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जेठानी और देवरानी की चूत की चुदाई - Jethani aur devrani ki chut ki chudai
जेठानी और देवरानी की चूत की चुदाई - Jethani aur devrani ki chut ki chudai , जेठानी और देवरानी दोनों एक चुदी , सामूहिक चुदाई का खेल कमरे में , एक घर की सच्चाई , सब चोदो साथ साथ में.
मेरा नाम साइना खातून है। मेरी शादी अभी ३ महीने पहले ही हुई है। मैं २४ साल की हूँ, मद मस्त हूँ, सेक्सी हूँ, हॉट हूँ और मुंहफट हूँ। मैं झांट किसी की परवाह नहीं करती। ये ससुराल भी मेरे लिए नई नहीं है। मेरी शादी बड़ी नजदीकी रिश्ते में हुई है इसलिए मैं काफी लोगों को जानती हूँ। यहाँ तक की उनके लण्ड भी पहचानती हूँ। हां 4 /6 लोग नए जरूर जुड़ गएँ है जिन्हे अभी तक नहीं पहचानती थी। पर अब वे भी पहचान में आ गए हैं। एक दिन मैं बिना बुर्के के बाहर चली गई तो जेठानी से कुछ बात चीत हो गयी।
- देख साइना तू अभी ३ महीने पहले ही इस घर में बहू बन कर आई है। और आते ही तू बिना बुर्का पहने हुए बाहर जाने लगी है। कई बार तुझे बिना बुर्के के आते जाते देखा है। ये अच्छी बात नहीं है। तुझे कुछ मर्यादा का ख्याल करना चाहिए।
- तो क्या सारी मर्यादा बहन चोद इस बुर्के में ही छुपी हुई है। बुर्का पहना तो मर्यादा में और नहीं पहना तो मर्यादा के बाहर हो गयी। ऐसा नहीं होता जेठानी जी। कभी कभी बिना बुर्के के बाहर जाने में कोई हर्ज़ नहीं है।
- तुझे क्या मालूम भोसड़ी वाली तू तो अभी कुछ दिन पहले ही आयी है। बहू है तो बहू बन कर रह। सास बनने की कोशिश न कर। तुझे कुछ हाय शर्म है की नहीं ?
- मैं सब जानती हूँ की यहाँ किसको कितनी हया शर्म है। मैंने कई बार यहाँ घर में कई लोगों को नंगी घूमते हुए देखा है। तब शर्म क्या माँ चुदाने चली जाती है ?
- अरे यार घर में हम कपड़े पहने या नंगी रहें। बाहर वालों को इससे क्या लेना देना ? यहाँ तो सब अपने कुनबे के ही हैं। कोई पराया नहीं है ? उनसे कोई पर्दा न करे तो चलता है पर बाहर वालों से और बुरी नज़र से पर्दा तो करना ही पड़ेगा।
- अच्छा यहाँ सब कुनबे वाले है तो सबसे खुले आम चुदवा लूं ? वैसे भी साले सब अपना अपना लण्ड खोले खोले हुए घूमते रहतें हैं. तब किसी को कोई शर्म नहीं आती। घर में बहू बेटियां बीवियां सब नंगी रहें तो कोई शर्म नहीं । बाहर जाने से ही शर्म आ जाती है।
- हां हां ऐसा होता है। शर्म तो बाहर वालों से की जाती है घर वालों से क्या शर्म ?
- तू जब मेरे मियां का लण्ड अपनी बुर में घुसाती है तब तुझे शर्म नहीं आती ?
- लण्ड तो तू भी घुसाती है अपनी चूत में मेरे मियां का ? बड़ा अच्छा लगता है न तुझे मेरे मियां का लण्ड ?
- तो क्या हुआ ? अपनी नन्द को देखो। वह तो इसी घर की है। आज तक मैंने उसे अपने शौहर का लण्ड पीते हुए नहीं देखा। वह तो बुर चोदी ग़ैर मर्दों के लण्ड पीती ही रहती है। और अपनी सास को देखो। आज तक मेरे ससुर ने अपना लण्ड सास के भोसड़ा में कभी नहीं पेला। वह तो लण्ड दूसरों की बीवियों की बुर में पेलता रहता है। दूसरों की बेटियां चोदता है, दूसरों की बहुओं की बुर में लण्ड घुसाता है। क्या उसे कभी शर्म आती ?
- अरे वो मर्द है। मर्द सब कुछ कर सकता है और कुछ भी कर सकता है।
- मर्द की माँ का भोसड़ा ? मर्द की बहन की बुर ? अब मैं इन मर्दों के लण्ड जब अपनी चूत में डाल कर भुनूँगी तब तुम देखना जेठानी जी। मेरी गांड के पीछे घूमा करेंगें ये सब भोसड़ी वाले मर्द ?
- अरे साइना एक बात बताऊँ। आज रात को एक बहुत बड़ा चुदाई का जश्न होने वाला है। बड़ा मज़ा आएगा।
- वो तो रात को होगा जेठानी जी पर अभी एक जश्न होने वाला है। मेरा मामू जान आया हुआ है। उसने मुझे बताया की जबसे मैंने तेरी जेठानी को देखा है तबसे मेरा लण्ड खड़ा है बहन चोद। अब ये तभी बैठेगा जब तेरी जेठानी इसे पकड़ के बैठायेगी।
- अच्छा ये बात है तू मैं जरूर बैठा दूँगी।
करीम मेरे बूब्स दबाने लगा और मैं भी उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगी। मैं धीरे धीरे उसके लण्ड की तरफ बढ़ रही थी और उधर मेरी जेठानी भी मेरे मामू के लण्ड की तरफ बड़ी तेजी से बढ़ रही थी. उसने तो मेरे मामू जान का नाड़ा भी खोल डाला। नाड़ा खुलने से वह नंगा हो गया। जेठानी ने उसका लण्ड पकड़ा और बड़े प्यार से मुस्कराते हुए हिलाने लगी। उसे देख कर मुझे भी जोश आ गया तो मैंने भी उसके मामू करीम का लण्ड बाहर निकाल लिया। मेरे लिए उसके मामू का लण्ड नया था। मैंने पहले इसका लण्ड पकड़ा और यही हाल जेठानी एक भी था। उसने भी मेरे मामू का लण्ड पहले कभी नहीं पकड़ा था। हम दोनों नया लण्ड पाकर बड़ी ख़ुशी हुई। मैं करीम के लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी और वह रहीम के लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी। तब तक हम दोनों की चूँचियाँ खुल गयीं। और वो दोनों हम दोनों की चूँचियाँ दबा दबा कर मज़ा लेने लगे। करीम ने मेरी सलवार भी खोल दी और मैं मादर चोद एकदम नंगी हो गयी। उधर जेठानी भी मेरे मामू के आगे एकदम नंगी हो गयी। करीम मुझे नंगी देख कर मस्त हो गया और मेरा मामू जेठानी को नंगी देख कर पागल हो गया। वह बोला साइना तेरी जेठानी तो बेहद खूबसूरत है। नंगी नंगी तो ये और ज्यादा खूब सूरत लग रही है। जेठानी का मामू बोला तसरीन तेरी देवरानी की बुर तो एकदम मक्खन मलाई है। बड़ी टाइट है बहन चोद इसकी बुर। इसे चोदने में तो ज़न्नत का मज़ा आएगा।
मैंने देखा की दोनों लण्ड एकदम तन कर खड़े हो गए हैं। मैं जेठानी के मामू का लण्ड चूसने लगी और जेठानी मेरे मामू का लण्ड चूसने लगी। मैं उसे लण्ड चूसते हुए देख रही थी और वह मुझे लण्ड चूसते हुए। वह बोली साइना तू भोसड़ी की बहुत अच्छी तरह लण्ड चूस लेती है। मेरा मियां का भी लौड़ा तू इसी तरह चूसती है। मैंने कहा अरे जेठानी जी लौड़ा साला मुझे बड़ा अच्छा लगता है। लण्ड से बढ़िया कोई चीज खुदा ने बनायीं ही नहीं। वैसे तू भी मेरे मियां का लण्ड चूसती है और झड़ता हुआ लण्ड पीती है। वह बोली अरी मेरी देवरानी तेरा मियां मेरा देवर है। उसके लण्ड पर मेरा हक़ है। और उसका हक़ मेरी चूत पर है, इसलिए मैं उससे खूब चुदवाती हूँ और आगे भी चुदवाती रहूंगी। तब तक करीम ने लण्ड मेरी चूत में पेल दिया और रहीम ने लण्ड जेठानी की बुर में। हम दोनों रंडी की तरह भकर भकर चुदवाने लगी। चढ़ाई की रफ़्तार बढ़ने लगी और हम एलपीजी भी अपनी अपनी गांड से जोर लगा लगा कर चुदवाने लगीं।
अचानक जेठानी ने मेरे मामू से पूंछा - मामू जान तूने कभी मेरी नन्द की बुर ली है ? कभी नन्द की माँ का भोसड़ा चोदा है। वह बोला - हां ली है। जब मैं पिछली बार आया था तो मैं उस दिन तेरी नन्द की चची जान की बुर चोद रहा था। बड़ी मस्त और टाइट बुर थी उसकी . वह भी बड़े मजे से चुदवा रही थी। इतने में तेरी नन्द जाने कहाँ से आ गयी और मेरा लण्ड बड़े गौर से देखने लगी। लण्ड उसकी चूत मे बार बार आ जा रहा था। ये सब दख कर वह गरम हो गयी। बस लण्ड जैसे ही पूरा बाहर निकला तो उसने हाथ बढ़ाकर लण्ड पकड़ा और अपने मुंह में भर लिया। तब तक चची जान ने उसे देख लिया। वह बोली तेरी माँ की चूत ? तूने बहन चोद लण्ड मेरी बुर से निकाल लिया। वह बोली अरे नही चची जान मैं थोड़ा चाट कर लण्ड फिर पेल दूँगी तेरी चूत में। कुछ देर बाद वह बोली ले अच्छा तू भी चुदवा ले अपनी बुर। ऐसा कह कर उसने मेरा लण्ड तेरी नन्द की बुर में घुसा दिया। मैं मस्त हो गया और एक नयी ताज़ी बुर चोदने लगा।
इन सब बातों से बढ़ा गया और दोनों लोग हचक हचक कर चोदने लगे फलस्वरूप मेरे मामू का लण्ड झड़ने लगा जिसे जेठानी ने बड़े मजे से पिया। फिर उसके मामू का लण्ड झड़ा और मैंने उसे बड़े प्यार से पिया। शाम को मैंने घर में कुछ हलचल देखी। लोगों का आना जाना देखा और लोगों को खूब हंसी मजाक करते हुए सुना तो एहसास हुआ की सच में आज कुछ होने वाला है। मैं चुपचाप सब कुछ देखती रही और लोगों पर नज़रें गड़ाये बैठी रही। रात को थोड़ा माहौल बदल गया अब लोग खुल कर बोलने लगे। मुझे कुछ गन्दी गन्दी बातें भी सुनाई पड़ीं और कुछ मस्त मस्त गालियां भी। बस मेरी चूत की आग भड़क उठी। फिर रात के 11 बज मैं एक बड़े हाल में गयी। मैंने वहां जो देखा उसे देख कर दंग रह गयी।
मैंने देखा की मेरी नन्द निदा नंगी नंगी अपने खालू का लण्ड चाट रही है। मैंने लण्ड देखा तो सिहर उठी। मेरे मुंह से निकला वाह क्या लौड़ा है ! कितना मस्त लौड़ा है ! फिर देखा की उसका खालू नंगा नंगा जेठानी की बुर चाट रहा है। और बड़े प्यार से चाट रहा है। और जेठानी उधर ससुर का लण्ड चाट रही है। उसका ससुर मेरा भी ससुर है। मैं आज पहली बार अपने ससुर का लण्ड देख रही थी। मेरा मन हुआ की मैं लण्ड जेठानी के मुंह से छीन कर अपने मुंह में घुसा लूं। इसका लण्ड ससुर के लण्ड से मोटा है। और ससुर भोसड़ी का मेरी फुफिया सास भोसड़ा चाट रहा है। फुफिया सास उसकी बहन है। वहअपनी ही बहन की बुर चाटने में लगा है। उधर फुफिया सास नन्द के चचा जान का लण्ड चूस रही है और चचा जान नन्द की बुर चाट रहा है। यानी इस तरह इस गोलाकार ग्रुप में 3 लण्ड हैं और 3 चूत।
हर आदमी किसी और की बुर चाट रहा है और उसका लण्ड कोई और चाट रही है। इसी तरह हर औरत ग़ैर मरद का लण्ड चाट रही है और उसकी बुर कोई और चाट रहा है।
इस तरह की सामूहिक चुदाई देख कर मैं हैरान भी हुई और खुश भी। फिर मैंने देखा की चचा जान ने लण्ड नन्द की बुर में पेल दिया। नन्द भी सब कुछ छोड़ कर चुदवाने लगी। नन्द के खालू ने लण्ड जेठानी की चूत में घुसाया और भका भक चोदने लगा। जेठानी बड़े मजे से अपने खालू ससुर से चुदवाने लगी। मेरा ससुर भोसड़ी का फूफी की बुर चोदने लगा और फूफी भी उससे ऐसे चुदवाने लगी जैसे की वह उसका भाई जान बल्कि उसका मियां हो। मैं ये चुदाई देख कर बहुत ही गरम हो गयी थी। अचानक किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और कहा भाभी जान वहां नहीं यहाँ देखो। मैंने पीछे देखा तो मेरा देवर एकदम नंगा नंगा खड़ा था और खड़ा था उसका लण्ड ? वह बोला भाभी जान तुम मेरा लण्ड पकड़ो न। इसे अपने मुंह में ले लो। तब तक किसी और ने भी कहा हां मेरा भी लण्ड ले लो भाभी जान। उसके भी अपना लण्ड खोल कर मुझे पकड़ा दिया। मेरे दोनों हाथ में एक एक लण्ड आ गया और मैं अपने आपको बड़ी खुश नसीब समझने लगी।
अली और सफी दोनों देवरों ने मेरे नंगे बदन से खेलना शुरू कर दिया। मैं भी उन दोनों लण्ड से खेलने लगी। कभी अली का लण्ड मुंह में लेती तो कभी सफी का लण्ड। सफी तो मुझे लिटा कर मेरी बुर चाटने लगा। अली मेरी चूँचियाँ मसलने लगा। दोनों लड़के मस्त जवान थे और उनके लण्ड किसी बड़े आदमी के लण्ड से कम नहीं थे. मेरा अनुमान था की दोनों के लण्ड 8" के थे और मोटे भी लगभग 5" + के ही थे। मुझे तो मोटे लंड बहुत अच्छे लगतें हैं। कुछ देर बाद अली ने घुसेड़ दिया अपना लण्ड मेरी चूत में। वह मुझे अपनी बीवी समझ के चोदने लगा बोला भाभी जान तेरी एकदम ताज़ी चूत बड़ा मज़ा दे रही है। इतनी टाइट है तेरी चूत की लण्ड बड़ी मुश्किल से घुसा। हम दोनों इसी ताक में थे की कब मुझे साइना भाभी की बुर मिले और हम चोदें। हम लोग जैसे ही यहां आये तो आप मिल गयी। हम लोग ख़ुशी के मारे उछल पड़े और उछल पड़े हम दोनों के लण्ड। मैंने पूंछा तो क्या तुम लोग एक साथ ही सबकी बुर लेते हो ?
वह बोला हां भाभी जान हम दोनों की जोड़ी बड़ी मशहूर है। हम दोनों एक दूसरे की बीवी चोदते हैं। सफी मेरी खाला का बेटा है। हम एक दूसरे की बहन भी चोदते हैं। तेरी नन्द की बुर हम दोनों एक साथ भी लेते हैं। हम दोनों एक दूसरे की माँ का भोसड़ा चोदते हैं। एक दूसरे की भाभी की बुर चोदते हैं। एक बात और बता दूँ भाभी जान की यहाँ सबकी सब बुर चोदी खूब भकाभक चुदाने वाली औरतें हैं। इन सब भोसड़ी वालियों को रात में सबके लण्ड चाहिए। रात में ये सब रंडी हो जातीं हैं भाभी जान। अक्सर तो ये सब मेरे बेड पर ही नंगी नंगी आ जातीं है और मेरा लण्ड पकड़ कर चूसने लगती हैं। सबसे अच्छी बात यह है की यहाँ हर घर में इसी तरह की चुदाई होती है। कभी कभी तो हम लोग पड़ोस में जाकर लड़कियां चोद आतें हैं। लड़कियों की माँ का भोसड़ा भी चोद आतें हैं। हमें तो जवानी का पूरा पूरा मज़ा मिल रहा है भाभी जान ? ऐसा बोल कर उन दोनों ने मेरी बुर का बाजा एक साथ बजाने लगे और रात भर खूब मस्ती से बजाते रहे। और मैं भी एक रंडी की तरह बजवाती रही। मुझे उन सबकी चुदती हुई बुर देखने का भी मौक़ा मिल रहा था। मगर मैं अपने इन दोनों लण्ड को छोड़ कर कहीं गयी नहीं। सफी और अली मुझे दोनों बारी बारी से चोदते रहे और अपनी चुदाई के किस्से भी सुनाते रहे जिससे मेरा जोश और बढ़ता रहा।
सफी बोला अरे भाभी जान एक बार तो मैंने अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड पेल दिया था। मैं समझा की वह मेरी खाला का भोसड़ा है मगर बाद में पता चला की वो मेरी अम्मी का भोसड़ा था। अम्मी ने मुझे पहचान लिया था मगर वो चुदवाती रही। मैंने जब उसकी तरफ देखा तो थोड़ा झिझक गया तो वह बोली बेटा सफी चोदते रहो। तेरा लण्ड मर्द है और मेरा भोसड़ा एक औरत है। एक मर्द का काम है औरत का भोसड़ा चोदना। इसमें कुछ भी गलत नहीं है बेटा। चोदो मुझे, खूब चोदो, फाड़ डालो मेरा भोसड़ा। मैं बहुत चुदासी हूँ और तेरा लण्ड बड़ा मज़ा दे रहा है। मैंने जब यह किस्सा अपने दोस्तों को सुनाया तो वे बोले यार ये कोई नई बात है नहीं। आजकल की अम्मियाँ अपने बेटों से धकाधक चुदवाती हैं। हम लोग भी अपनी अपनी माँ का भोसड़ा चोदते हैं यार । इसमें कोई बुराई नहीं है। उन दोनों की बातो से मुझे बड़ा मज़ा आया और मैं उनके झड़ते हुए लण्ड बड़ी मस्ती से चाटने लगी।
इतने में मेरी जेठानी चुद कर मेरे पास आ गई। मैंने कहा तू बुर चोदी कितने लोगों से चुदवाकर आयी है। वह मुस्कराकर बोली मैं जब चुदवाती हूँ तो फिर लण्ड नहीं गिनती। एक बार चूत खोल दी तो खोल दी फिर उसे चाहे जितने लोग चोदें मैं उसकी परवाह नही करती।
दूसरे दिन रात को मेरे सामने मेरा ससुर नंगा नंगा आकर खड़ा हो गया। उसका टन टनाता हुआ लण्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। वह बोला बहू लो मेरा लण्ड पकड़ कर देखो और बताओ की तुम्हे पसंद है की नहीं ? फिर क्या मैंने खुले आम लण्ड पकड़ लिया और बड़े प्यार से मुस्कराती हुई उसे हिलाने लगी। उसकी चुम्मी लेने लगी और जबान निकाल कर सुपाड़ा चाटने लगी। मैंने कहा लौड़ा तो बड़ा मस्त है ससुर जी। उसने मुझे चिपका लिया। मैं भी नंगी ही बैठी थी। वह बोला तो फिर आज मैं तेरी बुर रात भर चोदूंगा।
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