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कुंवारी लड़की को चोदा भैस नहलाने के बहाने - Kunwari ladki ki chudai - Chhoti aur Fress chut ko choda
कुंवारी लड़की को चोदा भैस नहलाने के बहाने - Kunwari ladki ki chudai - Chhoti aur Fress chut ko choda , तालाब के अंदर और किनारे पर चोद दी , कुंवारी चूत गांड का उद्घाटन , जोहड़ पर गांड मारी , दोपहर में चुदने गई , पानी में चुदाई , लंड की दीवानी.
दोस्तों, मैं चोदु नाथ आज आपके लिए एक ऐसी सच्ची कहानी लेकर आया हूँ जिसे पढ़कर लड़कों का लंड पानी छोड़ देगा और लड़कियों की चूत में आग लग जाएगी और आज ही किसी ना किसी लड़के से अपनी फुद्दी की सील तुड़वा लेगी और शादी शुदा या पहले से सील टूटी हुई लड़कियां अपने लिए नए यार खोज लेंगी.
कहानी उस समय कि है जब मैं 12th कक्षा में पढ़ता था. रविवार के दिन स्कूल की छुट्टी थी इसलिए मैं अपनी भैसों को लेकर दोपहर के समय तालाब पर गया हुआ था. एक लड़की जो मेरी ही क्लास में पढ़ती थी, भैस लेकर तालाब पर आई. काफी समय हो गया लेकिन उसकी भैस तालाब से बाहर नहीं निकली तो उसने मुझे भैस निकालने के लिए कहा.
मैंने उससे कहा कि मैं उसकी भैस निकालने के लिए तालाब में क्यों जाऊं?
उसने कहा - मैं एक लड़की हूँ और ज्यादा समय तक यहाँ नहीं रह सकती.
मैंने कहा - क्यों नहीं रह सकती हो?
उसने कहा - लोग क्या कहेंगे.
मैंने कहा - किस बारे में.
उसने कहा - तालाब पर एक जवान लड़का और एक जवान लड़की अकेले थे. और....
मैंने कहा - और.... आगे.
वो चूत हो गई.
मैंने कहा - डरो मत, मैं हूँ ना.
उसने कहा - तुम मेरी मदद नहीं कर रहे हो.
मैंने कहा - भैस ऐसे ही थोड़े ही निकलेंगी.
उसने कहा - तो कैसे निकलेंगी.
मैंने कहा - पहले इन्हें तालाब में जाकर नहलाओ, फिर निकालो और घर ले जाओ.
उसने कहा - मुझे पानी में डर लगता है.
मैंने कहा - मैं तुम्हारे साथ पानी में रहूँगा.
उसने कहा - तुम मेरी भैस ही बाहर निकल दो.
मैंने कहा - नहीं मैं भैस निकालने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हारी मदद के लिए तुम्हारे साथ पानी में जा सकता हूँ बस.
उसके पास अब दूसरा कोई option नहीं था. वो खुद पानी में जाने को तैयार हो गई और मुझे भी साथ में चलने को कहा.
मैंने कहा - ठीक हैं मैं तुम्हारे साथ पानी में जा सकता हूँ.
यह कहकर मैंने अपनी कमीज और पैंट उतार दी और सिर्फ कच्छे में उसके साथ तालाब के पानी की तरफ चल दिया. उसने मुझे पहले पानी में जाने को कहा तो मैंने कहा कि पहले एक पांव पानी में मैं रख दूंगा फिर तुम भी रखोगी और मेरे साथ - साथ अंदर चलोगी वर्ना मैं वापिस बाहर निकल जाऊंगा.
उसने ऐसा ही किया और मेरे साथ ही थोड़ी सी दुरी रखकर पानी में आ गई. हम दोनों उनकी भैस की तरफ जाने लगे और जब हम पानी में काफी गहराई में चले गए तो मैंने उससे कहा कि जरा ध्यान से चलना पानी में सांप भी होते है.
मेरे इतना कहते ही वो मेरी तरफ आई और डर के कारण मुझसे चिपक गई. मैंने उसके होठों को चूम लिया और कहा डरो मत मैं हूँ ना. अब मैंने उसकी चूत को सलवार के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया. उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया.
मैंने दुसरे हाथ हाथ से उसकी एक चूची दबा दी. वो सिहर उठी और आह्हह्हह्हह्हह ऊऊह्ह्ह्ह करने लगी. मेरे पास कई भैसे थी और वो एक झुण्ड बनाकर पानी में इकटठी ही बैठी हुई थी और हमारे नजदीक ही थी. मैंने उसका हाथ पकड़ा और मेरी भैसो में ले जाने लगा.
वो इंकार करने लगी और बोली - यहाँ कोई आ जाएगा.
मैंने कहा - चिंता मत करो यहाँ कोई नहीं आएगा.
यह कहकर मैंने उसे मेरी भैसों के बीच में ले गया और एक भैस से सटाकर उसके होठ चूसने लगा. वो भी अब पूरी उत्तेजित हो गई. 10 मिनट तक उसके होठ चूसने के साथ - साथ मैं उसकी चूत को भी सहलाता रहा. फिर मैंने एक हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार को नीचे करके उसकी चूत में ऊँगली डाल दी. वो मजे में पागल होने लगी.
5 मिनट ऊँगली सेक्स करने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड डालना शुरू कर दिया. चूत बहुत ही छोटी थी. लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था. मैंने लंड को चूत के होल पर अच्छे से रखा और एक जोर का झटका मारा. आधा लंड चूत में घुस गया और लडकी छिटपटाने लगी. मैंने उसे जोर से पकडे रखा और एक हाथ से उसके मुंह को दबाए रखा. मुझे लगा कि उसकी चूत में दर्द होने से वो चीख भी सकती है.
मैंने थोड़ी देर तक रुकने के बाद जब वो शांत हो गई तो एक और झटका मारकर लंड थोड़ा और अंदर सरका दिया और लंड को अंदर बाहर करने लगा. अब उसे दर्द कम होने लगा और वो मुझसे चिपक गई. मैंने एक और जोरदार स्ट्रोक मारा अब लंड पूरा अंदर चला गया और वो भी थोड़े दर्द के साथ मजे लेने लगी. लगातार 20 मिनट चोदने के बाद मेरे लंड ने अपना पानी उसकी चूत में डाल दिया.
उसने कहा - अब मुझे छोड़ दो, मेरी फुद्दी में बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने उससे कहा - ठीक है आज के लिए बस इतना ही लेकिन अब हम हर रोज चुदाई किया करेंगें.
उसने कहा - ठीक है लेकिन हर रोज यहाँ नहीं.
मैंने कहा - ठीक है, मैं तुम्हारे लिए एक दूसरी जगह खोज लूँगा, जो सुरक्षित होगी.
उसने मुझे एक किस दिया और पानी से बाहर निकलने लगी. मैंने उसे तालाब के किनारे लाकर छोड़ दिया और उसकी भैस को अकेला अंदर जाकर नहलाया और फिर बाहर निकाल दिया. वो भैस को लेकर घर की तरफ जाने लगी लेकिन उसकी चाल में बहुत बदलाव था. साफ दिख रहा था कि आज उसे कोई दर्द है. फिर हमने जब भी मौका लगा खूब चुदाई की. कभी मेरे भैस वाले घेर में, कभी उसके घर, कभी स्कूल की छत पर और कभी हमारे घर जब कोई नहीं होता.
दोस्तों, मैं चोदु नाथ आज आपके लिए एक ऐसी सच्ची कहानी लेकर आया हूँ जिसे पढ़कर लड़कों का लंड पानी छोड़ देगा और लड़कियों की चूत में आग लग जाएगी और आज ही किसी ना किसी लड़के से अपनी फुद्दी की सील तुड़वा लेगी और शादी शुदा या पहले से सील टूटी हुई लड़कियां अपने लिए नए यार खोज लेंगी.
कहानी उस समय कि है जब मैं 12th कक्षा में पढ़ता था. रविवार के दिन स्कूल की छुट्टी थी इसलिए मैं अपनी भैसों को लेकर दोपहर के समय तालाब पर गया हुआ था. एक लड़की जो मेरी ही क्लास में पढ़ती थी, भैस लेकर तालाब पर आई. काफी समय हो गया लेकिन उसकी भैस तालाब से बाहर नहीं निकली तो उसने मुझे भैस निकालने के लिए कहा.
मैंने उससे कहा कि मैं उसकी भैस निकालने के लिए तालाब में क्यों जाऊं?
उसने कहा - मैं एक लड़की हूँ और ज्यादा समय तक यहाँ नहीं रह सकती.
मैंने कहा - क्यों नहीं रह सकती हो?
उसने कहा - लोग क्या कहेंगे.
मैंने कहा - किस बारे में.
उसने कहा - तालाब पर एक जवान लड़का और एक जवान लड़की अकेले थे. और....
मैंने कहा - और.... आगे.
वो चूत हो गई.
मैंने कहा - डरो मत, मैं हूँ ना.
उसने कहा - तुम मेरी मदद नहीं कर रहे हो.
मैंने कहा - भैस ऐसे ही थोड़े ही निकलेंगी.
उसने कहा - तो कैसे निकलेंगी.
मैंने कहा - पहले इन्हें तालाब में जाकर नहलाओ, फिर निकालो और घर ले जाओ.
उसने कहा - मुझे पानी में डर लगता है.
मैंने कहा - मैं तुम्हारे साथ पानी में रहूँगा.
उसने कहा - तुम मेरी भैस ही बाहर निकल दो.
मैंने कहा - नहीं मैं भैस निकालने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हारी मदद के लिए तुम्हारे साथ पानी में जा सकता हूँ बस.
उसके पास अब दूसरा कोई option नहीं था. वो खुद पानी में जाने को तैयार हो गई और मुझे भी साथ में चलने को कहा.
मैंने कहा - ठीक हैं मैं तुम्हारे साथ पानी में जा सकता हूँ.
यह कहकर मैंने अपनी कमीज और पैंट उतार दी और सिर्फ कच्छे में उसके साथ तालाब के पानी की तरफ चल दिया. उसने मुझे पहले पानी में जाने को कहा तो मैंने कहा कि पहले एक पांव पानी में मैं रख दूंगा फिर तुम भी रखोगी और मेरे साथ - साथ अंदर चलोगी वर्ना मैं वापिस बाहर निकल जाऊंगा.
उसने ऐसा ही किया और मेरे साथ ही थोड़ी सी दुरी रखकर पानी में आ गई. हम दोनों उनकी भैस की तरफ जाने लगे और जब हम पानी में काफी गहराई में चले गए तो मैंने उससे कहा कि जरा ध्यान से चलना पानी में सांप भी होते है.
मेरे इतना कहते ही वो मेरी तरफ आई और डर के कारण मुझसे चिपक गई. मैंने उसके होठों को चूम लिया और कहा डरो मत मैं हूँ ना. अब मैंने उसकी चूत को सलवार के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया. उसने मेरा हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने हाथ नहीं हटाया.
मैंने दुसरे हाथ हाथ से उसकी एक चूची दबा दी. वो सिहर उठी और आह्हह्हह्हह्हह ऊऊह्ह्ह्ह करने लगी. मेरे पास कई भैसे थी और वो एक झुण्ड बनाकर पानी में इकटठी ही बैठी हुई थी और हमारे नजदीक ही थी. मैंने उसका हाथ पकड़ा और मेरी भैसो में ले जाने लगा.
वो इंकार करने लगी और बोली - यहाँ कोई आ जाएगा.
मैंने कहा - चिंता मत करो यहाँ कोई नहीं आएगा.
यह कहकर मैंने उसे मेरी भैसों के बीच में ले गया और एक भैस से सटाकर उसके होठ चूसने लगा. वो भी अब पूरी उत्तेजित हो गई. 10 मिनट तक उसके होठ चूसने के साथ - साथ मैं उसकी चूत को भी सहलाता रहा. फिर मैंने एक हाथ से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार को नीचे करके उसकी चूत में ऊँगली डाल दी. वो मजे में पागल होने लगी.
5 मिनट ऊँगली सेक्स करने के बाद मैंने उसकी चूत में लंड डालना शुरू कर दिया. चूत बहुत ही छोटी थी. लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था. मैंने लंड को चूत के होल पर अच्छे से रखा और एक जोर का झटका मारा. आधा लंड चूत में घुस गया और लडकी छिटपटाने लगी. मैंने उसे जोर से पकडे रखा और एक हाथ से उसके मुंह को दबाए रखा. मुझे लगा कि उसकी चूत में दर्द होने से वो चीख भी सकती है.
मैंने थोड़ी देर तक रुकने के बाद जब वो शांत हो गई तो एक और झटका मारकर लंड थोड़ा और अंदर सरका दिया और लंड को अंदर बाहर करने लगा. अब उसे दर्द कम होने लगा और वो मुझसे चिपक गई. मैंने एक और जोरदार स्ट्रोक मारा अब लंड पूरा अंदर चला गया और वो भी थोड़े दर्द के साथ मजे लेने लगी. लगातार 20 मिनट चोदने के बाद मेरे लंड ने अपना पानी उसकी चूत में डाल दिया.
उसने कहा - अब मुझे छोड़ दो, मेरी फुद्दी में बहुत दर्द हो रहा है.
मैंने उससे कहा - ठीक है आज के लिए बस इतना ही लेकिन अब हम हर रोज चुदाई किया करेंगें.
उसने कहा - ठीक है लेकिन हर रोज यहाँ नहीं.
मैंने कहा - ठीक है, मैं तुम्हारे लिए एक दूसरी जगह खोज लूँगा, जो सुरक्षित होगी.
उसने मुझे एक किस दिया और पानी से बाहर निकलने लगी. मैंने उसे तालाब के किनारे लाकर छोड़ दिया और उसकी भैस को अकेला अंदर जाकर नहलाया और फिर बाहर निकाल दिया. वो भैस को लेकर घर की तरफ जाने लगी लेकिन उसकी चाल में बहुत बदलाव था. साफ दिख रहा था कि आज उसे कोई दर्द है. फिर हमने जब भी मौका लगा खूब चुदाई की. कभी मेरे भैस वाले घेर में, कभी उसके घर, कभी स्कूल की छत पर और कभी हमारे घर जब कोई नहीं होता.
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