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मैं आदमी को शक्ल से नहीं लंड से पहचानती हूँ - Main aadmi chehre se nahi land se janti hun
मैं आदमी को शक्ल से नहीं लंड से पहचानती हूँ - Main aadmi chehre se nahi land se janti hun , मस्त और जबरदस्त चुदाई , चुद गई , चुदवा ली , चोद दी , चुदवाती हूँ , चोदा चादी और चुदास अन्तर्वासना कामवासना , चुदवाने और चुदने के खेल , चूत गांड बुर चुदवाने और लंड चुसवाने की हिंदी सेक्स पोर्न कहानी.
मैं जब सवेरे उठी तो सीधे खाला जान के पास चली गयी। खाला जान भी मेरी तरह कपड़ों से अस्त व्यस्त थीं। मैं समझ गयी की खाला का भोसड़ा रात भर चुदा है। वह भी शायद मुझे देख कर समझ गयी की तराना भी रात भर चुदवाकर आयी है।
खाला की बेटी का नाम है हिना और उसका शौहर है फ़याज़। आखिर कार यह तय हो गया की रात में तराना के पास फ़याज़ का लण्ड भेजा जाए ? रात में महफ़िल जम गयी। जिसमे अम्मी, खाला, हिना और मैं थीं। मरदों में मेरा शौहर, हिना का शौहर, खाला का देवर अमीन और मेरी फूफी का बेटा अमर थे। पहले शराब का दौर चला खूब बातें हुई। गन्दी गन्दी बातें होने लगीं।
मस्ती चढ़ी तो हिना बोली :- अम्मी, आज तेरी बहन की बिटिया की बुर ? भोसड़ी वाली देखती हूँ कैसे सबके लण्ड पहचान लेती है ?
अम्मी बोली :- अरी मेरी बुर चोदी हिना जवानी में सब याद रहता है। तेरी माँ भी सबके लण्ड पहचान लेती थी। खाला ने कहा :- हिना, तेरी माँ की चूत, बहन चोद ? अब थोड़ी याद दास्त कम हो गयी है नहीं तो मैं भी बड़ी कमाल की चीज थी। १६ साल की उम्र में ही मैं लोगों की माँ बहन चोदा करती थी।
खाला बोली :- अच्छा, चल माँ की लौड़ी तराना मैं तेरा इम्तिहान लेती हूँ। देखती हूँ की तू लण्ड सबके पहचान पाती है की नहीं ? सबने मेरी आँखों में पट्टी बाँध दी। उधर हिना ने अमर का पैजामा खोला और लण्ड बाहर निकाला, उसे हिलाया और चूमा चाटा तो लण्ड अच्छी तरह खड़ा हो गया। फिर उसे मेरे आगे खड़ा कर दिया गया। मैंने लण्ड पकड़ते ही कहा नहीं अम्मी ये लण्ड वो नहीं है जिसने मुझे कल चोदा था। बात मेरी सही थी तो सबने ताली बजाई। दूसरी बार हिना का शौहर फ़याज़ नंगा नंगा मेरे पास आया। कौन कौन भेजा गया मेरे सामने यह बात मुझे बाद में मालूम हुई। मैंने फ़याज़ का लण्ड पकड़ा. उसे चारों तरफ से पकड़ कर देखा। उसके चूतड़ों पर भी हाथ फिराया और लण्ड का टोपा उंगलियों से छू कर देखा तो बोली हां अम्मी यही वह लौड़ा है जो मुझे कल रात को चोद कर गया था। मैंने लण्ड फिर चूमा और उसे प्यार किया।
मेरी बात सुनकर सब लोग हैरान हो गए। मेरी पट्टी खुल गयी। तब सबने फ़याज़ से पूंछा कल तुम हिना के साथ थे तो फिर तराना के पास कैसे पहुँच गए। वह बोला मैं रात भर हिना के पास नहीं था। मैं रात को उठा था और हिना की माँ चोद कर आया था। तब तक मेरा शौहर खालिद बोला नहीं यार हिना की माँ का भोसड़ा तो मैं चोद रहा था। और मैं उसे अपनी बीवी समझ के चोद रहा था। चोदने के बाद मुझे मालूम हुआ की वह मेरी बीवी नहीं थी, हिना की माँ थी। तो मैं चुप चाप अपने बिस्तर पर आ कर लेट गया।
खाला ने कहा :- हाय अल्ला, तभी मैं जान नहीं पाई की कौन मुझे चोद रहा है। मेरे लिए भी इसका लण्ड एक नया लण्ड था।
हिना बोली :- हाय दईया तो फिर मुझे किसने चोदा रात भर ? मैं तो समझ रही थी की मेरा मियां ही मुझे चोद रहा है।
तब तक अमर फूफी का बेटा बोला :- तो फिर मैंने चोदा तुम्हे रात भर हिना। रात में लाइट नहीं थी। मैं गलत जगह चला गया। जब बिस्तर पर आया तो मुझे एक लड़की मिल गयी। वह नंगी थी। उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया क्योंकि मैं भी नंगा था। वह तुम थीं हिना। मैं रात में नंगा नंगा ही सोता हूँ। कारण यह है की रात में कोई न कोई मेरा लण्ड पकड़ ही लेती है। और अगर नहीं पकड़ती है तो मैं किसी के भी बिस्तर पर चला जाता हूँ। वहां जो लड़की होती है वही मेरा लण्ड पकड़ लेती है। मैं रात में किसी न किसी की बुर लेता जरूर हूँ। भले ही मेरी शादी नहीं हुई।
अम्मी ने कहा :- तेरी माँ का भोसड़ा अमर ? तू तो बहुत बड़ा हरामजादा है।
मैंने कहा :- इसका मतलब कल रात को हिना के मियां फ़याज़ ने मुझे चोदा। मेरे मियां खालिद ने खाला की बुर चोदी और फूफी के बेटे ने हिना की बुर ली । अँधेरे में जाने क्या क्या हो जाता है ?
हिना बोली :- यार तराना तू बता की तेरी माँ किसने चोदी कल रात को ?
मैंने कहा :- यार यह बात तो मेरी माँ ही बता सकती है।
अम्मी ने कहा :- कल किसी भोसड़ी वाले ने तराना की माँ नहीं चोदी। कल मैं पड़ोसी का लण्ड पी कर सो गयी थी।
खाला ने कहा :- अब जो होना था वो हुआ। पर अब क्या होना है उस पर चर्चा करो।
मैंने कहा :- चर्चा क्या करना है ? मैं बताती हूँ क्या होना है। सबसे पहले हिना का मियां फ़याज़ हिना की माँ चोदेगा क्योंकि वह उसकी माँ चोदने के लिए ही मेरे कमरे में आया था। वैसे मैंने फ़याज़ से पूंछा की तुम अपनी बीवी की माँ क्यों चोदना चाहते थे ? उसने कहा ताकि जब हम दोनों की तू तू मैं मैं हो तो मैं कह सकूं की मैंने तेरी माँ चोदी है, हिना। इस बात पर सब लोग हंस पड़े। मैंने आगे बताया की मेरा मियां मुझे चोदना चाहता था लेकिन वह खाला का भोसड़ा चोद कर आ गया। इसलिए वह मुझे चोदेगा। इतने में मेरा मियां खालिद बोला नहीं मैं अपनी बीवी यहाँ नहीं चोदूंगा। मैं तो किसी और की बीवी चोदूंगा। तब अम्मी बोली तो फिर तू भी अपनी बीवी की माँ चोद ले ? मैंने आगे कहा तब तो अमर मुझे चोदेगा और खाला का देवर अमीन हिना की बुर लेगा।
फिर क्या खाला ने अपने ही दामाद का लौड़ा पकड़ लिया और उसे बड़े प्यार से हिलाने लगीं। खाला के कपड़े उतर चुके थे। वह बहन चोद बिलकुल नंगी थीं। उसकी बड़े बड़े स्तन बड़े सेक्सी दिख रहे थे। फ़याज़ ने अपना लौड़ा वहीँ फंसा दिया। इसी तरह मेरी अम्मी ने भी अपने दामाद का लण्ड पकड़ लिया और उसे खूब चूमा। उसने जैसे ही अपना पेटीकोट खोला तो उसका भोसड़ा भी सबके सामने खुल गया। मेरा मियां मेरी माँ का भोसड़ा देख कर उत्तेजित हो गया। उसने लौड़ा उसी पर टिका दिया और एक धक्के में अंदर घुसेड़ दिया। वह मस्ती से मेरी माँ चोदने लगा। तब तक खाला के देवर ने अपना लण्ड हिना को पकड़ा दिया। वह बोली हाय मेरे चाचू भोसड़ी के तू अपने भाई जान की बिटिया की बुर चोदेगा ? तू मेरी बुर नहीं चोदेगा मैं तेरा लण्ड चोदूँगी। उधर मैंने फूफी के बेटे अमर का लौड़ा पकड़ लिया। मैं तो लण्ड के टोपा पर ही मर मिटी। मैं बड़ी देर तक टोपा ही चाटती रही। बाद में लौड़ा जब चूत में घुसा तो लगा की मैं किसी मरद से चुदवा रही हूँ। पूरा कमरा चुदाई की आवाज़ों से गूंजने लगा।
फ़याज़ बोला ;- यार, मुझे तो बीवी से ज्यादा उसकी माँ चोदने में मज़ा आ रहा है।
हिना बोली :- अब तो तू सबकी माँ का भोसड़ा ही चोदा कर। तेरे लण्ड को चूत अब नसीब नहीं होने वाली।
मैंने कहा :- खाला जान एक बात आपने भी नोट किया होगा। ये मेरी फूफी का बेटा अमर है न। देखो कितनी मस्ती से मेरी बुर ले रहा है। बिलकुल अपने बाप पर गया है। इसका बाप भी ऐसे ही चोदता है बुर ?
खाला बोली :- हां तराना, इसकी तो माँ का भोसड़ा ? वह भी इसी तरह बुर चोदी मेरे मियां से चुदवाती है। इसी तरह की गन्दी गन्दी बातें करती हुई हम सब चुदाई का मज़ा लूट रही थीं। सामूहिक चुदाई का मज़ा ही निराला होता है। जो एक इसमें चुदवा लेती है वह फिर अकेले में किसी से नहीं चुदवाती।
एक दिन रात को ऐसे ही कुछ औरतें और मरद बैठे हुए थे। औरतों में बेटियां बहुयें और बीवियां भी थीं। अचानक चोदा चोदी की बाते होने लगीं। लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा की बातें होने लगीं। रात में बहन चोद हर एक माँ, बेटी, सास, बहू, नन्द, जेठानी, देवरानी सब की सब रंडी हो जाती है। किसी से भी चुदवाने के लिए बेताब हो जाती हैं। थोड़ी देर में लण्ड की बातें शुरू हो गयीं । लण्ड के साइज की बातें होने लगीं और फिर लण्ड पहचानने की बातें भी होने लगीं। सबको मालूम ही था की मैं लण्ड एक बार में ही पहचान लेती हूँ। पर कुछ लोगों को मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा था। मैंने फिर सबको एक चैलेन्ज दिया और कहा तुम किसी का कभी लण्ड लाओ मैं उसे पकड़ कर पहचान लूंगी।
फिर मेरी आँखों में पट्टी बांध दी गयी। मेरे सारे कपडे खोल डाले गए। मैं एकदम नंगी हो गयी। तभी एक लण्ड मेरे सामने आ गया। मैंने उसे पकड़ा उसके पेल्हड़ थामे और लण्ड का सुपाड़ा सहलाया और बोली अरे ये तो खालू का लण्ड है बहन चोद ? मैं सही थी तो सबने तालियां बजायीं. फिर दुसरा लण्ड आया। मैंने उसे भी अच्छी तरफ छू कर देखा और बताया अरे ये तो मेरा जीजू है भोसड़ी का। मैं फिर सही निकले और सबने ताली बजाई। फिर एक तीसरा लण्ड भी मेरे समाने लाया गया। मैंने उसे खूब हिलाया सहलाया, लण्ड के टोपा पर कई बार उंगलियां फिराईं, उसके पेल्हड़ थामे, उसकी झाटों पर हाथ फेरा फिर बोली वाओ, ये तो नियाज़ का लौड़ा है यार , मेरी मामू की बेटी ज़ोया का शौहर ? ज़ोया भी वहीँ बैठी थी। मैं सही थी। सबने फिर तालियां बजाई। मेरी आँख की पट्टी खोल दी गयी। पर ज़ोया कुछ नहीं बोली।
मैंने कहा :- यार ज़ोया क्या बात है तुम नाराज़ हो क्या ?
वह बोली :- नाराज़ नहीं हूँ, हैरान हूँ। मैं आज ही अपनी सुहागरात मना कर आ रही हूँ। मैं समझ नहीं पा रही हूँ की तूने मेरे मियां का लण्ड पहचान कैसे लिया ? इसका मतलब है की तूने कभी उससे चुदवाया है
मैंने कहा :- नहीं ज़ोया मैंने तेरे मियां से चुदवाया नहीं है, तेरे मियां का लण्ड पिया है। दो बार लण्ड पिया है मैंने तेरे मियां का ? इसलिए मैं तेरे मियां का लण्ड पहचानती हूँ।
मैंने पूंछा ज़ोया क्या तुमको बुरा लगा ? अगर ऐसा है तो तुम मेरे मियां का लण्ड दो बार नहीं तीन बार पी लो। वह बोली नहीं यार मुझे बुरा नहीं लगा। वैसे मैं तेरे मियां का क्या तेरे अब्बू का लण्ड भी पी लूंगी। मुझे कोई शर्म तो आती नहीं हूँ। मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ, यार। मैं तो बस वह मजेदार किस्सा सुनना चाहती हूँ जब तूने मेरे मियां का लण्ड पिया ?
मैंने कहा :- ठीक है अब तुम सुनो :- तुमको शायद मालूम नहीं की तेरा मियां मेरे मियां के दोस्त का दोस्त है। मैं जब सुहागरात मना कर आयी थी तो एक दिन वह मेरे घर आया। उस समय मैं अपने मियां के दोस्त से चुदवा रही थी क्योंकि घर में मैं अकेली थी। उसके आते ही मेरी नियत उस पर ख़राब हो गयी। पहले तो मैं कुछ बातें करती रही फिर अपनी आदत के मुताबिक लण्ड पर हाथ मारा और काह यार इसे मुझे दे दो न प्लीज। वह मेरा इशारा समझ गया और मेरी चूँचियाँ दबाने लगा। मैंने अकेली होने के फायदा उठाया और मस्ती से भकाभक चुदवाने लगी। उसने मुझे आगे से चोदा, पीछे से चोदा , ऊपर से चोदा और नीचे से चोदा। मैं खलास हो गयी और फिर वह भी खलास हो गया।
इतने में उसका दोस्त यानी तेरा मियां वहाँ आ गया। तब मेरे मियां का दोस्त बोला भाभी अब इसका लौड़ा भी पकड़ लो न प्लीज। मेरी तुरंत चुदाने की इच्छा तो थी नहीं पर हां एक नया लण्ड पकड़ने की इच्छा हो गयी। मैंने उसे नंगा किया और लण्ड हिलाने लगी। वह मेरी चूँचियाँ दबाने लगा। मैंने लण्ड मस्ती से चाटा। उसका सुपाड़ा चाटा और फिर पूरा लण्ड मुंह में ले लिया। मैं मुंह से ही चोदने लगी लण्ड और तब तक चोदती रही जब तक की वह झड़ नहीं गया। उसका सारा वीर्य मैं पी गयी और लण्ड का टोपा चाट चाट कर साफ़ कर दिया। दूसरी बार मैंने उसका लण्ड तब पिया जब मेरा मियां उसकी भाभी की बुर ले रहा था। अब सुनो ज़ोया अभी तक तेरे मियां का लण्ड मेरी चूत में नहीं गया। पर आज मैं उसका लण्ड अपनी चूत में जरूर पेलूँगी। तुमसे बने तो मेरी झांटें उखाड़ लेना ?
फिर हम दोनों ने सबके सामने एक दूसरे के मियां से खूब जम कर चुदवाया।
मैं जब सवेरे उठी तो सीधे खाला जान के पास चली गयी। खाला जान भी मेरी तरह कपड़ों से अस्त व्यस्त थीं। मैं समझ गयी की खाला का भोसड़ा रात भर चुदा है। वह भी शायद मुझे देख कर समझ गयी की तराना भी रात भर चुदवाकर आयी है।
- मैंने पूंछा :- खाला जान यह बताओ की रात को करीब २ बजे मेरे बिस्तर कौन मरद आ गया था। मैं उसे पहचान नहीं पाई ? वह बिलकुल नंगा था। घर में लाइट नहीं आ रही थी। उसका लण्ड मेरे बदन से टकराया। मैंने उसे पकड़ भी लिया लेकिन मैं यह जान नहीं पायी की यह किसका लण्ड है ? क्योंकि मैंने पहले वह लण्ड कभी पकड़ा नहीं था। अगर पकड़ा होता तो पहचान जरूर जाती ? फिर भी मैं रुकी नहीं। लण्ड का मज़ा लेती रही और बाद में उसे अपनी चूत में भी घुसा लिया। मैंने सोंचा की होगा किसी भोसड़ी वाले का लण्ड ? पर है तो लण्ड ही न ? मेरा काम तो हो जायेगा ? मैंने भी गांड उठा उठा के चुदवाती रही । वह साला रुका नहीं। मुझे चोद कर रफ्फू चक्कर हो गया। अब मैं उसे ढूंढ रही हूँ
- खाला - हाय अल्ला, यही तो मेरे साथ भी हुआ। पहले तो मुझे मेरा नंदोई चोद कर गया। तब तक रात के लगभग २ बज चुके थे। फिर एक लड़का आया। मुझे नहीं मालूम की वह लड़का था की आदमी ? पर था भोसड़ी का बिलकुल नंगा। उसका लण्ड मेरी चूँचियाँ से टकरा गया। मैंने लण्ड पकड़ कर देखा तो वह टन्नाया हुआ था। लण्ड चूँकि मुझे पसंद आ गया तो मैं कुछ बोली भी नहीं। मैंने पहले तो लण्ड से खूब मस्ती की, उसे हिलाया चूमा, चाटा और चूसा भी। बाद में उसे अपनी चूत में घुसा कर चुदवा लिया। मज़ा तो मुझे बहुत आया पर मालूम नहीं हुआ की वह था कौन ? किसका लण्ड था ? मैं तो उससे फिर चुदवाना चाहती हूँ।
- मैंने कहा - अरी खाला जान मैं भी एक बार उजाले में उससे चुदवाना चाहती हूँ। उसका लण्ड देखना चाहती हूँ। इसीलिए उसे ढूंढ रही हूँ।
- खाला - तराना एक बात बता अगर वह मिल भी जाए तो तू उसे पहचानेगी कैसे ?
- मैंने कहा - उसके लण्ड से पहचान लूंगी। मैं जिस लण्ड को एक बार पकड़ लेती हूँ उसे कहीं भी पहचान सकती हूँ।
- खाला - अरे यार उस रात को जब अन्धेरा था। तूने न उसे देखा और न उसका लण्ड देखा तो फिर कैसे पहचान लेगी तू ? मुझे चूतिया बना रही है तू भोसड़ी की ? तेरी माँ का चूत ? मुझे उल्लू बना रही तू ?
- तब तक मेरी अम्मी भी आ गयी। वह भी बोली हां तराना, तेरी खाला ठीक ही तो कह रहीं हैं। तू उसे बेवकूफ क्यों बनाना चाहती है। जब उस रात को बिलकुल लाइट थी नहीं। घर में बिलकुल अन्धेरा था। तूने उसे देखा नहीं। उसका लण्ड देखा नहीं तो फिर पहचानेगी कैसे ?
- मैं फिर कह रही हूँ अम्मी की मैं उसे उसके लण्ड से पहचान लूंगी। उसका लण्ड हाथ में आते ही मैं उसे पहचान लूंगी की हां यही आदमी था जो मुझे रात में चोद गया। क्या बात करती है तू।
- अभी तक तूने जाने कितने लण्ड पकड़ेंगे होंगें ? तो क्या तू सबके लण्ड पहचान लेगी ?
- हां अम्मी पहचान लूंगी। चाहो तो तुम मेरा इम्तिहान ले कर देख लो।
- खाला - ठीक है बुर चोदी तराना मैं सबके सामने लूंगी तेरा इम्तिहान ?
खाला की बेटी का नाम है हिना और उसका शौहर है फ़याज़। आखिर कार यह तय हो गया की रात में तराना के पास फ़याज़ का लण्ड भेजा जाए ? रात में महफ़िल जम गयी। जिसमे अम्मी, खाला, हिना और मैं थीं। मरदों में मेरा शौहर, हिना का शौहर, खाला का देवर अमीन और मेरी फूफी का बेटा अमर थे। पहले शराब का दौर चला खूब बातें हुई। गन्दी गन्दी बातें होने लगीं।
मस्ती चढ़ी तो हिना बोली :- अम्मी, आज तेरी बहन की बिटिया की बुर ? भोसड़ी वाली देखती हूँ कैसे सबके लण्ड पहचान लेती है ?
अम्मी बोली :- अरी मेरी बुर चोदी हिना जवानी में सब याद रहता है। तेरी माँ भी सबके लण्ड पहचान लेती थी। खाला ने कहा :- हिना, तेरी माँ की चूत, बहन चोद ? अब थोड़ी याद दास्त कम हो गयी है नहीं तो मैं भी बड़ी कमाल की चीज थी। १६ साल की उम्र में ही मैं लोगों की माँ बहन चोदा करती थी।
खाला बोली :- अच्छा, चल माँ की लौड़ी तराना मैं तेरा इम्तिहान लेती हूँ। देखती हूँ की तू लण्ड सबके पहचान पाती है की नहीं ? सबने मेरी आँखों में पट्टी बाँध दी। उधर हिना ने अमर का पैजामा खोला और लण्ड बाहर निकाला, उसे हिलाया और चूमा चाटा तो लण्ड अच्छी तरह खड़ा हो गया। फिर उसे मेरे आगे खड़ा कर दिया गया। मैंने लण्ड पकड़ते ही कहा नहीं अम्मी ये लण्ड वो नहीं है जिसने मुझे कल चोदा था। बात मेरी सही थी तो सबने ताली बजाई। दूसरी बार हिना का शौहर फ़याज़ नंगा नंगा मेरे पास आया। कौन कौन भेजा गया मेरे सामने यह बात मुझे बाद में मालूम हुई। मैंने फ़याज़ का लण्ड पकड़ा. उसे चारों तरफ से पकड़ कर देखा। उसके चूतड़ों पर भी हाथ फिराया और लण्ड का टोपा उंगलियों से छू कर देखा तो बोली हां अम्मी यही वह लौड़ा है जो मुझे कल रात को चोद कर गया था। मैंने लण्ड फिर चूमा और उसे प्यार किया।
मेरी बात सुनकर सब लोग हैरान हो गए। मेरी पट्टी खुल गयी। तब सबने फ़याज़ से पूंछा कल तुम हिना के साथ थे तो फिर तराना के पास कैसे पहुँच गए। वह बोला मैं रात भर हिना के पास नहीं था। मैं रात को उठा था और हिना की माँ चोद कर आया था। तब तक मेरा शौहर खालिद बोला नहीं यार हिना की माँ का भोसड़ा तो मैं चोद रहा था। और मैं उसे अपनी बीवी समझ के चोद रहा था। चोदने के बाद मुझे मालूम हुआ की वह मेरी बीवी नहीं थी, हिना की माँ थी। तो मैं चुप चाप अपने बिस्तर पर आ कर लेट गया।
खाला ने कहा :- हाय अल्ला, तभी मैं जान नहीं पाई की कौन मुझे चोद रहा है। मेरे लिए भी इसका लण्ड एक नया लण्ड था।
हिना बोली :- हाय दईया तो फिर मुझे किसने चोदा रात भर ? मैं तो समझ रही थी की मेरा मियां ही मुझे चोद रहा है।
तब तक अमर फूफी का बेटा बोला :- तो फिर मैंने चोदा तुम्हे रात भर हिना। रात में लाइट नहीं थी। मैं गलत जगह चला गया। जब बिस्तर पर आया तो मुझे एक लड़की मिल गयी। वह नंगी थी। उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया क्योंकि मैं भी नंगा था। वह तुम थीं हिना। मैं रात में नंगा नंगा ही सोता हूँ। कारण यह है की रात में कोई न कोई मेरा लण्ड पकड़ ही लेती है। और अगर नहीं पकड़ती है तो मैं किसी के भी बिस्तर पर चला जाता हूँ। वहां जो लड़की होती है वही मेरा लण्ड पकड़ लेती है। मैं रात में किसी न किसी की बुर लेता जरूर हूँ। भले ही मेरी शादी नहीं हुई।
अम्मी ने कहा :- तेरी माँ का भोसड़ा अमर ? तू तो बहुत बड़ा हरामजादा है।
मैंने कहा :- इसका मतलब कल रात को हिना के मियां फ़याज़ ने मुझे चोदा। मेरे मियां खालिद ने खाला की बुर चोदी और फूफी के बेटे ने हिना की बुर ली । अँधेरे में जाने क्या क्या हो जाता है ?
हिना बोली :- यार तराना तू बता की तेरी माँ किसने चोदी कल रात को ?
मैंने कहा :- यार यह बात तो मेरी माँ ही बता सकती है।
अम्मी ने कहा :- कल किसी भोसड़ी वाले ने तराना की माँ नहीं चोदी। कल मैं पड़ोसी का लण्ड पी कर सो गयी थी।
खाला ने कहा :- अब जो होना था वो हुआ। पर अब क्या होना है उस पर चर्चा करो।
मैंने कहा :- चर्चा क्या करना है ? मैं बताती हूँ क्या होना है। सबसे पहले हिना का मियां फ़याज़ हिना की माँ चोदेगा क्योंकि वह उसकी माँ चोदने के लिए ही मेरे कमरे में आया था। वैसे मैंने फ़याज़ से पूंछा की तुम अपनी बीवी की माँ क्यों चोदना चाहते थे ? उसने कहा ताकि जब हम दोनों की तू तू मैं मैं हो तो मैं कह सकूं की मैंने तेरी माँ चोदी है, हिना। इस बात पर सब लोग हंस पड़े। मैंने आगे बताया की मेरा मियां मुझे चोदना चाहता था लेकिन वह खाला का भोसड़ा चोद कर आ गया। इसलिए वह मुझे चोदेगा। इतने में मेरा मियां खालिद बोला नहीं मैं अपनी बीवी यहाँ नहीं चोदूंगा। मैं तो किसी और की बीवी चोदूंगा। तब अम्मी बोली तो फिर तू भी अपनी बीवी की माँ चोद ले ? मैंने आगे कहा तब तो अमर मुझे चोदेगा और खाला का देवर अमीन हिना की बुर लेगा।
फिर क्या खाला ने अपने ही दामाद का लौड़ा पकड़ लिया और उसे बड़े प्यार से हिलाने लगीं। खाला के कपड़े उतर चुके थे। वह बहन चोद बिलकुल नंगी थीं। उसकी बड़े बड़े स्तन बड़े सेक्सी दिख रहे थे। फ़याज़ ने अपना लौड़ा वहीँ फंसा दिया। इसी तरह मेरी अम्मी ने भी अपने दामाद का लण्ड पकड़ लिया और उसे खूब चूमा। उसने जैसे ही अपना पेटीकोट खोला तो उसका भोसड़ा भी सबके सामने खुल गया। मेरा मियां मेरी माँ का भोसड़ा देख कर उत्तेजित हो गया। उसने लौड़ा उसी पर टिका दिया और एक धक्के में अंदर घुसेड़ दिया। वह मस्ती से मेरी माँ चोदने लगा। तब तक खाला के देवर ने अपना लण्ड हिना को पकड़ा दिया। वह बोली हाय मेरे चाचू भोसड़ी के तू अपने भाई जान की बिटिया की बुर चोदेगा ? तू मेरी बुर नहीं चोदेगा मैं तेरा लण्ड चोदूँगी। उधर मैंने फूफी के बेटे अमर का लौड़ा पकड़ लिया। मैं तो लण्ड के टोपा पर ही मर मिटी। मैं बड़ी देर तक टोपा ही चाटती रही। बाद में लौड़ा जब चूत में घुसा तो लगा की मैं किसी मरद से चुदवा रही हूँ। पूरा कमरा चुदाई की आवाज़ों से गूंजने लगा।
फ़याज़ बोला ;- यार, मुझे तो बीवी से ज्यादा उसकी माँ चोदने में मज़ा आ रहा है।
हिना बोली :- अब तो तू सबकी माँ का भोसड़ा ही चोदा कर। तेरे लण्ड को चूत अब नसीब नहीं होने वाली।
मैंने कहा :- खाला जान एक बात आपने भी नोट किया होगा। ये मेरी फूफी का बेटा अमर है न। देखो कितनी मस्ती से मेरी बुर ले रहा है। बिलकुल अपने बाप पर गया है। इसका बाप भी ऐसे ही चोदता है बुर ?
खाला बोली :- हां तराना, इसकी तो माँ का भोसड़ा ? वह भी इसी तरह बुर चोदी मेरे मियां से चुदवाती है। इसी तरह की गन्दी गन्दी बातें करती हुई हम सब चुदाई का मज़ा लूट रही थीं। सामूहिक चुदाई का मज़ा ही निराला होता है। जो एक इसमें चुदवा लेती है वह फिर अकेले में किसी से नहीं चुदवाती।
एक दिन रात को ऐसे ही कुछ औरतें और मरद बैठे हुए थे। औरतों में बेटियां बहुयें और बीवियां भी थीं। अचानक चोदा चोदी की बाते होने लगीं। लण्ड, बुर, चूत, गांड, भोसड़ा की बातें होने लगीं। रात में बहन चोद हर एक माँ, बेटी, सास, बहू, नन्द, जेठानी, देवरानी सब की सब रंडी हो जाती है। किसी से भी चुदवाने के लिए बेताब हो जाती हैं। थोड़ी देर में लण्ड की बातें शुरू हो गयीं । लण्ड के साइज की बातें होने लगीं और फिर लण्ड पहचानने की बातें भी होने लगीं। सबको मालूम ही था की मैं लण्ड एक बार में ही पहचान लेती हूँ। पर कुछ लोगों को मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा था। मैंने फिर सबको एक चैलेन्ज दिया और कहा तुम किसी का कभी लण्ड लाओ मैं उसे पकड़ कर पहचान लूंगी।
फिर मेरी आँखों में पट्टी बांध दी गयी। मेरे सारे कपडे खोल डाले गए। मैं एकदम नंगी हो गयी। तभी एक लण्ड मेरे सामने आ गया। मैंने उसे पकड़ा उसके पेल्हड़ थामे और लण्ड का सुपाड़ा सहलाया और बोली अरे ये तो खालू का लण्ड है बहन चोद ? मैं सही थी तो सबने तालियां बजायीं. फिर दुसरा लण्ड आया। मैंने उसे भी अच्छी तरफ छू कर देखा और बताया अरे ये तो मेरा जीजू है भोसड़ी का। मैं फिर सही निकले और सबने ताली बजाई। फिर एक तीसरा लण्ड भी मेरे समाने लाया गया। मैंने उसे खूब हिलाया सहलाया, लण्ड के टोपा पर कई बार उंगलियां फिराईं, उसके पेल्हड़ थामे, उसकी झाटों पर हाथ फेरा फिर बोली वाओ, ये तो नियाज़ का लौड़ा है यार , मेरी मामू की बेटी ज़ोया का शौहर ? ज़ोया भी वहीँ बैठी थी। मैं सही थी। सबने फिर तालियां बजाई। मेरी आँख की पट्टी खोल दी गयी। पर ज़ोया कुछ नहीं बोली।
मैंने कहा :- यार ज़ोया क्या बात है तुम नाराज़ हो क्या ?
वह बोली :- नाराज़ नहीं हूँ, हैरान हूँ। मैं आज ही अपनी सुहागरात मना कर आ रही हूँ। मैं समझ नहीं पा रही हूँ की तूने मेरे मियां का लण्ड पहचान कैसे लिया ? इसका मतलब है की तूने कभी उससे चुदवाया है
मैंने कहा :- नहीं ज़ोया मैंने तेरे मियां से चुदवाया नहीं है, तेरे मियां का लण्ड पिया है। दो बार लण्ड पिया है मैंने तेरे मियां का ? इसलिए मैं तेरे मियां का लण्ड पहचानती हूँ।
मैंने पूंछा ज़ोया क्या तुमको बुरा लगा ? अगर ऐसा है तो तुम मेरे मियां का लण्ड दो बार नहीं तीन बार पी लो। वह बोली नहीं यार मुझे बुरा नहीं लगा। वैसे मैं तेरे मियां का क्या तेरे अब्बू का लण्ड भी पी लूंगी। मुझे कोई शर्म तो आती नहीं हूँ। मैं बहुत बड़ी बुर चोदी हूँ, यार। मैं तो बस वह मजेदार किस्सा सुनना चाहती हूँ जब तूने मेरे मियां का लण्ड पिया ?
इतने में उसका दोस्त यानी तेरा मियां वहाँ आ गया। तब मेरे मियां का दोस्त बोला भाभी अब इसका लौड़ा भी पकड़ लो न प्लीज। मेरी तुरंत चुदाने की इच्छा तो थी नहीं पर हां एक नया लण्ड पकड़ने की इच्छा हो गयी। मैंने उसे नंगा किया और लण्ड हिलाने लगी। वह मेरी चूँचियाँ दबाने लगा। मैंने लण्ड मस्ती से चाटा। उसका सुपाड़ा चाटा और फिर पूरा लण्ड मुंह में ले लिया। मैं मुंह से ही चोदने लगी लण्ड और तब तक चोदती रही जब तक की वह झड़ नहीं गया। उसका सारा वीर्य मैं पी गयी और लण्ड का टोपा चाट चाट कर साफ़ कर दिया। दूसरी बार मैंने उसका लण्ड तब पिया जब मेरा मियां उसकी भाभी की बुर ले रहा था। अब सुनो ज़ोया अभी तक तेरे मियां का लण्ड मेरी चूत में नहीं गया। पर आज मैं उसका लण्ड अपनी चूत में जरूर पेलूँगी। तुमसे बने तो मेरी झांटें उखाड़ लेना ?
फिर हम दोनों ने सबके सामने एक दूसरे के मियां से खूब जम कर चुदवाया।
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