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बीवियों की पराये मर्दों से चुदवाने की आदत - Dusre ka land pyara lage
बीवियों की पराये मर्दों से चुदवाने की आदत - Dusre ka land pyara lage , पत्नी क्यों चुदती है पराए आदमी से , पति के साथ बेवफाई करने की वजह , पति को दिया धोखा , पड़ोसी के लंड की भूख , बेगाना लंड अपना लगने लगा.
बीवियों द्वारा पराये मर्दों से चुदवाना कोई नई बात नहीं है। ऐसा तो सदियों से होता आ रहा है। इन बीवियों को चाहे कितनी ही पाबंदियों के बीच रखो, सात पर्दों के बीच छुपा कर रखो लेकिन जिन बीवियों को पराये मर्दों से चुदवाने की आदत होती है, वो किसी न किसी तरह से चुदवा ही लेतीं हैं और ऊपर से ऐसी पाक, साफ़, भोली भाली बनी रहतीं हैं जैसे की कुछ हुआ ही नहीं। इसीलिए कहा गया है की स्त्रियों के चरित्र को मनुष्य क्या भगवान् भी नहीं जान पाता है। मैं ऐसी कई बीवियों को जानती हूँ जो चोरी छिपे पिछले कई बर्षों से अपने ही घर में आज भी पराये मर्दों से चुदवा रहीं हैं और अपने हसबैंड के आगे ऐसा ब्यवहार करतीं है की जैसे उससे बढ़कर दुनियां में कोई और पतिब्रता स्त्री नहीं है। मैं सबसे पहले आपको मिसेज बिसाखा से मिलवाती हूँ। मैंने बिसाखा से पूंछा - मुझे मालूम हुआ है की आप कई सालों से अपने ही घर में पराये मर्दों से चुदवा रहीं हैं। मैं यह जानना चाहती हूँ की ये सब आप कैसे करतीं हैं। क्या आप कभी रंगें हाथों पकड़ी गयीं है। अगर पकड़ी गईं हैं तो फिर क्या हुआ ?
वह बड़े प्रेम से बोली - मेरी शादी के 12 साल हो गएँ हैं और मैं पिछले 10 सालों से पराये मर्दों से अपने ही घर में चुदवा रहीं हूँ जिसकी भनक किसी को भी नहीं है। मैं आपको ये सब सही सही बता रही हूँ लेकिन आप यह वादा कीजिये की आप ये सब किसी और को बताएंगी नहीं ?
मैंने कहा - बिलकुल नहीं बताऊंगी। देखो यार मैं भी एक औरत हूँ और शादी शुदा औरत हूँ। मैं औरत की मनोदशा समझती हूँ। तुम मेरे ऊपर भरोषा रखो मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊँगी।
वह बताने लगी :- मैं अपनी शादी के दो साल तक सिर्फ अपने पति से ही चुदवाती रही। किसी और मरद से कभी नहीं चुदवाया। किसी और का लण्ड पकड़ने की कोशिश भी नहीं की। लेकिन हां मन तो करता था की कोई और लौड़ा हो जो मुझे खूब हचक हचक कर चोदे। मैं खूबसूरत हूँ, गोरी चिट्टी हूँ और बड़ी बड़ी चूँचियों वाली हूँ। मुझे मरद मिलने में कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ती। बस थोड़ा इशारा करना पड़ता है और मैं इशारा अपने ढंग से करती हूँ। दो साल के बाद मेरा मन मचलने लगा और फिर मैंने एक का लण्ड पकड़ा उससे चुदाना शुरू किया तो बड़ा मज़ा आया। फिर दूसरे को पकड़ा तो उससे भी चुदवाने में खूब मज़ा आया। फिर मेरी निगाह तीसरे मरद के लण्ड पर पड़ी तो मैं उससे भी चुदवाने लगी। अब बारी बारी से कभी एक से, कभी दूसरे से और कभी तीसरे से चुदवाने लगी। फिर इत्तिफाक से मुझे एक और मरद मिल गया। उससे नजदीकियां बढ़ाईं तो उसके लण्ड का भी कब्जा मुझे जल्दी ही मिल गया और मैं उसे भी अपनी चूत में पेलने लगी. इसके बाद अभी एक साल पहले मैं एक और मरद से चुदवाने लगी जिससे मेरी मुलकात ट्रेन में हुई थी। इस तरह मेरे 5 यार हैं। मैं आज भी इन्हीं लोगों से चुदवाती रहती हूँ। इनमे में से न कोई मेरे घर का है, न मेरी ससुराल का और न किसी नाते रिस्तेदार का। सब लोग बाहर के हैं और मेरे पक्के यार हैं। मुझे जी भर के चोदने वाले हैं। अब मैं आपको विस्तार से अपने पहले मरद से चुदाई की कहानी सुनाने जा रही हूँ -
शादी के दो साल बाद मैं एक दिन शॉपिंग हाल में अकेली ही घूम रही थी। अचानक किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा तो मैंने पीछे मुड़ कर देखा और कहा अरे विमल तू ? तू यहाँ क्या कर रहा है ? वह बोला अरे यार मैं इसी शहर में रह रहा हूँ। यहीं नौकरी कर रहा हूँ। एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हूँ। पर तुम बताओ न अपने बारे में। मैंने कहा मैं भी यही हूँ अपने हसबैंड के साथ। फिर हम दोनों बैठ कर चाय नास्ता करने लगे। विमल मेरे कॉलेज का दोस्त है। हम दोनों बड़ी देर तक कॉलेज के दिनों की बातें करते रहे। बाद में उसने पूंछा बिसाखा तेरा हसबैंड कहाँ है ? मैंने बताया की वह दो दिन के लिए टूर पर गया है। पर तुम बताओ की तेरी बीवी कहाँ है ? वह बोला यार मैंने तो शादी ही नहीं की ? मैं अभी भी अकेला ही हूँ। मैंने कहा तो फिर क्या चलो मेरे घर। वहां खुल कर बातें करेगें यहाँ तो खुल कर नहीं कर सकते। मैं उसे प्रेम से अपनी कार में बैठा कर घर ले आई।
मैंने उसे बैठाया और अंदर जाकर कपड़े बदल कर फ़ौरन आ गयी। साथ में मैं ड्रिक्स का सेट भी बनाकर ले आयी और उसे शराब का गिलास पकड़ा दिया। हम दोनों ने चियर्स कहा और शराब पीने लगे। सच बताऊँ माहिया मेरी नियत वहीँ ख़राब हो गयी थी जब मैंने विमल को शॉपिंग हॉल में देखा था।
- मैं बोली - हां अब बता तू भोसड़ी का अभी तक अकेला क्यों है ? शादी क्यों नहीं की तूने ?
- वह बोला - क्या बताऊँ मुझे नौकरी बहुत दिनों के बाद मिली है। मेरे बाप ने कहा था की जब तक तू काम नहीं करेगा तब तक मैं तेरी शादी नहीं करूंगा।
- अच्छा तो इसका मतलब अब तू कर लेगा शादी।
- हां यार अब तो कर ही लूंगा।
- तो फिर ये बता की तू शादी के बाद अपने हनीमून में क्या करेगा ?
- वही करूंगा यार, जो सब लोग करतें हैं।
- खुल के बता यार ? यहाँ हम दोनों के अलावा कोई नहीं है। दरवाजा भी बंद है और कोई आने वाला भी नहीं है. फिर तेरी गांड क्यों फट रही है ?
- यार सुहागरात में हम दोनों नंगे नंगे बिस्तर पर एन्जॉय करेंगें।
- अच्छा तो साफ़ साफ़ बता की तू सुहागरात में अपनी बीवी चोदेगा ?
- हां बिलकुल बीवी चोदूंगा।
- अच्छा तो तुझे चोदना आता है ? तूने पहले कभी किसी की बीवी चोदी है। किसी की बुर में लौड़ा पेला है अपना ?
- नहीं यार अभी तक तो नहीं पेला ?
- तो फिर आज मौक़ा है पेल ले अपना लौड़ा ? मेरी, बुर चोदी, बुर किस दिन काम आएगी। आज तू मेरी बुर चोद कर चोदना सीख ले। मैं जिस तरह से बातें कर रही थी वह समझ गया की मैं कितनी चुदासी हूँ। मैंने अपना हाथ उसके लण्ड पर रख दिया और कहा अपना लण्ड मुझे दे दे विमल ? आज मैं नंगी नंगी तेरे लण्ड के साथ खेलूंगी। कॉलेज के दिनों में तो कभी मैंने तेरा लण्ड देखा नहीं पर आज जरूर देखूँगी।
उधर फिर मैंने भी अपना पेटीकोट खोल डाला। उसने जब मेरी छोटी छोटी झांटों वाली चूत देखी तो मस्त हो गया। उसका हाथ मेरी चूत पर चला गया और वह बोला वॉवो बिसाखा तेरी चूत तो वास्तव में बड़ी हॉट है यार ? वह झुक कर मेरी बुर चाटने लगा और एक हाथ से मेरी चूचियाँ भी मसलने लगा। आज मैं शादी के बाद पहली बार किसी पराये मरद का लौड़ा चूस रही थी तो मुझे लगा की जैसे मैंने अपनी मंजिल पा ली है। मैंने कहा यार विमल अब तुम अक्सर मुझे अपना लण्ड पकड़ाते रहना। तेरी शादी हो जाए तो भी तुम मुझे चोदते रहना । बोलो वादा करते हो न ? वह बोला हां यार इतनी अच्छी चूत कौन छोड़ेगा ? मैं तो सच में चोदता रहूंगा। दूसरे की बीवी चोदने में तो बड़ा मज़ा आता है बिसाखा। कुछ देर बाद जब उसने लौड़ा पेला मेरी चूत में तो मुझे स्वर्ग का मज़ा आया। इतना मज़ा तो मुझे अपने हसबैंड चुदवाने में नहीं आया। मैं नीचे लेटी थी और वह मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोद रहा था।
मैंने उसे कुछ देर के लिए अपना हसबैंड बना लिया था। मैंने कहा विमल तू मेरा पति है यार मुझे चोदो। चूत का हलवा बना दो। फाड़ डालो मेरी बुर। तेरा लौड़ा बड़ा ताकतवर है। चीथड़े उड़ा दो मेरी चूत के। ये चूत बुर चोदी हर रोज़ पराये मरद का लण्ड खाना चाहती है। पेल दो लण्ड। वॉवो बड़ा मज़ा आ रहा है। आज मैं बहुत अच्छी तरह चुद रही हूँ। वह पलंग के नीचे खड़ा खड़ा मुझे चोद रहा था। मेरी दोनों टांगें उसके कंधे पर थीं। मुझे अपनी नंगी टांगें गैर मर्दों के कंधे पर रखने में बड़ा मज़ा आता है। थोड़ी देर में वह मुझे पीछे से चोदने लगा और मैं भी घोड़ी की तरह चुदवाने लगी। उसने इतनी रफ़्तार से चोदा की मैं खलास हो गयी। फिर वह खलास होने लगा तो मैंने उसका झड़ता हुआ लण्ड चाटा।
जाते समय मैंने कहा देखो यार विमल मुझे जब जब मौक़ा मिला करेगा तब तब मैं तुझे व्हाट्सअप पर sms भेज कर बुलाया करूंगी। इस तरह मैंने 4 और लोगों को अपना यार बनाया और उनसे चुदवाती हूँ। सबसे बाद वाला यार जो मुझे ट्रेन में मिला था सबसे बढ़िया है। उसका लण्ड साला 9" का है और चोदता भी गज़ब का है। मैं तो अपने घर में पराये मर्दों के लण्ड का मज़ा लेती रहती हूँ।
तो देखा आपने दोस्तों, ऐसी होतीं हैं ये बुर चोदी खूबसूरत बीवियां ?
अब मैं आपको एक और खूबसूरत बीवी से मिलवाती हूँ। मैं पहुँच गयी मिसेज शिल्पा चौधरी के घर। वह एक बंगाली औरत है , २८ साल की है, गज़ब की खूबसूरत है, हॉट है और खुल कर बातें करती है। मेरी उससे बड़ी पक्की दोस्ती है. मुझसे कुछ भी नहीं छुपाती।
- मैंने कहा - यार शिल्पा मैं यह जानना चाहती हूँ की क्या तुम अपने ही घर में ग़ैर मर्दों से चुदवाती हो ?
- वह बोली - हां बिलकुल चुदवाती हूँ। और मैं ही क्यों ? आजकल की सभी बीवियां दूसरों से चुदवाने का मौक़ा निकाल ही लेतीं हैं।
- तो तुम कब कब और कितने लोगों से चुदवाती हो ?
- मैं तो लगभग हर दूसरे दिन किसी न किसी से चुदवाती हूँ।
- क्या ये सब तेरा हसबैंड जानता है ?
- न बाबा न, मैं तो उसके आगे एक भोली भाली सीधी शादी बीवी ही बनी रहती हूँ। उस भोसड़ी वाले को क्या मालूम की मैं गैर मर्दों से चुदवाने वाली बहुत बड़ी चुदक्कड़ बीवी हूँ।
- तो फिर बताओ न की तुम कैसे पराये मर्दों चुदवाती हो ?
बस मैं उससे हंसी मजाक करने लगी। अपने बूब्स इधर उधर करके दिखाने लगी। रात के 11 बज चुके थे। मैंने कहा देवर जी अब सोने का टाइम हो गया है। वह बोला भाभी जी अभी नींद नहीं आ रही है। मैंने कहा अच्छा तो फिर तू क्या करेगा ? वह बोला कर बहुत कुछ सकता हूँ भाभी पर ,,,,,,,,,,,? मैंने हंसकर मजाक करते हुए कहा पर क्या ? पर ये की तेरी गांड फट रही है क्या ? पर क्या तेरा लण्ड नहीं खड़ा होता है ? मैंने खुल कर कहा तो वह भी जोश में आ गया और बोला भाभी जी मुझे सब आता है और मेरा खड़ा भी होता है। मैंने कहा तो फिर दिखाओ न अपना खड़ा हुआ लण्ड ? मैंने उसके लण्ड पर हाथ मार दिया। उसने मेरी चौंचियाँ दबा दीं और कहा भाभी मैं बहुत देर से इन्हे देख रहा हूँ। अब तो मैं इसके अंदर घुसेड़ दूंगा अपना ,,,,,, ? मैंने बोली क्या घुसेड़ दोगे ? बोल तो पा नहीं रहे हो और घुसेड़ दोगे ? तुमसे अच्छा तो मेरा पड़ोसी है जो बोलता भी है और घुसेड़ भी देता है अपना लण्ड ? वह बोला अच्छा ये बात है तो लो देखो न पकड़ के मेरा लण्ड, भाभी जी। वह नंगा नंगा मेरे सामने खड़ा हो गया और मैं उसका लण्ड पकड़ कर मस्त होने लगी। लण्ड साला मेरे हसबैंड के लंड के बराबर था पर इसका थोड़ा मोटा ज्यादा था। मैं लण्ड पकड़ कर बड़े प्यार से हिलाने लगी।
फिर तो मैं भी मादर चोद हो गई पूरी नंगी। मेरी चिकनी चूत देख कर उसकी लार टपकने लगी और वह सहलाने लगा मेरी बुर। मैंने अपनी एक चूँची उसके मुंह में घुसेड़ दी। वह चूमने लगा मेरे बूब्स और चाटने लगा मेरे निपल्स। मैंने उसके लण्ड का सुपाड़ा बार बार मुंह से निकाल नकाल कर आम की गुठली की तरह चूस रही थी। मुझे उसके पेल्हड़ भी बड़े मस्त लगे। मैं लण्ड के साथ साथ पेल्हड़ चाटना और चूमना कभी नहीं भूलती।
मैं बुरी तरह चुदासी हो चुकी थी। मेरी चूत से आग निकल रही थी। मुझे इतना बढ़िया लण्ड मिला तो मैं अब बिना चुदवाये रुक नहीं सकती थी। , मैंने अपनी चूत फैला दी और कहा लो देवर जी अब तुम पेल दो अपना लण्ड जल्दी से मेरी चूत में और चोद मेरी बुर चाहो ? मैं भी देखना चाहती हूँ की तेरे इस भोसड़ी वाले लण्ड में कितना दम है ? उसने मुझे बेड के एक कोने में घसीटा और मेरी गान के नीच दो तकिया लगा दिया। मेरी चूत ऊपर उठ गयी और तब मैंने अपनी दोनों टांगें पर रख दीं / उसने लण्ड पहले मेरी चूत पर खूब रगड़ा। लण्ड भी गीला था और चूत भी। फिर क्या लौड़ा पूरा का पूरा सरसराता हुआ अंदर घुस गया। मैं बड़े मजे से चोदने लगा और मैं बड़े मजे से चुदने लगी। मैं आज शादी के बाद पहली बार किसी पराये मरद से चुद रही थी। मैं तो बिलकुल सातवें आसमान पर थी। बहुत दिनों के बाद मुझे चुदाई का असली मज़ा मिल रहा था।
कहतें है की स्त्रियों को जितना मज़ा पराये मर्दों से चुदवाने में आता है उतना मज़ा उसे अपने मरद से चुदवाने में नहीं आता भले की उसके मरद का लण्ड घोड़े के लण्ड के बराबर ही क्यों न हो, मोटा तगड़ा और बड़ी देर तक चोदने वाला ही क्यों न हो ? बन्दर की नूनी के बराबर पराये मरद का लण्ड उसे ज्यादा मज़ा दे जाता है। ऐसा होता है स्त्रियों का चरित्र जो आजतक किसी को समझ में नहीं आया।
इसमें उनका कोई दोष नहीं है ये तो सब भगवान का बनाया हुआ करिश्मा है।
खैर मैं तो सारी दुनिया भूल कर बस चुदवाने में ही मस्त थी। आखिर में जब उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठा कर चोदा तो बड़ा मज़ा आया। मैंने जब झड़ता हुआ लण्ड चाटा तो बड़ा स्वादिस्ट लगा। इसके बाद फिर मैंने अपने नंदोई से चुदवाया और एक दिन अपने बहनोई का भी लण्ड अपनी चूत में पेलवा लिया। अभी दो लड़के और मेरे संपर्क में हैं। एक तो कल ही मुझे चोदने आ रहा है क्योंकि कल मेरा हसबैंड अपने गांव जा रहा है और दूसरा उसके एक हफ्ते के बाद चोदेगा। मैं अपने यारों का दायरा बढ़ा रही हूँ और मेरा प्लान है की जब मेरे हसबैंड ऑफिस में हो तो मैं यहाँ हर रोज़ किस न किसी से चुदवाती रहूं।
फिर मैंने एक दिन अपनी पक्की दोस्त राधिका को फोन कर दिया।
वह बोली - अरी माहिया, तू बुर चोदी कहाँ घूम रही है? तू अभी इसी वख्त मेरे घर आ जा।
मैंने कहा - ऐसी क्या बात है की तू मुझे अभी बुला रही हूँ ?
वह बोली - बहन चोद माहिया। तू सवाल न कर तेरी माँ की चूत। मैं कह रही हूँ न बस तू आजा बाकी बातें बाद में करूंगी ।
मैं फ़ौरन चल पड़ी और 10 मिनट में ही उसके घर पहुँच गयी। वहां दो मस्त जवान लड़के बैठे थे। राधिका ने बताया की ये दोनों जग्गू और रोहन हैं। आजकल मेरा हसबैंड बैंकाक में एक सेमीनार अटेंड करने गया है। वह वहां गोरी गोरी लड़कियां चोदेगा और मैं यहाँ गोरे गोर लड़कों से चुदवाऊंगी। मैं उन दोनों को बड़े गौर से देखने लगी। थोड़ी देर तक हम सब शराब पीते रहे और फिर राधिका ने मेरा हाथ पकड़ कर रोहन के लण्ड पर रख दिया और खुद जग्गू का लण्ड बाहर निकालने लगी। मैं तो बेशर्म थी ही। मैं भी इन सब बीवियों की तरह ही बड़ी छिनार हूँ, बदचलन हूँ और ग़ैर मर्दों से खुल्लम खुल्ला चुदवाने वाली हूँ। मैं तो लण्ड पाकर मस्त हो गयी। फिर मैंने रोहन का लण्ड राधिका की बुर में घुसा दिया और राधिका ने जग्गू का लण्ड मेरी बुर में।
कहतें है की स्त्रियों को जितना मज़ा पराये मर्दों से चुदवाने में आता है उतना मज़ा उसे अपने मरद से चुदवाने में नहीं आता भले की उसके मरद का लण्ड घोड़े के लण्ड के बराबर ही क्यों न हो, मोटा तगड़ा और बड़ी देर तक चोदने वाला ही क्यों न हो ? बन्दर की नूनी के बराबर पराये मरद का लण्ड उसे ज्यादा मज़ा दे जाता है। ऐसा होता है स्त्रियों का चरित्र जो आजतक किसी को समझ में नहीं आया।
इसमें उनका कोई दोष नहीं है ये तो सब भगवान का बनाया हुआ करिश्मा है।
खैर मैं तो सारी दुनिया भूल कर बस चुदवाने में ही मस्त थी। आखिर में जब उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठा कर चोदा तो बड़ा मज़ा आया। मैंने जब झड़ता हुआ लण्ड चाटा तो बड़ा स्वादिस्ट लगा। इसके बाद फिर मैंने अपने नंदोई से चुदवाया और एक दिन अपने बहनोई का भी लण्ड अपनी चूत में पेलवा लिया। अभी दो लड़के और मेरे संपर्क में हैं। एक तो कल ही मुझे चोदने आ रहा है क्योंकि कल मेरा हसबैंड अपने गांव जा रहा है और दूसरा उसके एक हफ्ते के बाद चोदेगा। मैं अपने यारों का दायरा बढ़ा रही हूँ और मेरा प्लान है की जब मेरे हसबैंड ऑफिस में हो तो मैं यहाँ हर रोज़ किस न किसी से चुदवाती रहूं।
फिर मैंने एक दिन अपनी पक्की दोस्त राधिका को फोन कर दिया।
वह बोली - अरी माहिया, तू बुर चोदी कहाँ घूम रही है? तू अभी इसी वख्त मेरे घर आ जा।
मैंने कहा - ऐसी क्या बात है की तू मुझे अभी बुला रही हूँ ?
वह बोली - बहन चोद माहिया। तू सवाल न कर तेरी माँ की चूत। मैं कह रही हूँ न बस तू आजा बाकी बातें बाद में करूंगी ।
मैं फ़ौरन चल पड़ी और 10 मिनट में ही उसके घर पहुँच गयी। वहां दो मस्त जवान लड़के बैठे थे। राधिका ने बताया की ये दोनों जग्गू और रोहन हैं। आजकल मेरा हसबैंड बैंकाक में एक सेमीनार अटेंड करने गया है। वह वहां गोरी गोरी लड़कियां चोदेगा और मैं यहाँ गोरे गोर लड़कों से चुदवाऊंगी। मैं उन दोनों को बड़े गौर से देखने लगी। थोड़ी देर तक हम सब शराब पीते रहे और फिर राधिका ने मेरा हाथ पकड़ कर रोहन के लण्ड पर रख दिया और खुद जग्गू का लण्ड बाहर निकालने लगी। मैं तो बेशर्म थी ही। मैं भी इन सब बीवियों की तरह ही बड़ी छिनार हूँ, बदचलन हूँ और ग़ैर मर्दों से खुल्लम खुल्ला चुदवाने वाली हूँ। मैं तो लण्ड पाकर मस्त हो गयी। फिर मैंने रोहन का लण्ड राधिका की बुर में घुसा दिया और राधिका ने जग्गू का लण्ड मेरी बुर में।
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