहीं। मैं आपका साथ दे सकती हूँ। उसने एक पैग मुझे पकड़ा दिया मैं उनके साथ शराब पीने लगी। मैंने भी ढीले कपडे जी हां सिर्फ एक गाउन। मेरी चूँचियाँ झलक रहीं थीं। उन दोनों की नज़रें वहीँ पर टिकीं थीं। वे भी कच्छा बनियाइन में ही थे।
फिर मैंने अपना गाउन उतार फेंका मैं मादर चोद एकदम नंगी हो गयी। मेरी चिकनी चूत देख कर वे दोनों पागल हो गए। शिवा मेरी चूत सहलाने लगा और सुरेश मेरी गांड़। मुझे भी अच्छा लगने लगा। अब मैंने लण्ड का सुपाड़ा मुंह में लेना शुरू किया। कभी शिवा का सुपाड़ा और कभी सुरेश का सुपाड़ा। दोनों लण्ड बहन चोद मुझे मज़ा दे रहे थे। मैं दोनों के पेल्हड़ भी चाटने चूसने लगी। मैं मन ही मन बड़ी खुश थी और अपनी खूबसूरती पर गर्व कर रही थी। आज अगर मैं खूबसूरत न होती तो मुझे ऐसे लण्ड नसीब नहीं होते ? मैं फिर बर्थ पर लेट गयी और तब शिवा मेरी बुर चाटने लगा। मैं सुरेश का लण्ड चूसने में जुटी थी। थोड़ी देर बाद सुरेश ने मेरी बुर चाटी और मैंने शिवा का लण्ड चाटा। मैं बारी बारी से दोनों लण्ड का मज़ा ले भी रही थी और मज़ा दे भी रही थी। मैं भोसड़ी की बड़ी हरामजादी हूँ। मैंने इस तरह अपने पति का लण्ड कभी नहीं चाटा।
मुझे दोनों मरद बेहद प्यारे लग रहे थे। इतने में सुरेश ने अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और बोला भाभी जी
अब मैं तेरी बुर चोदूंगा ? मैंने कहा अरे चोद ले भोसड़ी के मेरी बुर चोदी बुर ? ये बुर चुदने के लिए ही पैदा हुई है। पेल दे इसमें अपना ये हक्कानी लण्ड ? उसने सच में घुसेड़ दिया मेरी चूत में लण्ड और भकाभक चोदने लगा। मैं शिवा का लण्ड मुंह में लिए हुए चुदवाने लगी। कभी शिवा का लण्ड हाथ में लेकर सहलाती, कभी उसे मुठ्ठी में लेकर ऊपर नीचे करती, कभी उसे मुंह में डाल लेती और कभी उसे प्यार से हिलाती झुलाती। मैं पल पल मस्त होती जा रही थी। चलती हुई ट्रेन में चुदवाने का मेरा यह पहला मौक़ा था। थोड़ी देर बाद सुरेश ने बुर से लण्ड निकाला तो शिवा ने पेल दिया अपना लण्ड। फिर मैं शिवा से चुदवाने लगी और सुरेश के लण्ड से खेलने लगी। मैंने कहा है मेरे राजा पूरा लौड़ा पेल चोदो। फाड़ डालो मेरी बुर। मेरी बुरा का बना दो आज ही भोसड़ा ? लण्ड पेल पेल के मेरी चूत का बना दो चबूतरा बहन चोद। चाहो तो मेरी गांड़ भी चोद लो। मैं उसके लिए भी तैयार हूँ। पर आज रात भर चोदो। ट्रेन बुर चोदी सवेरे ११ बजे पहुंचेगी तब तक तुम लोग मुझे चोदते रहो। अरे मादर चोदों मैं बड़ी नसीब वाली हूँ जो भगवान् ने मुझे चोदने के लिए तुम्हे यहाँ भेज दिया। तेरे लण्ड बड़े भाग्यशाली है जो मेरी जैसी मस्ती चूत चोदने को मिली है उसे। देखो न लण्ड कितने खुश है भोसड़ी के। घोड़े के लण्ड की तरह हिनहिना रहें हैं। सुरेश चोदने की रफ़्तार बढाए चला जा रहा था। उसके बाद मैंने दोनों लण्ड पर बैठ बैठ कर चुदवाया। पीछे से चुदवाया और दोनों लण्ड अपनी चूँचियों के बीच भी डाला। वाह क्या माहौल था ! क्या चुदाई थी उस रात की ! मुझे आज भी अच्छी तरह याद है ?
एक दिन मैं अपनी दोस्त अनीता के घर चली गयी। वह इसी शहर में अपने पति के साथ अकेली रहती है। मैं जब पहुंची तो वह घर में अकेली ही थी। मुझे देख कर वह खुश हो गयी और मेरा वेलकम किया। फिर हम दोनों शराब पर बैठ गयी और शराब पीती हुई बातें करने लगी।
उस दिन मैंने दोनों से रात भर खूब मस्ती से चुदवाया।
किसी को बुरा लगता है तो लगे, किसी की गांड जलती है तो जले, किसी की माँ चुदती है तो चुदे लेकिन यह सच है की मैं बीवी एक की हूँ और चुदवाती सबसे हूँ। सबके लण्ड अपनी चूत में पेलती हूँ, सबके लण्ड पर बैठती हूँ और सबके लण्ड चोदती हूँ. मुझे किसी भोसड़ी वाली का या भोसड़ा वाले का कोई डर नहीं है। जिसको अच्छा लगे वो देखे जिसको न अच्छा लगे वो गांड मराये अपनी। मुझको किसी से क्या लेना देना ? मेरा नाम सुनीता है। मैं गैर मर्दों से बड़ी जल्दी संपर्क बना लेती हूँ। जानते हो कैसे ? क्योंकि मैं बहुत खूबसूरत हूँ मेरी चूँचियां बड़ी बड़ी हैं, मेरी गांड़ बड़ी सेक्सी है और मेरी चूत एकदम चौकस है। रंग गोरा है, गाल गुलाबी हैं और मैं बिंदास सबसे हंस कर बात करती हूँ। लण्ड पकड़ने में मेरा कोई मुकाबला नहीं कर सकता। मैं किसी भी मरद का लण्ड एक मिनट में पकड़ लेती हूँ। मैंने ट्रेन में कई लोगों के लण्ड पकड़े हैं., बस में चलते चलते कई लड़कों के लण्ड पकड़े हैं और बात करते करते कई लड़कों के लण्ड पर हाथ मारा है। जिसके लण्ड पर हाथ मारती हूँ वह भोसड़ी का मेरे आगे पीछे अपना लण्ड पकड़ाने के लिए घूमा करता है। शादी के बाद मैंने सबसे पहले अपने बड़े देवर का लण्ड पकड़ा। पहले दिन मुंह में लण्ड लेने के बाद वह जल्दी ही झड़ गया और मुझे चोद नहीं पाया। वह थोड़ा झेंप गया। तब मैंने कहा नहीं देवर जी पहली बार ऐसा होता है पर अगली बार तुम मेरी बुर चोद लोगो। दो दिन बाद मैंने फिर उसका पकड़ा और तब उसने मुझे खूब जम कर चोदा। उसके बाद मैंने एक दिन मैंने अपने छोटे देवर से चुदवा लिया और फिर मैं दोनों से अक्सर चुदवाने लगी। एक दिन मैंने अपने नंदोई को फंसा लिया। अकेले में उसका लण्ड पकड़ा तो वह बोला भाभी जी आप तो बहुत सुन्दर हैं। मैंने कहा तो फिर चोदो न मुझे। मैंने उसका लौड़ा उसे नंगा करके पकड़ लिया। मैंने लण्ड हिला कर कहा अच्छा तो यही लण्ड मेरी नंद की बुर में घुसता है ? आज ये मादर चोद नन्द की भाभी की बुर चोदेगा ? मैंने फिर रात भर उससे तीन बार चुदवाया।
एक दिन मैं बैंक गयी और मैनेजर.मिस्टर रमन से मिली। मैनेजर एक मस्त नौजवान लगभग ३० साल का आदमी था। मेरा दिल उस पर आ गया। मेरी नियत उस पर ख़राब हो गयी। अब ऑफिस में मैं उसके लण्ड पर हाथ नहीं मार सकती थी तो मैंने उससे कहा सर कल मेरी बर्थ डे है। मैं आपको आमंत्रित कर रही हूँ। कल शाम को आप ८ बजे जरूर आ जाना।
दूसरे दिन वह आ गया। तब तक मैंने सब तैयारी कर ली थी। मेज पर केक भी रख लिया बगल में डिंक्स की भी तैयारी थी। पर घर उसके अलावा कोई और नहीं था। उसने पूंछा मैडम मेरे अलावा कोई और नहीं है ? मैंने कहा बात यह है की मैं अपना बर्थ डे वैसे मानती नहीं हूँ। कल आपसे मुलाकात हुई तो मैंने कह दिया और मैं खुश हूँ की आप आ गए। मेरे लिए आप ही काफी हैं। अब मुझे किसी और भोसड़ी वाले की जरुरत ही नहीं है। मैंने जानबूझ कर गाली दी। केक कटा और फिर हम दोनों ने डिंक्स लेना शुरू कर दिया। मैंने नीचे एक घाघरा पहना था और ऊपर कुछ भी नहीं। बस एक चुन्नी माला की तरह डाली थी जिसमे मेरी चूँचियाँ थोड़ी बहुत छुपी थीं। मैं बीच बीच में चूँचियाँ इधर उधर करके उसको झलक दिखा भी देती थी। मैं थोड़ा अश्लील बातें भी करने लगी और इन्ही बातों के दरमियान उसने कहा मैडम,,,,,,, ? तो मैंने छूटते ही कहा मैडम की माँ का भोसड़ा ? मैडम की बहन की बुर । मुझे मैडम मत कहो मैं सुनीता हूँ। मुझे बुर चोदी सुनीता कहो।
मेरी गालियां सुनकर उसके बदन में हलचल होने लगी। थोड़ा और नशा चढ़ा तो मेरी चूँचियाँ लगभग पूरी खुलने लगीं। उसकी नज़र चूँचियों पर बार बार टिक जाती। मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखा और आगे बढाकर उसका लण्ड ऊपर से दबा कर कहा यार अब कब तक इस बिचारे 'लण्ड' को छुपाकर रखोगे रमन बाबू। 'लण्ड' जब एक बार खड़ा हो जाए तो उसे दबाना नहीं चाहिए ? मेरे मुंह से 'लण्ड' सुनकर उसका लण्ड और हरकत में आ गया। तब तक मैंने अपनी चुन्नी उतार कर फेंक दी। मेरी नंगी चूँचियाँ उसके सामने छलक पड़ीं। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूँचियाँ पर रख दिया और कहा अब ये बुर चोदी चूँचियाँ तेरी ही हैं रमन बाबू ? इनका मज़ा जैसे चाहो वैसे ले लो। उसने चूँचियाँ दबा दीं और उनकी चुम्मी भी ले ली। मुझे उसकी मंसा का आभाष हो गया और मैं मन ही मन बड़ी खुश हुई।
मैं मुस्कराते हुए उसक पैंट खोलने लगी और उसने कोई आपत्ति नहीं की। वह। कमीज उतार दी और बनियाइन भी। उसकी चौड़ी छाती मुझे सेक्सी लगीं क्योंकि उस पर घने बाल थे। मैंने कर दिया और सोफा पर बैठी बैठी उसकी चड्ढी नीचे खसका दी। तब उसका लण्ड टन्न से मेरे गाल पर लगा। लण्ड देख कर मैं गद गद हो गयी। लण्ड का लंबा भी था और मोटा भी। उसका सूपड़ा अधिक बाहर था। मैंने लण्ड मुठ्ठी में लिया उसकी कई चुम्मियाँ लीं और बोली रमन यार तेरा लण्ड बड़ा सॉलिड है, जबरदस्त है और मर्दाना है। मुझे मर्दाने लण्ड ही पसंद आते हैं। मेरा मुंह खुला और लण्ड का सुपाड़ा अंदर। मैं पेल्हड़ थामे जबान सुपाड़े के चारों तरफ अंदर ही अंदर घुमाने लगी। मजे की बात यह थी की लण्ड की झांटें बिलकुल साफ़ थी। लण्ड सच में बड़ा प्यारा और खूबसूरत लग रहा था।
फिर मैंने भी अपना घाघरा खोल डाला और अपनी मस्तानी छोटी छोटी झांटों वाली चूत उसे दिखा दी। अब वह मेरे सामने पूरा नंगा हो गया और मैं भी मादर चोद उसके सामने बिलकुल नंगी हो गयी। मैं उसका लण्ड पकड़े पकड़े बेड रूम में चली गयी और उसे चित लिटा दिया। मैं उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ कर उसका लौड़ा हिलाने लगी, उसे चूमने चाटने लगी. मैं लण्ड से प्यार करने लगी। मैं लण्ड से खेलने लगी, मैं लण्ड अपने माँथे पर, अपनी आँखों पर, अपने गालों पर, अपने होठों पर, अपने गर्दन में रगड़ने लगी। मैं लण्ड को प्यार से पुचकारने लगी। उसके बाद मैं लण्ड बड़े मजे से अपनी चूँचियों पर फिराने लगी। फिर मैं उस पर चढ़ बैठी और अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
हम दोनों 69 बने हुए थे. मैं उसका लण्ड चाटने लगी और वह मेरी चूत चाटने लगा। थोड़ी देर में वह जोश में आ गया और लण्ड मेरी बुर में घुसेड़ दिया। मैं चुदाने लगी और वह चोदने लगा। वह स्पीड बढ़ाता गया और मैं उसका साथ देती गयी। मेरी तमन्ना पूरी हो रही थी और उसे भी एक नई चूत चोदने का मौक़ा मिल रहा था। मेरे मुंह से निकला वाओ, क्या लौड़ा है तेरा यार रमन ? बड़ा मज़ा दे रहा है। मुझे खूब अच्छी तरह से चोदो। फाड़ डालो मेरी बुर चोदी बुर ? मेरी गांड मार लो, मेरी चूँचियाँ चोद लो, मेरे मुंह में घुसेड़ दो लण्ड, मेरी माँ चोद लो यार, मेरी बहन की बुर ले लो. तेरे लण्ड में बड़ी ताकत है। हाय दईया बड़ा अच्छा लग रहा है। बहुत दिनों के बाद ऐसा लौड़ा मिला है। चोदो मुझे दिन रात चोदो। रोज़ चोदो सुबह शाम चोदो, शराब पी पी कर चोदो। अपने दोस्तों के भी लण्ड पेल दो मेरी चूत में यार।
रमन ने फिर मुझे पीछे से चोदना शुरू किया। मैं डॉगी स्टाइल की चुदाई खूब एन्जॉय करती हूँ। मैं धकाधक छुड़वाने लगी और तब मुझे लगा की मेरी चूत ढीली हो रही है। लौड़ा जब मोटा हो और सख्त हो तो चूत का बाजा जल्दी बजा देता है। मैं झाड़ गयी और तब वह बोला भाभी अब मैं भी निकलने वाला हूँ। मैंने घूम गयी और लण्ड मुठ्ठी में लेकर सड़का मारने लगी। मैंने लण्ड के आगे मुंह खोल दिया और तब लण्ड ने उगल दिया सारा वीर्य जिसे मैं पी गयी और मस्ती से झड़ता हुआ लण्ड चाटने लगी।
एक बार मैं ट्रेन में सफर कर रही थी। मैं फर्स्ट A / C में थी जिसमे 4 बर्थ होतीं हैं। लेकिन 1 बर्थ खाली थीं जिसमे कोई भी यात्री नहीं था। शाम के ८ बज चुके थे। मेरे सामने 2 बर्थ पर दो लड़के थे उनकी उम्र लगभग २६ / २८ साल की होगी। वे थे बड़े स्मार्ट और हैंडसम। मेरी नियत उन पर ख़राब हो गयी। मैंने बात चीत शुरू की तो मालूम शिवा और सुरेश थे , दोनों आपस में दोस्त थे। रात को टी टी आया और टिकट चेक करके चला गया। फिर हमने कूपे को अंदर से बंद कर लिया। एक ने अपने बैग से शराब की बोतल निकाली और दो पैग बनाया। मैं बड़े गौर से देख रही थी तो शिवा बोला मैडम आप साथ देंगीं ? मैंने कहा मैं सुनीता हूँ। मुझे सुनीता कहो मैडम नहीं। मैं आपका साथ दे सकती हूँ। उसने एक पैग मुझे पकड़ा दिया मैं उनके साथ शराब पीने लगी। मैंने भी ढीले कपडे जी हां सिर्फ एक गाउन। मेरी चूँचियाँ झलक रहीं थीं। उन दोनों की नज़रें वहीँ पर टिकीं थीं। वे भी कच्छा बनियाइन में ही थे।
- मैंने पूंछा आप दोनों दोस्त है क्या ?
- वह बोला जी हां हम दोनों पक्के दोस्त हैं।
- कितने पक्के दोस्त हैं आप लोग ?
- बचपन के दोस्त है साथ साथ खेले कूदे हैं पढ़े लिखे हैं।
- तो फिर बचपन एक दूसरे को नंगा देखते होंगें आप लोग ?
- हां बचपन में तो नंगे नंगे खेलते ही थे।
- कभी जवानी में एक दूसरे को नंगा देखा है आपने ?
- मेरा सवाल सुनकर वे दोनों लड़खड़ा गए। एक दूसरे को देखने लगे और जबाब ढूंढने लगे। शिवा ने कहा हां सुनीता जी देखा तो है पर अच्छी तरह नहीं देखा ?
- तो फिर आज यहाँ अच्छी तरह देख लो। यहाँ तो कोई नहीं है ?
- आप तो है सुनीता जी तो फिर कैसे देख लूं।
- मैंने अगर तुम्हे नंगा देख भी लिया तो मैं मादर चोद तुम्हारा क्या उखाड़ लूंगी। एक झांट भी नहीं उखाड़ पाऊँगी मैं तेरी ?
- सुरेश बोला हां अगर तुम भी हमारे साथ नंगी हो जाओ तो फिर हम लोग भी हो जायेगें ?
- अच्छा तो तुम मुझे भी नंगी देखना चाहते हो ? मैंने शराब का गिलास एक ही घूंट में खाली किया और कहा ठीक है तो मैं भी तुम्हारे साथ नंगी हो जाती हूँ। मैं बुर चोदी वैसे भी रात में नंगी ही रहती हूँ।
- वाओ, तब तो बड़ा मज़ा आयेगा।
- अब ये बताओ की तुम लोग अपने आप नंगे होंगे की मैं तुम्हे नंगा करूँ ?
- आप हमें नंगा कर दें तो बहुत अच्छा होगा मैडम ?
- फिर मैडम कहा ? मैडम की माँ का भोसड़ा ? मैडम की माँ की चूत ? देखो मैं शादी शुदा हूँ ? तुम मुझे सुनीता भाभी कहो। तुम दोनों मेरे देवर हो।
फिर मैंने अपना गाउन उतार फेंका मैं मादर चोद एकदम नंगी हो गयी। मेरी चिकनी चूत देख कर वे दोनों पागल हो गए। शिवा मेरी चूत सहलाने लगा और सुरेश मेरी गांड़। मुझे भी अच्छा लगने लगा। अब मैंने लण्ड का सुपाड़ा मुंह में लेना शुरू किया। कभी शिवा का सुपाड़ा और कभी सुरेश का सुपाड़ा। दोनों लण्ड बहन चोद मुझे मज़ा दे रहे थे। मैं दोनों के पेल्हड़ भी चाटने चूसने लगी। मैं मन ही मन बड़ी खुश थी और अपनी खूबसूरती पर गर्व कर रही थी। आज अगर मैं खूबसूरत न होती तो मुझे ऐसे लण्ड नसीब नहीं होते ? मैं फिर बर्थ पर लेट गयी और तब शिवा मेरी बुर चाटने लगा। मैं सुरेश का लण्ड चूसने में जुटी थी। थोड़ी देर बाद सुरेश ने मेरी बुर चाटी और मैंने शिवा का लण्ड चाटा। मैं बारी बारी से दोनों लण्ड का मज़ा ले भी रही थी और मज़ा दे भी रही थी। मैं भोसड़ी की बड़ी हरामजादी हूँ। मैंने इस तरह अपने पति का लण्ड कभी नहीं चाटा।
मुझे दोनों मरद बेहद प्यारे लग रहे थे। इतने में सुरेश ने अपना लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और बोला भाभी जी
एक दिन मैं अपनी दोस्त अनीता के घर चली गयी। वह इसी शहर में अपने पति के साथ अकेली रहती है। मैं जब पहुंची तो वह घर में अकेली ही थी। मुझे देख कर वह खुश हो गयी और मेरा वेलकम किया। फिर हम दोनों शराब पर बैठ गयी और शराब पीती हुई बातें करने लगी।
- मैंने कहा - यार तुम अकेली घर में बोर नही होती हो ?
- वह बोली - ज्यादा बोर नहीं होती। किसी न किसी को मन बहलाने के लिए बुला लेती हूँ।
- कौन बहलाता है तेरा मन अनीता ?
- पराये मरद का 'लण्ड' बहलाता है मेरा मन ?
- क्या मतलब यार साफ़ साफ़ बताओ न ?
- मेरा हसबैंड हफ्ते में दो बार टूर पर जाता है। जब वह जाता है तो मैं अपने दोस्तों को बुला लेती हूँ और उनके लण्ड से खेलती हूँ, उनके लण्ड पीती हूँ, उनके लण्ड अपनी बुर में लेती हूँ, लण्ड चोदती हूँ, मज़ा करती हूँ।
- तो आज तेरा हसबैंड कहाँ है ?
- वह टूर पर गया है। परसों आयेगा।
- तो फिर आज तुम्हे चोदने कौन आएगा ?
उस दिन मैंने दोनों से रात भर खूब मस्ती से चुदवाया।
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